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मुझे मिली इक माधुरी

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नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम धीरज है, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रहता हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और काफी दिनों से सोच रहा था कि मैं भी अपनी कहानी आप लोगों तक पहुँचाऊँ और अब जाकर मैं कहानी लिख रहा हूँ।

मैं शुरू से ही अकेला रहा हूँ, मेरे घर वाले गाँव में रहते हैं और मैं पढ़ाई की वजह से अकेला रहता हूँ।

मैंनें अब तक कई लड़कियों को चोदा है। यह कहानी तब की है जब मैं राजस्थान गया था, वहाँ हमारे जीजा जी के दोनों भाइयों की शादी थी।

जब मैं गया तो मैं वहाँ बहुत ज्यादा लोगों को नहीं जानता था लेकिन मेरे नाम से वहाँ मुझे बहुत लोग जानते थे। मैं शादी से सगाई से एक दिन पहले ही पहुँचा, मुझसे पहले मेरे बड़े भाई वहाँ पहुच चुके थे।

वहाँ 4-5 लड़कियाँ आई हुई थी, उनमें एक लड़की कुछ ज्यादा ही चमक रही थी, उसनें नीले रंग के कपड़े पहन रखे थे, उम्र होगी करीब 18-19, रंग गोरा और चुचे तनें हुए !

मैंनें मन ही मन सोचा कि अगर यह चोदनें को मिल जाये तो मजा आ जाये !

मैंनें पता किया कि यह कहाँ से आई हुई है, और कैसी है। जीजाजी के भाई से पता चला कि बारहवीं क्लास में पढ़ती है और यह उस तरह की लड़की नहीं है।

मैंनें उनसे कहा- कोई बात नहीं, कोशिश करनें में क्या जाता है !

फिर शाम को मैं अपनी बहन के लड़के को लेकर घर में ही घूम रहा था तो उसे लेनें के लिए वो मेरे पास आई और लड़के को मेरी गोद से लेनें लगी।

मैंनें कहा- यह ऐसे नहीं आता, पहले इसे अपना नाम बताओ, अगर इसे अच्छा लगा तो आयेगा, नहीं तो नहीं आयेगा।

वो कहनें लगी- पहले यह अपना नाम बताएगा तो ही मैं अपना नाम बताऊँगी।

मैंनें कहा- यह तो नहीं बोलता, क्या मैं बता दूँ?

फिर बोली- ठीक है।

मैंनें कहा- मेरा नाम धीरज है। और तुम्हारा?

तो उसनें अपना नाम माधुरी बताया।

मैं बोला- नाम तो बहुत अच्छा है।

फिर मुझे दीदी नें आवाज लगा दी, मैं चला गया और वो भी। मैं सोचनें लगा कि अगर यह रात को मिल जाये तो मसल कर रख दूँगा। फिर रात को खाना खाया, वो बहुत देर तक मुझे दिखाई नहीं दी। मैं उसे खोजनें लगा तो तभी मैंनें देखा कि वो ऊपर वाले कमरे में लेटी हुई टीवी देख रही थी, वो और एक लड़की और थी वहाँ।

मैंनें उससे कहा- मैं तुम्हें बहुत देर से खोज रहा था, तुम कहीं दिखाई नहीं दी तो मैं तुम्हें देखनें आ गया।

वो मुझसे बोली- तुम मुझे तुम क्यों कहते हो? मैं तुमसे छोटी हूँ !

मैंनें कहा- तो क्या कहूँ?

उसनें कहा- मेरे नाम से बुला सकते हैं ! मुझे सब मधु बुलाते हैं।

मैंनें कहा- मधु तुम किसके साथ आई हो यहाँ?

तो वो बोली- मेरी मम्मी मेरे साथ आई हुई हैं।

फिर एकदम से बोली- वैसे तुम मुझे क्यों खोज रहे थे?

इतनें में वो दूसरी लड़की थी, कमरे से चली गई, मुझे लगा कि उसी नें उसे इशारा किया हो उसे जानें के लिए।

मैंनें कहा- कैसे कहूँ?

फिर बोली- मुँह से ही कह दो !

मैंनें कहा- सच में कह दूँ?

बोली- कह दो !

मैंनें कहा- तुम बहुत ही सुन्दर हो !

वो बोली- फ्लर्ट कर रहे हो?

मैंनें कहा- नहीं ! सच बताऊँ? तुम्हें नीचे बुला रहे हैं।

वो एकदम हंस पड़ी और कहनें लगी- तुम मजाक अच्छा कर लेते हो !

मैंनें कहा- मैं बहुत कुछ अच्छा कर लेता हूँ।

फिर मैंनें कहा- रात को जल्दी मत सोना, दीदी वाले कमरे में देर तक बैठेंगे, अगर तुम नहीं आई तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

मैंनें कहा- वैसे तुम्हें भी मुझसे बातें करना अच्छा लगता है ना?

“तुम्हें कैसे पता चला कि…?”

“हम मन की बातें भी जान लेते हैं।”

वो बोली- अच्छा बहुत कुछ जानते हो?

तो मैंनें लाइन मारते हुए कहा- बताऊँ कि तुम क्या सोच रही हो?

बोली- बताओ !

मैंनें कहा- तुम सोच रही हो कि ज्यादा बातें करता है वैसे ही वक्त बर्बाद कर रहा है।

वो शरमा गई और जानें लगी।

मैंनें कहा- जब सच बात आई तो जानें लगी?

बोली- मुझे बहुत देर हो गई है, मम्मी आ जाएँगी।

मैंनें कहा- वाकई तुम जाना चाहती हो?

तो वो बोली- बाद में बात करेंगे, अभी मैं चलती हूँ !

मैं बोला- दिल तोड़ के ना जा…..

….और वो चली गई।

अब रात को सभी लोग अपनें अपनी जगह सोनें के लिए जानें लगे, मैं दीदी के कमरे में बैठा उसका इंतजार कर रहा था।

वो आ गई, वो आकर मेरे पास में ही बैठ गई।

बैठते ही मैंनें अपना पैर उससे छुआ दिया, उसनें कुछ नहीं कहा। फिर मैंनें उसके पैर पर अपना पैर रगड़ना शुरु कर दिया वो मेरी तरफ देखनें लगी और उस तरह का मुँह बनाया जैसे मुझे ऐसा करनें से रोक रही हो।

फिर उसकी मम्मी नें उसे आवाज लगा दी और वो जानें लगी, तो मैं वहाँ भी वहाँ से उठकर जानें लगा और ऊपर जाकर उसके ख्यालों में खोकर अपना लंड हिला कर सो गया।

फिर सवेरे को वो मुझे ऊपर की छत पर ही मिली और बोली- गुड मोर्निंग !

मैंनें कहा- मैंनें तुम्हें सपनें में देखा और सबसे पहले तुम ही दिख गई। फिर तो शायद जो सपनें में देखा था सच हो जायेगा।

बोली- क्या देखा था सपनें में?

मैंनें कहा- पूछो मत ! बस निक्कर में स्वप्नदोष हो गया।

वो बोली- तुम भी ना !

मैंनें कहा- मैं क्या? जो सच था मैंनें कह दिया !

फिर बोली- मुझे पता नहीं क्यों, फिर भी तुमसे बात करना अच्छा लगता है।

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उस दिन सगाई की रस्म थी तो मैंनें कहा- आज तो मजा आयेगा, पर अगर तुम मेरा साथ दो तो !

फिर मैं उसे अकेले देखकर अन्दर कमरे में ले गया और उसे कहा- मुझे बस एक किस करनें दो !

मैंनें उसके हाथ पकड़ रखे थे !

वो ममा करनें लगी, मैंनें कहा- क्यों क्या तुम यह नहीं चाहती? तुम्हें नहीं पता कि तुम्हारी चूचियाँ कैसी हैं, बस दिल करता है कि पी जाऊँ इन्हें !

वो बोली- कोई देख लेगा !

मैंनें उसके होटों से अपनें होंठ लगा दिए और बुरी तरह से चूसनें लगा।

फिर बोली- कोई आ जायेगा !

मैंनें कहा- खिड़की बंद कर दूँ !

वो नहीं कहकर मेरे से अलग हो गई।

मैंनें कहा- एक बात कहूँ?

वो बोली- कहो !

मैंनें कहा- मुझे तुम्हारे साथ सब कुछ करना है !

वो बोली- यह नहीं हो सकता।

मैंनें कहा- अगर यह नहीं हो सकता तो मैं आज ही जानें वाला हूँ।

वो बोली- यहाँ सब होंगे फिर कैसे?

यह सुनते ही मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई हो, मैंनें कहा- वो सब मुझ पर छोड़ दो !

मैंनें फिर से उसे पकड़ कर उसके चुच्चे मसल दिए, वो सिसकारियाँ लेनें लगी।

वो कहनें लगी- अभी सवेरा हुआ है, और सुबह से ही शुरू हो गए?

वो चली गई, उसके जानें के बाद भी मैं उसके चूचों को याद कर रहा था।

तभी जीजाजी आए और कहनें लगे- सुबह हो गई है, और कुछ सामान भी लाना है, तुम अपनी दीदी को पार्लर ले जाना।

मैंनें कहा- ठीक है।

वो चले गए, मैं बाजार गया और वहाँ जीजाजी के भाई भी मिल गए जिनकी शादी थी, वो बोले- इनको जल्दी से ले जाओ और घर छोड़ दो ! फिर मुझे थोड़ी खरीददारी करनी है, मेरे साथ चलो !

मैं दीदी को घर छोड़ कर मार्केट में आ गया फिर हमनें वहाँ से एक बीयर की पेटी ली और घर आ गए। हमनें फ्रिज में बीयर ठण्डी करनें के लिए लगाई और उसे लॉक कर दिया।

तभी माधुरी बहुत ही प्यारे अंदाज में मेरे पास आई और बोली- क्या कर रहे हो?मैंनें कहा- कान में बताऊँगा !

वो बोली- मुझे नहीं पूछना ! तुम फिर से चिपक जाओगे।

फिर शाम को घर पर डी जे का प्रोग्राम था। तो सब वहाँ पर तैयारी में लगे थे और मैंनें एक बीयर गटकी और घूमनें लगा।

मेरे अन्दर का डर बिल्कुल समाप्त हो गया।

फिर सब नाचनें में लगे थे तो मैं चुपके से उसके पास गया और कहा- डी जे रात को दो बजे तक चलेगा, तू 11 बजे के करीब अपनी मम्मी से नींद का बहाना करके आ जाना !

वो बोली- अगर मम्मी मेरे साथ गई तो?

मैंनें कहा- मम्मी को भी साथ ले आना !

वो बोली- ज्यादा मत बनो !

मैंनें फिर से कहा- ठीक 11 बजे ऊपर वाले कमरे में नहीं तो…!

तो मैं 11 बजे से पहले जाकर ऊपर वाले कमरे में उसका इंतजार करनें लगा, वो ग्यारह पच्चीस पर आई और आते ही मेरे से लिपट गई ।

मैंनें कहा- मैंनें तो सोचा था कि इधर ही आग लगी है, पर यहाँ तो इधर से भी ज्यादा लगी है।

वो बोली- ज्यादा बोलोगे तो मैं चली जाऊँगी !

मैंनें उसे जोर से भींच दिया वो सिसियानें लगी, वो बोली- धीरे नहीं कर सकते क्या !

मैंनें कहा- तुम करो, मैं बैठ जाता हूँ !

वो मेरे होंठों को चूसनें में लगी हुई थी। क्या बताऊँ कि क्या होंट थे उसके !

मैंनें उसके कमीज में हाथ डालना शुरू किया, वो मेरे कपड़े उतारनें लगी, बोली- अब तक कितनियों को चोदा है?

मैंनें कहा- बस तुमको ही चोद रहा हूँ !

वो बोली- ऐसा नहीं हो सकता !

मैंनें उसके होटों को चूसते हुए उसके सलवार के नाड़े को खोल दिया, उसके पूरे कपड़े उतार दिए। कमरे में नाइट बल्ब जला हुआ था, उसकी चूत बिल्कुल साफ थी, एक भी बाल नहीं था।

मैंनें एक उंगली उसकी चूत में डाली तो वो सिसकारनें लगी।

मैं जोर से उंगली अन्दर-बाहर करनें लगा।

वो बोली- अपना भी तो दिखाओ?

मैंनें कहा- खुद ही देख लो !

मेरे लण्ड का बुरा हाल था, वो चिकना हो रहा था, उसनें हाथ में लिया और हिलानें लगी।

मैंनें कहा- मुँह में ले लो !

वो मना करनें लगी।

मैंनें कहा- कितनी बार करवा चुकी हो?

वो बोली- महीनें में 2-3 बार मेरा बॉयफ़्रेन्ड मुझे चोद ही देता है।

लण्ड मुँह में लेनें के लिए मैंनें ज्यादा जोर नहीं दिया, मैं तो बस उसकी चूत मारना चाहता था, मुझे लग रहा था कि जल्दी ही इसकी चूत में अपना लण्ड डाल दूँ !

अब वो भी कहनें लगी- अब देर मत करो, कोई आ जायेगा, जल्दी काम ख़त्म करो।

मैंनें उसको लिटाया और अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा और एक जोर का झटका दिया।

वो चिल्ला पड़ी, बोली- धीरे से करो !

और जल्दी ही वो भी झटके लगानें लगी और 10-12 मिनट की चुदाई के बाद मेरा निकलनें ही वाला था तो मैंनें कहा- कहाँ निकालूँ?

वो बोली- अन्दर ही निकाल दो, कोई बात नहीं !

फिर मेरा निकल गया और वो तब तक दो बार झड़ चुकी थी।

मैं उसके ऊपर ही लेट गया, थोड़ी देर बाद वो कपड़े ठीक करनें लगी, उसकी गांड को देखकर मेरा फिर खड़ा होनें लगा, मैंनें फिर उसे पकड़ा और वो अपनें हाथ से मेरे लण्ड को सहलानें लगी, मेरा पूरी तरह से खड़ा हो गया।

मैंनें उसे अपनें ऊपर लिया और फिर एक बार चुदाई का हमारा दूसरा दौर 30 मिनट तक चला, उसके बाद मैं झड़ गया और वो अपनी चुदी हुई चूत को लेकर चली गई।

और उसके बाद मुझे बड़ी ही अच्छी नींद आ गई और सुबह बहुत देर से जगा।

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