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खुश करने के लिए

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कई साल पहले की बात है मेंरे पति वरुण नें मुझसे पूछा- क्या तुम मेंरे साथ नागपुर जाना चाहोगी?

उनको अपनें जॉब के किसी काम से ही वहाँ जाना था। मैंनें ख़ुशी खुशी हाँ कर दी, इस बहानें मैं भी घूम सकती थी।

हम दोनों ट्रेन से नागपुर पहुँचे। स्टेशन पर हमको लेनें एक कार आई थी। मेंरे पति नें बताया कि यह कार उनके सी.ए. नें भिजवाई है।

कार से हम एक पाँचसितारा होटल मेंं आ गए। होटल का नाम मैं गुप्त रखना चाहती हूँ क्योंकि इससे होटल की बदनामी हो सकती है। हम करीब 4 बजे दोपहर तक होटल मेंं आ गए थे। फिर वरुण नें बताया कि शाम को उनको अपनें बॉस से नागपुर के एक क्लब मेंं मिलना है। मुझे उन्होंनें अच्छी तरह से तैयार होनें को कहा।

मैंनें गुलाबी रंग की एक बहुत बढ़िया साड़ी पहनी और उनके साथ क्लब गई। क्लब मेंं वरुण का बॉस और सी.ए. दोनों मिले। उनके साथ वरुण नें मेंरा परिचय करवाया और फिर हम चारों एक मेंज़ पर बैठ गए। मेंरे एक तरफ इनका बॉस था और दूसरी तरफ वरुण खुद थे।

इनके बॉस नें पूछा मुझसे- आप क्या ड्रिंक लेंगी?

मैंनें थोड़ी आनाकानी और उनके जिद करनें पर कह दिया- मैं बकार्डी ले लूँगी।

मैंनें कभी एक बार बकार्डी पी थी, इसमेंं बहुत कम अल्कोहल होता है, वो अच्छी लगी थी। पर जब यह बकार्डी आई तो यह तो हार्ड ड्रिंक जैसी थी। पर अब मैं कैसे मना करती, मैंनें ही तो कहा था।

बॉस नें कहा भी कि मेंरी पसंद बहुत हाई है और तारीफ़ भी की।

अब ड्रिंक्स चल रही थी और सब थोड़ा थोड़ा बेतकल्लुफ़ भी होते जा रहे थे। थोड़ी हंसी मजाक होते होते फ्लर्टिंग मेंं बदल रही थी।

मैंनें भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया तो वे और उत्साहित हो गए। इसी बीच मेंरे पति यानि वरुण वाशरूम के लिए गए तो उनकी सीट पर वो सी.ए. साब आकर बैठ गए, वरुण आया तो खली कुर्सी मेंं बैठ गया। अब मेंरे आजू-बाजू इनका बॉस और सी.ए. हो गए। इनका बॉस एक बहुत ही खूबसूरत 6 फुट का जवान था। उसकी उम्र करीब 26-27 ही होगी। मैं भी 28 की थी। सी.ए. की करीब 35-36 होगी। वह भी आकर्षक तो था पर व्यक्तित्व मेंं बॉस से कम ही था। बॉस तो ऐसा था कि कोई भी महिला पिंघल जाए उसकी बाँहों मेंं।

मुझे ऐसी कोई उम्मीद नहीं थी कि उनकी भी मुझ पर नज़र है। पर मैंनें महसूस किया की बॉस नें मेंज के नीचे नीचे ही मेंरे पैर पर अपनें पैर से थोड़ा सा दबाव बनाया। मैं जब चुप रही तो दुबारा किया। मैंनें भी जवाब दिया पैर से ही। मुझे ऐसा करनें मेंं बड़ी गुदगुदी हो रही थी, मज़ा आ रहा था। अब बॉस थोड़ा आगे बढ़े और अपनें घुटनें को मेंरे घुटनें से रगड़नें लगे। ऊपर से सब सामान्य दिख रहा था। थोड़ी देर मेंरी रेशमी साड़ी पर ही उनके घुटनें की रगड़ बहुत आनन्दित कर रही थी। मेंरी ओर से भी उनको बराबर जवाब मिल रहा था, मैं भी अपनी टांग उनसे चिपका रही थी।

अब मेंरी बारी आई चोंकनें की। हुआ यह कि बॉस नें अपना दायां हाथ अचानक मेंरी जांघों के बीच मेंं रख दिया। मेंरे हाथ का गिलास गिरते गिरते बचा। बॉस का यह हाथ मेंरी जांघों के बीच मेंं धंसता जा रहा था और मेंरी योनि के उभार को छू रहा था। मैं तो काम्पनें जैसी हालत मेंं थी। उधर मेंरी योनि मेंं खलबली मच रही थी और वो गीली होती महसूस हो रही थी।

थोड़ी देर तक जब किसी नें नोटिस नहीं किया तो मैंनें भी अपना बाया हाथ नीचे ही नीचे बॉस के लण्ड पर पैंट की ज़िप के ऊपर रख दिया। बॉस का लण्ड गरम और कड़क हो चुका था। पता नहीं कैसे सी.ए. की नज़रों नें हमारी यह हरकत पकड़ ली और वो भी चालू हो गया। उसनें मौका देखा और बॉस का हाथ वहाँ से हटते ही अपना हाथ मेंरी चूत पर धर दिया।

मुझे लगा कि आज तो कुछ गजब ही हो रहा है, मेंरी चूत से जैसे अब पानी बहनें लग जायेगा। ऐसा तो मैंनें कभी सोचा भी नहीं था। खैर अब ड्रिंक्स के बाद डिनर भी जल्दी ही हो गया और बॉस अपनी कार से हमको होटल छोड़नें आये। वहाँ पर एक कमरा हमारे बगल का ही सी.ए. के लिए था। वो भी साथ मेंं आये। ऊपर आकर मैं तो अपनें कमरे मेंं आ गई गुडनाईट कह कर, वे तीनो सी.ए. के कमरे मेंं बैठ गए, मुझे बताया कि अभी वे कुछ काम भी करेंगे और अभी ड्रिंक्स भी कम रह गई है तो थोड़ा और पियेंगे।

मैंनें साड़ी उतारी, ब्रा और पैंटी भी उतर दी और नाईटी पहन कर लेट गई क्योंकि मैं ख्यालों से ही कुछ मज़ा लेना चाह रही थी।

मैं आँखें बंद करके सोनें की मुद्रा मेंं लेटी हुई थी कि वरुण मेंरे कमरे मेंं आया, उसी के लिए दरवाज़ा भी लॉक नहीं किया था।

मैंनें आँख नहीं खोली तो उसनें सोचा कि मैं सो रही हूँ। उसनें अपनी ज़िप खोल कर अपना कड़क लण्ड मेंरे चेहरे पर रगड़ना शुरु किया। मैं चुपचाप मज़ा लेती रही। अब उसनें अपनें लण्ड को मेंरे होंटों पर रख दिया। मैं इतनें गरम स्पर्श से आनंदविभोर होती जा रही थी। अब मुझसे भी नहीं रहा गया, मैंनें जैसे ही आँखें खोली तो अवाक् रह गई।

मैंनें डरते हुए कहा- वरुण आ जायेगा।

वह वरुण नहीं बॉस था, वे बोले- वो इतनी पी गया है कि कल तक भी होश मेंं नहीं आएगा, तुम निश्चिन्त होकर चुदनें का मज़ा ले सकती हो।

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मुझे क्या मालूम था कि मैं जो सपना बुन कर आनन्दित होना चाह रही थी वो सब सच ही होनें वाला था।

मैं फिर भी डर रही थी, तो बॉस नें कहा- सी.ए. वरुण के साथ बैठा है, वो नहीं आएगा, तुम चिंता मत करो।

मैं भी निश्चिन्त हो गई और इस खूबसूरत मर्द से चुदनें का मज़ा लेना चाहती थी इसलिए फट से तैयार हो गई और लिपट गई उसकी बाँहों मेंं।

उसनें मुझे अपना लण्ड मेंरे हाथ मेंं थमाया। बाप रे ! क्या साइज़ था- 7″ से ज्यादा ही होगा। मैंनें उसके लिए जल्दी से अपनी नाइटी ऊपर की और बिस्तर पर लेट कर टाँगे चौड़ी कर दी।

बॉस नें कोई देरी नहीं की और मेंरी चूत पर अपना फनफनाता लण्ड टिका कर एक धक्का लगाया और लण्ड पिस्टन की तरह अन्दर तक धंस गया।

मुझे हल्का सा दर्द तो हुआ क्योंकि यह लण्ड कुछ ज्यादा ही मोटा था। पर जैसे जैसे उसनें बाहर-भीतर, बाहर-भीतर पेलना शुरु किया तो भारी मज़ा आनें लगा, मैं भी नीचे से अपनें चूतड़ उछाल उछाल कर पूरा लण्ड अन्दर लेनें की कोशिश कर रही थी। फच-फच की आवाज़ें आनें लगी और मेंं आआह्ह ऊउह्ह कर रही थी, सिसकारियाँ भर रही थी।

4-5 मिनट तक इसी तरह चोदनें के बाद उसनें मुझे घोड़ी की अवस्था मेंं मेंरे दोनों पैरों और हाथों पर खड़ी किया और पीछे से मेंरी चूत को हाथ से टटोल कर उसमेंं अपना लण्ड घुसेड़ दिया और चूत मेंं लगा धक्के मारनें।

मेंरी चूचियाँ हवा मेंं उछलकूद कर रही थी और वो मेंरी कमर अपनें दोनों हाथों से पकड़े हुए पूरा लण्ड पेलते हुए अन्दर-बाहर कर रहा था, मुझे परम सुख मिल रहा था।

तभी मैंनें देखा कि वो सी.ए. मेंरे मुँह के सामनें खड़ा है और मेंरी जुल्फें, मेंरे लम्बे बालों को चेहरे से हटा कर अपना लण्ड मेंरे मुँह मेंं घुसानें की तैयारी मेंं था।

मैंनें कहा- मैं यह नहीं करुँगी !

पर वो नहीं माना और मुझे भी यह स्वाद चखनें की इच्छा हो गई।

अब पीछे से बॉस जब धक्का मारता तो आगे दूसरा लण्ड मेंरे हलक तक घुस जाता। सी.ए. मेंरे बालो से खेल रहा था। फिर दोनों नें अपनी अपनी जगह बदल ली और फिर दोनों नें जम कर मुझे चोदा।

मैं इतनें जोर से झड़ी और इतना पानी चूत से निकला जितना कभी नहीं निकला होगा। सी.ए. नें भी मेंरी चूत मेंं पानी भर दिया और ये सब मिलकर मेंरी टांगों के किनारे किनारे बह निकले।

उधर बॉस भी जब झड़नें को हुआ तो उसनें अपना लण्ड मेंरे मुँह से बाहर निकाल लिया नहीं तो मेंरा मुँह भी भर गया होता। लेकिन बॉस का वीर्य मेंरे बालों मेंं गिरा और वो हंसते हुआ बोला- शैम्पू लगा दिया तुम्हारे बालों मेंं, धो लेना।

दोनों के झड़नें के बाद उन्होंनें कहा कि उनको बहुत मज़ा आया और वे दोनों अपनें कमरे मेंं चले गए।

मैंनें सब ठीकठाक किया और सोनें का नाटक करनें लगी। तभी 5-10 मिनट बाद वरुण धीरे से कमरे मेंं आया, उसको बॉस सहारा देकर छोड़ गया।

वरुण खूब पिए हुए था, उसनें मेंरी बगल धीरे से लेट कर मुझे हल्की हल्की दो तीन आवाज़ दी, मैंनें कोई जवाब नहीं दिया तो फिर वो सो गया, मैं अपनी चूत को सहलाते हुए और उसे हाथ से थपथपा कर देखते हुए सो गई।

अगले दिन वरुण और मैं वापिस आ गए।

वरुण नें कोई ऐसी बात नहीं कही जिससे कुछ अंदाज़ा लगाया जा सके कि उसे कुछ शक भी हुआ या नहीं, या सब मालूम था, या उसनें बॉस को खुश करनें के लिए सब षडयंत्र रचा हो।

पर मुझे ऐसी शंका नहीं हुई, आज भी नहीं है।

चुदाई का यह विशेष अनुभव मैं कभी नहीं भूल पाऊँगी।

Antarvasna

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