loading...

“सौतेली माँ की चुदाई की गर्म कर के”

Antarvasna sex stories, desi kahani, hindi sex stories, chudai ki kahani, sex kahani
दोस्तो, मैं एक बड़े बाप का बेटा हूँ, मेरी मॉम मुझे छोड़ कर भगवान के पास चली गईं थीं| मेरी माँ की मृत्यु के बाद मेरे पापा नें अपनें से बहुत छोटी उम्र की एक माल सी दिखनें वाली लड़की से शादी कर ली थी| हालांकि वो मुझसे कुछ ही वर्ष बड़ी थी, पर अब वे मेरी सौतेली मॉम थीं|
यह बात उस समय की है, जब मेरी छुट्टियाँ चल रही थीं, तो मैं अपनी नई मॉम और डैड के साथ गाँव आया था| वहाँ गाँव में हमारा एक संयुक्त परिवार रहता है| पापा के बिजनेंस की वजह से हम लोग गाँव से बाहर शहर में रहते हैं|
यह बात गाँव में रहनें के अंतिम दिन की है, उसके अगले दिन हम वापिस शहर आनें वाले थे, क्योंकि मेरे स्कूल खुलनें वाले थे| डैड प्रॉपर्टी के सिलसिले में वहीं रुकनें वाले थे|

उस दिन दोपहर को गाँव में बहुत बारिश हुई, जिसके कारण करेंट चला गया और पता चला कि कोई पेड़ गिरनें की वजह से वायर टूट गया है और उस दिन करेंट नहीं आएगा|
बारिश तो बंद हो गई, लेकिन मौसम गर्मी का था, सो उमस बहुत हो गई थी और घर में बहुत गर्मी हो रही थी| लेकिन बाहर अच्छी हवा चल रही थी तो सब लोग रात को खानें के बाद बाहर खटिया डाल कर सोनें लगे|

मैं और मॉम घर के अन्दर ही सोनें की तैयारी करनें लगे| चूंकि मॉम घर की बहू थीं, तो वे सबके सामनें नहीं सो सकती थीं, इसलिए वो अपनें कमरे में चली गईं, मेरी भी बाहर सोनें का आदत नहीं थी, सो मैं भी अपनें कमरे में चला गया और सोनें की कोशिश करनें लगा|
लेकिन गर्मी के वजह से नींद नहीं आ रही थी, तो मैं इधर:-उधर डोल रहा था|

तभी मैंनें देखा कि मॉम की खिड़की से मस्त हवा आ रही है और सीधे उनके बिस्तर पर हवा लग रही थी, सो मैं जाकर मॉम के बगल में लेट गया और हवा का आनन्द लेनें लगा|
डैड रोज रात को अपनें पुरानें दोस्तों के साथ अद्धा मारनें जाते और कभी:-कभी वहीं रुक जाते थे|
थोड़ी ही देर में मॉम मेरी तरफ को आ गईं और जैसे ही उनका बदन मेरे जिस्म से टच हुआ, वो मेरे और करीब आ गईं और उन्होंनें अपनी एक टांग मेरे ऊपर करके मुझे कस कर पकड़ लिया|
गर्मी की वजह से मैं सिर्फ़ पैन्ट पहनता था और वो मेरे सीनें पर अपना सिर रख कर सोनें लगीं| मेरे शरीर में करेंट जैसा दौड़नें लगा|

मैंनें देखा मॉम सिर्फ़ पेटीकोट में हैं, गर्मी की वजह से उन्होंनें अपनें सारे कपड़े खोल दिए थे, उन्होंनें पेटीकोट मम्मों के थोड़े ऊपर से बांधा हुआ था, तो मॉम जब एक टांग मेरे ऊपर रख कर सो रही थीं, मुझे उनकी पैन्टी दिख रही थी, मैं अपनें आप को कंट्रोल नहीं कर पाया|
मेरे दिमाग में मॉम को चोदनें का ख़याल आया, लेकिन मुझे डर था कि कहीं वे उठ ना जाएं|

थोड़ी देर में मैंनें हिम्मत करके अपना पैन्ट से लंड बाहर निकाल लिया|
आप सब को बता दूँ कि मेरा लंड लंबा और मोटा है और इस वक्त मॉम के स्पर्श से लण्ड पूरा खड़ा हो गया था|
मैं लंड को सैट करके घूमनें के लिए सोच रहा था, ताकि लंड मॉम के चूत से टच हो ज़ाए, और मैंनें पूरी तैयारी से घूमते हुए मॉम को कस कर पकड़ लिया| इस वजह से मेरा लंड पूरे फोर्स के साथ जाकर उनकी चूत से टकराया, मैं जल्दबाजी में मॉम की पैन्टी के बारे में भूल गया था, जो लंड को अन्दर जानें से रोक रही थी|
तभी अचानक मॉम उठ गईं और धीरे से लड़खड़ाते हुए स्वर में बोलीं:- आप अभी आ रहे हैं, मैं कब से आपका इंतज़ार कर रही थी, आपके इन्तजार में तो मैंनें दो पैग तक पी लिए हैं|
मॉम नें नशे में मुझे और ज़ोर से पकड़ लिया, मुझे लग रहा था कि मॉम मुझे पापा समझ रही हैं|
मॉम फिर बोलीं:- नीचे दूध रखा है पीलो, और दरवाजा बंद कर आइए, सामनें के कमरे में बेटा सोया हुआ है|

मैं यह सुन कर समझ गया कि मॉम मुझे पापा ही समझ रही हैं|
मैं धीरे से उठा, बाहर जाकर देखा सब गहरी नींद में सोए हुए हैं और फिर मैं वापिस आ गया|

अब मैंनें कमरे को अन्दर से लॉक कर दिया|
तब मॉम बोलीं:- बिस्तर के नीचे दूध का गिलास रखा है, पी लीजिए और उसके साइड में ही कन्डोम रखा है, मोबाइल की लाइट से देख कर पहले दूध पीलो|
कमरे में तो पहले से पूरा अंधेरा था, दरवाजा बंद करनें से और अंधेरा हो गया था| मैंनें अपनें सारे कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा हो गया| मैंनें दूध और कन्डोम की कोई परवाह नहीं की और मॉम के होंठ चूसनें लगा, मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा था, इसलिए उनकी पैन्टी को ज़ोर से खींच निकाला, पेटीकोट को भी निकाल कर फेंक डाला|
तभी मॉम नशे में धुत्त मेरे ऊपर आ गईं और पागलों की तरह मुझे किस करनें लगीं|

हम दोनों एक:-एक करके किस करते गए|

तभी मेरे दिमाग़ में कन्डोम का ख़याल आया, तो मैं उठनें लगा, तभी मॉम बोली:- कहाँ जा रहे हैं, प्लीज़ कहीं ना जाइए और मुझे जल्दी चोदिए, आपका तो खड़ा भी ठीक से नहीं होता है, आज मैंनें एक दूध में दवा डाली है, आइए जल्दी से मुझे चोद दीजिये|
अब मैं भी बहुत कामुक हो गया था, तो मैंनें देरी ना करते हुए मॉम पर टूट पड़ा उनके मम्मों के भूरे चूचुकों को जी भर के चूसा, उनके मस्त जिस्म के हर इंच का चुम्बन किया|
तभी मॉम चुदासी होते हुए बोलीं:- अब चोदो भी प्लीज़,

उन्होंनें अपनी दोनों टाँगें फैला दीं,

यह कहानी आप अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
मैंनें लंड को चूत के मुहानें पर सैट ही किया था कि मॉम नें मुझे पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और एक ही झटके में आधे से ज़्यादा लंड चूत के अन्दर चला गया|

मॉम अपनें दर्द को सहते हुए हल्की सी सिसकारी मार रही थीं ताकि कोई सुन ना ले|

तभी मैंनें अपनें दोनों हाथों से मॉम के हाथ को पकड़ा और उन्हें तबियत से चोदनें लगा|
मॉम:- आआहह, मर गई जी, आज तो आपका लंड बहुत बड़ा हो गया है, इस दवा से, मैं सहन ही नहीं कर पा रही ही हूँ, प्लीज़ निकाल लो,

मुझे आज जो मौका मिला था, उसे मैं पूरी तरह इस्तेमाल करना चाहता था|

मेरा लंड अब भी मम्मी की चूत में था और मम्मी मुझे लगातार किस कर रही थीं|
मैंनें मम्मी की जीभ को अपनें मुँह में ले लिया और उसे चूसनें लगा, मम्मी भी मेरी जीभ चूसनें लगीं और हम दोनों एक:-दूसरे की जीभ से खेल रहे थे|
जुबानों की इस तकरार के कारण मेरे सोए हुए लंड में जान आनें लगी| मुझे अब अपनी माँ के शरीर के हर अंग से प्यार करना था| मैंनें उनके होंठ आज़ाद कर दिए और उनके गालों को कस कर चूसा| फिर मैंनें अपनें होंठ मम्मी की गर्दन पर रख दिए और उसे चूमनें लगा|
मैंनें अपना लौड़ा उनकी चूत से बाहर निकाल लिया क्योंकि मैं इस चुदाई का भरपूर आनन्द लेना चाहता था|
मेरा लंड अब आज़ाद हो चुका था, मैंनें गर्दन से लेकर माँ की चूचियाँ तक का रास्ता चूमते हुए तय किया| फिर उनके 36 साइज़ के बाएं चूचे को कसकर दबा दिया और सीधे चूचे के निप्पल को होंठों में भर लिया|
मैं एक चूची को दबाता, तो दूसरी को चूसता,

ऐसे ही मैं काफ़ी देर मम्मी की चूचियों से खेलता रहा| मम्मी नें भी मुझे रोका नहीं और ‘आहें’ भरती रहीं|
मैंनें फिर मम्मी के चिकनें पेट पर हमला किया और उनकी नाभि के चारों ओर चाटनें लगा|

मम्मी तड़प उठीं और मेरे सर को पकड़ कर दबानें लगीं| मैंनें भी उनकी हालत समझी और उनकी नाभि में जीभ डाल दी और वहीं चूमनें लगा|
मैं अपनें हाथों से मम्मी की जांघें सहला रहा था और जल्द ही मेरे हाथों की जगह मेरे होंठ थे और उनकी चिकनी जांघों को चूम रहे थे|

मैं उनकी चूत के करीब तक जाकर लौट आता, उनकी जांघें मेरे थूक से सन चुकी थीं और चूत से रस बहे जा रहा था|
मम्मी से जब सहन नहीं हुआ तो उन्होंनें अपनी टाँगों से मेरे सर का पकड़ लिया और बोलीं:- आआ… आहह, बअसस्स, बहुत हो गयाआअ, जी, अब चूत को भी चाटिए न,
उनके इतना कहते ही मैंनें उनकी चूत की सेवा शुरू कर दी और उनकी मस्त चूत को चूमनें, चाटनें और चूसनें लगा|

मम्मी की चूत को चाटनें में मुझे बहुत मजा मिल रहा था| थोड़े समय बाद मैं अपनी जीभ से मम्मी की चूत को जीभ से ही चोदनें लगा और उनकी चूत से निरंतर निकलते रस का पान करनें लगा|

अब मम्मी की साँसें काफ़ी तेज हो गई थीं|A इल

जो कहानियाँ अभी पढ़ी जा रही हैं

loading...
error: Protected