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साली की कमसिन बेटी-2

Antarvasna‘मैं हूँ मेरी जान! तुम्हारा चाहनें वाला! हाय अच्छा हुआ कि तुम जाग गई!’

‘क्या मस्त जवानी पाई है! आज मैं तुमको…!’ और किसी भूखे कुत्ते की तरह मुझे अपनी बाँहो में कसता मेरी दोनों चूचियों को टटोलता बोला- हाय हाय… क्या गदराई जवानी है!’

मैं अपनें दोनों उभारों को उसके हाथ में देते ही जन्नत में पहुँच गई| मेरा चाचा मेरे चिकनें गाल पर अपनें गाल लगा दोनों को दबा बोला- बस एक बार चखा दो! देखो कितना मजा आता है!

‘हाय चाचा! आप मुझे छोड़ दो! यह क्या कर रहे हैं आप? अम्मी आ जाएगी!’

‘सायरा से मत डर! उसनें ही तो भेजा है! कहा है कि जाओ! मेरी बेटी जवान हो गई है! उसे जवानी का मजा दो| बहुत दिनों से ललचा रही हो! बड़ा मजा पाओगी| अम्मी कु्छ नहीं कहेंगी!’ और इसके साथ ही मेरी चूचियों को मैक्सी के ऊपर से कसकर दबाया तो मेरा मजा सातवें आसमान पर पहुँच गया|

‘अम्मी सो गई क्या?’ मैंनें पूछा तो चाचा बोले- हाँ! आज तुम्हारी अम्मी को मैंनें बुरी तरह थका दिया है| अब वो रात भर मीठी नींद सोएगी| बस मेरी रानी एक बार! देखना मेरे साथ कितना मजा आता है!

और उसनें मेरे दोनों निप्पल को चुटकी में मसल कर मुझे राज़ी कर लिया| सच आज चाचा की हरकत में मजा आ रहा था! दोनों निप्प्लों को मसले जानें का नशा रानों में उतर रहा था|

‘चाचा आप अम्मी के साथ सोते हैं? वह तो आपकी भाभी हैं?’

‘आज अपनें पास सुलकर देखो! जन्नत की सैर करा दूँगा| हाय! कैसी मतवाली जवानी पाई तूनें! भाभी है तो क्या हुआ! माल तो बढ़िया है तेरी अम्मी का!’

‘दरवाज़ा खुला है!’ मैंनें मज़े से भरकर कहा| मेरी नस नस में बिजली दौड़ रही थी! अब बदन पर एक कपड़ा भी बुरा लग रहा था| उसनें मेरी चूचियों को मसलते हुए मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया| उसे मेरी जैसी कुँवारी लड़कियों को राज़ी करना आता था| होंठ कऊसते ही मैं ढीली हो गई|

चाचा मेरी मस्ती को देख एकदम से मस्त हो गये! धीरे से मेरे बदन को बेड पर सीधे बिछा कर मेरी चूचियों पर झुक कर मेरी रानों पर हाथ फेरते बोले- अब तुम एकदम जवान हो गई हो| कब मजा लोगी अपनी जवानी का| डरो नहीं! तुमको कली से फूल बना दूँगा| अम्मी से मत डरो! उनके सामनें तुमको मजा दूँगा बस तुम हाँ कर दो!

हाथ लगवानें में और मजा आ रहा था! मैं मस्त हो उसे देखती बोली- अम्मी को आप रोज़…?

‘हाँ मेरी जान! जब भी यहाँ रहता हूँ तो तुम्हारी अम्मी को रोज़ चोदता हूँ| तुम तैयार हो तो तुमको भी रोज़ चोदूँगा| हाय कितनी खूबसूरत हो| ज़रा सा और खोलो ना!

मैं तो जन्नत में थी| चाचा चूचियों को दबाए एक हाथ गाल पर और दूसरा रानों के बीच फेर रहे थे और दोनों रानों को पूरा खोल दिया| चाचा चालाक थे! पैर खोलनें का मतलब समझ गये! मुस्काराकार मेरे होंठ चूम कर बोले- तुम्हारी फ़ूफ़ा की छोटी बहन को तो तुम जानती हो! अभी बारहवीं की भी नहीं है! उसकी चूचियाँ भी तुमसे छोटी हैं! वह भी मुझसे खूब चुदवाती है|’

और चूत की फाँक को चुटकी से मसला तो मैं कसमसकर बोली- हाय चाचा! आप फ़रज़ाना को भी मेरी अम्मी की तरह चोदते हो?’

‘हाँ यहाँ रहता हूँ तो तुम्हारी अम्मी को और अकसर तुम्हारी जीनत फ़ूफ़ी के घर में उसकी ननद फ़रजाना को खूब हचक कर चोदता हूँ!

‘बोलो तो हो राज़ी मेरे से चुदवानें के लिये?’

और मेरी बुर की दरार में उंगली फ़ेरी तो मैं राज़ी हो गई और बोली- राज़ी हूँ पर अम्मी से मत बताना|

मैं चाचा को यह एहसास नहीं होनें देना चाहती थी कि मैं तो जानें कब से राज़ी हूँ| मैं अपना 18 साल का ताज़ा बदन उसके हवाले करनें को तैयार थी| अगर वह अम्मी को चोद कर ना आए होते तो मेरी कुँवारी चूत को देखकर बिना पूछे मुझे चोद ही डालते! पर वह अम्मी को चोद कर अपनी बेकरारी को काबू में कर चुके थे| वह मेरी नई चूचियों को हाथ में लेते ही मेरी कीमत जान गये थे|

मेरे लिए यह पहला मौका था! चाचा मुझसे ज़बरदस्ती ना कर प्यार से कर रहे थे! अब तक वह मेरी नंगी चूत को देख उस पर हाथ फेर कर उसे चूम भी रहे थे पर मैंनें अभी तक उनका लंड नहीं देखा था|

चाचा नें दुबारा चूचियों को मसलते हुए कहा- अम्मी से मत डरो| अम्मी नें पूरी छूट दे दी है| बस तुम तैयार हो जाओ!

और चूचियों को इतनी ज़ोर से दबाया कि मैं तड़प उठी|

‘मुझे कु्छ नहीं आता!’ मैं राज़ी होकर बोली तो उसनें कहा- मैं सिखा दूँगा!
और मेरे गाल काटा तो मैं बोली- ऊई… बड़े बेदर्द हो चाचा…

मेरी इस अदा पर मस्त हो गाल सहलाते मैक्सी पकड़ कर बोले- इसको उतार दो!
‘हाय पूरी नंगी करके?’
‘हाँ मेरी जान! मजा तो नंगे होनें में ही आता है| बोलो पूरा मजा लोगी ना?’
‘हाँ!’
‘तो फिर नंगी हो जा! मैं अभी आता हूँ|’ चाचा कमरे से बाहर चला गए|

मेरी हालत क्या थी! बता नहीं सकती थी! मेरेपूरे बदन में चीटियाँ सी रेंगनें लगी! चूत फुदकनें लगी थी! पानी छोड़ रही थी! मैं पूरी तरह तैयार थी| मैंनें जल्दी से मैक्सी उतार दी और पूरी नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई| अम्मी तो चुदवानें के बाद अपनें कमरे में आराम से सो रही थी और अपनें चोदू यार को मेरे पास भेज दिया था|

मैं अपनें नंगे जवान कुंवारे बदन को देखती आनें वाले लम्हों की याद में खोई थी कि मेरी माँ का यार वापस आया| मुझे नंगी देख वह खिल उठा! पास आ पीठ पर हाथ फेर कर बोला- अब पाओगी जन्नत का मज़ा!

मेरी नंगी पीठ पर हाथ फेर मजा दे उसनें झटके से अपनी लुंगी अलग की तो उनका लंड मेरे पास आते ही झटके खानें लगा| अभी शायद उसमें फुल पॉवर नहीं आई थी पर अभी भी उसका कम से कम 6 इंच का था| मैं पहली बार चचा का लंड देख मस्ती से भर गई|

चाचा बिस्तर पर आया और पीछे बैठ मेरी कमर पकड़कर बोला- गोद में आओ मेरी जान!

मेरा कमरा मेरे लिए जन्नत बन गया था| अब हम दोनों ही नंगे थे| जब चाचा की गोद में अपनें चूतड़ रखे तो चाचा नें फ़ौरन मेरी दोनों चूचियों को अपनें दोनों हाथों में ले बदन में करेंट दौड़ाया| चचा का लवड़ा मेरे चूतड़ों की दरार में झटके दे रहा था|

‘ठीक से बैठो! तभी असली मजा मिलेगा| देखना आज मेरे साथ कितना मजा आता है!’

नंगी चूचियों पर उसका हाथ चला तो आँख बंद होनें लगी| अब सच में ही बड़ा मजा आ रहा था|

‘फ़ातिमा!’
‘जी चचा!’
‘कैसा लग रहा है?’

मेरी गाण्ड में उनका खड़ा लंड गड़ रहा था जो एक नया मजा दे रहा था| अब मैं बदहवास हो उनकी नंगी गोद में नंगी बैठी अपनी चूचियों को मसलवा कर मस्त होती जा रही थी|

तभी चाचा नें चूचियों के टाइट निप्पल को चुटकी से दबाते पूछा- बोलो मेरी जान? कैसा लग रहा है?
‘हाय! अब और मजा आ रहा है चाचा!’

‘घबराओ नहीं! तुमको भी अम्मी की तरह पूरा मजा दूँगा! हाय तुम्हारी चूचियाँ तो भाभी से भी अच्छी हैं|’

चचा मेरी मस्त जवानी को पाकर एकदम से पागल से हो गये थे| निप्पल की छेड़ छाड़ से बदन झनझना गया था मेरा! जी कर रहा था कि कोई मुझे रगड़ दे! निचोड़ दे!

तभी चाचा नें मुझे गोद से उतारकर बेड पर लिटाया और मेरे निप्पल को होंठो से चूस कर मुझे और ज्यादा पागल कर दिया! हाथ की बजाए मुँह से ज़्यादा मजा आया| चाचा की इस हरकत से मैं खुद को भूल गई! उनको मेरी चूचियाँ खूब पसंद आई| चाचा 10 मिनट तक मेरी चूचियों को चूस चूस कर पीते रहे|

चूचियों को पीनें के बाद चाचा नें मुझसे मेरी रानों को फैलानें को कहा तो मैंनें खुश होकर अपनें चोदू चाचा के लिए जन्नत का दरवाज़ा खोल दिया| पैर खोलनें के बाद चाचा नें मेरी कुँवारी चूत पर अपनी जीभ फिराई तो मैं तड़प उठी|

चाचा मेरी चूत को चाटनें लगे! चूत चटवाते ही मैं तड़प उठी|
चाचा नें चाटते हुए पूछा- अब बोलो जान! कैसा लग रहा है?
‘बहुत अच्छा मेरे राजा!’

‘तुम तो डर रही थी| अब दोनों का मजा एक साथ लो!’ और अपनें दोनों हाथों को मेरी मस्त चूचियों पर लगा दोनों को दबाते मेरी कुँवारी गुलाबी चूत को चाटनें लगे तो मैं दोनों का मजा एक साथ पाकर तड़पती हुई बोली- ‘हाय… आआहह… बस करो चाचा… ऊई… नहीं… अब और नहीं…’
‘अभी लेटी रहो!’

मुझे ग़ज़ब का मजा आया! वो भी मेरी जवानी को चाटकर मस्त हो उठे|

10 मिनट तक चाटते रहे फिर मुझे जवान करनें के लिए मेरे ऊपर आए| चाचा नें पहले ही मस्त कर दिया था इसलिए दर्द कम हुआ| चाचा भी धीरे धीरे पेलकर चोद रहे थे| मेरी चूत एकदम ताज़ी थी इसलिए चाचा मेरे दीवानें होकर बोले- हाय अब तो सारी रात तुमको ही चोदूँगा|’

मैं मस्त थी इसलिए दर्द की जगह मजा आ रहा था|

‘मैं भी अब आपसे रोज़ चुदवाऊँगी|’

उस रात चाचा नें दो बार चोदा था और जब वे अगली रात मुझे पेल रहे थे तो अचानक अम्मी भी मेरे कमरे में आ गई| मैं ज़रा सा घबराई लेकिन चाचा उसी तरह चोदते रहे|

अम्मी पास आकर मेरी बगल में लेट मेरी चूचियों को पकड़कर बोली- ओह बेटी! अब तो तुम्हारी बुर चोदनें लायक हो गई है| लो मजा मेरे यार के तगड़े लंड का!’

‘ओह अम्मी! चाचा बहुत अच्छे हैं! बहुत अच्छा लग रहा है|’

अब मैं और अम्मी दोनों साथ ही चाचा से चुदवाते हैं| चाचा अक्सर आते हैं ओर हम दोनों माँ बेटी चुदाई का मजा लेती हैं और चाचा हमें खूब मजा देते हैं|

बुढापे का रंगीन साथी
दोस्तो! आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनानें जा रहा हूँ! जिसे सुन कर आप हैरान रह जाएंगे| यह बात मेरे एक वकील दोस्त की कहानी है! जो उसनें एक दिन मुझे पेग पीते पीते बता दी|
उसकी कहानी को मैं अपनी भाषा में आपको बता रहा हूँ|

मुझे सब वैसे तो वकील साहब कहते हैं! पर मेरा पूरा नाम रंजन अग्रवाल है| मेरी उम्र इस वक़्त 57 साल है| तीन साल पहले मेरा एक बड़ा ही ज़बरदस्त एक्सीडेंट हो गया था! जिसमें मेरी पत्नी गुज़र गई और मेरा एक हाथ और एक बाजू कट गई|

अब बिना हाथों के मेरे लिए तो सभी काम मुश्किल हो गए थे तो मैंनें वकालत छोड़ दी|
बेटा मेरा वकील है और दिल्ली में प्रेक्टिस करता है| अम्बाला में हमारा पुश्तैनी मकान है! कुछ दुकानेंं और थोड़ी और जायदाद है तो मैं अपनें बेटे के पास दिल्ली नहीं गया! बल्कि अम्बाला में ही रह गया|

एक पूरे टाइम का नौकर रख लिया! जो मेरे सारे काम करता था! मुझे रोटी भी खिलाता और पोट्टी सुसू भी करवाता|

अब फ्री होता हूँ तो कभी यहाँ घूम तो कभी वहाँ घूम… ज़िंदगी बहुत अच्छी चल रही थी|
हमारे पड़ोस में एक परिवार रहता है! उनकी छोटी बेटी! कोमल नें भी वकालत की पढ़ाई शुरू कर दी! और अक्सर मेरे पास कुछ न कुछ पूछनें के लिए आती रहती|

कोमल को सब प्यार से कोमा कहते हैं! कोई 22 साल की पतली दुबली सी बहुत सुंदर चेहरे वाली लड़की|
अब पड़ोसी की बेटी! मेरी भी बेटी जैसी थी! मैं हमेशा उसे अपनी बेटी की तरह ही प्यार करता और उसको सही मार्गदर्शन देता| वो भी मुझे बेशक अंकल कहती पर एक बेटी की तरह मेरी सेवा और प्रेम करती थी! मेरे बहुत सारे छोटे मोटे काम भी कर देती थी|

ऐसे ही एक दिन जब वो मेरे पास आई तो मेरा नौकर किसी काम से बाहर गया हुआ था! मुझे शाम की सैर के लिए जाना था! सो मैंनें कोमा से कहा- बेटा! अगर तुम्हें कोई तकलीफ न हो तो क्या तुम मेरे शर्ट प्रेस कर दोगी?
वो मुस्कुरा कर बोली- लो अंकल! इसमें तकलीफ वाली क्या बात है! मैं कर देती हूँ! बोलो कौन सा करना है|

उसनें अलमारी खोली और मेरी बताई हुई शर्ट निकाल कर प्रेस करनें लगी|
प्रेस उसनें मेरे बेड की साइड वाले स्विच में ही लगाई थी|

जब वो प्रेस कर रही थी तब अचानक मेरी नज़र उसकी टी शर्ट के अंदर गई| नीचे से उसनें ढीली सी अंडर शर्ट पहन रखी थी और टी शर्ट के गले में से मैंनें देखा! तो छोटे छोटे बड़े प्यारे प्यारे से मलाई के पेड़े झूल रहे हैं|

सच में मुझे उसके चूचे मलाई के पेड़ों जैसे ही लगे| मन में विचार आया कि अगर ये पेड़े खानें को मिल जाएँ तो ज़िंदगी का मकसद पूरा हो जाए|

मगर तभी मन में दूसरा विचार आया ‘ये क्या देख रहा है रंजन| वो तेरी बेटी है! उसको इस गंदी नज़र से देख रहा है|’
मगर किसी नें सच कहा है! काम वासना पर किसी का कोई वश नहीं है|

मैंनें अपना चेहरे घूमा लिया! बात खत्म हो गई|
मगर रात को सोते हुये मुझे सपनें में फिर से कोमा के वो खूबसूरत छोटे छोटे चुचे दिखे| मेरी नींद खुल गई! देखा तो लंड नें पायजामे का तम्बू बना दिया था| उसके बाद मैं कितनी देर तक सो नहीं पाया! बार बार मेरे सामनें अंधेरे में से निकल निकल कर कोमा के चूचे ही नज़र आते रहे! बड़ी मुश्किल से नींद आई|

मगर उस दिन के बाद मेरे देखनें का नज़रिया बदल गया| अब मैं अक्सर कोमा के बदन की गोलाइयाँ! उभार और कटाव देखता! मगर सब से बड़ी दिक्कत यह थी! कि सारी जगह एक बहुत ही शरीफ इंसान की इमेज बना रखी थी! तो किसी से यह भी नहीं कह सकता था कि यार किसी रंडी की ही दिलवा दो! और दोनों हाथ न होनें की वजह से मुठ भी नहीं मार सकता था|
बड़ी विचित्र समस्या थी मेरी!

ऐसे में ही एक दिन जब कोमा मेरे पास बैठी पढ़ रही थी! वो मुझसे बोली- अंकल! आप से एक बात पूछनी है?
मैंनें कहा- पूछो बेटा!
‘मगर डर लगता है…’ वो बोली|
‘अरे डर किस बात का! मैं तुम्हारा अंकल हूँ! तुम मेरी बहुत प्यारी बेटी हो! पूछो क्या बात है?
मुझे यह शक था कि वो शायद अपनें किसी बॉयफ्रेंड के बारे में कोई बात करना चाहती होगी|

वो बोली- पर आप किसी को बताओगे तो नहीं?
मैंनें कहा- अरे बेटा! मैं कहाँ आता जाता हूँ! मैं किस से कहूँगा! तुम बिंदास पूछो|
मुझसे तसल्ली करके वो बोली- ये रेप क्या होता है?पूछ कर वो बहुत शरमाई|

मैंनें कहा- बेटा! यह तो बहुत उलझन भरा सवाल है! अब मैं भी तुम्हें कैसे समझाऊँ! मतलब किसी भी पुरुष द्वारा किसी भी औरत या लड़की से उसकी इच्छा के बिना संबंध बनाना रेप होता है|
मैंनें गोल मोल सा जवाब दिया|

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‘वो तो मैं भी जानती हूँ! मगर हम क्लास की कुछ लड़कियाँ इसके बारे में डीटेल में जानना चाहती हैं|’
मैंनें कहा- बेटा फिर नेंट पे सर्च कर लो! तुम्हें कुछ न कुछ मिल जाएगा|
मैंनें बात को टाल दिया|

दो तीन दिन बाद उसनें फिर मुझसे पूछा- अंकल! मैंनें नेंट भी बहुत देखा मगर इसका कोई सही जवाब नहीं मिल पाया! और सच कहूँ! तो वो गंदी वीडियोज़ देखनें का मेरा मन नही करता|

मैंनें कहा- देखो बेटा! असल में तो इसका जवाब उन गंदी वीडियोज़ में ही मिलेगा! मगर अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें डीटेल में सब समझा सकता हूँ! मगर उसके लिए मुझे कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग करना पड़ेगा जो कोई भी बाप! या बाप जैसा व्यक्ति अपनी बेटी के सामनें नहीं प्रयोग नहीं करना चाहेगा| अब तुम बड़ी हो चुकी हो! जवान हो! समझदार हो! सो इन सब बातों को ध्यान से सुनो और समझो!

यह कह कर मैंनें उसको रेप और पुरुष और स्त्री के बीच के सेक्सुयल संबंध के बारे में डीटेल से बताया| वो बड़े ध्यान से मेरी हर बात को सुन रही थी और कॉपी में नोट भी कर रही थी|
मगर दिक्कत यह हुई कि उसको समझाते समझते मेरा लंड अकड़ गया| अब पाजामे के नीचे से वो साफ झलक रहा था और कोमा नें भी देख लिया|

मुझे बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई कि बच्ची क्या सोचेगी कि अंकल लंड अकड़ा कर बैठे थे!
मगर मैं भी क्या करता! अब लंड तो लंड है! खड़ा हो गया तो हो गया|

फिर मैंनें भी कोमा को भेज दिया! क्योंकि वो भी बार बार मेरे उठे हुए पाजामे को देख रही थी|
मेरे मन में भी सौ तरह की बातें आ रही थी|

उसके जानें के बाद मैं बाथरूम में गया! अपना पाजामा नीचे को किया और बहुत कोशिश की के किसी तरह से इसे शांत कर सकूँ! मगर ऐसा नहीं हो पाया! दीवार से भी रगड़ा! मगर कोई बात नहीं बनी| फिर धीरे धीरे ये अपनें आप ही शांत होकर ढीला हो गया|

उसके बात बहुत दिनों तक मेरे और कोमा के बीच कोई ऐसी बात नहीं हुई! वो आती और पढ़ कर चली जाती|

करीब एक महीनें बाद उसनें मुझसे कहा- अंकल! एक बात पूछूँ?
मैंनें सहज स्वभाव कह दिया- पूछ बेटा!
वो बोली- ये वैसे वाली वीडियोज़ देख कर मन और तरह का क्यों हो जाता है?

मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि यह लड़की मरवाएगी मुझे! आज अगर फिर वैसे ही विषय पर बात हुई! और फिर से मेरा लंड अकड़ गया तो क्या होगा|
मैंनें कहा- तो तुम देखती ही क्यों हो! मत देखा करो|
‘नहीं मैं तो अपनी नॉलेज बढ़ानें के लिए देखती थी! पर ना जानें क्यों अब बार बार देखना अच्छा लगता है!’ वो बोली|

मैंनें सोचा ‘मर गए…’! आज तो पक्का यह पंगा करेगी मेरी जान को!
मैंनें थोड़ा सोच कर कहा- तो फिर क्या करती हो?
‘कुछ नहीं…’ उसनें छोटा सा जवाब दिया|

मुझे लगा कि वो और कुछ कहना चाहती है! मगर संकोच कर रही है! मैं भी उसके साथ इस बात को और आगे बढ़ाना चाहता था! मगर मैं भी संकोच कर रहा था कि पड़ोस की लड़की है! बेटी जैसी है! अगर कल को कोई बात हो गई! तो इस पंगे से जान नहीं छूटनी! मगर एक दिल कह रहा था! बात आगे बढ़ा! अगर बात बन गई तो इस कच्ची कली को चूसनें का मौका मिल जाएगा|

थोड़ा सा सकुचाते हुये मैंनें कह ही दिया- तो कुछ कर लिया करो!
वो झट से बोली- क्या करूँ! हाथ से करना मुझे पसंद नहीं! बॉयफ्रेंड कोई है नहीं! तो किस से करूँ फिर?

यह तो बड़ी साफ बात कर दी उसनें…
मैंनें कहा- बॉय फ्रेंड बना लो!
‘नहीं…’ वो बोली- बॉय फ्रेंड नहीं बनाना! मुझे तो कोई तजुर्बेकार इंसान! एक ऐसा दोस्त जिसपे मैं यकीन कर सकूँ! वो चाहिए! जो मुझे इस सब के बारे में सब कुछ बता सके और मेरा कोई गलत फायदा भी ना उठाए|

मुझे लगा के इसका इशारा मेरी तरफ ही है तो मैंनें कह दिया- ऐसा दोस्त तो फिर मैं ही हो सकता हूँ|
मेरे चेहरे की मुस्कान देख कर वो भी मुस्कुरा दी|
‘मगर पहले मैं सब कुछ जानना चाहती हूँ! उसके बाद ही मैं कुछ करनें के बारे में सोचूँगी|’

मेरे तो दिल की धड़कन बढ़ गई- तो क्या जानना चाहोगी?
मैंनें एक टीचर की तरह पूछा| उसके बाद उसनें सेक्स के बारे में मुझसे बहुत से सवाल किए! और मैंनें भी उसके हर सवाल का जवाब दिया! बात करते करते लफ्जों के बंधन खुलते गए और हम लिंग से लंड! योनि से चूत और बूब्स से चूचे जैसे शब्द भी इस्तेमाल करनें लगे|

उसको बताते बताते मेरा अपना लंड मेरे पाजामे में पूरी तरह से तन गया| उसनें भी देखा! मैंनें भी उसे बता दिया- देखो यह है सेक्स का असर! तुमसे बात करते करते मेरा भी टाईट हो गया! क्या तुम्हें भी कुछ हो रहा है?
पता तो मुझे भी था कि उसकी चूत भी पानी छोड़ रही होगी|
वो भी बोली- हाँ! मैं भी गीला गीला महसूस कर रही हूँ|

अब जब इतनी बात खुल गई! तो मैंनें उससे पूछा- कोमा क्या तुम मेरा लंड देखना चाहोगी?

वो चुप सी हो गई! मगर थोड़ी देर सोचनें के बाद उसनें हाँ में सर हिलाया|

मैंनें कहा- देखो मेरे तो हाथ हैं नहीं! तो तुम्हें खुद ही मेरा पाजामा उतार के इसे बाहर निकालना पड़ेगा|
मैंनें कहा और उठ कर खड़ा हो गया|

कोमा नें पहले मेरी तरफ देखा! फिर मेरे पाजामे से तनें हुये मेरे लंड को! और फिर अपनें दोनों हाथों से मेरे इलास्टिक वाला पाजामा और मेरी चड्डी दोनों उसनें एक ही बार में नीचे सरका दी|
मेरा 6 इंच का मोटा! काला लंड उसके सामनें प्रकट हुआ! वो आँखें फाड़ के इसे देखनें लगी|

मैंनें कहा- सिर्फ देखो नहीं! इसे अपनें हाथ में पकड़ो|
उसनें एक हाथ में पकड़ा! मैंनें कहा- दोनों हाथों से पकड़ो और मजबूती से! ज़ोर से पकड़ो!

उसनें दोनों हाथों से ज़ोर से मेरा लंड पकड़ा तो मैंनें अपनी कमर आगे को की और अपनें लंड का टोपा बाहर निकाल दिया|
‘आह’ मेरे मुख से निकला- ऐसे ही पकड़े रहो|
मैंनें कहा और मैं उसके हाथों में ही अपनें लंड को आगे पीछे करनें लगा! मुझे इसी में चुदाई का मज़ा आ रहा था|

मैंनें पूछा- कोमा! तुमनें ब्लू फिल्मों में देखा होगा! लड़कियाँ कैसे लंड चूसती हैं! तुम चूसोगी?
वो कुछ नहीं बोली! तो मैंनें अपनी कमर को धकेलते हुये अपनें लंड को उसके मुँह से लगाया मगर उसनें अपना मुँह घूमा लिया|

मैंनें अपनी टाँगें हिला हिला कर अपना पाजामा और चड्डी बिल्कुल उतार दिये और पास में ही दीवान पे लेट गया- इधर आ जाओ कोमा!
मैंनें कहा तो वो आकर मेरे घुटनों के पास बैठ गई और उसनें बिना कहे फिर से मेरा लंड पकड़ लिया|
‘इसे हिलाओ कोमा! ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे हिलाओ!’ मैंनें कहा! वो हिलानें लगी|

उसके चेहरे पे कोई भाव नहीं थे! देखनें से लगा रहा था कि वो पूरी गर्म है और इस वक़्त अगर मैं उसे चोदनें को कहूँ तो हो सकता है वो मुझे चोदनें दे|
मैंनें कहा- कोमा! मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ! मेरी जान! अपनी जीन्स उतारो और मेरा लंड अपनी चूत में ले लो! प्लीज़ यार!
मैंनें कहा तो उसनें मना कर दिया|

कहानी जारी रहेगी|

मैंनें फिर कहा- अगर सेक्स नहीं कर सकता तो क्या मैं तुम्हारी चूत चाट तो सकता हूँ! मुझे चूत चाटना बहुत पसंद है! प्लीज़ बेबी! अपनी चूत मेरे मुँह पे रख दो! मैं उसे चाट कर ही संतुष्ट हो जाऊँगा!

वो उठी उसनें अपनी जीन्स और पेंटी नीचे को सरकाई! मगर पूरी नहीं उतारी! मैंनें देखी झांट के छोटे से गुच्छे में उसकी कुँवारी चूत की लकीर…
मैंनें कहा- इसे मेरे मुँह पे रख दो! मेरे ऊपर ही लेट जाओ|

वो मेरे ऊपर लेट गई! मैंनें अपना सर उसके घुटनों तक उतरी जीन्स में फंसा लिया और उसकी चूत को चूमा और फिर पूरा मुँह खोल कर अपनें मुँह में ले लिया! और बस फिर जब मैंनें अपनी जीभ उसकी चूत में घुमई तो वो तो उचक गई|
‘क्या हुआ?’ मैंनें पूछा|
‘बहुत गुदगुदी होती है!’ वो बोली|
‘कोई बात नहीं! इसी में मज़ा आएगा!’ मैंनें कहा और उसनें अपनी चूत फिर से मेरे चेहरे पे रख दी और मैंनें फिर से चाटनें लगा|

उसकी चूत सच में गीली हुई पड़ी थी| उसकी कुँवारी चूत का पानी चाटते हुये मैं सोच रहा था ‘क्या बात है यार! एक कुँवारी लड़की मुझे मिली है! इसको तो चोद कर ज़िंदगी का मज़ा आ जाएगा|’

खैर पहले वो मेरे ऊपर लेटी मेरे लंड से खेलती रही! मगर जैसे जैसे मैं उसकी चूत चाट रहा था! उसका भी उन्माद बढ़ रहा था और फिर तो वो मेरे लंड को बड़ी मजबूती से पकड़ कर मेरा हस्तमैथुन करनें लगी|
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था! मैंनें अपनी एक बाजू से उसे अपनें से चिपका रखा था| जितना मैं अपनी जीभ से उसकी चूत का दाना सहलाता! उसकी चूत के अंदर तक जीभ डाल कर चाटता! वो उतना ही तड़पती! और फिर इसी उन्माद में उसनें बिना कहे ही मेरा लंड अपनें मुँह में ले लिया और चूसनें लगी|

यह सुख तो मुझे बरसों बाद मिला था! वो चूसती गई और मैं चाटता रहा! और फिर मेरे तो फव्वारे छूट गए! लंड से वीर्य की पिचकारियाँ निकल पड़ी और उसके मुँह के अंदर बाहर! आजू बाजू सब भिगो दिया|
उसनें मुँह से मेरा लंड निकाला और थू थू करके थूकनें लगी|

मगर मैंनें उसकी कमर को नहीं छोड़ा और उसकी चूत को चाटता रहा|
कोई 2-3 मिनट और चाटा और फिर वो तड़पनें लगी- आह! अंकल! खाओ जाओ! खाओ जाओ इसे! आह…. मर जाऊँगी मैं सच में! प्लीज़ अंकल! और चाटो!

वो बोलती गई! अपनी चूत को मेरे चेहरे पे रगड़ती रही और फिर मेरे वीर्य से भीगे हुये लंड अपनें मुँह से लेकर चूस गई|
बड़ी मुश्किल से मैंनें उसे तड़पती हुई को संभाला|
खूब उछली! पटक पटक के उसनें अपनी चूत मेरे मुँह पे मारी! उसकी चूत से सफ़ेद पानी के टुपके मैंनें टपकते हुये देखे! मैं वो भी चाट गया! फिर वो शांत हो कर मेरे ऊपर ही लेटी रही! मगर मेरा लंड अब भी उसनें हाथ में पकड़ा हुआ था|

कोई 5-6 मिनट बाद वो उठी! अपनें कपड़े पहनें और जानें लगी तो मैंनें उसे रोका- अरे यार ऐसे मत जाओ! मेरे कपड़े भी तो पहना दो| वो मुस्कुराई! फिर पहले तो बाथरूम से पानी ला कर उसनें मेरी जांघें और लंड को अच्छे से साफ किया! मेरे कपड़े पहनाए! बिस्तर ठीक किया और सब सेट करनें के बाद जानें लगी तो मैंनें पूछा- कल आओगी?
‘ज़रूर…’ उसनें कहा और चली गई|

और अब मैं कल का इंतज़ार करनें लगा और सोचनें लगा! अगर कल आई तो क्या उसके साथ सेक्स करके देखूँ! अगर वो मान गई तो क्या वो मुझे चोदनें देगी|
अगले दिन करीब दोपहर के 3 बजे कोमा आई! उसनें स्लेक्स और टॉप पहना था|

वो अंदर आई तो मैंनें कहा- वेलकोम स्वीटहार्ट|
वो आकर मेरे पास ही बैठ गई- और सुनाओ! अंकल कैसे हो?
उसनें पूछा! आज वो बहुत विश्वास से भरी लग रही थी|

‘अरे क्या बताऊँ यार! तुम्हारे जानें के बाद तो मैं तुम्हारे ही ख्यालों में खोया रहा!’ मैंनें कहा|
‘क्यों! ऐसा क्यों?’ उसनें पूछा|
मैंनें कहा- यार ये बुढ़ापे का इश्क़ होता ही ऐसा है!
मैंनें कहा तो वो मुस्कुरा के बोली- क्या आपको मुझसे इश्क़ हो गया है?
मैंनें कहा- हाँ! मुझे तुम बहुत प्यारी लगती हो! रात भर मैंनें तुम्हारे बारे में सोचता रहा! आई लव यू कोमा!

‘अरे आप तो दीवानें हो गए अंकल!’ वो बोली|
मैंनें कहा- हाँ! मैं तुम्हारा दीवाना हूँ! और आज मैं तुमसे सेक्स करना चाहता हूँ|
मैंनें उसे साफ साफ बोल दिया|

वो बोली- अंकल! सेक्स तो मैं भी करना चाहती हूँ! पर डर लगता है! दर्द होगा|
मैंनें कहा- मेरा तजुरबा किस दिन काम आएगा! थोड़ा दर्द तो होगा! मगर इसमे मज़ा भी भरपूर है! बोलो करोगी?
वो बोली- ट्राई करके देखते हैं! अगर दर्द हुआ तो रहनें देंगे!
मैंनें कहा- हाँ! अगर दर्द हुआ तो रोज़ थोड़ी थोड़ी प्रेक्टिस करते रहेंगे और एक दिन सब कुछ बिल्कुल सेट हो जाएगा|

फिर मैंनें उसकी आँखों में देखा और पूछा- तो फिर शुरू करें?
वो हंस दी|
मैंनें कहा- मगर मुझे तुम्हारी एक और मदद भी चाहिए?
वो बोली- क्या?

मैंनें कहा- सबसे पहले मैं अपनी झांट साफ करवाना चाहता हूँ! मुझे ये बाल बिल्कुल पसंद नहीं हैं! खुद मैं कर नहीं सकता! और किसी से कह नहीं सकता! अगर तुम इतना कर दो मेरे लिए तो|

वो मान गई|

मैं उसे अपनें साथ बाथरूम में ले गया! पहले उसनें क्रीम लगा कर मेरे ही सेफ़्टी रेज़र से मेरी झांट बहुत अच्छी तरह साफ की! अब उसके नर्म नर्म हाथ मेरे लंड को छू रहे थे तो मेरा तो लंड तन गया|
मगर मैंनें खुद पर सब्र रखा! झांट साफ करवानें के बाद मैं नंगा ही बाहर आ गया! बेडरूम में आकर मैंनें कोमा से कहा- कोमा! आज अपनें पास बहुत अच्छा मौका है! तो सबसे पहले मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ! अपनें कपड़े उतारो बेटी! और मुझे नंगी होकर दिखाओ|

वो बोली- अंकल अब तो मुझे बेटी मत बुलाइये! अब तो हमारा रिश्ता कुछ और हो चुका है|
मैंनें कहा- नहीं बेटी! तुम नहीं जानती! देखो तुम हो तो मेरी बेटी जैसी ही! तुम्हें बेटी पुकारता हूँ! तो मन में एक अजीब सी हरकत होती है! तुम्हें बेटी पुकारना और तुमसे सेक्स की बातें करना! तुमसे सेक्स करना मन में एक खुशी! एक संतोष सा भर देता है! मुझे अच्छा लगता है तुम्हें अपनी बेटी बना के चोदना!

‘आपको नहीं लगता कि आपके दिमाग में फितूर है! या आपका दिमाग खराब है?’ वो बोली|
‘बिल्कुल है! मगर मुझे यही पसंद है! अगर तुम्हें बुरा न लगे तो!’ मैंनें कहा|
वो बोली- कोई बात नहीं! आप जो चाहे कह लो! मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता|
मैंनें कहा- तो कोमा बेटी! मुझे नंगी हो कर दिखाओ! और मेरे पास आ कर कपड़े उतरना|

वो बिल्कुल मेरे पास आ गई! पहले उसनें अपना टॉप उतारा! नीचे छोटा सा ब्रा पहना था! मैंनें अपनी कटी हुई बाजू से ही उसके छोटे छोटे चूचों को सहला कर देखा! फिर उसनें अपनी ब्रा भी उतार दी|
बहुत ही छोटे छोटे से उसके चूचे! मैंनें उसे अपनें और पास किया और उसका चूचे अपनें मुँह में लेकर चूसे| छोटे छोटे निप्पल! दाल के दानें जैसे! मैंनें उन पर काटा! तो कोमा के मुँह से सीसी की आवाज़ निकली! जब मैं उसके चूचे चूस रहा था तो वो एक माँ की तरह
मेरे सर को सहला रही थी|

थोड़ी देर चूसनें के बाद मैंनें छोड़ दिया तो उसनें अपनी स्लेक्स भी उतार दी! स्लेक्स के नीचे चड्डी थी|
मैंनें कहा- चड्डी भी उतार दो!
उसनें वो भी उतार दी|

पतली पतली टाँगें! छोटी सी कमर! छोटे छोटे बूब्स! मतलब यह कि सेक्सी कहनें के लिए उसके पास कुछ भी नहीं था! अगर कुछ था तो बस इतना के उसके एक चूत लगी थी! जिसे मैं अपनें लंड से चोद सकता था|
मैंनें पूछा- कोमा तुम्हारी उम्र कितनी है?
वो बोली- 23 साल!

मैंनें कहा- मगर 23 साल के हिसाब से तो तुम बहुत छोटी दिखती हो! आजकल तो 14-15 साल की लड़की तुमसे ज़्यादा भरी होती है! कुछ खाया पिया करो|
वो बोली- अंकल खाती तो बहुत हूँ! पर लगता ही नहीं क्या करूँ|
मैंनें उसे अपनी गोद में बैठा लिया! उसनें मेरे लंड पकड़ लिया और मैं फिर से उसके चूचे चूसनें लगा! कभी गर्दन! कंधों को चूम लेता|
फिर वो पीछे को लेट गई और मेरी तरफ देखनें लगी! मैं भी उसके ऊपर लेट गया! मगर मेरे वज़न नें तो उसकी सांस ही रोक दी|
मैंनें कहा- तुम ही मेरे ऊपर आ जाओ और खुद कमांड संभालो|
वो आकर मेरी छाती पे बैठ गई! मैंनें कहा- बेटी सबसे पहले मुझे अपनी चूत चटवाओ! तुम्हारी चूत का पानी मुझे बहुत टेस्टी लगता है! अपनें हाथ की उँगलियों से अपनी चूत के दोनों होंठ खोलो और चूत के अंदर से गुलाबी माल चटवाओ|

उसनें वैसा ही किया! चूत खोल कर अंदर का गुलाबी हिस्सा मेरे मुँह से लगवाया! मैंनें अपनी जीभ जितनी अंदर तक डाल सकता था! डाल कर उसकी चूत चाटी|
जब उसको भी मज़ा आनें लगा तो वो और आगे को खिसकनें लगी और धीरे धीरे उसनें अपनें चूतड़ भी मेरे मुँह पर रख दिये! और काम में अंधा हुआ मैं उसकी गाँड तक चाट गया|

जब उसको ज़्यादा मज़ा आया तो वो उल्टी हो कर मेरे ऊपर लेट गई और फिर से मेरे लंड से खेलते खेलते उसको चूसनें लगी|

सच में अधेड़ उम्र में कच्ची कुँवारी कन्या मिल जाए तो मर्द अपनें होश खो बैठता है|
मेरा हाल भी ऐसा ही था|

वो अपनी कमर हिला हिला कर अपनी चूत और गाँड मेरे मुँह पर रगड़ रही थी और मैं! बड़े प्यार से सब कुछ ऐसे चाट रहा था! जैसे मेरे लिए यह सबसे स्वादिष्ट मिठाई हो|
काफी खेलनें के बाद मैंनें कहा- कोमा! बेटी! अब अपनें अंकल का लंड अपनी चूत में लेकर देखो|

मेरे कहनें पर वो उठी और मेरे लंड के ऊपर बैठ गई! उसके थूक से मेरा लंड भीगा था! और मेरे थूक से उसकी चूत|
उसनें मेरा लंड अपना हाथ में पकड़ा और अपनी चूत पर रख कर अंदर लेनें की कोशिश करनें लगी! मगर अनुभव न होनें की वजह से हर बार मेरा लंड बाहर को फिसल जाता|

जब 4-5 बार ऐसा हुआ तो मैंनें कहा- ऐसे नहीं होगा! तुम उस दराज़ से क्रीम निकाल कर लाओ|
वो उठ कर क्रीम ले आई|
फिर मेरे कहनें पर उसनें काफी सारी क्रीम मेरे लंड पे और अपनी चूत पे लगा ली| अब मैंनें सोचा के कमांड तो मुझे ही संभालनी पड़ेगी|
मैंने उसे नीचे लेटाया और खुद उसकी टाँगों को चौड़ा करके बीच में आ गया और उसे कहा- कोमा, मेरी बच्ची, अपने अंकल का लौड़ा अपनी चूत पे रखो।
उसने वैसा ही किया और जब मैंने ज़ोर लगाया तो क्रीम की चिकनाहट की वजह से मेरा लौड़ा पिचक कर करके उसकी कुँवारी चूत में घुस गया।

कोमा तो दर्द से बिलबिला उठी, और जैसे ही पीछे को हटी, मेरा लंड उसकी चूत से निकल गया।
मैंने कहा- अरे, पीछे कहाँ जा रही हो, हिलो मत, लेटी रहो और इसे अंदर लेने की कोशिश करो, ऐसे करोगी तो दर्द भी ज़्यादा होगा, और काम भी नहीं हो पाएगा।
मुझे बड़ा महसूस हुआ कि आज अगर मेरे दोनों हाथ होते, तो इस लड़की को मैं हिलने भी नहीं देता।
चलो मेरे कहने पे वो फिर से मेरे नीचे आ गई ‘आराम से अंकल, दर्द होता है!’ उसने कहा।

मैंने फिर से आराम आराम से करते हुये, अपने लंड का टोपा उसकी चूत में घुसा दिया, उसे दर्द हो रहा था, मगर वो बर्दाश्त कर रही थी।
मैं बहुत आराम आराम से अपना लंड धीरे धीरे करते हुये, उसकी चूत में घुसता जा रहा था, और इसी तरह मैंने अपना आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत में डाल दिया।

इतना बहुत था, मैंने उसके दर्द का ख्याल रखते हुये उसे धीरे धीरे चोदना शुरू किया।
बेशक आधे लंड से मुझे चुदाई का कोई ज़्यादा मज़ा नहीं आ रहा था, मगर उसके लिए इतना ही बहुत था, जब पिचक पिचक की आवाज़ करते हुये मेरा आधा लंड उसकी चूत में आराम से आने जाने लगा तो मैंने थोड़ा और ज़ोर लगा कर और लंड अंदर पेलना शुरू किया।

मैं देख रहा था कि लड़की को दर्द हो रहा था, मगर उसने एक बार भी नहीं कहा कि अंकल रहने दो, और देखते देखते मेरा सारा लंड उसकी चूत में उतर गया।
एक 23 साल की लड़की, जिसने पहले कभी लंड नहीं लिया था, एक 57 साल के मर्द का 6 इंच का लंड पूरा अपनी चूत में ले चुकी थी, और उसके चेहरे पे दर्द के भाव कम होते जा रहे थे।

जैसे जैसे मैं उसे चोद रहा था, वैसे वैसे उसका उन्माद, उसका आनन्द बढ़ता जा रहा था। उसने मेरी कमर पकड़ ली और मुझे अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया- और अंकल, और ज़ोर से करो, ज़ोर से मारो, और ज़ोर से!
कहते हुये वो मुझमें और जोश भरती जा रही थी।
मैंने भी अपनी पूरी ताकत से अपनी कमर चलाई, और पूरा दम लगा कर उसको पेला।

और फिर मैं झड़ा, और मेरी मर्दानगी का सारा रस उसकी चूत में भर गया।
मैं कोमा की बगल में लेट गया।

कोमा उठी और उसने मेरा मुँह चूम लिया।
‘क्या हुआ?’ मैंने पूछा।
‘सच में अंकल, बहुत मज़ा आया। मुझे नहीं पता था कि सेक्स में इतना मज़ा आता है!’ वो बोली।
‘मगर तुम्हें तो दर्द हो रहा था!’ मैंने पूछा।
‘हाँ हो रहा था, मगर थोड़ी देर बाद उस दर्द में भी मज़ा आने लगा।’ वो हंस कर बोली।

वो उठी और बाथरूम में चली गई, मैं भी चला गया, हम दोनों ने खुद को फ्रेश किया, कपड़े पहने, रूम सेट किया।
जब वो जाने लगी तो मैंने पूछा- कोमा बेटी, अब कब?
वो बोली- अंकल, मैं तो रोज़ आती हूँ, जब आप चाहो तब!
वो मुस्कुराई और दरवाजा खोल कर बाहर चली गई।

Antarvasna

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