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“सर ने मेरी चुत का भोसड़ा बनाया”

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मै दिल्ली की रहनें वाली हूँ| मै काफी सेक्सी और मस्त मौला लड़की हूँ| मेरा बदन कमाल का है मेरे मम्मे 32साइज़ के है मेरे मम्मे खूब बड़े बड़े है मेरे बाल भी बहुत काले लम्बे और घनें है जब मै रोड से निकलती हूँ| तो लडके मुझे देखकर सीटी मारते है मेरी कॉलोनी मे हर जवान लड़का मुझको चोदना चाहता है तो मै आपको अपनी स्टोरी सुनाती हूँ|
मैनें बी कॉम फर्स्ट इयर मे एड्मीसन ले लिया था मेरे सारे टीचर्स बहुत बढ़िया थे मैनें फर्स्ट इयर बड़ी लगन से पढ़ा मैनें कभी क्लास भी बंक नही की पर फिर भी फ्रेंड्स मेरी फर्स्ट क्लास नही आई मै बड़ी जोर जोर से रोनें लगी| मुकेश सर नें मुझको देखा तो बोले मेरे केबिन मे चलो मै उसके केबिन मे चली गयी मुकेश सर बहुत अच्छे थे वो सभी बच्चों को बड़ी मेहनत से पढ़ाते थे कालेज मे हर कोई उनकी बड़ी तारीफ करते था देखो ज़न्नत|

अभी तुम्हारे पास सेकंड इयर और थर्ड इयर दो साल है एक कम करो.. तुम हर शाम को ७ बजे मेरे घर आ जाया करो.. मै तुमको इतनी मेहनत से पढ़ाऊँगा की तुम्हारी फर्स्ट डिवीज़न क्लियर हो जाएगी वो बोले और मेरे सर पर प्यार से हाथ फेर दिया सर मै आज से ही आपके घर आना सुरु कर देती हूँ| आप कितनी फ़ीस लेंगे मैनें पूछा अरे ज़न्नत.. पहले तुम आओ तो सही मुकेश सर बोले फ्रेंड्स.. मैनें सुना था की जो जो लडकी उनसे ट्यूशन पढ़ती थी सब टॉप करती थी इसलिए मै भी बहुत खुस हो गयी थी|
फ्रेंड्स.. मैनें उसी शाम से मुकेश सर से ट्यूशन पढना सुरु कर दिया वो मुझको बड़ी महनत से पढ़ानें लगे कोई फ़ीस की बात भी नही की एक दिन मुझको पेशाब लगी| सर टॉयलेट जाना है बाथरूम किधर है?? मैनें पूछा उधर आगे से बायीं तरफ मुकेश सर बोले मै अंदर बाथरूम मे आ गये मैनें अपनी सलवार खोली चड्ढी उतारी और छुल् छुल मूतनें लगी||

जब मै वापिस गयी तो पेशाब की 2-4 बुँदे मेरी सलवार मे लगी| थी सायद मुकेश सर नें वो भीगी जगह देख ली थी थोडा मुस्कुरा दिए मै भी थोडा हस दी हम दोनों गुरु चेली फिर से पढनें लगे फ्रेंड्स जब पढ़ते पढ़ते बोर हो गए तो गुरु जी का चाय पीनें का मन हुआ ज़न्नत ! अगर तुम्हारे हाथों की गर्म गर्म चाय मिल जाए तो मजा आ जाए तुम मुझको हर रोज एक प्याला चाय पिला दिया करो.. समझ लो यही मेरी फ़ीस होगी|
जैसा आप कहे सर मैनें कहा मै उनके किचेन मे गयी और चाय बनानें लगी| मै अपनें और उनके लिए चाय बना लायी हम फिर से पढनें लगे एक महीना गुजर गया उन्होंनें कोई पैसा नही लिया बस मै हर रोज उनके लिए चाय बना देती थी एक दिन बड़ी गर्मी पड़ रही थी पढाई करनें का मेरा जरा भी मन नही था सर का भी मन नही था ज़न्नत तुम साथ चलो तो आज कोई फिल्म देख ली जाए कितनें दिन हो गए कोई पिक्चर नही देखी है|

मै मान गयी सर और मै उनकी कार मे पिक्चर देखनें गये सर नें बालकनी की टिकट ली ये कोई हॉरर पिक्चर थी डर के मारे मैनें मुकेश सर का हाथ पकड़ लिया फिर एक सीन मे बड़ा डेंजर भूत था मै सर के सीनें से चिपक गयी फ्रेंड्स इस तरह हम आये दिन पिक्चर.. मॉल.. मेले.. नुमाईस जानें लगे धीरे धीरे मुझको भी अच्छा लगनें लगा|
एक दिन एक मॉल मे मै मुकेश सर के साथ घूम रही थी उन्होंनें मेरा हाथ चूम लिया मुझको चुता नही लगा मुझको अच्छा लगा फिर इसी तरह कभी वो मेरा हाथ चूम लेते कभी मै उनका हाथ चूम लेती धीरे धीरे मुझको उसनें प्यार हो गया एक दिन जब शाम को मै पढनें गयी तो उन्होंनें मुझको पकड़ लिया ज़न्नत !

मै तुमसे प्यार करनें लगा हूँ| अब मै तुम्हारे बिना नही रह सकता सर बोले सर मै भी आपसे प्यार करनें लगी| हूँ| मैनें भी कहा हम दोनों एक दुसरे के करीब आ गए सर नें मुझको गले से लगा लिया मैनें भी उनको गले लगा लिया हम दोनों उनके बेडरूम मे चले गये सर नें मुझको बिस्तर पर लिटा दिया खुद भी मेरे पास आ गये अब हम दोनों एक दुसरे से पूरी तरह लिपटे थे वो मेरे रसीले मधुर होंठ पीनें लगे| फ्रेंड्स आप ये स्टोरी रियललकहनी|कॉम पर पढ़ रहे है|

मैनें भी उसके होंठ पीनें लगी| मेरी सांसों की सुगंध उनके बदन मे समा गयी धीरे से सर नें अपनी डेनिम जींस की बेल्ट खोल दी उसका लंड बाहर निकल आया पता नही फ्रेंड्स मै कब उनके लंड से खेलनें लगी| जब मुझको होश आया तब मै मुकेश सर के लंड को चूस रही थी मै रंडियों की तरह बर्ताव कर रही थी|

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मै पढ़ते पढ़ते ३० साल की हो गयी थी मगर कभी लंड के दर्शन नही किये थे आज मै पहली बार किसी मर्द का जवान बड़ा सा मोम्बत्ते जैसा लंड हाथ मे ली हुई थी आज मेरे हाथ मे एक अजूबा लग गया था सायद अंदर ही अंदर मै लंड की प्यासी थी मेरी अन्तर्वासना आज भड़क गयी थी सायद लोक लाज के डर से मैनें आज तक किसी लडके से नही कहा की मुझको एक बार चोद दो|
जब मुझको होश आया तो मैनें सर का लंड चूसनें मे मस्त थी मै जल्दी जल्दी अपनें हाथों से उनके लंड पकड़ कर लंड उपर नीचे रगड़ रही थी खूब फेट रही थी फिर मुह मे लेकर चूस रही थी उधर सर नें मेरी सलवार खोल दी थी मेरी पंटी के अंदर हाथ डाल के चला रहे थे धीरे धीरे हम दोनों 69 की पोजीशन मे आ गये|

हम दोनों अब नंगे हो गये थे मुकेश सर मस्ती से मेरी चुत पी रहे थे और मै उनका लंड पी रही थी सर को जब मेरी चूत जब कुछ सुखी लगी| तो उन्होंनें मेरी चुत मे थोडा थूक दिया अब मेरी चुत गीली हो गयी और वो मजे से पीनें लगे अब तो जैसे मै भी जोश मे आ गयी मैनें भी उनके लंड पर खूब सारा थूक दिया अब उनका लंड चिकना हो गया मै मजे से रंडियों जैसे हुनर के साथ उनका लंड चूसनें लगी||
मुकेश सर को बड़ी जोर की चुदास चढ़ गयी उन्होंनें मुजको 2-4 थप्पड़ जड दिए चल छिनाल! मुह खोल वो बोले मेरे मुह मे उन्होंनें अपना लंड पेल दिया मै साँस नही ले पा रही थी सर मेरे मुह चोदनें लगे हप्प हप्प करके वो मेरे छोटे से मुह को चुत का छेद समझ के चोदनें लगे मेरी चूत तो बिलकुल गीली हो गयी फ्रेंड्स मेरी चूत बहनें लगी| फिर सर नें अपना बड़ा सा लंड निकाला और मेरे मुह पर थपकी देनें लगे अपनें हट्टे कट्टे लंड से थपकी देनें लगे मै तो निहाल हो गयी मुकेश मेरे मुह को अपनें लंड से खूब जोर जोर से मारनें लगे|
फिर उन्होंनें मेरे मम्मो को भी अपनें लंड से खूब थपकी दी फिर से एक बार मेरे मुह को चुत समझ के वो चोदनें लगे मुझको इतना अच्छा लगा की मेरी चुत बिलकुल गीली गीली हो गयी फ्रेंड्स सर नें 2- 4 तमाचे मुझको और जड़ दिये अब उन्होंनें मेरी चूत पर फोकस किया मेरी चुत खूब बड़ी सी फूली हुई थी|

मैनें कुछ दिन पहले ही झांटे बनायीं थी सर नें अब मुझको पूरी तरह नंगा कर दिया था मेरी चुत बिलकुल हीरो हौंडा जैसी खुब्सूरत और शानदार थी सर मेरी चुत को गहरी नजर नें देखनें लगे जैसे उसको खा जाएँगे एक सेकंड को तो मै दर गयी मैनें डर से आँखे बंद कर ली सर मेरी चुत को छूनें लगे मेरी चुत मेरे गरम जिस्म का सबसे सन्वेदनशील हिस्सा थी|

आज तक मैनें किसी लडके को अपनी चुत तक नही पहुचनें दिया था इसलिए मुकेश सर ही वो किस्मतवाले मर्द थे जो मेरे सबसे सन्वेदनशील अंग तक पहुचे थे मेरा दिल जोर से धक् धक् करनें लगा पता नही सर मेरी चुत के साथ कैसा व्यवहार करे सर नें एक बार मेरी शानदार बड़ी सी चूत को पप्पी ले ली वो मस्त हो गये|
मेरी चुत की फाकों और दरारों को अपनी उँगलियों से छूकर देखनें लगे..मेरी चुत काली चमकदार थी और बड़ी शानदार थी मुकेश सर तो जैसे मेरी चूत से बातें ही करनें लगे उन्होंनें २ ४ बार मेरी चूत को पप्पी दे दी इस चूत के लिए कितना झगडा लड़ाई होता है कितनें क़त्ल हो जाते है इसलिए मै बार बार कह रही थी की सर बहुत किस्मत वाले थे जब सर नें काफी देर थक मेरी चुत के दीदार कर लिए तो अब वो उसको बड़े प्यार से चाटनें लगे मै सिसकियाँ लेनें लगी||

लडकियों के इस छेद के लिए सारी दुनिया मरती है सर भी मरे जा रहे थे सर नें अपना पहलवान लंड मेरी चुत के दरवाजे पर रखा मेरी दिल धक् धक् करनें लगा डर से मैनें आँखे बंद कर ली सर नें सुरुवाती धक्का मारा पर लंड फिसल के उपर भाग गया|
मैनें आँखे बंद की कर रखी थी क्यूंकि आजतक मैनें किसी से नही चुदवाया था सर नें एक बार और कोसिस की इस बार भी लंड दाए बाए फिसल गया सर नें अबकी बार जादा फोकस किया उसनें मेरे भोसड़े पर ढेर सारा थूक दिया अब मेरी चुत गीली हो गयी सर नें अबकी बार पुरे फोकस से धक्का मारा लंड किसी बर्फ तोड़नें वाली मशीन की तरह मेरी चुत मे अंदर घुस गया मेरी तो फ्रेंड्स गांड ही फट गयी लगा की किसी नें मुझको चाक़ू मार दिया हो मुजको बहुत दर्द हुआ सर नें निचे देखा मेरी चुत से खून बह रहा था|
मै तड़प रही थी सर नें एक धक्का और मारा लंड सीधा मेरी चुत मे गच नें उतर गया मैनें सर को हटानें लगी| ज़न्नत बेबी! बस थोडा बर्दास्त करो.. अभी तुम भी मजा पाओगी सर बोले मेरे तो पसीना छुट गया मेरे सर मे भी जोर का दर्द होनें लगा था चुत मे तो पहले ही था मुकेश सर अब मुजको बड़े प्यार से धीरे धीरे चोदनें लगे वो भी चाहते थे की मुजको कम से कम दर्द दो मैनें किसी तरह बर्दास्त किया सर मुजको होले होले चोदनें लगे कुछ देर बाद दर्द कम हो गया और मुजको मजा मिलनें लगा सर नें लंड निकाल लिया और मेरी चुत पीनें लगे अब सब कुछ नार्मल हो गया था|
जब दोबारा उन्होंनें मेरे अंदर अपना लंड डाला तो मुझको दर्द नही हुआ अब मुझे मजा आनें लगा था अब मुकेश सर मुजको जल्दी जल्दी पेलनें लगे तो मेरी कमर भी उपर उठनें लगी| मैनें अपनी टाँगे और फैला ली जिससे सर मेरे अंदर पूरा अंदर तक गुस सके मै कामयाब रही सर अब जोर जोर से गहरे फटके मरनें लगे| फ्रेंड्स आप ये स्टोरी रियललकहनी|कॉम पर पढ़ रहे है|

अब तो जैसे मै चरम सुख मे डूब गयी पर ये तो अभी सुरवात थी जब १ घंटा गुजर गया तो मैनें ही खुद चिल्लानें लगी| सर चोद लीजिये आज मुजको आप मुझको कितनी मेहनत से पढ़ाते है मुझसे कोई फ़ीस भी नहीं लेते है इसलिए सर मुझपर आपका पूरा हक बनता है आज चोद लीजिये जी भरके मुझको मैनें जोर जोर से गरम सिस्कारियां भरके कहनें लगी||

मुकेश सर मुझको धिन्चक धिन्चक राजी खुसी से पेलनें लगे मैनें अपनी दोनों टाँगे उनकी पीठ मे लपेट दी उनका जोश दोगुना बढ़ गया हच हच वो मुजको चोदनें लगे उस दिन फ्रेंड्स मै खूब चूदी अपनें प्यारे मुकेश सर से उसके बाद तो जैसे चुदवानें की मुझको लत ही लग गयी थी मुझको अब मै शाम ५ बजे ही आ जाती थी और पहले २ ४ राउंड चुदाई हो जाती थी फिर मै पढ़ती थी|

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