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“सफर में मामी की चुदाई की मैंने”

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मेरा नाम अजयपाल है! मैं 20 साल का हूँ! स्टूडेंट हूँ! मैं इंदौर में अपनें मामा के घर रहता हूँ|

मेरे घर में एक पूजा थी! तो मुझे पूजा में शामिल होनें के लिए अपनें घर जबलपुर जाना था| दिन में मॉम का फोन आ गया था कि मामी जी को भी ले आना|

मैंनें मामाजी को बोला- मॉम बोल रही हैं कि मामी जी जी को साथ ले आना|

मामा जी बोले- ठीक है 2 दिन में वापिस आ जाना!

मामा जी की शादी अभी 3 महीनें पहले ही हुई थी! मामाजी की उम्र 26 के करीब थी मैं मामाजी के साथ ही रहता था और मामी जी मेरी अच्छी दोस्त बन गई थीं| लेकिन मैंनें उन्हें कभी बुरी नज़र से नहीं देखा था|

हम बस स्टैंड पहुँचे! मामाजी हम दोनों को छोड़नें आए थे| मामाजी नें एक डबल बर्थ बुक करा दी और हम बस में बैठ गए| बस 7:30 पर इंदौर से निकल गई और सुबह 7 बजे जबलपुर पहुँचना था|

रास्ते भर मैं और मामी जी बात करते रहे मामी जी नें सफ़ेद रंग का सूट पहन रखा था और अभी नई शादी हुई थी तो मामी जी एकदम मस्त लग रही थीं| उनके गाल भरे-भरे थे और बहुत खूबसूरत थीं| उन्हें देख कर ऐसा लगता था कि मानो कोई परी हों| हम बात करते रहे! इस वक्त गर्मी का मौसम था! तो गर्मी लग रही थी| मामी जी बोलीं- अजयपाल गर्मी बहुत है! एक काम करो! तुम थोड़ी देर के लिए नीचे उतर जाओ! मैं गाउन पहन लेती हूँ!

मैं नीचे उतर गया और मामी जी नें थोड़ी देर बाद आवाज दी! तो फिर ऊपर चला गया| मामी जी को देखकर मैं परेशान हो गया! वो क्रीम रंग की गाउन पहनें हुए थीं क्योंकि गाउन बहुत पतली था और बदन साफ-साफ दिख रहा था| मामी जी यही गाउन घर पर भी पहनती थीं लेकिन अन्दर ब्लाउज पहनती थीं! मामी जी नें अन्दर ब्रा भी नहीं पहनी थी! बस चुनरी ओढ़ रखी थी! गाउन में ब्रा भी नहीं थी! तो मामी जी के मम्मे साफ दिख रहे थे! मैं कुछ नहीं बोला|

हम बात करते रहे! मामी जी लेट गईं और मैं फोन में ब्लू-फिल्म देखनें लगा! क्योंकि मामी जी सो चुकी थीं|

अब मामी जी की चुन्नी भी खिसक गई! पूरा बदन दिख रहा था! मामी जी की पैन्टी पूरी साफ-साफ दिख रही थी! मम्मे कुछ ज़्यादा बड़े नहीं थे! मुश्किल से एक सेब के बराबर होंगे तो लटक नहीं रहे थे! एकदम उठे हुए थे| उनके मम्मों की नोक साफ गाउन के ऊपर से दिख रही थी|

मामी जी सो रही थीं! उन्हें देख-देख कर मेरा दिमाग खराब हो रहा था और मैं ब्लू-फिल्म भी देख रहा था| मैंनें मोबाइल बंद कर दिया और लेट गया| मामी जी मेरी तरफ करवट लिए हुई थीं तो मुझे उनके मम्मे गले के नीचे से साफ दिख रहे थे|

अब मैंनें मामी जी को चोदनें का प्लान बना लिया! लेकिन मन में डर था! क्योंकि मैंनें कभी ऐसा नहीं सोचा था| मेरा लौड़ा खड़ा था! अब मैंनें अपना पैन्ट उतारकर साइड में रख दिया और अंडरवियर में ही लेट गया और सो गया| मुझे नींद नहीं आ रही थी! क्योंकि मामी जी की लाल रंग की पैन्टी दिख रही थी|

अब मैंनें सोचा कि कुछ करते हैं| मैंनें धीरे से मामी जी के ऊपर हाथ रखा! तो मामी जी नें करवट लेकर दूसरी तरफ मुँह कर लिया| मैं तो डर ही गया कि मामी जी शायद जान चुकी हैं|

मैं थोड़ी देर लेट गया और नींद तो आ नहीं रही थी सो मैंनें धीरे से अपनें पैर से मामी जी के गाउन को ऊपर करनें लगा| मेरी थोड़ी सी कोशिश से ही गाउन मामी जी के घुटनों तक आ गया और मैं उनसे चिपक कर लेट गया|

मामी जी नें कुछ भी ऐतराज नहीं किया! तो मैंनें मामी जी के गाउन को हाथ से कमर के ऊपर तक ले आया| मामी जी अब भी कुछ नहीं बोलीं| अब मामी जी की गोरी-गोरी गांड उनकी लाल रंग की पैन्टी में से साफ दिख रही थी|
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अब मेरा दिमाग खराब हो गया| मैंनें अपना लौड़ा निकाला और मामी जी की पैन्टी में लगा कर सोनें का नाटक करनें लगा| बस झटके से चल रही थी! तो दोनों हिल रहे थे| मामी जी को भी मेरा लौड़ा महसूस होनें लगा! पर वो कुछ बोल नहीं रही थीं|
रात हो चुकी थी! सब लोग सो रहे थे| तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंनें मामी जी की पैन्टी धीरे से नीची को खिसका दी और घुटनों तक कर दी|

मामी जी खुद शुरु हो गई।

इतनें में मामी जी उठ गईं! मेरा तो दम निकल गया| मैं सोनें का नाटक करनें लगा| मामी जी नें देखा कि मेरा लौड़ा खड़ा है और उनकी पैन्टी भी नीचे है! लेकिन वो फिर से सो गईं|

अब मुझे डर लग रहा था लेकिन लौड़ा खड़ा था| फिर मेरी हिम्मत ही नहीं हुई कि मामी जी को हाथ लगाऊँ| मैं वैसे ही लेटा रहा! करीब 10 मिनट बाद मामी जी नें मेरी तरफ करवट ले ली और मेरा लौड़ा हाथ में पकड़ लिया|

मेरी जान निकल गई! मामी जी भी चुदना चाहती थीं| मेरा लौड़ा 6 इंच का था! लेकिन मोटा बहुत था! जो मामी जी के हाथ में नहीं बन रहा था|
मामी जी धीरे से बोलीं- अजयपाल! इतना मोटा लौड़ा मैंनें पहली बार देखा है!

मैं कुछ नहीं बोला और लेटा रहा| मामी जी मेरे लौड़ा को सहलानें लगीं| अब मैं पूरे जोश में आ गया था लेकिन सकुचा रहा था| मामी जी नें मुँह में लौड़ा लेनें की कोशिश की लेकिन मोटा होनें के कारण उनके मुँह में नहीं जा रहा था|

मामी जी मेरे ऊपर आकर बैठ गईं और बोलीं- अजयपाल अब नाटक नहीं करो! मुझे तुम्हारा लौड़ा बहुत अच्छा लगा| तुम मेरा साथ दो!

मामी जी के बोलनें पर मैं जाग गया मामी जी मेरे ऊपर चढ़ी थीं! लेकिन लौड़ा चूत में जा ही नहीं रहा था|

करीब 3-4 मिनट हो गए! लंड मामी जी की चूत में नहीं गया! फिर मामी जी नें अपनें मुँह से थूक निकाल कर मेरे लौड़ा पर मला और जब अब उन्होंनें लंड पर बैठ कर दबाव बनाया तो लौड़ा एकदम से अन्दर चला गया| मामी जी चिल्लाईं और झट से उन्होंनें चूत से लंड को बाहर निकाल दिया|

मैंनें बोला- क्या हुआ?

तो मामी जी नें बोला- मुझसे सहन नहीं होगा तुम्हारा लौड़ा बहुत मोटा है|

लेकिन मेरा लौड़ा अभी तना हुआ था! मैंनें मामी जी को बोला- तुम नीचे आ जाओ|

फिर मामी जी मेरे लंड के नीचे आ गईं और मैंनें धीरे-धीरे मामी जी की चूत में लौड़ा डाल दिया|

मामी जी को दिक्कत हो रही थी! इसलिए मैं धीरे-धीरे हिल रहा था| थोड़ी देर बाद मामी जी पानी-पानी हो गईं और अब लौड़ा आराम से मामी जी की चूत में शंटिंग कर रहा था|

करीब 7-8 मिनट बाद मैंनें मामी जी की चूत में अपना माल झड़ा दिया| मामी जी को भी मज़ा आ गया और बोलीं- तुम तो लड़कियों को मार डालोगे और कोई भी लड़की तुम्हारा लौड़ा देखकर आराम से चुदवानें को तैयार हो जाएगी|

बस के सफ़र के बाद हम घर पहुँच गए और दूसरे दिन फिर बस से ही उसी तरह आए और इस बार मैं मामी जी को 3 बार चोदा|

इसके बाद तो जब भी मामा जी घर पर नहीं होते! तो मामी जी को खूब चोदता था|

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