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“ये तुम्हारे जीजू हैं खूब चुदाई करवावो इनसे”

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मैं यानि सोलन, नंदिता और प्रिया पक्की सहेलियां हैं। हम तीनों की कोई बात आपस में किसी से छुपी नही रहती थी, हम तीनों में सबसे सुंदर मैं ही हूँ पर नंदिता और प्रिया भी दिखनें में सुंदर ही कहलाती हैं। नंदिता की शादी हुए दो साल हो चुके हैं, उसका एक बेबी बॉय भी है, नंदिता का पति एक तराशे हुए बदन का मालिक है, वो भी हमसे बहुत हिलमिल गया है, अक्सर ही हम लोग एक दूसरे के यहाँ पार्टी रखते हैं और साथ साथ हँसी मजाक करते हैं।
मेरी इच्छा भी अब होनें लगी कि मैं भी अंकित के और करीब आऊँ, मुझे वो अच्छा भी लगता है।

मैंनें अपनी ओर देखा, मेरा जिस्म भी सेक्सी है, मेरे स्तनों का उभार भी सुंदर है, गोलाई लिए सीधे तनें हुए, किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं, मेरी कमर पतली है, मेरे चूतड़ थोड़े से भारी हैं, दोनों चूतड़ों की फांकें गोल और कसी हुई हैं, चलते समय मेरी चूतड़ों की दोनों गोलाईयाँ ऊपर नीचे लहराती हैं. अंकित मुझे चोरी चोरी तिरछी निगाहों से देखते रहते थे। मैं उन के करीब रहनें की कोशिश करनें लगी. मैं नंदिता के यहाँ अधिक जानें लगी. अब अंकित भी मेरे से सेक्सी मजाक करनें लगा था।
“हाय बिमलेश… नंदिता कहाँ है..”
“किचेन में है… अभी आ जायेगी बैठो..”
अंकित सफ़ेद पजामे और बनियान में था. मुझे देखते ही पता चल गया कि उसनें अन्दर अंडरवियर नहीं पहना है. उसके सोये हुए लंड तक का आकार ऊपर से ही नजर आ रहा था।
मैं जानबूझ के सोफे पर ऐसे झुक कर बैठी कि उसे मेरे बूब्स आसानी से दिख जाएँ। उसनें भी मेरे बूब्स को देखनें का लालच नहीं छोड़ा। मैंनें उसे देखते हुए पकड़ लिया, मैं मुस्कराई, वो शरमा गया…
“जीजू क्या देख रहे थे… ”
“कुछ नहीं… बस ..”
“शरारती हो… है ना ..”
अंकित का लण्ड अब धीरे धीरे खड़ा होनें लगा था, मुझे देख कर वो उत्तेजित होनें लगा था।
“कौन शरारत कर रहा है… ” नंदिता कमरे में आते हुए बोली।
“जीजू… मजाक अच्छी मजाक करते हैं ..” मैंनें बात बदल दी।
” लो चाय हाजिर है… ”
“नंदिता… जीजू से कहो ना कभी कभी तो हम पर भी लाइन मार लिया करें ..”
“अरे तुम ही लाइन मार लो ना… जीजू तो तुम्हारे ही है ना…”
“क्यों जीजू… क्या इरादा है…”
“अंकित… बताओ भी तो… ”
“अंकित… बता भी दो… ”
“अरे मौका तो मिलनें दो… फिर इसका चुम्मा भी लूँगा… और ..और ..”
“और क्या क्या करोगे… अब थोडी शर्म करो… तुम्हारी बीवी पास खड़ी है… ”
“बीवी की पूरी परमिशन है… सोलन ये कह रहा है तो चुपके से दे ही देना..”
नंदिता मेरे पास आयी और मेरे कान में धीरे से कहा – “जरा ध्यान दो… तुम्हारे जीजू का खड़ा हो रहा है ..”
मेरी नजर तो पहले ही उसके लंड पर थी, यह सुनकर मैं शरमा गई, मैं धीरे से बोली- “धत्त… ”
“क्या हुआ. .हमें भी तो बताओ..”
उसकी बात सुनकर हम सभी हसनें लगे पर जीजू का मजाक मुझे अच्छा लगा…
आज रात को प्रिया की शादी की होटल में पार्टी थी. हम सभी एक कार में होटल आ गए थे। वहां प्रिया को उसकी सहेलियों नें घेर रखा था. नंदिता प्रिया को सजानें सँवारनें लगी. तभी नंदिता बोली– तुम दोनों यहाँ क्या करोगे, नीचे हॉल में पार्टी एन्जॉय करो..
मुझे तो मौका मिल गया, मैंनें आज पार्टी के लिए खास सेक्सी ड्रेस पहनी थी. ये ड्रेस उसे बहुत पसंद थी. ब्रा इस तरह से कसी थी कि मेरे बूब्स बाहर उभरे हुए नज़र आ रहे थे. टाइट जींस और टॉप पहना था. ताकि अंकित मेरे हुस्न का मजा ले सके. उसे आज पटाना भी था. नंदिता से मुझे हरी झंडी मिल ही चुकी थी.
हम दोनो नीचे हाल में आ गए। थोड़ी देर वहां कुछ खाया पिया और बातें करते रहे। मैं बार बार उसका हाथ पकड़ लेती थी। वो हाथ छुड़ाता भी नहीं था। फ़्लोर पर कुछ जोड़े डांस कर रहे थे।
अंकित बोला- “चलो सोलन ! डांस करते हैं… ”
“हां… चलो… ना… ”
हम दोनो डांस फ़्लोर पर आ गए। मैंनें उसकी कमर में हाथ डाला तो वो सिहर गया।
” जीजू… शरमा रहे हो… मेरी कमर में भी हाथ डालो… ”
उसनें मेरी कमर में हाथ डाल दिया और हम थिरकनें लगे। मैं जान बूझ कर अपनें बूब्स उसके सामनें उछाल रही थी। उसकी नज़रें मेरे बूब्स से हट नहीं रही थी। मुझे लगा कि मेरा जादू चल गया। मैंनें उससे टकराना शुरू कर दिया। कभी बूब्स टकरा देती तो कभी उससे चिपक जाती। अब अंकित भी समझनें लग गया था। वो भी मुझसे कुछ ज्यादा ही चिपकनें लग गया था, इतना कि उसके मोटे लण्ड की चुभन मैं कभी अपनें चूतड़ों पर महसूस करती तो कभी अपनी चूत के पास। मैं तो यही चाहती थी कि अंकित मुझसे और खुल जाए। कुछ ही देर में हम थक गए। डांस छोड़ कर हम गार्डन की तरफ़ चले गए। अंकित गार्डन में आकर हरी घास पर लेट गया। उसका लण्ड उभर कर दिखनें लगा।
मैं भी उसके पास ही बैठ गई। मैंनें उसका सर अपनी जांघों पर रख लिया और प्यार से उसके बालों में अपनी उंग्लियों से सहलानें लगी। वो एकटक मुझे निहार रहा था। मैंनें कहा-“क्या देख रहे हो जीजू… मुझे कभी देखा नहीं क्या?”
“हां.. पर ऐसी सोलन नहीं… ” वो मुस्कुरा उठा।
“..नहीं जीजू… तुम आज कुछ अलग लग रहे हो… ”
” तुम कितनी सुन्दर लग रही हो आज..”
“हाय जीजू… ऐसे मत बोलो ना..”
“सच कह रहा हूँ… तुम्हारा बदन भी आज सेक्सी लग रहा है… मुझसे अब सहा नहीं जा रहा है..”
“जीजू… हाय रे… फ़िर से कहो..” मैं खुशी से बेहाल हुई जा रही थी।
वो मेरी आंखों में झांकनें लगा। मैनें भी अपनें नयन उस से लड़ा दिये। आंखों ही आंखों में हम दोनो डूबनें लगे। मैं भी अनजानें में उसके ऊपर झुकती चली गयी. हमारे होंट जानें कब एक दूसरे से चिपक गए. मेरी साँसे गहरी हो चली थी. अंकित मेरे होटों को चूस रहा था. मैं भी अपनी जीभ उसके मुंह में डाल चुकी थी. मेरा हाथ अपनें आप ही उसके पेट पर से होता हुआ उसके लंड से टकरा गया. मैंनें पेंट के बाहर से ही उसे पकड़ लिया. वो सिहर उठा. उसका लंड उत्तेजित हो कर मोटा और लंबा हो गया. बहुत ही कड़क होकर बाहर जोर लगा रहा था. उसका हाथ मेरी चुन्ची पर पहुँच गया था. एक हाथ से उसनें मेरी चुन्ची दबा दी. मैं आनंद से निहाल हो गयी. ज्यादा खुशी इस बात की थी कि अब अंकित मुझे जरूर ही चोद कर रहेगा.
मैंनें कहा -“हाय जीजू… मेरी चुन्ची और मसल दो… मजा आ रहा है… ” कहते हुए मैंनें उसकी पेंट की जिप खोल दी और लंड को पकड़ कर सहलानें और हौले हौले उसे मसलनें लगी.
उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी. बोला -“थोड़ा जोर से पकड़ कर ऊपर नीचे करो… ”
“जीजू… कितना मोटा लंड है… हाय जीजू मुझे कब चोदोगे… ”
“आज ही रात को… नंदिता से पूछ कर… ”
“वो हाँ कह देगी ?…” मैंनें अनजान बनते हुए पूछा. अंकित मुझे देख कर मुस्कराया पर बोला कुछ नहीं.
“अब बस करो नहीं तो मेरा रस निकल जाएगा… ”
“नहीं राजा… थोड़ा और मसलनें दो ना… तुम भी चुचियां दबाओ ना… खींचो ना… ” मैं जोश में बोले जा रही थी।
पर अंकित उठ कर बैठ गया. मैं भी अपनें कपड़े ठीक करनें लगी।
हम दोनों को समय का पता ही नहीं चला. हॉल में आए तो महफिल रंग में थी. प्रिया और उसका हसबंड सामनें वाली सिंहासन पर बैठे थे. नंदिता हमें देखते हुए मुस्कराई. मैं और अंकित भी मुस्करा दिए.
“रात बहुत हो गयी है… अब चलना चाहिये… ” नंदिता बोली. प्रिया नें भी जानें को कह दिया.
हम चारों यानि अंकित, मैं, नंदिता और बेबी बाहर आकर कार में बैठ गए, अंकित गाड़ी चला रहा था, नंदिता नें पूछा- पार्टी एन्जॉय की या नहीं..?
“हाँ… पार्टी अच्छी थी…”
“क्या अच्छा था.. बताओ तो…?”
“जीजू… वो ही अच्छे लगे…”
“तो बाजी हाथ में आई या नहीं… या मैं कुछ करूँ?”
“तुम ही कुछ कर दो ना… मेरी तो चुदवानें कि बहुत इच्छा हो रही है !”
” हाँ मेरी भोली रानी… आपके चेहरे से सब पता चल रहा है… कि मेरी सोलन को किस चीज़ की जरूरत है ..” और हंस पड़ी।
“पर तुम्हारी सहमति तो चाहिए ना…”
“चलो आज घर चल के देखते हैं… आज मन भर लेना… ” नंदिता नें भी अब साफ़ कह दिया.
अंकित का घर आ चुका था. मेरा घर अभी दूर था. और नंदिता नें रुकनें को पहले ही कह दिया था.
हम सभी कमरे में गए. और बेबी को बेड पर सुला दिया. हमनें अपनें कपड़े बदले. मैंनें भी नंदिता का एक ढीला सा पजामा पहन लिया. अंकित भी पजामा पहन कर आ गया. पजामे में से उसका उत्तेजित लंड की उठान साफ़ दिख रही थी.
नंदिता नें भी भांप लिया कि मैं क्या देख रही हूँ. वो मुझे देख कर मुस्करा दी. नंदिता अपनी बेबी के साथ लेट गयी फिर अंकित भी लेट गया. मैं किनारे पर अंकित के साथ लेट गयी. कमरे में धीमी बत्ती जल रही थी. मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था. मुझे पता था आज मेरी चुदाई हो ही जायेगी।
मैंनें हिम्मत करके अंकित के पेट पर हाथ रख दिया. उसनें मेरी तरफ़ देखा. मैंनें हाथ बढा कर उसका लंड पकड़ लिया. वो अन्दर कुछ नहीं पहना था. उसके लंड की मोटाई से मैं सिहर उठी. मैं उसका लंड दबानें लगी. लंड और टन्ना नें लगा. मैंनें पजामे के अन्दर हाथ डाल दिया और उसके लंड के ऊपर की चमड़ी को ऊपर चढा दी. उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी. उसनें मेरे बूब पकड़ लिए और धीरे धीरे सहलानें लगा .मेरे टॉप को ऊँचा करके मेरी चूचियां दबानें लगा. मेरे मुंह से आह निकल गयी।
मैंनें उसका लंड पकड़े पकड़े ही उसकी तरफ़ पीठ कर ली. अंकित मेरी पीठ से चिपक गया. उसनें मेरा पजामा नीचे उतार दिया. मेरी गांड की दरारों में उसका नंगा लंड टकरा गया. मेरे जिस्म में सनसनी फैलनें लगी. फिर उसनें लंड को और चूतडों में गडा दिया. मेरी चूतड की फांकों को चीरता हुआ उसका लंड मेरी गांड के छेद से टकरा गया. मेरी चूतडों के बीच उसका मोटा लंड फंसा हुआ बहुत आनंद दे रहा था. मुझे उसका पूरा साइज़ और नंगा स्पर्श अच्छा लग रहा था. उसके हाथ मेरी टॉप में घुस पड़े और चुन्ची मसलनें लगे. उसके लंड नें जोर मारा तो मेरी गांड की छेद मे थोड़ा सा घुस गया. मैंनें अपनी टांग थोड़ी ऊँची कर ली. फिर तो लंड की सुपारी फक से गांड में घुस गयी. मेरे मुंह से आह निकल गयी. उसनें अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर दूसरे ही झटके में लंड अन्दर घुसता चला गया .. मैंनें अपना मुंह भींच लिया कि कहीं आवाज ना निकल जाए. उसनें धीरे धीरे धक्के लगानें शुरू कर दिए. मेरी चूत में उसनें उंगली घुसा दी. पर मुझे लगा कि उंगली मर्द की नहीं है. मैंनें देखा तो वो नंदिता थी.
वो मुझे देख कर प्यार से मुस्कराई .”मजा आ रहा है ना… ”
” हाय… नंदिता… . मैं मर जाऊंगी… मुझे मत देखो ना ..”
“अरे शर्म मत कर ..चुदानें के लिए तो तू तड़प रही थी ना… तेरे जीजू का लंड है… खाए जा… और मस्त हो चुदाए जा… ”
उसनें मेरी गांड से अपना लंड निकाल लिया और अब वो बिस्तर के बीच में लेट गया. उसका लंड सीधा और लंबा तना हुआ खड़ा था.
नंदिता बोली – “इस चाकू पर बैठ जा… और अपनी फांकों में इसे घुसनें दे और आज तू चोद डाल अपनें जीजू को… ”
“थंक यू. ..” कह कर मैं उछल कर उसके लंड पर बैठ गयी… मैंनें निशाना लगाया और चूत का छेद खड़े लंड पर रख दिया. मेरी चूत पानी से भीग गयी थी… सारा चिकना रस इधर उधर फ़ैल गया था. लंड नें मेरी चूत को चूमा और चूत नें उसका वैलकम किया. वो फच की आवाज करता हुआ अन्दर जानें लगा साथ ही मेरा बैलेंस भी बिगड़ गया और मैं लंड पर पूरा धच से बैठ गयी।
मेरे मुंह से चीख निकल पड़ी, “हाय ..जीजू… मर गयी ..”
नंदिता बोली – “हाँ… मेरी रानी… अब लंड का पता चला है… ”
“बहुत मोटा है ..राम. ..जड़ से टकरा गया है ..”
अंकित अब नीचे से चूतडों को हिला हिला कर चोद रहा था. इतनें में नंदिता नें मेरी गांड में उंगली घुसा दी. और घुमानें लगी. मैंनें तो अब ऊपर से कमर हिला हिला कर अंकित को चोद रही थी .सारा कमरा फच ..फच… की आवाज से गूंज उठा.
“हाय मेरी रानी… दे धक्के… नंदिता मेरी गांड में उंगली घुसा दे रे ..” वो आनंद से सिसकारी भरनें लगा.
“हाँ ..मेरे राजा… ये लो… ” कहते हुए नंदिता नें अपनी दूसरे हाथ की उंगली अंकित की गांड में घुसा दी. मैं मस्ती में झूम रही थी.
” हाय ..जीजू… चोद दे रे… लगा दे ..रे… और जोर से… फाड़ दे यार… स ई से ऐ… मर गयी… हाय… चोद दे… जीजू… मेरी चुन्ची मसल डाल… खींच… और खींच… ऊऊओए ई ई… रे… क्या कर हो… राजा… लगा ना… जोर से… ”
मेरी हालत चरम सीमा पर पहुँच रही थी . मैं होश खोती जा रही थी.
अचानक उसनें मुझे करवट बदल कर अपनें नीचे दबा लिया. और मेरे ऊपर चढ़ गया. उसनें लंड को दबा कर चूत में घुसा दिया. और उसके धक्के तेज होते गए. ऊधर नंदिता नें फिर से अपनी उंगली हमारी गांड में घुसेड़ दी और अन्दर गोल गोल घुमानें लगी. मुझे दोनों तरफ़ से डबल मजा आनें लगा. पर अब मुझे लग रहा था… कि मैं झड़नें वाली हूँ. उसके लंड की तेजी को और उंगली को सह नहीं पा रही थी.
“जीजू… मैं मर गयी… हाय रे… चोद… और चोद… हाय निकल दे पानी… चोद दे रे… .हाय यी ययय… मैं मरी… सी सी ओ ऊ ओए एई मैं मरी… मैं गयी ऐ… अरे निकाला ..निकल अ… अरे… अरे… हाय रे… ”
कहते हुए मैंनें अपना पानी निकाल दिया. नंदिता नें मेरी गांड से उंगली निकाल दी. अचानक अंकित के लंड का दबाव मेरी चूत पर बढ़नें लगा .. और फिर वो कराह उठा… “हाय मेरी रानी… मैं गया… मेरा निकलनें वाला है… हँ… हँ… ओ ऊ ओह ह्ह्ह ह्ह्ह हह. ओ ऊ ह ह ह हह ह्ह्ह… नंदिता… निकला… निकल अ… आ आह हह आया आह्ह… ”
उसके लंड नें अपना रस उगलना चालू कर दिया. पर नंदिता तो इंतज़ार में थी उसनें पीछे से हाथ डाल कर मेरी चूत से लंड खींच लिया और टांगों के बीच घुस कर लण्ड अपनें मुंह में ले लिया. अंकित ये जानता था कि ये रस तो नंदिता का ही है. इसलिए उसनें अपनी टांगे ऊँची कर के अपना पूरा लण्ड उसके मुंह में दे दिया. नंदिता पूरा रस गट गट करके पी गयी और अब लण्ड को चाट कर साफ़ कर रही थी. मैं निढाल सी बिस्तर पर पड़ी थी.
“मजा आया मेरी रानी ” नंदिता बोली
“जीजू नें तो बस कमाल ही कर दिया ..इतनी जोर से चोद दिया कि पूछो मत… पर माल मेरे लिए तो छोड़ा होता… ” नंदिता हंसनें लगी.
“जीजा साली का रिश्ता ऐसा ही मजेदार होता है… क्यूँ अंकित है ना… ”
” तुम तो लकी हो जो जीजू से रोज़ चुदवा लेती हो… मेरी तरफ़ तो देखो ना… चूत में ज़ंग लग जाता है ..” मैं हंसती हुई बोली.
“अच्छा तो हरी झंडी ..बस ”
“क्या… हरी झंडी…”
‘ये तुम्हारा जीजू… और ये तुम… खूब चुदवाओ जीजू से… और मस्त हो जाओ !”
अंकित और मैं एक दूसरे को मुस्करा कर देख रहे थे. आँखों आँखों में इशारे हो गए थे. हम सब उठे और अपनें कपड़े ठीक किए. और सोनें की तैयारी करनें लगे।

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