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“मैं रोती रही जीजू चोदते रहे”

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मेरा नाम छोटी है! उम्र 19 साल! शादी को कुछ महीनें हो चुके हैं| मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं! मैं भी उन्हें बहुत प्यार करती हूँ| मैं अपनें पति से कई बार चुद चुकी हूँ| मेरी चुदाई मुझे बहुत तकलीफ देती है| मेरे पति मुझे चोदते समय मुझ पर बिल्कुल भी दया नहीं दिखाते! बेरहम हो जाते हैं| मैं रोती रहती हूँ! वो चोदते रहते हैं|
ऐसा नहीं कि मैं शादी से पहले नहीं चुदी हूँ| मैं शादी से पहले अपनें जीजू से कई बार चुद चुकी हूँ| जीजू भी मुझे चोदते समय बेरहम हो जाते थे| शायद सारे पुरुष एक जैसे ही होते हैं| पहले मैं जीजू से अपनी चुदाई के बारे मैं बताती हूँ|

बात उस समय की है जब दीदी की शादी हुई थी| जो मुझसे दो साल बड़ी थी| हम दोनों बहनेंं कम सहेलियाँ ज्यादा थी| हमनें एक दूसरे को पूरा नंगा करके देखा था एक दूसरे की चूत भी देखी थी| लेकिन चुदाई क्या होती है यह पता नहीं था| दीदी नें ही ससुराल से लौटकर बताया था कि जीजू नें उन्हें कैसे और कितनी बेरहमी से चोदा था|
मैंनें एक बार पापा मम्मी को चुदाई करते चुपके से देख लिया था| तब मैं 19 साल की थी| यह तो पता था कि औरतों के चूत होती है| लेकिन यह नहीं पता था कि लण्ड इतना मोटा और लम्बा होता है और चूत में घुस जाता है|

मम्मी बड़े आराम से चुद रहीं थीं| मम्मी बैड पर लेटी थीं| उनकी टांगें नंगी थीं और ऊपर को मोड़ी हुई थीं| पापा नीचे खड़े थे| वो अपनें लण्ड को मम्मी की चूत में अन्दर:-बाहर कर रहे थे|
मुझे डर लगा और दीदी को भी दिखाया| तब दीदी नें बताया था कि पापा मम्मी को चोद रहे हैं|
मैंनें पूछा:- क्यों?
तो उन्होंनें बताया:- हर औरत को चुदना पड़ता है|
दीदी साइंस पढ़ती थी! उन्होंनें बताया:- एक दिन तुझे भी चुदना पड़ेगा! मुझे भी चुदना पड़ेगा|
मैनें पूछा:- तकलीफ़ नहीं होती है क्या?
उन्होंनें कहा:- पता नहीं! जब तू खुद चुदेगी तो पता चल जायेगा|
कुछ सालों में दीदी की शादी हो गई| वहाँ से लौट कर दीदी नें अपनी चुदाई के बारे में बताया था| उन्होंनें बताया कि जीजू उन्हें पूरी नंगी करके चोदा| चुदाई में लगती भी है और मजा भी बहुत आता है|
अब मेरी भी चुदनें की इच्छा होनें लगी थी| अगली बार मैं भी उनके साथ उनके घर गई| वो दोनों ही नौकरी करते थे| फ्लैट में दो कमरे थे| एक में वो दोनों और एक में मैं अकेली सोती थी| मैं रात को बिस्तर में लेटनें के बाद उन दोनों की चुदाई के बारे में सोचा करती थी| मुझे देखना था कि ज़ीजू दीदी को कैसे चोदते हैं|
एक रात को मुझे मौका मिल ही गया| उनके कमरे की लाइट जली थी| दरवाजे में एक छेद था| मैंनें देखा कि जीजू दीदी के कपड़े उतारनें की कोशिश कर रहे थे|

एक रात को मुझे मौका मिल ही गया| उनके कमरे की लाइट जली थी| दरवाजे में एक छेद था| मैंनें देखा कि जीजू दीदी के कपड़े उतारनें की कोशिश कर रहे थे|
दीदी विरोध कर रही थी! कह रही थी:- छोटी जाग जायेगी|
जीजू कह रहे थे:- अब मेरे से और इंतजार नहीं होता| आज तो मैं तुम्हें चोदकर ही मानूँगा|
जीजू जबरदस्ती दीदी को नंगी करनें लगे तो दीदी गिड़ड़ानें लगी:- मान जाओ ……… मान जाओ……… बहुत लगती है| मेरी चीख निकल जाती है| छोटी सुन लेगी|
जीजू नहीं मानें! बोले:- कि तुम चीखती हो तो और मजा आता तुम्हें चोदनें में !
उन्होंनें दीदी की साड़ी खींचनी शुरू की| दीदी उनको रोक रही थी| लेकिन जीजू नें दीदी को एक हाथ से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से दीदी की साड़ी उतार दी| अब जीजू नें दीदी को पीछे से बाँहों में भर लिया और दीदी का ब्लाउज खोलनें लगे| दीदी जीजू से छूटनें की कोशिश कर रही थी| उन्हें अपनें ब्लाउज के हुक खोलनें से रोक रही थी| लेकिन जीजू नें ब्लाउज के हुक भी खोल दिये| मेरी साँसें रुकी हुई थीं| जीजू नें दीदी का ब्लाउज भी उतार कर फेंक दिया| दीदी की ब्रा उतारनें के लिये जीजू को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी| उन्होंनें दीदी की ब्रा की पट्टियों को कधों से नीचे उतार दिया| फिर दीदी को घुमाकर बाँहों में कस लिया और पीछे से ब्रा की हुक खोल दी| अब दीदी का पेटीकोट रह गया था| ब्रा उतारकर दीदी को छोड़ दिया| दीदी इधर उधर भागनें लगी| जीजू दीदी के पेटीकोट का नाड़ा खोलनें को लपके|
दीदी नें नाड़ा पकड़ लिया ताकि खुले नहीं! वह कह रही थी:- मान जाओ…… रहनें दो! इसे मत उतारो|

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वह कह रही थी:- मान जाओ…… रहनें दो! इसे मत उतारो| जीजू बोले:- अच्छा ठीक है|
वो रुक गये| अब दीदी नें नाड़ा छोड़ दिया और अपनें स्तनों को पकड़ लिया| जीजू नें लपक कर दीदी को बाँहों में भर लिया| जबरदस्ती दीदी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया| दीदी छटपटानें लगी| जीजू नें उनका पेटीकोट उतार कर दीदी को नंगी कर दिया और गोद में उठाकर बिस्तर पर पटक दिया|
उन्होंनें दीदी के होंथों पर होंठ रख दिए| फिर ऊपर sexkahanihindi.com से नीचे तक चाटा| जब उन्होंनें दीदी की चूत चाटी तो दीदी सिसकारी भरनें लगी| वो बल खानें लगी|
जब जीजू नें अपनें कपड़े उतारे तो मैं जीजू का लण्ड देखकर दंग रह गई| पापा के लण्ड की तरह बड़ा था|
वो जब दीदी के ऊपर झुके तो दीदी हाथ जोड़कर कहनें लगी:- मान जाओ…… बहुत तकलीफ़ होती है|
जीजू नहीं मानें| जीजू नें अपना लंड दीदी की चूत पर रख दिया| दीदी नें अपनें हाथ उनके पेट पर रखे ताकि उन्हें रोक सके| जीजू के बार बार कहनें पर हथियार डाल दिये| दीदी नें अब अपनें हाथ ऊपर करके सिरहानें रख लिये| अब दीदी रुआंसी हो चली थी|
जीजू नें लण्ड चूत में घुसाना शुरू किया| दीदी नें अपनें होंठ भींच लिये| ताकि आवाज न निकले| लेकिन जैसे ही जीजू नें धक्का मारा! दीदी की चीख निकल गई…आ…आ…आ…आ… |
जीजू का आधा लण्ड दीदी की चूत में फँसा था| दीदी रो रही थी| थोड़ी देर दीदी को रुलानें के बाद जीजू नें एक और धक्का मारा और पूरा लण्ड दीदी की चूत में होकर उनके पेट में घुस गया| दीदी की फिर से चीख निकल गई…आ…आह…आ…आई…|

एक दिन वो जल्दी ही घर लौट आये! दोपहर में मुझसे बोले:- आओ! तुम्हें बढ़िया फोटो दिखाऊँ|
मैंनें कहा:- दिखाओ|
उन्होंनें अपनें मोबाइल में मेरी नंगी फोटो दिखाईं|
मैं वहाँ से भागी तो उन्होंनें मुझे पकड़कर अपनी टाँगों पर बिठा लिया|
मैं बोली:- छोड़ो जीजू आप तो बहुत बेशर्म हो|
जीजू बोले:- अच्छा जी……? नंगी तुम सोती हो! और बेशर्म मैं हो गया? मैंनें तो नहीं कहा था नंगी सोनें के लिये|
मैंनें अपना चेहरा हाथों से छिपा लिया|
वो बोले:- वैसे तुम्हारी चूत है बहुत सुन्दर| तुम्हारी चूत देखकर तो किसी बु्ढ्ढे का लण्ड भी खड़ा हो जायेगा|
उन्होंनें शब्दों में मेरी चूत का नक्शा खींच दिया|
मैंनें कहा:- जीजू चुप रहो !
मैं फिर भागनें को उठी|
जीजू नें फिर पकड़कर अपनी टाँगों पर बिठा लिया! वो मेरी जाँघों पर हाथ फिरानें लगे और कहनें लगे:- छोटी! सच बताना….. अभी तक किसी से चुदी हो या नहीं?
मैं सीधे प्रश्न का कोई सीधा उत्तर न दे सकी|
जीजू नें फिर पूछा:- बताओ न छोटी! अभी तक किसी से चुदी हो या नहीं?
मैनें ना में सिर हिला दिया|
जीजू बड़ी बेशर्मी के साथ बोले:- फिर तो तुम्हें चोदनें में बहुत मजा आएगा ! बोलो चुदोगी? अभी तो तुम्हारी चूत की सील भी नहीं टूटी होगी|
मैं चौंक गई:- क्या मतलब? कैसी सील?
जीजू बोले:- हर कुँआरी लड़की की चूत एक झिल्ली से बन्द होती है! जिसे हाइमन कहते हैं| जब लण्ड पहली बार चूत में घुसता है तो वह फट जाती है| उसी को चूत फाड़ना कहते हैं| चूत फटनें के ख्याल से मेरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गई! दीदी को रोते देख चुकी थी|
मेरी बेखुदी में जीजू का हाथ कब स्कर्ट के अन्दर पहुँच गया? मुझे पता ही नहीं चला| जब होश आया तो मैंनें उनका हाथ हटना चाहा तो जीजू नें मुझे गोद में लिटाकर मेरी स्कर्ट ऊपर उठा दी और मेरी चड्डी उतारनें लगे|
मैं गिड़गिड़ानें लगी:- जीजू नहीं… जीजू नहीं….|
जीजू नहीं मानें| उन्होंनें मेरी चड्डी उतार दी|
अब मेरी चूत उनके सामनें थी| मेरी झाँटें छोटी:-छोटी थीं| जीजू मेरी चूत को सहला रहे थे|
फिर जानें क्यूँ उन्होंनें मुझे छोड़ दिया|
मैं खड़ी हो गई|
फिर जीजू बोले:- अब बाकी कपड़े तुम खुद उतारोगी या मैं उतारूँ?
मैं कुछ न बोली|
फिर जीजू उठे और मुझे पीछे से बाँहों में भर लिया और मेरी शर्ट के बटन खोलनें शुरू कर दिए| बटन खोलते हुए उन्होंनें पूछा:- जानती हो लण्ड कितना लम्बा होता है?
मैंनें पापा का लण्ड भी मम्मी को चोदते समय देखा था और खुद जीजू का लण्ड भी दीदी को चोदते समय देखा था| फिर भी मैंनें ना में सिर हिला दिया|
वो उँगली से इशारा करते हुए बोले इत्ता सा होता है! लेकिन चूत सामनें हो तो या लड़की बाँहों में हो तो छ: से आठ इंच तक लम्बा हो जाता है|
जीजू का लण्ड खड़ा हो चुका था जो मुझे अपनें पीछे गाण्ड पर महसूस हो रहा था|
मुझे जानें क्या हो गया था| मैं जीजू को रोक नहीं पा रही थी| जीजू मेरी शर्ट के सारे बटन खोल चुके थे| उन्होंनें मेरी शर्ट को पीछे को उतार दिया|
अब जीजू बोले:- तुम्हें अपनी चूत के बारे में पता है?
मैंनें कुछ नहीं कहा|
अब तक वो मेरी ब्रा के हुक भी खोल चुके थे| ब्रा के स्ट्रेप्स को कंधों से नीचे सरका दिया|
ब्रा भी उतर गई|
मेरे स्तन कड़े थे| जीजू मेरे स्तनों से खेलनें लगे|
मुझे उत्तेजना की वजह से पेशाब जानें की इच्छा होनें लगी! मैं बोली:- जीजू! पेशाब लगा है|
जीजू बोले:- अब तुम्हारी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी है| तुम चाहे न मानो! लेकिन तुम्हारी चूत चुदनें को तैयार है|
मैं गिड़गिड़ाई:- नहीं जीजू ! तकलीफ़ हो जायेगी मुझे !
मैं उनसे छूटनें की कोशिश करनें लगी|
जीजू बोले:- देख छोटी! अब तुम्हें बिना चोदे तो मैं छोड़ूँगा नहीं|
मैं रुआँसी हो गई| अनजानें डर से मेरी आँखों में आँसू आ गये|
मैं बोली:- जीजू! पेशाब तो कर आनें दो?
जीजू बोले:- चल! मैं करवा कर लाता हूँ|
उन्होंनें मुझे गोद में उठा लिया और…

मुझे उत्तेजना की वजह से पेशाब जानें की इच्छा होनें लगी! मैं बोली:- जीजू! पेशाब लगा है|
जीजू बोले:- अब तुम्हारी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी है| तुम चाहे न मानो! लेकिन तुम्हारी चूत चुदनें को तैयार है|
मैं गिड़गिड़ाई:- नहीं जीजू ! तकलीफ़ हो जायेगी मुझे !
मैं उनसे छूटनें की कोशिश करनें लगी|
जीजू बोले:- देख छोटी! अब तुम्हें बिना चोदे तो मैं छोड़ूँगा नहीं|
मैं रुआँसी हो गई| अनजानें डर से मेरी आँखों में आँसू आ गये|
मैं बोली:- जीजू! पेशाब तो कर आनें दो?
जीजू बोले:- चल! मैं करवा कर लाता हूँ|
उन्होंनें मुझे गोद में उठा लिया और…
टॉयलेट में ले गये|
मैं टॉयलेट में स्कर्ट को टाँगों में दबाये खड़ी जीजू के हटनें का इन्तजार कर रही थी|
जीजू बोले:- बैठ ! कर पेशाब|
मैं नहीं बैठी| मैं सिर झुकाये खड़ी रही|
जीजू बोले:- छोटी बैठ ना ! मैंनें अभी तक तुम्हारी दीदी sexkahanihindi.com को भी पेशाब करते नहीं देखा है| तुम्हारी चड्डी तो मैंनें ही उतारी है| अब तो तुम्हें पेशाब करते हुए देखूँगा|
मैं न चाहते हुए भी बैठ गई|
जीजू दरवाजे पर ही खड़े रहे! बोले:- कर पेशाब|
वो मेरी चूत की ओर देख रहे थे और मैंनें पेशाब की धार छोड़ दी|
मैं उठी और जीजू मुझे बाँहों में भर कर कमरे में ले आये| कमरे में आते ही उन्होंनें मेरी स्कर्ट के हुक खोल दिये और स्कर्ट नीचे गिर गई|
मैं अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी|
जीजू नें मुझे उठाकर बिस्तर पर पटक दिया! मेरी टाँगों को ऊपर उठाकर मेरे सामनें बैठ गए|
फिर मुझसे ही मेरी चूत का वर्णन करनें लगे|
मेरी चूत के होठों को पकड़कर बताया:- ये तुम्हारी चूत के होंठ हैं|
फिर चूत को अपनी उँगली और अँगूठे से फैलाकर बताया:- यह तुम्हारी भगनासा है !
और हल्का सा सहला दिया|
मुझसे बरदाश्त न हुआ! मैं दोहरी हो गई! मेरी सिसकारी निकल गई|
फिर उन्होंनें मेरी चूत का बड़ी बारीकी से निरीक्षण किया| फिर अपनें कपड़े भी उतार दिये|
मुझे अपनें लण्ड को दिखाते हुए बोले:- देख! यह लण्ड है| यही चूत फाड़नें का औजार है|
फिर उन्होंनें लण्ड की खाल को ऊपर खींच दिया! बोले:- चूत में घुसनें के बाद यह ऐसा हो जाता है| ऐसे भी घुस सकता है चूत में| अब मैं इसे तुम्हारी चूत में घुसाऊँगा|
जीजू मेरे ऊपर ऐसे आ गये कि उनका लण्ड मेरे मुँह पर और उनका सिर मेरी चूत पर था|
उन्होंनें जब मेरी चूत चाटना शुरू किया तो मेरी आह निकल गई| जीजू नें अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और लण्ड को गले तक पहुँचा दिया|
उस समय मुझे पहली बार अहसास हुआ कि लण्ड कितना लंबा और सख्त होता है|
जीजू जल्दी ही असली काम पर आ गये| उन्होंनें मेरी टाँगें ऊपर को मोड़ दीं| मेरी चूत के दोंनों होंठ खुल गये|
जीजू नें लण्ड को मेरी चूत पर रख दिया|
डर के मारे मुझे चूत पर लण्ड टिकते ही दर्द महसूस होनें लगा|
मुझे लगा कि जीजू नें ठोक दिया लण्ड मेरी चूत में| मेरे मुँह से निकला:- आ…|
जीजू बोले:- अभी तो मैंनें कुछ भी नहीं किया|
मैं बोली:- जीजू! मुझे डर लग रहा है|
दीदी की हालत तो मैं पहले ही देख चुकी थी|
अब जीजू नें लण्ड को मेरी चूत में घुसाना शुरू किया तो मेरी चूत में लगनें लगी|
मैं जीजू को रोकते हुए बोली:- आ… जीजू! लग रही है| जीजू मर जाऊँगी… आआ… आ… जीजू प्लीज ! मर जाऊँगी…मैं !
अभी तक जीजू लण्ड का चूत पर दबाव बढ़ा रहे थे| मेरी आँखों में आँसू छ्लक आये थे| तभी लण्ड फिसलकर मेरी भगनासा को रगड़ते हुए मेरे पेट की ओर आ गया|
डर के मारे मुझे पता नहीं था कि लण्ड कहाँ गया| मेरी आह निकली|
जीजू बोले:- अरे वैसे ही! अभी घुसा ही कहाँ है?
मैं बोली:- जीजू मुझे बहुत डर लग रहा है|
जीजू बोले:- इसमें डरना काहे का! बस लण्ड तुम्हारी चूत को फाड़ेगा और तुम्हारे पेट में घुस जायेगा|
जीजू नें ऐसे कहा जैसे कुछ भी नहीं होनें वाला|
जीजू नें फिर लण्ड को मेरी चूत के छेद पर रखा और लण्ड को मेरी चूत में घुसाना शुरू कर दिया|
मेरी चूत में फिर से लगनें लगी|
मैं जीजू को रोकते हुए बोली:- आ…आ… जीजू! लग रही है| जीजू! लग रही है! मर जाऊँगी… आआ… आ…
और जीजू नें थोड़ा रुककर एक जोर का धक्का मारा|
मेरी चीख निकली:- आआआआ… आआ…|
मेरी चूत की झिल्ली फट गई! खून निकल आया था| लण्ड करीब दो इंच अन्दर मेरी चूत में घुस कर फँस चुका था|
मुझे ऐसा महसूस हो रहा था मानो कोई मेरी चूत को चाकू से काट रहा हो| मैं रोनें लगी थी:- आआआ… आ… जीजू… बहुत जोर से लग रही है|
जीजू के लण्ड का बीच का मोटा हिस्सा अभी और घुसना बाकी था|
जीजू नें धीईई…रे से लण्ड को थोओओ…ड़ा:-सा बाहर निकालकर बड़ी बेरहमी से एक और धक्का मारा|
मैं मर गई और भी जोर से चीखी:- आआआआ… आआ… और रोनें लगी|
लण्ड सबसे मोटे हिस्से तक मेरी चूत में घुस गया था|
जीजू बोले:- छोटी! यह तो शुरूआत है| असली चुदाई तो अब होगी|
उन्होंनें फिर से लण्ड को थोड़ा:-सा बाहर निकालकर बड़ी बेरहमी से धक्का मारा| अब पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसकर मेरे पेट में समा गया|
जीजू नें भी पूरा जोर लगाकर जितना गहरा घुसा सकते थे उससे भी ज्यादा घुसा दिया| उनका लण्ड मेरे पेट में कहाँ तक घुस गया? पता नहीं| पेट के अन्दर 7 इंच बाप रे|
उसके बाद तो जीजू नें धक्कों की झड़ी लगा दी| चार पाँच धक्के ऐसे मारे कि जीजू पूरे लण्ड को बाहर खींचते और वापस मेरी चूत में ठोक देते|
मैं हर धक्के पर रोती:- आआआआ… आआ… आआआआ… आआ… आआआआ… आआ…
फिर उन्होंनें लण्ड बाहर निकाल लिया| मेरी टाँगें सीधी कीं|
अब मेरी चूत के दोनों होठ आपस में मिल गये| चूत मात्र एक दरार जैसी दिखनें लगी और जीजू आ गये फिर से अपनी औकात पर|
वो मेरे ऊपर बैठ गये| उन्होंनें लण्ड को मेरी चूत की दरार पर रखा और बड़ी बेरहमी के साथ एक ही धक्के में घुसाते चले गये|
मेरी तो जान ही निकल गई! मैं बिलबिलानें लगी|
जीजू लण्ड को चूत में पूरी ताकत से तब तक दबाते रहे जब तक पूरा लण्ड मेरे पेट में नहीं समा गया|
मेरी चूत का बुरा हाल था| उन्होंनें बिना रुके कई धक्के लगा डाले| मैं रोती रही|
फिर उन्होंनें लण्ड बाहर निकाल लिया|
मैं जानती थी कि थोड़ा रुककर फिर से लण्ड मेरी चूत में ठोक देंगे| उनके इस शौक के बारे में दीदी नें बताया था|
वही हुआ|
उन्होंनें अपना लण्ड एक ही झटके में पूरा का पूरा चूत के रास्ते मेरे पेट में घुसा दिया| मैं रोनें के सिवा कुछ न कर सकी|
मैं हर धक्के पर रोती रही| वो मुझे चोदते रहे|
काफी देर चुदनें के बाद मुझे अपनें अन्दर से कुछ निकलता महसूस हुआ|
उस क्षण को मैं बर्दाश्त न कर सकी और कसकर जीजू से लिपट गई| आ…ह… जीजू… अब बअ…अ…स|
उस समय जीजू नहीं रुके| वो धक्के मारते रहे|
कुछ सेकण्डों में मैं निढाल हो गई| पता नही मैं सो गई थी या बेहोश हो गई थी? मुझे तो यह भी याद नहीं कि जीजू उसके बाद भी मुझे चोदते रहे या नहीं? इतना याद है कि जब होश आय तो मेरी चूत में दर्द हो रहा था| जीजू पास ही नंगे बैठे थे|
मैं उठनें लगी तो जीजू नें मुझे उठनें नहीं दिया! बोले:- अभी कहाँ जा रही हो? तुम तो झड़ गईं मुझे भी तो झड़नें दो|
यह कहकर जीजू फिर से मेरे ऊपर सवार हो गये|
मैंनें विनती की:- जीजू अब नहीं! अब मैं मर जाऊँगी|
लेकिन वो नहीं मानें! उनके मेरी चूत में लण्ड घुसानें से पहले ही मैं रोनें लगी|
जीजू को रहम नहीं आया| उन्होंनें मेरी दुखती चूत पर लण्ड रखकर धीरे:-धीरे घुसाना शुरू किया और फिर अचानक एक झटके में पूरा लण्ड घुसा दिया|
मैं रो रही थी! वो मुझे चोद रहे थे| और फिर चोदते:-चोदते मुझे उनका लण्ड और भी कठोर होता महसूस हुआ| और फिर उनके मुँह से आह निकली एक आखरी धक्के में लण्ड पूरी ताकत से मेरी चूत
में समाता चला गया और उनके लण्ड से कुछ गर्म:-गर्म निकलता
महसूस हुआ|कुछ देर में 7 इंच लम्बा और डेढ़ इंच मोटा लण्ड मुलायम और छोटा सा रह गया| उसके बाद जीजू नें मुझे कई बार चोदा और मैं चुदाई के बारे में सब कुछ जान गई|

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