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“मैंने अपने भाई की कुँवारा लंड अपनी चुत में ली”

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हाय दोस्तों क्या आप सभी मुठ मारते है. मुझे तो एकेले में मुठ मारना बहुत अच्छा लगता है. मैं भी क्या बात कर रही हूँ आप सब इस साईट पर आते ही है कहानिया पढ़ मुठ मारनें के लिए यह पर तो कई शादी शुदा लोग भी आते है कहानिया पढ़नें अपनी बीवी के अलावा किसी और की चूत की कहानी पढ़ मजे करनें लोगो के एक्सपीरियंसेस जाननें के लिए. वैसे आप सभी को बता दूँ मेरा नाम सुनीता है ! मेरा छोटा भाई 12th में पढ़ता है! वह गोरा चिट्टा और करीब मेरे ही बराबर लम्बा भी है ! मैं इस समय 20 की हूँ और वह 18 का! मुझे भैय्या के गुलाबी होंठ बहूत प्यारे लगते हैं ! दिल करता है कि बस चबा लूं ! पापा गल्फ़ में है और माँ गवर्नमेंट जॉब में ! माँ जब जॉब की वजह से कहीं बाहर जाती तो घर मैं बस हम दो भाई बहन ही रह जाते थे ! मेरे भाई का नाम राज है और वह मुझे दीदी कहता है ! एक बार मान कुछ दिनों के लिये बाहर गयी थी ! उनकी इलेक्शन ड्यूटी लग गयी थी ! माँ को एक हफ़्ते बाद आना था ! रात मैं डिनर के बाद कुछ देर टी वी देखा फ़िर अपनें-अपनें कमरे मैं सोनें के लिये चले गये!
करीब एक आधे बाद प्यास लगनें की वजह से मेरी नींद खुल गयी ! अपनी सीधे टेबल पर बोटल देखा तो वह खाली थी ! मैं उठकर किचन में पानी पीनें गयी तो लौटते समय देखा कि राज के कमरे की लाइट ओन थी और दरवाज़ा भी थोड़ा सा खुला था ! मुझे लगा कि शायद वह लाइट ओफ़ करना भूल गया है मैं ही बन्द कर देती हूँ ! मैं चुपके से उसके कमरे में गयी लेकिन अन्दर का नजारा देखकर मैं हैरान हो गयी !
राज एक हाथ मैं कोई किताब पकड़ कर उसे पढ़ रहा था और दूसरा हाथ से अपनें तनें हुए लण्ड को पकड़ कर मुठ मार रहा था ! मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि इतना मासूम लगनें वाला दसवी का यह छोकरा ऐसा भी कर सकता है ! मैं दम साधे चुपचाप खड़ी उसकी हरकत देखती रही. लेकिन शायद उसे मेरी उपस्थिति का आभास हो गया ! उसनें मेरी तरफ़ मुँह फेरा और दरवाजे पर मुझे खड़ा देखकर चौंक गया! वह बस मुझे देखता रहा और कुछ भी ना बोल पाया ! फिर उसनें मुँह फ़ेर कर किताब तकिये के नीचे छुपा दी ! मुझे भी समझ ना आया कि क्या करूं ! मेरे दिल मैं यह ख्याल आया कि कल से यह लड़का मुझसे शर्मायेगा और बात करनें से भी कतरायेगा ! घर मैं इसके अलावा और कोई है भी नहीं जिससे मेरा मन बहलता ! मुझे अपनें दिन याद आये! मैं और मेरा एक कज़िन इसी उमर के थे जब से हमनें मज़ा लेना शुरू किया था तो इसमें कौन सी बड़ी बात थी अगर यह मुठ मार रहा था !
मैं धीरे-धीरे उसके पास गयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसके पास ही बैठ गयी! वह चुपचाप लेटा रहा ! मैंनें उसके कंधो को दबाते हुई कहा. “अरे यार अगर यही करना था तो कम से कम दरवाज़ा तो बन्द कर लिया होता” ! वह कुछ नहीं बोला. बस मुँह दूसरी तरफ़ किये लेटा रहा ! मैंनें अपनें हाथों से उसका मुँह अपनी तरफ़ किया और बोली “अभी से ये मज़ा लेना शुरू कर दिया! कोई बात नहीं मैं जाती हूँ तो अपना मज़ा पूरा कर ले! लेकिन जरा यह किताब तो दिखा! मैंनें तकिये के नीचे से किताब निकाल ली! यह हिन्दी मैं लिखे अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज की किताब थी! मेरा कज़िन भी बहूत सी अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज की किताबें लाता था और हम दोनों ही मजे लेनें के लिये साथ-साथ पढ़ते थे! चुदाई के समय किताब के डायलोग बोल कर एक दूसरे का जोश बढ़ाते थे!
जब मैं किताब उसे देकर बाहर जानें के लिये उठी तो वह पहली बार बोला. “दीदी सारा मज़ा तो आपनें खराब कर दिया. अब क्या मज़ा करुंगा!

“अरे! अगर तुमनें दरवाज़ा बन्द किया होता तो मैं आती ही नहीं!

“और अगर आपनें देख लिया था तो चुपचाप चली जाती!
अगर मैं बहस मैं जीतना चाहती तो आसानी से जीत जाती लेकिन मेरा वह कज़िन करीब 6-7 महीनें से नहीं आया था इसलिये मैं भी किसी से मज़ा लेना चाहती ही थी! राज मेरा छोटा भाई था और बहूत ही सेक्सी लगता था इसलिये मैंनें सोचा कि अगर घर में ही मज़ा मिल जाये तो बाहर जानें की क्या जरूरत? फिर राज का लौड़ा अभी कुंवारा था! मैं कुँवारे लण्ड का मज़ा पहली बार लेती. इसलिये मैंनें कहा. “चल अगर मैंनें तेरा मज़ा खराब किया है तो मैं ही तेरा मज़ा वापस कर देती हूँ! फिर मैं पलंग पर बैठ गयी और उसे चित लिटाया और उसके मुर्झाये लण्ड को अपनी मुट्ठी में लिया! उसनें बचनें की कोशिश की पर मैंनें लण्ड को पकड़ लिया था! अब मेरे भाई को यकीन हो चुका था कि मैं उसका राज नहीं खोलूंगी. इसलिये उसनें अपनी टांगे खोल दी ताकि मैं उसका लण्ड ठीक से पकड़ सकूँ! मैंनें उसके लण्ड को बहूत हिलाया-डूलाया लेकिन वह खड़ा ही नहीं हुआ! वह बड़ी मायूसी के साथ बोला “देखा दीदी अब खड़ा ही नहीं हो रहा है!
“अरे! क्या बात करते हो? अभी तुमनें अपनी बहन का कमाल कहाँ देखा है! मैं अभी अपनें प्यारे भाई का लण्ड खड़ा कर दूंगी! ऐसा कह मैं भी उसके बगल में ही लेट गयी! मैं उसका लण्ड सहलानें लगी और उससे किताब पढ़नें को कहा! “दीदी मुझे शर्म आती है! “साले अपना लण्ड बहन के हाथ में देते शर्म नहीं आयी! मैंनें ताना मारते हुए कहा “ला मैं पढ़ती हूँ! और मैंनें उसके हाथ से किताब ले ली ! मैंनें एक स्टोरी निकाली जिसमे भाई बहन के डायलोग थे! और उससे कहा. “मैं लड़की वाला बोलूँगी और तुम लड़के वाला! मैंनें पहले पढ़ा. “अरे राजा मेरी चूचियों का रस तो बहूत पी लिया अब अपना बनाना शेक भी तो टेस्ट कराओ” !  दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम  पे पढ़ रहे है!
“अभी लो रानी पर मैं डरता हूँ इसलियेकि मेरा लण्ड बहूत बड़ा है. तुम्हारी नाजुक कसी चूत में कैसे जायेगा?
और इतना पढ़कर हम दोनों ही मुस्करा दिये क्योंकि यह हालत बिलकुल उलटे थे! मैं उसकी बड़ी बहन थी और मेरी चूत बड़ी थी और उसका लण्ड छोटा था! वह शर्मा गया लेकिन थोड़ी सी पढ़ायी के बाद ही उसके लण्ड मैं जान भर गयी और वह तन कर करीब ६ इँच का लम्बा और १५ ! इँच का मोटा हो गया! मैंनें उसके हाथ से किताब लेकर कहा. “अब इस किताब की कोई जरूरत नहीं ! देख अब तेरा खड़ा हो गया है ! तो बस दिल मैं सोच ले कि तू किसी की चोद रहा है और मैं तेरी मु्ठ मार देती हूँ” !
मैं अब उसके लण्ड की मु्ठ मार रही थी और वह मज़ा ले रहा था ! बीच बीच मैं सिस्कारियां भी भरता था ! एकाएक उसनें चूतड़ उठा कर लण्ड ऊपर की ओर ठेला और बोला. “बस दीदी” और उसके लण्ड नें गाढ़ा पानी फेंक दिया जो मेरी हथेली पर गिरा ! मैं उसके लण्ड के रस को उसके लण्ड पर लगाती उसी तरह सहलाती रही और कहा. “क्यों भय्या मज़ा आया”
“सच दीदी बहूत मज़ा आया” ! “अच्छा यह बता कि ख़्यालों मैं किसकी ले रहे थे?” “दीदी शर्म आती है ! बाद मैं बताऊँगा” ! इतना कह उसनें तकिये मैं मुँह छुपा लिया !
“अच्छा चल अब सो जा नींद अच्छी आयेगी ! और आगे से जब ये करना हो तो दरवाज़ा बन्द कर लिया करना” ! “अब क्या करना दरवाज़ा बन्द करके दीदी तुमनें तो सब देख ही लिया है” !
“चल शैतान कहीं के” ! मैंनें उसके गाल पर हलकी सी चपत मारी और उसके होंठों को चूमा ! मैं और किस करना चाहती थी पर आगे के लिये छोड़ कर वापस अपनें कमरे में आ गयी ! अपनी सलवार कमीज उतार कर नाइटी पहननें लगी तो देखा कि मेरी पैंटी बुरी तरह भीगी हुयी है ! राज के लण्ड का पानी निकालते-निकालते मेरी चूत नें भी पानी छोड़ दिया था ! अपना हाथ पैंटी मैं डालकर अपनी चूत सहलानें लगी ऊंगलियों का स्पर्श पाकर मेरी चूत फ़िर से सिसकनें लगी और मेरा पूरा हाथ गीला हो गया ! चूत की आग बुझानें का कोई रास्ता नहीं था सिवा अपनी उँगली के ! मैं बेड पर लेट गयी ! राज के लण्ड के साथ खेलनें से मैं बहूत एक्साइटिड थी और अपनी प्यास बुझानें के लिये अपनी बीच वाली उँगली जड़ तक चूत मैं डाल दी ! तकिये को सीनें से कसकर भींचा और जान्घों के बीच दूसरा तकीया दबा आंखे बन्द की और राज के लण्ड को याद करके उँगली अन्दर बाहर करनें लगी ! इतनी मस्ती चढ़ी थी कि क्या बताये. मन कर रहा था कि अभी जाकर राज का लण्ड अपनी चूत मैं डलवा ले ! उँगली से चूत की प्यास और बढ़ गयी इसलिये उँगली निकाल तकिये को चूत के ऊपर दबा औन्धे मुँह लेट कर धक्के लगानें लगी ! बहुत देर बाद चूत नें पानी छोड़ा और मैं वैसे ही सो गयी !
सुबह उठी तो पूरा बदन अनबुझी प्यास की वजह से सुलग रहा था ! लाख रगड़ लो तकिये पर लेकिन चूत मैं लण्ड घुसकर जो मज़ा देता है उसका कहना ही क्या ! बेड पर लेटे हुए मैं सोचती रही कि राज के कुँवारे लण्ड को कैसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया जाये ! फिर उठ कर तैयार हुयी ! राज भी स्कूल जानें को तैयार था ! नाश्ते की टेबल हम दोनों आमनें-सामनें थे ! नजरें मिलते ही रात की याद ताजा हो गयी और हम दोनों मुस्करा दिये ! राज मुझसे कुछ शर्मा रहा था कि कहीं मैं उसे छेड़ ना दूँ ! मुझे लगा कि अगर अभी कुछ बोलूँगी तो वह बिदक जायेगा इसलिये चाहते हुई भी ना बोली!

चलते समय मैंनें कहा. “चलो आज तुम्हे अपनें स्कूटर पर स्कूल छोड़ दूँ” ! वह फ़ौरन तैयार हो गया और मेरे पीछे बैठ गया ! वह थोड़ा सकुचाता हुआ मुझसे अलग बैठा था ! वह पीछे की स्टेपनी पकड़े था ! मैंनें स्पीड से स्कूटर चलाया तो उसका बैलेंस बिगड़ गया और सम्भालनें के लिये उसनें मेरी कमर पकड़ ली ! मैं बोली. “कसकर पकड़ लो शर्मा क्यों रहे हो?”
“अच्छा दीदी” और उसनें मुझे कसकर कमर से पकड़ लिया और मुझसे चिपक सा गया ! उसका लण्ड खड़ा हो गया था और वह अपनी जान्घों के बीच मेरे चूतड़ को जकड़े था !

“क्या रात वाली बात याद आ रही है राज”

“दीदी रात की तो बात ही मत करो ! कहीं ऐसा ना हो कि मैं स्कूल मैं भी शुरू हो जाऊँ”! “अच्छा तो बहूत मज़ा आया रात में”

“हाँ दीदी इतना मज़ा जिन्दगी मैं कभी नहीं आया ! काश कल की रात कभी खत्म ना होती ! आपके जानें के-की बाद मेरा फ़िर खड़ा हो गया था पर आपके हाथ मैं जो बात थी वो कहाँ! ऐसे ही सो गया” !
“तो मुझे बुला लिया होता ! अब तो हम तुम दोस्त हैं! एक दूसरा के काम आ सकते हैं” !

“तो फ़िर दीदी आज राख का प्रोग्राम पक्का”!

“चल हट केवल अपनें बारे मैं ही सोचता है ! ये नहीं पूछता कि मेरी हालत कैसी है? मुझे तो किसी चीज़ की जरूरत नहीं है? चल मैं आज नहीं आती तेरे पास!

“अरे आप तो नाराज हो गयी दीदी ! आप जैसा कहेंगी वैसा ही करुंगा ! मुझे तो कुछ भी पता नहीं अब आप ही को मुझे सब सिखाना होगा” !
तब तक उसका स्कूल आ गया था ! मैंनें स्कूटर रोका और वह उतरनें के बाद मुझे देखनें लगा लेकिन मैं उस पर नज़र डाले बगैर आगे चल दी ! स्कूटर के शीशे मैं देखा कि वह मायूस सा स्कूल में जा रहा है ! मैं मन ही मन बहूत खुश हुयी कि चलो अपनें दिल की बात का इशारा तो उसे दे ही दिया !
शाम को मैं अपनें कालेज से जल्दी ही वापस आ गयी थी ! राज २ बजे वापस आया तो मुझे घर पर देखकर हैरान रह गया ! मुझे लेटा देखकर बोला. “दीदी आपकी तबीयत तो ठीक है?” “ठीक ही समझो. तुम बताओ कुछ होमवर्क मिला है क्या” “दीदी कल सण्डे है ही ! वैसे कल रात का काफी होमवर्क बचा हुआ है” ! मैंनें हंसी दबाते हुए कहा. “क्यों पूरा तो करवा दिया था ! वैसे भी तुमको यह सब नहीं करना चाहिये ! सेहत पर असर पढ़ता है ! कोई लड़की पटा लो. आजकल की लड़कियाँ भी इस काम मैं काफी इंटेरेस्टेड रहती हैं” ! “दीदी आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे लड़कियाँ मेरे लिये सलवार नीचे और कमीज ऊपर किये तैयार है कि आओ पैंट खोलकर मेरी ले लो” ! “नहीं ऐसी बात नहीं है ! लड़की पटानी आनी चाहिये” !
फिर मैं उठ कर नाश्ता बनानें लगी ! मन मैं सोच रही थी कि कैसे इस कुँवारे लण्ड को लड़की पटा कर चोदना सिखाऊँ? लंच टेबल पर उससे पूछा. “अच्छा यह बता तेरी किसी लड़की से दोस्ती है?”

“हाँ दीदी मधु से” !

“कहाँ तक”

“बस बातें करते हैं और स्कूल मैं साथ ही बैठते हैं” !

मैंनें सीधी बात करनें के लिये कहा. “कभी उसकी लेनें का मन करता है?”

“दीदी आप कैसी बात करती हैं” ! वह शर्मा गया तो मैं बोली. “इसमे शर्मानें की क्या बात है ! मुट्ठी तो तो रोज मारता है ! ख़्यालों मैं कभी मधु की ली है या नहीं सच बता” ! “लेकिन दीदी ख़्यालों मैं लेनें से क्या होता है” ! “तो इसका मतलब है कि तो उसकी असल में लेना चाहता है” ! मैंनें कहा !
“उससे ज्यादा तो और एक है जिसकी मैं लेना चाहता हूँ. जो मुझे बहूत ही अच्छी लगती है” ! “जिसकी कल रात ख़्यालों मैं ली थी” उसनें सर हिलाकर हाँ कर दिया पर मेरे बार-बार पूछनें पर भी उसनें नाम नहीं बताया ! इतना जरूर कहा कि उसकी चूदाई कर लेनें के बाद ही उसका नाम सबसे पहले मुझे बतायेगा ! मैंनें ज्यादा नहीं पूछा क्योंकि मेरी चूत फ़िर से गीली होनें लगी थी ! मैं चाहती थी कि इससे पहले कि मेरी चूत लण्ड के लिये बेचैन हो वह खुद मेरी चूत मैं अपना लण्ड डालनें के लिये गिड़गिड़ाये! मैं चाहती थी कि वह लण्ड हाथ में लेकर मेरी मिन्नत करे कि दीदी बस एक बार चोदनें दो ! मेरा दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा था इसलिये बोली. “अच्छा चल कपड़े बदल कर आ मैं भी बदलती हूँ” !  दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम  पे पढ़ रहे है!
वह अपनी यूनीफोर्म चेंज करनें गया और मैंनें भी प्लान के मुताबिक अपनी सलवार कमीज उतार दी ! फिर ब्रा और पैंटी भी उतार दी क्योंकि पटानें के मदमस्त मौके पर ये दिक्कत करते ! अपना देसी पेटीकोट और ढीला ब्लाउज़ ही ऐसे मौके पर सही रहते हैं ! जब बिस्तर पर लेटो तो पेटीकोट अपनें-अपनी आप आसानी से घुटनें तक आ जाता है और थोड़ी कोशिश से ही और ऊपर आ जाता है ! जहाँ तक ढीलें ब्लाउज़ का सवाल है तो थोड़ा सा झुको तो सारा माल छलक कर बाहर आ जाता है ! बस यही सोच कर मैंनें पेटीकोट और ब्लाउज़ पहना था !
वह सिर्फ़ पायजामा और बनियान पहनकर आ गया ! उसका गोरा चित्त चिकना बदन मदमस्त करनें वाला लग रहा था ! एकाएक मुझे एक आइडिया आया ! मैं बोली. “मेरी कमर मैं थोड़ा दर्द हो रहा है जरा बाम लगा दे” ! यह बेड पर लेटनें का पर्फेक्ट बहाना था और मैं बिस्तर पर पेट के बल लेट गयी ! मैंनें पेटीकोट थोड़ा ढीला बांधा था इस लिये लेटते ही वह नीचे खिसक गया और मेरी बीच की दरार दिखाये देनें लगी ! लेटते ही मैंनें हाथ भी ऊपर कर लिये जिससे ब्लाउज़ भी ऊपर हो गया और उसे मालिश करनें के लिये ज्यादा जगह मिल गयी ! वह मेरे पास बैठ कर मेरी कमर पर (आयोडेक्स पैन बाम) लगाकर धीरे धीरे मालिश करनें लगा ! उसका स्पर्श (टच) बड़ा ही सेक्सी था और मेरे पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी ! थोड़ी देर बाद मैंनें करवट लेकर राज की और मुँह कर लिया और उसकी जान्घ पर हाथ रखकर ठीक से बैठनें को कहा ! करवट लेनें से मेरी चूचियों ब्लाउज़ के ऊपर से आधी से ज्यादा बाहर निकाल आयी थी ! उसकी जान्घ पर हाथ रखे रखे ही मैंनें पहले की बात आगे बढ़ाई. “तुझे पता है कि लड़की कैसे पटाया जाता है?”
“अरे दीदी अभी तो मैं बच्चा हूँ ! यह सब आप बतायेंगी तब मालूम होगा मुझे” ! आयोडेक्स लगनें के दौरान मेरा ब्लाउज़ ऊपर खींच गया था जिसकी वजह से मेरी गोलाइयाँ नीचे से भी झांक रही थी ! मैंनें देखा कि वह एकटक मेरी चूचियों को घूर रहा है ! उसके कहनें के अन्दाज से भी मालूम हो गया कि वह इस सिलसिले मैं ज्यादा बात करना चाह रहा है!

“अरे यार लड़की पटानें के लिये पहले ऊपर ऊपर से हाथ फेरना पड़ता है. ये मालूम करनें के लिये कि वह बूरा तो नहीं मानेंगी”! “पर कैसे दीदी” ! उसनें पूछा और अपनें पैर ऊपर किये ! मैंनें थोड़ा खिसक कर उसके लिये जगह बनायी और कहा. “देख जब लड़की से हाथ मिलाओ तो उसको ज्यादा देर तक पकड़ कर रखो. देखो कब तक नहीं छुटाती है और जब पीछे से उसकी आँख बन्द कर के पूछों कि मैं कौन हूँ तो अपना केला धीरे से उसके पीछे लगा दो ! जब कान मैं कुछ बोलो तो अपना गाल उसके गाल पर रगड़ दो! वो अगर इन सब बातों का बूरा नहीं मानती तो आगे की सोचों” !
राज बड़े ध्यान से सुन रहा था ! वह बोला. “दीदी मधु तो इन सब का कोई बूरा नहीं मानती जबकि मैंनें कभी ये सोच कर नहीं किया था ! कभी कभी तो उसकी कमर मैं हाथ डाल देता हूँ पर वह कुछ नहीं कहती” ! “तब तो यार छोकरी तैयार है और अब तो उसके साथ दूसरा खेल शुरू कर” ! “कौन सा दीदी” “बातों वाला ! यानी कभी उसके सन्तरो की तारीफ करके देख क्या कहती है ! अगर मुस्करा कर बूरा मानती है तो समझ ले कि पटानें मैं ज्यादा देर नहीं लगेगी” !
“पर दीदी उसके तो बहुत छोटे-छोटे सन्तरे हैं ! तारीफ के काबिल तो आपके है” ! वह बोला और शर्मा कर मुँह छुपा लिया ! मुझे तो इसी घड़ी का इंतजार था ! मैंनें उसका चेहरा पकड़ कर अपनी और घूमते हुए कहा. “मैं तुझे लड़की पटाना सीखा रही हूँ और तो मुझी पर नजरें जमाये है” !
“नहीं दीदी सच मैं आपकी चूचियों बहूत प्यारी है ! बहुत दिल करता है” और उसनें मेरी कमर मैं एक हाथ डाल दिया! “अरे क्या करनें को दिल करता है ये तो बता” ! मैंनें इठला कर पूछा !
“इनको सहलानें का और इनका रस पीनें का”! अब उसके हौसले बुलन्द हो चुके थे और उसे यकीन था कि अब मैं उसकी बात का बूरा नहीं मानूँगी! “तो कल रात बोलता ! तेरी मुठ मारते हुए इनको तेरे मुँह मैं लगा देती ! मेरा कुछ घिस तो नहीं जाता ! चल आज जब तेरी मुठ मारूंगी तो उस वक्त अपनी मुराद पूरी कर लेना” ! इतना कह उसके पायजामा मैं हाथ डालकर उसका लण्ड पकड़ लिया जो पूरी तरह से तन गया था ! “अरे ये तो अभी से तैयार है” !
तभी वह आगे को झुका और अपना चेहरा मेरे सीनें मैं छुपा लिया ! मैंनें उसको बांहों मैं भरकर अपनें करीब लिटा लिया और कस के दबा लिया ! ऐसा करनें से मेरी चूत उसके लण्ड पर दबनें लगी ! उसनें भी मेरी गर्दन मैं हाथ डाल मुझे दबा लिया ! तभी मुझे लगा कि वो ब्लाउज़ के ऊपर से ही मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ को चूस रहा है ! मैंनें उससे कहा “अरे ये क्या कर रहा है? मेरा ब्लाउज़ खराब हो जायेगा” !
उसनें झट से मेरा ब्लाउज़ ऊपर किया और निप्पल मुँह मैं लेकर चूसना शुरू कर दिया! मैं उसकी हिम्मत की दाद दिये बगैर नहीं रह सकी ! वह मेरे साथ पूरी तरह से आजाद हो गया था ! अब यह मेरे ऊपर था कि मैं उसको कितनी आजादी देती हूँ ! अगर मैं उसे आगे कुछ करनें देती तो इसका मतलब था कि मैं ज्यादा बेकरार हूँ चुदवानें के लिये और अगर उसे मना करती तो उसका मूड़ खराब हो जाता और शायद फ़िर वह मुझसे बात भी ना करे ! इस लिये मैंनें बीच का रास्ता लिया और बनावटी गुस्से से बोली. “अरे ये क्या तो तो जबरदस्ती करनें लगा ! तुझे शर्म नहीं आती” !
“ओह्ह दीदी आपनें तो कहा था कि मेरा ब्लाउज़ मत खराब कर ! रस पीनें को तो मना नहीं किया था इसलिये मैंनें ब्लाउज़ को ऊपर उठा दिया” ! उसकी नज़र मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ पर ही थी जो कि ब्लाउज़ से बाहर थी ! वह अपनें को और नहीं रोक सका और फ़िर से मेरी चूचींयाँ को मुँह मैं ले ली और चूसनें लगा ! मुझे भी मज़ा आ रहा था और मेरी प्यास बढ़ रही थी ! कुछ देर बाद मैंनें जबरदस्ती उसका मुँह लेफ़्ट चूचींयाँ से हटाया और राइट चूचींयाँ की तरफ़ लेते हुए बोली. “अरे साले ये दो होती हैं और दोनों मैं बराबर का मज़ा होता है” !
उसनें राइट मम्मे को भी ब्लाउज़ से बाहर किया और उसका निप्पल मुँह मैं लेकर चुभलानें लगा और साथ ही एक हाथ से वह मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ को सहलानें लगा ! कुछ देर बाद मेरा मन उसके गुलाबी होंठों को चूमनें को करनें लगा तो मैंनें उससे कहा. “कभी किसी को किस किया है?” “नहीं दीदी पर सुना है कि इसमें बहूत मज़ा आता है” ! “बिल्कुल ठीक सुना है पर किस ठीक से करना आना चाहिये” !
“कैसे”
उसनें पूछा और मेरी चूचींयाँ से मुँह हटा लिया ! अब मेरी दोनों चूचियों ब्लाउज़ से आजाद खुली हवा मैं तनी थी लेकिन मैंनें उन्हे छिपाया नहीं बल्कि अपना मुँह उसकेउसकी मुँह के पास लेजा कर अपनें होंठ उसके होंठ पर रख दिये फ़िर धीरे से अपनें होंठ से उसके होंठ खोलकर उन्हे प्यार से चूसनें लगी ! करीब दो मिनट तक उसके होंठ चूसती रही फ़िर बोली !

“ऐसे” !

वह बहूत एक्साइटिड हो गया था ! इससे पहले कि मैं उसे बोलूँ कि वह भी एक बार किस करनें की प्रक्टीस कर ले. वह खुद ही बोला. “दीदी मैं भी करूं आपको एक बार” “कर ले” ! मैंनें मुस्कराते हुए कहा !

राज नें मेरी ही स्टाइल मैं मुझे किस किया ! मेरे होंठों को चूसते समय उसका सीना मेरे सीनें पर आकर दबाव डाल रहा था जिससे मेरी मस्ती दो गुणी हो गयी थी ! उसका किस खत्म करनें के बाद मैंनें उसे अपनें ऊपर से हटाया और बांहों मैं लेकर फ़िर से उसके होंठ चूसनें लगी ! इस बार मैं थोड़ा ज्यादा जोश से उसे चूस रही थी ! उसनें मेरी एक चूचींयाँ पकड़ ली थी और उसे कस कसकर दबा रहा था ! मैंनें अपनी कमर आगे करके चूत उसके लण्ड पर दबायी ! लण्ड तो एकदम तन कर आयरन रोड हो गया था ! चुदवानें का एकदम सही मौका था पर मैं चाहती थी कि वह मुझसे चोदनें के लिये भीख माँगें और मैं उस पर एहसान करके उसे चोदनें की इजाजत दूँ !
मैं बोली. “चल अब बहूत हो गया. ला अब तेरी मुठ मार दूँ” ! “दीदी एक रिक्वेस्ट करूँ” “क्या” मैंनें पूछा ! “लेकिन रिक्वेस्ट ऐसी होनी चाहिये कि मुझे बुरा ना लगे” !
ऐसा लग रहा था कि वह मेरी बात ही नहीं सुन रहा है बस अपनी कहे जा रहा है ! वह बोला. “दीदी मैंनें सुना है कि अन्दर डालनें मैं बहूत मज़ा आता है! डालनें वाले को भी और डलवानें वाले को भी ! मैं भी एक बार अन्दर डालना चाहता हूँ” !
“नहीं राज तुम मेरे छोटे भाई हो और मैं तुम्हारी बड़ी बहन” ! “दीदी मैं आपकी लूँगा नहीं बस अन्दर डालनें दीजिये” ! “अरे यार तो फ़िर लेनें मैं क्या बचा”! “दीदी बस अन्दर डालकर देखूँगा कि कैसा लगता है. चोदूंगा नहीं प्लीज़ दीदी” !
मैंनें उस पर एहसान करते हुए कहा. “तुम मेरे भाई हो इसलिये मैं तुम्हारी बात को मना नहीं कर सकती पर मेरी एक सर्त है ! तुमको बताना होगा कि अकसर ख़्यालों मैं किसकी चोदते हो?” और मैं बेड पर पैर फैला कर चित लेट गयी और उसे घुटनें के बल अपनें ऊपर बैठनें को कहा ! वह बैठा तो उसके पायजामा के ज़र्बन्द को खोलकर पायजामा नीचे कर दिया ! उसका लण्ड तन कर खड़ा था ! मैंनें उसकी बांह पकड़ कर उसे अपनें ऊपर कोहनी के बल लिटा लिया जिससे उसका पूरा वज़न उसके घुटनें और कोहनी पर आ गया ! वह अब और नहीं रूक सकता था ! उसनें मेरी एक चूचींयाँ को मुँह मैं भर लिया जो की ब्लाउज़ से बाहर थी ! मैं उसे अभी और छेड़ना चाहती थी !
सुन राज ब्लाउज़ ऊपर होनें से चुभ रहा है ! ऐसा कर इसको नीचे करके मेरे सन्तरे धाप दे” ! “नहीं दीदी मैं इसे खोल देता हूँ” ! और उसनें ब्लाउज़ के बटन खोल दिये! अब मेरी दोनों चुचियां पूरी नंगी थी ! उसनें लपक कर दोनों को कब्जे मैं कर लिया ! अब एक चूचींयाँ उसके मुँह मैं थी और दूसरी को वह मसल रहा था ! वह मेरी चूचियों का मज़ा लेनें लगा और मैंनें अपना पेटीकोट ऊपर करके उसके लण्ड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया ! कुछ देर बाद लण्ड को चूत के मुँह पर रखकर बोली. “ले अब तेरे चाकू को अपनें ख़रबूज़े पर रख दिया है पर अन्दर आनें से पहले उसका नाम बता जिसकी तो बहूत दिन से चोदना चाहता है और जिसे याद करके मुठ मारता है” !  दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम  पे पढ़ रहे है!
वह मेरी चूचियों को पकड़ कर मेरे ऊपर झुक गया और अपनें होंठ मेरे होंठ पर रख दिये ! मैं भी अपना मुँह खोलकर उसके होंठ चूसनें लगी ! कुछ देर बाद मैंनें कहा. “हाँ तो मेरे प्यारे भाई अब बता तेरे सपनों की रानी कौन है” !
“दीदी आप बुरा मत मानियेगा पर मैंनें आज तक जितनी भी मुठ मारी है सिर्फ़ आपको ख़्यालों मैं रखकर” !
“हाय भय्या तो कितना बेशर्म है ! अपनी बड़ी बहन के बारे मैं ऐसा सोचता था” ! “ओह्ह दीदी मैं क्या करूं आप बहूत खूबसूरत और सेक्सी है ! मैं तो कब से आपकी चूचियों का रस पीना चाहता था और आपकी चूत मैं लण्ड डालना चाहता था ! आज दिल की आरजू पूरी हुयी” ! और फ़िर उसनें शर्मा कर आंखे बन्द करके धीरे से अपना लण्ड मेरी चूत मैं डाला और वादे के मुताबिक चुपचाप लेट गया !
“अरे तो मुझे इतना चाहता है ! मैंनें तो कभी सोचा भी नहीं था कि घर मैं ही एक लण्ड मेरे लिये तड़प रहा है ! पहले बोला होता तो पहले ही तुझे मौका दे देती” ! और मैंनें धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलानी शुरू कर दी ! बीच-बीच मैं उसकी गाँड भी दबा देती !
“दीदी मेरी किस्मत देखिये कितनी झान्टू है ! जिस चूत के लिये तड़प रहा था उसी चूत में लण्ड पड़ा है पर चोद नहीं सकता ! पर फ़िर भी लग रहा है की स्वर्ग मैं हूँ” ! वह खुल कर लण्ड चूत बोल रहा था पर मैंनें बूरा नहीं माना ! “अच्छा दीदी अब वादे के मुताबिक बाहर निकालता हूँ” ! और वह लण्ड बाहर निकालनें को तैयार हुआ !
मैं तो सोच रही थी कि वह अब चूत मैं लण्ड का धक्का लगाना शुरू करेगा लेकिन यह तो ठीक उलटा कर रहा था ! मुझे उस पर बड़ी दया आयी ! साथ ही अच्छा भी लगा कि वादे का पक्का है ! अब मेरा फ़र्ज़ बनता था कि मैं उसकी वफादारी का इनाम अपनी चूत चुदवाकर दूँ ! इस लिये उससे बोली. “अरे यार तूनें मेरी चूत की अपनें ख़्यालों में इतनी पूजा की है ! और तुमनें अपना वादा भी निभाया इसलिये मैं अपनें प्यारे भाई का दिल नहीं तोड़ूँगी ! चल अगर तो अपनी बहन को चोद्कर बहनचोद बनना ही चाहता है तो चोद ले अपनी जवान बड़ी बहन की चूत” !
मैंनें जान कर इतनें गन्दे वर्ड्स उसे कहे थे पर वह बूरा ना मान कर खुश होता हुआ बोला. “सच दीदी” ! और फ़ौरन मेरी चूत मैं अपना लण्ड धका धक पेलनें लगा कि कहीं मैं अपना इरादा ना बदल दूँ !
“तू बहुत किस्मत वाला है राज” ! मैं उसके कुँवारे लण्ड की चूदाई का मज़ा लेते हुए बोली ! क्यों दीदी” “अरे यार तू अपनी जिन्दगी की पहली चूदाई अपनी ही बहन की कर रहा है और उसी बहन की जिसकी तू जानें कबसे चोदना चाहता था” !
“हाँ दीदी मुझे तो अब भी यकीन नहीं आ रहा है. लगता है सपनें में चोद रहा हूँ जैसे रोज आपको चोदता था” ! फिर वह मेरी एक चूचींयाँ को मुँह मैं दबा कर चूसनें लगा ! उसके धक्कों की रफ्तार अभी भी कम नहीं हुयी थी ! मैं भी काफी दिनों के बाद चुद रही थी इसलिये मैं भी चूदाई का पूरा मज़ा ले रही थी !
वह एक पल रुका फ़िर लण्ड को गहराई तक ठीक से पेलकर ज़ोर-ज़ोर से चोदनें लगा ! वह अब झड़नें वाला था ! मैं भी सातवें आसमान पर पहूँच गयी थी और नीचे से कमर उठा-उठा कर उसके धक्कों का जवाब दे रही थी ! उसनें मेरी चूचींयाँ छोड़ कर मेरे होंठों को मुँह मैं ले लिया जो कि मुझे हमेशा अच्छा लगता था ! मुझे चूमते हुई कस कस कर दो चार धक्के दिये और और “हाय सुनीता मेरी जान” कहते हुए झड़कर मेरे ऊपर चिपक गया ! मैंनें भी नीचे से दो चार धक्के दिये और “हाय मेरे राजा कहते हुए झड़ गयी !
चुदाई के जोश नें हम दोनों को निढाल कर दिया था ! हम दोनों कुछ देर तक यूँ ही एक दूसरे से चिपके रहे ! कुछ देर बाद मैंनें उससे पूछा. “क्यों मज़ा आया मेरे बहनचोद भाई को अपनी बहन की चूत चोदनें में” उसका लण्ड अभी भी मेरी चूत में था ! उसनें मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़ कर अपनें लण्ड को मेरी चूत पर कसकर दबाया और बोला. “बहुत मजा आया दीदी ! यकीन नहीं होता कि मैंनें अपनी बहन को चोदा है और बहनचोद बन गया हूँ” ! “तो क्या मैंनें तेरी मुठ मारी है” “नहीं दीदी यह बात नहीं है” ! “तो क्या तुझे अब अफसोस लग रहा है अपनी बहन को चोद्कर बहनचोद बननें का” !
“नहीं दीदी ये बात भी नहीं है ! मुझे तो बड़ा ही मज़ा आया बहनचोद बननें मैं ! मन तो कर रह कि बस अब सिर्फ़ अपनी दीदी की जवानी का रा ही पीता रहूं ! हाय दीदी बल्कि मैं तो सोच रहा हूँ कि भगवान नें मुझे सिर्फ़ एक बहन क्यों दी ! अगर एक दो और होती तो सबको चोदता ! दीदी मैं तो यह सोच रहा हूँ कि यह कैसे चूदाई हुयी कि पूरी तरह से चोद लिया लेकिन चूत देखी भी नहीं” !
“कोई बात नहीं मज़ा तो पूरा लिया ना?” “हाँ दीदी मज़ा तो खूब आया” ! “तो घबराता क्यों है? अब तो तूनें अपनी बहन चोद ही ली है ! अब सब कुछ तुझे दिखाऊंगी ! जब तक माँ नहीं आती मैं घर पर नंगी ही रहूँगी और तुझे अपनी चूत भी चटवाऊँगी और तेरा लण्ड भी चूसूँगी ! बहुत मज़ा आता है”! “सच दीदी” “हाँ ! अच्छा एक बात है तो इस बात का अफसोस ना कर कि तेरे सिर्फ़ एक ही बहन है. मैं तेरे लिये और चूत का जुगाड़ कर दूंगी” !
“नहीं दीदी अपनी बहन को चोदनें मैं मज़ा ही अनोखा है! बाहर क्या मज़ा आयेगा” “अच्छा चल एक काम कर तो माँ को चोद ले और मादरचोद भी बन जा”! “ओह दीदी ये कैसे होगा”
“घबरा मत पूरा इन्तज़ाम मैं कर दूंगी ! माँ अभी 39 साल की है. तुझे मादरचोद बननें मैं भी बड़ा मज़ा आयेगा” !
“हाय दीदी आप कितनी अच्छी हैं ! दीदी एक बार अभी और चोदनें दो इस बार पूरी नंगी करके चोदूंगा” ! “जी नहीं आप मुझे अब माफ़ करिये” ! “दीदी प्लीज़ सिर्फ़ एक बार” ! और लण्ड को चूत पर दबा दिया !
“सिर्फ एक बार” ! मैंनें ज़ोर देकर पूछा ! “सिर्फ एक बार दीदी पक्का वादा” !
“सिर्फ एक बार करना है तो बिलकुल नहीं” ! “क्यों दीदी” अब तक उसका लण्ड मेरी चूत मैं अपना पूरा रस निचोड़ कर बाहर आ गया था ! मैंनें उसे झटके देते हुए कहा. “अगर एक बार बोलूँगी तब तुम अभी ही मुझे एक बार और चोद लोगे” “हाँ दीदी” !
“ठीक है बाकी दिन क्या होगा ! बस मेरी देखकर मुठ मारा करेगा क्या ! और मैं क्या बाहर से कोई लाऊंगी अपनें लिये ! अगर सिर्फ़ एक बार मेरी लेनी है तो बिलकुल नहीं” !
उसे कुछ देर बाद जब मेरी बात समझ मैं आयी तो उसके लण्ड में थोड़ी जान आयी और उसे मेरी चूत पड़ा रगड़ते हुए बोला. “ओह दीदी यू र ग्रेट” !

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