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"मैंने अपनी दीदी की आँचल खुशियो से भर दी 2"

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मैंने पुछ दीदी जीजू के लंड से वीर्य नहीं निकलता क्या? तो दीदी ने कहा उनके लंड से तिन चार बूंद वीर्य निकलता हैं। तभी तो में माँ नहीं बनी और अब तेरा वीर्य मेरी बच्चेदानी में जायेगा और तू अपने बच्चे के मामा बनेगा. फिर हमने कपड़े पहन लिए और उसके बाद में रोज रात को दीदी को चोदने लगा और जब दिन में मौका मिलता में दीदी की चुदाई कर देता.
और 25 दिन बाद दीदी ने कहा की वह माँ बनने वाली हैं। और में यह सुन कर एकदम खुश हो गया और दीदी ने जीजू को फोन कर के अपने माँ बनने की बात बताई.
और फिर दीदी ने यह बात घर में बताई तो सारे घर वाले बहुँत खुश हो गये और फिर आंशु दीदी को लेकर मार्केट गयी.
और करीब २ घंटे बाद दीदी और आंशु मार्केट से आई और में जब रात को दीदी के पास गया और दीदी को चूमने लगा तो दीदी ने मुझे गोद में बिठाकर कहा आआओ मेरे राजा भैया तूने मुझे माँ बनाकर मेरी जिंदगी को खुशियों से भर दिया हैं।, अब में तुजे क्या गिफ्ट दू, मैंने कहा दीदी तुम खुश हो यही मेरे लिए गिफ्ट हैं।.
तो दीदी ने कहा की में तो तेरे लिए एक खुबसुरत गिफ्ट लायी हुँ. मैंने कहा क्या? फिर दीदी ने कहा की थोडा सब्र करो और फिर मेरे लंड को चूमा और फिर अपने मुह में ले कर चूसने लगी और चूसती रही.
मैंने कहा दीदी छोडो मेरा लंड वीर्य निकालने वाला हैं। दीदी ने इशारे से मुझे कहा के निकाल दे और में अपना वीर्य दीदी के मुह में छोड़ने लगा और दीदी मेरा वीर्य पि गयी और फिर मेरा लंड चाट कर मेरे लंड पर लगा हुँआ वीर्य चाट गयी.

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फिर दीदी बेड से उठी और सिंदूर ले कर मुझे बिठाकर मेरी टांगो के बिच में बैठ गयी एयर मेरा लंड अपने मुह में ले कर मुझे अपनी मांग भरने को कहा.

मेंने कहा दीदी में आपकी मांग कैसे भर सकता हुँ दीदी मुझे गाली देते हुँए बोली साले भेन्चोद अपनी बहन को चोद कर उसकी कोख तो भर सकता हैं। और मांग नहीं भर सकता. मैंने दीदी के हाथ से सिंदूर ले कर दीदी की मांग में भर दिया और दीदी ने कहा के मेरा असली पति तो तुम हो और फिर उठकर बाथरूम में गयी और कुछ देर बाद जब वापस आई तो दीदी के साथ आंशु भी थी.

में दीदी के साथ आंशु को देख कर हैरान हो गया तभी दीदी ने कहा मेरे अजीत यह हैं। तेरा गिफ्ट और अब तू मेरे साथ आंशु को भी चोद और दीदी ने जट से मेरा लंड पकड़ लिया और आंशु को मेरा लंड दिखाते हुँए बोली देख आंशु इसी लंड ने मेरी लाइफ बना दी वरना में पूरी जिंदगी बांज ही रहती और फिर दीदी ने मेरा लंड आंशु के हाथ में दे दिया और आंशु ने मेरा लंड पकड़ लिया और आगे पीछे करने लगी और मैंने भी आंशु के चुचे पकड़े.
फिर दीदी ने एक एक कर के आंशु के कपड़े उतार दिए, में आंशु का गोरा मस्त और गदराया जिस्म देख कर मस्त हो गया और मैंने जट से आंशु के चुचे पकड़ लिए मेरे चुचे पकड़ने से आंशु मस्ती में आह हां उऔउ जहह करने लगी और मेरा लंड पकड़ कर मेरी मुठ मारने लगी और दीदी मेरा लंड चूसने लगी.
फिर जब मैंने आंशु की चूत देखि तो आंशु की चूत दीदी की चूत से भी टाईट थी और में अपनी ऊँगली आंशु की चूत में डालने लगा पर मेरी उंगली आंशु की चूत में नहीं गयी. आंशु ने दीदी को कहा दीदी मेरी चूत में अब भैया की उंगली भी नहीं जा रही फिर उनका बड़ा लंड कैसे मेरी चूत में जायेगा. दीदी ने कहा के तू फिकर मत कर, जैसे यह मेरी चूत में गया हैं। वैसे ही तेरी चूत में भी जायेगा.

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फिर दीदी ने आंशु को बेड पर लेटा दिया और उसकी दोनों टाँगे खोल कर मेरा लंड उसकी चूत के होल पर रख कर बोली अजीत रुक और फिर एक कंडोम निकाल कर मेरे लंड पर लगाने लगी, पर वह नहीं लग रहा था क्योंकि मेरा लंड कंडोम से बड़ा था तो फिर मैंने दीदी को कहा की दीदी अब क्या होगा?
दीदी ने कहा तू चिंता मत कर, में गर्भ ना रहने वाली टेबलेट भी लेकर आई हुँ, और आंशु का सर अपनी गोद में रख कर मुझे आंशु की चूत में लंड डालने को कहा और मैंने आंशु की चूत पर अपना लंड रखा और एक धक्का लगाया और मेरा लंड का टोपा आंशु की चूत में फस गया और मैंने एक धक्का लगाया और मेरा लंड आंशु की चूत में चला गया और आंशु दर्द से चिल्लाने लगी.

दीदी ने आंशु के मुह पर अपने हाथ रख दिए और बोली की अजीत अपना लंड आंशु की चूत से मत निकालना, मैंने कहा दीदी आंशु को बहुँत दर्द हो रहा हैं। और अगर इसके चिल्लाने से मम्मी पापा को पता चल गया तो दिदि ने कहा की में उन्हैं।ं दूध में नींद की टेबलेट मिला कर दे चुकी हुँ और अब वह ९ बजे से पहले नहीं उठने वाले हैं।.

और मुझे अपना बाकि लंड भी आंशु की चूत में डालने को बोली, और मेने फिर एक जोरदार धक्का मारा और अपना सारा लंड आंशु की चूत में डाल दिया और आंशु दर्द से चिल्लाने लगी पर दीदी का हाथ आंशु के मुह पर था और उसकी आवाज गले में ही अटक गयी, थोड़ी देर आंशु का दर्द कम हुँआ और उसे दर्द के साथ मजा आने लगा और में धीरे धीरे आंशु की चूत में धक्के देने लगा.

और आंशु भी अपनी गांड को ऊपर निचे कर के मजे लेने लगी, मेने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर से आंशु को चोदने लगा आंशु भी अहह औउ उह उःह करने लगी और मेरा वीर्य निकालने को हुँआ और मेने दीदी को कहा दीदी मेरा निकलने वाला हैं।. दीदी ने कहा इसकी चूत में ही छोड़ दो और तभी मेरा लंड से वीर्य की पिचकारी आंशु की चूत में निकल गयी.

और फिर जब मेने आंशु की चूत से अपना लंड निकाला तो आंशु की चूत से खून निकला और मेने दीदी को कहा दीदी आंशु की चूत से वहुँत खून निकल रहा हैं।, दीदी ने कहा मेरे अजीत तेरे लंड से आंशु की चूत की सिल टूट गयी हैं। और इसलिए उसकी सिल टूटने से इतना खून निकल रहा हैं।, तुम चिंता मत करो.

फिर आंशु को ले कर बाथरूम में गयी और आंशु से चला भी नहीं जा रहा था कुछ देर बाद दीदी आंशु की चूत को साफ करने आई तो आंशु बहुँत खुश थी और फिर मेने दीदी को भी चोदा.
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अब दीदी अपने पति यानि मेरे जीजू के पास हैं। और में रोज रत को आंशु की चुदाई करता हुँ और उसे गर्भ ना रहने की गोली खिला देता हुँ, ताकि वो माँ ना बन जाये.

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