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“मेरे साथ मेरी अम्मा की भी चुदाई हुई”

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मेरा नाम नगमा है! मैं 18 साल की हूँ| यह बात उन दिनों की है! जब मैं स्कूल में पढ़ती थी| मेरी मम्मी परवीन एक प्राइवेट स्कूल में इंग्लिश की टीचर हैं और मेरे पापा दुबई की एक कंपनी में हैं| वह साल दो साल में इंडिया आया करते हैं और 25-30 दिनों के लिए ही आते हैं| जब वे घर आते थे! तब मम्मी बहुत खुश रहती थीं! लेकिन उनके जानें के बाद मम्मी बहुत उदास हो जाती थीं|
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हमारा घर शहर की आबादी से दूर था, हम किराये के मकान में रहते थे, यह घर पापा के दोस्त कुर्वान चाचू का था| कुर्वान चाचू पापा के दोस्त थे| यही वजह थी कि वह हम लोगों से किराया नहीं लिया करते थे| कुर्वान चाचू हमारे घर अक्सर आया करते थे| उनके आनें पर मम्मी बहुत खुश रहती थीं| उनके आनें से मम्मी का अकेलापन दूर हो जाता था|
कभी-कभी हम लोग कुर्वान चाचू के साथ बाहर उनकी कार से आउटिंग पर भी जाते थे| धीरे-धीरे वह हमारे साथ बेहद घुल-मिल गए थे|
एक दिन मैं स्कूल से घर आई तो देखा कि मेरे पापा के दोस्त कुर्वान चाचू आए हुए हैं|
मम्मी दोपहर का खाना बना रही थीं| मैंनें अपना स्कूल बैग कमरे में रखा और किचन की तरफ बढ़ गई! लेकिन अन्दर का नज़ारा देख कर मेरे पाँव ठिठक गए थे|

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मैंनें चुपके से किचन में झांक कर देखा! कुर्वान चाचू नें मम्मी को अपनें आगोश में लिया हुआ था| वह अपनें हाथों को मम्मी के बदन पर घुमा रहे थे| मम्मी चाचू की कमर पर हाथ फिरा रही थीं! फिर गर्दन पर! और फिर सर पर! उधर चाचू मम्मी के होंठों को छोड़ कर उनके गालों को चूमनें लगे और फिर गर्दन पर अपनें होंठ फिरानें लगे|
मम्मी लगातार उनका साथ दे रही थीं और चाचू भी उनके गुदाज चूचियाँ लगातार दबा रहे थे| चाचू नें मम्मी का जालीदार सफ़ेद कुरता ऊपर उठा दिया था| मम्मी नें नीले रंग की ब्रा पहनी थी| कुर्वान चाचू अब अपनें होंठों को उनकी गर्दन पर लेकर आए और फिर उनके कंधों पर चूमनें लगे|
यह सब देख कर मैं पागल हुए जा रही थी, मैंनें ऐसा पहली बार देखा था| मेरे जिस्म में आग सी लग गई थी| मैं यह समझ चुकी थी कि एक शादीशुदा औरत को पूरे-पूरे साल बिना शौहर के रहना बेहद मुश्किल होता है| पेट की भूख तो खानें से मिटाई जा सकती है! लेकिन जिस्म की भूख का क्या?
यही वजह थी कि मम्मी नें अपना जिस्म कुर्वान चाचू को सौप दिया था|
वैसे भी मेरी मम्मी एक कॉलेज में टीचर थीं| वह खुले विचारों वाली महिला थीं| लेकिन मुझे फिर भी अपनी मम्मी से यह उम्मीद नहीं थी कि कुर्वान चाचू मम्मी को चोदेंगे|
किशोरावस्था में होनें के कारण मेरी इसमें दिलचस्पी और बढ़ गई थी, मैं न चाहते हुए भी उन दोनों को देखे जा रही थी|

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अभी कॉलेज से आकर मैंनें अपना ड्रेस भी नहीं बदला था| मैं अपनी चूचियों को शर्ट के ऊपर से ही मसलनें लगी| चाचू और मम्मी को बड़ा मजा आ रहा था|

मम्मी नें चाचू की पैंट में अपना हाथ डाला हुआ था| वह चाचू के लंड को सहलानें लगीं! जिससे चाचू का लंड खड़ा होकर 6 इंच का हो चुका था|
चाचू नें अपना एक हाथ मम्मी की सलवार में डाल दिया! शायद उनकी चुत गीली हो चुकी थी और थोड़ा-थोड़ा चिपचिपा पानी निकल रहा था|
चाचू नें मम्मी की सलवार का इज़ारबंद खोलना चाहा! तो मम्मी नें हाथ पकड़ कर रोक दिया:-अभी नहीं, नगमा आ गई है स्कूल से! रात को!

मम्मी अपनें कपड़े सम्हालते हुए किचन से बाहर आ गई थी| उन्होंनें खाना लगाया और मुझे आवाज़ दी| हम तीनों नें मिलकर लंच किया|
फिर मैं टीवी देखनें लगी मम्मी और चाचू आराम करनें लगे| मैं यह समझ चुकी थी कि आज रात को मेरी मम्मी कुर्वान चाचू से चुदवायेंगी|

मैं यही सोच-सोच कर खुश हो रही थी कि आज मुझे चाचू-मम्मी की चुदाई देखनें को मिलेगी|
फिर रात को कुर्वान चाचू मम्मी और मैं खाना खाकर रात साढ़े दस बजे सोनें लगे, मुझे नींद तो आ नहीं रही थी|
तकरीबन दो घंटे ऐसे ही बीत गए| मेरी आँख हल्की सी लगनें लगी थी| तकरीबन 15 मिनट बाद मेरे कानों में चूड़ियों के खनकनें की आवाज सुनाई पड़ी| मेरी नींद खुल चुकी थी! मैंनें धीरे से अपनें कमरे की खिड़की खोली! जो कि मम्मी के कमरे की तरफ खुलती थी|
कुर्वान चाचू मेरी मम्मी के बदन पर अपना हाथ फेर रहे थे, वो शरमा रही थीं, चाचू नें उनका सफ़ेद दुपट्टा निकल कर अलग कर दिया था और उनके कन्धे पर हाथ रख दिया|

वो वहाँ से उठकर जानें लगीं! चाचू नें मम्मी को पीछे से कस कर पकड़ कर अपनें होंठ उनकी गर्दन पर रख दिए|
वो थोड़ा छूटनें के लिए कसमसाईं! उनके चहरे पर एक घबराहट सी थी:-कुर्वान! है तो यह गलत ना!

कुछ गलत नहीं है परवीन! तुम्हारे शौहर मेरे दोस्त हैं! और फिर तुम्हारी भी तो कुछ ज़रूरतें हैं|

कुर्वान चाचू नें मम्मी की गर्दन पर अपनें होंठ फिराते हुए कहा|
मम्मी नें एक लम्बी सी सांस लेते हुए आँखें बंद कर ली थीं:-मुझे डर लगता है! किसी को मालूम पड़ गया तो?

मम्मी थोड़ा झिझक रही थीं! लेकिन फिर धीरे-धीरे उनका विरोध कम हो गया और मम्मी नें खुद को ढीला छोड़ दिया|

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चाचू नें उन्हें अपनें पास खींचा और मम्मी के गुलाबी होंठों पर अपनें होंठ रख दिए|
वो थोड़ा ना-नुकर करते हुए बोलीं:-तुम्हें नहीं लगता कि हम जो कर रहे हैं, ये सब गलत है! मुझे अपनें शौहर को धोखा नहीं देना चाहिए|

चाचू नें कहा:-परवीन! हम दोनों जो कर रहे हैं! वो दो जिस्मों की जरुरत है! तुम्हारे शौहर अल्ताफ मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं! दुबई जानें से पहले उन्होंनें मुझसे कहा था कि मैं आपका और आपकी बेटी नगमा का ख्याल रखूँ! यदि तुम्हारा शौहर तुम्हारी इस जरूरत को पूरा करता है! तो तुम बेशक जा सकती हो! इस उम्र में ये सब सामान्य बात है| इसे धोखा नहीं कहते हैं! यह तुम्हारी ज़रूरत है|

कुर्वान चाचू नें अपनी बात को जोर देते हुए मम्मी को समझाया था|
मम्मी मन ही मन में चाचू साथ देना चाहती थीं! पर सीधा कह न सकीं| चाचू भी उसके मन की बात समझ गए और उसे चूमनें लगा| धीरे-धीरे मम्मी नें खुद को समर्पित कर दिया था और अब उनका विरोध समाप्त हो चुका था|
मैं खिड़की से झांकते हुए अपनी मम्मी को अपनें पापा के दोस्त से चुदते हुए देख रही थी|
उन दोनों नें तकरीबन दस मिनट तक किस किया| अब मम्मी की शर्म खत्म हो गई थी! वह भी खुल गई थीं और चाचू का भरपूर साथ दे रही थीं|
चाचू उनके गाल के बाद उनके वक्ष स्थल पर चुम्बन करनें लगे, इससे वो उत्तेजित हो गईं| वह उनके चूचियाँों को सहला रहे थे! और उनके चूचुकों को अपनी उँगलियों से दबा कर मसल रहे थे! मम्मी पूरी तरह गर्म हो गई थीं|
यह सब देख कर मेरे दिल में एक अजीब सी बेचैनी होनें लगी थी| मेरा हाथ खिड़की पर खड़े हुए ही अपनी सलवार के अन्दर न चाहते हुए भी चला गया था|
उधर चाचू नें अपना हाथ मम्मी के पेट के ऊपर से सहलाते हुए उनकी सलवार में सरका दिया था! शायद उनका हाथ मम्मी की चुत पर था|

“आह्ह्ह! कुर्वान!”
मम्मी मचल उठी थीं! फिर चाचू मम्मी को अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर ले गए| उनको बिस्तर पर लेटा कर पीछे से उनकी कुर्ती की डोरियाँ खोलनें लगे|

मम्मी नें फिर से थोड़ी ना-नुकुर की!

पर चाचू नें कहा:-अब मुझे मत रोको! जब भी मैं तुम्हारे जिस्म को मज़ा देता हूँ, हर बार तुम ऐसे करती हो कि जैसे मैं पहली बार तुम्हारे साथ ऐसा कर रहा होऊँ? हर बार तुम ना नुकुर करती हो?
प्यासी मम्मी की चुत पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी! इसलिए कुर्वान चाचू को भी कोई दिक्कत नहीं हुई| पाँच मिनट बाद कुर्वान चाचू बिस्तर पर मम्मी के ऊपर जा पहुँचे और मम्मी के पीठ की चुम्मियाँ लेनें लगे|
मैं यह सब देख रही थी! लेकिन मैंनें अपनी खिड़की अधखुली कर रखी थी इसलिए मम्मी! चाचू को कोई शंका नहीं हुई|
कुर्वान चाचू धीरे मम्मी के दूध दबानें लगे! मम्मी के मुँह से आवाजें निकलनी शुरू हो गई थीं| कुर्वान चाचू नें धीरे से मम्मी की गुलाबी सलवार का इजारबंद खोल दिया और धीरे से कुर्ती भी ऊपर सरका दी| मम्मी अब अधनंगी हो चुकी थीं| उन्होंनें अपनी कमर पर एक काली डोरी बांधी हुई थी| कुर्वान चाचू के द्वारा मम्मी की चुदाई को देख कर मैं पागल हो रही थी|
कुर्वान चाचू नें इतनी जोर से मम्मी के दूध दबाए और चूसे कि मम्मी “आ! आहा! अआ! हह्हा!आआह्ह! धीरे से!” करनें लगीं|
कुर्वान चाचू नें धीरे-धीरे मम्मी की सलवार घुटनों तक सरका दी और उनकी काली चड्डी के ऊपर से ही मम्मी के चुतड़ दबानें और चूमनें लगे| मम्मी नें करवट बदली और खुद ही अपनें जम्पर को उतार कर फेंक दिया| मम्मी अब ब्रा और पैंटी में थीं|
मैंनें आज पहली बार अपनी मम्मी का गोरा जिस्म देखा था| ब्रा-पैंटी में वो मुझे उस समय बहुत ही कामुक! सुन्दर और मासूम लग रही थीं, वे 34 साल की होनें के बावजूद इस वक़्त जवान लड़की लग रही थीं|

चाचू मम्मी को अपनी बाँहों में लेकर! उनके होंठों को चूसनें लगे, अब वो भी चाचू का साथ दे रही थीं|
मेरे लिए यह अनुभव जन्नत से कम नहीं था| कुर्वान चाचू नें उठकर मम्मी के पाँव सहलानें शुरू कर दिए और उसमें गुदगुदी करनें लगे| मम्मी अपना पाँव हटानें लगीं|

वह दोनों किसी प्रेमी जोड़े की तरह एक-दूसरे से खेल रहे थे, उनके अन्दर कोई जल्दबाजी नहीं थी, दोनों एक-दूसरे को प्यार कर रहे थे|

कुर्वान चाचू उनकी पायल को चूमनें लगे और हाथ से पाँव पर मालिश करनें लगे| कुर्वान चाचू धीरे से मम्मी की पैंटी की तरफ पहुँचे और उसे उतार कर किनारे रख दी|
उनका लंड जो इतना खड़ा हो चुका था कि चड्डी फाड़ रहा था| चाचू पूरे नंगे हुए और मम्मी की टांगें ऊपर करके अपना सात इंच का लंड मम्मी की फूली हुई चुत में डाल दिया|

मम्मी सिसकार उठीं:-अअह आआ! आआह! अहह!हाहा आआहह्ह!हा कुर्वान धीरे-धीरे! नगमा उठ जाएगी! अहह्ह!सिइइइ!
मम्मी नें मेरे जाग जानें के डर से अपनी आवाजें बंद कर लीं| कुर्वान चाचू धीरे-धीरे चुदाई की गति तेज करनें लगे| मम्मी की चूड़ियाँ खन-खन कर रहीं थीं|

चाचू उनको तेज-तेज चोदनें लगे|
मम्मी भी चाचू के कंधे को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थीं! वैसे ही कुर्वान चाचू भी तेज स्पीड में उनकी चुत में धक्के लगा रहे थे| उनका सात इंच का लंड मम्मी की चुत में पूरा पेवस्त हो रहा था| मम्मी अपनी टांगें ऊपर किए हुए बिस्तर पर पड़ी लम्बी-लम्बी साँसें भर रहीं थीं|
तकरीबन आधे घंटे तक कुर्वान चाचू मम्मी को लंड डालकर चोदते रहे! उसके बाद वे दोनों शांत हो गए| इसी के साथ उनकी पायलों की “छुन-छुन” भी बंद हो गई थी| शायद कुर्वान चाचू झड़ चुके थे|
वह दोनों काफ़ी देर बिस्तर पर नंगे ही पड़े रहे! उसके बाद फिर वो दूसरी बार के लिए तैयार हुए|
कुछ देर बाद उन्होंनें मम्मी को फिर से चूमना-चाटना शुरू कर दिया| मम्मी नें भी कुर्वान चाचू के लंड को मुँह में लेकर उनके लौड़े को चूसना शुरू किया| पहली ठोकर के सारे वीर्य साफ़ को किया|
कुर्वान चाचू मम्मी को फिर से प्यार करनें लगे| उनके दूध दबानें शुरू कर दिए| अब कुर्वान चाचू का लौड़ा फिर से हाहाकारी हो गया था| इस बार उन्होंनें मम्मी को उल्टा किया! मतलब चाचू नें मम्मी को कुतिया बना दिया|

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