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“मेरे साथ मेरी अम्मा की भी चुदाई हुई”-4

मुस्कुराते हुए मम्मी धीरे से नीचे बैठ गईं और उनकी जीन्स को नीचे खिसका दिया! फिर उसे धीरे से नीचे उतार दिया| चाचू का सात इंच का लंड बाहर आ गया! उनका सुपाड़ा पहले से ही खुला हुआ था! मम्मी नें मुस्करा कर ऊपर देखा और लंड को अपनें मुख में डाल लिया| चाचू नें मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली|

अब नसीम चाचू के हाथ मम्मी की ब्रा को खोलनें में लगे थे! मम्मी नें उनका लंड चूसना छोड़ कर पहले अपनी ब्रा को उतार दिया!

हाय रे… मम्मी के उरोज तो सच में बहुत सधे हुए थे! हल्का सा झुकाव लिए! चिकनें और अति सुन्दर!
मम्मी नें फिर से उनका लंड अपनें मुख में ले लिया और चूसनें लगीं| चाचू के हाथ मम्मी के बालों में चल रहे थे! उनके बाल खुल गए थे|
अब उन्होंनें मम्मी को उठा कर खड़ा कर लिया:-शबनम! मुझे भी आप अपनी चुत को प्यार करनें की इजाजत देंगी?”

नसीम की इस बात पर पहले तो मम्मी शरमा गईं! फिर वो बिस्तर पर चित्त लेट गईं और उन्होंनें अपनी दोनों टांगें ऊपर को खोलते हुए अपनी चुत पसार ली|
“हाय! शबनम! इतनी चिकनी! इतनी प्यारी! लंड लगते ही भीतर फ़िसल जाए! 34 साल की होकर भी तुम किसी कुंवारी लड़की से कम नहीं हो|”
“ऐसे मत बोलो! मेरी जान! बस इसे चूम लो! फिर चाहे जो करो! भले ही उसमें अपना अन्दर उतार दो!”

नसीम:-थैंक्स यार कुर्वान! तेरे दोस्त की बीवी तो मस्त माल है! मैं तो कहता हूँ कि परमानेंंट बदल ले इसे मेरी बीवी से! तू मेरी बीवी नगमा को जब चाहे! जहाँ चाहे! ले जाया कर! और जैसे चाहे चोदा कर|

“अरे यार! तू भी शबनम को जब चाहे ले जा सकता है! अब शबनम हम दोनों की दोस्त है|”
कुर्वान चाचू नें नसीम की इस बात का हँस कर जवाब दिया था|
“अच्छा जी थोड़ा कम मस्का लगाओ!”
मम्मी को चुदनें की बहुत लग रही थी! इस पर चाचू नें अपना मुँह मम्मी की चुत पर लगा दिया! और उनके दानें को उनके होंठों नें मसल दिया|
“सीईईए!” करते हुए मम्मी नें आँखें बंद कर लीं और अपनी चुत उछालनें लगीं|
मेरी चुत में भी यह देख कर पानी उतर आया! इधर मैं अपनी चुत को दबानें लगी|
मम्मी तो खुशी के मारे जैसे उछल रही थीं! पर चाचू चुत से चिपके हुए उसका रस चूसनें में लगे थे|
“अब तड़पाओ मत! जैसा मैं कहूँ वैसा करो!”

“शबनम! पीछे घूम कर कुतिया बन जाओ! पहले तुम्हारी चिकनी गाण्ड मारूंगा!”

“ओह! तुम्हें भी गाण्ड मारना अच्छा लगता है! कोई बात नहीं! मेरे दोनों तरफ़ छेद हैं! किसी को भी चोद दो! पर पहले अपना ये लंड मुझे मुँह से चूसनें दो ना!”

“ओह! जैसी शबनम जी की इच्छा!”
नसीम चाचू नें एक बार फिर बिस्तर पर बैठ गए और मम्मी को मुँह में अपना लंड दे दिया| मम्मी के मुँह से बीच-बीच में सिसकारी भी निकल जाती थी| वो अपनें कठोर लंड को मम्मी के मुँह में मारते रहे और मम्मी नें अपनी चुत घिसवाना चालू कर दिया|
मुँह से लौड़ा चुसवाते हुए जैसे ही चाचू का वीर्य छलका! मम्मी के मुँह से भी सीत्कार निकल पड़ी| मम्मी चाचू का सारा वीर्य गटक गई थीं! और अब वे उनके लंड को चाट-चाट कर साफ़ करनें लगी थीं|
“इसमें आपको बहुत मजा आता है ना?”
“हाँ” कहते हुए उनके लंड को मम्मी नें हिलाया! फिर मम्मी नें चाचू के लौड़े को अपनें चिकनें बोबे से लगा दिया और उसे अपनी छाती पर घिसनें लगी|
मम्मी अब बिस्तर पर बैठ गईं और अपनी चिकनी चुत को उंगली से पहले सहलानें लगीं! फिर चुत की फांक को मसलनें सी लगीं| फिर मम्मी नें अपना दाना उभार कर देखा और उसे मसलनें लगीं! उन्होंनें अपनी गीली चुत में अपनी उंगली घुसा ली और “आह” भरते हुए हस्तमैथुन करनें लगीं|
मम्मी जल्दी ही झड़ गईं! वो शायद पहले से ही बहुत उत्तेजित थीं|
मम्मी के झड़ते ही नसीम चाचू मम्मी की चुत का रस चूसनें लगे! मम्मी नें उन्हें सिसकारी लेते हुए अपनी जांघों के बीच दबा लिया|
“अब देखो! मैं फ़िर तैयार हूँ! अब मैं तुम्हारी जम कर गाण्ड चोदूँगा! मजा आ जाएगा!”
मम्मी नें घोड़ी बन कर अपनी सुडौल गाण्ड पीछे की और उभार दी! नसीम चाचू को गाण्ड मारनें का शौक था, उन्होंनें धीरे से लंड गाण्ड में डाल दिया और मम्मी मस्त हो गईं!

ये सब देखनें में मुझे बहुत आनन्द आ रहा था|
मम्मी की गाण्ड को चाचू नें बहुत देर तक बजाया, मम्मी भी चाचू के स्खलित होनें तक गाण्ड चुदाती रहीं|

मम्मी की गाण्ड मार कर चाचू सुस्तानें लगे|

“जूस पियोगे या दूध लाऊँ?”

“अभी तो दूध ही पियूँगा! फिर जूस!”

“ही ही ही!”
मम्मी जैसे ही दूध लानें के लिए उठीं! चाचू नें उन्हें फिर से गोदी में खींच लिया और उनकी चूचियों को अपनें मुँह से दबा लिया|

“शबनम! मेरी जान कहाँ जा रही हो! अपनें दूध नहीं पिलाओगी क्या?”

चाचू मम्मी को गुदगुदाते हुए दूध पीनें लगे|

“हुंह!”
मैं अपनी चूत में उंगली करते हुए सोच रही थी कि चाचू मम्मी के दूध तो खूब चूस-चूस कर पी रहे हैं! मेरे तो चूसते ही नहीं हैं!

मम्मी गुदगुदी के मारे सिसकारियाँ भरनें लगीं|

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“बहुत प्यारे हो तुम दोनों! कैसी-कैसी शरारतें करते हो!”
दोनों नंगे ही एक-दूसरे के साथ खेल रहे थे! खेलते हुए उन दोनों में फिर से आग भरनें लगी थी| कुर्वान चाचू का लंड फुंफकारनें लगा था|

“अब देरी किस बात की है!” मम्मी नें चुदासे स्वर में कहा|

“नहीं मुझे अभी दूध पीनें दो! न!”

“पहले बस एक बार! मेरे ऊपर चढ़ जाओ! मुझे शांत कर दो!”
मम्मी नें अपनी दोनों खूबसूरत सी टांगें उठा लीं! चाचू उन टांगों के बीच में समा गए| कुछ ही पलों में चाचू का मोटा लंड मम्मी की चुत को चूम रहा था| चाचा का लंड मम्मी की चुत में घुसता चला गया|

मम्मी आनन्द से झूम उठी थीं|
इधर मेरी चुत नें भी पानी छोड़ दिया! मुझे भी एक मीठी सी गुदगुदी हुई|
मेरी मम्मी अपनी टांगें ऊपर उठा कर उछल-उछल कर चुदवा रही थीं और नसीम चाचू का लंड चूस रही थीं|

मेरा हाल इधर खराब होता जा रहा थ, मम्मी की मधुर चीखें मेरे कानों में रस घोल रही थीं|
दोनों गुत्थम-गुत्था हो गए थे! कभी चाचू ऊपर तो कभी मम्मी ऊपर!! खूब जम कर चुदाई हो रही थी|
मम्मी को इस रूप में मैंनें पहली बार देखा था! वो एकदम रांड बनी हुई थीं| लगता था जिन्दगी भर की चुदाई वो तीनों आज ही कर डालेंगे|
तभी तीनों का जोश ठण्डा पड़ता दिखाई देनें लगा!

अरे!!

क्या दोनों झड़ चुके थे?

सफ़र की इति हो चुकी थी! हाँ सच में वो दोनों झड़ चुके थे|
नसीम चाचू नें मुस्करा कर मम्मी कर चूचे अपनें मुँह में भर लिए और “पुच्च! पुच्च!” करके चूसनें लगे|
मम्मी धीरे से नीचे बैठ गईं और नसीम का लंड पकड़ कर सहलानें लगीं, उसका लंड अपनें मुँह में लेकर उसे चूसनें लगीं|
नसीम कभी तो मम्मी की जांघें चूमता और कभी उनके बालों को सहलाता:-जोर से चूसो शबनम डार्लिंग! उफ़्फ़ बहुत मजा आ रहा है! और कस कर जरा!

अब मम्मी जोर-जोर से “पुच्च! पुच्च!” की आवाजें निकालनें लग गई थीं, नसीम की तड़प साफ़ नजर आनें लगी थी|
फिर मम्मी नें गजब कर डाला! मम्मी नें अपनी एक टांग उसके दायें और एक टांग नसीम के बायें डाल दी| नसीम का सख्त लंड सीधा खड़ा हुआ था, दोनों प्यार से एक-दूसरे को निहार रहे थे|
मम्मी उसके तनें हुए लंड पर बैठनें ही वाली थीं! मेरे दिल से एक “आह!” निकल पड़ी “मम्मी प्लीज ये मत करो! प्लीज नहीं ना!”

पर मम्मी तो बेशर्मी से किसी रंडी की तरह उसके लंड पर बैठ गईं|

“मम्मी घुस जायेगा ना! ओह्हो समझती ही नहीं है!”
पर मैं उनके लंड को किसी खूँटा की तरह मम्मी की चुत में घुसता हुआ देखती ही रह गई! कैसा चीरता हुआ मम्मी की चुत में घुसता ही जा रहा था|
फिर मम्मी के मुँह से एक आनन्द भरी चीख निकल गई|
“उफ़्फ़्फ़! कहा था ना जड़ तक घुस जाएगा! पर ये क्या!? मम्मी तो नसीम से जोर से अपनी चुत का पूरा जोर लगा कर उससे लिपट गईं और अपनी चुत में लंड घुसवा कर ऊपर-नीचे हिलनें लगीं|
अह्ह्ह! खुदा वो तो मस्त चुद रही थीं! सामनें से नसीम मम्मी की गोल-गोल कठोर चूचियाँ मसल-मसल कर दबा रहा था| उसका लंड बाहर आता हुआ और फिर “सररर!” करके अन्दर घुसता हुआ मेरे दिल को भी चीरनें लगा था|
मेरी चुत का पानी निकल कर मेरी टांगों पर बहनें लगा था| पूरी रात कुर्वान चाचू और उनके दोस्त नसीम नें मेरी मम्मी को किसी रांड की तरह चोदा था|
मुझे अपनी बारी का इंतज़ार था! जो कि जल्द ही आनें वाली थी|
मैं अपनें बिस्तर पर आ गई और चुत में उंगली डाल कर अन्दर-बाहर करनें लगी|
संयोग से एक रात को मम्मी को चुदवाते हुए देखकर मैं अपनी चुत में उंगली कर रही थी कि मेरे मुँह से सीत्कार निकल गई जिसको मम्मी नें सुन लिया| मैं जान नहीं पाई कि क्या हुआ लेकिन अगले दिन मम्मी का व्यवहार कुछ बदला-बदला सा था|

मुझसे रहा नहीं गया! मैंनें मम्मी से पूछा:-क्या बात है मम्मी! आज बहुत उदास हो?

मम्मी नें कहा:-नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है|
कुछ देर के बाद मम्मी नें मुझे अकेले में बुलाया और बोलीं:-कल रात!

इतना सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए! मेरा चेहरा लाल हो गया|

तब मम्मी नें कहा:-देखो बेटी मेरी उम्र इस वक़्त 32 साल है! और तुम जानती हो कि तुम्हारे पापा बाहर रहते हैं! उनको दुबई गए हुए दो साल से ऊपर हो गया|
ये सब कहते हुए मम्मी का गला भर आया! उनकी आँखों से आंसू छलक पड़े| मैंनें मम्मी को दिलासा दिया और कहा:-मैं समझती हूँ! कोई बात नहीं है मम्मी|

मेरी इस बात से उनका दिल कुछ हल्का हुआ और वो बोलीं:-बेटी तुम नाराज़ नहीं हो न मुझसे?

मैंनें कहा:-नहीं मम्मी! इसमें नाराज़ होनें वाली कौन सी बात है! ऐसा तो सबके साथ होता होगा?

मम्मी के चहरे पर कुछ मुस्कान आई|

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