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“मेरे साथ मेरी अम्मा की भी चुदाई हुई”-3

अब चाचू का मुँह मेरे सामनें था! उनका चेहरा लाल हो चुका था| वो मेरे चेहरे की तरफ देख भी नहीं रहे थे| उन्होंनें अपनें इनर को उठाया! लोअर नीचे सरका कर अपनें लौड़े को बाहर निकाला|

उस वक्त तो मुझे पता नहीं था कि मेरा यौनांग कुछ छोटा था|
मुझे थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था! पर कामोत्तेजना बहुत हो रही थी| चाचू नें मेरी टांगें फैला दीं और खुद टांगों के बीचों-बीच आ गए|
उन्होंनें लौड़े पर थूक लगाया और योनिद्वार के ठीक बीचों-बीच मुझे उनका लौड़ा महसूस हुआ| उन्होंनें मेरे दोनों घुटनों को अपनें हाथों से थामा और जोर का एक धक्का लगाया “आआआ! ईईई आश्स्श्श्श! मम्मी….
मेरी तो जैसे जान ही निकल गई! मैं छूटनें के लिए तड़पनें लगी| नीचे मेरी चुत में जलन सी हो रही थी|

“धीरे से! धीरे से! कुछ नहीं होगा मेरी गुड़िया रानी को!”
यह कहते हुए चाचू मेरे मासूम नन्हें अधखिले वक्ष-उभार मसलनें लगे और मुझे चूमनें लगे|
पहली बार मेरी चुत में कोई लंड गया था| कॉलेज में मुझे कई सारे लड़के मुझे लाइन मारते थे! लेकिन मैंनें सोचा नहीं था कि यह सौभाग्य कुर्वान चाचू को मिलेगा|

लगभग 5 मिनट में मेरा दर्द कुछ कम हुआ! तो मुझे अच्छा लगनें लगा और मैं खुद ही कमर हिलानें लगी और कूल्हे उठानें लगी|
चाचू नें मेरी कमर के नीचे तकिया लगाया और हल्के-हल्के धक्के लगानें शुरू कर दिए और लगभग दो मिनट में उनकी रफ्तार बहुत तेज हो गई|

अब मुझे भी बहुत मजा आ रहा था! मेरी योनि में मीठी सी चुभन मुझे आनन्द भरी टीस दे रही थी|
लगभग 7-8 मिनट तक धक्के लगानें के बाद मुझे चरमोत्कर्ष प्राप्त होनें लगा और मुझे योनि के अन्दर संकुचन सा महसूस हुआ| मुझे योनि के अन्दर कुछ रिसता हुआ सा महसूस हुआ! चाचू नें लौड़ा झटके से बाहर निकाला और सारा वीर्य मेरे योनि मुख और मेरे पेट पर गिरा दिया! और मेरे ऊपर गिर गए|

वे झड़ चुके थे और लम्बी-लम्बी सांसें लेनें लगे|
मुझे चुत में दर्द महसूस हो रहा था! मेरी चुत खून से लथपथ हो गई थी! मैं डर गई थी|

तब चाचू नें बताया:-पहली बार में ऐसा होता है!

मैंनें चड्डी चुत पर चढ़ा ली|
कुछ देर बाद चाचू मेरे छोटे-छोटे चुतड़ों को मसलनें लगे और फिर से मेरी चड्डी को कमर तक खिसका दिया| मैं आँखें बंद करके चुपचाप लेटी हुई थी|
चाचू मेरे ऊपर छा गए थे| उनका लौड़ा मेरी चुत में दुबारा घुस गया था! मैं एकदम से थक कर चूर हो गई थी| ऐसा लग रहा था कि न जानें कितनी दूर से दौड़ लगा कर आई होऊँ|
कुछ देर चाचू का लंड मेरी चुत में ही पड़ा रहा! चाचू नें अपनी आँखें खोलीं और मेरे सुनहरे घनें बालों में अपना दुलार भरा हाथ फिराया| हम दोनों एक-दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे|
उन्होंनें अपना लंड मेरी चुत से बाहर खींचा!

फिर चाचू नें लोअर पहना और बाथरूम में घुस गए!
मैं चुपचाप हल्की सी आँख खोलकर उनको देख रही थी! जैसे ही वो अन्दर घुसे! मैंनें जल्दी-जल्दी अपनी पजामी ऊपर खींची! कपड़े और बाल ठीक-ठाक किए और जल्दी से वहाँ से बाहर निकल आई! क्यूंकि मेरा मन चाचू से नजर मिलानें को नहीं हो रहा था|
मेरे ख्याल से इस सारे प्रकरण में चाचू का कोई दोष नहीं था| मैं जानती थी कि मेरी मम्मी परवीन जो 34 साल की जवान और खूबसूरत औरत हैं! उनके साथ जो हो रहा था! वह मेरे साथ भी कभी भी हो सकता है! लेकिन आज ही के दिन यह सब हो जाएगा! मैं नहीं जानती थी|
कुछ देर बाद कुर्वान चाचू मेरे नजदीक आए और उन्होंनें मेरे गालों पर एक ज़ोरदार पप्पी ली और 2 दिन बाद वापस आनें का वादा करके चले गए|
फिर एक दिन वह हुआ! जिसकी मैंनें कभी उम्मीद भी नहीं की थी| शाम के 9 बज रहे थे! कुर्वान चाचू की कार दरवाजे पर आकर रुकी थी| चाचू का रात को इस तरह आना! कोई नई बात नहीं थी! लेकिन मैंनें दरवाजे पर जाकर देखा कि आज चाचू के साथ एक और आदमी भी था|
कुर्वान चाचू:-हाय परवीन कैसी हो? इससे मिलो, यह मेरा दोस्त नसीम है!
मम्मी नें धीरे से “हाय” करके अपना हाथ आगे बढ़ाया था|

“और नसीम यह है मेरी प्यारी सी नन्हीं सी भतीजी नगमा!”

कुर्वान चाचू नें मेरे गाल खींचते हुए! नसीम को मेरी तरफ इशारा किया|
नसीम नें ललचाई हुई नज़रों से मुझे नीचे से ऊपर तक देखा था! उस वक़्त मैंनें रेड स्कर्ट और ब्लैक टॉप पहना हुआ था| मैं बिना जवाब दिए अपनें कमरे में चली गई थी|
मैं अपनें कमरे में चली गई थी और खिड़की से उनकी बातें सुननें लगी थी|

कुर्वान चाचू मम्मी को कमरे में ले कर गए थे! नसीम बरामदे में ही रुका था|

“परवीन यह मेरा दोस्त नसीम है! आज रात यह हमारे साथ रुकेगा!|”

चाचू मम्मी को समझा-बुझा रहे थे! लेकिन मम्मी माननें को तैयार नहीं थीं|

“अरे! किसी को कुछ पता नहीं चलेगा! बस मैं तुम और नसीम! एक रात की तो बात है!”

मैं समझ चुकी थी कि कुर्वान चाचू मम्मी को नसीम से चुदवानें के लिए राजी कर रहे थे|
परवीन:-तुम्हारी बात अलग है कुर्वान! तुम मेरे शौहर के दोस्त हो! लेकिन एक गैर मर्द के साथ मैं नहीं कर सकती|

मम्मी परेशानी से अपना सिर पकड़े सोफे पर बैठी थीं|
कुर्वान चाचू:-मैं और नसीम बचपन के दोस्त हैं! यहाँ तक कि मैंनें उसकी पत्नी की भी ली है! अब अगर वह कुछ माँगता है! तो मैं कैसे मना कर दूँ! और फिर यह बात इस कमरे से बाहर थोड़े ही जानें वाली है? मैंनें नसीम को बोला है कि तुम मेरे बहुत अच्छे दोस्त अल्ताफ की बीवी हो|

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“तुमनें मुझसे पूछ कर बोला था क्या!? मैं ऐसा नहीं कर सकती कुर्वान!”

कुर्वान चाचू नें मम्मी के गालों को अपनें दोनों हाथों में लेते हुए अपनी बात पर जोर देकर कहा|
“लेकिन घर में मेरी बेटी नगमा भी है! वह क्या सोचेगी! अब वह छोटी नहीं रही है!?”

मम्मी नें अपनी शंका ज़ाहिर करते हुए जवाब दिया था! जबकि नसीम चाचू बाहर बरामदे में बैठे सिगरेट पी रहे थे|
“हाँ मुझे बहुत अच्छी तरह से मालूम है कि वो “बड़ी” हो गई है! उसकी तुम फ़िक्र मत करो! मैं उसको सम्हाल लूँगा|
फिर मम्मी धीरे-धीरे राजी हो गई थीं| कुर्वान चाचू मम्मी को अपनी गोद में लिए हुए थे और उनके कुरते में हाथ डाल कर उनके चूचों को मसल रहे थे| जिससे उनका विरोध अब कम हो गया था|
रात होनें को थी! मेरा दिल धड़कनें लगा था! मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था कि मेरी मम्मी मेरे सामनें ही दो-दो मर्दों से चुदेगीं! कैसे चुदेगीं! आह्ह्ह चाचा का और उनके दोस्त का कड़क लंड भला अन्दर कैसे घुसेगा!? यह सोच कर तो मेरी चुत में भी पानी उतारनें लगा था|
रात को मम्मी मेरे कमरे में आईं और मुझे ठीक से सुला दिया और चादर ओढ़ा कर लाईट बन्द करके कमरे बन्द करके चली गईं|

मैंनें धीरे से चादर हटा दी और उछल कर खिड़की पर आ गई|
नसीम चाचू शायद शराब पी रहे थे! उसका यह रूप भी मेरे सामनें आनें लगा था| अपना लंड मसलते हुए वो धीरे-धीरे शराब पी रहे थे|

“उसे चादर उढ़ा दी है! वो गहरी नींद में सो गई है!”

यह सुनते ही कुर्वान चाचू नें मम्मी को अपनी बाँहों में भरते हुए चूम लिया|
मुझे उनके कमरे से अब नसीम चाचू की भी आवाज सुनाई दे रही थी!

मेरा दिल धड़क रहा था कि मम्मी की आज दो मर्दों से चुदाई होगी|

कुर्वान नें मम्मी को नसीम के पास जानें को कहा|
मम्मी धीरे-धीरे शरमाते हुए चाचू की तरफ़ बढ़ रही थीं! उनके पास आकर वो रुक गईं! और अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से उन्हें निहारनें लगीं|
तभी मम्मी मेरे सामनें मुँह करके आ गईं! मैंनें देखा कि उन्होंनें आज बेहद ही कीमती ड्रेस पहना हुआ था! छोटी सी ब्लैक रंग की बैकलेस कुर्ती और उसके साथ लाल रंग की जालीदार सलवार! यह ड्रेस शायद नसीम चाचू मम्मी के लिए लाए थे|
मैं सोचनें लगी कि अरे! वाह मम्मी ऐसी ड्रेस में!

मेरा दिल बल्लियों उछलनें लगा था, ये दोनों हरामजादे आज रात को मेरी मम्मी की चुदाई करेंगे|
मम्मी का तराशा हुआ गुदाज गोरा जिस्म! ट्यूबलाईट की रोशनी में जैसे चांदी की तरह चमक उठा| उनकी ताजी शेव की हुई चुत की फ़ांकें! सच में किसी धारदार हथियार से कम नहीं थीं| कैसी सुन्दर सी दरार थी! चिकनी शेव की हुई रसीली चुत|
“उफ़्फ़्फ़! परवीन! आप भी ना! अभी किसी मॉडल से कम नहीं हो|” नसीम चाचू नें मम्मी के गोरे सफ़ेद जिस्म को चूमते हुए कहा था|

“हा! हा! हा! अच्छा जी! कुर्वान भाईजान की मेहरबानी है! यह जो तुम्हारे सामनें हूँ|”

मम्मी उनसे लिपट कर बातें कर रही थीं| कभी तो वो मेरी नजरों के सामनें आ जातीं! और कभी आँखों से ओझल हो जाती थीं|
तभी नसीम चाचू नें मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनें सामनें सामनें खींच लिया और कुर्ती के ऊपर से ही उनके सुडौल चुतड़ों को दबानें लगे| मम्मी की लम्बाई चाचा के बराबर ही थी!
उफ़्फ़! मम्मी नें गजब कर दिया! उन्होंनें नसीम चाचू की जीन्स की ज़िप धीरे से खोल दी|

“क्यूं आपको! मेरे सामनें शर्म आ रही है क्या? अपनें लंड को क्यूं छुपा रखा है! जानेंमन?”
तभी मेरी धड़कन तेज हो गईं! चाचू नें मम्मी की सलवार के नीचे से मम्मी की गाण्ड को दबा दिया| मम्मी नें अपनी टांग कुर्सी पर रख दी! ओह्ह्ह तो जनाब नें मम्मी की गाण्ड में उंगली ही घुसेड़ दी है|

वो अपनी उंगली गाण्ड में घुमानें लगा! मम्मी भी अपनी गाण्ड घुमा-घुमा कर आनन्द लेनें लगीं|
कमरबंद खींचते ही मम्मी की सलवार उनके शरीर से खिसक कर सरसराती हुई नीचे फ़र्श पर आ गिरी| मम्मी की सफ़ेद दूधिया माँसल टांगें नंगी हो चुकी थीं|

“परवीन! तुम कितनी सुन्दर हो!”
मम्मी नें मुस्कुराते हुए नजर नीची कर ली! चाचू नें आगे बढ़ कर मम्मी को प्यार से गले लगा लिया| उनका दुपट्टा अलग करके उनके होंठों पर अपनें होंठ लगा दिए थे, मम्मी तो जैसे उनसे चिपट सी गई थीं, दोनों के लब एक-दूसरे से मिल गए|
गहरे चुम्बनों का आदान-प्रदान होनें लगा| अब नसीम चाचू मम्मी के नंगे भारी-भारी चुतड़ों को चीर कर उनकी गुदा द्वार में उंगली डाल रहे थे|

“आउच…”
मम्मी के मुख से एक प्यारी सी “आह” निकल पड़ी| पजामे में से चाचू का लंड उभर कर बाहर निकलनें हो रहा था| मम्मी नें एक बार नीचे उनके लंड को देखा और अपनी चड्डी से ढकी चुत उनके लंड से टकरा दी| अब वो अपनी चुत वाला भाग लंड पर दबा रही थीं|
चाचू नें अपनें दोनों हाथों से मम्मी की चूचियों को सहला कर दबा दिया! तो मम्मी सिमट सी गईं|

“परवीन! मेरे लंड को भी प्यार करो!न!?”

चाचू नें मम्मी की गर्दन को चूमते हुए कहा

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