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“मेरे साथ मेरी अम्मा की भी चुदाई हुई”-2

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“तुम जानती हो मुझे कुतिया बना कर तुम्हारी गाण्ड मारना बहुत अच्छा लगता है! परवीन!”

कुर्वान चाचू नें अपना मूसल मम्मी की गाण्ड के छेद में लगाया और उनके चुतड़ों पर एक थपकी दी|

मैं सोच भी नहीं सकती थी कि मेरी मम्मी आज पूरी रंडी बनी हुई थीं|

मम्मी समझ गईं कि अब ये थपकी देनें का मतलब है कि उनकी गाण्ड में लौड़े की शंटिंग शुरू होनें वाली है| उन्होंनें खुद को गाण्ड मरानें के लिए तैयार कर लिया था|
कुर्वान चाचू नें मम्मी की गाण्ड में शॉट मारा! “आआह्ह्ह! धीरे-धीरे कुर्वान!”

“बस बस परवीन! हो गया!”

मम्मी के हलक से एक घुटी सी चीख निकली! कुर्वान चाचू का हाहाकारी लंड मम्मी की मुनिया की सहेली उनकी गाण्ड में पूरा घुस चुका था|
परवीन:-प्लीज कुर्वान! धीरे-धीरे दर्द हो रहा है!

मम्मी के चेहरे पर दर्द साफ़ झलक रहा था|

“क्यों! क्या अल्ताफ तुम्हारी गाण्ड नहीं मारता था?”

“नहीं! वह गाण्ड मारनें के शौक़ीन नहीं हैं! मुझे इन्हीं धक्कों का और तुम्हारे लंड का बड़ी बेसब्री से इन्तजार था| मुझे नहीं मालूम था कुर्वान कि तुम्हारा लौड़ा इतना बड़ा है! आह्ह! चोदो मुझे और जोर से चोदो!”
कुर्वान चाचू मम्मी के ऊपर कुत्ते जैसे चढ़े थे! मम्मी की गाण्ड पर जैसे ही चोट पड़ती! उनके दोनों चूचे बड़ी तेजी से हिलते| कुर्वान चाचू नें उनके हिलते हुए दुद्धुओं को अपनें हाथों से पकड़ लिया! जैसे कुर्वान चाचू नें मम्मी की चूचियों का भुरता बनानें की ठान ली हो|
उनकी गाण्ड को करीब दस मिनट तक ठोकनें के बाद वे मम्मी की पीठ से उतरे और फिर उन्होंनें मम्मी को चित्त लेटा दिया| अब उन्होंनें मम्मी की कमर के नीचे तकिया लगाया और उनके पैर फैला कर उनकी चुत में अपनें मूसल जैसे लौड़े को घुसेड़ दिया|
मम्मी भी नीचे से अपनी कमर उठा कर थाप दे रही थीं, मम्मी के मुँह से अजीब सी आवाजें निकलनें लगीं थीं:-चो!द! कुर्वान! और!ज्जोर! स्से!धक्के! मारर! मेरेरेरे! राज्ज्ज्ज!जा !

और फिर वो अचानक शिथिल पड़ गईं! मम्मी झड़ चुकी थीं|
कुर्वान चाचू नें भी तूफानी गति से धक्के मारते हुए उनकी चुत में अपनें लंड का लावा छोड़ दिया|
उन दोनों की चुदाई देखकर मेरी भी चुत गीली हो गई थी! मैंनें अपनी उंगली से अपनी चुत को सहलाना शुरू कर दिया था|

मुझे मालूम था कि आज कुर्वान चाचू मम्मी को देर तक चोदेंगे! मैंनें महसूस किया था कि जब चुदाई होती है! तो फिर उन दोनों को! मेरी तो जैसे सुध ही नहीं रहती है|
कुर्वान चाचू का इंजन अभी मम्मी की चुत में शंटिंग कर रहा था| मेरी आँखें मुंदनें लगी थीं! कुछ देर बाद मैं सो गई|
अब तो चाचू और मम्मी के बीच के सभी परदे मेरे सामनें खुल चुके थे! मम्मी भी अपनी पूरी मस्ती से अपनी चुत कि चीथड़े उड़वानें में लग चुकी थीं|

कुर्वान चाचू मम्मी को जब चाहते तब चोदते थे| धीरे-धीरे वह दोनों मेरे सामनें ही एक कमरे में चले जाते और कई-कई घंटे बाद निकलते थे| मैं भी हमेशा मम्मी और चाचू की चुदास लीला देखती थी रात को जाग जाग कर…
एक दिन मैं जब सुबह उठी! तो देखा कि कुर्वान चाचू मेरे साथ ही लेटे थे| वह मुझे पूरी तरह से चिपटाए हुए थे|

मैंनें चाचू से पूछा:-मम्मी कहाँ हैं?

चाचू:-वह तो अपनें कॉलेज चली गईं|

“ठीक है! मैं आपके लिए चाय बना दूँ?”
चाचू नें सिगरेट सुलगाते हुए “हाँ” में सिर हिला दिया था| थोड़ी देर बाद मैं चाय लेकर आ गई थी| चाचू में मुझे पास में बैठनें के लिए इशारा किया|

मैं वहीं उनके पास बैठ गई|
“कल रात को तुम सो रहीं थी या जाग रही थीं?” चाचू नें प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए सवाल किया|
अचानक इस तरह के सवाल से मैं सकपका गई थी| चाचू को शायद ये मालूम पड़ गया था कि मम्मी और उनकी चुदाई का मैंनें पूरा नजारा देखा है|
“देखो नगमा! मैं तुम्हारा चाचू हूँ! तुम्हारी मम्मी का ख्याल रखना मेरा फ़र्ज़ है! तुम बड़ी हो गई हो! समझदार हो! इस बात को समझ सकती हो|”

मैंनें बिना कोई जवाब दिए अपना सिर शर्म से नीचे झुका लिया था|
“वैसे कितनें साल की हो गई हो तुम?”

“पिछले महीनें में 18 साल की!” मैंनें धीरे से शरमाते हुए जवाब दिया था|

चाचू नें मुझे अपनें सीनें से लगा लिया:-बड़ी हो गई है मेरी बच्ची! तू फ़िक्र मत कर! तेरे लिए मैं तेरी मम्मी से बात करता हूँ!

चाचू नें मुझे गले लगाये हुए ही मेरी पीठ पर सहलाते हुए कहा था| मैं किसी मासूम बच्चे की तरह उनसे चिपकी हुई थी|

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चाचू नें मुझे अपनी ओर खींचा और अपनी गोद में झटके से खींच लिया! हम दोनों बिस्तर पर गिर गए|

मैं चूती तरह घबरा गई! मैं हल्की सी आवाज में बोली:-चाचू प्लीज मुझे जानें दो!

“कुछ नहीं होगा तुझे मेरी गुड़िया रानी!”
चाचू मेरे कंधों पर किस करनें लगे! मुझे अच्छा लग रहा था! परन्तु शर्म भी आ रही थी! क्यूंकि वे मेरे चाचू थे|

मैं छूटनें की कोशिश करनें लगी! परन्तु चाचू नें मुझे पीछे से जकड़ रखा था|
अचानक उनका हाथ मुझे अपनी टांगों के बीच महसूस हुआ| चाचू मेरी नन्हीं सी मासूम योनि को मसल रहे थे| मुझे अच्छा लग रहा था! परन्तु थोड़ा अजीब भी! क्यूंकि यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था|

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चाचू नें मुझे मुँह के बल बिस्तर पर लिटा लिया और मेरे ऊपर लेट कर मेरी पीली जालीदार कुर्ती की ज़िप खोल कर मेरी पीठ पर चुम्बन करनें लगे| मैं चुपचाप सिसकारियाँ भर रही थी|
चाचू नें मेरे अधखिले उभार मसलनें शुरू कर दिए! मेरे पीछे उभारों पर मुझे उनके लौड़ा का दबाव साफ़ महसूस हो रहा था| नीचे मेरी योनि में कुलबुलाहट सी होनें लगी थी| योनि को और साथ में भगांकुर को मसलवानें को मन कर रहा था|
फिर चाचू नें मेरी काली चूड़ीदार पजामी नीचे खिसका दी और मेरी गुलाबी रंग की चड्डी की एक झटके में नीचे खिसका लिया| मुझे शर्म सी महसूस हो रही थी परन्तु आनन्द भरी सनसनाहट में लिपटी! मैं चुपचाप लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी| मुझे लग रहा था कि मेरी योनि कुछ रीतापन है! उसे भरनें के लिए मैं कुछ अन्दर लेनें को मचल रही थी|
मुझे सीधा करके चाचू की अब उंगली आसानी से मेरी गुलाबी चुत में जा रही थी| मैं बहुत जोर से सिसकारियाँ ले रही थी “उन्नन्नह्हह! आअह्हह! ऊऊह्ह. आहन्न! आहऊर चूसो!”
फिर चाचू नें मेरे छोटे-छोटे चूचों को चूसना छोड़ कर होंठों का किस लेना शुरू कर दिया:-तू तो मेरी गुड़िया रही है नगमा! मैं तो कब से तेरे पकनें का इंतज़ार कर रहा था! मूआआह्ह्ह!

चाचू नें मुझे चूमते हुए ख़ुशी ज़ाहिर की|
कुछ देर के बाद मैं पूरी तरह से गर्म हो गई| फिर चाचू नें अपना लोअर खोला और अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया| उनका लंड अब तन कर पूरा 90 डिग्री का हो गया था|

मैं पहले तो शरमाई! लेकिन कुछ देर के बाद जब उन्होंनें फिर से लंड पकड़ाया! तो मैं थोड़ा खुल गई|

चाचू नें बोला:-इसे सहलाओ और आगे-पीछे करो|
मैं वैसा ही करनें लगी|
चाचू नें फिर मेरी नन्हीं सी मासूम चुत में एक उंगली डाल दी| मैं जोर से “आह्ह्ह!” करके सिस्कार उठी| कुछ देर के बाद मैंनें अपनी चूड़ीदार पजामी खुद उतार दी|
“वाह! क्या नन्हीं सी पिंक! बिना बाल की चुत है! आज तो मैं तुझे कली से फूल बनाऊंगा! मेरी गुड़िया रानी!”

चाचू नें हाँफते हुए कहा|
मेरी चुत पूरी भीगी हुई थी| मेरी चुत पर एक भी बाल नहीं था! हल्का सा रोंया ही अब तक आया था| मेरी चुत पूरी पावरोटी की तरह फूली हुई थी|

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फिर चाचू नें मुझे अपना लंड चूसनें के लिए बोला! मैंनें मना कर दिया|

चाचू नें बोला:-कुछ नहीं होता!

मैं बोलनें लगी:-नहीं! मुझे घिन आ रही है!

“देखो इस तरह से चूसो!”
यह कहते हुए कुर्वान चाचू नें मेरी चुत को चूसना शुरू कर दिया|

मैं चिल्लानें लगी:-आह्हह्हह्हह! चाचू नहीं! बस करो!

चाचू अपनी जीभ से मुझे चोद रहे थे! मेरे मुँह से सिसकारियाँ फूट रही थीं “चाचू आह्ह! मेरी चुत में आग लग रही है! अहह्ह्ह! कुछ करो!”
वे लगातार मेरी चुत को चूसते रहे|

मैं जोर से चिल्ला रही थी:-और जोर से! आह्ह!

मैं अपनें हाथ से उनके सिर को अपनी चुत के ऊपर खींच रही थी| अपनें पैरों को कभी ऊपर तो कभी दोनों जांघों को जोर से दबा रही थी! कभी-कभी मेरी साँसें फूल जाती थीं|
कुछ देर के बाद मेरी चुत नें पानी छोड़ दिया! चाचू नें सारा का सारा पानी पी लिया|

मैं बिस्तर पर नंगी निढाल पड़ी थी| वो मेरे गोर दुबले-पतले नाज़ुक जिस्म को देख रहे थे| मैं जोर से हाँफ़ रही थी! जैसे कोई कई मील से दौड़ कर आई होऊँ|
“डरती है मेरी गुड़िया रानी! चाचू से डरती है? कुछ हुआ मेरी बेबी! मज़ा आया ना?”

चाचू नें मुझे सीधे लिटा कर प्यार से कहा|

मैंनें हाँ में सिर हिलाया|

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