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“मेरी कमसिन साली जूही की चुदाई कि पोर्न मूवी दिखाकर”

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मैं गोरख, मेरी शादी बेगूसराय के एक गांव में हुई है| मेरी साली जूही गोरी चिट्टी 5 फीट 6 इंच लंबी, स्पोर्ट में अव्वल रहनें वाली, पर अति क्रोधी है| शायद भगवान उसे फुर्सत के क्षणों में बनाया था|

एक बार जाड़े के मौसम में मैं ससुराल में था| सुबह के समय सभी रजाई में दुबके हुए थे| जूही भी नाईटी पहनें रजाई में थी, उसके पैर बाहर निकले हुए थे| उसकी नाईटी सरक कर ऊपर चढ़ गई थी|| जिससे उसकी काले रंग की पैन्टी मुझे साफ दिख रही थी|

मैंनें भी मौका देखा और उसके साथ रजाई में घुस गया| मेरे लंड नें सीधे उसकी गांड पर धक्का दिया| फिर क्या था, उसनें पूरा घर अपनें सर उठा लिया था| किसी तरह मामला शांत हुआ|| मेरी तो जान हलक में आ गई थी|

एक दिन मैं जाड़े का धूप सेंकनें छत पर टहल रहा था, नीचे सभी औरतें आंगन में नहा रही थीं|
एकाएक साली की तेज आवाज सुनाई दी- दीदी, ज़रा ऊपर तो देखना, कहीं जीजा जी देख नहीं रहे हैं न?
मेरी बीवी नें कहा- नहीं देख रहे हैं|| बिंदास नहाओ|

मैंनें थोड़ा इंतजार किया, जब पानी गिरनें की आवाज आई तो मैं बैठे-बैठे पंजों पर सरकते हुए दीवार की ओट से देखनें लगा|

उफ्फ भगवान नें क्या बॉडी दी थी| उसकी 34 इंच की उठी हुई गठीली चूचियां और उनके ऊपर काले-काले चूचक हल्का स्लोप लिए हुए पेट में गहरी नाभि, आज साली लाल पैंटी में गजब सुंदर लग रही थी| उसके दोनों नंगे पैर एकदम सुडौल, केले के तनें की तरह चिकनें और नर्म लग रहे थे|

रात में बीवी को दो बार चोदनें के बाद भी लंड खड़ा हो गया| मैं वहीं पर मुठ मारनें लगा| जूही भी कनखियों से देख रही थी| मेरा लंड स्खलित होनें के साथ ही फिर उसनें हल्ला मचा दिया|
खैर किसी तरह से यह मामला भी शांत हुआ, बीवी सुगंधा की डांट खाई, सो अलग|

कुछ महीनें के बाद मेरी साली और सास मेरे यहाँ रेणुकूट आईं| सुबह में सासू माँ सुबह-शाम घंटों पूजा किया करती थीं| मैं अपनी साली जूही के लिए स्टार मूवी की फिल्म लगा दिया करता था| उस समय रात की मूवी पर बहुत ज्यादा पाबंदी नहीं थी, चुम्मा चाटी वाले सीन काफी हुआ करते थे|

कभी कभी रशियन फिल्म रात में लगा कर मैं दूसरे रूम में सोनें का नाटक किया करता था| इन फिल्मों में चोदा चोदी का हरकतें कपड़े के ऊपर से दिखाई जाती थीं| मैंनें देखा कि इस दौरान साली का एक हाथ पैंटी के अन्दर चला जाया करता था|

मैं समझ गया कि साली अब गरम होना शुरू हो गई है, बस मौके की तलाश में था| संयोग से मौका भी जल्दी आ गया|

सासू माँ को बेगूसराय जाना पड़ा| मैं जानबूझ कर वीडियो प्लेयर खरीद कर ले आया| बीवी सुगंधा के बिगड़नें पर कहा कि दोपहर में तुम किचन क्लासेस में चली जाती हो, मैं फैक्ट्री चला जाता हूँ|| बच्चे स्कूल चले जाते हैं|| बेचारी जूही बोर हो जाती होगी, कहो तो लौटा दूँ|

भला बहन कैसे मना कर सकती थी|

शुरु में हिन्दी और अंग्रेजी फिल्म ला कर दिया करता था| एक दिन जानबूझ कर मैंनें चायनीज फिल्म लाकर दे दी, जिसमें नंगा करके चोदना छोड़कर सभी कुछ दिखाते हैं| ये तो मैं जान गया था कि स्टार मूवी की ए श्रेणी की फिल्म देखनें वाली साली अब हल्ला नहीं करेगी, पर अपनी गांड फटी हुई थी|

शाम को साली नें केवल ये पूछी कि आप ये फिल्म देखे हैं?
मैंनें सरल सा मुँह बना कर कहा- फुर्सत कहाँ है वीडियो फिल्म देखनें की|

इस पर मेरी जूही नें एक संतोष भरी साँस ली| फिर कुछ दिन बाद एक क्सक्सक्स ब्लू फिल्म के साथ हिन्दी फिल्म की वीडियो लाकर दे दी| शाम को फिर धड़कते दिल से घर गया| घर का माहौल एक दम शांत था| मैंनें गहरी साँस ली समझ गया था बेगूसराय वाली जूही को अब लौड़ा पक्के में चाहिए|

अब तो मैं अक्सर क्सक्सक्स फिल्म लाकर दे दिया करता था| एक दिन सुगंधा अपनी किचन क्लास चली गई थी, बच्चे सब स्कूल में थे| मैं ऑफिस जानें के बहानें से घर से निकला और सबके जानें के बाद मैं वापस घर कर तरफ मुड़ गया| साथ में मैंनें एक बाम की शीशी खरीद ली| घर पहुँचते ही उल्टी करनें का नाटक करनें लगा| जूही भी पीछे पीछे बाथरूम आ गई, मैं देख चुका था कि वह ब्लू फिल्म देख रही थी|| इस वक्त गरम थी और अब उस मौके को भुनानें का वक्त था|

मैंनें जानबूझ कर ऐसा नाटक किया कि वो आलिंगनबद्ध हो गई, मैं उसके कंधे पर सर रखते हुए कहा कि सर में बहुत दर्द हो रहा है, बाम लगा दो|

उसी तरह बेडरूम में चला गया| बेड के पास आकर जूही को लिए बेड पर गिर गया| इसी क्रम में उसकी नाइटी उठ गई और मेरा हाथ सीधे उसकी चूत पर चला गया|

जूही थोड़ा कसमसाई पर कहीं कुछ नहीं हुआ| मैं धीरे धीरे उसकी चूत को सहलानें लगा| ऊपर चढ़ते हुए उसकी चूची के पास पहुँच गया|

अरे ये क्या|| जूही तो ब्रा भी नहीं पहनी थी| मैं उसकी नाइटी उठा कर चूची पीनें लगा, मैं जीभ उसकी चूची के चारों तरफ फिरा रहा था| उस वक्त जूही भी ‘आह उह||’ कर रही थी| मैं एक हाथ से चूची मसल रहा था, दूसरा हाथ उसकी चूत पर रख कर सहला रहा था| बुर के चारों तरफ उग आई सुनहरी मखमली झाँटों को सहलानें का अपना ही मजा है|

मैं अपनी जीभ को धीरे धीरे नीचे लाते हुए उसकी गहरी नाभि को नापनें लगा| जूही का सिसकारियां बढ़नें लगी थीं| साथ ही साली के चूतड़ भी तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे| वो अपनें निचले होंठ को कस कर दांतों से भींचे हुए थी| मैं जीभ को नीचे लाते हुए उसकी चूत की भग को चूसनें लगा|

जूही की ‘उह आह||’ की सिसकारियां घर में गूँजनें लगी थीं|

अंत में जूही इतना ही बोल सकी- जीजा जी अब सहन नहीं होता|| कुछ करो|| मेरी जान निकली जा रही है|
मैंनें भी बिना देर किए लौड़े को उसकी बुर के छेद पर रखा, एक हल्का धक्का दे मारा| मेरा लंड आधे रास्ते पर जा कर अटक गया|| और एक तेज चीख जूही के मुँह से निकल पड़ी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गई…’
वो केवल इतना बोली- नहीं जीजा जी… नहीं…

उसकी आँखों के किनारे से आँसू निकल रहे थे| सील बंद साली की चूत की झिल्ली फट गई थी| छोटी बुर अब बढ़ कर चूत बननें के तैयारी कर रही थी| एक कली खिल कर फूल बन रही थी|

थोड़ी देर के बाद फिर एक धक्का और लगा और मेरा लंड पूरा अन्दर चला गया| अब जूही की सीत्कार और चूत की ‘फच्च फच्च||’ पूरे रूम में गूँज रही थी|

अब जूही बोलनें लगी थी- आह|| और जोर से और जोर से|| साला क्या खा कर पैदा किया है कि एक लड़की को खुश नहीं कर पा रहा है|| दिदिया तो प्यासी ही रह जाती होगी|

दो मिनट बाद दोनों एक साथ स्खलित हुए थे|

मैं उठ कर अलग हुआ तो देख कर मेरा खून ही सूख गया| पूरी चादर खून से सना हुआ था| कोई भी औरत समझ जाती कि यहाँ पर किसी लड़की का शीलभंग हुआ है|
जूही तुरंत बोली- आप जल्दी ऑफिस जाइए, मैं संभाल लूँगी|

बाद में जूही नें कहा कि दिदिया को शक हो गया था, वो पूछ रही थी कि जीजा जी भी आए थे| मैंनें कही, तो घुमा कर पूछी कि चादर क्यों धो कर रही हो|| चादर तो बाई धोती है, तो मैंनें कह दिया कि मन नहीं लग रहा था तो सोचा कि कुछ काम वगैरह ही कर दूँ|

बहन को शक न हो, जूही बात बात पर मुझ पर इस लिए क्रोध किया करती थी| अब मैं समझ गया था वो क्रोधित क्यों होती है|

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