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“मेरा पहला चुम्बन मेरे लिये घातक बना”

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मोना मेरे साले की लड़की है| घर में सब उसे मोना और सभी सहेलियां मोना और स्कूल में वो माधवी माथुर के नाम से जानी जाती है| उम्र 18 के आसपास, +2 में पढ़ती है| गदराया बदन शोख, चंचल, चुलबुली, नटखट, नादान, कमसिन, क़यामत| कन्धों तक कटे बाल, सुतवां नाक,
पतले पतले गुलाबी होंठ जैसे शहद से भरी दो पंखुडियां, सुराहीदार गर्दन, बिल्लोरी आँखें, छोटे छोटे नींबू जो अब अमरुद बन गए हैं पतली कमर, चिकनी चिकनी बाहें और केले के पेड़ की तरह चिकनी जांघें| सबसे कमाल की चीज तो उसके छोटे छोटे खरबूजे जैसे नितम्ब हैं|
हे भगवान् ,  अगर कोई खुदकुशी करनें जा रहा हो और उसके नितम्ब देख ले तो एक बार अपना इरादा ही बदलनें पर मजबूर हो जाए| उसकी पिक्की या भोस का तो आप और मैं अभी केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं| कुल मिला कर वो एक क़यामत है| ऐसी कन्याएं किसी भी अच्छे भले आदमी का घर बर्बाद कर सकती है| पर मुझे क्या पता था,कि भगवान् नें इसे मेरे लिए ही बनाया है|

पहले मैं अपनें बारे में थोड़ा बता दूं| मेरा नाम प्रेम गुरु है| मैं एक बहु राष्ट्रीय कंपनी में काम करता हूँ| उम्र 32 साल, कद 5’ 8′ रंग गेहुँवा| शक्ल-सूरत ठीक ठाक| वैसे आदमियों की शक्ल-ओ-सूरत पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता, ख़ास बात उसका स्टेटस होता है और दूसरा उसकी सेक्स पॉवर| भगवान् नें मुझे इन दोनों चीजों में मालामाल रखा है| मेरे लिंग का साइज़ 7′ है और मोटाई 2 इंच| मेरा सुपाड़ा आगे से कुछ पतला है| आप सोच रहे होंगे फिर पतले सुपाड़े से चुदाई का मज़ा ज्यादा नहीं आता होगा तो आप गलत सोच रहे हैं| यह तो भगवान् का आशीर्वाद और नियामत समझिये| गांड मरवानें वाली औरतें ऐसे सुपाड़े को बहुत पसंद करती है| आदमियों को भी अपना लण्ड अन्दर डालनें में ज्यादा दिक्कत नहीं होती|

जिन आदमियों के लिंग पर तिल होता है वो बड़े चुद्दकड़ होते है फिर मेरे तो सुपाड़े पर तिल है आप अंदाजा लगा सकते हैं मैं कितना बड़ा चुद्दकड़ और गांड का दीवाना हूँ| मेरी पत्नी मधुर 36-28-36, उम्र 28 साल बहुत खूबसूरत है| उसे गांड मरवानें के लिए मनानें में मुझे बहुत मिन्नत करनी पड़ती है| लेकिन दोस्तों ये फिर कभी| क्यों कि ये कहानी तो मोना के बारे में है|

दरअसल मैं अपनें अनुभव एक डायरी में लिखता था| ये सब उसी में से लिया गया है| हाँ मुख्य पात्रों के नाम और स्थान जरूर बदल दिए हैं| मैं अपनी उसको (?) बदनाम कैसे कर सकता हूँ जो अब इस दुनिया में नहीं है जिसे मैं प्रेम करता हूँ और जन्म जन्मान्तर तक करता रहूँगा| इसे पढ़कर आपको मेरी सच्चाई का अंदाजा हो जायेगा| मेरा दावा है कि मेरी ये आप-बीती आपको गुदगुदाएगी, हँसाएगी, रोमांच से भर देगी और अंत में आपकी आँखे भी जरूर छलछला जायेंगी|
मेरी एक फेंटेसी थी| किसी नाज़ुक कमसिन कली को फूल बनानें की| पिछले 7-8 सालो में मैं लगभग 15-20 लड़कियों और औरतों को चोद चुका हूँ पर अब मैं इन मोटे मोटे नितम्बों और भारी भारी जाँघों वाली औरतों को चोदते चोदते बोर हो गया हूँ| मैनें अपनें साथ पढ़नें वाली कई लड़कियों को चोदा है पर वो भी उस समय 20-21 की तो जरूर रही होंगी| हाँ अपनें कामवाली बाई गुलाबो की लड़की अनारकली जरूर 18 के आस पास रही होगी पर वो भी मुझे तब मिली जब उसकी बुर चुत में बदल चुकी थी| सच मानो तो पिछले 3-4 सालों से तो मैं किसी कमसिन लड़की को चोदनें के चक्कर में मरा ही जा रहा था|

शायद आपको मेरी ये बातें अजीब सी लगे- नाजुक कलियों के प्रति मेरी दीवानगी| हमारे गुरूजी कहते हैं चुदी चुदाई लड़कियों/औरतों को चोदनें में ज्यादा मुश्किल नहीं होती क्योंकि वे ज्यादा नखरे नहीं करती और चुदवानें में पूरा सहयोग करती है| इन छोटी छोटी नाज़ुक सी लड़कियों को पटाना और चुदाई के लिए तैयार करना सचमुच हिमालय पर्वत पर चढ़नें से भी ज्यादा खतरनाक और मुश्किल काम है|

कहते है भगवान् के घर देर है पर अंधेर नहीं है| मेरा साला किसी कंपनी में मार्केटिंग मैनेंजर है| वो अपनें काम के चक्कर में हर जगह घूमता रहता है| इस बार वो यहाँ टूर पर आनें वाला था| मधु नें उसे अपनी भाभी और मोना को भी साथ लानें को मना लिया|
सुबह-सुबह जब मैं उन्हें लेनें स्टेशन पर गया तो मोना को देख कर मेरा दिल इतना जोर से धड़कनें लगा जैसे रेल का इंजन| मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा दिल हलक के रास्ते बाहर आ जायेगा| मैनें अपनें आप पर बड़ी मुश्किल से काबू किया| सामनें एक परी जैसी बिल्लौरी आँखों वाली नाज़ुक सी लड़की कन्धों पर बेबी डोल लटकाए मेरे सामनें खड़ी थी – नीले रंग का टॉप और काले रंग की जीन पहनें, सिर पर सफ़ेद कैप, स्पोर्ट्स शूज, कानों में छोटी छोटी सोनें की बालियाँ, आँखों पर रंगीन चश्मा ? ऊउफ्फ्फ़ ,  मुझे कत्ल करनें का पूरा इरादा लिए हुए|

दोनों जाँघों के बीच जीन पैंट के अन्दर फंसी हुई उसकी उभरी हुई बुर किसी फ़रिश्ते का भी ईमान खराब कर दे | मुझे लगा कि मेरा पप्पू अपनी निद्रा से जाग कर अंगडाई लेनें लगा है| मैं भी कितना उल्लू का पट्ठा हूँ मोना को पहचान ही नहीं पाया| 3-4 साल पहले जब मैं अपनी ससुराल के किसी फंक्शन में जब मैनें उसे देखा था,तो उसकी उम्र कोई 13-14 साल के लगभग रही होगी| मैं भी कितना गधा था,इतनी ख़ूबसूरत बला की ओर मेरा ध्यान पहले नहीं गया| मैं तो उसे एक अंगूठा चूसनें वाली, इक्कड़ -दुक्कड़, छुपम-छुपाई खेलनें वाली साधारण सी लड़की ही समझ रहा था| कितनी जल्दी ये लड़की जवानी पूरी बोम्ब बन गई है| मैं उसे ऊपर से नीचे तक देखता ही रह गया| उसका बदन कितना निखर सा गया था| मैं अभी सोच ही रहा था,कि उसकी पिक्की की साइज़ कितनी बड़ी हो गई होगी और उसकी केशर क्यारी बननी शुरू हुई या नहीं मेरा मतलब है की वो अभी पिक्की ही है या बुर बन गई है| पता नहीं उसनें अभी तक अपनी पिक्की या बुर से मूतनें का ही काम लिया है या कुछ और भी, अचानक मेरे साले की आवाज मेरे कानों में पड़ी|
अरे प्रेम | कहाँ खो गए भई ?

मैं अपनें ख़्वाबों से जैसे जागा| आइये-आइये भाई साहब | रास्ते में कोई परेशानी तो नहीं हुई? मैनें उनका अभिवादन करते हुए पूछा|

उन्होंनें क्या जवाब दिया, मुझे कहाँ ध्यान था, मेरी आँखें तो बस मोना पर से हटानें का नाम ही नहीं ले रही थी| ऐसे खूबसूरत मौके का फायदा कौन कम्बख्त नहीं उठाएगा| आप समझ ही गए होंगे मैनें आगे बढ़ते हुए मोना को अपनी बाहों में भरते हुए कहा- अरे मोना माउस | तू तो बहुत बड़ी हो गई है|

अपनें सीनें से लगाए मैनें उसकी गालों और सिर के बालों पर हाथ फिराया| उसके छोटे छोटे अमरुद मेरे सीनें से दब रहे थे| उसके नाज़ुक बदन की कुंवारी खुश्बू मेरे नथुनों में समां गई| मुझे लगा कि मेरे ख़्वाबों की मंजिल मेरे सामनें खड़ी है| मेरा दिल तो कर रहा था,कि उसका प्यार से एक किस्स ले लूँ पर स्टेशन पर उसके माता-पिता के सामनें ऐसा करना कहाँ संभव था| न चाहते हुए भी मुझे उस से अलग होना पड़ा लेकिन अलग होते होते मैनें उसके गालों पर एक प्यारी सी थप्पी तो लगा ही दी| फिर मैनें उसका हाथ पकड़ा और हम सभी स्टेशन से बाहर अपनी कार की ओर आ गए|

घर पहुँचनें पर मधु नें अपनें भैय्या, भाभी और मोना का गरमजोशी से स्वागत किया और फिर मोना की और बढ़ते हुए कहा,’अरे मोना तू ?’ मधु मोना को मोना ही बुलाती है, वो उसे अपनी बाहों में लेते हुए बोली|

‘नमस्ते बुआजी |’ शायद कहीं सितार बजी हो, जलतरंग छिड़ी हो या किसी अमराई में कोयल कूकी हो, इतनी मीठी और सुरीली आवाज मोना के सिवा किसकी हो सकती थी|

‘अरे ये तो मुझसे भी एक इंच बड़ी हो गई है|’ मधु नें कहा|

‘हाँ लम्बी तो बहुत हो गई है पर पढ़ाई-लिखाई में अभी भी मन नहीं लगाती |’ शितल नें बुरा सा मुंह बनाते हुए हुए कहा|

‘अरे अभी बच्ची है, अपनें आप पढ़ लेगी, तुम क्यों चिंता करती हो |’ मधु बोली|

मैं सोच रहा था- क्या वाकई ये अभी बच्ची (बची) ही है| उसके स्तन, नितम्ब तो कहर बरपानें वाले बन चुके हैं|

‘फूफाजी | बाथरूम किधर है?’ मोना नें पूछा|

‘आ, न | हाँ, आओ इधर है |’ मैं उसका हाथ पकड़ कर अपनें बेडरूम से लगे बाथरूम की ओर ले गया| मैं जानबूझकर उसे गेस्ट रूम के साथ भी एक बाथरूम में नहीं ले गया था|

‘मैं साथ आऊँ क्या अन्दर ?’ मैनें मुस्कुराते हुए पूछा|

‘नहीं | क्यों ?’

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‘वो फिर कोई छिपकली आ गई तो ?’

‘ओह | हटो आप भी, ‘ वो शर्माते हुए बाथरूम में घुस गई और दरवाजा बंद कर लिया| और मैं बाहर खड़ा उसके सू-सू की आवाज का इन्तजार करनें लगा|
बाहर खड़ा मैं अपनें सपनो में खोया हुआ था| आज से कोई 3-4 साल पहले जब मैं अपनी ससुराल किसी फंक्शन में गया था,तब की एक घटना मेरी आँखों में फिर से घूम गई|

मेरे ससुराल में घर दो-मंजिला है | ऊपर के भाग में एक कमरा और बाथरूम बना है| मैं शाम को छत के ऊपर टहल रहा था| इतनें में मोना के चीखनें की आवाज सुनाई दी और वो लगभग दौड़ते हुए बाथरूम से बाहर आई, वो थर थर कांप रही थी| इससे पहले कि मैं कुछ समझता उसे ठोकर लगी और वो नीचे गिर पड़ी, मैनें भाग कर उसे उठाया| उसके पैर में चोट लग गई थी, उसकी आँखों में आंसू आ गए|

‘अरे क्या हुआ ?’

‘वो | वो |’ मोना तो कुछ बोल ही नहीं पा रही थी|

‘हाँ | हाँ | क्या हुआ ?’

‘वो | बाथरूम में छिपकली है |’

मेरी हंसी निकल गई| मोना को छिपकलियों से बड़ा डर लगता है| जब वो उठी तो उसके मुंह से कराह सी निकली,’उईईई ,  माँ |’

‘क्या हुआ ?’

‘मेरे पैर में चोट लग गई है |’ उसनें अपना घुटना मसलते हुए कहा|

मैनें उसके घुटनें पर हाथ फिराया| उसनें मिड्डी और टॉप पहना था| मिड्डी में उसकी पुष्ट जांघे तो कमाल की थी| मैं उसकी बुर तो नहीं देख सकता था,पर उसके गोरे गोरे घुटनों और जाँघों को देख कर अंदाजा तो लगा ही सकता था,कि वो तो पूरी कमायत ही होगी|
मैनें उसका घुटना सहलाया| वो थोड़ा सा छिल गया था, थोड़ा सा खून भी चमकनें लगा था|

मैनें कहा, ‘अब तुम्हें डॉक्टर इंजेक्शन लगायेगा |’

तो वो रोनें लगी और बोली,’नहीं मैं इंजेक्शन नहीं लगवाउंगी | मुझे इंजेक्शन से बड़ा डर लगता है |’

‘भई गाँव में तो बस थूक लगा देते हैं पर यहाँ तो ? ‘ मैनें आगे की बात जानबूझ कर नहीं कही|

‘हाँ ये ठीक है ?’ मोना नें हामी भरी|

मैनें तुंरत उसके घुटनें पर अपनी जीभ लगा दी और थोड़ा सा थूक उस पर लगा कर एक चुम्मा ले लिया| मोना खिलखिला कर हंस पड़ी|

‘ओह || फूफाजी ,  आप भी , ?’

‘क्यों क्या हुआ ?’

‘कोई घुटनों पर भी पप्पी लेता है ?’

उसनें मेरी ओर आश्चर्य से देखा तो मैनें कहा, ‘अच्छा तो कौन सी जगह पप्पी लेते है?’

‘पप्पी तो गालों पर ली जाती है|’ वो मासूमियत से बोली|

‘अच्छा | तो आओ फिर गालों पर भी ले लेते हैं |’
मैं आगे बढ़ा और उसके नरम मुलायम गुलाबी होंटों पर अपनें होंठ रख दिए| मैनें धीरे धीरे उसके होंठो को चूमा और फिर अपनी जीभ उन पर फिरानें लगा जैसे सावन का प्यासा बारिश की हर बूँद को पी जाना चाहता है, मैं उसके होंठों को चूसनें लगा| वह पूरा साथ दे रही थी उसके लिए तो मानो ये एक खेल ही था| मैनें अपनी जीभ उसके मुंह में डालनें की कोशिश की तो वो हँसनें लगी| मेरा दिल धड़क रहा था| मेरी भावनाओं का उसे इतनी छोटी उम्र में क्या भान होगा वो तो इसे केवल अपनें अंकल का प्यार ही समझ रही थी पर मेरे लिए तो यह अमूल्य निधि की तरह था| हमारा यह किस्स कोई तीन चार मिनट तो जरूर चला होगा| फिर हम अपनें होंठों पर जीभ फेरते हुए अलग हो गए|

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