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“मेरा पहला चुम्बन मेरे लिये घातक बना”-4

सोच कर मैं तो सूखे पत्ते की तरह काँप गया|

मैं तो तब चौंका जब मोना नें आँखे मलते हुए कहा,’गुड-मोर्निंग फूफाजी |’

मैं भला क्या कहता| मोना बाथरूम में चली गई| मेरी हालत तो उस निराश शिकारी की तरह हो रही थी जिसके हाथ में आया हुआ शिकार छूट गया हो| मैं बाहर लॉन में पड़ी चेयर पर बैठ कर अखबार पढ़नें लगा|
गर्मियों की छुटियाँ चल रही थी इसलिए मधु को तो वैसे ही स्कूल नहीं जाना था,(मधु बच्चों के एक स्कूल में डांस टीचर है) और मैनें आज बंक मारनें का इरादा पहले ही कर लिया था,वैसे भी आज बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी थी| मैं चाहता था,कि मोना और मधु पहले नहा धो लें, मैं तो आराम से नहाना चाहता था| मुझे आज अपनें पप्पू का मुंडन भी करना था| 
आप तो जानते ही है मधु को लंड और चुत पर झांटे बिलकुल अच्छी नहीं लगती| उसनें कल रात भी उलाहना दिया था| पर मैं तो कुछ इससे आगे भी सोच रहा था| क्या पता कब किस्मत मेरे ऊपर निहाल हो जाये और मेरी माधवी डार्लिंग मेरी बाहों में आये तो मैं एक हैंडसम चिकनें आशिक की तरह लगूं| वैसे एक कारण और भी था| गुरूजी कहते है झांटों की सफाई करनें के बाद लंड और चुत दोनों की सुन्दरता बढ़ जाती है और लंड का आकार बड़ा और चुत का छोटा नजर आनें लगता है| वैसे तो ये नज़र का धोखा ही है पर चलो इस खुशफहमी में बुरा भी क्या है|
खैर कोई बारह-साढ़े बारह बजे मैं नहा धोकर फारिग हुआ| मोना स्टडी रूम से बाहर आ रही थी| उसकी नज़रें झुकी हुई थी और साँसे उखड़ी हुई माथे पर पसीना| वो मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी| वो मेरी और देखे बिना मधु के पास रसोई में चली गई| पहले तो मैं कुछ समझा नहीं पर बाद में मेरी तो बांछें ही खिल गई| ओह मोना डार्लिंग नें जरूर वो ही ‘जंगली छिपकलियों’ वाला फोल्डर और फाइल्स देखी होंगी|
 थैंक गॉड| आईला, || मेरा दिल किया कि जोर से पुकारूं – माधवी, | ओ… माई|| | डार्लिंग’|

कोई आधे घंटे बाद मोना नाश्ता लेकर आई| उसकी नज़रें अभी भी झुकी हुई थी| ऊपर से वो सामान्य बननें की कोशिश कर रही थी|
मैनें उसे पूछा,’क्या बात है ?’
तो वो बोली ‘कुछ नहीं आआन्न, | वो, || वो हम मंदिर कब चलेंगे ?’

मैनें उसके चहरे की और गौर से देखते हुए कहा,’शाम को चलेंगे अभी तो बहुत गरमी है |’
आज कामवाली बाई गुलाबो नहीं उसकी लड़की अनारकली आई थी| मैं सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था| जब मोना रसोई में जा रही थी तो अनारकली उधर देखते हुए मेरे पास आकर फुसफुसानें वाले अंदाज में आँखें मटकते हुए बोली ‘ये चिकनी लोंडिया कौन है ?’

मैनें उसके दोनों संतोरों को जोर से दबाते हुए कहा ‘क्यों लाल मिर्च से जल गई क्या ?’

‘जले मेरी जूती |’ पैर पटकते हुए वो अपना मुंह फुलाते हुए वो अन्दर चली गई|

आप चौंक गए न ? मैं आपको बताना भूल गया कि अनु हमारे यहाँ काम करनेंवाली बाई गुलाबो की लड़की है जिसे मैं कई बार चोद चुका हूँ और उसकी गांड भी मार चुका हूँ| वो तो समझती है कि सारी खुदाई छोड़ कर मैं तो बस उस पर ही मोर हूँ| उसे हम भंवरों की कैफियत का क्या गुमान| वैसे भी भगवान् नें औरतों को दूसरी किसी भी सुन्दर औरत के लिए ईर्ष्यालू बनाया ही है तो इसमें बेचारी अनारकली का क्या दोष है|

शाम को कोई चार बजे मैं और मोना लिंग महादेव मंदिर पर जानें के लिए तैयार हो गए| मधु नें वो ही कमर दर्द का बहाना बनाया और साथ नहीं गई| मैं इस कमर दर्द का मतलब अच्छी तरह जानता था| मोना को जब ये पता चला कि बुआजी साथ नहीं जा रही तो वो बहुत खुश हुई पता नहीं क्यों| दो जनो के लिए तो कार की जगह बाइक ही ठीक थी|

मोना नें सफ़ेद पैन्ट और गहरे बादामी रंग और फूलों वाला एक ओर से झूलता हुआ कुर्ता पहन रखा था| सिर पर वोही नाइके वाली टोपी, कलाई में रिस्ट वॉच | मैं तो अभी ये सोच ही रहा था,कि मोना नें जरूर वोही पेंटी और पैडेड ब्रा भी पहनी होगी जो कल शाम हमनें खरीदी थी| पैडेड ब्रा के कारण उसके बूब्स की साइज़ 34 तो जरूर लग रही थी| होंठों पर हलकी सी लाल लिपस्टिक| आज मैनें भी अपनी काली जीन और पसंदीदा टी-शर्ट पहनी थी| इम्पोर्टेड परफ्यूम स्पोर्ट्स शूज और नाइके की टोपी|

‘बिल्लो रानी कहो तो अभी जान दे दूँ, |’ मैं मस्ती से गुनगुनाता जब बाहर आया तो मोना नें मुझे घूर कर ऊपर से नीचे तक देखा| फिर एक आँख मारते हुए बोली ‘ओये होए | क्या बात है | आज तो बड़े जच रहे हो? किसी को कत्ल करना है क्या ?’ मैं क्या बोलता|
‘अच्छा बताओ मैं कैसी लग रही हूँ ?’ मोना नें आँखे नचाते हुए कहा|

‘बिलकुल बंदरिया लग रही हो’ मैनें उसे चिढ़ानें के अंदाज में कहा तो उसनें अपना मुंह फुला लिया| मेरा इरादा उसे नाराज़ करनें का कतई नहीं था| मैं तो उसे सपनें में भी नाराज करनें की नहीं सोच सकता| मैनें उसके गालो पर थप्पी लगाते हुए कहा ‘बिलकुल हंसिका मोटवानी और करीना कपूर लग रही हो | सच में |’

‘परे हटो|| हुंह झूठे कहीं के ? ‘ जिस अदा से उसनें ये कहा था,मुझे मधु का रात वाला डायलॉग याद आ गया| इसी लिए तो कहते है कई चीजें वंशानुगत भी होती हैं|

मोना मोटर साइकल पर मेरे पीछे चिपक कर बैठी हुई थी उसका एक हाथ मेरी कमर को नाभि के थोड़ा नीचे कस कर पकड़े हुए था| उसनें अपना सिर मेरे कंधे पर रखा था,और एक हाथ गले में डाल रखा था| जिस तरीके से वो मेरे साथ चिपक कर बैठी थी मुझे नहीं लगता मोना अब छोटी बच्ची रह गई है| उसकी गोलाइयां मेरी पीठ पर आसानी से महसूस हो रही थी| आज उसनें भी शायद अपनी बुआजी की ड्रेसिंग टेबिल का पूरा फायदा उठाया था| पिछले जन्मदिन पर जो इम्पोर्टेड परफ्यूम मैनें मधु को गिफ्ट दिया था,
उसकी महक भला मैं कैसे नहीं पहचानता| मैं तो इतना मदहोश हो रहा था,कि मुझे लगनें लगा कहीं मैं कोई एक्सीडेंट ही कर बैठूंगा|
जहां से पहाड़ी पर मंदिर के लिए रास्ता शुरू होता है श्रद्धालु नंगे पैर ही ऊपर पैदल जाते है| मोटरसाइकल स्टैंड पर खड़ी करनें और जूते उतारनें के बाद मैनें मोना को बताया ऊपर पीनें का साफ़ पानी नहीं मिलेगा अगर पीना है तो यही पी लो| मोना पानी की पूरी एक बोतल डकार गई और मैनें जानबूझ कर उसे बाद मैं फ़्रूटी के 2-3 पाउच और पिला दिए| आप इतनें भी कम अक्ल नहीं है कि मेरी इस चाल को न समझ रहे हो| पर मोना इन सब बातों से परे कुछ और खानें पीनें की फिराक में थी| हमनें प्रसाद के साथ कुछ स्नेंक्स, मिठाइयां और बंदरों के लिए भुनें हुए चनें लेनें के बाद मंदिर के लिए चढ़ाई शुरू कर दी| मंदिर की दूरी यहाँ से कोई दो किलोमीटर है|

आज सोमवार का दिन था,पर भीड़ कोई ज्यादा नहीं थी कोई इक्के दुक्के ही श्रद्धालु थे क्योंकि लोग सुबह सुबह दर्शन करके चले जाते है| हमारे जैसे प्यार के परवानें अपनी शमा के साथ शाम को ही आते है| दर्शन करनें और कच्चा दूध-जल चढानें के बाद जब हम मुख्य मंदिर से बाहर आये तो मैनें मोना से पुछा तुमनें क्या मन्नत माँगी तो वो कुछ सोचनें लगी और फिर बोली,’नहीं | पहले आप बताओ |’

मेरे जी में आया साफ़ कह दूं कि मैनें तो बस तुझे ही माँगा है पर ये कहना इतना आसान भी नहीं था,मेरे दोस्तों और दोस्तानियो | मैनें घुमा फिरा कर कहा,’जो तुमनें माँगा, वो ही मैनें मांग लिया |’

‘क्या, | ? आपनें भी ? मतलब, | यानें , |? ओह || ?’ वो आश्चर्य से मेरा मुंह देख रही थी जैसे मैनें उसकी कोई शरारत या चोरी पकड़ ली हो| जब उसे अपनी बात समझ आई तो शर्म से दोहरी गई| मैं तो निहाल ही हो गया|
मंदिर के पीछे थोड़ा खुला आँगन सा है जहां पर तीन तरफ दो दो फ़ुट की दीवार बनी है नीचे गहरी खाई और झाड़ झंखाड़ है| यहाँ काले मुंह वाले लंगूर बहुत है जो पेड़ों पर उछल कूद मचाते रहते हैं, आनें वाले श्रद्धालु उन्हें भुनें हुए चनें, केले आदि डाल देते हैं| बच्चो का तो ये मनपसंद खेल होता है| फिर मोना भी तो अभी बच्ची ही थी ऐसा मौका वो भला क्यों छोड़ती| उसनें भी बंदरों को चनें डालनें शुरू कर दिए| हम लोग एक कोनें में खड़े थे| थोड़ी दूर दूसरे कोनें में एक नवविवाहित जोड़ा अपनी गुटरगूं में व्यस्त था| लड़का शायद उसका किस्स लेना चाहता था,पर लड़की शर्म के मारे उसे मना कर रही थी| मैनें देखा मोना बड़े गौर से उनको देख रही है| मैं चुप रहा| थोड़ी देर बाद वो दोनों उठकर चले गए तब मोना को शायद मेरी याद आई|

‘जिज्जू | थोड़ी देर बैठें ?’

‘हाँ, यहीं दीवार के पास बैठ जाते हैं|’

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हम दोनों पास पास बैठ गए| एक हलका सा हवा का झोंका आया तो मोना के बदन की कुंवारी खुश्बू मेरे तन मन को अन्दर तक सराबोर करती चली गई| मोना बंदरों को दानें डाल रही थी| कभी ऊपर उछालती कभी दूर फेंक देती बंदरों की इस उछल कूद से उसे बहुत मज़ा आ रहा था| मैनें उसे समझाया कि इनको ज्यादा मत सताओ नहीं तो ये काट खाएँगे पर मोना तो अपनी ही धुन में थी|
पेड़ की एक डाली पर एक बन्दर अपनी लुल्ली निकाले उसे छेड़ रहा था| मोना उसे बड़े ध्यान से देख रही थी| इतनें में एक बंदरिया आई और बन्दर उसके ऊपर चढ़ कर आगे पीछे धक्का लगानें लगा| मोना नें बिना अपनी नज़रें हटाये मुझ से बोली ‘देखो जिज्जू | ये बन्दर क्या कर रहे हैं|’

उसे क्या पता, वो बेख्याली में क्या बोल गई |

मेरे लिए भी ये अप्रत्याशित था| अब आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकते है मैनें अपनें पप्पू को किस तरह से रोक रखा था| अगर ये घर या कोई सूनी जगह होती तो निश्चित ही मैं कुछ कर बैठता| पर मैनें उसे कहा, ‘ये आपस में प्यार कर रहे हैं, इनका भी शुक्र पर्वत तुम्हारी तरह बहुत ऊंचा है|’

अचानक वो बोली, ‘वो कैसे क्या आपको , |? क्या आपको हाथ देखना आता है ?’

आपको बता दूँ मैं थोड़ा बहुत हस्त रेखाएं देख लेता हूँ| पूरा तो नहीं जानता पर जीवन रेखा, हृदय रेखा आदि तो थोड़ा बहुत बता ही देता हूँ| बाकी तो गप्प लगानें वाली बात है| किसी को भी प्रभावित कर लेना मेरे बाएँ हाथ का खेल है| मैं जानता हूँ कि ये सब उसे उसकी माँ नें बताया होगा| क्यों कि मैं शितल को भी एक दो बार पपलू बना चूका हूँ| उसे भविष्य और हाथ की रेखाओं को जाननें की बड़ी इच्छा रहती है|

‘हाँ | हाँ || आओ’ मैनें उसे अपनें पास खींचते हुए कहा|

मैनें उसका बायाँ हाथ अपनें हाथ में ले लिया| हाथ के नाखून थोड़े बढ़े हुए थे| उन पर नेंल-पेंट किया हुआ था| बाएँ हाथ का अंगूठा थोड़ा सा पतला लग रहा था,और उस पर नेंल-पेंट भी नहीं लगा था|

मैनें उससे पूछा,’मोना क्या तुम अभी भी अंगूठा चूसती हो ?’

‘हाँ कभी कभी’ उसनें नज़रें झुकाते हुए कहा|

‘तुम्हारी माँ तुम्हें मना नहीं करती क्या ?’

‘वो तो बहुत गुस्सा होती हैं|’

‘तो फिर तुम ऐसा क्यों करती हो ?’

‘असल में मुझ से अनजानें में ऐसा हो जाता है|’

‘अनजानें में हो जाता है या तुम्हे इसमें मज़ा भी आता है?’

‘हाँ सच कहूँ तो जब मैं अकेली होती हूँ तो मुझे अंगूठा चूसनें में बहुत मज़ा आता है’ उसनें मेरी आँखों में देखते हुए जवाब दिया|
‘अब तुम्हारी अंगूठा चूसनें की उम्र नहीं रही है कुछ और भी चूसना सीखो |’

‘और क्या चूसनें की चीज होती है जीजाजी ?’ उसनें आँखें मटकाते हुए कहा|

‘जैसे कि, || जैसे कि , |||’ मैं गड़बड़ा गया लेकिन फिर संभालते हुए कहा ‘जैसे कि आइस कैंडी लोलीपोप और, | और, || कुल्फी, | बहुत सी चीजें हैं जिन्हें तुम प्यार से चूस सकती हो |’
एक बार तो मेरे जी में तो आया की कह दूँ अब तो तुम्हे लंड चूसना सीखना चाहिए पर मैं अभी कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था| शुरू शुरू में थोड़ा संयम बरतना होगा नहीं तो ये चिड़िया मेरे हाथों से फुर्र हो जायेगी| वैसे तो मैं भी यही चाहता था,कि वो अंगूठा चूसना जारी रखे| इसका एक कारण है ? हमारे गुरूजी कहते हैं जो लड़की बचपन में अंगूठा चूसती है वो अपनें प्रेमी या पति की अच्छी प्रेमिका और पत्नी साबित होती है और उनका दाम्पत्य जीवन बहुत ही अच्छा और सुखी बीतता है| मतलब आप बिलकुल अच्छी तरह समझ गए होंगे|

मैं बातों का सिलसिला रोमांटिक करना चाहता था, मैनें पूछा ‘अच्छा मोना एक बात बताओ |’

‘क्या ?’

‘तुम फिल्म देखती हो ?’
कहानी अभी जारी है

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