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“मामा की प्यारी बेटी की सील मैंने तोड़ी”

मेरा नाम प्रमे है| पंजाब से हूँ|

मैं पॉलिटेक्निक कर रहा हूँ| मेरा कद 5 फुट 5 इंच का है| मैं दिखनें में कुछ खास नहीं हूँ.. बस लड़कियों की चुदाई की प्यास बुझाता हूँ|
मैं अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम का एक नियमित पाठक हूँ| यह मेरी और मेरी मामा की लड़की की चुदाई की कहानी है|
बात उन दिनों की है| जब मैं अपनें मामा के यहाँ रह कर स्कूल में पढ़ता था|

मेरे मामा की एक लड़की है.. जिसका नाम मनीषा (बदला हुआ नाम) है| वो भी स्कूल में पढ़ती है|

वो दिखनें में एकदम कयामत है| उसकी लम्बाई 5 फुट 4 इंच है| उसका फिगर 36-30-36 का है.. उसके बाहर निकलते चूचे| किसी को भी चोदनें के लिए बेकरार कर सकते हैं|

मैं हमेशा उसको घूरा करता था|
एक दिन वो कमरे में झाड़ू लगा रही थी तो उसके चूचे मुझे साफ बाहर निकलते दिखाई दे रहे थे|

मैं हर रोज उसके चूचे देखता रहता और बाथरूम में जाकर उसके नाम से मुठ मारा करता था|
मेरा एक साल इसी तरह मुठ मारते हुए गुजरा लेकिन मैं जब स्कूल के आखिरी साल में आया तब तक वो और भी मस्त हो गई थी|
लेकिन दोस्तो| मरता क्या ना करता| सिर्फ मुठ मार कर ही काम चलता रहा|
कुछ दिनों बाद होली आ गई.. मैं पंजाब नहीं गया|

मैंनें अपनी होली मामा के यहाँ मनाना ही सही समझा|
मैं अपनें दोस्तों के साथ होली मनानें लग गया और मेरे दोस्तों नें उस दिन मुझे कुछ ड्रिंक करवा दी|
पीनें से मेरा दिमाग घूम गया और मैंनें अपनें दोस्तों से कहा- अब मैं जा रहा हूँ.. मुझे चढ़ गई है|
मैं वहाँ से अपनें मामा के यहाँ आ गया|

घर आकर देखा तो सिवाए मनीषा के और कोई नहीं था|
मैंनें मनीषा से पूछा- मामा मामी कहाँ गए?

तो उसनें कहा- पापा और मम्मी चाचा के यहाँ गए हैं|
यह कहानी आप अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं|
मैं नशे में था|

मैं सोचनें लगा आज तो मनीषा को चोद ही डालूंगा|
मनीषा अपनें कमरे में सोनें चली गई|

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कुछ देर बाद मैं भी नहा कर मनीषा के कमरे में गया.. तो देखा मनीषा सोई हुई है|
मैं उसके बगल में जाकर लेट गया| मैंनें धीरे से उसकी चूचे पर हाथ रखा और धीरे-धीरे दबानें लगा|
मुझे उसकी तरफ से कोई विरोध होता नहीं दिखाई दे रहा था| इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं उसके चूचों से अपनें हाथ को नीचे लाता गया और उसके पजामे में डाल दिया|
कुछ पल चूत का जायजा लिया.. फिर उसकी चूत को सहलानें लगा|

कुछ मिनट उसकी चूत सहलानें के बाद मैंनें उसका नाड़ा खोल दिया और कुरते को भी उतार दिया|
फिर भी वो कुछ भी नहीं बोली|

मैंनें खुलकर उसको पूरा नंगा कर दिया और मैं भी पूरा नंगा हो गया|

अब मैं उसकी चूत को फैला कर चाटनें लगा|
क्या स्वाद था यारों उसकी चूत का.. नमकीन लस्सी की तरह…
पांच मिनट तक उसकी चूत चाटनें के बाद मैं खड़ा होकर उसके मुँह की तरफ गया और अपनें लंड को उसके मुँह में घुसानें लगा.. लेकिन वो मेरे लंड को मुँह में नहीं ले रही थी|
फिर मैंनें अपनें हाथों से उसके मुँह को दबाया और लंड को उसके मुँह में घुसेड़ दिया और आगे-पीछे करनें लगा|
कुछ मिनट के बाद मैं उसके पैरों की तरफ आया और उसके दोनों पैरों को अपनें कंधों पर रखा और उसके कूल्हों के नीचे तकिया रख दिया|

अब उसकी चूत बिलकुल मेरे लंड के सामनें थी|
मुझे रहा नहीं जा रहा था तो मैंनें देर ना करते हुए अपनें लंड को उसकी चूत पर थोड़ा रगड़ा और घुसानें लगा.. लेकिन लंड अन्दर नहीं जा रहा था|
मैंनें अपनें लंड पर अपना थूक लगाया और धीरे-धीरे घुसानें लगा| अभी आधा लंड ही घुसा था कि वो दर्द से चिल्लानें लगी|

मैंनें झट से उसके होंठों पर अपनें होंठ रख दिए.. जिससे उसकी आवाज दब गई और मैंनें दूसरे ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया|
अब मैं उसका मुँह दबाए हुए धीरे-धीरे लौड़े को चूत में अन्दर-बाहर करनें लगा|
करीब पांच मिनट बाद वो ठीक महसूस करनें लगी|

अब मैंनें स्पीड बढ़ा दी और उसकी कराह भरी आवाजें कामुक सिसकारियों में बदलनें लगीं|
कुछ मिनट की धकापेल चुदाई के बाद उसके झड़ जानें के बाद मैं झड़नें को हुआ और मैंनें अपना पूरा माल उसकी चूत में निकाल दिया|
उसकी दोबारा की अकड़न से मालूम हुआ कि शायद वो दोबारा भी झड़ गई थी|
मैं कुछ देर उसके ऊपर लेटा रहा.. फिर मैं उठ कर बाहर वाले बाथरूम में गया और लंड धोकर वापस आ गया|
जब मैं वापस मनीषा के कमरे में आया.. तो देखा कि मनीषा उठ कर कपड़े पहन रही थी|
मैंनें उससे पूछा- तुम सोनें का नाटक क्यों कर रही थीं|

वो शर्मा गई और तुरंत मेरी बांहों में आकर कहनें लगी- वो तो मैं देख रही थी कि तुम क्या करते हो.. सच में तुमनें मुझे वो मज़ा दिया है.. जो मैं किसी के साथ नहीं ले सकती थी|

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