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"माँ और भाभी की चुदाई"

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नमस्ते मित्रो… मैं मुजफरनगर ब्वॉय आप सभी के लिए एक नई सच्ची कहानी के साथ आपकी चूत और लण्ड को गर्म करनें हाजिर हूँ!

अन्तर्वासना की गर्म भाभियाँ, आंटियां और लड़कियां मेल करके हमेशा जल्द नई कहानी लिखनें के लिए कहती रहती हैं!
इस कहानी को लिखनें में मुम्बई की एक भाभीजी मदद की है… उनका नाम यहाँ नहीं बता सकता… उन्हें बुरा लगेगा और मैं उनका विश्वास नहीं तोड़ना चाहता… तो पेश है एक नई कहानी…
पुनः लिख रहा हूँ कि यह कहानी पूर्णतय: सच है!
मेरे घर में मेरी सौतेली माँ… भाभी और भैया रहते थे! मेरे पिताजी नें कम उम्र की लड़की से शादी करे उन्हें मेरी माँ बना दिया था!
मेरी सौतेली माँ की उम्र 31 साल है! मेरे पिताजी और भाई एक दिन शहर जाते हुए एक्सिडेंट में मारे गए थे! भाई की शादी को सिर्फ 3 महीनें ही हुए थे! तब से घर खेत के काम माँ ही देखती हैं और घर के सभी काम भाभी देखती हैं!

मैं माँ और भाभी का लाड़ला हूँ! बचपन से मैं माँ के साथ ही खेतों में हगनें के लिए जाता था! हमारे गाँव में सभी बाहर ही खेतों में हगनें जाते थे! हमारे घर के पीछे ही कुछ दूरी पर खेत हैं… वहीं सभी गाँव की औरतें भी हगनें जाती थीं!
हगनें के लिए माँ मुझे अपनें पास ही बिठाती थीं, हमेशा अपनी माँ की चूत गाण्ड रोज देखता था! हगनें के बाद माँ मुझे नहलाया करती थीं! नहानें से पहले… माँ मेरे लण्ड की तेल से मालिश करती थीं!
भाभी के आनें के बाद कई बार मैं भाभी के साथ भी जाता था! कई बार भाभी नें भी मेरे लण्ड की मालिश की है! भाभी भी मुझे अपनें पास ही हगनें के लिए बिठाती थीं!
अब जब मैं बड़ा होनें लगा… तो खुद अकेला ही हगनें जाता था और नहाता भी अकेला ही था!
अब मैं एक गबरू जवान हो गया था… और रोज कसरत करता था! मेरी मस्त बॉडी बन गई थी! रोज सुबह जब नहानें जाता था… तब मेरे लण्ड की मालिश के लिए भाभी मुझे रोज हाथ में तेल जरूर देती थीं… कभी माँ भी देती थीं!
एक दिन माँ की तबियत खराब हो गई तो माँ जल्दी सो गईं! मैं अब हगनें के लिए जानें वाला था… हाथ में पानी का डिब्बा उठाया… तो भाभी हँसते हुए बोलीं- कहाँ जा रहे हो देवर जी?

मैं- भाभी अभी आता हूँ हग कर…

भाभी- पहले तो मेरे साथ हगते थे… और अब अकेले-अकेले हग कर आते हो… क्या आजकल किसी गाँव की दूसरी औरतों के साथ हगते हो?

इतना कह कर वे जोर-जोर से हँसनें लगीं!
मैं शरमाते हुए बोला- भाभी आपनें ही तो मेरे हगना बंद कर दिया… और अब ऐसा कहती हो?

भाभी- कोई बात नहीं… बंद कर दिया तो क्या हुआ… अब फिर चालू कर देते हैं!

मैं- ठीक है… चलो चलते हैं!
भाभी और मैं हगनें के लिए हमारे घर के पीछे वाले खेतों में निकल पड़े! रास्ते में चलते-चलते मैं भाभी के पीछे चलनें लगा, भाभी पीछे से मस्त गाण्ड मटका मटका कर चल रही थीं!
कुछ देर में हम दोनों खेत में काफी अन्दर आ गए थे! अच्छी साफ़ जगह देखकर हम दोनों बैठनें लगे! भाभी नें अपनी साड़ी ऊपर की और अपनी चड्डी नीचे कर ली और मेरे सामनें हगनें बैठ गईं!

मैं भी पैन्ट और अन्डरवियर नीचे करके हगनें बैठ गया!
भाभी नें मेरे लण्ड को घूरते हुए कहा- अरे वाह देवर जी… अब तुम्हारी नुन्नी तो लण्ड बन गई है!

मैं- हाँ… ये तो माँ और आप की मेहरबानी है!
हम दोनों हँसनें लगे!
भाभी- पर इतनें बाल हैं लण्ड पर… कभी निकालते नहीं हो क्या…?

मैं- नहीं इनके बारे में ख्याल ही नहीं आया… और आपनें भी बाल निकालना कहाँ सिखाया!

मैं भी भाभी की चूत को गौर से देख रहा था… और भाभी भी ये देख रही थीं कि मैं उनकी चूत देख रहा हूँ!
भाभी नें हँसते हुए कहा- क्यों देवर जी किसी की चूत नहीं देखी क्या… जो मेरी चूत इतनी गौर से देख रहे हो!

मैं- देखी तो बहुत हैं और पेली भी हैं भाभी!

भाभी- क्या? कब… किसकी देख ली और पेल ली…

उन्होंनें थोड़ा गुस्सा होते हुए और अचम्भे से पूछा!
मैं- क्या भाभी… यहाँ तो रोज ही हगनें आता हूँ… और गाँव की सारी औरतें भी हगनें के लिए यहीं आती हैं! अब तक गांव की सारी चूतें देख चुका हूँ! गाँव की हर लड़की… भाभी और बुढ़ियों तक की देख ली है… और तो और गाँव की नई-नई दुल्हनों की भी चूतें देखी हैं!
भाभी- अरे वाह… मेरे शेर… मैं तो तुम्हें बच्चा समझ रही थी और तुम तो काफी आगे निकले… तो सिर्फ देखी ही हैं या कुछ किया भी है… या यूँ ही कह रहे हो कि पेली हैं!
मैं- हाँ भाभी रोज रात में गाँव की जिस भी औरत की चूत में खुजली होती है… तो वो यहीं आ जाती है और हगनें के बाद मैं उनकी मस्त पेलता हूँ!
भाभी- क्या रवि… गांव की इतनी औरतों को चोदा… और घर की चूतों का ख्याल ही नहीं रखा तुमनें?

मैं- मतलब… भाभी मैं समझा नहीं कुछ?

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भाभी- ज्यादा भोले मत बनो! मैंनें और सासू माँ नें इतनी मालिश की तुम्हारी… और तुम हो कि कभी हमारे साथ कुछ किया ही नहीं…
मैं- भाभी आपको और माँ को कैसे चोद सकता हूँ मैं?

भाभी- वाह… रोज लण्ड की मालिश करवा सकते हो… हमारे साथ नहा सकते हो… हग सकते हो… तो फिर चोद क्यों नहीं सकते…?

मैं- ठीक है आपको तो चोद लूँगा… पर भाभी… माँ को कैसे चोदूँ?
भाभी- मैं सब बता दूँगी… चलो अभी घर चलते हैं… आज से ही शुरू करते हैं और माँ की चिंता मत करो… वो खुद तुम्हारे लण्ड के इंतजार में हैं! इसी लिए तो बेचारी वे तुम्हारे लण्ड की मालिश रोज करती थीं!

मैं- क्या सच में?

भाभी- हाँ…
मैं- ये आपको कैसे पता…? और माँ नें भी मुझे कभी नहीं कहा… वे तो रोज ही लण्ड हाथ में लेती थीं… जब इतनी बात थी तो आप दोनों नें मेरे लण्ड को चूत में क्यों नहीं लिया?

भाभी- तब तुम बच्चे थे… अब बड़े जवान और बड़े लण्ड वाले हो… एक दिन मैंनें तुम्हारी माँ को चूत में गाजर डालते देखा था… तो उन्होंनें मुझे देख लिया था! मुझे देखते ही वो थोड़ी डर गई थीं… और मुझे बुला कर उन्होंनें कहा भी था कि किसी को मत बताना! मैंनें भी कहा कि इसमें किसी से कहनें की क्या बात है! मैं भी तो रोज उंगली या गाजर-मूली डाल लेती हूँ! तब तुम्हारी माँ बोलीं कि अब समय आ गया है कि रवि का लण्ड लिया जाए और जीवन का सूनापन दूर किया जाए!
मैं- अगर ऐसी बात है… तो मैं अब आप दोनों को कभी प्यासा नहीं रहनें दूँगा… रोज चोदूँगा! आज से गाँव की औरतों की चूत मारना बंद समझो…

भाभी- हाँ जरूर रोज चोदना हम दोनों सास-बहू को… और हाँ गाँव की चूतें जो तुमनें अपनें बड़े लण्ड से भोसड़ा बना दी हैं… उन्हें भी जरूर चोदते रहना! उन्हें क्यों नाराज करते हो… उनकी भी प्यास मैं समझ सकती हूँ!

मैं- ठीक है भाभी… जैसा आप कहें!
अब मेरा लण्ड हगते हुए खड़ा हो गया था… भाभी की भी नजर उस पर पड़ी!

भाभी- अरे ये क्या… तेरा लण्ड तो अभी से खड़ा हो गया… शायद रोज इसी समय चुदाई करते हो… तो इसी कारण खड़ा हो गया होगा!

मैं और भाभी हँसनें लगे!
अब हमनें अपनी-अपनी गाण्ड धोई… और घर की तरफ निकलनें लगे!
घर जाते ही भाभी नें देखा कि माँ सो रही थीं! भाभी नें घर का दरवाजा ठीक से बंद कर दिया और मुझसे चिपक गईं, भाभी मेरे होंठ चूसनें लगीं, मैं भी भाभी के होंठ चूसनें लगा!
क्या बताऊँ दोस्तों… भाभी के होंठ इतनें नर्म थे… जैसे कोई गुलाब के फूल की पंखुरियाँ हों!

हमनें लगातार 10 मिनट तक होंठ चूसे!
अब मैं भाभी के बोबे दबानें लगा! उनके बोबे काफी बड़े और सख्त थे… दबानें में इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊँ! हम दो जिस्म एक जान बन गए थे! इसी में 30 मिनट निकल गए!

मैंनें झट से भाभी की साड़ी ऊपर की और उनकी चड्डी निकाल दी, भाभी की झाँटों वाली चूत चाटनें लगा!
हम दोनों कुछ देर पहले तो हग कर आए थे… तो भाभी नें बिना हाथ-पैर धोए और चूत धोए चूमना चालू कर दिया!

क्या मस्त मादक गंध थी भाभी की चूत की… कभी उनके मूत की गंध… तो कभी उनकी मादक और प्यासी चूत की गंध…
मैंनें चूत को हाथों से सहलाया और चूत चौड़ी करके चाटनें लगा! कभी भाभी के मस्त काले हल्के भूरे रंग के दानें को चाटता… तो कभी पूरी जीभ चूत के अन्दर डालनें लगता!
भाभी मेरा सर अपनी चूत पर दबानें लगीं और जोर-जोर से चिल्लानें लगीं- चाट रवि… चाट… अपनी इस भाभी की प्यासी चूत को आज खा जा… आह्ह… चाट इसे… आहह…उह्ह…

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अब भाभी की चूत से मस्त खारा और चिकना पानी आनें लगा! मैं पूरा पानी चाटनें लगा और पीनें लगा!

पानी छोड़नें के बाद भाभी अब थोड़ी शांत हो गई थीं!
अब भाभी उठीं और मेरे लण्ड को मेरी पैन्ट से निकालनें लगीं!

लण्ड निकालनें में दिक्कत आ रही थी क्योंकि लण्ड फूल कर काफी कड़ा और बड़ा हो गया था!
भाभी नें मेरी पूरी पैन्ट निकाल दी, अब मैं नीचे से पूरा नंगा हो चुका था, भाभी नें लण्ड हाथ में लिया और बोलीं- बापरे… ये तो पहले से भी ज्यादा बड़ा दिख रहा है… इतना लंबा और बड़ा हो गया है कि हाथ में भी नहीं आ रहा है!

मैं बोला- ये तो आप दोनों की मालिश की देन है और आज आपको चोदनें की उत्सुकता भी बहुत हो रही है… इसी कारण इतना फूल गया है!
भाभी नें लण्ड को सहलाना चालू किया और अब मेरे लण्ड को चूसनें लगीं!

मैंनें भी हगनें के बाद घर आकर लण्ड और हाथ-पैर नहीं धोए थे… लण्ड पर लगी मूत की कुछ बूँदें भी भाभी चाट रही थीं!
मेरा गाँव का देशी लण्ड भाभी के मुँह में पूरा जा ही नहीं रहा था… काफी मोटा था! भाभी सिर्फ मेरे लण्ड का टोपा ही चूस पा रही थीं!

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