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“माँ के साथ उसकी कुवारी बेटी की चुदाई”-1

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मै ओम  उम्र 44 साल! अविवाहित पर चुदाई का मजा लेनें में खूब उस्ताद| मेंरी इस कहानी में जो लड़की है उसका नाम है- जुली खान|
वो मेंरे एक दोस्त प्रोफ़ेसर दीनानाथ की बेटी है|

जुली के पिता और मै दोनों कॉलेज के दिनों से दोस्त हैं| उनकी शादी एम|ए| करते समय हीं हो गई|
मेंरी भाभी जी यानि उनकी बेगम रिश्ते में मौसेरी बहन थी|

खैर मै तो जुली के बारे में कहनें वाला हूं उसके माँ-बाप में तो शायद ही आप-लोगों को रुचि हो|

जुली 18 साल की बी कॉम प्रथम वर्ष की छात्रा है! बहुत सुन्दर चेहरे की मालकिन है| एकदम गोरी! 5’5′ लम्बी! पतली छरहरी काया! लहराती-बलखाती जब वो सामनें से चलती तो मेंरे दिल में एक हूक सी उठती|
मेंरे जैसे चुतखोर मर्द के लिए उसका बदन एक पहेली था! कैसी लगेगी बिना कपड़ों के जुली?

तब मै भूल जाता कि वो मेंरे गोद में खेली है! उसके बदन को जवान होते मैनें देखा है| उसकी बूब नींबू से छोटे सेब! संतरा! अनार होते देखा है! महसूस किया है|
सोच-सोच कर मैनें पचासों बार अपना लंड झाड़ा होगा पर उसका मुझे चाचा कहना! मुझे रोक देता था कुछ भी करनें से| उसके दिल की बात मुझे पता नहीं थी न|
वैसे जुली का चक्कर दो-तीन लड़कों से चला था! घर पर उसे खूब डाँट भी पड़ी थी! पर उन लोगों नें हद पार की थी या नहीं मुझे पता न चल पाया|

और जब भी मेंरे दोस्त और भाभी जी नें इस बात की चर्चा की! तब उनके भाषा से मुझे कुछ समझ नहीं आया|

और एक बार। भगवान की दया से कुछ ऐसा हुआ कि।

हुआ यह कि जुली के नाना की तबियत खराब होनें की खबर आई और जुली के अम्मी-अब्बा को उसके ननिहाल मेंरठ जाना पड़ा|
जुली की पढ़ाई चलते रहनें की वजह से वो उसको नहीं ले जा सके|
उनके घर में नीचे के हिस्से में जो किरायेदार थे वो भी अपनें गाँव गए हुए थे! सो जुली को अकेला वहाँ न छोड़! उन लोगों नें उसको एक सप्ताह मेंरे साथ रहनें को कहा|
असल में यह प्रस्ताव मैनें ही उन लोगों को परेशान देख कर दिया था| वो तुरंत मान गए|

मेंरे दोस्त नें तब कहा भी कि यार मै भी यही सोच रहा था पर तुम अकेले रहते हो! लगा कहीं तुम्हें कोई परेशानी ना हो|

बातचीत करते हुए जमील नें हल्की आवाज में बताया कि एक बार पहले भी वो जुली को अकेले तीन दिन के लिए छोड़े थे तो आनें पर किरायेदार से पता चला कि दो दिन लगातार जुली के साथ कोई लड़का रहा था! जो उसके साथ स्कूल में पढ़ता था! अब कहीं इंजीनियरिंग पढ़ रहा है|

वो अपनी परेशानी मुझे बता रहा था और मै सोच रहा था कि जब जुली अपनें घर पर एक लड़के को माँ-बाप के नहीं रहनें पर रख सकती है! तो घर के बाहर तो वो जरूर ही चुदवाती होगी|

खैर! अगले दिन सुबह कोई 7 बजे वो लोग जुली को मेंरे अपार्ट्मेंट पर छोड़नें आए! चाय पी और मेंरठ चले गये| जुली तब अपनें स्लीपिंग ड्रेस में ही थी- एक ढ़ीली सा कैप्री और काला गोल गले का टी-शर्ट|

उसको को नौ बजे कॉलेज जाना था! दो घंटे के लिए|

मेंरी नौकरानी नाश्ता बना रही थी! जब जुली किचन में जाकर उससे पूछनें लगी- साबुन कहाँ है?

असल में अकेले रहनें के कारण मेंरे कमरे के बाथरूम में तो सब था पर दूसरे कमरे! जिसमें जुली का सामान रखा गया था! वह बाथरूम कपड़े धोनें के लिए ही इस्तेमाल होता था|

मैनें तभी कहा- जुली! तुम मेंरे कमरे का बाथरूम प्रयोग कर लो! मुझे नहानें में अभी समय है|

और जुली अपन कपड़े लेकर मुस्कुराते हुए चली गई| मै बाहर वाले कमरे में अखबार पढ़ रहा था! जब जुली तैयार हो! नाश्ता करके आई! बोली- चाचा! मै करीब बारह बजे लौटूँगी! तब तो घर बंद रहेगा?

मैनें उसके भीगे बालों से घिरे सुन्दर से चेहरे को देखते हुए कहा- परेशान होनें की कोई बात नहीं है! तुम एक चाबी रख लो!

और मैनें नौकरानी से चाबी ले कर उसको दे दी| (मैनें एक चाबी उसको इसलिए दी थी कि वो शाम को आ कर काम कर जाए और मेंरा खाना पका जाए) साथ ही नौकरानी को शाम की छुट्टी कर दी कि शाम को हम लोग होटल में खाना खा लेंगे|
थोड़ी देर में नकरानी भी काम निपटा कर चली गई! और मै तैयार होनें बाथरूम में आया|

और|

बाथरूम में जुली की कैप्री और टी-शर्ट खूँटी से टंगी थी और नीचे गीली जमीन पर जुली की ब्रा-पैन्टी पड़ी थी| ऐसा लग रहा था कि उसनें उन्हें धोया तो है! पर सूखनें के लिए डालना भूल गई| मेंरे लन्ड में सुरसुरी जगनें लगी थी|

मैनें उसके अन्तर्वस्त्र उठा लिए और उनका मुआयना शुरु कर दिया| सफ़ेद ब्रा का टैग देखा-लवेबल 32 बी| सोचिए! 5’5′ की जुली कितनी दुबली-पतली है|

मैनें अब उसकी पैन्टी को सीधा फ़ैला दिया|
वो एक पुरानी पन्टी थी- रुपा सॉफ़्ट्लाईन 32 नम्बर।
इतनी पुरानी थी कि उसके किनारे पर लगे लेस उघड़नें लगे थे और वो बीच से हल्का-हल्का घिस कर फ़टना शुरु कर चुकी थी| मैनें उसे सूँघा! पर उसमें से साबुन की ही खुशबू आई|

फ़िर भी मैनें ऐसे तो कई बार उसके नाम की मुठ मारी थी! पर आज उसकी पैन्टी से लन्ड रगड़-रगड़ कर मुठ मारी और अपना माल उसके पैन्टी के घिसे हुए हिस्से पर निकाला और फ़िर बिना धोये ही पैन्टी-ब्रा को सूखनें के लिए डाल दिया|

मेंरे दिमाग में अब ख्याल आनें लगा कि एक बार कोशिश कर के देख लूँ! शायद जुली पट जाए| पर मुझे अब देर हो रही थी सो मै जल्दी-जल्दी तैयार हो कर निकल गया|

शाम को करीब सात बजे मै घर आया! जुली बैठ कर टीवी देख रही थी| उसनें ही मुझे चाय बना कर दी|

हम दोनों साथ चाय पी रहे थे! जब मैनें कहा- तैयार हो जाओ जुली! आज बाहर ही खाएंगे!

खुशी उसके चेहरे पर झलक गई और मै उसके उस सलोनें से चेहरे से नजर हटा न पाया|

हम लोग इधर-उधर की बात कर रहे थे! तभी उसे ख्याल आया! बोली- सॉरी चाचा! आज आपके बाथरूम में गलती से मेंरे कपड़े रह गए| असल में मेंरे जानें के बाद अम्मी जब सारे घर को ठीक करती है! तो वो यह सब भी कर देती है| कल से ऐसा नहीं होगा|

उसके चेहरे पे सारी दुनिया की मासूमियत थी|

मैनें भी प्यार से कहा- अरे! कोई बात नहीं बेटा! मुझे कोई परेशानी नहीं हुई| तुम तो धो कर गई ही थी! मैनें तो सिर्फ़ सूखनें के लिए तार पर डाल दिया|

फ़िर थोड़ी शरारत मन में आई तो कह दिया- वैसे भी तुम तो खुद दस किलो की हो! तो तुम्हारी ब्रा-पैन्टी तो 10 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए न| उसको सूखनें डालनें में कोई मेंहनत तो करना नहीं पड़ा मुझे|

उसनें अपनी बड़ी-बड़ी आँखों को गोल-गोल नचाया- पूरे 41 किलो हूं मै!

मैनें तड़ से जड़ दिया- ठीक है! फ़िर तो मै सुधार कर देता हूं! फ़िर 41 ग्राम होगी ब्रा-पैन्टी?

वो मुस्कुरा कर बोली- मेंरा मजाक बना रहे हैं! मै तैयार होनें जा रही हूं|

और वो अपनें कमरे में चली गई! मै अपनें कमरे में|

कोई आधे घण्टे बाद हम घर से निकले| जुली नें एक गहरे हरे रंग की कैप्री और गुलाबी टॉप पहनी थी| बालों को थोड़ा ऊपर उठा पैनीटेल बनाया था! पैर में बिना मोजा रीबॉक के जूते|

मै उसकी खूबसूरती पर मुग्ध था|

हम लोग पैदल ही एक घण्टा घूमें और फ़िर करीब नौ बजे एक चाईनीज रेस्तराँ में खाना खाकर दस बजे तक घर आ गए| थोड़ी देर टीवी देखनें के बाद करीब 11 बजे जुली अपनें कमरा में और मै अपनें कमरा में सोनें चले गए| जुली के बारे में सोचते सोचते बड़ी देर बाद मुझे नींद आई|

अगले दिन करीब छः बजे जुली नें मुझे जगाया! वो सामनें चाय लेकर खड़ी थी| मेंरे दिमाग में पहला ख्याल आया कि आज का दिन अच्छा हो गया! उसकी सलोनी सूरत देख कर|

हमनें साथ चाय पी| वो तब मेंरे बिस्तर पे बैठी थी| उसनें एक नाईटी पहनी हुई थी जो उसके घुटनें से थोड़ा नीचे तक थी| रेडीमेंड होनें के कारण थोड़ा लूज थी! और उसके ब्रा के स्टैप्स दिख रहे थे| आज उसे साढ़े आठ बजे निकलना था! सो वो बोली-‘आप बाथरूम से हो लीजिए! तब मै भी नहा लूँगी! आज थोड़ा पहले जाना है|

मै जब बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि उसनें मेंरा बिस्तर ठीक कर दिया है और अपनें कपड़े हाथ में लेकर मेंरे बेड पर बैठी है|

जब वो बाथरूम की तरफ़ जानें लगी तब मैनें छेड़ते हुए कहा- आज भी अपना 41 ग्राम छोड़ देना|

वो यह सुन जोर से बोली- छीः! और हल्के से हँसते हुए बाथरूम का दरवाजा बन्द कर लिया|

मै बाहर बैठ पेपर पढ़ रहा था! जब वो बोली-‘मै जा रही हूं चाचू! करीब एक बजे लौटूँगी! मेंरा लंच बनवा दीजिएगा! नस्ता मै कैंटीन में कर लूँगी|

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मै उसको कसे पीले सलवार कुर्ते में जाते देखता रहा! जब तक वो दिखती रही| उसकी सुन्दर सी गांड हल्के हल्के मटक रही थी|

थोड़ी देर में मेंरी नौकरानी मैरी आ गई और अपना काम करनें लगी! मै भी तैयार होनें बाथरूम में आ गया|
मुझे थोड़ा शक था कि आज शायद मुझे ब्रा-पैन्टी ना दिखे! पर मेंरी खुशी का ठिकाना न रहा जब मैनें देखा कि आज फ़िर उसनें अपनी ब्रा-पैन्टी धो कर कल की तरह ही जमीन पर छोड़ दी है|
कल शायद उससे गलती से छूट गया था! पर आज के लिए मै पक्का था कि उसनें जान-बूझ कर छोड़ा है|
मुझे लगनें लगा कि यह साली पट सकती है|

मैनें आज फ़िर उसकी पैन्टी लंड पे लपेट मूठ मारी और माल उसके पैन्टी में डाल दिया| यह वाली पैन्टी कल वाली से भी पुरानी थी! और उसमें भी दो-एक छोटे छेद थे| पर मुझे मजा आया| मैनें अपनें माल से लिपटी पैन्टी को ब्रा के साथ सूखनें को डाल दिया|

शाम को मुझे आनें में थोड़ी देर हो गई! मैरी हम दोनों का खाना बना कर जा चुकी थी| मै जब आया तो जुली नें चाय बनाई और हम दोनों गपशप करते हुए चाय पीनें लगे|

जुली नें ही बात छेड़ दी- आज फ़िर आपको मजा आया मेंरी सेवा करके?
मै समझ न सका तो उसनें कहा- वही 41 ग्राम! सुबह! और मुस्कुराई|

मैनें भी कहा- हाँ! मजा तो खूब आया पर जुली! इतनें पुरानें कपड़े मत पहना करो! फ़टे कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता|

वो समझ गई! बोली- ठीक है चाचू! आगे से ख्याल रखूँगी|

मैनें देखा कि बात सही दिशा में है तो आगे कहा- अच्छा जुली! थोड़ा अपनें निजी जीवन के बारे में बताओ| जमील कह रहा था कि तुम्हारा किसी लड़के के साथ चक्कर था| अगर न बताना चाहो तो मना कर दो|

वो थोड़ी देर चुप रही! फ़िर उसनें रेहान के बारे में कहा! जो उसके साथ स्कूल में 5 साल पढ़ा था! दोनों अच्छे दोस्त थे पर ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको इतना डाँटा जाए! रेहान तो फ़िर उस डाँट के बाद कभी मिला भी नहीं| अब तो वो उसको अपना पहला क्रश मानती थी|

मैनें तब साफ़ पूछ लिया- क्यों! क्या चुदाई-उदाई नहीं किया उसके साथ?

वो अपनें गोल-गोल आँख घुमा कर बोली- छीः! क्या मै आपको इतनी गन्दी लड़की लगती हूं! रेहान मेंरा पहला प्यार था! अब कुछ नहीं है!

मैनें मूड को हल्का करनें के लिए कहा- अरे नहीं बेटी तुम और गन्दी! कभी नहीं! हाँ थोड़ी शरारती जरूर हो! बदमाश जो अपनी ब्रा-पैन्टी अपनें चाचू से साफ़ करवाती हो|

वो बोली- गलत चाचू! साफ़ तो खुद करती हूं! आप तो सिर्फ़ सूखनें को डालते हो|

हम दोनों हँसनें लगे|

फ़िर खाना खा कर टहलनें निकल गए| बातों बातों में वो अपनें कॉलेज के बारे में तरह तरह की बात बता रही थी और मै उसके साथ का मजा ले रहा था|

तीसरे दिन भी सुबह जुली के चेहरे पर नजर डाल कर ही शुरु हुई| उस दिन मैरी थोड़ा सवेरे आ गई थी! जुली का नाश्ता बना रही थी| मै भी अपनें औफ़िस के काम में थोड़ा व्यस्त था कि जुली तैयार हो कर आई|

मैन घड़ी देखी- 8:30

जुली बोली- चाचू आज भी रख दिया है मैनें आपके लिए 41 ग्राम… और आज धोई भी नहीं हैं|

और वो चली गई|

मैनें भी अब जल्दी से फ़ाईल समेंटी और तैयार होनें चला गया|
आज बाथरूम में थोड़ी चुदाईी किस्म की ब्रा-पन्टी थी और उससे बड़ी बात कि आज जुली नें उस पर पानी भी नहीं डाला था|

दोनों एक सेट की थी! गुलाबी लेस की| इतनी मुलायम कि दोनों मेंरी एक मुट्ठी में बन्द हो जाए|

मैनें पैन्टी फ़ैलाई-स्ट्रिन्ग बिकनी स्टाईल की थी| उसके सामनें का भाग थोड़ा कम चौड़ा था! करीब 4 इंच और नीचे की तरफ़ पतला होते होते योनि-स्थल पर दो इंच का हो गया था! फ़िर पीछे की तरफ़ थोड़ा चौड़ा हुआ पर 5 इंच का होते होते कमर के इलास्टिक बैंड में जा मिला| साईड की तरफ़ से पुरा खुला हुआ! बस आधा इंच से भी कम की इलस्टिक|

मैनें प्यार से उस गन्दी पैन्टी का मुआयना किया| चुत के पास हल्का सा एक दाग था! जो बड़े गौर से देखनें पर पता चलता! मैनें उस धब्बे को सूंघा| हल्की सी खट्टेपन की बू मिली और मेंरा लन्ड को सुरूर आनें लगा|
मैनें प्यार से उसी धब्बे पर अपना लन्ड भिड़ा! पैन्टी को लन्ड पे लपेट मजे से मुठ मारनें लगा और सारा माल उसी धब्बे पर निकाला! फ़िर उस पैन्टी-और ब्रा को सिर्फ़ पानी से धो कर सुखनें डाल दिया|

शाम साढ़े सात बजे घर आया! साथ चाय पीनें बैठे तो मैनें बात छेड़ दी- आज तो जुली बेटी! तुमनें कमाल कर दिया|

वो कुछ नहीं बोली तो मैनें कह दिया- बिना धुली ब्रा-पैन्टी से तुम्हारी खुशबू आ रही थी|

वो शर्मानें लगी! तो मैनें कहा- सच्ची बोल रहा हूं! मैनें सूँघ कर देखा था| तुम्हारे बाप की उम्र का हूं! पर आज वाली 41 ग्राम की खुशबू नें मेंरे दिल में अरमान जगा दिये|

वो थोड़ा असहज दिखी! तो मैनें बात थोड़ा बदला- पर मैनें भी दिल पर काबू कर लिया! तुम परेशान न हो|

वो मुस्कुराई! तब मैनें कहा- पर आज वाली तो बहुत चुदाईी थी! अब कल क्या दिखाओगी मुझे?
शाम साढ़े सात बजे घर आया! साथ चाय पीनें बैठे तो मैनें बात छेड़ दी- आज तो जुली बेटी! तुमनें कमाल कर दिया|

वो कुछ नहीं बोली तो मैनें कह दिया- बिना धुली ब्रा-पैन्टी से तुम्हारी खुशबू आ रही थी|

वो शर्मानें लगी! तो मैनें कहा- सच्ची बोल रहा हूं! मैनें सूँघ कर देखा था| तुम्हारे बाप की उम्र का हूं! पर आज वाली 41 ग्राम की खुशबू
नें मेंरे दिल में अरमान जगा दिये|

वो थोड़ा असहज दिखी! तो मैनें बात थोड़ा बदला- पर मैनें भी दिल पर काबू कर लिया! तुम परेशान न हो|

वो मुस्कुराई! तब मैनें कहा- पर आज वाली तो बहुत चुदाईी थी! अब कल क्या दिखाओगी मुझे?

वो मुस्कुराई- कल 30 ग्राम मिलेगा|

मै- क्यों?

वो बोली- क्योंकि आज मैनें नीचे पहनी ही नहीं है| वो दोनों पुरानी वाली पहननी नहीं थी और ये वाली तो आज धुली है! कल पहनूँगी|

मैनें कहा- ऐसी बात है तो चल आज ही खरीद कर लाते हैं| मैनें आज तक कभी लेडीज पैन्टी नहीं खरीदी! आज यह भी कर लेते हैं|

वो थोड़ा सकुचाई तो मैनें उसको हाथ पकड़ कर उठा दिया! बोला- जल्दी तैयार हो जाओ|

मै तब जींस और टीशर्ट में था! और वो अपनें नाईटी में|
वो दो मिनट में चेंज करके आ गई- नीले स्कर्ट और पीले टॉप में वो जान-मारू दिख रही थी|

उसनें आते हुए कहा- स्कर्ट में सुविधा होगी! एक तो वहीं पहन लूँगी! और एक और ले लूंगी|

बहुत मस्त लौन्डिया थी वो| मेंरे जैसे मर्द को टीज करना खूब जानती थी|

जब भी मै ये सोचता कि साली नंगी चुत ले कर बाजार में है! मेंरे दिल से एक हूक सी निकल जाती|

हम एक लेडीज अंडरगार्मेंट्स स्टोर में गए| मेंरे लिए यह पहला अनुभव था| दो-तीन और लेडीज ग्राहक थीं|
हमारे पास एक करीब 28-30 साल की एक सेल्सगर्ल आई तो मैनें उसे एक ब्र-पैन्टी सेट दिखानें को कहा|

क्या साईज? और कोई खास स्टाईल? कहते हुए उसनें एक कैटेलॉग हमें थमा दिया|

एक से एक मस्त माल की फ़ोटो थी! तरह तरह की ब्रा-पैन्टी में| मै फ़ोटो देखनें में व्यस्त हो चुका था कि जुली बोली- सिर्फ़ पैन्टी लेते हैं ना|

मैनें नजर कैटेलग पर ही रखते हुए कहा- एक इसमें से ले लो! फ़िर दो-तीन पैन्टी ले लेना|
कहानी अभी जारी है….

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