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“माँ के साथ उसकी कुवारी बेटी की चुदाई”-2

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मैनें नजर कैटेलग पर ही रखते हुए कहा- एक इसमे से ले लो! फ़िर दो-तीन पैन्टी ले लेना|

सेल्सगर्ल नें पूछा-‘दीदी के लिए लेना है या मैडम के लिए? मैनें जुली की तरफ़ इशारा किया|

वो मुस्कुराते हुए बोली- किस टाईप का दूँ! थोड़ी चुदाईी! हॉट या सॉबर?

मैनें जब उसे थोड़ा चुदाईी टाईप दिखानें को बोला तो वो मुस्कुराई| वो समझ रही थी कि मै उस हूर के साथ लंपटगिरी कर रहा हूं|

उसनें कुछ बहुत ही मस्त सेट निकल दिए| एक तो बस सिर्फ़ पैन्टी के नाम पर 2’ का सफ़ेद पारदर्शी जाली थी ब्रा भी ऐसा कि जितना छुपाती नहीं उतना दिखाती| मुझ वो ही खरीदनें का मन हुआ! पर जुली नें एक दूसरा पसंद किया|

जब मैनें कहा कि एक वह चुदाईी टाईप ले कर देखे! तो वो बोली- नहीं! पर अगर आपका मन है तो सिर्फ़ पैन्टी मे ऐसा कुछ देख लेंगे! पैसा भी कम लगेगा|

जुली की पसंद की पैन्टी उसकी चुदाईी पैन्टी से थोड़ी और छोटी थी| चुतड़ तो लगभग 90% बाहर ही रहता! पर योनि ठीक ठाक से ढक जाती|
उसनें उसका चटख लाल रंग पसंद किया|

फ़िर उसनें हेन्स की स्ट्रींग बिकनी पैन्टी माँगी! तो सेल्सगर्ल नें एक 3 का सेट दिया|
अब मैनें उस चुदाईी पैन्टी के बारे मे कहा और जोर दे कर एक सफ़ेद और एक काली पैन्टी खरीद ली|
जुली नें हेन्स की एक पैन्टी पैक से निकाली और ट्रायल कमरा मे चली गई और पहन ली|

सामान पैक करते समय सेल्सगर्ल नें जुली से उसकी पुरानी पैन्टी के बारे मे पूछा तो जुली नें कहा- इट्स ओ के ! आई हैडन्ट बीन वीयरिन्ग एनी !

(सब ठीक है! मैनें नहीं पहना हुआ था)

सेल्सगर्ल नें भी चुटकी ली- आजकल के बच्चे भी ना…? इस तरह बिना चड्डी बाजार मे निकल लेते हैं|

दुकान पर मौजूद तीनों सेल्सगर्ल और मै भी हँस दिया और जुली झेंप गई|

अगले दिन सुबह चाय पीते हुए मैनें कहा- जुली! अब आज का दिन मेरा कैसे अच्छा बीतेगा! आज तो 30 ग्राम ही मुझे मिलेगा|

वो मुस्कुराई और बोली- सब ठीक हो जायेगा! फ़िक्र नॉट|

जब वो जानें लगी तो मुझे बोली- चाचू! जरा अपनें कमरे मे चलिए! एक बात है|

मुझे लगा कि वह शायद कुछ कहेगी पर वो कमरे मे मुझे लाई और मुझे बिस्तर पर बिठा दिया! फ़िर एक झटके मे अपनी जीन्स के बटन खोल कर उसे घुटनें तक नीचे कर दिया! बोली- देख कर आज का दिन ठीक कर लीजिए|

उसके बदन पर वही चुदाईी वाली सफ़ेद पैन्टी थी! उसकी त्रिभुजाकार सफ़ेद पट्टी से उसकी बुर एकदम से ढकी हुई थी! पर सिर्फ़ बुर ही! बाकी उस पैन्टी मे कुछ था ही नहीं सिवाय डोरी के ! उसकी जाँघ! चुतड़ सब बिल्कुल अनावृत थे एकदम साफ़ गोरे! दमकते हुए! झाँट की झलक तक नहीं थी|

मेरा गला सूख रहा था| वो 20-25 सेकेन्ड वैसे रही फ़िर अपना जीन्स उपर कर ली! और मुस्कुराते हुए बाय कह बाहर निकल गई|
मैनें वहीं बिस्तर पर बैठे-बैठे मुठ मारी! यह भी भूल गया कि मैरी घर मे है|

उस दिन बाथरूम मे मुझे पता चला कि आज मेरे ही रेजर से जुली झाँट साफ़ की थी! और अपनें झाँट के बालों को वाश बेसिन पर ही रख छोड़ा है| दो इन्च की उसकी झाँट के काफ़ी बाल मुझे मिल गये! जिन्हें मैनें कागज मे समेट कर रख लिया|
मैनें फ़िर मुठ मारी|

शाम की चाय पीते हुए मैनें बात शुरु किया- बेटा! आज मेरे लिए पैन्टी नहीं थी तो तुमनें मेरे लिए रेजर साफ़ करनें का काम छोड़ दिया !
मेरे चेहरे पर हल्की हँसी थी|

वो शरमा गई|

तब मैनें कहा- किस स्टाईल मे शेव की है?
उसके चेहरे के भाव बदले! बोली- मतलब?

मैनें आगे कहा- मतलब किस स्टाईल मे अपनें बाल साफ़ किए हैं?

उसे समझ नहीं आया तो बोली- अब इसमे स्टाईल की क्या बात है! बस साफ़ कर दी|

मैनें अब आँख मारी- पूरी ही साफ़ कर दी?

वो अब थोड़ा बोल्ड बन कर बोली- और नहीं तो क्या! आधा करती? कैसा गन्दा लगता|

मैनें सब समझ गया! कहा- अरे नहीं बाबा! तुम समझ नहीं रही हो! लड़कियाँ अपनें इन बालों को कई तरीके से सजा कर साफ़ करती हैं !

उसके लिए यह एक नई बात थी! पूछनें लगी- कैसे?

तब मैनें उसको बताया कि झाँटों को कैसे अलग अलग स्टाईल मे बनाया जाता है! जैसे लैंडिन्ग स्ट्रीप! ट्रायन्गल! हिटलर मुश्टैश! बाल्ड! थ्रेड! हार्ट… आदि|
उसके लिए ये सब बातें अजूबा थीं! बोली- मुझे नहीं पता ये सब ! मै तो जब भी करती हूं! हमेशा ऐसे ही पूरी ही साफ़ करती रही हूं| अभी दो महीनें बाद किए हैं आज ! इतनी बड़ी-बड़ी हो गई थी| अम्मी को पता चल जाए तो मुझे बहुत डाँटती! वो तो जबरदस्ती बचपन मे मेरा 15-18 दिन पर साफ़ कर देती थी| वो तो खुद सप्ताह मे दो दिन साफ़ करती हैं अभी भी|

मैनें भी हाँ मे हाँ मिलाई- हाँ! सच बहुत बड़ी थी! दो इन्च के तो मै अपनें नहीं होनें देता! जबकि मै मर्द हूं|

मै महीनें मे दो-एक बार काल-गर्ल घर लाता था| इसके लिए मै एक दलाल राजेन्दर रोशन की मदद लेता| उसके साथ मेरा 5-6 साल पुराना रिश्ता था| वो हमेशा मुझे मेरे पसन्द की लड़की भेज देता| अब तो वो भी मेरी पसन्द जान गया था और जब भी कोई नई लड़की मेरे मतलब की उसे मिलती! वो मुझे बता देता|

ऐसे ही उस दिन शाम को हुआ| रोशन का फ़ोन आया करीब आठ बजे! तब मै और जुली खाना खा रहे थे|

रोशन नें बताया कि एक माल आई है नई उसके पास! 18-19 साल की| ज्यादा नहीं गई है! घरेलू टाईप है| आज उसकी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट सही आनें के बाद वो सुबह मुझे बतायेगा| अगर मै कहूं तो वो कल उसकी पहली बुकिंग मेरे साथ कर देगा|

जुली को हमारी बात ठीक से समझ मे नहीं आई! और जब उसनें पूछा तो मैनें सोचा कि अब इस लौन्डिया से सब कह देनें से शायद मेरा रास्ता खुले! सो मैनें उसको सब कह दिया कि मै कभी-कभी दलाल के मार्फ़त काल-गर्ल लाता हूं घर पर ! आज उसी दलाल का फ़ोन आया था! एक नई लड़की के बारे मे|

उसका चेहरा लाल हो गया|
काल-गर्ल के बारे मे सुन कर जुली का चेहरा लाल हो गया|

वो चुप-चाप खाना खानें लगी| फ़िर हम टीवी देखनें लगे! वो एक फ़िल्म लगा कर बैठ गई| मुझे लगा कि शायद काल-गर्ल वाली बात उसे अच्छी नहीं लगी| पर मैनें उसे अब नहीं छेड़ा! सोचा देखें अब वो खुद कैसे मुझे मौका देती है|

अगली सुबह फ़िर रोशन का फ़ोन आया| मुझे लगा कि यह शायद ज्यादा हो रहा है! सो मैनें रोशन को मना कर दिया| जुली फ़ोन पर मेरी जो बात हो रही थी! वो सुन रही थी| मेरे फ़ोन काटनें पर उसनें सब कुछ ठीक से जानना चाहा|

एक बार फ़िर उसकी इच्छा देख मुझे लगा कि बात फ़िर पटरी पर आनें लगी है| मै चाहता था कि कैसे भी अब आगे का रास्ता खुले जिससे मै जुली के मक्खन से बदन का मजा लूँ| पाँच दिन बीत चुके थे और दो-तीन दिन मे उसके अम्मी-अब्बू आ जानें वाले थे|

मैनें गंभीर बननें की ऐक्टिंग करते हुए कहा- बुरा मत मानना जुली ! पर तुम्हें पता है कि मै अकेला हूं! इसलिए अपनें जिस्म की जरूरत के लिए एक दलाल सेट किया हुआ है! वो हर महीनें 5 और 25 तारीख को मुझे फ़ोन पर पूछता है| मेरा जैसा मूड हो मै उसको बता देता हूं! वो लड़की भेज देता है| अक्सर जैसी फ़र्माईश की जाती है! वो इन्तज़ाम कर देता है|

वो बोली- प्लीज चाचू! आज बुला लीजिए ना| मैनें कभी काल-गर्ल नहीं देखी|

मैनें कहा- पर मै तो तुम्हारे बारे मे सोच कर मना कर रहा था! तुम क्या समझोगी मुझे अगर मै घर पर लड़की बुला लूँ तब? ना ! यह ठीक नहीं होगा! तुम्हारे रहते !
पर अब वो जिद कर बैठी| शनिवार का दिन था! बोली- आज कॉलेज नहीं जाउंगी! अगर आपनें हाँ नहीं कहा|

करीब एक घण्टे बाद मैनें कह दिया- ठीक है! पर…”

वो तुरन्त मेरा फ़ोन लाई! काल-बैक किया और स्पीकर ऑन कर के सामनें बैठ गई|

मै कह रहा था- हाँ रोशन! भेज देना आज 8 बजे! कोई ठीक-ठाक! घरेलू भेजना! पर नई भेजना! रचना या पल्लवी नहीं|

रोशन बोला- नई वाली सही है सर! रेट थोड़ा ज्यादा लेगी! पर मस्त माल है| आप उसके पहले दस मे ही होंगे| मेरे से पहली बार बुक हो रही है| इसी साल +2 किया है और यहाँ पढ़ाई के लिए इस शहर मे आई तो हॉस्टल से उसको रोजी मेरे पास लाई| दिखनें मे टॉप क्लास चीज है सर ! एकदम मस्त सर ! मैनें कभी गलत सप्लाई आपको किया आज तक| 34-23-36 है सर! एक दम टाईट|

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मैनें रेट पूछा! तो उसनें 6000 कहा! फ़िर 5000 पर बात पक्की हुई|अचानक मुझे थोड़ा मस्ती का मूड हुआ! मैनें कहा- रोशन! कहीं वो छुई-मुई तो नहीं! जरा उससे बात करवा सकोगे पहले?

वो बोला- नहीं सर ! घरेलू है! पर मस्त है! खूब मस्ती करती है! एक बार मैनें भी चखा है उसको! तभी तो आपको कह रहा हूं| उसको मै आपका नम्बर दे देता हूं|

करीब दस मिनट बाद मेरा फ़ोन बजा! तो मैनें स्पीकर ऑन कर के हैलो किया|

उधर से वही लड़की बोली- जी! मेरा नाम अंशु है! रोशन साहब नें मुझे आपसे बात करनें को कहा है|

मैनें गंभीर आवाज मे कहा- हाँ अंशु! आज रात तुम्हारी मेरे साथ ही बुकिंग है| असल मे मै तुमसे एक बात जानना चाहता हूं! तुम तो नई हो| रोशन जो पैसे देगा तुमको वो तो ठीक है! पर क्या तुम्हें ऐतराज होगा! अगर मेरे साथ कोई और भी हो तो| मै और पैसे दूंगा|

थोड़ी चुप्पी के बाद बोली- दो के साथ कभी किया नहीं सर|

मेरे मन मे शैतान घुसा था कि आज जब जुली साली खुद मुझे रन्डी बुलानें को कह रही है! तब आज उसको दिखाया जाए कि रन्डी चोदी कैसे जाती है|

मै योजना बना रहा था! कहा- अरे नहीं! वैसा नहीं है! करना तुम्हें मेरे साथ हीं होगा| असल मे एक लड़की मेरे साथ होगी! वो देखेगी सब जो तुम करोगी|

मै यह सब बोलते हुए जुली की तरफ़ देख रहा था| उसके चेहरे पे सुकून था! जैसे मैनें उसके मन की बात की हो|

अंशु नें अब थोड़ा सहज होकर पूछा- कोई फ़ोटो-वोटो नहीं होगा ना?

मैनें कहा- बिल्कुल नहीं”
वो राजी हो गई! फ़िर पूछनें लगी- सर! आपको कोई खास ड्रेस पसंद हो तो?

मैनें कहा-“नहीं! जो तुम्हें सही लगे| और कुछ याद करके पूछा- अंशु! बुरा मत मानना! पर तुम्हारी योनि साफ़ है या बाल हैं?

वो बोली- जी बाल हैं! करीब महीनें भर पहले साफ़ किया था! फ़िर अभी तक काम चल रहा है| रोशन सर नें भी कहा कि जब तक कोई आपत्ति ना करे मै ऐसे ही रहनें दूँ| आप बोलेंगे तो साफ़ करके आऊँगी|

मैनें खुश होकर कहा- नहीं-नहीं! तुम जैसी हो! वैसी आना| जरुरत हुई तो यहाँ कर लेंगे|

और फ़ोन बंद कर दिया|

इसके तुरंत बाद जमील का फ़ोन आया कि उन्हें अभी वहाँ दस दिन और रुकना होगा! जब तक ऑपरेशन नहीं हो जाता! जुली के नाना का|

मेरे लिए यह अच्छा शगुन था| मेरे लिए अंशु भाग्यदायिनी साबित हुई थी|

मै देख रहा था कि जुली भी यह सब सुन खुश हो रही है| जुली सब चुप-चाप सुन रही थी|

मैनें उसकी जाँघ पर हाथ फ़ेरा और कहा- अब तो खुश हो जुली ! तुम्हारे मन की ही हो गई|

वो बिना बोले बस मुस्कुरा रही थी|

मैनें कहा- आनें दो अंशु को! आज उसकी लैंडिंग स्ट्रीप स्टाईल मे बना कर बताउँगा| वो भी नई है! थोड़ा सीखेगी मेरे एक्स्पीरियेंस से|

जुली कॉलेज़ चली गई| मैरी आकर घर का सारा काम कर गई| जाते समय मैनें मैरी को शाम को आनें को मना कर दिया|

जब जुली कॉलेज़ से आई तो बहुत खुश दिख रही थी| मैनें जुली को बता दिया कि मैनें मैरी को शाम को आनें के लिए मना कर दिया था|

फ़िर शाम को वो बोली- अब खाना बना लेते हैं! दो घण्टे मे तो वो आ जायेगी|

जुली किचन मे गई! मै टीवी मे व्यस्त हो गया| साढ़े सात तक हमनें डिनर कर लिया और बैठ कर अंशु का इंतजार करनें लगे|

8:10 पर काल-बेल बजी! तो जुली तुरंत कूद कर दरवाजे तक पहुँची और उसे खोला|

मैनें देखा कि एक छरहरे बदन की थोड़ी सांवली लगभग जुली की लम्बाई की ही लड़की सामनें थी|

जुली नें उसका नाम पूछा और भीतर ले आई|

मैनें अंशु को बैठनें को कहा तो वो सामनें सोफ़े पर बैठ गई| जुली अभी भी खड़े होकर उसको घूर ही रही थी|

अंशु नें चटख पीले रंग का सूती सलवार-सूट पहना हुआ था! जो उसके बदन पर सही फ़िट था| लौन्डिया 18 की ही लग रही थी! 34-26-36 ! मेरी अनुभवी नजरों नें उसका माप ले लिया|

मै अपनी किस्मत पर खुद हैरान था| मेरे पास दो-दो जवान लौन्डियाँ थी और दोनो बीस बरस से भी कम| अंशु तो जुली से भी उमर मे छोटी थी! जुली नें दो साल पहले इंटर किया था जबकि अंशु नें इसी साल किया| हाँ! उसका बदन थोड़ा जुली से ज्यादा भरा था| पर फ़र्क सिर्फ़ उन्नीस-बीस का ही था|

मैनें अंशु से कहा- यह जुली है! यही हमारे साथ मे रहेगी कमरे मे और सब देखेगी|

अंशु नें अब भरपूर नजर से जुली को घूरा ऊपर से नीचे तक|

मैनें पूछा- डिनर करके आई हो या करोगी?

उसनें कहा- नहीं! जिस दिन बुकिंग होती है! रात मे नहीं खाती|

अंशु नें बताया कि वो सिर्फ़ शनिवार को ही रोशन से बुकिंग कराती है! और यह सब थोड़े मजे और थोड़े पैसे के लिए करती है|

बोली- इजी मनी! यू नो|

मैनें उसको 5000 दे दिये और कहा कि ये जो रोशन से बात थी! और फ़िर 2000 उसको देकर कहा- कि ये उसका अलग से हैं मेरी बात माननें के लिए|

वो संतुष्ट थी! बोली- एक बारऽऽ सर ! मै बाथरूम जाना चाहूंगी|

मैनें कहा- ठीक है ! थोड़ा साफ़ कर लेना साबुन से! आगे-पीछे सब !

और मैनें उसको आँख मारी ताकि पहली बार की झिझक कम हो| मुझे उसके चेहरे से लग रहा था कि वो सही मे नई थी| मैनें जुली को उसे पानी पिलानें को कहा और वो पानी लेनें चली गई| पानी पीकर अंशु नें अपना दुपट्टा सोफ़े पर डाला और जुली से पूछा- बाथरूम…?

करीब दस मिनट बाद वो आई और कहा- मै तैयार हूं! किस कमरे मे ऽऽ ?

हम सब मेरे बेडरूम मे आ गए! तब अंशु नें पूछा- मै खुद कपड़े उतारूँ या आप दोनों मे से कोई?

मै जुली की तरफ़ देख रहा था कि उसका क्या मिजाज है| उसे लगा कि मै शायद उसको कह रहा हूं कि वो कपड़े उतारे! इसलिए वो अंशु की तरफ़ बढ़ गई|

अंशु नें उसकी तरफ़ अपनी पीठ कर दी| जब जुली उसके कुर्ते की जीप नीचे कर रही थी! अंशु नें जुली से हल्के से पूछा- ये आपके पापा है?

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