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"माँ और भाभी की चुदाई2"

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अब तक आपनें पढ़ा…
मेरा गाँव का देशी लण्ड भाभी के मुँह में पूरा जा ही नहीं रहा था… काफी मोटा था! भाभी सिर्फ मेरे लण्ड का टोपा ही चूस पा रही थीं!

मैं मादक आवाज में बोला- भाभी वाह्ह… क्या मस्त लौड़ा चूसती हो आप… अआहहह… उम्मम… ओहोहोहो… हईईईई…

भाभी मेरे लण्ड को 10 मिनट तक चूसती रहीं!
‘भाभी बस करो… नहीं तो मुँह में ही झड़ जाऊँगा!’

उन्होंनें मेरी बात को अनसुना कर दिया और लण्ड चूसती रहीं!

मैं समझ गया कि भाभी को मेरा वीर्य पीना है!

कुछ ही देर में मैंनें मेरे लंड का पानी भाभी के मुँह में छोड़ दिया!

अब आगे…
भाभी भी मस्त चटकारे लेते हुए पूरा पानी पी गईं… एक बून्द भी नहीं बाकी रखी!

माल निकल जानें के बाद भी भाभी मेरा लौड़ा चूसती रही थीं… जिस कारण मेरा लण्ड खड़ा ही था!
भाभी नें तुरंत बिस्तर पर अपनी टाँगें चौड़ी कर दीं… मैंनें भी समय ना गंवाते अपना लण्ड उनकी चूत में रख कर धीरे-धीरे घुसानें लगा! मेरा लण्ड काफी मोटा था तो चूत में घुसनें में दिक्कत आ रही थी!
मैं सम्भलते हुए धीरे से डालनें लगा, अब तक लण्ड 2 इंच तक जा चुका था!

मैंनें धीरे से झटका मारा… तो भाभी जोर से चिल्ला पड़ीं- भीष्म आराम से… बहुत समय से इस प्यासी चूत में लण्ड अन्दर नहीं गया…
मैंनें उनकी इस बात पर ध्यान नहीं दिया और एक जोर का झटका मार दिया! अब मेरा पूरा लण्ड चूत में घुस गया था!

भाभी दर्द से छटपटानें लगीं और उनकी आँखों से आंसू आनें लगे!
कुछ देर ठहरनें के बाद मैं चूत को पेलनें लगा, भाभी को मजा मिलना आरम्भ हो गया- फाड़ दे भीष्म… अपनी भाभी की चूत को आह… आह… उफ़…

भाभी को मैंनें लगातार काफी देर तक चोदा… इस चुदाई में भाभी एक दो झड़ चुकी थीं!
मैंनें अपना सारा पानी चूत में नहीं डाला… लण्ड निकाल कर भाभी के मुँह में डाल दिया!

भाभी के मुँह में 7-8 झटके मारते ही मेरा पानी उनके मुँह में चला गया!

भाभी पूरा पानी पी गईं!

रात भर भाभी की चूत मैंनें 4 बार मारी, हम दोनों सुबह 4 बजे सोए…

पर रोज की तरह सुबह जल्दी उठ भी गए!
सुबह माँ भी जल्दी उठीं!

अब माँ की तबियत कुछ ठीक लग रही थी, मैं सुबह फिर हगनें गया… पर आज मैं अकेला गया था!
खेत में अन्दर जाते ही मैं हगनें बैठ गया! उसी समय गाँव की एक लड़की… जिसकी कुछ दिन पहले शादी हुई थी और आज ही अपनें मायके वापस आई थी! मैं इसकी चूत पहले भी मार चुका था… वो आकर मेरे बाजू में हगनें बैठ गई!
मैं- अरे अनिता… कैसी हो… कब आई ससुराल से?

अनिता भी हगते हुए बोली- मजे में हूँ… तुम बताओ कैसे चल रहा है… चुदाई का मजा…
मैंनें हगते हुए उसकी चूत देखी और कहा- हाँ… अब तो गाँव की बहुत चूतों को चोद चुका हूँ और ये क्या… अनिता शादी के बाद भी तुम्हारी चूत तो पहले जैसे ही है!

अनिता- क्या करूँ… मेरे ‘वो’ कुछ खास चुदाई नहीं कर पाते हैं! जब से तुमसे चुदी हूँ… पति के लण्ड में मजा ही नहीं आता… अब यहाँ आई हूँ… तो तुमसे चुदवा लेती हूँ!
मैं- हाँ ठीक है… पर अभी नहीं… कभी और अभी थोड़ा बिजी हूँ!

अनिता नें हँसते हुए कहा- हाँ… अब तो घर की चूतों को फाड़नें में लगे होगे!

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मैंनें चौंकते हुए पूछा- तुम्हें कैसे पता?
अनिता- कल रात तुम्हें डिब्बा लेकर हगनें जाते देख कर मैं भी तुम्हारे पीछे आई थी! मैंनें सोचा था कि चलो आज फिर हगते हुए भीष्म के बड़े लण्ड से चुदा लेती हूँ… पर साथ में तुम्हारी भाभी थीं… इसी लिए कल छुप कर हगनें बैठी और तुम दोनों की सारी बातें सुन ली थीं!
मैं- क्या करूँ अनिता… भाभी ठीक ही तो कह रही थीं… भैया की और पिताजी की मौत के बाद से उन्हें कोई लण्ड ही नहीं मिला… कैसे रहती होगीं बिना लण्ड के… आखिर में उन्हें खुश रखना भी तो मेरी जिम्मेदारी ही है!

अनिता- हाँ तुम सही कह रहे हो… तुम जरूर खुश रखना उन्हें… और खूब चोद-चोद कर खुश रखना! अभी के लिए मैं बिना तुम्हारा लण्ड लिए चली जाती हूँ… पर अगली बार 2-3 बार जरूर चोद देना!
मैं- बस इतना ही… तू कहे तो तुझे मेरे बच्चे की माँ बना दूँ?

अनिता- सच?

मैं- हाँ… बोल लेगी मेरा बच्चा अपनी कोख में?

अनिता- नेंकी और पूछ-पूछ?
हम दोनों हँसनें लगे!

अब हमनें अपनें चूतड़ धोए और घर निकल पड़े!
घर आते ही मैं नहानें घुस गया… आज भाभी की जगह माँ नें लण्ड की मालिश के लिए तेल दिया!

माँ हँसते हुए बोलीं- ले बेटा… तेल… मालिश के लिए… ठीक से लगाना… पहले तो तू हमारे हाथों से लगवाता था… पर अब खुद ही लगाता है… माँ और भाभी से कैसी शर्म…
माँ के ऐसा कहनें पर मैं थोड़ा हड़बड़ा गया… पर मन में आया कि ऐसे भी कल भाभी को चोदा है और आगे माँ को भी तो चोदना ही है… क्यों न आज लण्ड पर तेल लगवाते हुए कुछ प्रयास किया जाए!
‘नहीं माँ… शर्म कैसी… तेल से मालिश की वजह से शायद तुम्हारे हाथों में दर्द होता होगा… इसी लिए मैं खुद ही लगा लेता हूँ!’
माँ की आँखों में चमक थी और मादक मुस्कान के साथ वे बोलीं- भला मेरे बेटे के लण्ड की मालिश से मेरा हाथ क्यों दुखेगा… लण्ड की मालिश से आगे मेरे बेटे की पत्नी काफी खुश रहेगी… इसी लिए मैं पहले से मालिश करते आ रही हूँ!

मैंनें उनके मुँह से लण्ड शब्द सुना तो मैं उनकी चुदास को समझ गया और मैंनें कहा- हाँ ठीक है न माँ… आज तुम्हीं मेरे लण्ड की मालिश कर दो!
हम दोनों घर के बाथरूम में आ गए, माँ नें गर्म पानी की बाल्टी भरी और मुझे मेरे कपड़े निकालनें के लिए कहा!

मैं कपड़े निकाल ही रहा था कि माँ नें मुझसे पहले अपनें कपड़े निकाल दिए, अब माँ सिर्फ सफेद रंग की चड्डी में थीं!
माँ के बड़े तरबूज के जैसे बड़े-बड़े बोबे मेरे सामनें खुले थे! माँ की लंबी-लंबी खुली नंगी टाँगें मेरे सामनें थीं! सफेद पैन्टी में माँ किसी हूर जैसी लग रही थीं!

मेरा लण्ड तुरंत खड़ा हो गया!
माँ मेरे लण्ड को देखते ही बोलीं- बाप रे, बेटा भीष्म इतना बड़ा लण्ड हो गया तेरा… मेरी मेहनत काफी रंग लाई है!

मैं- हाँ माँ… ये तुम्हारी और भाभी की मेहनत का नतीजा है!
अब माँ नें मेरे लण्ड पर तेल लगाया और मालिश करनें लगीं! माँ मालिश करते करते समय अपनें बड़े बोबे मेरी टाँगों को लगा रही थीं… आज काफी समय बाद माँ नें मेरे लण्ड को हाथ में लिया था!
अब मैं माँ की मालिश से मदहोश हो रहा था! मैंनें अपनी आँखें बंद कर लीं! मेरे मुँह से ‘अअहह…आह… आह्ह… अ…अहहा… हा…’ की आवाजें आ रही थीं!
अचानक माँ नें मेरा लण्ड मुँह में ले लिया… मैंनें झट से आँखें खोलीं!

मैं- आह्ह… ये क्या कर रही हो!
माँ हँसते हुए बोलीं- नई तरह की मालिश… क्योंकि बेटा अब तू बड़ा हो गया है न… और वैसे भी कल रात में तेरी भाभी नें काफी जोरों से मालिश की थी! तेरी और तेरी भाभी की आवाजें कल रात को जब में पानी पीनें उठी थी… तब सुनी थी!
मैं- क्या सच में माँ… अच्छा हुआ तुमनें कल हमारी चुदाई की आवाज सुन ली… तो फिर अब तुम भी भाभी के जैसी मालिश के लिए तैयार हो या नहीं?

माँ- मैं तो सालों से इसी दिन का इन्तजार कर रही हूँ बेटा!
माँ के ऐसे कहते ही मैंनें माँ को खड़ा किया और चूमनें लगा!

माँ के होंठ क्या मस्त नरम और मादक थे… हर चुम्बन पर माँ के होंठों से रस टपक रहा था! मैं अब चूमते हुए माँ के बोबे दबानें लगा… माँ के बड़े बोबे मेरे हाथों में समा नहीं रहे थे! बोबे मस्त मुलायम और नरम थे… दबानें में बहुत मजा आ रहा था!
कुछ ही देर बाद मैं नीचे बैठ कर माँ की कच्छी हटा कर मां की चूत चाटनें लगा था! उनकी मस्त बिना बालों की चिकनी बुर… जो पानी छोड़ रही थी… मस्त मादक गंध के साथ बहुत पानी छोड़ रही थी!

माँ अब मादक सीत्कार निकाल रही थीं ‘म्मम्म… ऊऊऊ ऊऊह उम्म म्म… आआअ… ह्ह्ह्ह्ह… ईईई ईईई… चाट बेटा… चाट… बहुत सताया है इस बुर नें… आज पूरी चूत का पानी खाली कर दे… चाट जोर से चाट… आआअ… उम्म्म्म… ईई…’


अब मैंनें चाटना बंद किया और वहीं खड़े होकर माँ की एक टांग ऊपर करके अपना लण्ड माँ की चूत पर सैट किया और धीरे से लण्ड डालनें लगा!
माँ की बुर अब भी काफी टाइट थी… क्योंकि माँ नें पिताजी के मरनें के बाद लोकलाज के चलते किसी से चुदाई नहीं करवाई थी!
मैंनें एक झटका तेज मारा और लण्ड आधा अन्दर डाल दिया! माँ दर्द से कराहते हुए बोलीं- ओह्ह भीष्म मार डालेगा क्या… आराम से चोद न…

मैंनें सुनी अनसुनी कर दी और एक और झटका मार दिया! अब मेरा पूरा लण्ड माँ की चूत में था!
माँ और जोर से चिल्लाईं! अब मैं माँ के होंठ चूमनें लगा और जब तक माँ का दर्द कम नहीं हुआ… तब तक चूमता रहा और बोबे दबाते रहा!
अब माँ नें खुद एक झटका नीचे से मारा… और मैं समझ गया कि अब माँ झटके लेनें को तैयार हैं!

मैंनें झटके लगाना चालू किया… अब माँ मेरे झटकों का मजा ले रही थीं!

माँ बोलीं- फाड़ दे भीष्म… आज मेरी बुर को… फाड़ दे… चोद दे अपनी माँ को… और जोर से चोद…
हमारी चुदाई लम्बी चली… मैंनें मेरा सारा पानी माँ की प्यासी चूत में डाल दिया!

मैं हाँफते हुए माँ से अलग हुआ… तो देखा कि भाभी बाथरूम के दरवाजे पर खड़ी होकर अपनी चूत साड़ी के ऊपर से मसल रही थीं और हमारी चुदाई देख रही थीं!
माँ… मैं और भाभी एक-दूसरे को देख कर हँसनें लगे!

अब मैं रोज मेरी माँ और भाभी को पेलता हूँ और कभी-कभी हगनें जानें पर गाँव की बुरें भी चोद लेता हूँ!

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