loading...

महिला अधिकारी और उसकी शादीशुदा सहेली-1

loading...

Antervasna sex stories, desi kahani, hindi sex stories, chudai ki kahani
कहानी शुरू करनें से पहले मैं आपको अपना परिचय दे दूँ। मैं एक 28 साल का कुवांरा बंदा हूँ, नाम लव है। पेशे से मैं सरकारी नौकरी में मैनेंजर के पद पर कार्य कर रहा हूँ। दिखनें में, ऐसा कहते हैं कि, मैं आज भी 20 साल के कॉलेज गोइंग स्टुडेंट की तरह नजर आता हूँ।मेरी हाईट 6 फ़ुट है, एक दिन जिज्ञासावश मैंनें अपना लंड नापा तो वो 18 सेमी का था।
मुझे निरीक्षण के सिलसिले में एक तालुका में जाना पड़ा। वहाँ उस अवसर पर बहुत से बड़े अधिकारियों का आगमन हुआ।
जब हमें समझानें के लिए वहाँ की अधीक्षक आई तो मैं देख कर दंग रह गया, उसकी उम्र करीब 40 साल की रही होगी, उसनें मस्त सा टॉप तथा स्किन टच सलेक्स पहनें हुए थे। मैं उसके सलेक्स को देखते ही उसकी जांघों में खो गया।
भाई एक बात तो है, अगर जांघें मस्त हों तो आप उसमें छुपी हुई चूत का अंदाज़ लगा सकते हैं कि वो कितनी जबरदस्त होगी।
बात करनें पर पता चला कि वो शादीशुदा नहीं थी। हम मीटिंग्स ख़त्म करनें के बाद लंच के लिए साथ बैठे तो वो बोली कि वो मेरे विचारो से बहुत प्रभावित हुई है और मुझसे कभी अकेले में समय लेकर तालुका स्तर पर सुविधाएँ बढ़ानें के लिए विस्तृत चर्चा करना चाहेगी।
थोड़े समय बाद ही वो मेरे कमरे में दो और महिलाओं के साथ आई और मेरा परिचय करवाया। वो दोनों महिलायें भी उस तालुका में ही अधिकारी थी। उनमें से एक को देखते ही लंड महाराज नें अपनी निद्रा तोड़ ली। उसकी जांघें पहली वाली से भी क़यामत थी, उम्र भी करीब 35-40 के बीच होगी।
मेरा मानना है कि सेक्स का असली मजा इन उम्र वाली महिलाओं के साथ ही आता है क्योंकि इनका अनुभव और मांसल बदन सेक्स का मजा दोगुना कर देता है या यूँ कहें कि आग में पेट्रोल का काम करता है। इन मैडम की एक ख़ास बात और थी वो यह कि यह करीब 5 फ़ुट की हाईट की थी, वहीं पहले वाली मैडम की हाईट लगभग साढ़े पाँच फ़ुट के करीब होगी। छोटी हाईट की महिलाओं के साथ जब आप सेक्स करते हैं तो जो उनके दोनों पैर आपके कमर पर लिपटनें के बाद जो उनके पैरों से धक्के लगते हैं उसका मजा इतना होता है कि आप सोचेंगे की उम्र बस इस चूत में ही गुजर जाये।
खैर मैंनें उन्हें अपना फ़ोन नंबर दिया और वापस आ गया।
दो दिन बाद ही अधीक्षक मैडम का फ़ोन आया, बोली कि उन्हें कुछ तकनीकी मुद्दों पर चर्चा करनी है और पार्टी भी देनी है तो मुझे रविवार को बुला लिया।
मैं वहाँ पहुँचा तो देखा ऑफिस तो बंद है और मोबाइल भी बंद है। थोड़ी देर इंतज़ार करनें के बाद मुझे मैडम की वही मस्त वाली दोस्त नजर आई। मैं सोच में पड़ गया और सच बोलूँ तो मुझे अंदाज़ा भी नहीं था कि जिसके साथ सेक्स करनें को सोच कर मैं कितनी बार हस्त मैथुन कर चुका हूँ वो खुद इस मंसूबे से ही मेरे पास होगी।
मैंनें उन्हें नमस्ते की और बोला- मैडम, आपकी सखी नें मुझे मार्गदर्शन के लिए बुलाया है।
तो वो बोली- आज सन्डे है और मैडम आज अपनें फ्लैट पर ही हैं और तुम्हें लेनें मुझे भेजा है।
मैंनें उनका नाम पूछा तो उन्होंनें हेतल बताया (काल्पनिक नाम)। रास्ते में वो मुझे अपनें बारे में बताती रही और मैं अपनें बारे में उन्हें बताता रहा।
बातों ही बातों में पता चला कि उनके पति को इरेक्टाइल डिसफंक्शन नामक बीमारी है। मैं इस बीमारी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जनता था मगर यह जानता था कि यह मर्दों की बीमारी है। फिर मैंनें मैडम के बारे में पूछा तो हेतल नें बताया कि मैडम का नाम अनुभूति देसाई है।
मैंनें पूछा- अनुभूति जी के पति क्या करते हैं?तो वो बोली- उनकी शादी नहीं हुई।
कारण पूछनें पर पता चला कि उनके कुंडली में दोष होनें के कारण उन्हें शुरुआत मैं कोई लड़का नहीं मिला फिर 35 साल निकल जानें के बाद उन्होंनें शादी नहीं करनें का फैसला किया। मैं सोच में पड़ गया तो मेरा ध्यान तोड़ते हुई हेतल बोली- तुम्हारी शादी नहीं हुई क्या?
मैंनें कहा- मुझे अब तक कोई मिली नहीं और मैं जीवन को अपनें तरीके से जीना चाहता हूँ।वो बोली- मतलब?
मैंनें खुले विचारों को दर्शाते हुए कहा- मैं जिन्दगी को एक यात्रा समझता हूँ और यात्रा का मतलब है चलते जाना न कि किसी को साथ में रख लेना। इसलिए मैं हर जगह को एन्जॉय करना चाहता हूँ और हर किसी से वही रिलेशन बनाना चाहता हूँ जो वो मुझसे बनाना चाहती हो।हेतल अचानक बोली- तो तुम मेरी हेल्प करोगे?मैंनें कहा- जी जरूर! इतनी दूर तुम्हारी हेल्प करनें ही तो आया हूँ!वो बोली- ऐसा नहीं है, मैंनें तुम्हें अपनें पति की बीमारी के बारे में बताया, तुम मेरी मदद करोगे या नहीं?
मैं तब तक कुछ नहीं समझा था और बोल दिया- मैं आपसे वादा करता हूँ कि जो कुछ मैं कर सकता हूँ आपके लिए जरूर करूँगा।
वो बोली- तो ठीक है, अनुभूति से बाद में मिल लेंगे, अभी मेरे फ्लैट पर चलते हैं, आप फ्रेश हो जाना, फिर अगर चाहेंगे तो अनु को यहीं मेरे फ्लैट पर बुला लेंगे, सन्डे को मेरे पति एक आश्रम में जाते हैं और वहाँ से देर रात तक आते हैं तो डिस्कशन भी हो जायेगा, अनुभूति को मैं कॉल भी कर दूँगी।मैंनें कहा- ठीक है।
उनके फ्लैट पर पहुँचनें के बाद वो मुझे कमरे में छोड़ कर दूसरे कमरे में चली गई। मैं समझ नहीं पा रहा था, फिर बाथरूम जाकर फ्रेश होकर बेडरूम में टीवी देखनें लग गया। तभी मुझे दूसरे कमरे से आवाज आई- आप यहीं आ जाइए, उस कमरे में एयर कंडिशनर नहीं है।
मैं दूसरे कमरे में गया तो वो गुलाबी साड़ी में बैठी थी, मैंनें कहा- आपनें कपड़े चेंज कर लिए?तो बोली- हाँ!और जाकर कमरे का दरवाज़ा लोक कर दिया।
मैंनें कहा- क्या हुआ?तो बोली- एयर कंडिशनर चालू है ना, इसलिए।मैंनें पूछा- अनुभूति को कॉल किया?
तो वो बोली- अनुभूति के पापा बाहर जा रहे हैं, वो उन्हें सी ऑफ करनें गई है, इसलिए मैं आपको लेनें आई थी और वो 3-4 घंटे बाद ही आ पाएंगी। आपको बुरा न लगे इसलिए मैं आपको यहाँ ले आई, आप यहाँ आराम कर लीजिये।
ऐसा बोल कर वो सोफे पर लेट गई और मैं बेड पर।
हम बातें करनें लगे तो बातों ही बातों में हेतल नें कहा- इरेक्टाइल डिसफंक्शन का मतलब होता है कि उनका प्राइवेट अंग उत्तेजना के समय खड़ा नहीं हो पाता है।
मैं बोला- इसमें मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?तो वो बोली- आपको क्या लगता है? मैं कितनें दिनों से परेशान हूँ।मैं बोला- बताओ कब से?वो बोली- पिछले दो सालो से मैंनें उनके साथ कुछ नहीं किया है।
ऐसा बोल कर वो रुआंसी सी होकर जानें लगी तो मैं बोला- हेतल, मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं तुम्हारी मदद कैसे करूँ?इतनें में वो मेरे बेड के पास आकर बोली- क्या आप मेरे साथ…?मैं अधूरे में ही समझ गया और बोला- मुझे कोई दिक्कत नहीं है, मगर क्या यह सच में मदद है?तो वो मेरे सीनें पर अपना सर रख कर बोली- चुप हो जाओ, बस मुझे संतुष्ट कर दो।
मैं आगे बढ़ता, इससे पहले उसनें मेरी पेंट की जिप खोल कर मेरा लंड निकाल लिया।मैं अपना आपा खो चुका था और तुरंत ही उसका ब्लाऊज खोल दिया, उसनें ब्रा नहीं पहनी थी।वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसती गई और मुझे लगनें लगा कि मैं वाकई जन्नत में हूँ।
मैं आपको बता दूँ कि जब मैंनें पहले बार उसको मीटिंग में देखा था तब हेतल की जांघें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था और अब वो मेरा लण्ड चूस रही थी।मैंनें तुरंत उससे कहा- साड़ी उतारो!तो उसनें साड़ी अलग कर दी, फिर मैंनें उसका पेटेकोट का नाड़ा भी खोल दिया और अपना एक हाथ धीरे-धीरे उसके पेट से फिराते हुए उसके पेटीकोट के अंदर डाल दिया और उसकी जांघों को सहलानें लगा, फिर उसका पेटीकोट उतार दिया, पेंटी भी उसनें नहीं पहनी थी।
उसका पेटीकोट खोलते ही मुझे जन्नत के दर्शन हो गए, उसकी चूत पर कोई बाल नहीं था, गोरी गोरी जांघों के बीच कॉफ़ी कलर की चूत देखते ही लगा मानो सारी तमन्नाएँ पूरी हो गई हों और मन ही मन मैं लंड से बोला- बेटा आज तो तू गया।
मैंनें हेतल से कहा- एक मिनट रुको।और अपनें आपको पूरा नंगा करके उसे पलंग पर लिटा दिया और सीधा अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया। जैसे जैसे मेरी जीभ उसकी चूत के छल्लों को चाटते हुए चूत के अन्दर गुलाबी वाले हिस्से में गई, हेतल के मुँह से सिसकारियों का सैलाब आ गया- उह्ह आह आःह्ह ऊई उई ईई हुम्म्म अह्ह्ह्ह बस बस प्लीज़ ओह ह ह्ह्ह्हह! डाल दो न प्लीज़ लव! मर जाऊँगी ईई ईई म्म्म्मआःह्ह्ह ह्हआः ह्हआःह्ह जल्दी करो।
मगर मैं तो उसकी चूत से निकलनें वाले रस को पीनें में मस्त था, उसकी चूत से इतना रस निकला कि पूरा गद्दा चूत के नीचे से भीग गया था।
यह आलम तो तब था जब मैं उसका पानी चाट चाट के पी रहा था।
फ़िर मैंनें अपना लंड जो उसकी लार से गीला था, उसकी चूत पर रगड़ा और हल्का सा सेट सा किया कि गपप्पप की आवाज़ के साथ पूरा अन्दर घुस गया।
कमाल की बात यह है कि अब तक मैंनें उसके होठों को छुआ भी नहीं था और अब होंठों को चूसनें का काम शुरू हुआ भी तो लंड के चूत-ए-जन्नत में जानें के बाद!
थोड़ी देर तक मैं लंड अन्दर डाल कर उसकी चूत की गर्मी का एहसास करता रहा और उसे मेरे लंड का एहसास करवाता रहा। लंड को अन्दर रखते हुए मैं उसके चुचूकों के चारों तरफ ऊँगलियाँ गोल गोल घुमाता रहा और वो पागलों की तरह मस्त होकर बोलनें लगी- अब और मत तड़पाओ, फाड़ दो इसे! इस लायक भी मत छोड़ो कि तुम्हारे सिवा किसी का लंड ले पाए! चोद चोद के सूजा दो इसे।
दोस्तो, सच कह रहा हूँ कि चुदाई का मजा जो सूकून से करनें में है वो दुनिया की कोई चीज़ में नहीं।मैं धीरे धीरे लंड बाहर निकलता फिर चूत पर रगड़ता हुआ अन्दर तक पेल देता।
कोई कहता है कि बड़े लंड से औरत की फट जाती है! यारों जब मजे का दर्द हो तो मजा और ही होता है यहाँ तो मेरा मजा दोगुना हो गया जब वो बोलनें लगी कि तुम्हारा वाकई बहुत बड़ा है और उस वक़्त लगता है कि लंड कितना ही बड़ा क्यों न हो मजा सिर्फ सुकून से चुदाई में है।
फिर जब मुझे लगा कि मेरा निकलनें वाला है तो मैंनें लंड बाहर निकाल लिया और धीरे से चूत पर लंड टिकाते हुए बोला- अन्दर निकालूँ या बाहर?
वो बोली- आज तो इस पानी का मजा चूत को भी जी भर के लेनें दो, मैं पिल खा लूँगी।
सुनते ही मैंनें उसकी कमर के नीचे दो तकिये लगाये और झटके से लंड चूत में पेल कर धक्के लगानें लगा। उसकी नाभि के पास बार बार बल पड़ रहे थे और साथ ही वो आगे की तरफ धक्के मार कर यह बताना चाह रही थी कि बस एक इंच भी बाहर मत रखो, पूरा अन्दर डाल दो।
खैर तेज़ झटकों के साथ मैंनें पूरे का पूरा पानी उसकी चूत में डाल दिया, फिर उसके ऊपर यूँ ही पसर गया।
मैंनें पूछा- तुम संतुष्ट हो ना?तो वो बोली- मैं दो बार फ्री हुई हूँ।
मैंनें उसे बोला- तुम बाथरूम जाकर साफ कर आओ, फिर से एक राऊँड लगायेंगे।
सच बोलूँ तो सबसे लम्बा राऊँड दूसरा राऊँड ही होता है लेकिन अगर सुकून से करो तो पहला राऊँड भी काफी लम्बा हो जाता है, हम अक्सर जल्दबाज़ी के चक्कर में मजा खो देते हैं और अगर सुकून से करो तो फटी हुई चूत भी आपको जन्नत का मजा दे सकती है।फिर वो बाथरूम जाकर वापस आई तो बोली- थोड़ी देर आराम करते हैं, फिर अनुभूति के आनें से पहले एक राऊँड और लगा देना प्लीज़। कहानी जारी रहेगी।

Antarvasna

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...