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“भाभी ने चुत चुदवा कर कहा गुरु दक्षिणा पूरा हुआ”

आज एक पुरानी भाभी की बात याद आ गई| तब मैं करीब 25 साल का था! और अविवाहित था! अपनें पैतृक निवास से दूर एक छोटा सा घर किराये पर लेकर नौकरी कर रहा था|
स्कूल के जमानें से मैं हारमोनियम बज़ाया करता था| शहर में होनें वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुझे सादर निमन्त्रण मिलता था|

गरमी के दिन थे! मैं ऑफिस से घर में आकर अपनें कपड़े निकाल कर सिर्फ अंडरवियर और बनियान में ही बिस्तर पर पड़ा आराम कर रहा था| खुला हुआ था इसलिए मेरे लंड में कुछ-कुछ सेक्स की उत्तेजना महसूस हो रही थी| मुझे बिस्तर पर आराम करते हुए लगभग दस मिनट हो गए होंगे इतनें में किसी नें दरवाजे पर खटखटाया|

इस वक्त कौन आया होगा?’ सोचते हुए मैंनें दरवाजा खोला और शर्म के मारे लज्जित सा गया|

सामनें मिना भाभी खड़ी थीं! मिना भाभी हमारी ही कालोनी में से मेरे अच्छे दोस्त की बीवी थी! उनकी उम्र लगभग 35 होगी वो शरीर से बड़ी ही मस्त और आकर्षक थी|

आईए ना अन्दरदरवाजे से हटते हुए मैंनें बोला|
वो कमर लचकाती हुई अन्दर आकर बिस्तर पर बैठ गई|
मैंनें झट से लुंगी पहन ली और कहा- कैसे आना हुआ?

वैसे तो मैं आपको बधाई देनें आई हूँ’
मैंनें थोड़ा आश्चर्य से पूछा- बधाई? वो किस बात की?
कल आपनें हारमोनियम बहुत अच्छी बजाई अभी भी वो स्वर मेरे कान में गूँज रहे हैं|’

उसकी बात सही थी क्योंकि मैं एक कार्यक्रम में हारमोनियम बजा रहा था|
मैंनें कहा- मैं ऐसे ही बजा रहा था पहले से ही मुझे संगीत का शौक है|
इसीलिए मैं आपसे मिलनें के लिए आई हूँ|’

मुझे उसकी यह बात कुछ समझ में नहीं आई मैं शांत ही रह गया|
वो फिर से बोली- एक विनती है आपसे सुनेंंगे क्या?
आप जो कहेंगी वो करूँगा इसमें विनती कैसीमैंनें सहजता से कहा|
मुझे भी संगीत का शौक है पहले से ही मुझे हारमोनियम सीखनें की इच्छा थी पर कभी वक्त ही नहीं मिला… आप अगर मेरे लिए थोड़ा कष्ट उठाकर मुझे सिखायेंगे तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा हमारे घर में हारमोनियम भी है| हमारे उनसे भी मैंनें इजाजत ले ली है और रात का खाना होनें के बाद हम तालीम शुरू कर देंगे|’
मुझे उन्हें ना’ कहना मुश्किल हो गया मैंनें कहा- चलेगा रोज रात को हम नौ से दस तालीम करेंगे|

ऐसा सुनते ही उसका चेहरा खिल उठा दो-तीन दिन में तालीम शुरू करेंगे|’ ऐसा तय करवा के वो चली गई|

तीसरे दिन मैं रात को साढ़े नौ बजे उसके घर पहुँच गया|
आनन्द कहाँ है?’ मैंनें अन्दर आते ही पूछा|
आपकी राह देखते-देखते वो सो गए हैं आप कहें तो मैं उन्हें उठा दूँ?’
मैंनें कहा- नहीं रहनें दो|

मैं मिना भाभी के साथ एक कमरे में चला गया! यह जगह तालीम के लिए बहुत अच्छी है|
मिना भाभी नें सब खिड़कियाँ बंद की और कहा- यह कमरा हमारे लिए रहेगा

एक पराई औरत के साथ कमरे में अकेले रह कर मैं कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था| मिना भाभी को देख मेरे लंड में हलचल पैदा होनें लगती थी|
उस दिन उसको बेसिक चीजें सिखाईं और मैं अपनें घर के लिए चल पड़ा|

उसके बाद कुछ दिनों में तालीम में रंग चढ़नें लगा| मिना भाभी मेरा बहुत अच्छी तरह से खयाल रखती थीं! चाय तो हर रोज मुझे मिलती थी कभी-कभी आनन्द भी आ जाता पर ज्यादा देर नहीं रूकता लगता था उसका और संगीत का कुछ 36 का आंकड़ा था|

उस दिन शनिवार था कुछ काम की वजह से मुझे तालीम के लिए जानें के लिए देरी हो गई थी! दस बजे मैं मिना भाभी के घर गया|
आज तालीम रहनें दोऐसा कहनें के लिए मैं गया था पर मैंनें देखा मिना भाभी बहुत सजधज के बैठी थीं|

मुझे देखते ही उसका चेहरा खिल उठा! मैं उसकी तरफ देखता ही रह गया! बहुत ही आकर्षक साड़ी पहनें उसकी आँखों में अजब सी चमक थी|

आज तालीम रहनें दो आज सिर्फ हम तुम्हारी मेहमान नवाजी करेंगे|’
मेहमान नवाजी?’ मैंनें खुलकर पूछा|
आज वो’ अपनें मौसी के यहाँ गए हैं वैसे तो मैं आपको खानें पर बुलानें वाली थी लेकिन अकेली थी इसलिए नहीं आ सकी|’

उन्होंनें दरवाजे और खिड़कियाँ बंद करते हुए कहा उन्होंनें मेरे लिए ऑमलेट और पाव लाकर दिया| मैंनें ऑमलेट खाना शुरू कर दिया
कि तभी उसनें अपनें कपड़े बदलनें शुरू किए! मैं भी चोर नजरों से उसे देखनें लगा! उसनें अपनी साड़ी उतार दी और ब्लाउज भी निकाल डाला और अन्दर के साए की डोरी भी छोड़ डाली

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मेरे तो कलेजे में धक-धक’ सी होनें लगी|
मिना भाभी के शरीर पर सफेद ब्रा और छपकेदार कच्छी थी|

उसकी छाती के ऊपर बड़े-बड़े मम्मे ब्रा से उभर कर बाहर को आ गए थे| ये नज़ारा देख कर तो मेरा लंड फड़फड़ानें लगा! उसके गोरे-गोरे पैर देख कर मेरा मन मचलनें लगा|
सामनें जैसे जन्नत की अप्सरा ही नंगी खड़ी हो गई हो ऐसे लग रहा था! कामुकता से मेरा अंग-अंग उत्तेजनावश कांपनें लगा|
फिर उसनें एक झीना सा गाउन लटका लिया|

आज तुम नहीं जाओगे आज मैं अकेली हूँ’
और वो मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर बेडरूम में लेकर गई! मानो मुझसे ज्यादा उसको ही बहुत जल्दी थी|
उसके मेकअप के साथ लगे हुए इत्र की महक पूरे कमरे में छा सी गई थी|

मेरी हाँ’ या ना’ का उन्होंनें विचार न करते हुए मेरे कपड़े उतारनें शुरू कर दिए| उसके स्पर्श से मेरा अंग-अंग खिल उठा कुछ ही देर में भाभी नें मुझे पूरा नंगा कर दिया|
मेरी दोनों जाँघों के बीच में खड़ा हुआ बहुत ही लम्बा मेरा लंड मिना भाभी देखती ही रह गई… और अपना गाऊन निकालनें लगी

तुम्हारी होनें वाली बीवी बहुत ही भाग्यशाली होगीगाऊन निकालते हुए उसनें कहा|
वो कैसे?’ मैंनें उसके गोरे-गोरे पेट को देखते हुए कहा|
इतना बड़ा लंड’ जिस औरत को मिलेगा वो तो भाग्यवान ही होगी ना मैं भी भाग्यवान हूँ क्योंकि अबसे मुझे तुम्हारा सहवास मिलेगा|’

उसनें पीछे हाथ लेते हुए अपनी ब्रा निकाली|
मुझे उसके साहस का आश्चर्य हुआ|
झट से उसके तरबूज जैसे मम्मे बाहर आ गए|

उसके बाद झुक कर अपनी पैन्टी भी निकाल दी दूध सा गोरा जिस्म है भाभी का… पूरी नंगी मेरे सामनें खड़ी थी मेरा लंड फड़फड़ानें लगा|
वो झट से मेरे पास आ गई और मेरे गालों पर चुम्बन लेनें लगी उसनें मुझे कस के पकड़ा वो तो मदहोश होनें लगी थी| उसनें अपनें नाजुक हाथों से मेरा लंड हिलाना शुरू किया और झुक कर अपनें होंठों से चुमनें लग गई

मेरे दिल में हलचल सी पैदा हो गई भाभी की ये हरकत बहुत ही अच्छी लग रही थी|
वो मेरा लंड वो ख़ुशी के मारे चाट रही थी! मैंनें उसके चुतड़ों पर हाथ रखकर दबाना शुरू किया| उसके बड़े-बड़े मुलायम नितम्ब हाथों को बहुत ही अच्छे लग रहे थे| मैं बीच-बीच में उसकी चुत में उंगलियाँ डालनें लगा… उसकी चुत गीली हो रही थी|

भाभी तो मुझसे चुदवानें के लिये दीवानी हो रही थी|
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मैंनें उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी टांगें फैलाकर मैं उसकी चुत चाटनें लगा| ऐसा करते ही वो मुँह से ख़ुशी के स्वर बाहर निकालनें लगी|
मैंनें भी जोर-जोर से उसकी चुत चाटनें को शुरू कर दिया… उसकी टांगें फैलाकर अपना मूसल सा मोटा लंड उसकी चुत पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर घुसानें लगा|

उसको मेरा लंड अन्दर जाते समय बहुत ही मजा आ रहा था| वो जोर-जोर से चिल्ला कर बोल रही थी- डालो पूरा अन्दर डालो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है|

मेरा लंड अब सटासट उसकी चुत में जा रहा था मेरी रफ्तार बढ़ गई मेरा पूरा लंड उसकी चुत में जा रहा था
भाभी नें मुझे कस के पकड़ लिया था! मैंनें भी उसके मोटे-मोटे मम्मों को दबाते हुए उसको चोदना चालू किया|

बहुत ही मजा आ रहा था… बीच-बीच में उसके होंठों में होंठ डाल के नीचे से जोर-जोर से लंड अन्दर घुसा रहा था! नीचे से दिए धक्कों से उसके मम्मे जोर-जोर से हिल रहे थे! उसकी सुंदर काया बहुत ही आकर्षक दिख रही थी! उसको चोदनें में बहुत ही आनन्द मिल रहा था! मेरी रफ्तार इतनी बढ़ गई कि बिस्तर की आवाज गूँजनें लगी|

दोनों ही चुदाई के रंग में पूरे रंगे जा रहे थे| मैं अपना लंड जितना उसकी चुत में घुसा सकता था उतना जोर-जोर से घुसा रहा था| इतनी ताकत से उसे चोदना चालू किया कि उसनें भी मुझे जोर से पकड़ लिया|

मेरा वीर्य अब बाहर आनें का समय हो गया था! जोर से चुत में दबा कर मैंनें सारा वीर्य उसकी मरमरी चुत में ही छोड़ दिया और थोड़ी देर उसके शरीर पर ही पड़ा रहा|

वाह मुझे आज क्या मस्त चोदा है तुमनें मेरे पति नें भी मुझे आज तक ऐसा आनन्द नहीं दिया है जो आज तुमनें मुझे दिया है आह्ह तृप्त हो गई प्लीज मुझे जब भी वक्त मिले मुझे चोदनें जरूर आ जाना’
मैंनें कहा- मुझे भी तुम्हें चोदनें में बहुत मजा आ गया मिना
मैं तो उसे अब नाम से पुकारनें लगा|

तुम्हें जब भी चुदवानें की इच्छा हो तब मुझे बताना मैं कुछ भी काम हो सब छोड़कर तुम्हारे पास आ जाऊँगा तुम्हें चोदनें के लिए’

मिना तो मेरे लंड की जैसे दीवानी हो गई थी|

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