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“भाभी की गाड़ और चुत का दरवाजा खोला”

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हाय फ्रेंड्स, अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम की वेबसाइट पर सेक्सी कहानियाँ पढ़नें वालों और पढ़नें वाली सभी भाभियों और कुँवारी चूतों को मेरे खड़े लंड का प्यार भरा सलाम। दोस्तों मेरा नाम जय प्रकाश है और मैं 24 साल का एक जवान लड़का हूँ। मैं भी अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम की वेबसाइट पर बहुत समय से सेक्सी कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। दोस्तों आज मैं आपको मेरे बिस्तर की हलचल को पूरी दुनिया के सामनें लानें का प्रयास कर रहा हूँ और यह घटना आज से 1 साल पुरानी है और तब मैंनें अपनें पडौस में रहनें वाली सुनीता भाभी के साथ चुदाई करी थी।

दोस्तों मैं उस भाभी को करीब 4-5 सालों से जानता हूँ और मैं उनको एक हसरत भरी निगाहों से देखता भी रहता हूँ, क्योंकि वह है ही इतनी बला की खूबसूरत कि कोई भी उनको एकबार देखे तो देखता ही रह जाए। वह किसी भी नजरिये से नहीं लगती कि, वह दो बच्चों की माँ भी है। वह भाभी 30 साल की है उनकी लम्बाई 5.5 फुट की है और उनका फिगर तो बड़ा ही गजब का है। देख तो मैं उनको पिछले 4-5 सालों से रहा था, पर उनको चोदनें का मौका मुझको 1 सा पहले ही मिला है। मैं सिर्फ़ उनको उनकी खूबसूरती के लिए देखता था और पहले मैंनें उनके बारे में ऐसा-वैसा कुछ भी नहीं सोचा था बस कभी–कभी जब वह झाड़ू लगाती थी तो मुझको उनके बड़े–बड़े खरबूजों के दर्शन हो जाया करते थे। और भाभी को उस नज़र से नहीं देखनें का कारण था कि, वह भाभी मुझसे उम्र में काफ़ी बड़ी थी और उस समय मैं स्कूल में 10 वीं में पढ़ता था. स्कूल का सबसे होशियार स्टूडेंट होनें के कारण, काफ़ी लड़कियों के प्रपोज़ल मुझको आते रहते थे और मैं इसी खुशी में रहता था, पर मैंनें उनमें से किसी भी लड़की से दोस्ती नहीं करी थी। स्कूल से पास होनें के बाद, मैंनें इंजिनियरिंग में एडमिशन ले लिया था। दोस्तों आपको तो पता है ही कि, इंजिनियरिंग में लड़कियाँ वैसे ही काफ़ी कम होती है और ऊपर से मेरा मैकेनिकल ब्रांच था, सो उधर तो और भी कम लड़कियाँ थी. पर किसी भी तरह मेरे दिन बिना लड़कियों के कट रहे थे. और मैं अब भी उस भाभी को देखता था और अब तो मैं बड़ा भी हो गया था और अब तो मैं अपनी जवानी के पूरे रंग में था। और फिर मैं ऐसे ही एक दिन अपनी छत पर टहल रहा था कि उस समय भाभी भी उनकी छत पर आ गई थी, हम दोनों की छत आपस में जुड़ी हुई है और नीचे एक लड़का फोन पर अपनी गर्लफ्रेंड से बात कर रहा था पर मैंनें उसे देखकर अनदेखा कर दिया था. और फिर वह भाभी मेरे पास आई और फिर वह मुझसे बोली कि, देख उस लड़के को शादी होनें के बाद भी उसनें गर्लफ्रेंड बना रखी है। मैंनें उसको देखा और कुछ नहीं कहा तो फिर उन्होनेंं मुझसे पूछा कि, तेरी कोई गर्लफ्रेंड है? तो मैंनें उनको मना कर दिया।

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तो फिर वह मुझसे बोली कि, तुम जैसे लड़कों की गर्लफ्रेंड ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। उसी समय मुझको समझ में आ गया था कि, भाभी के अन्दर का तूफान अभी थमा नहीं है. दोस्तों उसके बाद तो अब भाभी से इस मुद्दे पर खुलकर बातें होनें लगी थी. भैया के ऑफिस चले जानें के बाद कभी–कभी मैं उनके साथ बैठकर टी.वी. पर कोई फिल्म भी देख लेता था और फिर एक दिन मैं उनके घर गया तो उनके घर का गेट खुला हुआ था तो मैं सीधा उनके कमरे में चला गया था वह उस समय नहाकर ही निकली थी और वह अपनें कपड़े पहन रही थी. वह अपनी सलवार पहन चुकी थी और अब वह अपनी ब्रा पहन रही थी. उस समय वह अपनें एक हाथ से अपनी ब्रा का हुक लगा रही थी और उनके बड़े-बड़े खरबूजे बाहर उछल रहे थे और वह उनकी ब्रा में बड़ी मुश्किल से समा रहे थे। मैंनें उनको देखा और फिर मैं शरमाकर गेट बन्द करके चुप-चाप वहाँ से चला आया। दोस्तों अब मेरी नियत डोलनें लगी थी और अब मैं उनको चोदनें के बारे में सोचनें लगा था. लेकिन उस घटना के बाद शरम से, मैंनें उनसे 10-15 दिनों तक नज़रें नहीं मिलाई थी और फिर मैं मन ही मन सोचनें लगा कि, उनको कैसे चोदूं? पर मुझको समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था. और मैं उनसे सीधे-सीधे तो अपनें इस ख़याल के बारे में बात भी नहीं कर सकता था. क्योंकि मुझे वैसे भी सब एक अच्छा लड़का समझते थे. अगर मेरी कोई बात उनको पसन्द नहीं आई तो मैं बदनाम हो जाऊँगा। और फिर इसी बीच मेरी परीक्षा भी शुरू हो गई थी और अब मेरे पास उनसे बात करनें का समय भी नहीं होता था. और फिर मैंनें एक प्लान बनाया. मेरी क्लास का एक दोस्त था जिसका नाम रोहित था, वह लड़कियों और भाभियों को फोन करके परेशान किया करता था और इसीलिए वह मेरे से भी किसी लड़की या भाभी का नम्बर माँगता रहता था, लेकिन दोस्तों मैंनें कभी उसे किसी का नम्बर दिया नहीं था। लेकिन एकदिन मैंनें उसे भाभी का नम्बर दे दिया था और मैंनें उसे भाभी के बारे में सब कुछ बता भी दिया था और मैंनें उसे यह भी कह दिया था कि, वह अगर पूछे कि, उसका नम्बर तुमको किसनें दिया है? तो तुम कह देना कि, आपकी सहेली अर्चना नें दिया है। दोस्तों अर्चना भी हमारे पड़ौस में रहती है और वह भी शादी-शुदा है. और भाभी नें मुझे बताया था कि यह औरत बड़ी हरामी है अभी भी उसके कई बॉयफ्रेंड है।

और फिर अगले दिन, मैंनें रोहित से सुनीता भाभी के बारे में पूछा, तो उसनें मुझको कहा कि, सुनीता भाभी नें उसे कल घर पर बुलाया है तो फिर मैंनें मन ही मन सोचा कि, साला यह तो बड़ा तेज है यह इतनी जल्दी यहाँ तक पहुँच भी गया और फिर उसनें मुझको सुनीता भाभी का मैसेज दिखाया, जिसमें उनके घर का पता था और फिर दोस्तों अगले दिन सुनीता भाभी नें जिस समय पर रोहित को बुलाया था, मैं भी उससे 30 मिनट पहले ही उनके यहाँ पहुँच गया था. और फिर भाभी नें मुझको हैरत से देखते हुए पूछा कि, तुम? तो फिर मैं भी शरमाकर के उनसे बोला कि, मैं ही हूँ वह रोहित. और फिर भाभी एक कातिल अदा से मुझे देखकर बोली कि, अब इतना शरमानें की कोई ज़रूरत नहीं है, मुझे तो पहले से ही पता था कि वह तू ही है. और फिर उन्होंनें मुझको कहा कि, तू इधर ही रुक, और मैं अभी छत पर कपड़े डालकर आती हूँ। फिर इतनी देर में मैंनें भाभी का फोन लिया और उसमें से रोहित के नम्बर पर एक मैसेज भेज दिया जिसमें लिखा था कि, अब मेरे पति आ गये है और फिर मैंनें उसके नम्बर को ब्लेक-लिस्ट में डालकर उससे आनें वाली कॉल्स को रिजेक्ट कर दिया था. और फिर मैंनें भाभी के कमरे में आते ही हिम्मत करके उनका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया था. जिससे भाभी मुझसे लिपट गई थी. और फिर मैंनें भाभी से कहा कि, तो फिर इतनें दिनों तक मुझको तड़पानें की क्या ज़रूरत थी? तो वह मुझसे बोली कि, मैंनें तो तुम्हें इतनें इशारे किए थे पर तुम कुछ समझते ही नहीं थे। और फिर मैंनें भाभी के मुहँ में अपना मुहँ डाल दिया और फिर मैं उनको फ्रेंच किस करनें लगा और फिर मेरा एक हाथ भाभी के बब्स पर और दूसरा हाथ उनकी चूत को उनके कपड़ों के ऊपर से ही सहला रहा था. दोस्तों भाभी की नजदीकी के अहसास से मेरा लंड सख़्त हो गया था और मेरा मन तो कर रहा था कि, भाभी को बस जल्दी से चोद दूँ पर मैंनें खुद को रोककर रखा हुआ था. और फिर मैंनें उनके कपड़े उतार दिए और भाभी को मैंनें सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में ही छोड़ दिया था. और अब भाभी सिसकारियाँ ले रही थी क्योंकि मेरा एक हाथ अब भाभी की पैन्टी में था और वह भी मेरे लंड को मेरी पेन्ट के ऊपर से सहला रही थी. और फिर इतनें में उनके घर की घन्टी बज उठी थी तो भाभी नें जल्दी से अपनें कपड़े पहनें और गेट खोला तो बाहर अर्चना खड़ी थी. मुझे तो उस समय बहुत गुस्सा आ रहा था, और उसी समय मुझे इस बात का मतलब समझ में आया कि, जब इस तरह की कोई स्थिति आ जाए तो इसको ही ‘खड़े लंड पर चोट’ होना कहते है। और फिर अर्चना भाभी अन्दर आ गई थी और फिर उन्होनेंं मुझे देखा और मुस्कुराते हुए मुझसे कहा कि, क्या हाल है तुम्हारा? अब तक तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड बनी या अभी भी बाबा जी का ठुल्लू ही लिए हुए घूम रहे हो हा हा हा… और फिर उस समय मेरा भेजा सटक गया, पर तभी सुनीता भाभी भी हँसनें लगी, और फिर उन्होंनें अर्चना भाभी से कहा कि, अब इसनें अपनें लिये एक गर्लफ्रेंड बना ली है।

अर्चना:- अरे वाह! जय प्रकाश बताओ तो ज़रा वह कैसी लगती है? वह तुमको किस विस भी करती है या नहीं? तभी सुनीता भाभी नें आगे बढ़कर मुझे चूम लिया, और अर्चना भाभी से कहा कि, करती है ना किस देखो ऐसे ही करती है ना?

और फिर मुझे सब समझ में आ गया था कि, यह सब सुनीता भाभी की ही चाल है वह मुझे नीचे बैठाकर छत पर अर्चना भाभी को बुलानें ही गई थी। बस फिर तो क्या था मैंनें भी सुनीता भाभी को अपनी बाहों में भर लिया और अर्चना भाभी के सामनें ही मैंनें सुनीता भाभी के बब्स को मसल दिया था और फिर मैंनें अर्चना भाभी को कहा कि, किस तो छोड़िए मैं तो उसके बब्स भी दबा देता हूँ देखो ऐसे। अर्चना भाभी भी अब खुलकर सामनें आ गई थी और फिर उसनें मेरा लौड़ा पकड़ लिया था और उन्होंनें मुझसे कहा कि, उसनें इसको भी चूसा है या नहीं? और बस अब तो सब कुछ खुल गया था और फिर तो सब कुछ वही हुआ जो हर चुदाई में होता है. उसके बाद तो लगातार ही मुझे अर्चना और सुनीता भाभी की और चुदक्कड़ सहलियाँ भी मिलनें लग गई थी।

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