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“भगवान ऐसी कुँवारी चुत सबको नसीब हो”

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प्रिय मित्रो, आज मैं आपको एक बहुत ही मज़ेदार बात बताने जा रहा हूँ। किसी किसी इंसान पर उसकी किस्मत इतनी मेहरबान होती है के वो खुद हैरान होता है, और उसकी किस्मत को देख कर और लोग जलते हैं।
ऐसी ही किस्मत पाई है, मेरे मित्र राज ने… उसने मुझे खुद ये बात बताई थी, और मैं खुद भी उन दोनों लड़कियों को अच्छे से जानता हूँ, अब तो खैर दोनों लड़कियों की शादी भी हो चुकी है, दोनों लड़कियां बाल बच्चेदार हो चुकी हैं, इसलिए उन दोनों लड़कियों के नाम बदल कर कहानी लिख रहा हूँ, कहानी के सभी पात्र और घटनाएँ बिल्कुल सच हैं।

दोस्तो, मेरा नाम राज है, बात तब की है, जब हम लोग अपने नए बने मकान में शिफ्ट हुये थे। मकान शहर से बाहर बनी एक नई कॉलोनी में बनाया था, इसलिए आस पास बहुत से प्लॉट खाली थे, घर भी दूर दूर थे।
हमारे घर से एक गली छोड़ कर आगे एक मकान बना हुआ था। उस घर में माँ बाप के अलावा सिर्फ दो लड़कियां थी, दोनों पढ़ती थी. मैं भी पढ़ता था मगर हमारे स्कूल अलग अलग थे।
बड़ी बहन का नाम रानी और छोटी की गीता था, मगर सब छोटी को गोल्डी गोल्डी ही कहत क दिन मैं अपनी साइकल पर उनके घर के पास से गुज़रा तो रानी छत पर खड़ी थी, हम दोनों के नैन मिले और वो हल्के से मुस्कुराई, मुझे लगा ‘यार, ये लड़की तो लाइन दे रही है।’

मैं फिर से साइकल घुमा कर लाया, इस बार मैंने रानी को बड़े ध्यान से देखा, और उसे स्माइल पास की तो बदले में वो भी मुस्कुरा दी।
मेरे मन में तो लड्डू फूट पड़े कि ये तो सेट ही हो गई।
बस अगले दिन दोस्ती करने का एक छोटा सा कार्ड मैंने उसके घर में फेंक दिया।

अगले दिन जब मैं उसके घर के सामने से निकला तो उसने भी कागज़ का एक टुकड़ा बाहर को फेंका, जैसे को रद्दी का टुकड़ा हो मगर मेरे लिए वो रद्दी नहीं था। मैंने वो कागज़ उठाया और आगे चला गया, थोड़ी दूर जा कर मैंने मैंने वो मुड़ा तुड़ा कागज़ खोल कर देखा, उसमें अँग्रेजी में बड़ा सा ‘यस’ लिखा था।
मैं तो झूम उठा।

उसके बाद अक्सर मैं अपनी छत से उसको इशारेबाज़ी करता, वो भी जवाब देती.
धीरे धीरे बात बढ़ने लगी, इशारों से आगे मैंने उसे मिलने के लिए कहा। मगर इस इशारेबाज़ी और चिट्ठी पत्री में ही एक साल गुज़र गया।
हम दोनों अब फर्स्ट इयर में थे, हम दोनों खुश कि हमारे पास भी अपना प्यार है, मगर प्यार से मुलाक़ात नहीं हो पा रही थी। वो अपने घर वालों से डरती ही बहुत थी, इसलिए घर से बाहर ही नहीं निकलती थी।

बड़ी मुश्किल से एक दिन मैंने उसे मनाया, वो स्कूल से सीधी मेरे पास आई। वो भी साइकल पर थी, पीछे उसकी छोटी बहन बैठी थी।
उस दिन रानी के मुझसे मिल कर सिर्फ इतना कहा कि वो दिन में बाहर मिलने नहीं आ सकती इसलिए मैं उसे मिलने के लिए मजबूर न करूँ।

मुझे बड़ी मुश्किल हुई कि ऐसी गर्लफ्रेंड का क्या फायदा जो मिल भी नहीं सकती वो!
मैंने एक दिन उसको कहा- तुम मुझे मिलने नहीं आ सकती, तो क्या मैं तुमसे मिलने आ सकता हूँ?
वो बोली-कैसे?
मैंने कहा- बस तुम अपने रूम का दरवाजा खुला रखना।

उस दिन रात को मैं अपनी घड़ी में अलार्म लगा कर सोया।
1 बजे अलार्म बजा, मैं उठा, अपने बाल वाल सेट किए और चुपचाप से अपने घर की दीवार फांद कर चल पड़ा।
आस पास सब घर वाले सो रहे थे।

मैंने धीरे से उसके घर की दीवार फाँदी, अंदर जा कर उसके कमरे का दरवाजा हल्के से धकेला।
दरवाजा खुला था, हल्की सी चरमराहट की आवाज़ से दरवाजा खुल गया।

मैंने अंदर देखा, अंदर नाइट लैम्प की मधम रोशनी में दोनों बहनें कम्बल ओढ़े सो रही थी।
मैंने पास जा कर रानी को हिलाया।

वो जाग गई और मुझे देख कर हैरान हो गई- अरे तुम यहाँ कैसे आ गए?
मैंने कहा- तेरे घर की दीवार फांद कर!
वो दबी सी हंसी हंस कर बोली- मरवाओगे क्या?
मैंने कहा- नहीं, मैं तो मारने आया हूँ।
वो बड़े हैरान हो कर बोली- मुझे मारने आए हो क्या?
मैंने कहा- नहीं मेरी जान, तुझे नहीं, तेरी मारने आया हूँ।

वो फिर दबी सी हंसी हंस पड़ी।

मैं भी उसके साथ ही उसके कम्बल में घुस गया, दोनों काफी देर लेटे आपस में धीरे धीरे बातें करते रहे। करीब दो घंटे मैं उसके रूम में रहा। इस दौरान हम दोनों ने एक दूसरे के 50 करीब चुम्बन लिए, ज़्यादातर होंठों पर। अगर मैं उसे चूमता था, तो बदले में वो भी मुझे चूमती थी। सिर्फ एक बार उसके बोबे दबाये, वो उसने ज़्यादा दबाने नहीं दिये।

उसके बाद तो ये सिलसिला ही चल निकला, हफ्ते में एक रात तो मैं उसके घर ज़रूर जाता। जैसे जैसे ठंड बढ़ रही थी, लोग और जल्दी सो जाते, फिर तो मैं रात 12 बजे जाता और सुबह 3 या 4 बजे वापिस आता।
मगर मैंने उसकी चूत मारने में कोई जल्दबाज़ी नहीं की। नया नया प्यार था, बस सच्चा इश्क़ था, सो सारा प्यार बातों में ही होता था। कभी कभी उसकी छोटी बहन भी उठ कर बैठ जाती और हमारे साथ वो बातें करती।
जब हमने प्यार करना होता, तो रानी उसे कह देती- गोल्डी, चल अब तू सो जा!
वो हमारी तरफ पीठ करके लेट जाती मगर नींद उसे भी कहाँ आती, हम जो खुसर फुसर करते, वो सब उसे सुनती।

‘अरे मेरी सलवार से हाथ बाहर निकालो!’
‘प्लीज कमीज़ मत उठाओ, ठंड लगती है!’
‘मेरी पेंट के हाथ डाल और पकड़ इसे!’
‘अब चुप, अब सिर्फ हमारे होंठ आपस में मिल कर बात करेंगे!’
‘तुम्हारे बूब्स बहुत सॉफ्ट हैं!’
और ऐसे और भी बहुत से वाक्य होते थे जो हम बोलते थे, और गोल्डी लेटी चुपचाप सुनती रहती थी।

फिर मेरे दोस्तो ने मुझसे कहा- यार तुझे इतना टाइम हो गया, उस से इश्क़ करते, और तूने अभी तक उसकी ली नहीं?
मेरे यार दोस्त अक्सर मुझे सेक्स के लिए प्रेरित करते।

फिर मैंने भी सोचा, अगर गर्ल फ्रेंड है तो क्यों न चोदी जाए।

इसी बात को लेकर मैं रानी से और ज़्यादा सेक्सी बातें और हरकतें करने लगा। धीरे धीरे वो भी पिंघलने लगी।
8 नवम्बर को मैं पहली बार उसके घर गया था, और दिसम्बर के पहले हफ्ते में मैंने उसको पहली बार बिल्कुल नंगी देखा। दरअसल मैंने ही उस से कहा था कि मैं उसे बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।
तो उसने कहा था- जब अगली बार आओगे, तब दिखा दूँगी।

अगली बार जब मैं गया तो मैंने उसे उसका वादा याद दिलाया तो वो बिस्तर से उठी और उठ कर एक एक करके अपने सारे कपड़े मेरे सामने खड़ी हो कर उतार दिये। उसकी बहन भी पास में ही सो रही थी, मगर उन दोनों बहनों की आपस में सेटिंग थी, दोनों आराम से एक दूसरे के सामने कपड़े बदल लेती थी, इसलिए दोनों ने एक दूसरी को नंगी देखा था तो शर्म की कोई बात नहीं थी।
मगर मेरे सामने वो पहली बार नंगी हुई थी, एक बात और थी, मैंने देखा लड़की दिलेर थी, मैंने एक बार कहा, तो उसने अपने सारे कपड़े झट से उतार दिये, बिना कोई सवाल किए।
छोटे छोटे गोरे गोरे बोबे, हल्के भूरे गुलाबी से निप्पल, सपाट पेट, पतली पतली सी टाँगें… दुबली पतली सी लड़की, हल्की सी झांट…

जब वो वापिस अपने कपड़े पहनने लगी तो मैंने उसे कम्बल में खींच लिया- अरे पहन लेना न कपड़े, इतनी जल्दी क्या है, अभी ऐसे ही लेटते हैं, मैं चला जाऊँ, फिर पहन लेना!
कह कर मैंने उसे अपने साथ ही अपनी कम्बल में लेटा लिया। वो कम्बल में आई, तो मैंने भी अपना लोअर उतार दिया, चड्डी तो मैंने पहनी ही नहीं थी।

जब मेरा तना हुआ लंड उसके पेट पर लगा तो वो बोली- ये क्या, तुम क्यों नंगे हो गए?
मैंने कहा- आज हमारे मुन्ना मुन्नी भी आपस में पारी करेंगे!
कह कर मैं उसके ऊपर लेट गया और अपना लंड उसकी चूत पर सेट किया।
उसने भी खुशी खुशी अपनी टाँगें चौड़ी कर दी और मेरे लंड का टोपा ठीक उसकी चूत के मुँह पे जा लगा।

‘इसकी पारी करनी ज़रूरी होती है क्या?’ रानी ने पूछा।
मैंने कहा- हाँ बहुत ज़रूरी होती है।

पहले तो मैं सिर्फ अपने लंड के टोपे को उसकी चूत के मुँह पर रख कर लेटा रहा क्योंकि मैं इंतज़ार कर रहा था, सही वक़्त का जब धीरे से अपने लंड को उसकी चूत में उतार दूँ।
आपस में प्यार भरी मीठी मीठी बातें करते करते हम बीच बीच में किसिंग भी करते रहे, वो भी नीचे लेटी कसमसा रही थी, जिससे मेरा लंड उसकी चूत के सुराख के बिल्कुल ऊपर टिका हुआ था, लंबे लंबे चुम्बन चल रहे थे, कभी मैं उसके रसीले होंठों को चूसता, कभी वो मेरे होंठों को चबा जाती।

मैं महसूस कर रहा था कि वो अब पूरी तरह से गर्म हो चुकी है, तो मैंने भी अपनी कमर का हल्का सा दबाव बढ़ाया और मेरे लंड का टोपा उसकी गीली चूत में घुसता चला गया। उसके मुँह से सिर्फ ‘ऊं’ की एक ही हल्की सी आवाज़ आई, मगर हमारा चुम्बन वैसे ही रहा, होंठ से होंठ वैसे ही चिपके रहे।
जब टोपा घुस गया तो मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया और थोड़ा और लंड उसकी चूत में डाला। मगर वो चुपचाप मेरे होंठों को चूसती रही और मैंने हल्के हल्के दबाव बढ़ाते हुये अपना सारा लंड उसकी चूत में उतार दिया।

जब मैंने अपने होंठ उसके होंठों से अलग किए तो उसने पूछा- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- चोद रहा हूँ तुझे!

मैंने अपना लंड उसकी चूत से अंदर बाहर करते हुये कहा- पगली, हम सेक्स कर रहे हैं।
वो बड़े हैरान हो कर बोली- इसे सेक्स कहते हैं?
मैंने कहा- कौन सी दुनिया में रहती हो, तुझे नहीं पता सेक्स कैसे होता है।
वो बोली- मैं तो सोचती थी, जैसे हम पहले किसिंग कर रहे थे, उसी को सेक्स कहते हैं।
मैंने कहा- बेवकूफ़, वो किसिंग होती है, जब मर्द का लंड औरत की चूत में जाता है, तब सेक्स होता है। पहले तो लड़की थी, मगर अब अपनी चूत मरवा कर तुम औरत बन गई हो। काली से फूल हो गई हो।

वो बड़ा चहकी- तुम बातें बहुत बनाते हो। अच्छा ये बताओ, सुहागरात को भी यही होता है क्या?
मैंने कहा- हाँ, सुहागरात को भी सेक्स ही होता है, और उसके बाद हनीमून पर भी सिर्फ सेक्स और सेक्स होता है।
वो बोली- हमने तो शादी की नहीं, फिर सेक्स करना ठीक है क्या?
मैंने कहा- सेक्स करने के लिए शादी की ज़रूरत नहीं होती।

बेशक मैं उस से बातें कर रहा था, मगर मेरा सारा ज़ोर उसकी चुदाई में लगा हुआ था। पहले तो मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था, मगर फिर मैं उठ कर बैठ गया, उसकी दोनों टाँगें मेरे दोनों कंधों पर थी। बेड की साइड में रखा छोटा सा टेबल लेंप, और उसकी मध्म से रोशनी में दमकता उसका गोरा बदन… मैं कभी उसके होंठ चूसता तो कभी उसके निप्पल।

मेरे ज़ोर ज़ोर से दबाने से उसके दोनों बोबों पर मेरी उँगलियों के निशान छप गए थे।

मैंने कम्बल उतार दिया और अपनी टी शर्ट भी। हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे, इतने में ही उसकी छोटी बहन ने करवट ली और हमारी तरफ मुँह करके हमें देखने लगी।
मैंने अपनी कारवाई नहीं रोकी।
उसने पूछा- दीदी, क्या कर रहे हो?
तो रानी ने बड़ा खुश होकर कहा- सेक्स कर रहे हैं।

सेक्स का नाम सुन कर गोल्डी की आँखें खुल गई, और वो बड़े गौर से हमें देखने लगी। मैंने भी अपना पूरा लंड रानी की चूत से बाहर निकाल कर फिर डालना शुरू किया, ताकि गोल्डी भी देख सके कि लंड कैसे और कहाँ डालता है।
गोल्डी बोली- दीदी शर्म नहीं आती, ऐसे नंगी लेटी हो।
रानी से पहले मैंने कह दिया- अरे सेक्स होता ही नंगे लेट कर है। कपड़े पहन कर सेक्स थोड़े होता है।

कम्बल में दुबकी गोल्डी भी मुझे सुंदर लग रही थी, मेरा तो मन था कि ये भी बाहर निकले और मैं उसे भी चोद दूँ। मगर अभी मुझ सब्र रखना था, ताकि पहले रानी को अपने वश में कर लूँ, उसकी अच्छे से चुदाई कर के।

मैंने रानी से कहा- रानी घोड़ी बनेगी?
तो वो अपना सर हिला कर उठ गई और मेरी तरफ पीठ करके अपने चूतड़ उसने मेरी तरफ कर दिये, मगर मैंने अपना तना हुआ लंड अच्छी तरह से हिला कर गोल्डी को दिखाया, और फिर पीछे से
रानी की चूत में डाला, जिसे रानी ने खुद पीछे को ज़ोर लगा कर सारे का सारा अपनी चूत में ले लिया।
उसके बाद रानी की चुदाई घोड़ी बन के होने लगी।

मैंने रानी से पूछा- रानी मज़ा आ रहा है?
वो बोली- हाँ, बहुत!

मैं उसे चोद रहा था, मगर मेरा ध्यान बार बार गोल्डी पर जा रहा था। मैं चाहता था कि गोल्डी भी अपना कम्बल उतारे और नंगी हो कर हमारे साथ ही आ जाए और मैं उसे भी चोद कर अपने लंड को ठंडा कर सकूँ।
मगर गोल्डी उठी नहीं मगर मुझे इतना ज़रूर पता था कि उसका हाथ उसकी सलवार में है।

मैंने उसको बेशर्म करने के लिए पूछ ही लिया- ए गोल्डी, तू सलवार में हाथ डाल कर क्या कर रही है?
वो एकदम से चौंक पड़ी, मगर रानी ने उसका कम्बल खींच दिया, सच में गोल्डी का हाथ उसकी सलवार में था, जब उसने अपना हाथ सलवार से बाहर निकाला, तो उसकी उँगलियाँ भीगी हुई थी, मैं समझ गया, साली हमें देख कर अपनी चूत सहला रही थी।

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रानी बोली- चिंता मत कर, वक़्त आने पे तुझे भी तेरा बॉय फ्रेंड मिलेगा, फिर तू भी हमारी तरह एंजॉय करना!
मगर मैं मन में सोच रहा था, बॉयफ्रेंड नहीं, इसके साथ तो मैं ही एंजॉय करूंगा।

उस रात हमारी सुहाग रात बहुत अच्छे से गुज़री, मैंने दो बार रानी को चोदा और दोनों बार उसके पेट पर ही अपना माल गिराया।
जहां तक मुझे लगता है कि एक बार तो गोल्डी ने भी अपनी चूत सहला सहला कर अपना पानी छोड़ा होगा।

उसके बाद हर तीसरे चौथे दिन हमारा मिलन होता, अब मैं और रानी खुल कर सेक्स करते। मेरे जाने से पहले ही रानी खुद नंगी हो कर बिस्तर में लेटी होती, मैं रूम में जाता, कपड़े उतारता और नंगा हो कर रानी के कम्बल में घुस जाता।

गोल्डी भी हमसे बातें करती रहती।

जिस रात मैं चौथी बार उनके घर गया, उस रात जब मैंने और रानी ने सेक्स किया, हम तो खैर बिल्कुल नंगे होते थे, और गोल्डी से कुछ भी शर्म नहीं करते थे, मगर उस रात गोल्डी ने कम्बल तो नहीं उतारा मगर सरे आम अपनी चूत का दाना सहला कर हस्तमैथुन किया। मुझे और रानी को साफ साफ दिख रहा था, मैंने गोल्डी से पूछा भी- ये क्या कर रही हो?
तो गोल्डी बोली- आप अपना काम करो, मैं अपना कर रही हूँ।

मैं ये सोच रहा था कि रानी को कैसे कहूँ कि मैं उसकी बहन को भी चोदना चाहता हूँ।

22 दिसंबर की रात, कड़ाके की ठंड थी, हमारे मिलन की रात थी।
मेरे मन में बड़े विचार आ रहे थे, सोच रहा था कैसे रानी और गोल्डी दोनों बहनों को चोदूँ।

जब मैं चुपके से रानी के घर में घुसा, तो उसके रूम का दरवाजा खोल कर अंदर गया, अंदर दोनों बहनें बेड पे लेटी थी, दोनों ने ऊपर तक रज़ाई ले रखी थी।
मैंने दोनों को ‘हाय’ कहा और अपनी आदत अनुसार मैंने पहले अपने कपड़े उतारे, नंगा होकर मैं रानी की रज़ाई में घुस गया, वो भी पहले से ही नंगी हो कर लेटी थी।
मेरे अंदर घुसते ही उसने मेरा लंड पकड़ लिया, अब हम 5-6 बार सेक्स कर चुके थे, तो हम दोनों में कोई औपचारिकता नहीं रही थी, रानी को भी पता था कि अगर आया है, तो चोदेगा ही।

मगर अभी तक हम सिर्फ चोदा चोदी ही करते थे, मेरी इच्छा थी कि इस से आगे बढ़ कर अब हम लंड चूसना, चूत चाटना और गांड मारने जैसे काम भी शुरू करें, इसलिए मैंने कहा- रानी सुन, मेरा लंड चूसेगी?
मुझे ये था कि शायद मना कर देगी, मगर वो तो रज़ाई में नीचे को घुस गई, मेरा चेहरा रज़ाई से बाहर था, और वो अंदर थी, उसने मेरा लंड पकड़ा, पहले उस से खेलती रही, हिला डुला कर देखती रही, जिस से मेरा लंड एक दम से तन गया, फिर मुझे अपने लंड के आस पास नर्म और ठंडा गीला सा एहसास हुआ, ये उसके गुलाबी होंठ थे, जिनमे मेरा लंड अब कैद हो चुका था।
बहुत ही प्यारा और मुलायम सा एहसास था, बहुत मज़ा आया मुझे अपना लंड चुसवा कर।

गोल्डी को मैंने देखा, वो मुझे देख रही थी, उसकी आँखों में अजीब से कशिश थी, जैसे कह रही हो मुझे भी छू कर देखो।
उसने इशारे से अपने भवें उठा कर पूछा- क्या कर रहे हो?
मैंने बोल कर कहा- मेरा लंड चूस रही है।
गोल्डी अपने चेहरे पे हैरानी की भाव लाई तो मैंने धीरे से अपनी रज़ाई उठा दी, अंदर रानी गांठ बनी बैठी थी और मेरा आधा लंड उसके मुँह में था।
गोल्डी उसे देखने लगी, मगर रानी ने चूसना ना छोड़ा, मैंने फिर से रानी को रज़ाई से ढक दिया, और वो अंदर ही अंदर मेरे लंड को चूसती रही।

मैंने इशारे से गोल्डी को पूछा- तू चूसेगी?
उसने हाँ में सर हिलाया, अब रानी तो रज़ाई के अंदर थी, मैंने मौका देख कर अपना हाथ आगे बढ़ाया और गोल्डी की रज़ाई के अंदर डाला, और फिर उसकी कमीज़ के ऊपर से उसका बोबा पकड़ कर दबा दिया।
गोल्डी के चेहरे पे मुस्कान आ गई, मैंने उसको खुश देख कर अपना हाथ उसकी कमीज़ के गले से अंदर डाला, उसने ब्रा नहीं पहनी थी, अंडर शर्ट पहनी थी, मैंने उसका बोबा, अंदर हाथ डाल कर पकड़ा, नर्म, मुलायम बोबा… मज़ा आ गया!
एक बहन मेरा लंड चूस रही है, दूसरी के मैं बोबे दबा रहा हूँ।

मैंने एक फ्लाइंग किस गोल्डी को किया, तो उसने भी जवाबी फ्लाइंग किस मुझे दिया। हम दोनों चुदाई करना चाहते थे, मगर डर था कि कहीं रानी बुरा न मान जाए, इसलिए मैंने रानी को बाहर निकाला- अब मैं तुम्हारी चूत चाटूँगा।
मैंने जान बूझ कर रानी को इस तरह लेटाया कि मेरी कमर गोल्डी की तरफ हो।

रानी अपनी टाँगें चौड़ी कर के लेट गई, तो मैंने अपना मुँह रानी की चूत से लगाया और जब मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में घुमाई, तो रानी को उछल पड़ी- अरे यार, ये तो बहुत गुदगुदी होती है। मैंने कहा- और इसी गुदगुदी में तो मज़ा है।

मैं रानी की चूत चाट रहा था, और अपनी कमर धीरे धीरे खिसका कर मैंने गोल्डी के मुँह के पास कर दी, मेरा तना हुआ लंड बिल्कुल उसके मुँह के पास था, और तभी मुझे एक बार और अपने लंड के आस पास ठंडा, गीला और नर्म एहसास हुआ।
बिना मेरे कहे गोल्डी ने खुद मेरा लंडन अपने मुँह में ले लिया था। वो चूस नहीं रही थी, सिर्फ लंड को मुँह में लिए थी, तो मैंने खुद अपनी कमर हिला कर उसके मुँह में अपना लंड चलाना शुरू कर दिया।

मेरी चटाई से रानी बेहाल हो रही थी, वो मुझ से बोली- बस यार अब करो, और जल्दी जल्दी करो।
मैंने कहा- अभी नहीं, अभी गोल्डी चूस रही है, उसको चूस लेने दो, उसके बाद करूंगा।

रानी ने एकदम से उठ कर देखा, गोल्डी अपने मुँह में मेरा आधे के करीब लंड लेकर लेटी थी।
रानी बोली- गोल्डी, तुझ से सब्र नहीं हुआ क्या?
उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला और बोली- नहीं दीदी, अब सब्र नहीं होता।

मेरे लिए इतना ही बहुत था, मैंने कहा- ऐसा करते हैं, रानी गोल्डी को अभी अपने में शामिल कर लेते हैं, हम दोनों मज़े करते हैं, ये बेचारी देख कर तरसती है, क्यों तरसाना इसे!

रानी कुछ नहीं बोली, तो मैंने गोल्डी की रज़ाई हटाई, उसकी सलवार में से उसका हाथ निकाला और उसकी गीली उँगलियों को चाट गया और गोल्डी ने उल्टे हाथ से ही अपनी सलवार का नाड़ा खोल कर अपनी सलवार उतार दी।
अभी शायद उसकी झांट भी नहीं उगी थी, गोरी, चिकनी चूत… देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया।

मैंने रानी को छोड़ उसकी टाँगें खोली और उसकी चूत पर मुँह लगा कर चाटने लगा। गोल्डी को मज़ा आया तो वो भी तड़पने लगी और उसने अपनी कमीज़ और अंडरशर्ट उतार दी।
दो मिनट दबा कर उसकी चूत चाटी मैंने, खूब कमर उठा उठा कर मारी उसने!
जब वो पूरी गर्म हो गई, तो मैंने उसे सीधा किया और अपना लंड उसकी चूत पे रखा और पूछा- डालूँ क्या?
गोल्डी के शांत चेहरे पर भी स्वीकृति थी।

मैंने हल्के से दबाव से अपने लंड का टोपा उसकी चूत में घुसाया। कमसिन उम्र, नाज़ुक बदन, कुँवारी चूत, मेरे लंड की ताब सह नहीं पाई, और तड़प उठी- नहीं जीजू, बहुत दर्द हो रहा है।
मगर जीजू अब पीछे हटने वाले नहीं थे।
मैंने कहा- पहली बार तो दर्द होना ही है, जानेमन, बस चुप चाप सह जाओ, आवाज़ मत निकालो!
तभी रानी बोल उठी- चुप कर पगली, मरवाएगी क्या? कैसे रो रही है, मम्मी पापा में से कोई जाग गया तो? क्यों शोर मचा रही है, मुँह बंद रख!

रानी ने कहा तो गोल्डी ने अपना मुँह अपने हाथों से भींच लिया, उसके दर्द ने उसके रोने ने मेरे अंदर के मर्द को शैतान बना दिया।
इस बार जब मैंने ज़ोर लगाया तो ज़्यादा ज़ोर लगा कर अपना लंड उसकी चूत में धकेला। लड़की की आँखों से टप टप आँसू बह रहे थे, मगर मुझे उसे दर्द में तड़पा कर मज़ा आ रहा था। बिना उसके रोने की परवाह किए, मैंने अपना सारा लंड उसकी चूत में डाल दिया।

मैंने रानी से कहा- पहली बार किया है न, शायद इस लिए दर्द ज़्यादा हो रहा है।
रानी बोली- इसको भी तो बहुत जवानी चढ़ी थी, अब ले मज़ा!

मैंने हाथ लगा कर देखा, मगर खून नहीं था, सिर्फ उसकी चूत का पानी ही था। दो चार बार और अपना लंड उसकी चूत में आगे पीछे करके मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और गोल्डी के ऊपर से उतर गया।
लंड मेरा अब भी तना हुआ था।

मैंने रानी को अपनी और खींचा, वो तो शायद खुश थी कि उसकी बहन ने उसकाबॉय फ्रेंड छीनना चाहा तो अच्छा हुआ कि उसको दर्द हुआ।
मैं बेड पे लेट गया और रानी को अपने ऊपर लेटा लिया, मैंने फिर से रानी की चूत चाटनी शुरू की, तो उसने भी मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। दोनों सेक्स के दीवाने फिर से अपनी काम क्रीड़ा में मस्त हो गए और गोल्डी अपनी चूत को अपने हाथों से दबाए हमारे पास लेटी हमें देख रही थी।

बस थोड़ी से देर की चटाई और चुसाई के बाद मैंने रानी को अपने ऊपर ही बुला लिया। रानी ने खुद मेरे ऊपर बैठ कर मेरा लंड अपनी चूत पे सेट किया और जैसे जैसे वो बैठती गई, वैसे वैसे मेरा लंड उसकी चूत में समाता गया, और जब पूरा लंड उसकी चूत में चला गया, फिर वो खुद ही अपनी कमर ऊपर नीचे हिला हिला कर चुदवाने लगी।

पतली सी कमर, सपाट पेट, पतली पतली टाँगे, मगर 6 इंच का पूरा लंड ऐसे अपनी चूत में ले रही थी कि पता ही नहीं लग पा रहा था के लंड इसके अंदर घुस कर जा कहाँ रहा है।
मैं नीचे ही रहा, रानी खुद मुझे चोदती रही।

सर्दी का मौसम था, मगर हम दोनों के बदन इतने गर्म थे कि हमें ज़रा भी सर्दी नहीं लग रही थी। 6 या 7 मिनट की चुदाई के बाद मेरा माल गिरने लगा।
मैंने रानी को उतारने को कहा, मगर शायद उसका भी झड़ रहा था, वो नहीं उतरी और मेरे लंड ने उसकी चूत के अंदर ही पिचकारी मार दी।

मैं तो नीचे ही लेटा था, मगर रानी भी निढाल होकर मेरे ऊपर ही लेट गई।
मेरा लंड झड़ने के बाद अभी भी अकड़ा हुआ था, जो करीब 2 मिनट बाद ढीला हो कर अपने आप उसकी चूत से बाहर फिसल गया।

उसके बाद मैं और रानी कस कर जफ़्फ़ी डाल कर लेट गए।
रानी बोली- आज बहुत मज़ा आया यार, जब तुम्हारा माल गिरा न, और उसके छींटे मेरे अंदर गिरे, अंदर अजीब से संतुष्टि हुई।
मैंने कहा- पता है, इसी माल की वजह से तू प्रेग्नेंट हो सकती है!
वो बोली- वो तो मुझे पता है।

मैंने कहा- चल झूठी, सेक्स करने का पता नहीं, पर अंदर माल गिरने से बच्चा होता है ये पता है।
वो बोली- एक बार माँ और मौसी बातें कर रही, तब माँ ने बताया था कि जब पुरुष के लिंग का वीर्य स्त्री की योनि के अंदर गिरता है तब बच्चा होता है। पर तब मुझे ये नहीं पता था कि पुरुष का लिंग स्त्री की योनि के अंदर जाता कैसे है।

मैंने गोल्डी की और इशारा करके कहा- ऐसे जाता है, जैसे इसके गया।
हम दोनों मुस्कुरा दिये तो वो भी मुस्कुरा दी।
मैंने गोल्डी से पूछा- गोल्डी, एक बार और लेगी?
वो बोली- न बाबा न, तुम तो मार दोगे मुझे!

मैंने कहा- इस से कोई नहीं मरती, बल्कि इस से तो ज़िंदगी मिलती है।

उसके बाद बातें करते करते हम एक घंटा और लेटे रहे।
सुबह 3 बजे के करीब जब मैंने जाने को कहा तो रानी बोली- चले जाना, इतनी भी क्या जल्दी है?
कह कर उसने बड़े मादक अंदाज़ में अपने सीने से रज़ाई हटा कर अपने बोबे मुझे दिखाये, मैं समझ गया कि ये एक बार और चुदाई करना चाहती है।

मैंने गोल्डी को अपनी ओर खींचा, और दूसरी तरफ से रानी को अपने साथ चिपकाया- पहले दोनों बहनें मारा लौड़ा खड़ा करो।

मैंने दोनों की रज़ाई हटा दी, दोनों की एक एक जांघ मैंने अपनी जांघों पर रखी, दोनों बहनें मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी, मेरे एक हाथ में रानी का बोबा था, तो दूसरे हाथ में गोल्डी का छोटा सा बोबा।
मैंने कहा- आज गोल्डी की नथ उतराई हो गई, थोड़ा ठीक हो जाए, उसके बाद हम तीनों एक साथ एंजॉय किया करेंगे।
रानी बोली- ठीक है।

मैंने दोनों बहनों के होंठों पर एक एक किस किया और ऊपर देख कर भगवान को धन्यवाद किया, जो मुझे इतनी अच्छी किस्मत दी।

Antarvasna

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