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बॉस की बेटी की चुदाई 

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पिछले महीनें एक दिन मेरे बोस नें मुझे और मेरी वाइफ़ को डिनर पर उसके घर बुलाया था, हम लोग उसदिन उसके घर पर गये। उसके फ़ैमिली में उसकी वाइफ़, वो और उसकी एक बेटी है। उसकी बेटी कोलेज मे पढ़ती है। उस दिन हम लोग उसकी फ़ैमिली से काफी घुल मिल गये। उसनें मुझे बताया की उसकी बेटी फिजिक्स सुब्जेक्ट में काफ़ी कमजोर है। मैं खुद फिजिक्स का मास्टर हूं तो उसनें मुझे रेकुएस्ट किया कि क्या मैं उसके बेटी को फिजिक्स पढ़ा सकता हूं। मैनें उसको हां कर दी मेरी वाइफ़ भी इनसिस्ट करनें लगी कि मैं उसको फिजिक्स पढ़ाऊं।

फिर मैनें उसको बताया कि तुम मेरे घर शनि-इतवार आया करो। मुझे सटरडे – सन्डे होलीडे होता है। उसनें हां कर दी। फिर वो शनिवार मेरे घर पर आ गयी। मैं घर पर अकेला ही था क्यों कि मेरी वाइफ़ भी जोब करती है और उसे सिर्फ़ संडे छुट्टी होती है। फिर मैनें उसे मेरे पास वाले कुरसी पर बिठाकर उसे मैं फिजिक्स पढ़ानें लगा। काफ़ी देर तक मैं उसे मन लगा कर पढ़ाता रहा।

थोड़ी देर में मैनें उसे कुछ काम दे कर मैं चाय बनानें किचन में चला गया। मैं चाय लेकर जब किचन से वापस आया तो मेरी नज़र उसके कमर पर पड़ी। उसनें जींस और शोर्ट टोप पहनी हुयी थी। वो टेबल पर झुककर लिखनें के कारण पीछे से उसका टोप ऊपर उठ गया था। फिर मैं उसके बगल में आ कर बैठ गया। मेरा पूरा ध्यान उसके कमर पर था। जींस के कारण उसकी पैंटी भी दिखायी दे रही थी। मैं काफी उत्तेजित हो चुका था पर मैं अपनें आपको रोकनें की कोशिश कर रहा था क्योंकि वो मेरे बोस की बेटी थी और उमर में भी छोटी थी। फिर वो मुझसे प्रश्न पूछनें लगी। मैं उसको उत्तर दे रहा था पर मेरा ध्यान बार बार उसकी कमर पर जा रहा था। वो काफी मासूम थी। थोड़ी देर बाद वो घर चली गयी।

वो जानें के बाद मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे सामनें उसका फ़ीगर दिखायी दे रहा था। मेरा लंड भी काफ़ी खड़ा हो चुका था। मैं थोड़ी देर बेड पर आकर लेट गया। फिर मैं उठकर बाथरूम में गया और हाथ से हिलाकर अपनें आपको ठंडा कर लिया। रात को मेरे बोस का फोन आया और मेरी तारीफ़ कर रहा था कि मैनें उसके बेटी को बहुत अच्छे से पढ़ाया।

रात को मैं जब सोनें के लिये गया तो मेरे वाइफ़ के साथ सेक्स करते समय मुझे उसका ही चेहरा नज़र आ रहा था। मैनें मेरे वाइफ़ को वो समझके चोद दिया। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या हो रहा है। रात भर मैं उसके बारे में ही सोच रहा था। दूसरे दिन वो फिर से आनें वाली थी, दूसरे दिन वो जब आयी तो वो सलवार पहनें के आयी थी। मैनें थोड़ी देर उसको पढ़ाया फिर वो घर चली गयी। मेरी वाइफ़ भी मेरे पढ़ानें की तारीफ़ कर रही थी।

अगले हफ़्ते शनिवार को मैं उसका इन्तज़ार कर रहा था। जब वो आयी तो उसनें पैंट और शोर्ट टॉप पहन रखी थी। उसका फ़ीगर बहुत ही अच्छा था। फिर मैनें उसको पढ़ाना शुरु किया पर मेरा ध्यान उसके बदन को टटोलनें में ही था। थोड़ी देर वैसे ही टटोलता रहा और फिर मैनें हिम्मत कर के मेरा एक हाथ पीछे से उसके खुली कमर पर रखा और उसे प्यार से हाथ घुमाते हुये पढ़ानें लगा। वो भी काफ़ी इंटेरेस्ट से पढ़ रही थी। धीरे धीरे मैनें अपना हाथ उसके टोप के अंदर घुसा दिया और उसकी पीठ पर घुमानें लगा। मैं काफ़ी उत्तेजित हो चुका था और मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या कर रहा हूं।

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थोड़ी देर मैं वैसे ही हाथ घुमा रहा था, उसकी ब्रा के ऊपर से मैनें काफ़ी देर तक हाथ घुमाया। वो क्वश्चन हल करनें की कोशिश कर रही थी। मैनें धीरे से उसके चेहरे के तरफ़ देखा तो आंखें बंद कर कर धीरे से मुस्करा रही थी। जैसे कि उसको मज़ा आ रहा हो। फिर मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी और मेरा हाथ मैनें उसके बूब्स के ऊपर से घुमाना शुरु क्या। वोह धीरे धीरे सिसकियां लेनें लगी। फिर मैनें उसका हाथ पकड़ कर मेरे पैंट के ऊपर से लंड पर रख
दिया, उसनें अचानक अपना हाथ मेरे से छुड़ा लिया।

पर उसनें मुझे हाथ घुमानें से नहीं रोका। फिर मैनें उसके ब्रा के हुक खोल दिये और उसके टिट्स के ऊपर से हाथ घुमानें लगा। मुझे समझ में आ गया कि वो अभी काफ़ी उत्तेजित हुयी है। मैनें धीरे से उसके पैंट कि चैन खोल दी पर वो मुझे हाथ डालनें से रोक रही थी पर भी मैनें जबरदस्ती से अंदर हाथ डाल दिया और पैंटी पर से उसके चूत के साथ खेलनें लगा। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। फिर से मैनें उसका हाथ पकड़ लिया और मेरा लंड पैंट से बाहर निकल कर हाथ में थमा दिया। इसबार उसनें कोई विरोध नहीं किया और मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया। अभी भी वो नीचे देखते हुये धीरे से मुस्करा रही थी। ये सब ३० मिनट तक चला, पर इस बीच हमनें न नज़र मिलायी और न बात की। सब कुछ चुपचाप ही चल रहा था।

फिर मैनें उसकी तरफ देख कर उसको खड़ा रहनें के लिये कहा। वो मेरे तरफ़ पीठ कर के मेरे सामनें खड़ी हो गयी। मैनें उसको पीछे से पकड़ कर उसको चूमना शुरु किया। फिर मैं कुरसी पर बैठ गया और मैनें उसकी पैंट उतार दी। वो अभी भी मेरे तरफ़ पीठ करके ही खाड़ी थी। फिर मैनें उसके चूतडों को मसलना शुरु किया ।थोड़ी देर में मैनें उसकी पैंटी उतार दी वो अभी सिर्फ़ शर्ट पहनें हुई मेरे तरफ़ पीठ करके खड़ी थी। फिर मैनें मेरी पैंट उतारकर अपनें तनें
हुये लंड को हाथ में लिया और उसको उल्टा मेरे गोद में बिठा कर लंड पीछे से उसके जांघो में चूत के पास डाल दिया। वो वैसे ही चुप चाप बैठ गयी। मैं उसको टोप ऊपर उठाकर पीठ पर चूसनें लगा। दोनो हाथों से मैनें उसके बूब्स पकड़ लिये थे।

थोड़ी देर में मैं उसको बेडरूम लेकर गया। उसको बेड पर बिठाकर उसके बाजु में खड़ा हो गया। वोह अभी भी शरमा कर स्माईल दे रही थी। उसनें मुझसे कोई बात नहीं की न ही उसनें मना किया। फिर मैं अपना लंड उसके मुंह के पास ले गया और उसको मुंह में लेनें के लिये कहा। उसनें सिर हिलाकर न कहा। पर मैनें उसको फ़ोर्स करके मेरा लंड चूसनें के लिये मजबूर कर दिया। थोड़ी देर में वो सफ़ाई से चूसनें लगी। अब मैनें हाथ से
उसकी चूत को सहलाना शुरु किया। वो गीली थी। फिर मैनें उसको बेड पर लिटा कर उसकी दोनो टांगे फ़ैला दी। अब उसकी चूत पूरी तरह से दिखायी दे रही थी। फिर मैनें अपनी जीभ उसकी चूत में डाल कर चूसना शुरु किया। वो उत्तेजना के कारण छटपटानें लगी, उसनें मेरा सिर दोनो हाथों में पकड़ लिया था। थोड़ी ही देर में मेरा लंड पूरा टाइट हो चुका था।

अब मैनें उसको चोदनें की पोसिशन ले लिया। उसनें मुझे मना किया। उसनें कहा नहीं मैनें कभी किया नहीं है और मुझे दर्द होगा। मैनें उसको समझा बुझाकर अपना लंड जबरदस्ती चूत में डाल दिया। वो जोर से चिल्लायी। उसको काफ़ी दर्द हुआ था और थोड़ा खून भी बाहर आया था पर मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था। मैं उसके
ऊपर टूट पड़ा था। थोड़ी देर में उसनें अपनें दोनो हाथों से मेरी कमर पकड़ लिया और मुझे जोर जोर से खीचनें लगी। अब मेरी भी स्पीड बढ़ चुकी थी। अब मुझे समझ आ गया था कि अब उसको भी मज़ा आ रहा है।

फिर मेरे लंड जवब देनें में आया तो मैनें उसे बाहर निकाल कर अपना लावा उसके कमर पर डाल दिया। वो एकदम सैतिस्फाइड हुई थी। फिर मैनें उसको उठाकर बाथरूम में भेज दिया। बेड की चादर मैनें गायब कर दी और दूसरी डाल दी। थोड़ी देर में वो फ़्रेश हो कर कपड़े पहन कर आ गयी। वो फ़िर घर जानें निकली। मैनें उससे बात करनें की कोशिश की पर उसनें मुझसे कोई बात नहीं की। उसके जानें के बाद मुझे थोड़ा डर लगनें लगा। शयद वो किसी को बता दे।

अगले दिन वो क्लास को नहीं आयी तो मैं और डर गया था। ओफ़िस में बोस का बेहविओउर मेरे साथ नोर्मल था तो थोड़ा टेंशन कम हुआ। इसी बीच मुझे उसका कोई फोन नहीं आया। उस वीक शनिवार मेरी वाइफ़ ओफ़िस में जानें के बाद मैं कम्प्यूटर पर बैठ कर अपना काम कर रहा था। अचानक डोर बेल बजी। मैनें दरवाजा खोला तो सामनें वो खड़ी थी। उसनें शरमाते हुये स्माईल दी और अंदर आ गयी। मैनें अंदर से दरवाजा बंद करके उसके तरफ़ देखा तो वो मुझसे आकर लिपट गयी। आज मैं उसको सीधे बेडरूम ले कर गया।

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