loading...

“प्यासी रिंकू की प्यासी चुत का पानी निकाला”

Antarvasna sex stories, desi kahani, hindi sex stories, chudai ki kahani,

मेरा परिचय
========
दोस्तो, मेरा नाम रविकांत है, दोस्त मुझे ‘लॅंडधारी’ रवि के नाम से बुलाते हैं। मेरा लंड 9 इंच लम्बा और 2 इंच मोटा है। जब मेरा लंड खड़ा (टाइट) होता है तो ऐसा लगता है जैसे किसी घोड़े या किसी गधे का लंड हो । जिसके अन्दर जाये, उसकी चूत का पानी निकाल कर ही बाहर आता है, और वो लड़की या औरत मेरे इस लंबे, मोटे और पठानी लंड की दीवानी हो जाती है । आज तक मैंनें बहुत सी शादीशुदा और कुवांरियों की सील तोड़ी है।

पटकथा: (कहानी के बारे में) :
=====================================================
प्यासी रिंकू की प्यासी चुत का पानी निकाला
=====================================================

Story : कहानी:
===========

दोस्तो, मेरा नाम रविकांत है, यह बात सन 2008 की है, मैंनें एक कमरा लिया था किराए पर क्योंकि मैं नया था। वहाँ मैं एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में इंजिनीयर था। मैंनें कमरा दूसरी मंज़िल पर लिया ताकि मुझे कोई डिस्टर्ब ना कर सके। रोज़ सवेरे मैं ऑफ़िस निकल जाता था और शाम को देर से आता था।

मेरे मकान मलिक की बीवी करीब 40 साल की थी और एक लड़की थी जो करीब बीस साल की थी, नाम था भावना।

दिखनें में दोनों माँ और बेटी ग़ज़ब की थी। मकान मालकिन की फ़ीगर 38D:-28:-40 के लगभग होगा। उसका भरा हुआ बदन देख कर मेरे लण्ड में आग सी लग जाती थी। बिल्कुल चिकनी औरत थी वो ! मकान मालिक सरकारी नौकरी में था और शाम को देर से आता था। देखनें में वह अधेड़ उम्र का लगता था जैसे बिल्कुल झड़ गया हो।

क्योंकि मेरी नौकरी ऐसी थी कि मुझे सवेरे जाना पड़ता था और शाम को आता था इसलिए मैं उन लोगों से ज़्यादा बात नहीं करता था, कभी कभार ही हेलो होती थी। गुजराती थे इसलिए घर में शराब और सामिष खाना और लाना मना था। इसलिए मैं भी इन बातों पर बहुत ध्यान रखता था, कभी अगर बीयर पीनें का मन होता था तो बाहर से ही पीकर आता था।

धीरे धीरे मकान मालकिन से कभी कभार मुलाकात हो जाती थी। उसकी बेटी क्योंकि कॉलेज में पढ़ती थी इसलिए शाम को घर पर वो अकेली हो होती थी। एक शाम को मैं थोड़ा जल्दी आ गया घर पर और नीचे ही मकान मालकिन नें मुझे चाय पर निमंत्रण दिया। मैंनें पहले तो ना कर दी लेकिन फिर उसके आग्रह करनें पर मैं चाय के लिए हाँ कर दी। मैं अपनें कमरे में गया और अपनें कपड़े बदल कर आ गया। मैंनें एक टी:-शर्ट और बरमुडा पहन रखा था। मकान मालिकन नें मेरे घण्टी बजानें पर दरवाज़ा खोला तो मैं उसको देख कर दंग रह गया। उसनें एक बहुत ही पतला सा गाऊन पहन रखा था जिसमें से उसकी पेंटी साफ साफ दिखाई दे रही थी।

मैंनें उसे कहा:- भाभी जी ! आज तो बहुत गर्मी है ! और पंखा चला दिया। मकान मालकिन नें कहा:- हाँ, आज गर्मी तो बहुत है इसलिए मैंनें भी यह नया गाऊन पहन ही लिया !

मैंनें कहा:-
यह गाऊन तो बहुत ही अच्छा है !

यह बात सुन कर वो खुश हो गई और बोली:- रवि , अब मैं चाय बनाती हूँ आपके लिए !

और इतना बोलकर वो रसोई में चली गई। मैंनें उसे रसोई में जाते देखा तो दंग रह गया। क्या मस्त औरत थी , उसनें गाउन के नीचे कोई ब्रा भी नहीं पहन रखी थी। मैंनें सोचा शायद गर्मी ज़यादा है इसलिए पतला सा गाऊन पहना होगा।

पर अपनें लण्ड का क्या करता? वो तो लोहे से भी ज़्यादा सख़्त हो गया था। मैंनें सोचा कि आज कुछ बात आगे बढ़ा ली जाए। खैर भाभी जी चाय लेकर आ गई और हम दोनों नें बातें शुरू कर दी। भाभी जी नें पूछा:- रवि , आपनें अभी तक शादी क्यों नहीं की ?

मैंनें कहा:- भाभी जी, पहले मैं ज़िंदगी में कुछ बन जाऊं फिर शादी करूँगा। फिलहाल तो मैं अपनें करियर पर ध्यान दे रहा हूँ।

भाभी जी बोली:- यह पैसे कमानें के चक्कर में कहीं तुम्हारी उमर ना ढल जाय! फिर कोई लड़की भी नहीं मिलेगी।

मैंनें बोला:- भाभी जी, यह तो मेरी किस्मत है, अगर कोई लड़की नहीं मिलती तो कोई बात नहीं ! भाभी जी बोली:- नहीं रवि, अभी तुम्हारी उमर ज़्यादा नहीं है और फिर शरीर की ज़रूरत का भी तो तुम्हें ही ख्याल रखना है ! यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और बोला:- भाभी जी, शरीर की ज़रूरत का तो मैं खुद ही कोशिश करता हूँ पूरी करनें के लिए !

भाभी जी बोली:- देखो, यह जो तुम बात कर रहे हो, उससे तुम्हारा शरीर कमज़ोर हो जाएगा और फिर शादी के बाद कुछ नहीं कर सकोगे। भाभी जी की बात सुनकर मैं चौंक गया और मैंनें सोचा कि लोहा गरम है, लगता है कि आज काम बन ही जाएगा। मैंनें बोला:- भाभी जी, फिर आप ही बताइए कि मैं क्या करूँ ? फिलहाल तो मैं अपनें हाथ से ही काम चला लेता हूँ।

भाभी जी बोली:- क्यों तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या रवि ? उससे कुछ करते हो?

मैंनें बोला:- भाभी जी, इतना समय नहीं है कि कोई गर्लफ्रेंड बनाई जाय और फिर मैं फिलहाल अपनें करियर की तरफ़ ध्यान दे रहा हूँ।

भाभी जी बोली:- चलो कोई बात नहीं रवि ,, तुम कभी कभार अपनें दिल की बात तो मुझसे कर लिया करो। इससे तुम्हारा मन भी हल्का हो जाएगा और तुम्हारा ध्यान भी बंट जाएगा।

फिर मैंनें पूछा:- भाभी जी और सुनाएं ! भैया तो बहुत ही काम करते हैं ! दिन रात सिर्फ़ पैसे कमानें की कोशिश करते रहते हैं, वो तो आपका बहुत ही ख्याल रखते हैं।

यह सुनकर भाभी जी बोली:- अब क्या बताऊं रवि , तुमको ! जब से भावना हुई है, वो तो कुछ करते ही नहीं है। बस मैं भी तुम्हारी तरह ही हूँ, सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है मेरे पास, बस अधूरी सी बनकर रह गई हूँ। इन पैसो का क्या करूँगी जब मेरा कोई ख्याल ही नहीं रखता।

मैंनें हिम्मत कर के बोला:- भाभी जी, हम लोग ऐसा क्यों नहीं करते कि एक दूसरे का ध्यान रखें, मेरा मतलब हम लोग दोस्त भी तो बन सकते हैं ना?

भाभी जी बोली:- अच्छा, अब दोस्त भी बोलते हो और भाभी भी कहते हो? सबसे पहले तुम मुझे रिंकू कह कर बुलाओ ! इतनी औपचारिकता में पड़नें की ज़रूरत नहीं है।मैंनें कहा:- अच्छा रिंकू , चलो अब से हम दोस्त हो गये हैं। यह कह कर मैंनें रिंकू का हाथ पकड़ लिया और उसे प्यार से दबा दिया। रिंकू मेरी इस हरकत से गरम सी हो रही थी।

मैंनें कहा:- रिंकू , तुम बहुत सुंदर हो और मैं तो तुम्हारी वजह से ही इस घर में रहता हूँ, नहीं तो मैं अपनें ऑफ़िस के पास भी रह सकता था। इतनें दिनों से बस अपनें दिल की बात दिल में रख कर घूम रहा था। बहुत दिल करता था कि आपसे आ कर दोस्ती की बात करूँ लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं होती थी। मेरी नज़र में रिंकू तुम बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी औरत हो और मैं हमेशा तुम्हारे पति को बहुत ही खुशनसीब समझता हूँ जिसे तुम्हारे जैसे औरत मिली है।

रिंकू यह सब सुनकर बहुत खुश हुई और बोली:- अच्छा अब उनके आनें का समय हो गया है, तुम चाय ख़त्म करो और ऊपर अपनें कमरे में जाओ। मैं तुमसे कल बात करूँगी।

अगली सुबह लगभग साढ़े पाँच बजे मेरे दरवाजे की घंटी बजी और मैंनें दरवाज़ा खोला तो देखा कि रिंकू बाहर खड़ी है। वो मुझे अर्धनगन अवस्था में देख कर मुस्कुरा कर गुड मॉर्निंग बोलकर छत पर चली गई। मुझे कुछ समझ नहीं आया और जब वो नीचे जा रही थी तो उसे मैंनें अपनें कमरे में खींच लिया। वो बोली:- मैं तो सुबह सुबह छत पर पानी देखनें के बहानें से आई थी, सोचा कि तुमसे बात हो जाएगी, लेकिन तुम तो सोए हुए थे।

मैंनें बोला:- कोई बात नहीं रिंकू , आज मैं दिन में जल्दी आ जाऊंगा।

इतना सुनकर वो बोली:- रवि , मैं तुम्हें तुम्हारे ऑफ़िस में फ़ोन करूँगी, फिर तुम आ जाना।

मैं ऑफ़िस में एक ज़रूरी काम में व्यस्त था कि मेरे फोन की घण्टी बजी और उधर से आवाज़ आई:- वो घर पर नहीं हैं, पास किसी शादी में जाएंगे तो तुम जल्दी से आ जाओ।मैंनें जल्दी जल्दी अपना काम ख़त्म किया और घर पहुँच गया।

रिंकू बोली:- र वि , तुम पहले कमरे में जाओ, मैं नीचे ताला लगा कर आती हूँ।

मेरे घर में दो दरवाज़े होनें की वजह से एक दरवाज़े पर ताला लगा कर दूसरे दरवाज़े से अंदर जा सकते थे इसलिए मैंनें बड़ी ही चालाकी से ताला खोला और फिर दूसरे दरवाज़े से बाहर आकर मुख्य दरवाज़े पर ताला लगा दिया। कुछ देर बाद रिंकू मेरे दूसरे दरवाज़े से अंदर आई और फिर हम दोनों मेरे बेडरूम में चले गये।

मैंनें कुछ देर रिंकू से बातें की और कहा:- क्या मैं तुम्हारी पप्पी ले सकता हूँ?

इतना सुनकर रिंकू बोली:- इस में पूछनें की क्या बात है? अगर तुम कुछ नहीं करते तो मैं क्या वैसे ही तुम्हारे पास आई हूँ?

यह सुनकर मैंनें रिंकू को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों पर अपनें होंठ चिपका दिए। रिंकू नें साड़ी और ब्लाउज़ पहन रखा था और वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। मैंनें उसके होंठ चूसनें शुरू कर दिए और वो सिसकियाँ भरनें लगी। फिर मैंनें उसके बालों में हाथ फेरना शुरु किया और उसके कान पर मैंनें प्यार से अपनी जीभ फेर दी। रिंकू अब काफ़ी गरम हो चुकी थी। उसनें मेरी कमीज़ में हाथ दे दिया और मेरे शरीर को ज़ोर से अपनें हाथों से पकड़ लिया. मैंनें धीरे धीरे उसके ब्लाउज़ में हाथ डाला और अपना चेहरा ब्लाउज़ के ऊपर रख दिया।

रिंकू बोली:- ज़रा धीरज से काम लो ! यह सब तुम्हें ही मिलेगा !

मैंनें उसका ब्लाउज़ और साड़ी उतार दी और अपनी कमीज़ भी निकाल दी। फिर मैंनें रिंकू को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी ब्रा भी निकाल दी और उसके मम्मे चूसनें लगा। रिंकू अब मेरा साथ भरपूर दे रही थी और उसनें मेरे लण्ड को ज़ोर से दबा दिया और हिलानें लगी।

मैंनें बोला:- इतनी ज़ोर से हिलाओगी तो सब माल तो ऐसे ही निकल जाएगा !

मैंनें रिंकू की चूची चूसना शुरू किया और अपनें हाथ से उसकी पैन्टी निकाल दी और हाथ उसकी चूत पर फेरना शुरू कर दिया। रिंकू नें मेरी अंडरवीयर निकाल दी और मेरे लण्ड को प्यार से सहलानें लगी। मैंनें रिंकू की चूची से अपना मुँह हटाया और उसकी नाभि को चाटना शुरू किया। रिंकू अब बहुत गरम हो चुकी थी। मैंनें फिर धीरे धीरे अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया और उसे चाटनें लगा। रिंकू की सिसकी निकल गई और उसनें अपनी टाँगें फैला दी जिससे मैं उसकी चूत को अच्छी तरह से चाट सकूँ। रिंकू की योनि से नमकीन स्वाद आ रहा था और थोड़ी देर में उसनें मेरे अण्डकोश पकड़ कर मेरा सर ज़ोर से दबा दिया और वो जैसे झड़ गई।

रिंकू ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी और वो बोली:- अब से यह तुम्हारी है, इसका जो भी और जैसे भी इस्तेमाल करना है तुम कर सकते हो। मेरी बरसों की आग को तुम ही बुझा सकते हो।

मैंनें अब अपना लण्ड रिंकू के मुँह की तरफ किया और उसनें अपनें मुँह में ले लिया और चाटनें लगी। मैं एक बार फिर से रिंकू की चूत चाटनें लगा और अपनें जीभ रिंकू की चूत में जल्दी जल्दी चला रहा था।

रिंकू की सिसकियाँ निकल रही थी, उसनें मेरा लण्ड मुँह से बाहर निकाला और बोली” अब मुझसे नहीं रहा जाता, अब डाल दो इसे मेरे अंदर और मेरी प्यास बुझा दो। मुझे शांत कर दो मेरे हीरो !

मैंनें अपनें लण्ड का सुपारा रिंकू की चूत पर रखा और एक धक्के में मेरा मोटा लंड रिंकू की चूत में आधा चला गया। उसकी जैसे चीख सी निकल गई और बोली:- ज़रा धीरे धीरे मेरे राजा ! इसका मज़ा लेना है तो धीरे धीरे इसे अंदर डालो और फिर जब पूरा चला जाए फिर ज़ोर ज़ोर से इसे अंदर बाहर करो !

मैंनें अपनें लण्ड धीरे धीरे उसकी चूत में डाला और फ़िर एक ज़ोर से धक्का पेल दिया और मेरा मोटा लंड उसकी चूत में सारा चला गया।

रिंकू बोली:- आ उउई ऊफफफ्फ़ हमम्म्मम आआ मेरे राजा डाल दो अंदर पूरा का पूरा ! यह चूत तुम्हारी है, फाड़ दो इसे ! आअहह ऊऊऊऊओ आआहह ज़ोर से और ज़ोर से !

मैंनें अपनी स्पीड बढ़ा दी और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत पर वार कर रहा था। मैंनें उसके मम्मे मुँह में लिए और अपनी स्पीड और भी बढ़ा दी। लगभग दस मिनट के बाद हम दोनों की आह निकली और हम दोनों झड़ गये। रिंकू नें मुझे एक ज़ोर से पप्पी दी और हम लोग बाथरूम में साफ होनें के लिए चले गये। थोड़ी देर में रिंकू और मैंनें फिर से किस करना शुरू किया और इस बार रिंकू नें मेरा लण्ड अपनें मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। मैं पांच मिनट बाद में फिर से तैयार हो गया चुदाई करनें के लिए। मैंनें इस बार रिंकू को उल्टा लिटा दिया और उसके मम्मे को पीछे से पकड़ कर मैंनें अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। दोस्तो, इस पोज़िशन में लंड सीधा योनि में घुस जाता है और औरत को बहुत ही मज़ा आता है।

मेरी इस हरकत से रिंकू की चीख निकल गई, वो बोली:- आहह उउफफफफ्फ़ अफ ऊहह आआ ऊ हह आअहह बहुत दर्द हो रहा है, ऐसे लगता है कि तुमनें अपना लंड सीधा मेरे पेट में ही घुसा दिया है। ज़रा धीरे धीरे करो ना ! आहह बहुत मज़ा आ रहा है. अब तुम अपनी स्पीड बढ़ा सकते हो।

मैंनें उसकी कमर पकड़ कर उसे पेलना शुरू किया और अपनें घस्से ज़ोर ज़ोर से मारनें लगा लेकिन मेरा झड़नें का कोई हिसाब नहीं बन रहा था। मैंनें रिंकू से कहा:- लगता है कि मुझे समय लगेगा झड़नें के लिये !

रिंकू बोली:- कोई बात नहीं ! तुम लगे रहो, जब समय आएगा तब झड़ जाना !

मैंनें रिंकू की गाण्ड के नीचे एक तकिया लगाया और उसके ऊपर चढ़ गया। रिंकू की सिसकिया तेज़ हो रही थी, मैंनें काफ़ी कोशिश की पर मेरा लण्ड झड़नें को तैयार नहीं था।फिर मैंनें सोचा कि अगर मेरा लंड एक टाइट सी चीज़ में जाए तो शायद यह झड़ जाए। मैंनें धीरे धीरे अपनें लण्ड की रफ़्तार कम करी और रिंकू की गांड पर उसे फेरना शुरू किया। रिंकू शायद मेरा इशारा समझ रही थी, वो बोली:- क्या इरादा है? मेरी कुँवारी गांड मारनें का इरादा है क्या? यह तो तुम्हारी ही है लेकिन ज़रा प्यार से इस्तेमाल करना क्योंकि यह अभी बिल्कुल कुँवारी है।

मैंनें झटक से उसके गांड पर सुपारा रखा और ज़ोर से पेल दिया। मेरा मोटा लंड रिंकू की गांड में सिर्फ़ दो इन्च जाकर फँस गया और गोर की चीख निकल गई, बोली:- हाए, रवि, उफ़फ्फ़ आहह ! निकाल दो इसे बाहर ! बहुत दर्द हो रहा है, मर गई …एयेए हह आ आ आ !

मैंनें अपना लंड घबराकर बाहर निकाला और फिर धीरे धीरे उसे अंदर डालना शुरू किया, साथ में मैं अपनें हाथ से रिंकू के मम्मे दबा रहा था जिससे उसकी गरमी और बढ़ती जा रही थी। मैंनें लगभग चार इन्च लण्ड घुसा दिया था और फिर एक बार ज़ोर से झटका मारा और पूरा का पूरा लौड़ा उसकी गाण्ड में घुस गया। रिंकू अब मेरा भरपूर साथ दे रही थी। मैंनें रिंकू को ज़ोर ज़ोर से पेलना शुरू किया और उसकी टाइट गांड में मेरा लण्ड बहुत मज़े से चुदाई कर रहा था। फिर मैं कुछ देर बाद उसकी गांड में ही झड़ गया।

उस दिन के बाद हम दोनों को जब भी मौका मिलता था हम चुदाई करते थे।

loading...
error: Protected