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“पाप या परमसुख”-1

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हेल्लो दोस्तों,
Antarvasna, hindi sex storyमेरा नाम अंकित है | बहुत दिनों से कुछ लिखने का मन कर रहा था, आज आप लोगों के लिए एक कहानी शुरू कर रहा हूँ| इस फोरम में नया हूँ सभी दोस्तों से सहयोग अपेक्षित है..
तो दोस्तों कहानी का नाम है “पाप या परमसुख” निश्चित तौर पर ये कहानी ऐसे परमसुख की है जिसे दुनिया वाले पाप कहते हैं | अब कहानी पढ़ कर ये आप लोगों को निर्धारित करना है कि दुनिया का सबसे बड़ा पाप सच में पाप होता है या इसमें कोई सुख भी है….
आप लोगों की आज्ञा हो तो कहानी शुरू करूँ ?
ये कहानी एक उच्च-मध्यम वर्ग परिवार की है | इस परिवार में मुख्य सदस्य इस प्रकार हैं, अनिल (42), अनिल की पत्नी सारिका (38), उनका बेटा रोहित जो कि किशोर उम्र का था और जवानी की देहलीज पर कदम रख चुका था और उनकी एकलौती औलाद होने की वजह से बहुत लाडला है | अनिल दिल्ली में एक अच्छी सरकारी नौकरी में है | ये परिवार मूलतः उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के एक गाँव का रहने वाला है | गाँव में अनिल का छोटा भाई सुनील उसकी पत्नी कविता उनके दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी अपनी विधवा माँ हेमलता के साथ रहते हैं | गाँव में सुनील का परिवार खेती बाड़ी करता है |हर साल की तरह इस साल भी रोहित गर्मियों की छुट्टी में अपनी दादी के घर गाँव जाने की जिद करता है | मई का महिना है | अनिल भी अपने काम में इतना व्यस्त होता था कि अपनी पत्नी और बेटे को बिलकुल भी समय नहीं दे पाता था, वो काम से थोडा ब्रेक लेना चाहता है | अनिल ऑफिस से एक हफ्ते की छुट्टियाँ ले लेता है और अपने परिवार के साथ अपने पैत्रक गाँव पहुचता है | गाँव में गेंहू की फसल की कटाई का काम चल रहा होता है | चूँकि अनिल के परिवार की खेती बाड़ी अब सुनील ही संभाल रहा है तो सुनील उसकी पत्नी और उसके बच्चे भी खेतों में मजदूरों के साथ रात दिन जमे हुए हैं जिससे फसल की कटाई का काम जल्द से जल्द ख़त्म हो सके | अनिल की माँ हेमलता जिनकी उम्र अब 57-58 के लlगभग होगी वो घर पर ही रूककर घर के कामकाज संभालती हैं | इस उम्र में भी हेमलता काम काज की वजह से एकदम स्वस्थ और सुन्दर है और अपनी उम्र से छोटी लगती है |अनिल, सारिका और रोहित को गाँव आया देखकर पूरा परिवार बहुत खुश होता है | रोहित तो अपने चचेरे भाई बहन से मिलकर ख़ुशी से फुला नहीं समाता | अब दिन चड़ने वाला होता है तो अनिल, सुनील और उसकी पत्नी खेत चले जाते हैं और बच्चे, उनकी दादी और सारिका घर में ही रूकते हैं | पुरे घर में बच्चों के खेल से हंसी ख़ुशी छा जाती है, रोहित को इतना खुश देखकर उसकी माँ और दादी भी बहुत खुश होते हैं | दोपहर के समय खाना लेकर राहुल और मीनू के साथ रोहित भी खेत जाता है और फिर रात में 9 बजे तक सब लोग एक साथ घर लौटते हैं | हेमलता और सारिका रात का खाना तैयार रखते हैं फिर पूरा परिवार मिलकर खाना खता है | गाँव में बिजली बहुत कर समय रहती है और रात में तो सिर्फ 2 घंटे के लिए मिलती है इसलिए सब लोग जल्दी से खाना ख़त्म कर के घर के आगन में बैठते हैं और बातें करते हैं | अब रात ज्यादा होने लगती है तो बच्चों को नींद आने लगती है | गर्मियों में गाँव में ज्यादातर लोग गर्मी से राहत के लिए घर के आगन में ही बिस्तर लगा के सोते हैं | सुनील के घर का आगन भी बहुत बड़ा है वो बाहर ही जमीन पर बिस्तर लगाता है और तीनों बच्चे और कविता एक साथ सो जाते हैं | हेमलता की आदत कमरे में ही सोने की है तो वो अपने कमरे में सोने चली जाती है | सारिका भी शहर में रहने वाली है तो वो भी दुसरे कमरे में सोना पसंद करती है, और रोहित को नींद में ही उठा कर अपने साथ दुसरे कमरे में ले जाती है | अनिल और सुनील दोनों भाई आगन में ही सोते हैं |
रात के समय गाँव में बिजली नहीं होने के कारण बहुत अँधेरा होता है और कुछ भी देख पाना बहुत मुश्किल होता है | खेत में काम की थकान की वजह से सब लोग बहुत जल्दी गहरी नींद में सो जाते हैं | रात में सारिका की नींद जोर की प्यास लगने के कारण खुल जाती है | सारिका अँधेरे में सँभलते हुए रसोई की तरफ बढ़ती है रसोई में करोसीन के तेल का एक लैंप जल रहा है जो कि हेमलता के कमरे और रसोई के बीच की खिड़की पर रखा है | सारिका मटके से पानी निकालकर पीती है अचानक उसका ध्यान गाँव के सन्नाटे के बीच आ रही हल्की हल्की आवाजों की तरफ जाता है | सारिका थोडा और ध्यान से सुनने की कोशिश करती है, तो उसे समझ आता है कि वो आवाजें उसकी सास हेमलता के कमरे से आ रही है जो की रसोई से लगा हुआ है | सारिका रसोई और हेमलता के कमरे की खिड़की की तरफ बढ़ती है और खिड़की से कमरे के अन्दर झांकती है | खिड़की में रखे लैंप की रोशनी थोडा रसोई और थोडा हेमलता के कमरे तक जा रही है | उस लैंप की रोशनी में सारिका को कुछ ऐसा दिखता है कि उसके होश उड़ जाते हैं | उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं होता |
एक अधेड़ उम्र की औरत अपनी टागें फैलाई खाट पर लेटी हुई है और उसके ऊपर एक उससे कम उम्र का आदमी चढ़ा है | औरत की जांघों के बीच उस आदमी के चूतड ऊपर नीचे हो रहे हैं | खाट इस तरह से लगी थी कि दोनों का सर आगे और पैर वाला हिस्सा पीछे की तरफ था जिससे कि सारिका उनके पैर वाला हिस्सा ठीक से देख पा रही थी, लेकिन उनका चेहरा ठीक से दिखाई नहीं दे रहा है |
जो दृश्य सारिका के सामने था उसमे आदमी का लंड औरत की बड़ी सी चूत के अन्दर बाहर हो रहा था औरत आदमी को जोर से कसे हुए थी और अपनी टांगो को आदमी की टांगो से फंसा रखी थी | आदमी लंड को कभी धीरे तो कभी तेज़ी से चूत में घुसेड रहा है और औरत कभी आदमी की पीठ तो कभी उसके सर के बालों को सहला रही है |

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