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“नेहा दीदी की चुदाई”

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हैलो, मेरा नाम सुधाकर है और मैं उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का रहनें वाला हूँ. मेरे घर के वाले घर में मेरे चाचा चाची रहते हैं, वो मेरे सगे चाचा नहीं है बल्कि पड़ोसी होनें के नाते हमारे परिवारों के प्रगाढ़ सम्बन्ध है तो मैं उन्हें चाचा चाची कहता हूँ.
उनकी एक लड़की है नेंहा! वो बहुत हॉट है. मैं उसे चोदना चाहता था. उसका घर और मेरा घर एकदम अगल-बगल में था, हमारी छतें भी मिली हुई थीं.. बीच में कोई भी दीवार नहीं है… यूं समझिए कि एक ही छत है.

जब वो हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ती थी, तब की बात है, गर्मियों के दिन थे, रात का समय था और सब लोग छत पर सोये हुए थे. हम दोनों के मतलब मेरा और नेंहा का बिस्तर अगल बगल में था.
आधी रात लगभग 12 बजे मेरी नींद खुल गई. मैंनें चाँद की हल्की रोशनी में देखा कि नेंहा सो रही थी और देखनें में बहुत मस्त लग रही थी.

मैंनें धीरे से अपनी चारपाई खिसका कर उसकी चारपाई से एकदम जोड़ ली और लेट गया. फिर बहुत हिम्मत करके अपना हाथ उसके पेट पर रखा और वो नहीं हिली, तो मैं अपना हाथ बढ़ा कर उसके चूची पर ले गया और चूची के ऊपर रख दिया. वो अब भी नहीं हिली, तो मेरा मनोबल और बढ़ गया.

क्या मस्त चूची थी उसकी.. अभी एकदम छोटी चीकू जितनी थी.

फिर मैं बहुत हिम्मत करके अपना हाथ सलवार के ऊपर से ही अपनी चचेरी बहन की चूत के ऊपर ले गया. नेंहा की चुत पर हाथ रखते ही मुझे एकदम गर्मी सी महसूस हुई. उसकी चुत का उभार भी अच्छा था. वह एकदम बेसुध सोई हुई थी. मेरी हिम्मत बढ़ गई थी. मैं अपना हाथ नेंहा की सलवार के अन्दर डालनें लगा. मैंनें धीरे से पैंटी की इलास्टिक उठाई और हाथ अन्दर कर दिया. हाथ के अन्दर जाते ही जन्नत की नर्म घास सी महसूस हुई.. उसकी चुत पर छोटे-छोटे मखमली बाल उगे थे. उसकी फूली सी चूत उसके दोनों पैरों के बीच में छिपी थी.

मैंनें हिम्मत करके दोनों पैरों को फैला कर चूत को छुआ, आह.. क्या मस्त चूत थी.

फिर मैंनें चूत को फैला कर अपनी उंगली डालनें लगा, इतनें में नेंहा जग गई. मैंनें तेजी से अपना हाथ निकाला और सो गया.

वो उठी, इधर-उधर देखा, उसनें अपनी सलवार में हाथ डाल कर देखा और फिर अपनी चारपाई मुझसे कुछ दूरी पर अपनी मम्मी के पास ले जाकर सो गई.
मैं डर गया था लेकिन फिर मैं भी सो गया.

सुबह सुबह नेंहा सिर के पास बैठकर मुझे जगानें लगी… मैं डर के मारे नहीं उठा, सोनें का अभिनय करता रहा.
फिर जब सब उठ कर चले गए तो उसनें मुझे जबरदस्ती उठा कर कहा- आप मेरे भाई हैं, आपको मेरे साथ ऐसा करनें में शर्म नहीं आती क्या?
उसनें मुझे बहुत गाली दीं. फिर लगभग दो साल तक उससे मेरी बोलचाल नहीं रही. इसके बाद मेरे गाँव में कई शादियां पड़ीं, तब भी उसकी मुझसे कोई बातचीत नहीं होती थी.

इसके बाद पहली शादी मेरे बगल के भईया की हुई, उसमें मेरी नेंहा से बातचीत चालू हो गई.

उसनें मुझसे कहा- मैं आपको बहुत मानती थी भाई, पर आप नें मेरा विश्वास तोड़ा है.
मैंनें कहा- ऐसी बात नहीं है.
फिर उसनें कहा- तो कैसी बात है?
मैंनें कहा- समय पर बताऊंगा.
उसनें कहा- ठीक है.

फिर मैंनें मेरे गाँव के एक लड़के जो मेरा पक्का यार था, से उससे कहलवाया कि सुधाकर तुमसे बहुत प्यार करता है.
तब नेंहा नें मुझसे पूछा- क्या आप सच में मुझसे प्यार करते हैं?
मैंनें कहा- हाँ.
तो उसनें कहा- तब कहनें में डरते क्यों हो.

वो इतना कह कर चली गई. फिर मेरी बातचीत फोन के माध्यम से भी होनें लगी. मैं उसको अपनी गाड़ी से स्कूल भी छोड़नें जानें लगा था.
एक दिन उसनें मुझे छत पर बुलाया और कहा- मुझे किस करो.
मैं जैसे ही किस करनें को हुआ, उसकी मम्मी आ गईं और मैं भाग गया. बहुत दिन के बाद होली आई. हम दोनों नें मन्दिर में जा कर खून से माँग भर के शादी कर ली और अपनें-अपनें घर चले गए.

जब बाद में उसका फोन आया, तब मैंनें कहा- शादी तो हो गई.. अब सुहागरात कब होगी?
उसनें कहा- जब तुम कहो.
मैंनें कहा- गाली तो नहीं दोगी?
उसनें कहा- नहीं.
तब मैंनें कहा- ठीक है तुम बगीचे में आ जाओ.

वो आ गई, फिर मैं और वो साथ-साथ एकदम झाल में चले गए और एक घनें पेड़ के बीच में बैठ कर बातें करनें लगे. हम दोनों बात करते-करते आपस में एकदम सट गए और किस करनें लगे.
नेंहा को किस करते हुए मैंनें कहा- मुझे दूध पीना है.
उसनें कहा- लो पी लो.

फिर मैंनें वैसे ही उसकी समीज उठा कर ब्रा खोल दी.. अगले ही पल उसकी दोनों चूचियां बाहर आ गईं.

मैंनें नेंहा की चूचियों में मुँह लगा दिया और दूध पीना शुरू कर दिया. उसकी चूचियां एकदम टाइट थीं. वो चूचियों की चुसाई एकदम मदहोश हो गई थी. फिर मैंनें अपनी तौलिया बिछाई और उसको उस पर लिटा कर उसकी समीज और ब्रा निकाल दिए. अब मैं आराम से नेंहा के दूध पीनें लगा.

फिर मैंनें कहा- अपनी सलवार भी खोल दो.
उसनें पहले तो मना किया, फिर मान गई और बोली- क्या करोगे?
मैंनें कहा- मुझे सिर्फ देखना है.

फिर मैंनें नेंहा की सलवार और कच्छी खोल दी. अब नेंहा मेरे सामनें एकदम नंगी पड़ी थी. वो एक हाथ से चूची और एक हाथ से चूत को ढके हुए थी.
वो कुछ रुआंसी सी हो रही थी और कह रही थी- मैं बहुत गलत कर रही हूँ.

फिर मैंनें उसके पैरों को फैला कर चूत को देखा. मैंनें पहली बार किसी की चूत देखी थी.. एकदम रसीली चिपचिपी सी चुत थी.. शायद नेंहा की चुत झड़ चुकी थी.

मेरा शरीर भी उत्तेजना से कांप रहा था और वो भी कांप रही थी. मैंनें आव देखा न ताव और उसकी चूत को चाट कर साफ कर दिया. मैं चुत का सारा पानी पी गया और दोनों हाथों से नेंहा की चूचियों को दबानें लगा. मैं अपनें मुँह से चूत के दानें को चूसनें लगा. आज नेंहा की चूत पर एक भी बाल नहीं था.

अब नेंहा एकदम गर्म हो गई थी क्योंकि उसकी चूत से लगातार रस गिर रहा था और मैं उसकी चुत चाटे जा रहा था. नेंहा के मुँह से लगातार ‘आह.. आह..’ की आवाज आ रही थी. वो कह रही थी- बस बस.. रुक जाओ.. मैं बहुत गलत कर रही हूँ.
मैंनें कहा- सब ऐसे ही करते हैं.

मैंनें अपना लंड निकाला मेरा लंड एकदम छोटा हो गया था. खड़ा ही नहीं हो रहा था, ऐसा लग रहा था कि पहली बार चूत देख कर डर गया था.

लेकिन मैं अपना लंड नेंहा की चूत पे रख कर जोर लगानें लगा और वो चिल्लानें लगी- प्लीज मुझे जानें दो.. तुम्हें मेरी कसम. लेकिन मैंनें उसे जकड़ लिया और जोर से प्रयास करनें लगा. वो तेज आवाज में रोनें लगी और कहनें लगी- बहुत दर्द हो रहा है.

इतनें में उसका भाई दूर से उसे खोजनें के लिए बुलानें लगा. उसनें कहा- अभी जानें दो.. बाद में जो कहोगे मैं करूँगी, पर अभी जानें दो.

मेरी भी फट गई थी, सो मैंनें उसे जानें दिया. उसनें एक एक करके सारे कपड़े पहनें, फिर चली गई. मेरी चुदाई अधूरी रह गई थी इसके बाद नेंहा मुझसे अकेले में मिलनें से डरनें लगी थी

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