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“निशु की कुँवारी चुत की देसी चुदाई”

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मैं आपको अपनें जीवन की रास लीला सुनानें जा रहा हूँ | दोस्तों मैं मनोज इंडिया के दिल मध्य प्रदेश के सागर का रहनें वाला हूँ. मेरी उमर 38 साल रंग गोरा मजबूत कद-काठी और 6″4″ लम्बा हूँ. मुझे मजलूम की मदद करनें मैं बड़ी राहत मिलती है और नर्म दिल हूँ|

जैसा की अक्सर कहानियो में होता है कि कहानी का कैरेक्टर के ऑफिस की दोस्त या पड़ोसन या रिश्तेदार वाली कोई बुर (जिसको मैं प्यार से मुनिया कहता हूँ ) मिल जाती है उसे तुरन्त चोदनें लगता है, पर हकीकत इससे कही अधिक जुदा और कड़वी होती है एक चूत चोदनें के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है ऐसी एक कोशिश की यह कहानी है|
हमारा शहर सागर प्राकृतिक सुन्दरता और हिल्स से घिरा हुआ है| यह एक बहुत ही सुंदर लैक है और यहाँ के लोग बहुत ही संतुष्ट और सीधे सादे हैं| पर यहाँ की महिलायें बहुत चुदक्कड़ है यह मैंनें बहुत बाद में जाना| मैं क्रिकेट और फुटबॉल का नेंशनल प्लेयर रहा हूँ इस कारण से अपनें एरिया में बहुत मशहूर था और सुंदर कद काठी और रूप रंग गोरा होनें के कारण हैंडसम भी दीखता था. लेकिन मुझे अपनें लन्ड की प्यास किसी न किसी के बारे मैं सोच कर और अपनी मुट्ठ मार कर या अपना तकिये को चोदकर बुझानी पड़ती थी मैं अपनी हेल्पिंग हब्बिट्स के कारण भी बहुत मशहूर था और सभी मुझे प्यार भी इसीलिए बहुत करते थे|
मेरे घर के सामनें ग्राउंड है जहा मैं खेलते हुए बड़ा हुआ और अपनें सभी सपनें सन्जोए| एक दिन हम कुछ दोस्त मोर्निंग एक्सर्साईज करके आ रहे थे तभी सामनें से आती हुई 3 लड़कियों पर नज़र पड़ी| उनमे से दो को मैं चेहरे से तो जानता था कि वो मेरे घर के आस पास रहती है| तीसरी से बिल्कुल अनजान था और वो कोई ख़ास भी नहीं थी. हम दोस्त अपनी बातों में मस्त दौड़ लगाते हुए जैसे ही उनके पास पहुचे तो बीच वाली लड़की मेरे को बहुत पसंद आई. मैं सिर्फ़ बनियान और नेंक्कर मैं था तो मेरे सारे मस्सल्स दिखाई दे रहे थे जिससे शायद वो थोडी इम्प्रेस हुई उसनें भी मुझे भरपूर नज़र देखा. मेरा ध्यान उस लड़की पर लगा होनें से मैं नीचे पत्थर नही देख पाया और ठोकर खाकर गिर पड़ा वो तीनो लड़कियां बहुत जोरों से हंस पड़ी और भाग गई. मुझे घुटनों और सर में बहुत चोट लगी थी काफ़ी खून बहा था इस कारण मैं कुछ दिन अपनी मोर्निंग एक्सर्साईज के लिए दोस्तों के पास नही जा पाया.
ठंडों का मौसम चल रहा था हमारे मोहल्ले मैं एक शादी थी. मेरी हर किसी से अच्छी पटती थी इसलिए मेरे बहुत सारे दोस्त हुआ करते थे. उस शादी में मैं अपनें ऊपर एक जिम्मेदार पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए बहुत काम कर रहा था. और मैं जयादातर महिलाओं के आस पास मंडराता कि शायद कोई पट जाए या कोई लिंक मिल जाए मुनिया रानी को चोदनें या दर्शन करनें के| पर किस्मत ख़राब. कोई नही मिली. मुझ से किसी खनकती आवाज नें कहा ” सुनिए आप तो बहुत अच्छे लग रहे है आप और बहुत मेहनत भी कर रहे है यहाँ ”
मैंनें जैसे ही मुड़कर देखा तो वो ही बीच वाली लड़की जिसको देखकर मैं गिरा था और जिसके कारण मेरे सर पर अभी भी पट्टी बंधी हुई थी जिसमे 3 टाँके लगे हुए थे और घुटनें का भी हाल कुछ अच्छा नही था…
मैंनें देखा वो खड़ी मुस्कुरा रही थी. मैंनें कहा “आ आप… आपनें मेरे से कुछ कहा”
” ही यहाँ ऐसे बहुत सारे लोग है जो मेरे को देख कर रोड पर गिरकर अपना सर फ़ुड़वा बैठे” वो अपनी सहेलियों से घिरी चहकती हुई बोली|
“आप लोग तो हंस कर भाग गई… मेरे सर और पैर दोनों मैं बहुत चोट लगी थी|” मैंनें कहा|
मेरे ही मोहल्ले की एक लड़की ज्योति जिसे मैं पहले पटानें की कोशि्श कर चुका था पर वो पटी नहीं थी बल्कि मेरी उससे लडाई हो गई थी.
ज्योति नें मेरे से मुह चिड़ाते हुए कहा इनको ” च्च्च च्च छक… अरे!! अरे!! बेचारा… मनोज भैया अभी तक कोई मिली नही तो अब लड़कियों को देख कर सड़कों पर गिरनें लगे ” और खिल खिला कर हंस दी…
मैंनें ज्योति के कई सपनें देखे मैं ज्योति को अपनी गाड़ी पर बिठाकर कही ले जा रहा हूँ उसके दूध मेरी पीठ से छु रहे है वो मेरे लंड को पकड़ कर मोटरसाईकिल पर पीछे बैठी है उसके बूब्स टच होनें से मेरा लंड खड़़ा हो जाता है तो मैं धामोनी रोड के जंगल मैं गाड़ी ले जाता हूँ जहा उसको गाड़ी से उतार कर अपनें गले से लिपटा लेता हूँ उसके लिप्स, गर्दन बूब्स पर किस कर रहा हूँ और उसके मम्मे दबा रहा हूँ साथ ही साथ उसकी मुनिया(बुर) को भी मसल रहा हूँ वो पहले तो न नुकर करती है लेकिन जब मैं उसकी मुनिया और बूब्स उसके कपडों के ऊपर से किस करता हूँ और उसकी सलवार खोल कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी पेशाब को चाटनें लगा ज्योति भी सीई हीई येः क्या कर रहे हो… मैं जल रही हूँ मुझे कुछ हो रहा है… कह रही है और मैं ज्योति को वहीं झाडियों मैं जमीन पर लिटाकर चोदनें लगता हूं| पहले ज्योति का पानी छूटता है फिर मेरा.. जब ख्वाब पूरा हुआ तो देखा लंड मेरा मेरे हाथ मैं झड़ चुका है और मुट्ठी मारनें से लंड लाल हो गया है
मुझे बहुत बुरा लगा ज्योति के तानों से मेरी बे-इज्ज़ती हुई थी वहाँ से मैंनें इन दोनों को सबक सिखानें का ठान लिया. मैंनें गुलाब जामुन का शीरा उसकी बैठनें वाली सीट पर लगा दिया जिससे उसकी सफ़ेद ड्रेस ख़राब हो गई और वो ऐन मौके पर गन्दी ड्रेस पहनें यहाँ वहाँ घूमती रही और लोग उसे कुछ न कुछ कहते रहे| पर उसका चेहरा ज्यों का त्यों था .. मैंनें ज्योति को उसके हाल पर छोड़ कर अपनें टारगेट पर कन्स्न्ट्रेट करनाउचित समझा
मैं उससे जान पहचान करना चाहता था जब से उसको देखा था उसके भी नाम की कई मूठ मारी जा चुकी थी और तकिये का कोना चोदा जा चुका था.. मेरा तकिये के कोनें मेरे स्पेर्म्स के कारण कड़क होना शुरू हो गई थे. पर कोई लड़की अभीतक पटी नहीं थी.
इसबार मैंनें हिम्मत करके उसका नाम पूछ लिया. जहा वो खाना खा रही थी वहीं चला गया और पूछा “आप क्या लेंगी और… कुछ लाऊँ स्वीट्स या स्पेशल आइटम आपके लिए…
भीड़ बहुत थी उस शादी मैं वो मेरे पास आ गई और चुपचाप खड़ी होकर खाना खानें लगी. मैंनें उसको पूछा “आप इस ड्रेस मैं बहुत सुंदर लग रही है.. मेरा नाम मनोज है आपका नाम जान सकता हूँ…” फिर भी चुप रही वो और एक बार बड़े तीखे नैन करके देखा. हलके से मुस्कुराते हुए बोली” अभी नही सिर्फ़ हाल चाल जानना था सो जान लिया”
मैंनें उसका नाम वहीँ उसकी सहेलियों से पता कर लिया और उसका एड्रेस भी पता कर लिया था. उसका नाम निशु था. वो मेरे घर के ही पास रहती थी. पंजाबी फॅमिली की लड़की थी. सिंपल सोबर छरहरी दिखती थी. उसकी लम्बाई मेरे लायक फिट थी उसके बूब्स थोड़े छोटे 32 के करीब होंगे और पतला छरहरा बदन तीखे नैन-नक्श थे उसके. वो मेरे मन को बहुत भा गई थी. शादी से लौट के मैंनें उस रात निशु के नाम के कई बार मुट्ठ मारी. मैं उसको पटानें का बहुत अवसर खोजा करता था वो मेरे घर के सामनें से रोज निकलती थी पर हम बात नही कर पाते थे. ऐसा होते होते करीबन 1 साल बीत गया.
एक बार मैं दिल्ली जा रहा था गोंडवाना एक्सप्रेस से. स्टेशन पर गाड़ी आनें मैं कुछ देर बाकी थी शादियों का सीज़न चल रहा था काफ़ी भीड़ थी. मेरा रिज़र्वेशन स्लीपर में था. तभी मुझे निशु दिखी, साथ में उसका भाई और सभी फॅमिली मेम्बेर्स भी थे| उसके भाई से मेरी जान पहचान थी सो हम दोनों बात करनें लगे. मैंनें पूछा “कहा जा रहे हो” तो बोले “मौसी के यहाँ शादी है दिल्ली मैं वहीँ जा रहे है”.
मुझ से पूछा ” मनोज जी आप कहा जा रहे हो”
मैंनें कहा ” दिल्ली जा रहा हूँ थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी अटेण्ड करनी है”
इतनें में ट्रेन आनें का अनौंसमेंट हो चुका था| उनके साथ बहुत सामान था, मेरे साथ सिर्फ़ एक एयर बैग था उन्होंनें मेरे से सामान गाड़ी में चढानें की रेकुएस्ट करी गाड़ी प्लेटफोर्म पर आ चुकी थी यात्री इधर उधर अपनी सीट तलाशनें के लिए बेतहाशा भाग रहे थे बहुत भीड़ थी. निशु के भाई नें बताया की इसी कोच में चढना है तो हम फटाफट उनका सामान चढानें मैं बीजी हो गए. उनका सामान गाड़ी के अंदर करके उनकी सीट्स पर सामान एडजस्ट करनें लगा मैंनें अपना बैग भी उन्ही की सीट पर रख दिया था मुझे अपनी सीट पर जानें की कोई हड़बड़ी नही थी क्योंकि बीना जंक्शन तक तो गोंडवाना एक्सप्रेस मैं अपनी सीट का रिज़र्वेशन तो भूल जाना ही बेहतर होता है. क्योंकि डेली पैसेन्जर्स भी बहुत ट्रेवल करते है इस ट्रेन से सो मैं उनका सामान एडजस्ट करता रहा.
गाड़ी सागर स्टेशन से रवाना हो चुकी थी. मैं पसीनें मैं तरबतर हो गया था. अब तक गाड़ी नें अच्छी खासी स्पीड पकड़ ली थी. निशु की पूरी फॅमिली सेट हो चुकी थी और उनका सामान भी. गाड़ी बीना 9 बजे रात को पहुचती थी और फिर वहा से दूसरी गोंडवाना मैं जुड़ कर दिल्ली जाती थी. इसलिए बीना मैं भीड़ कम हो जाती है. मैं सबका सामान सेट करके थोड़ा
चैन की साँस लेनें कम्पार्ट्मेन्ट के गेट पर आ गया फिर साथ खड़े एक मुसाफिर से पूछा “यह कौन सा कोच है ” उसनें घमंडी सा रिप्लाई करते हुए कहा एस 4… तुम्हें कौन सो छानें ( आपको कौन सा कोच चाहिए)” “अरे गुरु जोई चानें थो… जौन मैं हम ठाडे है… (बुन्देलखंडी) (यही चाहिए था जिसमे हम खड़े है)”
मैंनें अपनी टिकेट पर सीट नम्बर और कोच देखा तो यही कोच था जिसमे निशु थी बस मेरी बर्थ गेट के बगल वाली सबसे ऊपर की बर्थ थी. बीना मैं मैंनें हल्का सा नाश्ता किया और घूमनें फिरनें लगा. मुझे अपनें बैग का बिल्कुल भी ख्याल नही था. बिना से गाड़ी चली तो ठण्ड थोडी बढ़ गई थी मुझे अपनें बैग का ख्याल आया. मैं उनकी सीट के पास गया तो मैंनें “पूछा मेरा बैग कहा रख दिया.” निशु की कजिन बोली ” आप यहाँ कोई बैग नही छोड़ गए आप तो हमारा सामान चढवा रहे थे उस समय आपके पास कोई बैग नही था” जबकि मुझे ख्याल था की मैंनें बैग निशु की सीट पर रखा था. वो लोग बोली की आपका बैग सागर मैं ही छूट गया लगता है.
मैंनें कहा कोई बात नही. उन्होंनें पूछा कि आपकी कौन सी बर्थ है मैंनें कहा इसी कोच मैं लास्ट वाली. निशु की मम्मी बोली “बेटा अब जो हो गया तो हो गया जानें दो ठण्ड बहुत हो रही है ऐसा करो मेरे पास एक कम्बल एक्स्ट्रा है वो तुम ले लो”
मैंनें कहा “जी कोई बात नहीं मैं मैंनेंज कर लूँगा”
” ऐसे कैसे मनेंज कर लोगे यहाँ कोई मार्केट या घर थोड़े ही किसी का जो तुमको मिल जाएगा ठण्ड बहुत है ले लो” निशु की मम्मी नें कहा.
“मुझे नींद वैसे भी नहीं आना है रात तो ऐसे ही आंखों मैं ही कट जायेगी..” मैंनें निशु की ऑर देखते हुए कहा. निशु बुरा सा मुह बनके दूसरे तरफ़ देखनें लगी.
ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर दौडी जा रही थी. मुझे ठण्ड भी लग रही थी तभी निशु की मम्मी नें कम्बल निकालना शुरू किया तो निशु नें पहली बार बोला. रुको मम्मी मैं अपना कम्बल दे देती हूँ और मैं वो वाला ओढ लूंगी. निशु नें अपना कम्बल और बिछा हुआ चादर दोनों दे दी… मुझे बिन मांगे मुराद मिल गई क्योंकि निशु के शरीर की खुशबू उस कम्बल और चादर मैं समां चुकी थी. मैं फटाफट वो कम्बल लेकर अपनी सीट पर आ गया
… मुझे नींद तो आनें वाली नहीं थी आँखों मैं निशु की मुनिया और उसका चेहरा घूम रहा था. मैं निशु के कम्बल और चादर को सूंघ रहा था उसमे से काफी अच्छी सुंगंध आ रही थी. मैं निशु का बदन अपनें शरीर से लिपटा हुआ महसूस करनें लगा और उसकी कल्पनों मैं खोनें लगा.. निशु और मैं एक ही कम्बल मैं नंगे लेटे हुए है मैं निशु के बूब्स चूस रहा हूँ और वो मेरे मस्त लौडे को खिला रही है. मेरा लंड मैं जवानी आनें लगी थी जिसको मैं अपनें हाथ से सहलाते हुए आँखे बंद किए गोंडवाना एक्सप्रेस की सीट पर लेटा हुआ निशु के शरीर को महसूस कर रहा था.
जैसे जैसे मेरे लंड मैं उत्तेजना बढती जा रही थी वैसे वैसे मैं निशु के शरीर को अपनें कम्बल मैं अपनें साथ महसूस कर रहा था. इधर ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर थी मैं निशु के बूब्स प्रेस करते हुए उसके क्लिटोरिस( चूत के दानें) को मसल रहा था और उसके लिप्स और गर्दन पर लिक करता हुआ निशु के एक-एक निप्प्ल को बारी बारी चूस रहा था.. इधर निशु भी कह रही थी अह्ह्ह हह सीईई ओम्म्म मम् बहु्त अच्छा लग रहा है मैं बहुत दिन से तुमको चाहती हूँ मनोज… जबसे तुमको देखा है मैं रोज तुम्हारे नाम से अपनी चूत को ऊँगली या मोमबत्ती से… चोदती हूं…उम् म… आ अ अ अ… तुम्हारा लंड तुम्हारे जैसा मस्त है उम् म म म बिल्कुल लम्बा चोडा मनोज… उम् म म आ अअ अआ जल्दी से मेरी चूत में अपना लन्ड घुसा दो अब सहन नही हो रहा उ मम म आया अ अ अ !
मैं एक झटके में निशु की बुर मैं लंड पेल कर धक्के मारनें लगा ट्रेन की रफ्तार की तरह के धक्के… फटाफट जैसे निशु झड़ रही हो उम् मम् मनोज…मेरी बुर र… सी पेशाब… निकलनें वाली ही तुम्हारे लंड नें मुझे मूता दिया मेरी पहली चुदाई बड़ी जबरदस्त हुई उम् म आ अ अ जैसे ही निशु झडी मैं भी झड़नें लगा मैं भूल गया की मैं ट्रेन मैं हूँ
और सपनें मैं निशु को चौद्ते हुए मुट्ठ मार रहा हूँ और मैं भी आ आया… हा ह निशु… ऊऊ मजा आ गया मैं कब से तुमको चोदना चाहता था कहते हुई झड़नें लगा और बहुत सारा पानी अपनें रुमाल मैं निकाल कुछ निशु के चादर मैं भी गिर गया.
जब मैं शांत हुआ तो मेरे होश वापिस आए और मैंनें देखा कि मैं तो अकेला ट्रेन मैं सफर कर रहा हूँ.. शुक्र है सभी साथी यात्री अपनी अपनी बेर्थ्स पर कम्बल ओढ कर सो रहे थी. ठण्ड बहुत तेज़ थी उस पर गेट के पास की बर्थ बहुत ठंडी लगती है अब मुझे पेशाब जानें के लिए उठाना था मैं हाफ पेंट में सफर करता हूँ तो मुझे ज्यादा दिक्कत नही हुई.. अब तक रात के 1.30 बज चुके थे मैं जैसे ही नीचे उतरा तो मुझे लगा जैसे निशु की सीट से किसी नें मुझे रुकनें का संकेत किया हो निशु की सीट के पास कोच के सभी यात्री गहरी नींद मैं सो रहे थे और ट्रेन अभी 1 घंटे कही रुकनें वाली नही थी. मैंनें देखा निशु हाथ मैं कुछ लिए आ रही है.. मेरे पास आकर बोली “बुधू तुम अपना बैग नहीं देख सके मुझे क्या संभालोगे” ठंड मैं ठिठुरते हो…”
मैंनें उसकी बात पर ध्यान नही दिया उसनें क्या मेसेज दे दिया मैं रिप्लाई दिया ” मैं तुम्हारे कम्बल मैं तुम्हारी खुशबू लेकर मस्त हो रहा था” मैं अपनें लंड के पानी से भरा रुमाल अपनें हाथ मैं लिए था. जिसको देख कर वो बोली “यह क्या है” मैंनें कहा ” रुमाल है”.
“यह गीला क्यों है” निशु नें पूछा ” ऐसे ही… तुम्हारे कारण… कह कर मैंनें टाल दिया…
निशु नें पूछा “मेरे कारण कैसे…” फिर मुझे ध्यान आया की अभी अभी निशु नें मुझे कुछ मेसेज दिया है…
मैंनें निशु को गेट के पास सटाया और उसकी आंखों मैं देखते हुए उसको कहा निशु आई लव यू और उसके लिप्स अपनें लिप्स मैं भर लिए उसके मम्मे पर और गांड पर हाथ फेरनें लगा. निशु भी मेरा किस का जवाब दे रही थी…
मैं निशु के दूधों की दरार मैं चूसनें लगा था और बूब्स को दबा रहा था… मेरा लंड जो आधा बैठा था फ़िर से ताकत भरनें लगा और उसके पेट से टकरानें लगा.. निशु मेरे से बोली आई लव यू टू.. इधर कोई देख लेगा जल्दी से इंटर कनेंक्ट कोच की और इशारा कर के कहनें लगी उस कोच के टॉयलेट मैं चलो…
हम दोनों टॉयलेट में घुस गए… टॉयलेट को लाक करते ही मैं उसको अपनें से लिपटा लिया और पागलों की भाति चूमनें लगा.. निशु मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुमको दिलो जान से चाहता हूँ…
हाँ! मेरे राजा मनोज मैं भी तुम्हारे बिना पागल हो रही थी… जानते हो यह प्रोग्राम कैसे बना दिल्ली जानें का…मेरे आनें का मैं तुम्हारे घर आई थी मम्मी के साथ तुम्हारी मम्मी और मेरी मम्मी संकट मोचन मन्दिर पर रामायण मंडल की मेंबर है.. तो उन्होंनें बताया की मनोज को परसों दिल्ली जाना ही तो वो नही जा सकती उनके साथ. तब मैंनें भी मम्मी को प्रोग्राम बननें को कह दिया मैंनें कहा यह कहानी छोड़ो अभी तो मजा लो
मैंनें उसको कमोड शीट पर बिठा दिया और उसके पैर से लेकर सर तक कपडों के ऊपर से ही चूसनें चूमनें लगा… मैंनें उसकी चूत पर हाथ रखा वो “सी ई ईई आई वहाँ नही वहाँ कुछ कुछ होता है जब भी तुमको देखती हु मेरी अंदर से पेशाब निकल जाती है वहाँ नही” ऐसा कहनें लगी
मैंनें कहा “मुझे विश्वास नही होता मुझे दिखाओ ” ऐसा कहकर मैं सलवार के ऊपर से उसकी अंदरूनी जांघ और बूब्स पर हाथ से मालिश करनें लगा
” हट बेशरम कभी देखते है लड़कियों की ऐसे वो शादी के बाद होता है ” निशु बोली
मैंनें निशु के बूब्स को सहलाते हुई और उसकी अंदरूनी जांघ पर चूमते हुए उसकी चूत की तरफ़ बदनें लगा और कहा ” ठीक है जैसा तुम कहो पर मैं कपड़े के ऊपर से तो चेक कर लूंगा”” निशु भी अब गरमानें लगी थी उसकी चूत भी काफ़ी गर्म और गीली होनें लगी थी. वो अपनें दोनों पैरो को सिकोड़ कर मेरे को चूत तक पहुचनें से रोक रही थी… ” प्लीज़ वहाँ नही मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी अपनें आप, को कुछ हो जायेगा… मेरी कजिन के भरोसे आई हूं उसको पटा रखा है मैंनें| यदि कोई जाग गया तो उसकी भी मुसीबत हो जायेगी प्लीज़ मुझे जानें दो अब…”
मैंनें निशु के दोनों पैर अपनी ताकत से फैलाये और उसकी सलवार की सिलाई को फाड़कर उसकी पिंक पैंटी जो की उसके चूत के रस मैं सराबोर थी अपनें मुह में ले लिया… उसकी पैंटी से पेशाब की मिलीजुली स्मेल के साथ उसके पानी का भी स्वाद मिल रहा था…
मैंनें पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को जोरो से चूसना चालू कर दिया.. निशु कहे जा रही थी” प्लीज़ नो ! मुझे जानें दो उई मा मैं कंट्रोल खो रही हूं उम् मम मम् मुझे जानें दो… और.. जोर से चाटो मेरी पेशाब में कुछ हो रहा है बहुत अच्छा लग रहा है मेरे पेट में गुदगुदी हो रही है निशु के निप्पल भी खड़े हो गए थी क्योंकि उसकी कुर्ती मैं हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल रहा था निशु मेरे सर को अपनी चूत पर दबाये जा रही थी… उम्म मैं निशु की पैन्टी को चूत से साइड में खिसका के उसकी चूत को चूत की लम्बाई में चूस रहा था|
निशु अपनें दोनों पैर टॉयलेट के विण्डो पर टिकाये मुझसे अपनी चूत चटवा रही थी निशु की बुर बिल्कुल कुंवारी थी मैंनें अपनी ऊँगली उसकी बुर मैं घुसेदी बुर बहुत टाइट और गीली थी निशु हलके हलके से करह रही थी ” उम्म्म आआ मर गई” मैं निशु की बुर को ऊँगली से चोद रहा था और चूत के दानें को चाट और चूस रहा था.. सलवार पहनें होनें के कारण चूत चाटनें मैं बहुत दिक्कत हो रही थी.
निशु की चूत झड़नें के कगार पर थी” आ आअ कुछ करो मेरा शरीर अकड़ रहा है पहले ऐसा कभी नही हुआ मेरी पेशाब निकलनें वाली ही अपना मुह हटाओ और जोर से चूसो अपनी उंगली और घुसाओ आअ आ| उई माँ आअ अ… उसकी जवानी का पहला झटका खाकर मेरे मुह को अपनें चूत के अमृत से भरनें लगी… निशु के मम्मे बहुत कड़क और फूल कर 32 से 34 होगये मालूम होते थे… इधर मेरी हालत ज्यादा ख़राब थी… मैंनें निशु को बोला प्लीज़ एक बार इसमे डाल लेनें दो निशु नें कहा ‘ अभी नही राजा मैं तो ख़ुद तड़प रही हूँ तुम्हारी पेशाब अपनी पेशाब मैं घुसवानेंको.. उम्म्म सुना ही बहुत मजा आता है और दर्द भी होता है ”
मैंनें कहा “अपन दोनों के पेशाब के और भी नाम है ” “मुझे शर्म आती है वो बोलते हुई” और वो खड़ी होनें लगी मैं कमोड शीट पर बैठा और अपनी नेंक्कर नीचे खिसका दी मेरा हल्लाबी लंड देखकर उसका मुह खुला का खुला रह गया.
“हाय राम… ममम म इतना बड़ा और मोटा…तो मैंनें कभी किसी का नही देखा
मैंनें पूछा “किसका देखा है तुमनें… बताओ ”
मेरे भैया जब भाभी की चुदाई करते है तो मैं अपनें कमरे से झाँक कर देखती हूँ.. भाभी भइया के इससे अद्धे से भी कम साइज़ के पेशाब में चिल्लाती है फ़िर इस जैसी पेशाब मैं तो मेरा क्या हाल करेगी… मैं कभी नही घुसवाउंगी”
मैंनें कहा अछा “मत घुसवाना, पर अभी तो इसको शांत करो”
“मैं कैसे शांत करू” निशु नें कहा|
मैंनें कहा “टाइम बरबाद मत करो, जल्दी से इसे हाथ मैं लो और मेरी मुट्ठ मारो” मैंनें उसका हाथ पकड़ कर अपनें लंड पर लगाया और आगे पीछे करवाया. पहले तो निशु थोड़ा हिचकी फिर बोली ” तुम्हारा लंड बहुत शानदार है मेरी चूत में फ़िर से खुजली होनें लगी है…हीई सीइई मैई इ इक्या करू ओम मम म फ्लिच्क कक्क ” एक ही झटके मैं मेरा सुपाडा उसनें किसी आइसक्रीम कोण की तरह चूस लिया मैं जैसे स्वर्ग में पहुच गया मैंनें उसके मुह में धक्के मारे मैंनें कहा मेरा पानी निकलनें वाला है.
” मेरी चूत फ़िर से गरम हो गई है इसका कुछ करो सी ई इ आअ आ अ…” निशु सिसकारियां भर रही थी मैंनें निशु को फौरन कमोड शीट पर बैठाया और उसकी कुर्ती का कपड़ा उसके मुह मैं भर दिया… जिससे लंड घुसनें पर वो चिल्लाये नही मैंनें उसको समझाया भी थोड़ा दर्द होगा सहन करना .. मैंनें उसकी दोनों टांगें फैली और चूत चाटी दो ऊँगली उसकी चूत मैं भी घुसी उसकी चूत बहुत टाइट थी और बहुत गीली लिसलिसी सी गरम थी. निशु कसमसा रही थी ” हीई इ सी ई इ इ इ अब जल्दी करो.. मेरे बदन मैं करोड़ों चीटियाँ घूम रही है मेरी बुर को ना जानें क्या हो गया है” निशु नें कुर्ती मुह से निकाल कर कहा.
मैंनें अपनें लन्ड पर बहुत सारा थूक लगाया और कुछ उसकी गीली चूत मैं भी लगाया जिससे उसकी चूत के लिसलिसे रस से मेरा थूक मिलकर और चूत को चिकना कर दे… मैंनें लंड हाथ मैं लेकर सुपाडा निशु की चूत मैं ऊपर नीचे रगडा .. निशु अपनी गांड उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी अब वो बिना लंड डलवाए नही रह सकती थी
उसनें मेरे लन्ड को पकड़ा और अपनी बुर पर टिकाया मैंनें पहले थोड़ा सा सुपाडा अंदर कर उसको अंदर बाहर कर एडजस्ट किया… मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे लण्ड को किसी जलते हुए चमड़े के क्लंप मैं कस दिया हो. इतनी टाइट बुर थी निशु की मैंनें थोडी और लंड अंदर पेला निशु की मुह मैं यदि कुर्ती ना घुसाई होती तो पूरे कम्पार्टमेंट के यात्री हमें चुदाई करते हुए पकड़ लेते…
निशु मेरे मोटे लंड के कारन अपना सिर इधर उधर हिलाकर और अपनी आंखों से आंसू निकाल कर बता रही थी की उसको कितना दर्द हो रहा है… मैं थोडी देर रुक कर फाटक से एक गहरा और चूत फाड़ धक्का पेला जिससे निशु की बुर की झिल्ली फटी और लौड़ा उसकी गहराई तक समां गया निशु की तो हालत ख़राब हो गई थी.. मैंनें थोड़ा रुक कर लंड बाहर खींचा तो उसके साथ खून भी बहर आया और फटा फट धक्के मारनें लगा.
निशु की टाइट चूत के कारण मेरे गेंदों मैं उबाल आना शुरू हो गया था.. मैंनें मौके की नजाकत को ताड़ते हुए पहले लंड बाहर निकाला और गहरी साँस लेकर अपनी पोस्शन कंट्रोल करी और निशु के मुह से कुर्ती हटी और फिर धीरे धीरे पूरा लंड घुसा कर शुरू मैं हलके धक्के मारे फ़िर ताबड़ तोड़ धक्के लगाए.
मैं अपनी स्पीड गोंडवाना एक्सप्रेस से मिला रहा था…” निशु की बुर पानी छोड़नें वाली थी क्योंकि उसनें अपनी कुर्ती वापिस अपनें मुह में डाल ली थी और निशु की बुर मेरे लौडे को कसनें लगी थे मैं निशु के 32 से 34 साइज़ हुए मम्मे मसलता हुआ चुदाई कर रहा था.. निशु बहुत जोरो से झडी तभी मेरे लण्ड नें भी आखिरी सांसे ली तो मैंनें निशु के दोनों मम्मे पूरी ताकत से भीचते हुए अपना लौड़ा निशु की टाइट बुर मैं आखिरी जड़ तक पेल दिया और निशु की बूर को मैंनें पहला वीर्य का स्वाद दिया निशु भी बहुत खुश हो गई थी. जब साँस थमी तो मैंनें लन्ड निशु की बुर से बाहर निकाल जिससे निशु की बुर से मेरे वीर्य के साथ निशु की बुर से जवानी और कुंवारापन का सबूत भी बहकर बाहर आ रहा था.
मैंनें निशु को हटाया और कमोड में पेशाब करी निशु बड़े गौर से मेरे लंड से पेशाब निकलते देखते रही और एक बार तो उसनें मुह भी लगा दिया. उसका पूरा मुह मेरे पेशाब से गीला हो गया कुछ ही उसके मुह में जा पाया मैंनें अपना लंड धोया नही उस पर निशु की बुर का पानी और जवानी की सील लगी रहनें दिया और नेंक्कर के अंदर किया निशु की बुर मैं सुजन आ गई थी मैं इंतज़ार कर रहा था की अब निशु भी अपनी बुर साफ़ करेगी तो नंगी होगी तो उसनें मुझे बाहर जानें को बोला. मैं उसकी बात मानकर उसको अपना रुमाल बताकर आ गया. मैंनें अपनी घड़ी मैं टाइम देखा तो हम लोगो के सवा घंटा गुजर गया था टॉयलेट में… शुक्र है भगवन का कि ठंड के कारण कोई नही जागा था और ट्रेन भी नही रुकी थी. थोडी देर बाद निशु अपनी बुर पर हा्थ फेरती हुई कुछ लड़खड़ाते हुए बाहर आई मैंनें पूछा क्या हाल है जानेंमन तुम्हारी बुर के ” सुजन आ गई है पर चुदवानें मैं बहुत मजा आया फ़िर से चुदवानें का मन कर रहा है
” ये लो यह रूमाल तुम वहाँ छोड़ आए थे| स फक्स…इसमे यह क्या लगा है लिसलिसा” यह वोही रुमाल था जिसमे मैंनें निशु के नाम की मुट्ठ मारी थी अपनी सीट पर लेते हुए वोही मुझे देनें लगी. “इसमे वोही लिसलिसा है तो अभी तुम्हारी मुनिया मैं मेरे लंड नें उडेला है… और तुम क्या लिए हो” मैंनें निशु को कहा… उसनें पहले सूंघा फूले कहनें लगी ” ये मेरी पैंटी ही… ख़राब हो गई थी तो मैंनें निकाल ली.. और तुम्हारा रुमाल मैं ले जा रही हूँ इसे अपनें साथ रखूँगी और तुम्हारे पानी का स्वाद लेकर इसे सूंघकर सो जाउंगी.. तुम दिल्ली में कहाँ रुकोगे.. और किस काम से जा रहे हो” निशु नें मेरे से पूछा| तुम अपनी पैंटी मुझे दो मैंनें निशु से कहा फिर बताउंगा कि मैं कहाँ और क्यों जा रहा हूँ. पहले तो निशु मुझे घुड़की “तुम क्या करोगे मेरी गन्दी पैंटी का” मैंनें कहा ” वोही जो तुम मेरे रुमाल के साथ करोगी और मैं तुम्हारी पैंटी अपनें लंड पर लपेट कर मुट्ठ भी मारूंगा” उसनें मेरे को चुम्मा देते हुए कहा “पागल” और अपनी पैंटी मुझे दे दी मैंनें वहाँ जहाँ उसकी बुर रहती है उसको अपनी नाक से लगाया और जीभ से चाटा तो निशु शर्मा गई
मैंनें निशु को बताया की मुझे दिल्ली में थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी है इतना सुनकर वो कुछ आश्वस्त हुई. मैंनें कहा तुम मेरा सेल नम्बर ले लो मेरे को फ़ोन कर लेना मैं बता दूँगा की कहा पर रुकुंगा और हम कैसे और कब मिलेंगे यह भी बता देंगे.
निशु मेरा रुमाल लेकर अपनी सीट पर आ गई और मैं अपनी सीट पर. अब मेरा बैग भी आ गया था सो मैंनें बैग मैं से एयर पिल्लो निकाल और अपनें सिराहनें रख कर निशु को याद करनें लगा मेरा मेरा लंड फ़िर से खड़ा होनें लगा सो मैंनें सीट पर लेटकर निशु की पैंटी सूंघनें लगा उसमे से निशु की पेशाब और उसके पानी की स्मेल आ रही थी. उस स्मेल नें कमाल ही कर दिया मेरा लंड फंफनाकर बहुत कड़क हो गया मैंनें निशु की पैंटी का वो हिस्सा जो

कि उसकी चूत से चिपका रहता था मैंनें फाड़ लिया और बाकी की पैंटी लेटे लेटे ही लंड पर लपेट ली नेंक्कर के अंदर मैंनें निशु को सपनें में चोदते हुए और उसकी बुर की खुसबू सूंघते हुए उसकी पेशाब भरी पैंटी को चाटते हुए मुठ मारनें लगा मैंनें अपना सारा पानी निशु की फटी हुई पैंटी और अपनी चड्डी मैं निकाल दिया 3 बार झड़नें के कारण पता ही नही चला की कब मैं सो गया”
सुबह मुझे एहसास हुआ की कोई मुझे जगा रहा है.. तो मैंनें आँख खोलते हुए पुछा कौन है गाड़ी कौन से स्टेशन पर खड़ी है… मुझे जगानें वाला मेरा साला निशु का भाई था बोला ” मनोज जी उठिए निजामुद्दीन पर गाड़ी खड़ी है पिछले 15 मिनट से सभी आपनें घर पहुच गए आप अभी तक सोये हुए हूँ” मैं फटाफट उठा और अपना सामान बटोरा वैसे ही हाथ में लिया और प्लेटफोर्म पर उतर आया. वहा सबसे पहले मेरी नज़र मेरी नई चुदैल जानेंमन निशु पर पड़ी वो बिल्कुल फ्रेश लग रही थी. उसके चेहरे से कतई ऐसा नही लग रहा थी कल रात को मैंनें इसी ट्रेन मैं निशु की बुर का अपनें हल्लाबी लंड से उदघाटन किया था और उसकी सील तोडी थी
प्लेटफॉर्म पर बहुत ठण्ड थी| सुनहरी धूप खिली थी मैं टीशर्ट और नेंक्कर मैं खड़़ा था. मैंनें निशु का कम्बल और चादर तह कर के उनको सौंपे और उनका धन्यवाद दिया मैं अपनें एयर पिल्लो की हवा ऐसे निकाल रहा था जैसे निशु के दूध दबा रहा हूँ और यह निशु को और उसकी कजिन को दिखा भी रहा था.
मैंनें उन लोगों से पूछा कि आप कहा जायेंगे निशु का भाई बोला हमको सरोजिनी नगर जाना है और आपको कहा जाना है.

मुझे भी सरोजिनी नगर जाना था वहा पर मेरे दोस्त की शादी है… मैंनें उन लोगों को जवाब दिया.
मैंनें कहा मेरे साथ चलिए… मुझे लेनें गाड़ी आई होगी बाहर…वो लोग बोले नही नहीं आप चलिए हम बहुत सारे लोग है और इतना सारा समान है, आप क्यों तकलीफ करते है…
मैंनें कहा इसमे तकलीफ जैसे कोई बात नही हम आखिर एक ही मोहल्ले के लोग है इसमे तकलीफ क्यों और किसे होनें लगी फ़िर गाड़ी में अकेला ही तो जाउंगा यह मुझे अच्छा नही लगेगा. निशु की कजिन धीमे से बोली रात की मेहनत सुबह रंग ला रही है… और मुझे निशु को देखकर हलके से मुसकुरा पड़ी. हम सभी बाहर आए तो देखा कि एक टाटा सूमो पर मेरे नाम की स्लिप लगी हुई थी मैंनें निशु के भाई और मम्मी से कहा की देखिये किस्मत से मेरे दोस्त नें भी बड़ी गाड़ी भेजी है. इसमे हम सब और पूरा सामान भी आ जाएगा.
गाड़ी में सारा सामान लोड कर सभी को बैठा कर गाड़ी रिंग रोड पर निकलते ही मैंनें गाड़ी साइड मैं रुकवाई और एक पी सी ओ में घुस गया वहा से अपनें दोस्त को फ़ोन किया कि यार मेरे लिए एक रूम का अलग अरेंजमेन्ट हो सकता है क्या… उसनें पूछा क्यों… मैंनें कहा देखा तेरे लौडे का इन्तेजाम तो कल हो गया तू कल ही चूत मारेगा मैं अपनें लिए अपनी चूत का इन्तेजाम सागर से ही कर के लाया हूँ… रात में ट्रेन में मारी थी चूत पर मजा नही आया| तसल्ली से मारना चाहता हूँ.
मेरा दोस्त बोला ” मनोज भाई तुमसे तो कोई लड़की पटती नही थी यह एक ही रात में तुमनें कैसे तीर मार लिए और तुमनें उसे चोद भी डाला!
मैंनें कहा बोल तू कर सकता है तो ठीक नही तो मैं होटल जा रहा हूं| मुझे मेरे दोस्त नें आश्वस्त करा दिया कि वो ऐसा इन्तेजाम कर देगा.
मैं फ़ोन का बिल देकर गाड़ी मैं बैठा और इंतज़ार करानें के लिए सभी को सॉरी बोला और ड्राईवर को चलनें का हुकुम दिया…मैंनें पूछा आप लोग सरोजिनी नगर मैं किसके यहाँ जायेंगे…निशु की मम्मी बोली ” बेटा मेरी बहिन के लड़के की शादी है… कल की मिस्टर कपूर… रोहन कपूर…
” ओह फ़िर तो मजा ही आ गया भाई” मैं उछलता हुआ बोला.. सब मेरे को आश्चर्य भरी निगाहों से देखनें लगे सो मैं आगे बोला ” वो.. वो.. क्या है की मुझे भी कपूर साहब के बेटे यानि सुमित की शादी मैं जाना है..
बातों बातों में कब सुमित का घर आ गया पता ही नही चला… पर मैं सुमित से आँख नही मिला पा रहा था.. जब सब घर के अंदर चले गए तो मैंनें ड्राईवर को रुकनें को बोला और अपना बैग गाड़ी मैं छोड़ कर सुमित को बुलानें उसके घर मैं गया… सुमित आकर मेरे से लिपट गया.. बहुत खुश था सुमित पर मैं उससे आँख नही मिला पा रहा था मैंनें सुमित को एक तरफ़ ले जाकर बोला ” देख यारा बुरा मत मानियो .. तुम्हारे यहाँ मेहमान बहुत है मैं ऐसा करता हूँ कि मैं और सुधीर मेरा एक और दोस्त दोनों होटल मैं रुक जाते है..”
मेरा इतना कहते ही सुमीत के चेहरे के भाव बदल गए.. सुमित नें कहा ” देख भाई मनोज मैं जानता हूँ की तुम होटल क्यों जा रहे हो यार कोई बात नही तुमनें राधा (निशु की कजिन) को चोद दिया तो क्या हुआ.. इससे कोई फर्क नही पड़ता.. यदि तुम निशु को भी चोद देते तो इसमे कोई दिक्कत नही थी मैं भी उसको चोदना चाहता था पर मौका नही मिला या मेरी हिम्मत नही हुई.. इसे दिल पे मत ले यार” मौज कर यारा मैंनें तेरे लिए स्पेशल रूम का अरेंजमेन्ट किया है वो भी तुम्हारी डार्लिंग के साथ वाले रूम में|
यह सुनकर मेरी जान में जान आई. मैं सुमित को क्लीयर कर देना चाहता था की मैं राधा नही निशु को चोदना चाहता हूँ.” सो मैंनें कहा मैंनें निशु को चोदा है ट्रेन में… और उसको ही तसल्ली से चोदना चाहता हूं..
सुमित बोला ” सेक्सी तो राधा थी पर तुमनें निशु को कैसे चोद लिया.. वो बधाई हो माई बोय…तभी निशु थोड़ा लंगडा के चल रही थी. तुमनें तो ऑफिस में अपनी मैडम को भी तगड़ा चोदा था जबकि वो शादी शुदा थी वो तो 2 दिन चल फ़िर भी नही सकी थी”
” तुम दोनों दरवाजे पर ही बातें करते रहोगे क्या? सुमित इसे इसके कमरे में पहुंचा दो .. कैसे हो मनोज बेटा” कहते हुए सुमित के पापा आ रहे थे…
मैंनें उनके पैर छुए और उनसे थोडी बातें करी. फ़िर सुमीत मेरे को अपनें रूम मैं ले गया.. सुमीत के पिता बहुत बड़े बिज़नस मैंन थे| बहुत बड़ा बंगला था उनका सुमीत नें मुझे सेकंड फ़लूर पर जहा सिरफ़ 3 ही कमरे थे और निशु वगैरह भी वहीं रुके थे रूम फिक्स किए थे.. रूम बहुत शानदार था एक डबल बेड, टी वी, वी सी डी प्लेयर, फ़ोन सब कुछ था|
सुमित बोला ” क्यों मनोज कैसा लगा मेरा इन्तेजाम तुम्हारी चूत भी तुम्हारे बगल में है और एक खास बात बताऊ मैं- निशु की बाथरूम तुम्हारी बाथरूम से अटैच्ड है बीच में दरवाजा है आओ मैं तुमको दिखा दू उसनें मेरे को वो दूर दिखा दिया और कैसे खुलता है वो भी दिखा दिया मैं वहाँ से निशु के बाथरूम मैं पहुच सकता था और वहाँ से उसके रूम मे. अच्छा चल तैयार होजा और फटाफट नीचे आजा साथ नाश्ता करेंगे ..
मैं सुमित को बोला ” सुमित तो निशु की चूत की खुशबू लेना चाहेगा ?”
सुमित नें कहा कैसे मैंनें निशु की पैंटी का वो फटा हिस्सा उसको दिखाया और उसको सूंघनें को दे दिया.. मैं और सुमित पहले भी कई लड़कियां साथ मिलकर चोद चुके थे उसको चूत की स्मेल के बारे में पता था बहुत अच्छी है रे मनोज निशु की बुर तो मैं तो उसकी बुर के नाम पर मुट्ठ ही मारता रह गया पर तुनें मेरे लन्ड का बदला ले लिया.. यह सब बातें बात बाथरूम में ही हो रही थी… सुमित मेरे रूम से चला गया
घर में काफ़ी हो हल्ला हो रहा था सो मैंनें रूम लाक करके टीवी ओं कर दिया और नंगा होकर फ्रेश होनें और नहानें बाथरूम मैं घुस गया. बढ़िया गर्म पानी से नहानें लगा तभी मुझे दीवार पर कुछ टकरानें की आवाज आई| मैंनें शोवेर बंद किया तो उस तरफ़ निशु नहा रही लगता महसूस हो रही थी… मैंनें…धीरे से दरवाजा खिसकाया जो की बिना किसी आवाज के सरकता था तो देखा एक बिल्कुल जवान नंगा जिस्म शोवेर में मेरी तरफ़ पीठ किया अपनी बुर मैं साबुन लगा रहा था मैं भी मादरजात नंगा था मेरे लंड को चूत का ठिकाना का एहसास होते ही उछाल भरनें लगा मैंनें आव देखा ना ताव सीधा जाकर उसके मुह पर हाथ रखा जिससे वो डरकर ना चिल्ला पाए और उसकी गांड के बीच मैं अपना हल्लाबी लौदा टिकते हुए उसकी पीठ से चिपक गया.
मेरी पकड़ जबरदस्त थी इसलिए वो हिल भी नही पाई मैंनें शोवेर के नीचे ही उसके कानो में कहा कहो जानेंमन अब क्या इरादा है चलो एक बार फिर से चुदाई हो जाए और मैं उसकी चूत पर हा्थ फिरनें लगा उसनें अपनी बुर मैं साबुन घुसा रखा था वो साबुन से अपनी चूत चोद रही थी मैंनें कहा यह जगह साबुन रखनें की नही लन्ड रखवानें की है और मैं उसके चूत के दानें को मसलनें लगा.
पहले तो उसनें टाँगे सिकोडी पर दानें को मसलनें से वो गरमा गई थी उसनें अपनी टाँगे ढीले छोड़ दी मैंनें अभी तक उसका मुह ताकत से बंद कर रखा था मैंनें कुछ देर इसकी पोसिशन मैं उसकी बुर का दाना मसला और फ़िर मैंनें अपनी बीच वाली ऊँगली उसकी बुर के हौले मैं घुसा दी… बहुत गरम और टाइट चूत थी.. मैंनें अपनी ऊँगली से उसकी बुर को चोदनें लगा था, वो मस्तानें लगी थी थी और उसकी बुर पनियानें लगी वो हिल रही थी अपनी गांड भी जोरो से हिला रही थी|
मैंनें अपनी ऊँगली को उसकी बुर मैं तेज़ी से पेलना शुरू कर दिया यानि की स्पीड बड़ा दी इधर मेरा हल्लाबी लौड़ा जो की उसकी मदमाती गांड मैं फसा हुआ था फनफना रहा था उसकी भी बुर गरमा गई थी.. तभी उसनें अपनें एक हाथ मेरी उस हथेली पर रखा जिससे मैं उसकी बुर को चोद रहा था फ़िर उसनें अपना हाथ मेरे लौडे को छूनें के लिए नीचे लगाया वो सिर्फ़ मेरे सुपाडे को ही टच कर पाई वो छटपटा रही थी
बहुत गरम और टाइट चूत थी.. तभी वो अपनें दोनों हाथो से मेरा हाथ अपनें मुह से हटानें की नाकाम कोशिश करनें लगी. मुझे उसकी यह हरकत ठीक नही लगी तो मैं उसे बाथरूम से खीच कर अपनें बेडरूम मैं ले आया और उसको उल्टा ही बेड पर पटक दिया जैसे ही वो पलटी मेरे होश फ़ाखता हो गए वो राधा थी…
मैंनें उसको चुप रहनें का इशारा किया और अपनें टीवी की आवाज थोडी और बढा दी| राधा का बदन बहुत सेक्सी था उसके कड़क बिल्कुल गोलाकार 36 साइज़ के मम्मे सुराहीदार गर्दन, 2 इंच गहरी नाभि हल्का सा सांवला रंग| राधा की चूत डबलरोटी की तरह फूली हुई थी राधा नें अपनी झांटे बड़ी ही कुशलता से सजा रखी थी मैं तो राधा को नंगी देख कर बेकाबू हो रहा था
राधा अपनी चूत दोनों हाथों से ढक रही थी और मेरे से कहनें लगी प्लीज़ मुझे जानें दो .. निशु नहाकर आजायेगी तो मुझे दिक्कत हो जायेगी.. मैंनें पूछा तुम्हारा रूम अंदर से तो लाक है बा.. बोली हाँ है मैंनें कहा तो फ़िर क्या फिकर तुम जैसे सेक्सी लड़की को नहानें मैं टाइम तो लगेगा ही. राधा तुम बहुत सेक्सी और खूबुसूरत और तुम्हारी चूत तो बहुत गजब की है इसमे जबरदस्त रस भरा हुआ है मुझे यह रस पिला दो प्लीज़ और मैं राधा के ऊपर टूट पड़ा|
राधा के होंठ बहुत ही रस भरे थे मैंनें उसके होंठों को अपनें ओठों में कस लिए और उसके लिप्स को चूसनें लगा मैं एक हाथ से राधा की मस्त जवानी के मम्मे भी मसल रहा था और अपना लौड़ा उसकी बुर के ऊपर टिका कर रगड़ रहा था पहले तो राधा छटपटाती रही पर जैसे ही मैंनें उसके शरीर पर अपनें शरीर के हिस्सों का दबाब बढाया तो वो भी कुछ ढीली पड़नें लगी. अब राधा नें अपनी चूत से अपनें हाथ हटा लिए थे मैंनें राधा के शरीर को सहलाना शुरू किया मैं उसकी अंदरूनी जांघों और चूत पर ज्यादा ध्यान दे रहा था.
राधा भी अब जवाब देनें लगी थी और सिसियानी लगी थी राधा का बदन बड़ा ही गुदाज़ बदन था और ऐसे ही फुद्दी वाली उसी बुर थी मैं अब राधा के निप्प्ल को चूसनें के लिए उसके होंठों को चूमते और चाटते हुए नीचे मम्मो की घाटी की ओर चल पड़ा राधा बहुत जोरो से सिसियानें लगी थी… मैंनें जैसे ही उसके मस्त मामो की सहलाना और उनके किनारों से चूसना चालू किया राधा छटपटानें लगी मैं एक निप्प्ल हाथ से मसल रहा था और दूसरा नीपल की ओर अपनी जीभ ले जा रहा था
राधा को राधा को भी अब मजा आनें लगा था उसनें नीचे हाथ डाल कर मेरा हल्लाब लौड़ा पकड़ लिया और बोली हाय मनोज निशु की बुर कितनी खुशनसीब है जिसको तुम्हारे लौडे जैसा चोदु लवर मिला कल रात में ट्रेन में तुमनें उसकी बुर के चीथड़े उड़ा दिए मैंनें देखा निशु लंगडाकर चल रही थी
मैंनें तुम दोनों की चुदाई के सपनें देखते हुए 3 बार अपनी चूत ऊँगली से झाड़ डाली| हय राजा! बहुत मस्त लौड़ा है…
मैंनें कहा राधा तुम्हारी जवानी में तो आग है तुमहरा बदन बहुत गुदाज और सुंदर सेक्सी है तुम्हारी पाव रोटी जैसे फूली चूत मुझे बहुत अच्छी लगती है और मैं तेजी से उसके निप्प्ल चूसनें लगा और एक हाथ से उसकी चूत को नीबू की तरह मसलनें लगा राधा बहुत गरमा गई थी राधा कहनें लगी अब कंट्रोल नही होता अपना लौड़ा मेरी बुर में घुसा दो, फाड़ दो मेरी बुर, बहुत खुजली हो रही है, तुम्हारा लन्ड जो भी लड़की एक बार देख लेगी बिना चुदवाए नही रह सकती.. और जिसनें एक बार चुदवा लिया उसके तो कहनें ही क्या वो हमेशा अपनी चूत का दरवाजा तुम्हारे लौडे के लिए खोले रखेगी
मुझे जब निशु नें तुम्हारे लौडे के पानी वाला रुमाल सुंघाया तो मेरी चूत नें अपनें आप पानी छोड़ दिया मैं समझ गई थी कि तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे जैसा ही हल्लाबी होगा जो मेरी बुर की जी भर कर चुदाई करेगा और खुजली मिटाएगा पर यह नही जानती थी कुछ ही घंटो में मुझे मेरी मुराद पूरी होनें का मौका मिल जायेगा…हाय अब सहन नही हो रहा जल्दी से अपना लौड़ा मेरी बुर में पेलो…
मैं राधा के माम्मे जबरदस्त तरीके से चूस रहा था और राधा का तना चूत का दाना मसल रहा था राधा की चूत बहुत पनियाई हुई थी राधा बहुत चुदासी हो रही थी राधा की बुर पर करीनें से काटी गई बेल बूटेदार झांटें बहुत सुंदर लग रही थी राधा की पाव रोटी पिचक और फूल रही थी ऐसी बुर को मैं पुट्टी वाली बुर कहता हूँ इसको चूसनें और चोदनें में बहुत मजा आता है| मैं राधा की बुर को उसकी लम्बाई मैं कुरेद रहा था और बीच बीच मैं एक ऊँगली उसकी बुर मैं घुसा कर ऊँगली से बुर भी चोद देता राधा की बुर मैं लिसलिसा सा पानी था मैंनें ऊँगली बाहर निकाल कर सूंघी और चाट ली बहुत ही बढ़िया खुशबू थी और टेस्ट तो पूछो ही मत
मेरी चूत के पानी की प्यासी जीभ राधा की बुर को चूसनें के लिए तड़प उठी मैंनें राधा के पैर के अंगूठे से चूसना शुरू किया और उसकी अंदरूनी जांघ तक चूसते चूसते पहुच गया मैं राधा की काली सावली पाव रोटी जैसी पुट्टी वाली बुर के आस पास अपनी जीभ फिरनें लगा वह जो उसका पानी लगा हुआ था उसको चाटनें में बहुत मजा आ रहा था राधा से रहा नही जा रहा था.. हाय मनोज यह क्या हो रहा ही मेरे को ऐसा पहले कभी नही हुआ| हाय मेरी बुर को चूसो इसे चबा जाओ इसे खा जाओ राधा नें मेरा सर पकड़ कर अपनी बुर पर लगा दिया उसकी पुत्ती वाली बुर को वो अपनी गांड उठाकर मेरे मुह पर रगड़ रही थी
मैंनें राधा की दोनों टांगे फैलाई और उसकी बुर पर किस किया| सी हाई मर गईई आया ऐसा कह रही थी फ़िर मैंनें राधा की पाव रोटी को उंगलियों से खोला और जीभ से जबरदस्त चाटनी शुरू कर दी ऊऊम्म्म्म हीईई सीईई बहुत अच्छा लग रहा है मनोज उम्म्म्म और चूसो और चाटो, अपनी जीभ पूरी घुमा दो, पहले किसी नें ऐसा मजा नही दिया ओम्म्म मेरी चूत झरनें वाली है ई अईई जल्दी से कुछ करो| मैंनें अपनी जीभ की रफ़्तार बड़ा दी
राधा अपनी दोनों टांगो से मेरे सर को दबा लिया मैंनें अपनी जीभ राधा की गरम और लिसलिसी बुर की गुफा में घुसा कर जैसे ही गोल गोल घुमाया अरे यार यह क्या कर दिया मेरी बुर तो पानी छोड़ रही है, और जोर से चू्सो और पिच पिच कर के उसकी बुर नें तेज़ी से पुचकारी मारना चालु कर दिया मैं तेज़ी से जीभ चलता हुआ उसका पानी पी गया और चूत का दाना फ़िर से अपनी जीभ में भर लिया राधा मेरा लंड को प्यार करना चाहती थी सो उसनें मेरे कहा तुम अपना लौड़ा मेरी ओर करो हम दोनों 6९ में हो गए
राधा मेरा लौड़ा बहुत तेज़ी से और अच्छे से चूस रही थी ऐसा लग रहा था की राधा पहली बार नही चुदवा रही वो पहले भी चुदवा चुकी थी मैं राधा की बुर के दानें को तेज़ी से चूस रहा था राधा मेरे नीचे थी और मेरा लौड़ा चूस रही थी मैं जितना प्रेशर उसकी बुर पर अपनी जीभ से डालता उतनी ही प्रेशर से राधा भी मेरे लौडे को चूसती मुझे ऐसा लग रहा था की मैंनें अपना लंड यदि जल्दी राधा के मुह से न निकाला तो यह झड़ जाएगा मैं राधा के मुह से लंड निकाल कर राधा की बुर को और गहराई से चूसनें लगा|
राधा फ़िर से तैयार थी.. हाय मेरे चोदु राजा आज लगता है मेरी बुर की खुजली पूरी तरह से शांत होगी| मेरी पाव रोटी में कई लौडे अपनें जान गवा चुके है घुसते ही दम तोड़ देते है| आज तुम मेरी बुर की जान निकल दो मेरे राजा… मैंनें राधा की गांड के नीचे तकिया लगे उसकी पाव रोटी जैसे पुत्ती वाली बुर जैसे घमंड मैं और फूल गई उस गुदाज पुत्ती वाली बुर से लिसलिसा सा कुछ निकल रहा था मुझे सहन नही हुआ तो मैंनें फ़िर से अपनी जीभ उसकी बुर से लगा दी.. अरे तुम भी डर रहे हो क्या मेरी पाव रोटी में दम तोड़नें से ? सी हीईई कोई तो मेरी बुर की खुजली शांत कर दे मैंनें अपना लौड़ा उसकी बुर पर रखा और थोड़ा उसे क्लिटोरिस से बुर के एंड तक रगडा साथ में मैं उसके माम्मे बुरी तरह से रगड़ मसल रहा था|
राधा अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लन्ड को अपनी बुर मैं घुसानें के लिए तड़प उठी मेरे राजा मत तड़पाओ मैं निशु नही राधा हूँ मैं चूत की खुजली से मर जाऊँगी मेरी बुर को चोदो… फाड़ो…
उसनें मेरा लन्ड पकड़ा और अपनी बुर के छेद पर टिका लिया और थोडी गांड उठाई तो पुक्क की आवाज के साथ सुपाडा उसकी बुर में घुस गया सुपाडा का गुदाज बुर में घुसना और राधा के मुह से दर्द की कराह निकलना शुरू हो गई| उई निशु मेरी बुर में पहली बार किसी नें जलता हुआ लोहा डाला| हाय मेरी बुर चिर गई, फ़ट गई, कोई तो बचा ले मुझे, बहुत मजा आ रहा था मैंनें राधा से कहा राधा जानेंमन पुट्टी वाली गुदाज बुर बहुत कम औरतों को नसीब होती है इनको बड़ी तसल्ली से चुदवाना चाहिए| तुम्हारी चूत की तो मैं आज बैन्ड बजा दूँगा
और मैंनें राधा के दोनों मम्मे अपनें हाथ में लिए और अपना होंठ उसके होंट से चिपका दिया और पूरा लन्ड एक ही झटके में पेलनें के लिए जोरदार धक्का मारा एक झटके में राधा की बुर की दीवारों से रगड़ खाता हुआ मेरा लंड आधी से ज्यादा राधा की पाव रोटी वाली बुर मैं धस चुका था
मैं कुछ देर रुका और लन्ड बाहर खीचा सुपाडा को बुर में रहनें दिया और फिर से बुर फाड़ धक्का लगाया| इस बार मेरा लन्ड राधा की बुर की गहराई में जाकर धस गया मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी गरम मक्खन वाली किसी चीज को मेरे लंड पर बहुत कस कर बाँध दिया हो. उसकी बुर बहुत लिसलिसी और गरम थी मैं राधा को हलके हलके धक्के देकर चोदनें लगा राधा को अब मजा आ रहा था
वो हाय! सी! राजा औरर मारो, यह बुर तुम्हारे लिए है मेरी बुर को चोदनें के इनाम में मैं तुम्हारी निशु के साथ सुहागरात मनवाऊँगी| बहुत मजा आ रहा है पहले किसी नें ऐसे नही चोदा, चोदते रहो, मुझे लगता है कि तुम्हारा लन्ड मेरे पेट से भी आगे तक घुसा हुआ है मेरी चूत की तो आज बैन्ड बज गई| अरे देखो सालो ऐसे चुदवाई और चोदी जाती है चूत उम्म्म मेरे राजा बहुत मजा आ रहा ही उई मा मेरी पेट में खलबली हो रही है यह मैं तो झरनें वाली हूँ मैं जानें वाली हूँ सो मैंनें अपनी स्पीड बड़ा दी राधा नें मेरे से कहा मनोज तुम लेटो मुझे तुम्हारे लौडे की सवारी करनें दो
मैं तुंरत लेट गया राधा नें लौड़ा को ठिकानें पर रखा और ठप्प से मेरे लौडे पर बैठ गई और फटाफट उचकनें लगी राधा के 36 साइज़ के मम्मे हवा में उछाल मार रहे थे| राधा बहुत तेजी से झड़ी पर मैं अभी नही झरनें वाला था क्योंकि पीछे 6-8 घंटो में 3 बार झर चुका था सो मैंनें राधा को कुतिया बनाया और बहुत बेरहमी से चोदा. राधा कहनें लगी मनोज बहुत देरी हो जायेगी जल्दी से खाली करो अपना लौड़ा मेरी बुर| मैं फ़िर मैंनें और तेज़ी से धक्के मारे और राधा की बुर की गहराई में झड़ गया राधा नें मेरा लौड़ा चाट कर साफ़ किया और फ़िर चुदवानें के वादे के साथ विदा हो गई …
मैंनें दिल्ली में सुमित के घर पर ही सुमित की सुहाग रात वाले कमरे में निशु के साथ भी सुहाग रात मनाई और राधा और निशु दोनों को चोदा पर यह सब बाद में

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