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“नाजुक चुत रुकसाना की”

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दोस्तो! मेरा नाम सौरभ है! मैं धनबाद झारखण्ड का रहनें वाला हूँ| पिछले कुछ सालों से अन्तर्वासना की कामुकता भरी कहानियों का बहुत मजा लेता आ रहा हूँ! मैंं कहानियाँ बहुत पढ़ी! आपनें मेरी पिछली कहानी को काफी सराहा|

दोस्तो! अब मैं आपको अपनी लेटेस्ट सेक्स स्टोरी बताता हूँ! यह घटना शुरू होती है जब मेरे घर में नये किरायेदार रहनें आए| उनका परिवार बहुत छोटा था और वो परिवार में चार लोग थे पति! पत्नी! एक लड़का और एक लड़की रुकसाना|

जब मैं शाम को अपनें ऑफिस से घर आया तो मुझे मेरी माँ नें बताया कि कल सुबह हमारे घर पर एक नये किरायेदार आनें वाले हैं| मैं अपनी माँ की कही बात को सुनकर मन ही मन सोचनें लगा कि अगर कोई पटाका लड़की या भाभी हुई तो मेरी चाँदी हो जाएगी|
और फिर हुआ भी ठीक ऐसे ही|
मैंनें माँ से पूछा कि उनके परिवार में कौन कौन है?
तो माँ नें मुझे बताया और अब मैं उनकी वो पूरी बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश हुआ|

अगले दिन सुबह मैं अपनें ऑफिस चला गया और जब में शाम को घर पर आया तो मैंनें देखा कि हमारे नये किरायेदार तब तक आ चुके थे| लेकिन मुझे तो अब रुकसाना को देखना था! लेकिन किस्मत से मुझे सबसे पहले रुकसाना की माँ मिली जो एक सेक्स मस्त माल थी और उनको देखते ही मेरा मुर्गा अंदर ही अंदर घूमनें लगा|

उनकी कमर 34 की! बूब्स तो देखनें से लग रहे थे कि ब्रा में आ ही नहीं सकते! इतनी बड़े आकार के थे| उसे देखकर मेरा मन तो बस यही कर रहा था कि ब्लाउज को फाड़कर बूब्स को अपनें मुँह में भरकर चूस लूँ! लेकिन हमारे बीच बस दुआ सलाम हुआ और मैं अपनें कमरे में चला गया|

शाम के करीब 6|30 बजे में अपनी छत पर बैठा हुआ ठंडे मौसम का आनन्द ले रहा था! तभी मुझे लगा कि मेरे पीछे कोई है और जब मैंनें पलट कर देखा तो एक नाज़ुक सी लड़की जो बहुत सुंदर और मासूम सी है वो खड़ी हुई थी|
मैंनें उससे हैल्लो किया और अपना हाथ आगे की तरफ बढ़ाया और कहा- मेरा नाम सौरभ है|
उसनें बोला- मैं रुकसाना|

कसम से दोस्तो! दिल नें इतनी ज़ोर से धक्का दिया कि मुझे लगा कि जैसे हार्ट अटैक आ गया हो| उसका फिगर दिखनें में कोई ऐसा ख़ास नहीं कमर 28 की! बूब्स शायद 30 के! लेकिन वो सुंदर कमाल की थी|

फिर मैंनें रुकसाना को कुर्सी दे दी प को कहा तो वो बैठ गई| हमारी बातें शुरू हो गई| धीरे धीरे मुझे उसके बारे में सब पता चला कि उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है| मुझे यह बात जान कर बहुत ख़ुशी हुई और अब मैंनें भी धीरे धीरे उससे अपनी दोस्ती को आगे बढ़ानी शुरू कर दी| मैं उसको कभी चोकलेट तो कभी टेडी दे देता|

दोस्तो! वो भी अब अच्छी तरह से समझ गई थी कि लड़का लाईन दे रहा है! लेकिन आप भी जानते हो कि किसी भी लड़की को फंसाना इतना आसान काम नहीं है जितना सुननें से लगता है|

अब धीरे धीरे यह भी हो गया अब हम हमेशा शाम को मिलते और घूमते थे|
एक दिन मैंनें भी थोड़ी हिम्मत करके उसको अपनें मन की बात बता दी! उसनें भी मेरी बात को मान लिया| उसी शाम हम बातें करते करते कब एक दूसरे के इतना करीब आ गए! हमें पता ही नहीं चला और हमनें एक दूसरे को किस किया|
उसकी सांसों की गर्मी से लगा कि आज मेरा पप्पू तो उल्टी कर ही देगा लेकिन कंट्रोल रखते हुए हमनें सिर्फ़ उस रात किस किया और यह हमारा किस का सिलसिला लगातार चलता रहा|

एक शाम हम दोनों बैठे ही थे कि बारिश शुरू हो गई और रुकसाना भागकर नीचे जानें लगी| तभी मैंनें उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया! उसको अपनें सीनें से लगाकर प्यार से उसके होंठों पर किस किया|

किस करते ही वो बेजान हो गई और उसनें अपनें आपको मुझसे चिपका दिया! मैं भी अब धीरे धीरे हाथ अपना नीचे ले जाकर उसके बूब्स को ऊपर से ही दबानें लगा|
उसकी तो आह्ह्ह्ह निकल गई और वो पूरी तरह बैचेन हो गई लेकिन मैं अब आज उसे छोड़नें वाला नहीं था| मैं उसके बूब्स को दबाते हुए अपना एक हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी गांड को दबानें लगा| वो अह्ह्ह उफ्फ करनें लगी|

तभी मैंनें उसको उठाकर अपनी गोद में ले लिया और अब उसनें अपनें दोनों पैरों से मेरी कमर को पकड़ लिया और मैं खड़े खड़े उसको किस कर रहा था| तभी रुकसाना की माँ उसे बुलानें लगी| कसम से यार लंड पर तो लगा किसी नें तेज़ाब गिरा दिया! लेकिन कोई कुछ कर नहीं सकता था|

और फिर कई महीनों बाद हमें मौका मिल ही गया! उस दिन ना मेरे घर पर कोई था और ना ही मेरे किराएदार के घर पर… सिर्फ़ रुकसाना और उसका भाई था|

हमनें शाम को बैठ कर बातें की और मैंनें उससे कहा कि आज रात को हम दोनों साथ रहेंगे|
लेकिन रुकसाना नें कहा- हम सेक्स नहीं करेंगे|
तो मैंनें भी कहा- ठीक है! लेकिन तुम मेरे साथ में तो रहोगी|
वो मान गई|
उफ|| लड़कियों के नखरे! क्या करें? चूत पानें के लिए तो करना ही पड़ता है|

फिर रात को करीब 12|30 बजे रुकसाना मेरे रूम में आई| उसके आते ही मैंनें उसको तुरंत पकड़कर अंदर खींच लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया! हम दोनों बेड पर गिर पड़े| मैंनें उसकी गर्दन पर किस किया और वो करवाती रही|

फिर कुछ देर बाद मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो गया और उसे यह भी महसूस हो गया और वो अपनी चूत को धीरे धीरे रगड़नें लगी! लेकिन फिर से वही लड़कियों के नखरे- सौरभ! प्लीज ऐसे नहीं! ग़लत तो नहीं होगा ना? यह सब बिल्कुल ग़लत है|
फिर मैंनें कहा- मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा! सिर्फ़ तुम्हारा दूध पीऊँगा|
और वो मान गई|

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दोस्तो! उस समय रुकसाना सिर्फ़ मेक्सी में थी और मैं सिर्फ़ लोवर में था|
मैं नीचे और रुकसाना मेरे ऊपर और मेरा लंड जो 8 इंच का है पूरा खड़ा हो गया था! लेकिन मैंनें कुछ किया नहीं! क्योंकि मैं जानता था कि बस एक बार रुकसाना का दूध पीनें लगा तो बाकी काम तो खुद ही हो जाएगा|
और मैं धीरे धीरे रुकसाना की मेक्सी को उतारनें लगा| अब रुकसाना सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी और वो लाल कलर की ब्रा और पेंटी में ग़ज़ब लग रही थी|

अब मैं उसके ऊपर आ गया और मैंनें उसकी गर्दन पर किस करते हुए उसके होंठों पर किस किया| उसनें अपनें दोनों पैर मेरी कमर पर रख दिए जिससे मैं उसकी कमर पर आ गया और मेरा लंड ठीक उसकी चूत के ऊपर था लेकिन फिर भी मैंनें कोई ऐसी वैसी हरकत नहीं की क्योंकि मैं जानता था कि सब कुछ खुद ही हो जाएगा|

फिर में रुकसाना को किस करते हुए धीरे धीरे उसकी छाती पर आ गया और उसकी ब्रा के ऊपर से ही दूध पीनें लगा| लेकिन कुछ ही देर के बाद उसनें अपनी ब्रा को खोल दिया और अपनी ब्रा को हटा कर मेरा चेहरा पकड़ा और तुरंत अपनी छाती पर रख दिया|
अब मैंनें बड़े ही प्यार से दबा दबाकर उसका दूध पीना शुरू किया|

वो मेरा सबसे कमाल का अनुभव था क्योंकि मैं रुकसाना के एक बूब को चूस रहा था और दूसरे बूब को ज़ोर ज़ोर से दबानें लगा|
फिर मैंनें हाथ लगाकर महसूस किया कि अब तक रुकसाना की पेंटी पूरी गीली हो गई थी और उसकी चूत का पानी मेरे लोवर को भी गीला कर रहा था और उस समय मैंनें अंडरवियर नहीं पहनी हुई थी तो मेरे लंड पर भी उसकी चूत का पानी लग गया था|

अब मैंनें अपना हाथ उसकी कमर पर रखते हुए उसकी नाभि पर रखा तो रुकसाना नें धीरे से मेरे कान में कहा- प्लीज! एक बार मेरी नाभि पर किस करो|
और बस मैं समझ गया कि आज अपना लंड जरूर अंदर घुसेगा|

फिर मैंनें उसके निप्पल पर एक हल्का सा काटते! चूसते हुए उसकी नाभि पर आ गया और उसकी नाभि पर किस करनें लगा| वो बिल्कुल मदहोश हो गई और मैंनें सही मौका देखते हुए अपना मुँह उसकी गीली पेंटी पर रख दिया और उसकी चूत पर एक हल्का सा किस किया| वो पूरे जोश में आकर गर्म हो गई और मैं भी उसकी तरफ से हाँ समझते हुए उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर किस करनें लगा|
रुकसाना की चूत से पानी ऐसे निकल रहा था जैसे नल से पानी आता है|

अब मैंनें रुकसाना की पेंटी को उतार दिया और उसकी गांड के पीछे हाथ लगाकर उसकी चूत को चाटनें लगा वो तो जैसे पूरी तरह से पागल ही हो गई! लेकिन मैंनें उसकी चूत को चाटना लगातार जारी रखा और धीरे से मैंनें उसकी चूत पर अपनी एक उंगली घुमाई और कुछ देर बाद उसे अंदर बाहर करनें लगा जिसकी वजह से वो तो जैसे पागल सी हो गई और वो मुझसे कहनें लगी- प्लीज! अब अंदर डाल दो! मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा|

लेकिन मैंनें सोचा कि अभी थोड़ा और तड़पा लूँ| फिर धीरे से मैंनें उसकी चूत में अपनी जीभ को डाल दिया और मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदनें लगा|
कुछ देर बाद रुकसाना इतनी गर्म हो गई कि वो झड़ गई और मेरा चेहरा उसकी चूत से निकले पानी से नहा गया|

लेकिन अब तो मुझे उस किले पर चढ़ाई करनी थी! मैंनें धीरे से अपना लोवर उतार दिया और रुकसाना के ऊपर आ गया! वापस उसके बूब्स को पीनें! दबानें लगा और अब रुकसाना भी मुझसे चुदनें को पूरी तरह से तैयार थी! उसनें अपनें दोनों पैरों को पूरी तरह फैला दिया था और मैंनें उसके बूब्स को पीते हुए धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया और अंदर की तरफ दबानें लगा|

जैसे ही उसे दर्द हुआ तो मैं उसके होंठों पर किस करनें लगा और मैंनें अपनें लंड को उसकी चूत पर दबाना जारी रखा| जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर घुसा तो उसनें दर्द में अपनें दांत ऐसे दबाए कि मेरे होंठ का सत्यानाश हो गया|

मैं अपना लंड अंदर डालता रहा और लगातार धक्के देता रहा| उसकी चूत अब फट गई! लेकिन चूत तो एकदम गीली हो चुकी थी जिसकी वजह से आराम से मेरा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था| फिर मैं धीरे धीरे उसकी चूत में धक्का लगानें लगा! अब उसे भी मजा आनें लगा और अब मेरी चुदाई करनें की स्पीड अचानक से बढ़ गई|

तभी रुकसाना नें मुझसे कहा- सौरभ! तुम नीचे हो जाओ|
मैंनें ठीक वैसा ही किया क्योंकि सेक्स में हम दोनों को मजा आना चाहिए|

रुकसाना मेरे ऊपर बैठ गई! उसनें मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुँह पर टिकाया और फिर बैठ गई| मेरा लंड उसकी चूत में पूरा अंदर चला गया और फिर जबरदस्त चुदाई हुई पूरे कमरे में फच फच आहहह आईईई इउह्ह की आवाजें आनें लगी| इतनी देर में रुकसाना झड़ गई थी|
अब बारी मेरी थी! लेकिन अब भी रुकसाना मेरे ऊपर थी और अगर अब लंड को उसकी चूत से बाहर नहीं निकाला तो मामला उलझ सकता था! क्योंकि मैं अपना वीर्य उसकी चूत से बाहर ही निकालना चाहता था|

मैंनें तुरंत उसको बेड पर पटका और उसके ऊपर आकर दस झटके दिए! मैं झाड़नें को हुआ तो मैंनें अपना लंड उसकी चूत से तुरंत बाहर निकाल कर रुकसाना के बूब्स पर रगड़नें लगा और मैंनें अपना सारा माल रुकसाना के चूचों के ऊपर निकाल दिया और वापस लंड को उसकी चूत में डाल कर हम दोनों लेट गये|

हमें पता ही नहीं कि कब नींद आ गई और हम सो गये|

हमनें चुदाई का यह सिलसिला काफी समय तक जारी रखा! फिर उसके पापा का ट्रांसफर हो गया! वो लोग दूसरे शहर चले गये मुझसे दूर|

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