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“धीरे जमाई बाबू दर्द हो रहा है”

कविता नाम की विधवा औरत की चुदाई की कहानी है यह| उनकी उम्र 45 साल की है और केवल 26 साल की उम्र में उनके पति उन्हें छोड़ कर इस दुनिया से चले गए थे| कविता की एक बेटी आपरेशन से हुई थी, उसका नाम कंचन है| कंचन की शादी भी 20 साल की उम्र में हो गई थी और वो पटना के एक बैंक में काम करती है| कंचन के पति का नाम मुन्ना है और वह 25 साल का है| कंचन जैसी लंबी, गोरी एंव सुंदर है, वैसे ही मुन्ना भी गोरा, चौड़े सीना वाला, छरहरा शरीर का गोरा लड़का है और वह भी एक बैंक में कार्य करता है|

कविता, कंचन और मुन्ना तीनों दो कमरों वाले एक फ्लैट में रहते हैं| कंचन की शादी को हुए अभी दो महीना ही हुआ है और रोज रात में मुन्ना उसे एक बार जरूर से चोदता है| मुन्ना का लंड लंबा और काफी मोटा है और जब वह कंचन की चुत में अपना हैवी लंड घुसाता है तो वह प्राय: ज़ोर से बोलती है, “आह दर्द होता है|| धीरे घुसाओ ना||”

उसकी सास बगल वाले कमरे में रोज कंचन के चुदनें की एहसास करती है और बीच:-बीच में खिड़की से देखती भी रहती है| पर विधवा होनें के कारण उदास हो जाती है| मुन्ना का इतना बड़ा लंड देख कर उसकी भी चुत में खुजली होनें लगती है| कविता के मम्मों का साइज 32 इंच का है और वो दुबली:-पतली है| वह अपनें फिगर को मेंटेन करके रखती है इसलिए वह स्मार्ट और सुंदर भी दिखती है|

एक दिन की बात है, उनके पड़ोस में रहनें वाली कंचन की एक सहेली की शादी होनें वाली थी और उसे रात भर उसके साथ रहनें के लिए बार:-बार बोल रही थी| शादी वाले दिन रात में घर में सिर्फ कविता और मुन्ना ही रह गए| इस मौके का लाभ मुन्ना भी उठाना चाहता था और उसकी सास भी, पर दोनों एक:-दूसरे से बोल नहीं पा रहे थे|

रात के दस बजे खाना खानें के बाद मुन्ना अपनें कमरे में चला गया और कविता देवी भी अपनें बिस्तर पर चली गईं| दोनों व्याकुल हो चुके थे, पर क्या किया जाए| फिर मुन्ना साहस करके अपनी सास के पास चला गया और सास के बगल में लेट गया|

कविता नें भी मुन्ना अपनें बगल में लेटते देखा तू वो मुन्ना को अपनें पास आनें को कहनें लगी| कविता देवी नें मुन्ना के सर को अपनें मम्मों पर रख लिया और उसे प्यार करते हुए उसके बालों को मालिश करनें लगीं:- जमाई राजा, कंचन के बिना नींद नहीं आ रही है क्या?

मुन्ना:- हाँ, सासू माँ|| जब तक उसे पकड़ कर नहीं सोता हूँ, मुझे नींद नहीं आती है|

कविता:- तुम मुझे ही कंचन समझ कर पकड़ लो ना, हर्ज ही क्या है| तुम चाहो तो मुझे पकड़ कर सो सकते हो|

यह कहकर कविता नें मुन्ना के होंठों को चूम लिया|

मुन्ना:- आप बहुत प्यारी हैं|

ये कह कर मुन्ना अपनी कोहनी को कविता के चूचों पर टकरानें लगा और धीरे:-धीरे उनके नजदीक आ गया| कविता के शरीर पर छोटी चोली होनें से उनकी गोरी कमर और सपाट पेट का काफ़ी हिस्सा खुला हुआ था| मुन्ना नें उनकी कमर को थाम लिया तो कविता नें अपनी बांहें मुन्ना के गले में डाल दीं| मुन्ना नें उन्हें अपनें पास को खींच लिया| इस तरह उसनें अपनें सिर को अपनी सास के सीनें पर दबा दिया|

इसके बाद मुन्ना नें सिर हिला कर उनके स्तनों को टटोला और उनके खुले हुए गोरे पेट पर चुम्बन कर दिया| कविता को गुदगुदी सी हुई, जिससे वो थोड़ी छटपटाईं, लेकिन मुन्ना उन्हें यूं ही जकड़ कर चुम्बन करता रहा| आख़िर उन्होंनें मुन्ना के बाल पकड़ कर सिर हटा दिया और बोलीं:- मुझे बहुत गुदगुदी हो रही है जमाई राजा|

मुन्ना नें अपनी सास की चूत पर हाथ रखते हुए कहा:- अरे अभी तो आपका पेट चूमा है, यहाँ चुम्बन करूँगा तब क्या होगा?

सास नें तुरंत मुन्ना का हाथ अपनी चुत से हटा दिया| इसके बाद सासू मां अपनी एक उंगली मुन्ना के होंठों पर रख कर बोलीं:- धत्त, ऐसा नहीं बोलते|

मुन्ना नें होंठ खोल कर उसकी उंगली मुँह में ले ली और चूसनें लगा| वो अब कविता के रसीली गुलाबी होंठों को चूमनें लगा| फ़िर कविता नें अपनी जीभ मुन्ना के होंठों से बीच में सरका कर अन्दर मुँह में डाल दी| मुन्ना अपनी सास की रसीली जीभ से अपनें मुँह को ऐसे चुसवा रहा था, जैसे मुन्ना के मुँह में कोई रसीला फल हो|

कुछ देर तक सास और जमाई यूँ ही एक:-दूसरे को चूमते रहे|

कविता:- अब ये लाइट बुझा दो ना|

मुन्ना नें सास का इशारा पाकर बत्ती को बुझा दिया और सासू को कस कर अपनें बाहुपाश में ले लिया| कविता भी यही चाहती थी|

अब कविता भी मुन्ना को चूमनें लगीं और उन्होंनें मुन्ना को अपनें मम्मों से खेलनें को बोल दिया| मुन्ना नें अपना हाथ उठा कर कविता के एक उभार पर रखा और उनकी छाती को दबा कर बहुत धीरे से मसला| फिर मुन्ना चोली के ऊपर से सासू की चूचियों को दबानें लगा| कविता की चूचियां काफी कड़ी थीं| मुन्ना को दबानें में मजा आ रहा था लेकिन चोली में फंसी होनें से मुन्ना को कुछ दिक्कत हो रही थी तो उसनें सास की चोली के बटन खोल दिए|

चोली खुलते ही कविता की ठोस चूचियां एकदम से उछल कर बाहर खेलनें लगीं| उफ… क्या गोरी और सख्त चूचियां थीं और उन पर गुलाबी से निप्पल भी छोटे छोटे से थे| कविता की चूचियाँ एकदम नारंगी की साइज की थीं|

इसके बाद मुन्ना के होंठ फिसलते हुए कविता के एक चूचुक पर आकर रुके और वो चूचुक को अपनें मुँह में लेकर जोर:-जोर से चूसनें लगा| इससे कविता के सारे शरीर में एक सिहरन सी दौड़नें लगी और स्तनों से रस निकल कर मुन्ना के मुँह में जानें लगा| मुन्ना एक स्तन को अपनें मुँह में लेकर उसका दूध पी रहा था और दूसरे मम्मे के निप्पल को अपनी उंगलियों में लेकर खेल रहा था|

कविता भी अपनें सिर को उत्तेजना में झटकनें लगी और अपनें जमाई के सिर को अपनी छाती पर जोर से दबानें लगीं| मुन्ना नें अपनी सास के एक स्तन का सारा रस पीनें के बाद दूसरे स्तन को अपनें मुँह में ले लिया और उसे भी चूसनें लगा|

मुन्ना नें देखा कि पहला चूचुक काफ़ी देर तक चूसनें के कारण काफ़ी फूल गया था| इस मस्ती से मुन्ना को मानो स्वर्ग मिल गया था| उस तो लग रहा था कि मानो वो किसी 18 साल की कुंवारी लड़की की चूचियों को पी रहा हो|

मुन्ना का गर्म हाथ घुंडियों को रगड़नें से कविता की चुत में सिहरन होनें लगी थी:- उफ|| उफ|| जमाई रा…|जा|| इस्स|| उह…म्म|| ओह|| और जोर से चूसो जमाई राजा!

यह बोलते हुए कविता नें जमाई के पजामा के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ लिया|

“उम्म्ह… अहह… हय… याह…”

कविता नें उत्तेजनावश अपना हाथ बढ़ा कर मुन्ना के लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया| मुन्ना का लंड तना हुआ था और काफ़ी बड़ा लंड था|

मुन्ना नें कविता की दूसरी चुची को चूसनें के बाद उन्हें अपनें से अलग किया और एक हाथ बढ़ाकर बिस्तर के पास लगे बिस्तर लैंप को रोशन कर दिया| हल्की सी रोशनी कमरे में फ़ैल गई| मुन्ना नें भी सारे कपड़े उतार दिए और सासू माँ को नंगी कर दिया|

सारे कमरे में हल्की सी रोशनी थी, जिसमें सिर्फ़ उन दोनों के नग्न शरीर चमक रहे थे| उस रोशनी में सासू माँ नें मुन्ना को अपनें से अलग करके अपनें जमाई के नग्न शरीर को निहारा, मुन्ना नें भी उनके गठीले शरीर को भूखी नजरों से देखा|

“बहुत खूबसूरत हो||” मुन्ना नें सासू माँ के शरीर की तारीफ़ की तो सासू माँ एकदम किसी कमसिन लड़की की तरह शरमा गईं|

फ़िर मुन्ना नें अपनी सासू माँ को कन्धों से पकड़ कर नीचे की ओर झुकाया|| सासू माँ अपनें जमाई के सामनें घुटनों के बल बैठ गईं| अब सासू माँ नें लैंप की रोशनी में पहली बार अपनें जमाई के बड़े लंड को अपनें मुँह के सामनें तन्नाते हुए देखा| जमाई का लंड देख कर सासू माँ के मुँह से ‘हाय||’ निकल गई:- ये काफ़ी बड़ा है जमाई बाबू|| मैं इसे नहीं ले पाऊँगी|| फट जाएगी मेरी!

“अभी से घबरा गईं| आप तो पिछले 20 सालों से चुदी नहीं हो ना|| इसलिए आपको ऐसा लग रहा है| मालूम है ना कि किसी लंड से कोरी चूत तक नहीं फटती, फिर आपकी तो बच्चे तक जन्म चुकी है| चूत होती ही ऐसी है कि लंड के हिसाब से अपनें को सैट कर लेती है| आप घबराइये मत, आपको तो मैं बहुत प्यार से चोदूँगा| बहुत तड़पाया हैं आपनें, कितनें दिनों से मैं सोच रहा था कि सासू माँ को कैसे चोदा जाए| आज तो आप खुद ही तैयार हैं|”

अब जमाई मुन्ना नें सासू माँ कविता को झुकनें को विवश कर दिया| कविता घुटनों के बल बैठ कर कुछ देर तक अपनें चेहरे के सामनें मुन्ना के लंड को पकड़ कर आगे:-पीछे करती रहीं| सासू माँ जब हाथ को पीछे करतीं तो लंड का मोटा सुपारा अपनें बिल से बाहर निकल आता| मुन्ना के लंड के छेद पर एक बूँद मोती सी चमक रही थी| कविता नें अपनी जीभ निकाल कर जमाई राजा के लंड पर चमकते हुए उस मोती को अपनी जीभ पर ले लिया और मुँह में लेकर उसका स्वाद लिया|| जो उन्हें बहुत भाया| फ़िर सासू माँ नें अपनी जीभ अपनें दामाद के लंड के सुपाड़े पर फिरानी शुरू कर दी|

जमाई बाबू “आ आआ अह ऊ ओ ह्ह्ह||” करते हुए अपनी सासू माँ के सिर को दोनों हाथों से थाम कर अपनें लंड पर दबानें लगे|

“इसे पूरा मुँह में ले लो माँ!!” मुन्ना नें कहा|

कविता:- उम्म्म्मऽऽ|नहींऽऽऽ पहले कभी नहीं लिया है|| कैसे ले लूँ|| उम्म्हा||

जमाई:- ले लो सासू माँ, जमाई की बात मान लो|| आह|| कैसा लग रहा है!

कविता नें अपनें होंठों को हल्के से अलग किया तो मुन्ना का 9” का लंड सरसराता हुआ कविता की जीभ को रगड़ता हुआ अन्दर चला गया| अब सासू माँ नें जमाई के लंड को हाथों से पकड़ कर और अन्दर तक जानें से रोका मगर जमाई बाबू नें सासू माँ के हाथों को अपनें लंड पर से हटा कर उनके मुँह में एक जोर का धक्का दे दिया|

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सासू माँ को लगा कि आज यह लौकी जैसा लम्बा लंड मेरे गले को फाड़ता हुआ पेट तक जा कर मानेंगा|

सासू माँ दर्द से छटपटा उठीं, उनका दम घुटनें लगा था| तभी मुन्ना नें अपनें लंड को कुछ बाहर निकाला और फ़िर वापस उसे गले तक धकेल दिया| मुन्ना अपनी सासू माँ के मुँह में अपनें लंड से धक्के लगानें लगे|

कविता पहली बार किसी लंड को चूस रही थीं और कुछ ही देर में उन्हें मजा आनें लगा था| फिर जमाई को खुश भी करना था, सो सासू माँ मजे से लंड चूसनें लगीं| उनके गले से “गों||गों| गों||” की आवाज निकल रही थी और जमाई बाबू मुंह में धक्के लगा रहे थे|

पंद्रह मिनट तक लंड चूसनें के बाद सासू माँ नें लंड को बाहर निकाल दिया और बोली:- अब बस करो बेटा… मुंह में दर्द हो रहा है|

जमाई का हाथ धीरे:-धीरे सरकता हुआ जब सास की चुत के ऊपर पहुँचा तो उनका चुपचाप पड़े रहना मुश्किल हो गया| सास के होंठों से एक दबी सी सिसकारी निकल गई, जमाई नें अपना हाथ हटा लिया|

फिर मुन्ना नें उसे बिस्तर पर लिटा दिया और मुन्ना नें बिना वक्त गंवाए अपनी सासू माँ की चूत पर मुँह लगा दिया और चुत को चूसनें लगा| सासू माँ जमाई के सर को जोर:-जोर से अपनी चुत पर दबानें लगीं और जमाई भी जोश में आकर सास की चूत को चूसनें लगा|

चुत चुसाई के बाद अब मुन्ना अपनें आपे से बाहर हो रहा था| वो लंड पेलनें के मूड में आ गया और अपना मुँह कविता की चूत के पास लेकर गया और उस पर चूम लिया| कविता नें अपनी टाँगें चौड़ी कर दीं, अब मुन्ना सासू माँ की चूत को अच्छी तरह देख सकता था, उनकी चूत मस्त गुलाबी, बिना बालों की एकदम फूली हुई थी, जिसमें से जमाई के लिए परिचित सी खुशबू आ रही थी|

अपनी सास की चूत को देख कर जमाई को साफ़ पता लग रहा था कि सास नें अपनी चुत के बाल आज ही साफ़ किए थे, मतलब आज वो पहले से इसके लिए तैयार थीं| मुन्ना नें एक बार फिर से अपनी जीभ अपनी सास की चूत में डाल दी और उसको चाटनें और चूमनें लगा| सास की चूत के उभरे होंठ मानो मर्द के स्पर्श के लिए तरस गए थे| उनकी चूत आग की तरह भभक रही थी|

फिर सासू माँ कहनें लगीं:- अह|| आग को भड़काओ मत|| इसको चूसो, चाटो, चोदो लेकिन देर मत करो|| मैं मरी जा रही हूँ|

जमाई अपनी सास की जलती हुई चूत में जीभ घुसाकर चूसनें लगा| सास के मुंह से उत्तेजक आवाजें निकलनें लगीं:- सी|| सी||ई|| ई|| उह||

अब सास नें अपनी जांघें पूरी तरह से खोल दीं, जिससे जमाई बाबू को सास की चुत चूसनें में आसानी हो गई|

जमाई नें अपनी जीभ नुकीली करके अपनी सास की जलती हुई चूत में डाल कर उनकी चूत की मलाई को पीनें लगा| सास की चूत पानी छोड़नें लगी थी और जमाई चुत का रस पी रहा था| सास की चूत पूरी गीली हो गई थी और बेटे जैसे जमाई के लंड को लेनें के लिए तरस रही थी| सासू माँ नें जमाई बेटे के लंड को पकड़ लिया और अपनी चूत पर रगड़नें लगीं|

सासू माँ की नशीली आँखें अपनें जमाई के चेहरे को बड़ी कामुकता भरी प्यास से निहार रही थीं, उनका ध्यान चूत से सटे जमाई के लंड पर लगा था| सास कविता इंतज़ार कर रही थी कि कब जमाई बाबू का लंड उनकी चुत की तृष्णा को शांत करेगा| उत्तेजना से सासू माँ की चुत के भगोष्ठ अपनें आप थोड़े से खुल गए थे|

“इसे अपनें हाथों से अन्दर लो!” जमाई मुन्ना नें सरसराते हुए कहा|

कविता नें फ़ौरन मुन्ना के लंड को पकड़ कर अपनी खुली चूत को और खोल कर उसमें रखवा लिया, उसी वक्त जमाई राजा नें एक जोर का झटका मारा और लंड का सुपाड़ा “फक्क||” की आवाज के साथ सास की चूत में जाकर अटक गया|

“ऊऽऽ ऊऊ फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आऽऽऽ आआ ह्ह्ह्ह्ह…” सास चीख उठीं|

सासू माँ को ऐसा लगा कि जमाई का तगड़ा लंड उनके पूरे शरीर को चीर कर रख देगा| सास कविता नें अपनी टांगों से जमाई की क़मर को जकड़ रखा था, उनके मुँह से चीख निकल रही थी मगर टांगों की जकड़न मुन्ना की क़मर को अपनी चूत की तरफ खींच रही थी|

“आह|| धीरे जमाई बाबू || चुत में दर्द कर रहा है|| आपका ये बहुत बड़ा है!”

जमाई:- बीस साल के बाद चुदवा रही हो तो दर्द तो होगा ही|| लेकिन डोंट वरी आपकी चूत फटेगी नहीं|| माँ जी आप बस अपनी चूत की चुदाई का मजा लो|| थोड़ा तो सहन करो|| नहीं तो बोलो, मैं निकाल लेता हूँ|

सास:- जब तुमनें घुसा ही दिया है तो चुदवाऊंगी पक्का, पर थोड़ा:-थोड़ा घुसाकर मजा लो|| तो मेरी चुत में दर्द भी उतना नहीं होगा|

जमाई नें ओके बोल कर धीरे:-धीरे करके अपना लंड सास की चूत से बाहर तक खींचा और फिर एक धक्का दे दिया|

“ऊऽऽ ऊऊ फ़्फ़्फ़्फ़ आऽऽ आआ ह्ह्ह्ह…”

ऐसा लगा कि जमाई का लंड पिस्टन की तरह अन्दर जाते हुए अपनें साथ सास के चूत:-रस को समेटते हुए चला जा रहा हो|

अब जमाई नें एक तकिया लेकर सास की क़मर के नीचे रख दिया, ऐसा करनें से सास की चुत खुलते हुए और ऊँची हो गई थी:- “देखना अब कैसे जाता है मेरा लंड तुम्हारे अन्दर!”

यह कह कर मुन्ना अपना लंड अपनी सास की चूत से सटा कर बहुत धीरे:-धीरे अन्दर:-बाहर करनें लगा और फिर एक ही झटके में पूरा घुसा दिया|

“आऽऽआअह्ह्|| ऊऊऊऊह् ह्ह्ह्छ|| आपका यह मोटा लंड स्सास्सह्ह|| मार दिया|| ऊम्ममा|| आह्हह्ह||”

“मजा आया मेरी जान||” मुन्ना नें लंड को सास की चुत में दबाते हुए कहा|

इस पर सास के मुँह से बस यही निकला:- आह पूरा डाल दिया ना|

“हाँ मेरी जान|| पूरा घुस गया|”

फ़िर मुन्ना जोर:-जोर कविता की चुत में धक्के मारनें लगा| सास की चूत पूरी तरह से फ़ैल गई थी| ऐसा लग रहा था मानो कोई मोटा बांस सास की चूत में डाला जा रहा हो|

पूरी तरह लंड को कविता की चुत में अन्दर करनें के बाद मुन्ना बहुत तसल्ली से अपनी सासू माँ को चोदनें लगा| सासू माँ भी नीचे से क़मर उठा कर जमाई का साथ देनें लगीं|

काफ़ी देर तक इसी तरह चोदनें के बाद जमाई बाबू नें बिस्तर के किनारे पर बैठ कर अपनी सासू माँ को अपनी गोद में बिठा लिया और चोदनें लगे|

“आआह्हह्हह जमाई जीई|| अह|| मजा आ गया|| अह और जोर्रर्रर सेई|| हन्नन्न जोरर्रर जोरर्र से|| अह धक्कक्का|| दो|| अह और्रर्रर जोरर सेई चोदिईईए अपनी सास की चूत्तत्त को आह|| मुझेई बहुत्तत्त अच्छाअआ लग्गग रअहा हैईइ|| ऊऊओह्ह्ह और जोर से चोदो मुझे आआह्हह और अन्दर तक|| अह जोर से||”

फ़िर मुन्ना नें कविता को दीवार से सटा कर बिस्तर से उठा लिया, मुन्ना नें अपनी टांगें अपनी सासू माँ की क़मर पर बाँध दीं और अपनें लंड को सास की चूत में घुसेड़े रखा|

कई तरह से अपनी सासू माँ को चोदनें के बाद जमाई नें कविता को वापस बिस्तर पर लिटा कर सासू माँ की चूत में अपना रस डाल दिया|

सासू माँ नें जमाई को चूम लिया और बोली:- बेटा, ऐसे ही मुझे रोज चोदा करो|

उसके बाद सास और जमाई थक कर नंगे ही लिपट कर सो गए

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