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दो भाइयों से बहन की चुदाई

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हैलो अन्तर्वासना पर्न स्टोरीज दाट कॉम कहानियाँ पढ़नें वाले मेरे दोस्तो, मेरी तरफ आप सभी को नमस्ते|
मेरा नाम प्रिंस है, मैं 25 साल का हूँ और मेरी बहन सुरुचि 22 साल की है, अब उसकी शादी हो गई है| मैं आपको अपनी फैमिली के बारे में बता देता हूँ| मेरी फैमिली में मेरे पापा-मम्मी मेरी छोटी बहन और मैं रहते हैं|
हमारे घर में मेरे ताऊ जी की फैमिली भी रहती थी| उनकी फैमिली में ताऊ-ताई और उनके 2 बेटे थे| एक बड़ा बेटा तो दिल्ली में जॉब करता था और छोटा बेटा विक्की यहीं घर में रहता था| ये मेरी उम्र का ही था|
यह बात तब की है जब मेरी उम्र छोटी थी और उस वक्त मैं अपनी बहन के साथ स्कूल जाता था| जब दोपहर में स्कूल से वापस घर आते थे, तब हम लंच करके अपनें कमरे में चले जाते थे| उस वक्त पापा काम पर होते थे, मम्मी अपनें रूम में सोनें चली जाती थीं|
लंच के बाद हम कुछ खेल खेलनें के लिए टाइम निकाल लेते थे|
एक दिन जब मैंनें खेलनें के लिए सुरुचि से कहा तो उसनें पूछा- भैया कौन सा खेल खेलना है?
मैंनें कहा- घर-घर वाला||
सुरुचि बोली- उसमें क्या करना होता है?
मैंनें कहा- उसमें तुम मेरी पत्नी बनोगी और मैं तेरा पति बनूंगा|
सुरुचि- ठीक है|
फिर मैंनें उसको बोला- चल, पहले हम शादी कर लेते हैं|
वो बोली- ठीक है|
मैं फिर मम्मी के रूम से सिंदूर की डिब्बी उठा कर ले आया और सुरुचि की माँग में सिंदूर लगा दिया| इसके बाद हम एक-दूसरे को गले मिले और फिर एक-एक किस किया| इसके बाद मैंनें खेल खेलना स्टार्ट किया| मैं काम पर चला गया|

इस तरह बाद के दिनों में ये खेल सारे-सारे दिन चलता रहनें लगा| अब जब भी सुरुचि के आस-पास कोई नहीं होता था, तब मैं और सुरुचि किस करनें लग जाते थे| फिर हम जब रात को सोनें जाते थे, तब भी हम एक-दूसरे के जिस्म को चूमते थे|
ऐसा एक साल चलता रहा, पर एक दिन मेरे पापा पता चल गया कि यह दोनों गलत काम करते हैं| फिर पापा नें मुझे और सुरुचि को बहुत डांट लगाई और मुझे चंडीगढ़ स्टडी करनें भेज दिया|
फिर जब मेरी स्टडी के चार साल बाद मुझे 3 दिन के लिए घर जाना मिला| जब मैं घर पहुँचा, तो मुझे सुरुचि को देख कर शॉक लग गया| वो एक एक हेरोईन की तरह मस्त माल जैसी बन गई थी| उसे देख कर ऐसा लगा कि जलेबी शीरा पी गई हो|
पर मैं मजबूर था, अब मैं दुबारा उसके साथ ऐसा कुछ नहीं कर सकता था|
फिर 3 दिन बाद जब मैं वापिस चंडीगढ़ आ गया, पर मेरे मन में बस सुरुचि के जिस्म का ही ख्याल आ रहा था कि कब मैं सुरुचि के जिस्म को हाथ लगा सकूंगा|
मेरी इस चाहत को भगवान नें पूरी कर ही दी|| क्योंकि थोड़े दिन बाद घर से पापा का फोन आया कि सुरुचि विक्की के साथ चंडीगढ़ आना चाहती है|
इस वक्त तक मैं चंडीगढ़ में जॉब करनें लगा था और मेरी तब नाइट ड्यूटी थी|
मैंनें कहा- ठीक है, वो दोनों आ सकते हैं| पापा बोले कि वो तेरे पास कल सुबह आ जाएगी| विक्की एक दिन बाद आएगा|
मैंनें कहा- ठीक है|
वो दूसरे दिन सुबह चंडीगढ़ आ गई थी और मैं अन्दर से खुश हो रहा था कि अब आज बहन की चुदाई का काम बनाना ही होगा, वर्ना कल विक्की के जानें के बाद कुछ नहीं हो पाएगा|
मैं उसको बस स्टैंड से लाकर घर आ गया| मैंनें फोन पर लंच आर्डर किया और सुरुचि को बोला- तुम फ्रेश हो जाओ|| तब तक लंच भी आ जाएगा|
मैं तो उसको देखता ही जा रहा था| उसके जिस्म के फिगर का 36-30-32 का साइज़ भी बहुत मस्त हो गया था| उसको देख कर तो मेरे मुँह में पानी आ जाता था, पर क्या करता मैंनें अपनें आपको रोक रखा था|
फिर हमनें लंच किया, सुरुचि सो गई|
जब शाम को मुझे ड्यूटी पर जाना था तब मैं उसको उठानें गया तो ऐसा लग रहा था कि बेड पर सोनाक्षी सिन्हा लेटी हुई है| मैंनें अपनें आपको बहुत मुश्किल से समझा रखा था|
मैंनें सुरुचि को जगा कर कहा- मैं ड्यूटी पर जा रहा हूँ, तुम ध्यान से रहना| यदि कोई काम हो तो फोन कर देना| मैं सुबह आऊंगा|
सुरुचि- ठीक है|
मैं फ्लैट में अकेला ही रहता था| मेरा फ्लैट 2 रूम सैट था और मैंनें पूरे फ्लैट में कैमरा लगा रखे थे|
फिर मैं ड्यूटी पर चला गया, पर ड्यूटी पर मेरा मन नहीं लग रहा था| मैंनें वहां हाफ टाइम काम किया और घर आ गया| मेरे पास फ्लैट की चाभी रहती थी| मैंनें सोचा सुरुचि को तंग न करूँ, इसलिए मैंनें अपनी चाभी से फ्लैट का गेट खोला और अन्दर चला गया|
मैंनें देखा सुरुचि के रूम की लाइट बंद है, लगता था कि वो सो गई है| फिर मैं चुपचाप अपनें रूम में आ गया| मैं सो ही रहा था कि सुरुचि के रूम से एक चीखनें की आवाज़ आई| मैं डर गया कि यह कैसी आवाज़ है|
मैं सुरुचि के रूम में जा ही रहा था कि सुरुचि की सिसकारी की आवाजें आनें लगीं| ‘आआह|| आआआह|| उऊहह||’
मैं तो शॉक हो गया और जब मैं सुरुचि के रूम में अन्दर गया तो मुझे फिर शॉक लगा| मैंनें देखा कि सुरुचि और मेरा भाई विक्की दोनों नंगे थे और विक्की का लंड सुरुचि की चुत में घुसा हुआ था| वो दोनों मुझे देख कर डर गए कि भैया कहाँ से आ गए| मैं तो एक बार गुस्सा हुआ और वो दोनों मुझसे माफी माँगनें लगे|
विक्की को दूसरे दिन आना था पर वो साला रात में ही आ गया| अब मैं कहाँ माननें वाला था|
सुरुचि और विक्की कहनें लगे- भैया आप जैसा कहो, हम दोनों वैसा ही करेंगे|| पर आप घर में ये सब मत बताना|
मैं भी मान गया, फिर मैंनें सुरुचि को बोला- तुमनें मेरे साथ चीटिंग की है|
सुरुचि बोली- भैया कैसी चीटिंग?
मैंनें कहा- सोच लो और तुम मुझे इतनी जल्दी भूल गईं?
सुरुचि- क्या भूल गई भैया, बताओ भी?
मैंनें भी फिर बोल ही दिया कि शादी तूनें मेरे साथ की थी और सुहागरात तुम विक्की के साथ मना रही हो?
सुरुचि बोली- सॉरी भैया|
वो मेरे पैरों के पास बैठ गई| फिर मैंनें उसको उठा कर बोला- अब क्या प्लान है?
सुरुचि कुछ नहीं बोली तो मैंनें फिर उसको पकड़ कर लिप किस करना स्टार्ट कर दिया|
मैंनें सुरुचि को बोला- कुछ याद आया?
उसनें सिर हिला कर जवाब दिया| मैंनें विक्की की तरफ घूर कर देखा तो विक्की सहमता हुआ बोला- मैं चलता हूँ|
मैंनें- तू कहीं नहीं जाएगा, तू मेरे रूम में जाकर सो जा, अब तेरी बारी कल आएगी|
वो चुपचाप जाकर मेरे रूम में चला गया| फिर तो जो खेल शुरू हुआ|| आह|| मैं आपको कैसे एक्सप्लेन करूँ|| मैं बता नहीं सकता कितना मजा आया|
इससे पहले कि मैं उसे चोदना शुरू करता कि मुझे याद आया| मैं उसके लिए एक ब्लैक कलर की नाइटी लेकर आया था और पिंक कलर की ब्रा और पेंटी भी लाया था| यह गिफ्ट तो मैंनें सुरुचि के लिए चंडीगढ़ वापस आते ही ले लिया था| मैंनें सोचा था कि जब सुरुचि के साथ ऐसा चुदाई का कोई मौका मिलेगा तो उसको ज़रूर गिफ्ट करूँगा|
मैंनें सुरुचि को बोला- यह तुम्हारी फर्स्टनाइट सुहागरात का गिफ्ट है|
वो बहुत खुश हो गई और बोली- मैं अभी पहन कर आती हूँ|
मैंनें कहा- यहीं पहन लो|
फिर वो इठला कर बोली- तो आप अपनें हाथ से ही पहना दो|
मैंनें कहा- ठीक है|
मैंनें उसको ब्रा पेंटी और नाइटी पहना कर बेड पर बैठा दिया और चुनरी से उसका मुँह ढक दिया| फिर मैं उसके पास बैठ गया| मैंनें भी इस वक्त सिर्फ़ अंडरवियर पहना था|
मैंनें उसके चेहरे से घूँघट उठाया और उसको बेड पर लेटा दिया| उसके माथे पर किस किया|| इसके बाद लिप पर किस करना स्टार्ट कर दिया| वो भी मेरा साथ दे रही थी| फिर मैंनें उसकी नाइटी में हाथ डाल कर उसके मम्मों को सहलानें लगा| वो भी मदहोश होनें लगी|
फिर मैंनें उसकी नाइटी को उतार दिया| वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में रह गई थी| मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध को चूसनें लगा| वो पूरी मदहोश हो गई थी, फिर मैंनें दाँतों की मदद से उसकी ब्रा खोल कर साइड करके रख दी| उसके चूचे एकदम मस्त और गोल थे| जब मैंनें उसके मम्मों को हाथ में लिया तो ऐसा लगा जैसे कि मैं स्वर्ग में बैठ कर किसी परी के मम्मों को हाथ में लेकर चूसनें जा रहा हूँ|
मैंनें कमरे में रखे फ्रिज से आइसक्रीम निकाली और उसके मम्मों पर आइस्क्रीम लगा कर चूसनें लगा| वो और तड़पनें लगी- आह|| ब्रो अब बस करो|| जल्दी से लंड डाल दो|| और मेरी चुत फाड़ दो|
मैंनें कहा- बहन, अभी तो मजा शुरू हुआ है|
वो वासना में ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करनें लगी|
मेरी मम्मे चूसनें की स्पीड और बढ़ गई और फिर मैंनें उसके दोनों मम्मों को पकड़ कर लंड से बहन की चूची चुदाई शुरू की और वो फिर ‘आआहह||’ करनें लगी|
मैं 5 मिनट तक उसके मम्मों को लंड के साथ रगड़ता रहा| फिर मैंनें चुत को सहलाना स्टार्ट किया और चुत पर आइसक्रीम लगा चूसनें लगा|
सुरुचि मेरे सिर को पकड़ कर चुत के अन्दर घुसी मेरी जीभ का मजा लेनें लगी| फिर मैंनें लंड पर आइसक्रीम लगाई और चुत के मुँह पर सुपारा लगा दिया| उसकी सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गईं ‘आआह|| ऊहम्म्म||’
फिर मैंनें एक झटका लगाया और लंड थोड़ा सा अन्दर गया था, पर उसको कुछ फर्क नहीं पड़ा| फिर मैंनें जब दूसरी बार झटका मारा तो सुरुचि उछल पड़ी और जोर से चिल्लानें लगी| मैं उसके होंठों पर किस करनें लगा| उसको दर्द बहुत हो रहा था पर मेरा भी लंड अभी आधा ही गया था| वो दर्द से मरी जा रही थी| फिर मैंनें उसके दर्द कम होनें का वेट किया| जब वो कुछ ठीक हुई तो मैंनें एक तगड़ा झटका मार दिया| इस बार तो सुरुचि जैसे मर ही चुकी थी, वो रोनें लगी|
मैंनें रुक कर उसके मम्मों को दबाया और उसे किस करता रहा ताकि उसका दर्द कम हो जाए| मुझे इन्तजार था कि जैसे ही उसका दर्द कम हो और मैं उसकी चुत में झटके मारनें स्टार्ट कर सकूँ|
यही हुआ मैं धीरे धीरे उसको चोदनें लगा| फिर उसका दर्द भी मजे में बदल गया| उसनें भी चुत चुदाई में मेरा साथ दिया| अब वो मस्त हो कर मजा ले रही थी- आआह उऊउह|| उफ्फ|| कितना मोटा लंड है|| आह चोदो||
हम दोनों 10 मिनट तक चुदाई करते रहे| अब सुरुचि झड़नें वाली थी, पर मैं अभी वैसे ही झटके मार रहा था| फिर सुरुचि चिल्लाते हुए झड़ चुकी थी|
कुछ पल और चुदाई चली और मैंनें सुरुचि से पूछा- मैं झड़नें वाला हूँ पानी किधर लेगी?
सुरुचि- अन्दर ही छोड़ दो||
यह बात सुन कर मैंनें लंड के झटकों की स्पीड बढ़ा दी और मैं उसकी चुत में ही झड़ गया| हम दोनों एक-दूसरे से चिपक कर बेड पर लेट गए|
फिर थोड़ी बाद सुरुचि लंड के साथ खेलनें लगी और मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया| सुरुचि भी चुदाई के लिए तैयार हो गई, वो बोली- इस बार मैं अपनें आप चुदाई करूँगी|
उसनें मुझे सीधा लिटा दिया और वो मेरे ऊपर आ गई| मैं उसके मम्मों को मसलनें लगा और वो मेरा लंड अपनी चुत के अन्दर करनें लगी| फिर लंड घुसते ही उसनें गांड उछाल कर चुदना शुरू कर दिया| हम दोनों नें 15 मिनट तक चुदाई का मजा लिया और सुरुचि झड़ कर मेरे ऊपर ही ढेर हो गई|
मेरा लंड अब भी उसकी चुत में ही था| मैं भी नीचे से धक्के मारता रहा और इसी अवस्था में झड़ गया| वो लंड को चुत में लिए ही सो गई| हमनें इस पूरी रात में कई बार चुत चुदाई का खेल खेला| उसनें बताया कि वो विक्की से भी 3 बार चुद चुकी थी|
उसकी विक्की संग चुत चुदाई की कहानी को मैं आपको अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा कि कैसे विक्की नें सुरुचि के फिगर को चोद कर बड़ा कर दिया|

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