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” दो अनजान चुत और लंड”

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मैं हूँ मंदीप शर्मा|| आयु 21 साल! राँची के जिला मोगा के एक छोटे से गाँव का रहनें वाला हूँ|
यह बात उस समय की है जब मैंनें अपनी बारहवीं क्लास राँची के ही एक स्कूल से पास की थी और मैं अपनें कैरियर को आगे बनानें के लिए किसी खोज में था| उसी समय मुझे अपना गाँव छोड़ कर अपनी बुआ जी के यहाँ जाना पड़ा|
अब आप सब जानते ही हैं कि गाँव के लड़के इतनें स्मार्ट और इंटेलीजेंट तो होते नहीं हैं! पर फिर भी मैं इंग्लिश और मैथ में काफी होशियार था| जिसका फायदा मुझे आगे जाकर एक नौकरी के रूप में मिल गया| यह नौकरी एक बहुउपयोगी बिल्डिंग में मिली थी! जिसका मुख्य काम घरेलू और औरतों की सभी चीजें डायरेक्ट उनके घर में सप्लाई करना था|

क्योंकि मैं अभी नया था! तो मेरा काम नजदीक के घरों तक ही सीमित रहा| इसी दौरान मेरी मुलाकात उस हसीना से हुई! जिसे देखनें के बाद मेरा मुँह खुला का खुला रह गया| उसका नाम मोहिनी था! उम्र 19 साल! रंग एकदम दूध सा सफ़ेद|| और सांचे में ढला हुआ मस्त फिगर था|

उस दिन मैं उनके घर कुछ सामान देनें के लिए गया था और अहोभाग्य कि आंटी जी घर पर नहीं थीं| उसनें बहुत ही अच्छे से मेरा अभिवादन किया और चाय देनें के बाद अपना सामान व बिल लेनें के बाद वापिस अपनें कमरे में चली गई|
उसको देखते ही मेरा दिल उस पर आ चुका था! पता करनें पर पता चला कि वो इस घर में सिर्फ अपनी माँ के साथ ही रहती है! उसकी बड़ी बहन रोमा पटियाला यूनिवर्सिटी कैंपस में रहती है| मोहिनी बारहवीं की स्टूडेंट थी|

अब मैं लगभग हर तीसरे दिन उनके घर में सामान देनें जानें लगा और इसी दौरान हमारी बातचीत भी होनें लगी| धीरे-धीरे हम दोनों एक-दूसरे से परिचित हो गए और कुछ दोस्ती जैसी बात भी बन गई थी| मेरा मन तो उसे चोदनें का था तो एक दिन मैंनें उससे अपनें दिल की बात कह दी कि मैं तुम्हें पसंद करनें लगा हूँ|

कहते हैं कि जब भगवान दयालु हो तो जो आपके मन में हो! सब आपको मिल जाता है| सो भगवान की दया से उसकी ‘हां’ भी हो गई और जॉब में मेरा प्रमोशन भी हो गया|

समय मिलते ही हम दोनों फ़ोन पर बात करनें लगे और कभी-कभी चुम्मा-चाटी भी होनें लगी| पर ये साला सेक्स इतनी मादरचोद आइटम है कि जब एक बार चस्का लग जाए! तो बस आदमी गया काम से|
इसी के चलते मैंनें उससे सेक्स के लिए पूछ लिया और उसे भी कोई ऐतराज नहीं था क्योंकि वो भी मुझे लव करनें लगी थी| अब बात थी टाइम और प्लेस की! तो वो भी मैंनें सैट कर लिया और हम दोनों चल पड़े प्यार के उस दरिया की ओर! जिसका ना तो कोई किनारा है और न ही गहराई की कोई सीमा है|

जगह की व्यवस्था करनें के बाद पहला काम था कि उस रात को यादगार बनाना और इसके लिए जरूरत थी कुछ तैयारियां करनें की; तो सबसे पहले मैंनें उस कमरे को सजानें के बारे में सोचा; मैंनें उसे डेकोरेट करवाया और खुद भी पूरी तरह तैयार होकर वहां तय वक्त के आधा घंटा पहले पहुँच गया ताकि मैं उसकी हर एक प्रतिक्रिया देख सकूं|
मैं बस एक तरफ छिप कर उसके आनें का इंतज़ार करनें लगा|

वो ठीक दस बजे पहुँच गई और कमरे की सजावट देखकर एकदम हैरानी से इधर-उधर देखनें लगी| फिर खुद ही बिस्तर पर लेट कर मेरा इंतज़ार करनें लगी| अब मैं तो वहां पर पहले से ही पहुँचा हुआ था तो मैंनें भी ज्यादा वेट न करवाते हुए उसको जा दबोचा|
हम एक-दूसरे को चुम्बन करते हुए आपस में बंध गए| कुछ मिनट के इस चुम्बन के बाद मैंनें अपनें हाथ सरकाते हुए उसकी कमर और फिर उसकी चुत के ऊपर पर हाथ चलाना शुरू कर दिया|

वो भी चुदासी थी तो मेरे साथ चुत रगड़वानें का मजा लेनें लगी| मैं उसको घुमाकर खुद उसकी पीठ की तरफ हो गया| अब मेरे हाथ उसके मुलायम दूध की थैलियों यानि उसके मम्मों पर जम गए थे|

वो मुझे मेरे कान के पास किस करनें लगी| अपनें दूध मसले जानें के चलते वो भी काफी गर्म हो चुकी थी| जिसकी वजह से उसकी मादक सिसकारियां निकल रही थीं| उसके मुँह से ‘आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊह्ह||’ की मदभरी आवाजें आ रही थीं|

अब मैंनें उसके कपड़े उतारनें में कोई देर न करते हुए जल्दी से उसकी कमीज को उतार दिया| उसका हाथ भी अब मेरे लंड पर आ पहुंचा था| उसका हाथ लगते ही लंड महाराज भी पूरी तरह से अकड़ में आ गए थे|
उसकी कमीज और सलवार उतारनें के बाद मैंनें उसको अपनी तरफ करते हुए निहारा तो मेरे होश ही उड़ गए| कमाल का तराशा हुआ 34-30-36 का एकदम बेदाग़ गोरा बदन मेरे सामनें नंगा था| बस बसंती रंग की छोटी से ब्रा-पेंटी उसके निप्पलों और चुत के छेद को ढके हुए थीं|| उसकी जवानी बड़ी कातिल लग रही थी| इसके साथ ही उसका मादक अंगड़ाई लेते हुए सिसकना और उसकी आँखों में चढ़ता हुआ सेक्स का खुमार मुझे पागल बना रहा था|

मैंनें लंड सहलाते हुए उससे बिस्तर पर लेटनें के लिए इशारा किया! पर उससे पहले उसका इशारा मेरे कपड़ों को लेकर था| सो मैंनें नशीले अंदाज में कह दिया- जान! मैंनें आपके कपड़े उतारे हैं! तो अब आपकी बारी है|

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इस पर वो हल्का सा मुस्कराई और खुद ही मेरे कपड़े उतारनें के लिए मेरे करीब आते हुए जुट गई| इस दौरान मैंनें अपना हाथ उसकी पेंटी में डाला तो पाया कि उसकी चुत के पानी से पेंटी लगभग पूरी गीली हो चुकी थी|
मेरा हाथ चुत पर लगते ही वो उचक गई|

कुछ ही पलों बाद मैं सिर्फ एक बॉक्सर में खड़ा था| मेरा अकड़ा हुआ लम्बा लंड बॉक्सर के ऊपर से ही अपना पहाड़ दिखा रहा था| मेरा लंड उसकी चुत में घुसनें के लिए बेताब था| मैंनें उसे पूरा नंगा लेटा कर थोड़ी देर फोरप्ले लिया| मैं भी एकदम नग्न हो चुका था और इस खेल में उसके चूचुकों को चूसना और उसकी चूत से खेलना शामिल हो चुका था|

मुझे चूत चाटना पसंद नहीं है तो मैंनें भी उससे लंड को मुँह में लेनें के लिए नहीं कहा|

अब हम उस मुकाम पर आ चुके थे! जहाँ से परम आनन्द की सीढ़ियाँ शुरू हो जाती हैं|

मोहिनी मेरे नीचे नंगी सिसकार रही थी और मुझे कुछ करनें को कह रही थी| मैंनें भी देर ना करते हुए अपना लंड उसकी कुंवारी चूत पर रखा और झटका लगा दिया| मेरे लंड का सुपारा उसकी मुनिया में जा फंसा! थोड़ी तकलीफ तो उसे हुई! पर उसनें कोई परवाह नहीं की| वो बस मुझे किस करनें में बिजी रही! लेकिन मेरा अगला धक्का लगते ही उसका शरीर जैसे कांप उठा! उसकी साँसें तेज हो गईं और वो मुझे ऊपर से हटानें की कोशिश करनें लगी|

मुझे मालूम था कि अगर एक बार नीचे से निकल गई तो फिर दुबारा हाथ नहीं आएगी! मैंनें उसको जोर से पकड़े रखा और उसके सयंत होनें तक धक्के न लगानें का निर्णय ले लिया|

लेकिन आदमी तो आखिर आदमी है! मैं ज्यादा देर तक संयम न रख सका और मैंनें धक्के मारनें शुरू कर दिए| शायद अब उसे इतना दर्द नहीं हो रहा था तो उसनें भी मुझे नहीं रोका और हमारी चुदाई अब स्पीड में चलनें लगी|

कुछ ही पलों में कमरा उसकी मादक सिसकारियों से गूंजनें लगा| पूरे कमरे में हम दोनों की ‘आआह|| आह|| और फच|| फच||’ की आवाजें गूँजनें लगीं या फिर हमारी तेज होती साँसों का शोर था|

लगभग दस मिनट में मेरा काम हो गया! पर इससे पहले उसका स्खलन भी एक बार हो चुका था| तेज धक्कों से वो फिर से गर्म हो चुकी थी और मेरा माल छूटते ही उसका दोबारा से उसकी चुत नें पानी छोड़ दिया|

हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में चिपक गए और वीर्य व रज के मिलन को होनें देनें लगे|

इसके बाद हम आराम करनें के लिए लेट गए|

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