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"चुद गई पापा की प्यारी परी"- नेहा

मैं अपनें घर में इकलौती लड़की हूँ, अमीर घर से होनें के कारण लाड़ प्यार नें मुझे बचपन से ही जिद्दी बना दिया था, मैं हर काम में अपनी मनमानी करती थी|
उन दिनों मैं सेक्स के बारे में कम ही जानती थी पर कॉलेज तक आते आते मुझे चूत और लंड के बारे में थोड़ा बहुत मालूम हो गया था|
मेरी मम्मी की नई नई शादी हुई थी…. जी सही सुना आपनें||

पिछले साल मेरे पापा नें शेयर मार्किट में पैसा लगाया था, उनको बहुत नुकसान हुआ तो उन्होंनें आत्महत्या कर ली थी|

कुछ ही महीनों बाद मम्मी नें अपनें एक कॉलेज के टाइम के दोस्त से शादी की थी जो पेशे से डॉक्टर है|
खैर जो लोग मुझे पहले से नहीं जानते मुझे उनको बात दूं, उन दिनों मैं जवान होती एक कच्ची उम्र की चंचल लड़की थी| एकदम भरपूर हुस्न की मालकिन…. मेरा रंग हल्का गुलाबी है|
हमारे कालोनी के लड़के मुझे देखकर गंदे:-गंदे इशारे करते और अपनें लंड पर हाथ फेरते हुए ‘नेंहा रानी…. पियोगी पानी?’ बोलते, मैं पलटकर देखती, कोई जवाब नहीं देती, सिर्फ मुस्कुरा देती, जिससे उनकी हिम्मत और बढ़ जाती|
चेहरे पर चश्मा चढ़ाए मिनी स्कार्ट में जब मैं अपनी एक्टिवा से कोचिंग के लिए निकलती थी तो कई लड़के बाइक से मेरा पीछा किया करते थे|

उनमें एक लड़का जो मेरे स्कूल का था, अंकेश मुझे बहुत पसंद था, मैं उसको धीरे धीरे लाइन देनें लगी, मेरी उससे दोस्ती हो गई|

मैं नासमझ कच्ची उम्र, बचपन की चड्डी से निकलकर जवानी की पैंटी में कदम रख रही थी, थोड़ी दुबली पतली थी, सीनें पर उभार भी आना शुरू हुआ था|
हम दोनों दिल्ली में पार्क में मिलते, अंकेश झाड़ियों में मुझे ले जाकर मेरी अधपकी चूचियों से खेलता, उनको दबाता, मसलता|

कभी कभी मुँह भी लगा देता था|

मैं सीत्कार उठती|
वह मेरा सफ़ेद शर्ट खोल देता तो कभी मेरी नीली स्कर्ट को ऊपर करके मेरी चड्डी में हाथ डाल देता था, मैं आँखें बंद किये सिसकारियाँ भरती रहती थी|
फिर एक दिन मैं अंकेश के साथ एक खाली क्लासरूम में थी, पीछे कोनें की सीट पर बैठे हम टैब पर ब्लू फिल्म देखते हुए हम दोनों पूरी तरह से प्यार में डूबे हुए थे| फिल्म में एक बेहद कम उम्र भारतीय लड़की को कुतिया बनाकर, एक काला नीग्रो बेहद वाइल्ड होकर चोद रहा था|
मुझे बड़ा अजीब लग रहा था, इतनी छोटी लड़की इतना मोटा हब्शी लंड कैसे अन्दर ले रही है|

सिर पर दो चोटी बंधे मेरे जिस्म पर सिर्फ सफ़ेद खुली हुई स्कूल की शर्ट और नीला स्कर्ट था|

अंकेश बारी बारी से मेरे छोटे छोटे अधखिले बूब्स को मसल रहा था|
शायद अंकेश भी काफी दिनों से इसी बात को इंतज़ार कर रहा था, उसनें अपनी ज़िप खोली और उसका गोरा मोटा लंड किसी साँप की तरह मेरे सामनें लहरा रहा था|

अब तक मैंनें लंड सिर्फ ब्लू फिल्म और किताबों में ही देखा था|

मैंनें एक बार अंकेश के लंड को देखा और फिर अपनी गुलाबी चूत को, अब मुझे सच्ची में डर लगनें लगा था|
अंकेश समझ गया कि मुझे डर लगनें लगा है:- डरती क्यों है मेरी नेंहा बेबी|

बड़े प्यार से अंकेश नें मुझे गोदी में ले लिया और मेरी आँखों में देखनें लगा, हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे उसकी और साँसें गर्म और तेज हो चुकी थी|
‘क्लास में कोई आ गया तो बहुत मुश्किल हो जाएगी| शायद हम दोनों को स्कूल से निकाल दिया जाये?’

‘ऐसा कुछ नहीं होगा, तुम बस हाथ सीट से नीचे करके पकड़ कर इसको सहलाओ, अच्छा लगेगा|’ उसनें मुझे बेंच पर बैठाया और मेरे हाथो में अपनें लंड को पकड़ा दिया और बोला:- जैसे ब्लू फिल्म में देखा है, बिल्कुल वैसे ही चूसो|
मैंनें अंकेश का लंड अपनें हाथों में ले लिया और उसको मस्ती में सहलानें लगी|

अंकेश का लंड तुरंत खड़ा हो गया:- नेंहा| मुँह में ले न यार….

‘पागल हो क्या? क्लास में ऐसे…. मुझे डर लगता है अंकेश|’

मैंनें मना कर दिया:- मुझको ऐसा कुछ नहीं करना है,,
लेकिन अंकेश नें मेरा हाथ पकड़ लिया:- आई लव यू नेंहा| मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ|

मेरे होंठों को चूसनें लगा,, तो मैंनें कहा:- नहीं अंकेश…. ये सब ग़लत है…. तुम मेरे फ्रेंड हो,,
अंकेश नें मेरे कंधे हाथ रख दिया और कहनें लगा:- देखो नेंहा, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ…. और जैसे जैसे तुम जवान हो रही हो…. मैं तुम्हें और भी प्यार करना चाहता हूँ|
उसनें मेरे गाल पर एक चुम्बन कर दिया…. मैं शर्मा गई और मैंनें कहा:- अंकेश प्यार तो मैं भी तुमसे करती हूँ…. पर अगर किसी को पता चल गया…. तो बहुत बुरा होगा|

अंकेश बोला:- अरे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा,,
मैं तो वैसे ही पोर्न मूवी में उस भारतीय लड़की की चुदाई देख कर गर्म हो चुकी थी…. मैंनें ज्यादा नाटक नहीं किया|

‘कुछ नहीं होगा धीरे से चूम कर देख|’ कहते हुए अंकेश नें अपना लंड मेरे होंठों पर रख दिया|
और फिर मैंनें यहाँ वहां देख कर डरते हुए अंकेश के गोरे लंड का सुपारा अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो अंकेश नें मेरे बालों को पकड़कर मेरे मुँह को पीछे खींचा और अपनें दूसरे हाथ से मेरा मुँह खोलकर अपनें लंड को पूरा मेरे मुँह में घुसा दिया|
अंकेश का लंड इतना बड़ा और मोटा था, कि वो मेरे गले तक उतर गया और फिर अंकेश नें मेरे मुँह को पकड़ लिया और अपनी गांड को हिलाकर मेरे मुँह को चोदनें लगा|

मेरी आँखों से आंसू निकल रहे थे और मेरे मुँह से घुँ घूँ खों खो| करके आवाज़|
मुझे बड़ा दर्द हो रहा था, उसका लम्बा मोटा लंड जड़ तक मेरे मुँह में था, वह अपनें दोनों हाथों से मेरी चोटियों को पकड़कर मेरे सिर को दबाये हुए था|

ऐसा लगा मुझे कि कुछ ही देर में मैं मरनें वाली हूँ लेकिन अंकेश को जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था, वो बस कसम खा के आया था कि स्कूल की इस नन्ही सी मासूम गुलाबी लड़की को आज चुदना सिखाकर ही मानेंगा|
मैं समझ चुकी थी कि आज यहाँ क्लासरूम में मेरी सील टूटनें वाली है|

अब मुझसे से और ज्यादा सहन नहीं हो रहा था और मेरी गुलाबी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी|
फिर उसनें धीरे से अपनें हाथ मेरे मम्मों पर रख दिया और कहा:- नेंहा मैं इनका रस पीना चाहता हूँ|

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उसनें मेरे शर्ट को ऊपर कर दिया, उसके बाद अंकेश नें मेरी कमर में अपना हाथ डाल दिया, अब मैं भी गर्म हो गई थी, अंकेश मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर दबानें लगा…. वो बेरहमी से मम्मों को मसल रहा था|
एक साथ दोनों मम्मों को बुरी तरह मसलनें से मैं एकदम से चुदासी हो उठी, अंकेश नें मेरे गुलाबी होंठों पर अपनें होंठों को रख दिए और उन्हें बुरी तरह चूसनें लगे|

वो मुझे पागलों की तरह चूमनें लगा था|

फिर अंकेश नें मुझे बेंच से उठाया, डेस्क पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आकर मेरे शर्ट के बटन खोल कर मेरे चूचों को पकड़ लिया|
अब उसनें मेरे कपड़े उतारना शुरू किए…. पहले मेरी कमीज़ निकाली…. फिर मेरी स्कर्ट खींच दी, फिर अंकेश नें मेरी ब्रा भी निकाल दी और वो मेरे तनें हुए मम्मों को चूमनें:-चाटनें लगा|
अंकेश बड़ी ही बेहरमी से मेरे चूचों को दबा रहा था और मेरे गुलाबी निप्पलों को मसल रहा था| उसनें अब मुँह को मेरे निप्पलों पर लगा लिया और उसको तेजी से चूसनें लगा और उनको किसी जानवर की तरह काटनें लगा|

अंकेश के साथ ये करते हुए बहुत सेक्सी लग रहा था,,
मैं अपनें दोस्त के साथ नंगी थी, अंकेश मेरे मम्मों को मुँह में पूरा भर के चूस रहा था और अपनें एक हाथ से मेरी चूत को भी सहला रहा था|
थोड़ी देर बाद अंकेश नें मेरी अनछुई चिकनी:-चिकनी जाँघें चूम लीं…. मैं सिहर उठी| अंकेश पागलों की तरह मेरी जाँघों को अपनें मुँह से सहला रहा था और चूम रहा था|
फ़िर उसनें मेरी लाल पैंटी भी उतार दी मेरी बिना बालों वाली अधखिली गोरी गुलाबी चूत को देखते ही वो एकदम से चकित रह गया और बोला:- वाह अभी तो ज्यादा बाल भी नहीं आये हैं, एकदम गोरी मासूम छोटी सी पुसी है तुम्हारी|

मैं हँस दी,,
मेरे पूरी चूत अंकेश नें हाथ में थाम ली और मेरी पूरी चूत को दबा दिया, चूत को सहलाता हुआ अंकेश बोला:- हाय नेंहा…. मेरी जान…. क्या चीज़ है तू…. क्या मस्त माल है…. हहमम्म ससस्स हहा,,
अंकेश नें अन्दर तक मुँह डाल कर मेरी जाँघें बड़े प्यार से चूमी और सहलाते हुए मेरी जाँघों को फैला दिया|

वो मेरी चूत को बुरी तरह मसलनें लगा, मुझे बहुत मज़ा आनें लगा…. मैं सिसकारी भरनें लगी,,

अंकेश और जोश में चूत को मसलनें लगा…. उसनें मसल:-मसल कर मेरी चूत लाल कर दी थी|
उसके इस तरह से रगड़नें से मेरी मुन्नी 2:-3 बार झड़ चुकी थी, बहुत गीला हो गया था, अंकेश के हाथ भी गीले हो गए थे…. सारा पानी निकल बाहर रहा था, मैं निढाल हो रही थी|
फिर अंकेश नें मेरी चूत की दोनों फांकों पर होंठ रख दिए और मेरी कसी हुई चूत के होंठों को अपनें होंठों से दबा कर बुरी तरह चूसनें लगा|

मैं तो बस कसमसाती रह गई…. मैं तड़पती मचलती हुई ‘आआहह…. आअहह…. अंकेश,, अंकेश…. हाय…. उईई…. आहह,,’ कहती रही और अंकेश चूस चूस कर मेरी अधपकी जवान चूत का रस पीता गया|
बड़ी देर तक मेरी चूत की चुसाई की, मैं पागल हो गई थी|
तभी अंकेश नें अपनें कपड़े उतारे और खुद नंगे हो गया और उसका लंड फड़फड़ा उठा…. करीब 7 या 8 इंच का लोहे जैसा सरिया था| मैंनें कहा:- अंकेश…. यह तो बहुत बड़ा और मोटा है…. ये मेरी चूत में नहीं जा पाएगा|

‘यार दर्द होता होगा बहुत?’ मैंनें डरते हुए कहा|

अंकेश नें कहा:- नेंहा तू फिकर मत कर…. फिर मैं तेरे से प्यार करता हूँ…. तुझे कुछ नहीं होनें दूँगा|
उसनें अपना लंड मेरी फुद्दी की तरफ बढ़ाया…. मैं सोच रही थी जो हालत अभी उस मूवी वाली लड़की की थी…. अब मेरी होनें वाली है|

अंकेश के लंड के टच करते ही मेरी चूत नें पानी छोड़ दिया, मैं बुरी तरह तड़प रही थी|
5 मिनट तक अंकेश मेरी चूत को अपनें लंड से सहलाता रहा…. फिर उसनें मेरी फुद्दी पर हल्का सा ज़ोर लगाया…. तो मेरी चीख निकल गई, उसका लंड अन्दर नहीं जा रहा था|

अंकेश नें कहा:- थोड़ा दर्द होगा…. लेकिन फिर ठीक हो जाएगा|

मैंनें मंत्रमुग्ध कहा:- ओके…. लेकिन अंकेश प्लीज़ आराम से करना|
अंकेश नें ज़ोर से अन्दर डाला…. तो उसका आधा लंड मेरे अन्दर कोई चीज़ तोड़ते हुए अन्दर घुसता चला गया|

मेरी आँखों में आँसू आ गए:- आह…. मैं मर जाऊँगी अंकेश …. प्लीज़ निकालो…. बहुत दर्द हो रहा है…. आह ओफ…. ममाआ,,

यह कहते हुए मैं गिड़गिड़ानें लगी…. पर वो नहीं माना और उसनें मेरे होंठों पर अपनें होंठों लगा दिए|
वो मेरे होंठों को चूसनें लगा और अपनें लौड़े को मेरी चूत में ऐसे ही डाले रखा| मेरी चूत से खून निकल रहा था और मैं बुरी तरह तड़प रही थी|

वह कहनें लगा:- नेंहा, तू मेरे लिए थोड़ा सहन कर ले प्लीज़|

मैंनें हल्के स्वर में कहा:- अंकेश आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ|

फिर अंकेश नें एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में जड़ तक घुस गया|
मैं तड़प उठी और ‘आह…. ओह्ह…. अंकेश मैं मर गई,,’ कहनें लगी|

अंकेश मुझे तसल्ली देता रहा और 5 मिनट तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा, वो मेरे दूध चूसता रहा|

लगभग 5 मिनट बाद उसनें धीरे धीरे झटके मारना शुरू किए|
मैं:- आह्ह…. अंकेश…. मज़ा आ रहा है|
इस बीच मैं 2 बार झड़ चुकी थी और वो यूँ ही मेरे होंठों को चूसता हुआ मुझे चोदता रहा|

लगभग 10 मिनट बाद अंकेश नें अपना सारा माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया|

मेरी चूत पानी और खून छोड़ती हुई बुरी तरह फड़फड़ा रही थी, मेरी चूत का हाल:-बेहाल हो चुका था|

इस तरह से मैं पहली बार अपनें बॉयफ्रेंड अंकेश से चुदवाई थी|
लेकिन एक बार शुरू हुआ यह खेल बार बार होनें लगा, कभी पार्क में, कभी कार में तो कभी किसी दोस्त के घर पर|
आप सोच रहे होंगे कि कहानी का शीर्षक तो है ‘चुद गई पापा की परी’ और पूरी कहानी में पापा का नाम भी नहीं आया? तो दोस्तो, कहानी के दूसरे भाग की प्रतीक्षा कीजिए|

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