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  "चुत की आग ने मुझे रंडी बना दिया"-8

दोस्तो.. मेरी सेक्स स्टोरी में आपनें अब तक पढ़ा था कि चचिया ससुर बहू सेक्स के बाद उन दोनों की बच्चे को लेकर बात चल रही थी|

अब आगे..
मोना:- लड़की होगी तो भी अच्छा है उसमें मेरी खूबसूरती और आपके जैसी ताक़त होगी.. वो भी अपनें पति को फुल मज़ा देगी|

अपनी बहू की बात सुनकर काका मुस्कुरानें लगे और मोना को अपनी बांहों में भर लिया|
मोना की अन्तर्वासना अब दोबारा जाग गई थी, वो लंड को अब मुँह में लेकर चूसनें लगी थी| उधर काका भी अब गर्म हो गए थे:- आह.. चूस रानी आज तो मेरे लंड के भाग खुल गए.. तेरी जैसी अप्सरा इसको चूस रही है.. ओफ.. चल रानी घूम जा और मुझे भी तेरी चुत का रस पीनें दे|
अब दोनों 69 के पोज़ में हो गए और एक:-दूसरे का रस चाटनें लगे| दस मिनट तक ये चुसाई चलती रही उसके बाद काका सीधे होकर लेट गए और मोना को समझते देर ना लगी कि काका क्या चाहते हैं|
मोना सीधे जाकर काका के खड़े लंड पर अपनी चुत सैट करके बैठ गई और धीरे:-धीरे ऊपर:-नीचे होनें लगी|

काका:- आह.. मोना रानी तू तो बड़ी समझदार है आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… कूद रानी मेरे लंड पे कूद आह.. कर दे इसको अपनी चुत में गायब आह.. उहह ले आह.. ले पूरा खा ले|

काका भी अब नीचे से झटके मारनें लगे थे और मोना गांड को ऊपर:-नीचे करके मज़ा ले रही थी| अब कमरे में दोनों की आहें गूँजनें लगी थीं और चुदाई का तूफान जोरों पे था|

मोना:- आह.. काका आह जोर से आह.. काश मेरी शादी आपसे हुई होती आह.. मज़ा आ जाता आह.. कब से प्यासी थी में आह.. आज अपनें मेरी चुत को तृप्त कर दिया आह.. आह..
बहू की बातें काका को और जोश दिला रही थीं.. वो स्पीड से धक्के मारनें लगे और मोना को अपनें ऊपर लेटा कर उसके निप्पल को चूसनें लगे|
कुछ मिनट ये चुदाई चली, काका के तगड़े लंड के दमदार झटके मोना की चुत सह नहीं पाई और उसकी चुत का बाँध टूट गया.. वो लंबी साँसें लेते हुए झड़नें लगी| मोना तो ठंडी हो गई.. मगर काका के लंड का जोश तो वैसा का वैसा ही था| अब मोना को लंड की चोट बर्दाश्त नहीं हो रही थी.. वो झट से लंड से उठ गई और फ़ौरन लंड को मुँह में लेकर चूसनें लगी|
काका:- आह साली छिनाल आह.. ये क्या किया चुत में मज़ा आ रहा था.. उफ़ चूस साली चूस आह.. अब तुझे घोड़ी बना के ऐसे शॉट मारूँगा आह.. तू क्या याद करेगी|
थोड़ी देर लंड चूसनें के बाद मोना समझ गई कि ये लंड मुँह से नहीं चुत से ही ठंडा होगा तो वो घोड़ी बन गई:- आह.. काका ले आह.. कर ले अपना अरमान पूरा आह.. ले तेरी घोड़ी तैयार है आजा चढ़ जा|
काका खड़ा हुआ और मोना के पीछे जाकर लंड को चुत पे सैट किया फिर मोना की कमर को कस के पकड़ के एक जोरदार धक्का मारा तो पूरा लंड एक हे बार में मोना की चुत में जड़ तक समा गया|

मोना:- आआईइ काका मार डाला रे.. उफ़ आह.. आज तो बरसों की चुदाई आपनें एक ही रात में कर दी आह.. आ उफ़फ्फ़ मारो आह.. और धक्के मारो आह.. आ..
काका अब स्पीड से मोना की चुत में लंड पेल रहे थे और साथ में अपनी उंगली से मोना की गांड का भी मुआयना कर रहे थे:- आह.. ले साली रांड आह.. तेरी गांड तो बहुत कसी हुई लगती है आह.. रामु नें इसको ज़्यादा नहीं चोदा होगा|

मोना:- आह.. ऑउच नहीं काका.. उफ़फ्फ़ प्लीज़ आप बस चुत से ही संतुष्ट हो जाओ.. आह.. गांड नहीं ये आपका मूसल झेल नहीं पाएगी|

काका:- क्यों रानी आह.. ले दुनिया में कोई चुत और गांड ऐसी नहीं बनी जो लंड ना ले सके.. रानी भगवान नें ये बनाई ही चुदाई के लिए है आह.. ले आह आह ले..
काका अब बहुत तेज झटके मारनें लगे थे.. उनका लंड फूलनें लगा था| मोना की चुत तो फिर से झड़ गई मगर काका फिर भी 5 मिनट और उसको चोदते रहे, तब कहीं जाकर उनका लावा फूटा और वो निढाल होकर मोना के पास लेट गए| काका नें मोना को अपनें सीनें पे लिटा लिया|
काका:- उफ साली क्या गर्म माल है रे तू कितनी चुदाई की.. साला मन ही नहीं भरता|

मोना:- आह.. काका आप हो ही असली मर्द.. कसम से मज़ा आ गया| अब तो जब तक यहाँ हूँ.. रोज ऐसे ही आपसे चुदाई करवाऊंगी|

काका:- अच्छा मेरी रानी को लंड इतना पसंद आया.. मगर आज तो कोई नहीं इसलिए खुल कर चुदाई हो गई| रोज थोड़े ऐसा हो सकेगा.. कल तो सब यहाँ होंगे ही फिर?

मोना:- होनें दो.. मुझे किसी का डर नहीं.. जब उस लड़के से चुदनें मैं छत पर जा सकती हूँ.. तो आपसे क्यों नहीं?
काका:- हा हा हा साली पक्की चुदक्कड़ है तू.. चल घबरा मत, मैं कोई ना कोई तरकीब लगा लूँगा| मगर आज बस एक बार तेरी गांड भी मार लेनें दे.. साली बहुत कसी हुई है.. मेरा तो मन ललचा गया|

मोना:- नहीं काका, प्लीज़ नहीं, ये तो रामु के लंड से ही बहुत दर्द करती है.. फिर आपका तो बम्बू है.. ये तो मेरी गांड को फाड़ ही देगा|

काका:- अरे एक बार तो चुत में भी दर्द होता है.. तू डर मत.. मैं हौले:-हौले मारूँगा और वैसे ये खुली हुई तो है ही, तो ज़्यादा दर्द नहीं होगा तुझे|

मोना:- नहीं काका खुली हुई नहीं है, शादी के दस दिन बाद रामु नें एक बार मारी थी.. मेरी जान निकल गई थी| उसके बाद कोई 2 महीनें बाद दोबारा मारी तब भी वही हाल हुआ| बस तब से ना रामु नें कहा.. ना मैंनें कहा|
काका:- ही ही मोना रानी तभी कहूँ ये गुलाबी छेद ऐसे बंद क्यों है.. तू ज़िद ना कर मैं तो गांड मारके ही रहूँगा| अब तू मेरी रानी है.. मेरी बात माननें का तेरा फ़र्ज़ बनता है.. समझी|

मोना:- ठीक है काका.. आप इतना कह रहे हो तो मान लेती हूँ मगर मेरी भी एक शर्त है| आप आज मेरी गांड नहीं मारोगे.. क्योंकि आज तो चुत का ही हाल बुरा हो गया.. आप कल मेरी गांड मार लेना|

काका:- अरे पगली.. कल तो सब होंगे गांड में लंड जाएगा तो तुझे दर्द होगा और तू चिल्लाएगी, तो सबको पता लग जाएगा|

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मोना:- नहीं काका.. आप मेरी चिंता मत करो मैं सब संभाल लूँगी प्लीज़ मान जाओ|

काका:- अच्छा ठीक है.. मान गया मगर आज की रात चुत तो मरवाएगी ना|
दोबारा चुदाई के नाम से मोना की आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं|

मोना:- अरे काका आप आदमी हो या घोड़े.. कितना चोदोगे? देखो मेरी चुत का क्या हाल हो गया.. सूजन आ गई|
मोना की बात सुनकर काका को हँसी आ गई:- अब तू घोड़ा समझ या घड़ा.. भाई मेरी तो आदत है एक बार में कम से कम 3 या 4 बार चुदाई ना करूँ तो मज़ा नहीं आता|

मोना:- मन तो मेरा भी यही है मगर हाथ पैर जवाब दे गए| आपकी चुदाई इतनी लंबी होती है क्या बताऊं|

काका:- अरे अभी थोड़े करूँगा.. तू थोड़ा आराम कर ले उसके बाद चुदाई करूँगा और वैसे तूनें मेरा लंड रस भी नहीं पिया तो मैं अबकी बार तेरे मुँह में रस डालूँगा|

मोना:- समझ गई काका.. आप नहीं मानोगे.. चलो मुझे थोड़ा सोनें दो कमर में दर्द हो रहा है| उसके बाद आप चाहे चुत में पानी निकालो या मुँह में.. आपकी मर्ज़ी|

काका:- चल ठीक है.. तू आराम कर मैं तब तक थोड़ा बाहर हो आता हूँ|
क्यों दोस्तो… मज़ा आ रहा है ना लगातार चुदाई ही चुदाई चल रही है| अभी जितना एंजाय करना है कर लो, बाद में स्टोरी अलग मोड़ पर जाएगी तब शायद चुदाई के मज़े थोड़े रुक जाएं.. हा हा हा हा डरो मत मजाक कर रही हूँ चलो आपकी वो पूजा के बारे में बताकर दुविधा दूर कर देती हूँ|
टीना और अशोक आराम से बैठ कर बियर का मज़ा ले रहे थे|
टीना:- यार अशोक अब कितना तड़पाएगा.. बता भी दे क्या बात है कौन है ये पूजा?

अशोक:- देख टीना मैं तुझपे भरोसा करता हूँ इसलिए बता रहा हूँ.. मगर उन कमीनों को मत बताना समझी|

टीना:- अरे यार तू जानता है.. मैं तेरी दीवानी हूँ| वो सब को तो तेरी वजह से झेलती हूँ.. तेरी कसम मैं किसी को नहीं बताऊंगी|

अशोक:- अच्छा तो सुन तू तो जानती है मैं अपनें मॉम डैड का एक ही बेटा हूँ|

टीना:- हाँ यार मुझे पता है|

अशोक:- सुन तो ले यार.. मेरे अंकल की बेटी आरती को भी तू जानती है ना|

टीना:- हाँ जानती हूँ.. तू क्या अपनी फैमिली के बारे में बता रहा है? यार पूजा के बारे में बता ना मुझे|

अशोक:- अबे साली.. वही बता रहा हूँ ये बातें बताऊंगा तब तेरे भेजे में सब बात घुसेंगी.. अब चुपचाप आगे सुन|
अशोक के गुस्सा होनें से टीना सहम गई उसनें बस ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई और अपनें दोनों हाथ गाल पर रख कर बैठ गई|
अशोक:- गुड ऐसे ही सुन तू.. अब देख मेरी कोई बहन तो थी नहीं.. तो मैं बचपन से आरती को अपनी बहन मानता था.. उसे मैं सग़ी से भी ज़्यादा मानता था|

‘ओके..’

‘आरती मुझसे 10 साल बड़ी थी वो एकदम छोटे भाई की तरह मेरा ख्याल रखती थी| यहाँ तक की जब उसकी शादी हुई, मैं इतना रोया कि क्या बताऊं तुझे|’

टीना:- हूँउऊ.. ये बातें नहीं पता थी मुझे.. फिर आगे क्या हुआ?
अशोक:- होना क्या था.. उसकी शादी एक अच्छे लड़के से हुई, वो यहीं मुंबई में ही एक बैंक में जॉब करता था| धीरे:-धीरे वक़्त गुज़रता रहा| आरती माँ बनी.. उसको एक लड़की हुई| छोटी गुड़िया के आनें से मैं बहुत खुश था| जैसे:-जैसे वो बड़ी हुई.. मैं उसके साथ खूब खेलता था| फिर दीदी को एक बेटा हुआ.. मेरी ख़ुशी और बढ़ गई| अब तो सारा दिन दीदी के घर आना:-जाना लगा रहता था| दोनों बच्चे मुझसे इतनें घुल गए कि क्या बताऊं, सारा दिन ‘मामा मामा..’ कहते मुझसे चिपके रहते थे|

टीना:- वाउ यार तू तो किसी फिल्म की कहानी जैसे बता रहा है.. फिर क्या हुआ?
अशोक:- फिर जीजू की बैंक नें उनका ट्रान्सफर बंगलोर कर दिया.. पूरे 5 साल बाद दीदी और जीजू वापस मुंबई आए हैं क्योंकि दीदी की तबीयत ठीक नहीं रहती इसलिए जीजू नें वापस अपना ट्रान्सफर मुंबई करवा लिया| इत्तफ़ाक़ की बात ये है हमारे घर के सामनें ही दोनों को घर मिल गया है|

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