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"चुत की आग ने मुझे रंडी बना दिया"-3

अब तक की सेक्स स्टोरी में आप सभी नें पढ़ा था कि सुमन नें संजय के ग्रुप से हाथ मिला लिया था ताकि वो रैगिंग से बच सके|

अब आगे..
टीना:- संजू ये क्या नया फंडा है.. आज तक ऐसा नहीं हुआ कि हम किसी को बिना रैंगिंग के जानें दें और दूसरी बात उसको ग्रुप में शामिल भी कर लिया, ये बात कुछ समझ नहीं आ रही?

संजय:- मेरी जान इसी लिए तो आई एम द ग्रेट संजय.. अभी जो कहूँ.. सब के सब वो करो, बाकी बाद में सबको ये फंडा भी समझा दूँगा|

वीरू:- संजय भाई, कहीं साली तेरे पे दिल तो नहीं आ गया ना?

टीना:- अगर ऐसा हुआ तो जान से मार दूँगी उस कुतिया को.. संजय सिर्फ़ मेरा है और मेरा ही रहेगा हा हा हा हा..

टीना के साथ:-साथ सब हंसनें लगे|
साहिल:- टीना ये क्या फिल्मी डायलॉग मार रही थी तू?

टीना:- अरे मजाक यार.. हाँ मानती हूँ मैं संजय को पसंद करती हूँ मगर उसकी वजह क्या है ये तो सब को पता ही है| अब ये उसको चोद कर छोड़ दे या प्यार करे.. आई डोंट केयर|

अजय:- ही ही टीना.. ऐसी बात मत कर यार, मेरी तो पैन्ट में हलचल शुरू हो जाती है|

टीना:- अबे चल साले चूतिये.. मूंगफली जितना तो लंड है तेरा.. उसमें क्या हलचल होगी|

साहिल:- टीना तू तो साली पक्की रंडी है. जब देखो चुत और लंड की बातें लेकर बैठ जाती है|

टीना:- अबे चुप साले बहनचोद मुझे ज़्यादा ज्ञान मत दे.. जब तू चुदाई करता है मेरी तब तो बड़ा प्यार जताता है साला अब मुझे रंडी बोल रहा है!
वीरू:- अरे यार आपस में झगड़ा मत करो, वैसे टीना चुदाई के वक़्त तो तू खुद कहती है मुझे गालियाँ दो.. रंडी कहो और अभी चिढ़ रही हो|

टीना:- अबे वो टाइम बात कुछ और होती है और अभी कोई सुन लेगा तो क्या कहेगा.. समझा!

विक्की:- यार, इस सबको गोली मारो और टीना तुमनें जो ग्रुप सेक्स का वादा किया था.. उसका क्या हुआ?

टीना:- सालों, सबके लंड लेकर मैंनें देख लिया है| अब एक साथ सब करोगे तो मेरी हालत पतली हो जाएगी और वैसे भी इस पिद्दी को छोड़ के तुम चारों के लंड बड़े पॉवर वाले हैं, ना बाबा मुझे अपनी चुत फड़वानी है क्या?
अजय:- चुत तो तेरी तभी फट गई थी जब संजय नें तुझे पहली बार चोदा था अब कैसा डर..? मान जा ना मज़ा आएगा यार!

टीना:- सालों बहुत बड़े चूतखोर हो सब के सब.. मैंनें कितनी लड़कियों की सील तुम सब से तुड़वाई है, ये सब भूल गए क्या जो अब मेरे पीछे पड़े हो?

संजय:- अरे अब सबका इतना मन है तो मन जा.. एक:-एक करके चुदवाए या एक साथ.. क्या फ़र्क पड़ता है?

टीना:- अच्छा बाबा, ठीक है.. मान गई बस मगर कोई अच्छी सी जगह का इंतजाम कर लो.. साथ में फुल बियर का भी इंतजाम हो तभी मज़ा आएगा|

संजय नें ‘हाँ’ कह दी, तो सबके सब खुश हो गए|
दोस्तो, टेंशन मत लो, ये टीना सच में रंडी टाइप की है, ये संजय की गर्लफ्रेंड जरूर है.. मगर ना जानें आज तक कितनें लंड ले चुकी है, इसलिए इनको जानें दो.. आगे की कहानी देखो|
टीना:- यार संजय प्लीज़.. अब तो बता दे तेरा ये सुमन के साथ क्या करनें का इरादा है?

संजय:- यार मैंनें आज तक इतनी सीधी:-साधी लड़की नहीं देखी वो भी यहाँ मुंबई में, इसकी सादगी और हुस्न की मिलावट को मैंनें गौर से देखा है, मेरा तो इसको बस देखते रहनें का मन किया|

विक्की:- क्या बात है प्यार:-व्यार हो गया क्या तुझे हाँ..?
वीरू:- अरे काहे का प्यार.. सीधे अल्फ़ाज़ में बोल ना उसको चोदना चाहता है|

संजय:- अबे चुप सालों.. ऐसी कमसिन कली को चोदना कौन नहीं चाहेगा? मगर ये साथ दे तो ज़्यादा मज़ा आएगा.. मगर इसको देख कर तुम लोगों को क्या लगता है कि ये साथ दे पाएगी?

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टीना:- अरे क्यों नहीं देगी? जब 4 पैग अन्दर जाएंगे.. साली रंडी बन जाएगी.. उसके बाद चुत चुदाई का पूरा मज़ा देगी|
संजय:- नहीं.. यही तो मैं नहीं चाहता कि ये किसी नशे का शिकार होकर मज़ा दे, तुम ज़रा सोचो ऐसी भोली लड़की.. जिसको अपना साइज़ तक पता ना हो, अगर वो अपनें मन से खुलकर सेक्स करें तो बड़ी:-बड़ी रंडियों को पीछे छोड़ देगी.. क्योंकि इतनें सालों जो शराफत का परदा ओढ़ रखा था, वो हट जाएगा और उसके अन्दर की रंडी बाहर आ जाएगी|
टीना:- इसका मतलब तुमनें कुछ सोच लिया है.. तभी उसको ग्रुप में शामिल किया है|

संजय नें ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई और अपना प्लान उन सबको बताया, जिसे सुनकर सबके चेहरे पे ख़ुशी आ गई|

अजय:- यार उसके चूचे बड़े प्यारे हैं… क्या समोसे से नुकीले तनें हैं.. बस सबसे पहले में उनकी नोकों को अपनें होंठों के बीच दबाना चाहूँगा|

साहिल:- अबे चुप.. सारा दिन एक ही बात.. चलो अन्दर वो हरामी वर्मा सर की क्लास है आज|
साहिल की बात सुनकर सब वहाँ से चले गए.. तो अब हम क्यों इनके साथ जाएं.. चलो आगे बढ़ते हैं|
उधर दोपहर तक विकाश सुकून की नींद सोता रहा, तब तक सोना नें भी अपनें आपको संभाल लिया था और खाना बना कर फ्री हो गई थी|

सोना नें विकाश को उठाया और खुद टीवी देखनें बैठ गई|
तकरीबन आधा घंटा बाद विकाश फ्रेश होकर आया और सोना को पीछे से बांहों में जकड़ लिया|

सोना:- ये क्या है विकाश.. जब करना होता है तुम करते नहीं, चलो खाना खा लो, नहीं तो ठंडा हो जाएगा|

विकाश:- अरे ऐसे कैसे.. मेरी बीवी तो इतनी गर्म है और मुझे खानें के लिए बोल रही है| मेरी जान अभी खानें के बाद कोई दूसरा काम नहीं.. बस आज तेरी सारी शिकायत दूर कर दूँगा.. इतना चोदूंगा.. इतना चोदूंगा कि दो दिन तक तुम खुद ना ना कहोगी|

सोना:- रियली तुम ऐसा करोगे..! तो फिर जल्दी से खाना खा लो ना|
सोना बेचारी सीधी:-साधी.. विकाश की बात सुनकर पिघल गई, उसका गुस्सा न जानें कहाँ का कहाँ चला गया.. उसके बाद दोनों नें अच्छी तरह से लंच किया और टीवी के सामनें बैठे एक:-दूसरे को देख कर मुस्कुरानें लगे|
विकाश:- क्यों जानेंमन, अब क्या इरादा है.. खाना तो हो गया अब अपनी रसीली चुत का रस भी पिला दे|

सोना:- आ जाओ मेरे गोपू.. किसनें रोका है मुझसे भी अब इन्तजार नहीं होता|
इतना कहकर सोना कमरे में गांड मटकाती हुई चली गई| उसके पीछे:-पीछे विकाश भी अन्दर आ गया और उसको बिस्तर पर लेटा कर उसके जिस्म को दबोचनें लग गया|
सोना भी वासना से भरी हुई थी, वो भी पागलों की तरह विकाश को किस करनें लगी|
करीब 5 मिनट तक दोनों एक:-दूसरे को चूमते:-चाटते रहे, इस दौरान विकाश नें सोना को नंगी कर दिया था और उसके निप्पल चूस रहा था|

सोना:- आह.. आ अइ गोपू आह.. अब बस भी करो आह.. पहले मेरी चुत को शांत करो आह.. उसके बाद जितना मर्ज़ी मज़े ले लेना|
विकाश कुछ बोलता या करता, तभी उसके फ़ोन की रिंग कमरे में गूंजनें लग गई.. उसका ध्यान फ़ोन की तरफ़ गया तो सोना नें उसको मना किया|

विकाश:- अरे एक मिनट रूको तो शायद बॉस का फ़ोन हो|

सोना:- आह.. प्लीज़ विकाश आह.. मत उठाओ उफ़ मेरी चुत जल रही है आह..
विकाश नें सोना की एक नहीं सुनी और फ़ोन उठा लिया और बातें करता हुआ थोड़ा टेंशन में आ गया|

कुछ देर विकाश नें फ़ोन पर बात की उसके बाद सोना की तरफ़ देखनें लगा|

सोना:- क्या हुआ विकाश सब ठीक तो है ना.. तुम इतनें टेंशन में क्यों आ गए हो बताओ ना प्लीज़?

विकाश:- गाँव से फ़ोन था.. दादा जी नहीं रहे.. हमें आज रात ही गाँव जाना होगा|
यह बात सुनकर सोना की तो हालत पतली हो गई, कहाँ तो उस पर सेक्स का खुमार चढ़ा हुआ था और कहाँ ये बुरी खबर सुननें को मिली|

सोना खड़ी हुई और विकाश के पास आकर उसके चेहरे को देखनें लगी|
विकाश:- सोना प्लीज़ अब ये मत कहना की मेरी चुत को शांत करो.. मेरा ये सब करनें का अब बिल्कुल मूड नहीं है और मुझे अभी बॉस के घर जाना होगा, कुछ दिनों की छुट्टी लेनी होगी|

सोना:- विकाश तुम ये कैसी बातें कर रहे हो.. ऐसी बात सुनकर मैं ये सब कहूँगी क्या.. हाँ! तुमनें मुझे क्या समझ रखा है?

विकाश:- देखो सोना मेरा दिमाग़ मत खराब करो.. वैसे भी दिन पे दिन तुम्हारी चुदाई की भूख बढ़ती जा रही है.. एक रंडी की तरह तुम हरकतें कर रही हो|
विकाश नें गुस्से में जो कहा उसे सुनकर सोना का पारा सर पर चढ़ गया| एक तो वैसे ही सेक्स उसके दिमाग़ में चढ़ा हुआ था.. ऊपर से ये बातें उसको बहुत बुरी लगीं| वो विकाश से बुरी तरह झगड़नें लग गई और विकाश भी गुस्से में था, तो उसनें भी ना जानें क्या से क्या बोल दिया| उसके बाद कपड़े पहनें और घर से बाहर निकल गया|
सोना वहीं बैठी देर तक रोती रही|
सोना का रोना:-धोना क्या देखना चलो सेक्स स्टोरी के दूसरी तरफ देखते हैं|
दोस्तो, सुमन अब उनके ग्रुप में शामिल हो गई थी| अब रोज उनके साथ उठना बैठना, बातें करना और कभी:-कभी नए स्टूडेंट की रैंगिंग करना, ये सब उनके बीच चलनें लगा और ऐसे ही कुछ दिन निकल गए|
एक दिन कॉलेज की कैंटीन में सुमन उन सबके साथ बैठी हुई थी|
विक्की:- यार टीना इतनें दिन हो गए… मगर ये सुमन हमारे बीच घुल नहीं पा रही है, मैंनें इसको मासूम लड़की समझ कर मौका दिया था इसकी रैंगिंग भी नहीं की थी.. मगर ये है कि हमारे साथ ठीक से पेश आती ही नहीं, अब तुम ही बताओ कि इसका क्या करें?

वीरू:- करना क्या है.. जितना मौका इसको देना था, हमनें दे दिया| अब बस इसकी हार्ड रैंगिंग करनी होगी, ये हमारे ग्रुप के लायक नहीं है|
सुमन इस हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी| उसकी समझ में ही नहीं आया कि ये अचानक क्या हो गया|

सुमन:- ये आप क्या बोल रहे हो.. मैंनें क्या किया? प्लीज़ आप मुझे ऐसे डराओ मत|

संजय:- सुमन ये तुम्हें डरा नहीं रहे.. सही बोल रहे हैं तुमनें वादा किया था तुम हम जैसी बिंदास बन जाओगी, मगर अभी तक तुम्हारे अन्दर एक भी बदलाव नहीं आया|
अब सुमन का क्या होगा.. चलिए सेक्स स्टोरी के अगले पार्ट में देखते हैं

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