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"चाची को चोदने की हसरत" तबदील हुई मा बहन की चुदाई में

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मेरी गर्म कहानी में आपनें पढ़ा कि चाची की चूत और गांड की चुदाई के बाद मैंनें अपनी चचेरी बहन मिना की कुंवारी बुर की चुदाई भी कर दी|

अब आगे:
सुबह उठ कर तैयार हुआ| दीदी नें मेरी ओर देख कर आँख मारी| फिर जाते समय माँ से छुप कर बोली:- क्यों छोटू कैसे हो?

और हंसनें लगी|

मैं कुछ बोले बिना ही क्लिनिक के लिए निकल गया|
जब शाम को आया तो माँ घर पर ही थी| मैंनें अपनें कमरे में जाकर कपड़े बदले और बाहर कुर्सी पर बैठ गया|

मिना मुझे चाय देनें आई|

मैंनें मिना को इशारे से माँ के प्रवचन सुननें जानें के बारे में पूछा| इशारा से ही मिना नें भी नहीं जानें के बारे में बताई|

अब मैं सोचनें लगा कि माँ को कैसे बाहर भेजू ताकि मिना दीदी को चोद सकूं|
मैंनें माँ को पूछा:- माँ आज नहीं गई?

माँ:- आज प्रवचन नहीं है|

मैं:- आज मैं थक गया हूँ| आप ही सब्जी ले आओ न?

माँ:- ठीक है| मैं ही ले आती हूँ|

कुछ देर में माँ झोला ले कर माँ बाजार चली गई|

मुझे मौका मिल गया| मैं जल्दी से मिना को अपनें कमरे में ले गया और जल्दी से नंगी करके दीदी की चूत में लंड पेल दिया|

मिना दीदी बोली:- अरे आराम से पेल| मुझे भी चुदना है|

मैं:- माँ आ जायेगी| इसलिए जल्दी से चोद देता हूँ|

और मैं लंड अंदर बाहर करनें लगा|
कुछ देर में दीदी भी मजा से सिसकारनें लगी:- ओह चोद| मेरे हरजाई कुत्ते भाई और ज़ोर से चोद| ओह कस कर मार मेरी चूत… और ज़ोर लगा कर धक्का मार| ओह मेरा निकल जाएगा| सीईईईई| कुत्ते| और ज़ोर से चोद मुझे… बहन की चूत को चोदनें वाले बहन के लौड़े हरामी| और ज़ोर से मार| अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा कर चोद कुतिया के पिल्ले… सीई… ईईई मेरा निकल जाएगा|
मैं अब और ज़ोर:-ज़ोर से धक्के मारनें लगा|

मेरी बहन अब किसी कुतिया की तरह से कुकिया रही थी और अपनें चूतड़ों को नचा:-नचा कर आगे:-पीछे की तरफ धकेलते हुए मेरे लंड को अपनी चूत में लेते हुए सिसिया रही थी:- ओह| चोद मेरे राजा… मेरे बहन के लंड… और ज़ोर से चोद… ओह… मेरे चुदक्कड़ बालम| उम्म्ह… अहह… हय… याह… सीईईई…

मादक सीत्कारें भरते हुए अपनी दांतों को भींचते और चूतड़ों को उचकाते हुए दीदी झड़नें लगी|
मैं भी झड़नें वाला ही था| दीदी के मुख से झड़ते समय की सिसकारियाँ निकल रही थी:- ओह आई मेरी चूत मी एई में… स्सीई ईई ईई…
ठीक इसी समय मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी के ज़ोर से चिल्लानें की आवाज़ सुन रहा हूँ और जब मैंनें दरवाजे की तरफ मुड़ कर देखा तो ओह… सामनें दरवाजे पर मेरी माँ खड़ी थी|

मैं एकदम भौंचक्का रह गया था और शीघ्रता से अपनें लंड को अपनी बहन की चूत में से निकाल लिया|
मेरी बहन तेज़ी के साथ बिस्तर पर से उतर गई और अपनी स्कर्ट को उसनें चूतड़ों पर चढ़ा लिया| दीदी नें अपना बदन कपड़ों से ढक लिया पर मेरा लंड अभी नंगा था|

माँ की नजर मेरे ही लंड पर थी:- ओह…! तुम दोनों एक साथ| पापियो| क्या मैंनें तुम्हें यही शिक्षा दी थी| ओह… तुमनें मेरा दिमाग़ खराब कर दिया| भाई:-बहन हो कर… ये कुकर्म करते हो!
मेरा लंड का पानी अभी नहीं निकला था| वो निकलनें वाला ही था| अचानक से एक झटके के साथ उसमें से एक तेज धार के साथ पानी निकल गया| मेरे वीर्य की बूदें उछल कर सीधा माँ के ऊपर उसकी साड़ी और पेट पर जा गिरी जो मेरे सामनें खड़ी हो कर डांट रही थी|

लंड अब पानी छोड़ कर लटक गया था| वो मेरे लंड की ओर देख ही रही थी पर कुछ नहीं बोल पाई और मेरे वीर्य को अपनें साड़ी और पेट पर से साफ करनें लगीं|

‘छी छी…’ कहते हुए वो कमरे से बाहर बिना कोई शब्द बोले निकल गईं|
हम दोनों एकदम अचंभित हो कर कुछ देर वहीं पर खड़े रहे| फिर हमनें अपनें कपड़े पहन लिए|

मैंनें मिना दीदी से कहा:- शायद जल्दी के चक्कर में मेन गेट बंद करना ही भूल गया|
हम दोनों के अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम कमरे से बाहर जा सके| मेरी बहन और मैं बहुत डरे हुए थे|

दीदी कमरे से बाहर निकली और मैं अपनें कमरे में ही रह गया|
रात के 11 बजे लगभग माँ जगानें आई:- चलो खाना खा लो!

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खानें का मन नहीं था पर डर से ना नहीं कह पाया| मैं बाहर निकल कर माँ के सामनें नजर झुकाए हुए चुपचाप खाना खाया और अपनें कमरे में सो गया|
सुबह जल्दी से तैयार हो कर समय से पहले ही क्लिनिक के लिए निकल गया|
शाम को लौटा और अपनें कमरे जाकर कपड़े चेंज कर अपनें बेड पर बैठ गया| अब सोच रहा था कि मिना और माँ का सामना तो दिन में हुआ होगा पर मैं क्या करूँ?

फिर मैं अपनें कमरे से बाहर निकला|

माँ अपनें कमरे में थीं|

मैं हिम्मत कर के माँ के कमरे की ओर चला गया| दरवाज़ खुला था और मैं सीधा माँ के पास इस तरह से गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं है| पर मुझे मिना नजर नहीं आ रही थी|
मैंनें माँ से पूछा:- क्या आपनें खाना खाया|

उन्होंनें कोई जवाब नहीं दिया|

फिर मैंनें पूछा:- माँ मिना नजर नहीं आ रही है?

माँ गुस्से से बोली:- क्यों मिना फिर चाहिए| पाप करते समय शर्म नहीं आती है… तुम्हारे चाचा आये थे वो उसे शहर ले गए| अब वे लोग वहीं रहेंगे|

मैं माँ की ओर देख रहा था:- माँ चाय नहीं बनाओगी?

‘बनाती हूँ!’ और उठ कर माँ किचन में चली गई|
माँ कुछ देर में चाय बना कर लाई| मैं चाय लेकर पीनें लगा| माँ अभी भी गुस्से में थी|

मैं माँ से बोला:- माँ इतनी गुस्से में क्यों हो?

माँ:- गुस्सा नहीं करूं तुम पे… तुमनें कोई ऐसी हरकत नहीं की है पाप किया है पाप!
मैं भी एकदम से बोल दिया:- माँ| अगर ये पाप है तो जो तुम चाचा के साथ करती हो वो क्या है?

माँ मेरी ओर देखती रह गई और बोली:- क्या| क्या करती हूँ मैं?

मैं:- तुम भी तो चाचा से चुदती हो!
चोदना शब्द सुन कर अपनें साड़ी को मुँह पर रख ली|
मैं फिर बोला:- तुम अगर गुस्सा करोगी तो मैं पापा से बोल दूँगा|

अब माँ नोर्मल हो गई:- अरे नविन क्या कह रहे हो… भूल जाओ| मैंनें कुछ नहीं देखा है… पापा से कुछ मत कहना!

मैं:- ठीक है| नहीं कहूँगा!
मैं चाय पीनें लगा| फिर माँ मेरे पास बैठ गई| उनके ब्लाउज का आगे का एक बटन खुला हुआ था जिसके कारण उनकी चूचियाँ एकदम बाहर की ओर निकली हुई दिख रही थीं|

‘देखो| मैं तुम्हें डांट तो नहीं रही| मगर फिर भी मैं पूछना चाहती हूँ कि तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? वो तुम्हारी बहन है| क्या तुम्हें डर नहीं लगा?’

वो मुझे से लगातार पूछ रही थी:- बताओ मुझे! क्या तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं महसूस नहीं हुई या पाप का अहसास नहीं हुआ? अपनी बहन को चोदते हुए!!
मैंनें अपना सिर नीचे झुका लिया और कोई जवाब नहीं दिया| मैं मन ही मन सोच रहा था कि वो मेरी सगी बहन थोड़े ही है|

फिर मेरा हाथ पकड़ कर अपनें हाथों में ले लिया और बोली:- बेटे कल से तुमनें मुझे बहुत गर्म कर दिया है| जब तुम्हारा माल मेरे ऊपर गिरा है तब से गर्म हो चुकी हूँ| तुम| तुम्हारी बहन को कल बहुत जबरदस्त तरीके से चुदाई कर रहे थे|
मैं शर्म से लाल हो रहा था और माँ की बातों को ध्यान से सुन रहा था फिर वो आगे बोली:- बेटा| जैसा कि मैं समझती हूँ| तुम गलत ही किया है क्योंकि सामाजिक परम्पराओं के अनुसार यह पाप है|

मैंनें हां में सर हिला के अपनी गलती मान ली|
फिर माँ अचानक बोली:- बेटा| क्या तुम एक और पाप करना चाहोगे? तुम मेरे बेटे हो| तुम तो मुझे चोद नहीं सकते पर तुम अपनें किसी दोस्त को बुला कर मुझे भी चुदवा दो! मैं भी बहुत गर्म हो गई हूँ|

‘माँ| क्या तुम सच में ऐसा कुछ सोच रही हो?’ मैं धीरे से बोला|

‘क्या तुम्हें अब भी कुछ शक़ हो रहा है? ज़रा अपनी माँ के लिय भी कुछ करो|’

‘ठीक है माँ| मैं अभी कुछ करता हूँ| मुझे भूख लगी है मेरे लिए कुछ खाना बनाओ मैं अभी कुछ करता हूँ|’

माँ खुश होकर किचन में चली गई|

मैंनें अपनें दोस्त आलोक को फोन किया कि जल्दी से आ मेरे घर जा… रात का खाना तूनें यहीं पर खाना है|
गर्म चुदाई की गर्म कहानी जारी रहेगी|

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