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“चाचा ने जमकर की माँ की चुदाई”

दोस्तों. आप सभी को संदीप का बहुत बहुत नमस्कार! मैं अपनी सच्ची घटना आपको बताना चाहता हूँ! बात उन दिनों की है जब मेरे पापा बेरोजगार थे! पढाई पूरी होने के बाद भी उनकी नौकरी नही लगी थी! वो बहुत परेशान रहते थे! उन दिनों मेरे पापा के पास साइकिल भी नही थी! पास पैसे भी ना थे! इसलिए वो पैदल पैदल ही हर जगह जाते थे! इसी गरीबी में उनकी शादी हो गयी! मेरी माँ बेहद खूबसूरत औरत थी! वो खूबसूरती का अनमोल नागिना थी!
मेरी माँ को पहली नजर में देखते ही मेरे पापा ने उनको पसंद कर लिया! पर वो मेरी माँ को ढंग से चोद ना पाए! इसकी वजह थी पैसे की कमी और गरीबी! मेरे पापा आये दिन बस परेशान रहते थे! वो पैसा कमाने के लिए टेम्पररी ट्यूशन पढने लगे! पर साइकिल ना होने के कारण वो पैदल ही पैदल जाते थे! मेरे पापा सुबह 5 बजे निकलते थे तो रात 9 बजे घर लौटते थे! मेरी जवान माँ अपनी किस्मत को कोसती थी की इतनी खूबसूरत होने पर भी ना तो कोई उनके रूप की प्रसंशा करने वाला था. और ना ही कोई उनको चोदने खाने वाला था!

वो सुबह उठकर मेरे पापा के लिए खाना बना देती और फिर पूरा दिन सिर्फ इंतजार करती रहती! दोस्तों उन दिनों सिर्फ डी डी 1 आता था! टीवी खरीदना बड़ी बात थी! मेरे पापा तो पहले से ही गरीब थे. तो टीवी कहाँ से खरीदते! मेरी माँ सारा दिन या तो स्वेटर बुनती थी या अख़बार पढ़ती थी! वो कितने अरमान करती थी की अगर दोपहर में उसके हस्बैंड यानि मेरे पापा कमरे में होती तो क्या क्या होता!
वो मेरी माँ को बाँहों में भर लेते! उनके रसीले ऊँठ चूमते! उनके दूध भरे चुचुक पीते और उनको गिराकर चोदते खाते भी! पर दोस्तों. मेरी माँ के लिए तो ये सब बस सपने ही थे! उनके आदमी बेरोजगार था और नौकरी ढूंढ रहा था! मेरी माँ की जवानी यूँ ही बेकार जा रही थी!

हाय हाय ये मजबूरी!

ये मौसम और ये दुरी!

मुझे पल पल है तड़पाये!

तेरी दो टकये की नौकरी में मेरा लाखों का सावन जाए!

बस दोंस्तों. बस यही हाल था! पास पड़ोस कभी कभी मेरी जवान माँ किसी पड़ोसन ने बात करके वक़्त बिताती थी!
मेरी माँ जी बोरिंग जिंदगी में ट्विस्ट जब आया जब मेरा चाचा मेरे पापा के घर रहने आया! मेरे दादा ने मेरे पापा से कहा कि बड़े होने के नाते मेरे चाचा को वो पढ़ाये लिखाये और नौकरी लगाने में मदद करे! अब मेरी माँ घर पर अकेली नही थी! मेरा चाचा जो बस 25 साल का बाका जवान छोरा था. मेरी जवान 18 साल की माँ के पास रहने आ गया! वो बड़ा जिम्मेदार आदमी था! मेरे पापा के लिए सरकारी नल से सैकड़ों बाल्टी पानी भर के लाता था!

सुबह ही मंडी जाकर सस्ते रेट पर सब्जी लाता था! मेरी पापा. मेरी माँ के कपड़े धोता था! मेरी पापा के जूतों पर पोलिश करता था! वो बड़ा जिम्मेदार आदमी थी! उसका नाम मनोज था! मेरे पापा के बाहर जाने के बाद वो नहाता था! नहाते समय मेरी माँ मेरे चाचा के कसरती बदन को देखती थी तो मन ही मन सोचती थी की कास उसका देवर मनोज ही उनका मर्द होता! माँ मेरे चाचा को खाना देती थी तो मनोज के सौंदर्य को निहारती थी बड़ी देर तक!
बड़ी बड़ी आँखे. सुन्दर गुलाबी लब. बड़ा था पान के आकार का गोरा चेहरा. 7 फिट ली लम्बाई! धीरे धीरे मेरी माँ मेरे चाचा मनोज को देखकर आसक्त हो गई! वो दूर बैठकर स्वेटर बुनती रहती और मनोज को ताड़ा करती! एक दिन मेरी माँ ने मनोज के चित्र बनाया और बाथरूम में जाकर उसकी तस्वीर को देखते हुए खुद अपनी रसीली छातियां पिने लगी और अपनी चूत में ऊँगली करने लगी! जब मेरा चाचा कुछ देर बाद बाथरूम गया तो उसे उसकी तस्वीर वहां मिली!
मेरा चाचा दंग रह गया! उनकी भाभी उसको इतना पसंद करती है कि उसकी फोटो देखकर मुठ मार रही थी! धीरे धीरे मेरी 18 साल की जवान माँ चदासी हो गयी! मेरा बाप जब 10 बजे घर पहुँचता था तो खाना खाकर सो जाता था! मेरी माँ की चुदवाने की आस अधूरी रह जाती थी! दोंस्तों. 18 साल में तो हर लौण्डिया चुदासी होती है. अगर मेरी माँ किसी से चुदवाना चाहती थी तो क्या गलत कर रही थी! मेरी नानी जब हाल चाल लेती थी तो मेरी माँ कह भी नही पाती थी कि उसको लण्ड तो खाने को मिलता ही नही है!
मेरी माँ कभी कभी अपना दुःख पड़ोसिन औरतों से कहती थी! 18 साल के उभरते यौवन में मेरी माँ के मादक जिस्म में चुदाई वाले हार्मोन्स भी बहुत बन रहे थे. इसलिये मेरी माँ किसी भी कीमत पर एक हट्टा कट्टा लण्ड लेना चाहती थी! धीरे धीरे मेरी माँ जान गई की मेरा चाचा मनोज ही उसकी चूदवाने की तलब दूर कर सकता है! मेरी माँ अब मौका मिलने पर अपना करारा कड़क जिस्म अपने मेरे चाचा को दिखा!देती!थी! जब मेरा चाचा पढ़ने बैठता था. मेरी माँ पोछा लगाने पहुँच जाती थी! वो झुक झुक पर पोछा लगाती थी तो उनके मदमस्त चुचुक ब्लॉउज़ से दिख जाते थे!
मेरी माँ नहाने जाती जाती थी तो अपने देवर यानि मेरे चाचा मनोज को पानी भरने के लिए बुलाती थी! पेटीकोट और ब्लॉउज़ में ही पानी भरने के लिए मेरे चाचा से कहती थी! मेरे चाचा का लण्ड तन जाता था! गदरायी अनचुदी भाभी के लहराते. बलखाते जिस्म को देखकर मेरा चाचा बस यही सोचता था कि कास अगर ये औरत मेरी भाभी नहीं होती तो उसे नंगा करके कसके चोद देता! भले चाहे बाद में उसे जेल ही क्यों ना हो जाती!

धीरे धीरे परिस्थितियां बदलने लगी! मेरी जवान गोरी खूबसूरत माँ आये दिन मेरे चाचा पर आये दिन डोरे डालने लगी! मेरा चाचा भी उसकी तरह मुड़ने लगा! नतीजा हुआ की मेरा चाचा बी ए की परीक्षा में फेल!हो गया! इसके लिये मेरी माँ ही जिम्मेदार थी! वो अपना!हुस्न आये दिन दिखाकर उसे इशारा करती थी. और इसका नतीजा हुआ कि वो पढाई में फोकस नही कर सका! फेल हो जाने पर मेरा!चाचा बहुत!दुखी हो गया! वो सीधा शराब की दुकान पर गया और 4 बोतलें गटक गया!

दोपहर के!1 बजे!वो घर पंहुचा! मेरी माँ नहाने जा रही थी! मेरी चाचा ने मेरी माँ का हाथ पकड़ लिया!

देवर जी!!ये क्या कर रहे हो?? !मेरी चुदासी माँ से तिरिया चरित्र दिखाते हुए पूछा! असलियत में वो मेरे चाचा से चुदवाना चाहती थी! मेरे चाचा ने उसे एक कंटाप जड़ दिया! मेरी माँ झन्ना गयी!

साली कुटिया!! तेरी वजह से मैं बी ए में फेल हो गया! अब मैं भाई को क्या मुँह दिखाऊंगा?? साली आज तेरी गर्मी मैं जरूर मिटा दूंगा! तेरी ख़ाहिश!मैं जरूर पूरी करूँगा! मेरा चाचा बोला!
उसने दरवाजा बंद कर दिया! अपनी बेल्ट निकली और मेरी मां के दो चार बार चिपका दी! मेरी माँ कुछ घबरा गई! वो बचने के लिए पीछे हटी थी मेरे चाचा ने मारे गुस्से के उस पर दो तीन बालटी पानी डाल दिया! मेरी जवान गदरायी माँ का अंग अंग भीग गया और उसके चुचुक जो बड़े बड़े गोल गोल थे. पीले रंग के ब्लॉउज़ पर से दिकने लगे! मेरा चाचा आज मेरी माँ का बलात्कार करने वाला था! मेरी चुदाई माँ की चूत मारके उसका भोसड़ा बनाने वाला था! 4 बोतल शराब पीने के बाद मेरा चाचा होश में नही था! उसके सर पर खून सवार था!
मेरे चाचा ने दो चार थापड़ मार के मेरी माँ के गुलाबी गलों को लाल कर दिया! मेरी माँ थोड़ा डर गई!
तुझे लण्ड चाहिए ना?? आज तुझे मैं खिलाता हूँ!  मेरा चाचा मनोज बोला! उसने दोनों हाथों ने मेरी को धक्का दिया! मेरी माँ फिसल गयी और पानी में जमीन पर गिर गयी! वो आंगन में ही गिर गयी थी! मेरे चाचा ने एक बाल्टी पानी और उनपर दाल दिया! वो जल्दी जल्दी साँस लेने लगी! उसका मुंह पानी में डूबा जा रहा था! मेरे चाचा ने अपने दोनों हाथ मेरी माँ के झीने पीले रंग के ब्लॉउज़ पर रखे और जोर से नीचे खीचा!
ब्लॉउज़ कमजोर था. चर्र की आवाज करता फट गया. मेरी जवान चुदासी माँ के 2 बेहद खूबसूरत स्तन प्रकट हो गए! बहुत गोल. गोर. कसे. कोमल और बहुत चिकने! मेरे चाचा ने ऐसा हुस्न आज तक नही देखा था! एक बार तो वो कमजोर पड़ रहा था मेरी जवान माँ के हुस्न के सामने! पर शराब ने अपना काम कर दिया! मेरे चाचा ने एक दो चपट मेरी माँ के गोल गोल चुचकों पर लगा दिए. जरा कस के! मेरी माँ के चुचुक इधर उधर हिलने लगे!
साली रंडी. बहुत चुदवाने का शौक था तो अपने बाप से चुदवा लेती! तेरी गर्मी शांत कर देता! मेरा भाई परेशान रहता है!तो मुझे लाइन मरती है!! साली कुटिया! तेरा रूप रंग देख देख कर ही मैं अपनी पढाई पर ध्यान नही दे सका!! और आज फेल हो गया!  मेरा चाचा बड़ी गुस्से में बोला! और उसने पीले पेटीकोट को पकड़ा और इतनी जोर से खीचा कि पेटीकोट भी चर्र की आवाज करता फट गया!
मेरी माँ की गाड़ फट गई! वो मेरे चाचा से चुदवाना तो चाहती थी. पर प्यार से नर्म बिस्तर पर! पर आज तो मेरा चाचा उसे ठंडे फर्श पर चोद चोद के उसकी चूत की गर्मी दूर करने वाला था! मेरी माँ का चेहरा पिला पड़ गया! उसका भोला भाला देवर ऐसा रूप भी बना सकता है. मेरी माँ ने कभी सपने में नही सोचा था! मेरी माँ ने इत्तफाक से उस दिन ना तो ब्रा पहनी थी. ना चड्डी पहनी थी! अब भी पानी से भीगी थी. वो गीली थी और नँगी हो गयी थी! मेरी जवान चुदासी माँ समज नही पायी की अपनी छतियों को ढके या चूत को! वो अपने दोनों हाथों से अपनी चूत ढकने लगी!

हाय हाय मादरचोद!!. राण्ड!! अब क्यों तिरिया चरित्र दिखाती है! अब क्यों नही चुदवाती खुलकर!! मेरा चाचा लाल आँखे दिखाता बोला! उसने मेरी माँ के चिकने गोरे पैर पकड़ लिए और उसकी टाँगें खोल दी!

देवर जी!! ये ये ये!! अअअअआप ठीक नही कर रहे!! मैं पुलिस को बुला दूंगी!!  मेरी माँ हकलाते हुए बोली! उसके होठ काँपने लगे!

सुन बहनचोद!! आज तो मैं तुझे जमकर चोदूंगा! तेरी वजह से मैं फेल हो गया! मेरा एक साल बर्बाद हो गया फिर चाहे मुझे फाँसी ही क्यों ना हो जाए  मेरा चचवा बोला और उसने मेरी माँ की चूत में दो उँगलियाँ पेल दी. और जोर से हाथ अंदर मारा! मेरी माँ बचाव बचाव चिल्लाने लगी पर किसी ने नही सुना!
मेरा चचवा जल्दी जल्दी मेरी माँ के योनि स्थल को फेटने लगा बिना किसी प्यार के बेदर्दी से वाहसिपने से! आज पहली बार मेरे चाचा ने मेरी माँ की बेहद सुंदर गुझिया को देखा! साफ चिकनी चूत जिसका कोई जवाब नही था! मेरा चचवा उनकी बुर को चूमना चाटना चाहता था. पर उसे याद आ गया कि इसी छिनाल की वजह से वो फेल हो गया! मेरे चाचा के मुंह से शराब की तेज महक आ रही थी! बुर फेटने से फच फच! की पनीली आवाज आ रही थी! चूत बहुत टाइट थी. मेरे चाचा को ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही थी!
मेरी माँ को थोड़ा मजा मिलने लगा! उसकी चूत का रास्ता अंदर तक साफ होने लगा और खुलने लगा ऊँगली करने से! साथ ही उनकी चूत अपना मक्खन भी चोदने लगी! मेरे चाचा ने दोनों ऊँगली बाहर निकली और सारा मक्खन चाट गया!

वैसे मॉल तो तू मस्त भाभी!!  मेरा चचवा बोला! मेरी माँ जनि की उसका गुस्सा कम हो गया! पर फिर उसने मेरी माँ की गाण्ड में दोनों बीच वाली उँगलियाँ दाल दी और जोर का हाथ अंदर मारा! मेरी माँ की माँ चुद गयी! थोड़ा खून उँगलियों में आ गया!
बचाव!! बचाव!! कोई बचाव मुझसे!!  वो रोति हुई चिल्लाई!

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चाचा मेरी माँ की गाण्ड में गहराई तक ऊँगली करता रहा! उस समय मेरी माँ रोई जा रही थी! उसे बहुत दर्द हो रहा था! वो छटपटा रही थी! पर मेरे चचवा को तरह नही आया! वो गहराई तक गाण्ड में ऊँगली करता रहा! वो और जल्दी जल्दी ऊँगली करने लगा!! तो मेरी माँ माफ़ी मांगने लगी!

देवर जी! मुझसे गलती हो गयी! माफ़ करदो देवरजी! मेरी माँ रोते बिलखते मिन्नते करने लगी! मेरा चचवा ये देखकर खुश हुआ की उनकी छिनाल चुदासी भाभी लाइन पर आ गयी है! गाण्ड में खूब अंदर तक अंगुल करने के बाद मेरे चाचा ने ऊँगली निकली और चिल्लाया

चल कुतिया! चाट अपनी गाण्ड के रस को!!  वो चीखा!

मेरी माँ सहम गयी और अपनी गाण्ड के रस को चाटने लगी!

मेरे चचा ने अपने कपड़े उतार फेके और बोला  चल हरामजादी!! चूस मेरा लण्ड!! मेरी नँगी माँ जो भीगी भी थी और सिर से पांव तक गीली थी सहम गयी. मेरा चाचा भी ज़मीन पर पानी में लेट गया लण्ड खोलकर! मेरी माँ उसका लण्ड चूसने लगी! मेरा चाचा उसके चिकने चुत्तड़ो को सहलाने लगा! हाथ को पीछे ले जाकर उनकी चूत में उँगल करते हुए गर्म करने लगा! फिर अचानक ने उसने मेरी माँ को 4 -5 तमाचे और जड़ दिए

ठीक से रंडी! ठीक से कर! मेरे लौड़े पर हाथ घुमा घुमाकर चूस!!  वो चिल्लाया!
मेरी माँ रोने लगी! पर डरती हुई अपने हाथ घुमा घुमा पर सिर जोर जोर से ऊपर नीचे करते हुए मेरे गबरू जवान चाचा का 10 इंच लंबा लण्ड चूसने लगी! वो इतना घबरा गई की उसकी गोलियां भी चूसने लगी! मेरे चाचा को सकून मिलने लगा! ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है!

चल लेट जा छिनाल! तेरी चुट की आग आज मिटाता हूँ!  काफी देर तक लण्ड चुसव्वल करवाने के बाद मेरा चचा बोला! उसने मेरी माँ के मुँह में मूत दिया!

चल पीजा पीज़ा इसे!!  वो चिल्लाया! मेरी माँ डर गई और उसका मूत भी पी गयी! मेरे चचवा ने अपने बड़े से 10 इंची लण्ड को मेरी माँ के उतपत्ति स्थल यानि भोंसड़े पर रखा और सट्ट ने धक्का मार दिया!
लोहे जैसा लण्ड मुलायम चुट को फाड़ता हुआ खूंटे जैसा अंदर गड़ गया! कहीं कोई प्यार नही ना इस चुदाई में केवल थी वासना और सिर्फ वासना! मेरी माँ की आज तो माँ चुद गयी थी! उसकी आँखों के आगे अंघेरा छा गया! मेरे चचवा ने उनकी छतियों को कस के पकड़ लिया और लगा चोदने! ये तो बड़ी नाइंसाफी थी! जो स्तन दुनिया के सबसे खूबसूरत गोल. गोरे. कसे. मुलायम और चिकने चुचुक थे उसे मेरे चचवा ने वाहसीपने से जकड़ रखा था! वो गचागच मेरी माँ को चोदे जा रहा था!
हाय मैं मर जाऊँगी!! हाय मैं मर जाऊंगी!!  वो रोने चिल्लाने लगी!

हाँ राण्ड! तू मरेगी जरूर आज! मुझे भी लग रहा है!  मेरा चाचा बोला! फिर को वाहसीपने ने मेरी माँ के बेहद!खूबसूरत चुचकों की काली भूरी घुंडियों को बेदर्दी से मसलने लगा! मेरी माँ की आँखों से गरम आँशु निकल कर बहने लगे! वो दर्द में थी बहुत दर्द में! मेरे चचवा को ये देखकर बड़ा मजा आ रहा था! उसने मेरी माँ के दोनों पैर उठाकर अपने कंधों पर रख लिये और हचा हचा हज करने लगा!
हमारे इधर जब कोई मर्द अपने घर की औरत को नन्गा करके बेदर्दी से चोदता खाता है तो उसे हज करना बोलते है! मेरा चाचा भी हज करने लगा! मेरी चचा ने माँ के गरम आंशू ने उनकी मांग भर दी!

रंडी!! अब तेरी यही सजा है कि आज से तू मेरी बीबी भी हो गयी! जबतक मेरी शादी नही होती. साली छिनाल ! तू मेरा बिस्तर गरम् करेगी वो भी हर रोज!!  मेरा चचवा चिल्लाया और गाचागच चोदने लगा!
आज तो मेरी माँ का छिनालपन हरम्पन सब दूर हो गया! मेरे चाचा ने उसे एक घण्टे तक गुस्से में चोदा! मेरी माँ की चुट छिल गयी! थोड़ा खून भी आ गया! अब मेरा चाचा मेरी माँ के खूबसूरत छतियों का स्तनपान करने लगा!

चल छिनाल! अब कुतिया बन!! वो बोला! मेरी माँ ये जानते हुए की अगर उसकी बात नही मानी तो अभी और मारेगा. कुतिया बन गयी! उसने अपने गोरे गोरे मांसल कंधे पानी पड़े ठंडे फर्श पर रख दिए. अपना पिछवाड़ा ऊपर उठा दिया! मेरे चाचा ने चिकने चुत्तड़ो पर 3 -4 छपट मारे! चुत्तड़ लाल हो गए! चाचा ने एक हाथ हाथ से चुट की लाइन मिलायी और फिर फिर पीछे से चोदने लगा!
आधे घण्टे तक चोदने के बाद फिर से उसने मेरी माँ के मुँह पर मूत दिया! मेरी माँ का हसीन चेहरा उसके मूत से भीग गया! वो चेहरा साफ भी ना कर पायी मेरा चाचा फिर से उसपर झपटा! उसने उसे दौड़ा लिया! मेरी माँ अंदर भाग गई और दरवाजा बंद कर लिया!

खोल रंडी!! अब क्यों भाग रही है?? उसने शराब के नशे में 8 -10 लात दरवाजे पर मार दी! दरवाजे की कुण्डी टूट गयी! उसने मेरी माँ को उसी तरह दबोच लिया जैसे जंगली कुत्ते जंगली मुर्गी को दबोच लेते है! मेरे चाचा ने 5 -6 लात मेरी जवान चुदासी माँ को जमा दिए!
और जबरन उसकी गाण्ड मारी! मेरी माँ की टाइट चुट और टाइट गाण्ड से खून बहाने लगा! फिर मेरा चाचा शराब के नशे से सो गया! मेरी माँ ने नहाया! रात 11 बजे मेरे पापा आये!

छिनाल!! अगर किसी को इसके बारे में बताया तो तू जिन्दा नही बचेगी!! ये बात समझ लेना!! मेरा चाचा गुर्राया!
इस घटना के बारे में मेरी माँ ने किसी को नही बताया! इसमें उसकी ही बेइज्जती होती! फिर हर दोपहर मेरा चाचा अंदर कमरे में चला जाता! और पुकारता भाभी!!

मेरी माँ समझ जाती की आज फिर उसका देवर उसे दोपहर भर नंगा करके लण्ड चुसाएगा और चुट मारेगा! पर मेरी जवान माँ कर भी क्या सकती थी! वो अंदर चली गयी! मेरे चाचा ने दरवाजा अच्छे से बंद कर लिया और पूरी दोपहर उसे रंडियों की तरह चोदता नोचता खाता रहा!

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