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“गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे”-5

फिर मैं परिमल के साथ दीक्षा लेनें चले गयी| दीक्षा वाले कमरे में बहुत सारे देवी देवताओं के चित्र लगे हुए थे| वो कमरा मेरे कमरे से थोड़ा बड़ा था| एक सिंहासन जैसा कुछ था जिसमें एक मूर्ति के ऊपर फूलमाला डाली हुई थी और सुगंधित अगरबत्तियाँ जल रही थीं|

उस कमरे में गुरुजी और समीर थे| परिमल मुझे अंदर पहुँचाके कमरे का दरवाज़ा बंद करके चला गया| उस कमरे में आनें के बाद मैं बहुत नर्वस हो रही थी|

गुरुजी – रश्मि , अब तुम्हारे दीक्षा लेनें का समय आ गया है| यहाँ हम सब लिंगा महाराज के भक्त हैं और थोड़ी देर में दीक्षा लेनें के बाद तुम भी उनकी भक्त बन जाओगी| लेकिन तुम्हारी दीक्षा हमसे भिन्न होगी क्यूंकी तुम्हारा लक्ष्य माँ बनना है| जय लिंगा महाराज| रश्मि, लिंगा महाराज बहुत शक्तिशाली देवता हैं| अगर तुम अपनें को पूरी तरह से उनके चरणों में समर्पित कर दोगी तो वो तुम्हारे लिए चमत्कार कर सकते हैं| लेकिन अगर तुमनें पूरी तरह से अपनें को समर्पित नही किया तो अनुकूल परिणाम नही मिलेंगे| जय लिंगा महाराज|

फिर समीर नें भी जय लिंगा महाराज बोला और मुझसे भी यही बोलनें को कहा|

मैंनें भी जय लिंगा महाराज बोल दिया लेकिन मुझे इसका मतलब पता नही था|

गुरुजी – रश्मि, लिंगा महाराज की दीक्षा लेनें से तुम्हारे शरीर और आत्मा की शुद्धि होगी| इसके लिए पहले तुम्हें अपनें शरीर को नहाकर शुद्ध करना होगा| तुम यहाँ बनें हुए बाथरूम में जाओ| वहाँ बाल्टी में जो पानी है उसमें खास किस्म की जड़ी बूटी मिली हुई हैं | तुम उस पानी से नहाओ और अपनें पूरे बदन में लिंगा को घुमाओ|

ऐसा कहकर गुरुजी नें मुझे वो लिंगा दे दिया , जो एक काला पत्थर था| लगभग 6 – 7 इंच लंबा और 1 इंच चौड़ा था| और एक सिरे पर ज़्यादा चौड़ा था| फास्ट फ़ूड सेंटर में जैसा एग रोल मिलता है देखनें में वैसा ही था , मतलब एक छोटे बेस पर एग रोल रखा हो वैसा|

लेकिन मेरे मन में ये बात नही आई की ये जो आकृति है , गुरुजी इसके माध्यम से पुरुष के लिंग को दर्शा रहे हैं|

गुरुजी – रश्मि, जड़ी बूटी वाले पानी से अपनें बदन को गीला करना | उसके बाद वहीं पर मग में साबुन का घोल बना हुआ है , उस साबुन को लगाना| फिर अपनें पूरे बदन में लिंगा को घुमाना|

“ठीक है गुरुजी|”

गुरुजी – रश्मि तुम गर्भवती होनें के लिए दीक्षा ले रही हो , इसलिए लिंगा को अपनें ‘ यौन अंगों ‘ पर छुआकर , तीन बार जय लिंगा महाराज का जाप करना|

मैनें हाँ में सर हिला दिया| लेकिन गुरुजी के मुँह से ‘ यौन अंगों ‘ का जिक्र सुनकर मुझे बहुत शरम आई और मेरा चेहरा सुर्ख लाल हो गया|

गुरुजी – रश्मि, औरतें सोचती हैं की उनके ‘ यौन अंगों ‘ का मतलब है योनि| लेकिन ऐसा नही है| पहले तुम मुझे बताओ की तुम्हारे अनुसार ‘ यौन अंग ‘ क्या हैं ? शरमाओ मत , क्यूंकी शरमानें से यहाँ काम नही चलेगा|

गुरुजी का ऐसा प्रश्न सुनकर मेरा दिल जोरों से धड़कनें लगा| मैं हकलानें लगी और जवाब देनें के लिए मुझे शब्द ही नही मिल रहे थे|

“जी वो……|||‘ यौन अंग ‘ मतलब ………जिनसे संभोग किया जाता है|”

दो मर्दों के सामनें मेरा शरम से बुरा हाल था|

गुरुजी – रश्मि , तुम्हें यहाँ खुलना पड़ेगा| अपना दिमाग़ खुला रखो| खुलकर बोलो| शरमाओ मत| ठीक है, अपनें उन ‘ यौन अंगों ‘ का नाम बताओ जहाँ पर लिंगा को छुआकर तुम्हें मंत्र का जाप करना है|

अब मुझे जवाब देना मुश्किल हो गया| गुरुजी मुझसे अपनें अंगों का नाम लेनें को कह रहे थे|

“जी वो ……वो …|मेरा मतलब………|| चूची और चूत|” हकलाते हुए काँपती आवाज़ में मैंनें जवाब दिया|

गुरुजी – ठीक है रश्मि| मैं समझता हूँ की एक औरत होनें के नाते तुम शरमा रही हो| तुमनें सिर्फ़ दो बड़े अंगों के नाम लिए| तुमनें कहा की तुम अपनी चूची पर लिंगा को घुमाकर मंत्र का जाप करोगी| लेकिन तुम अपनें निपल्स को भूल गयी ? जब तुम अपनें पति के साथ संभोग करती हो तो उसमे तुम्हारे निपल्स की भी कुछ भूमिका होती है की नही ?

मैनें शरमाते हुए हाँ में सर हिला दिया| अब घबराहट से मेरा गला सूखनें लगा था| कुछ ही मिनट पहले मैं परिमल को टीज़ कर रही थी पर शायद अब मेरा वास्ता बहुत अनुभवी लोगों से पड़ रहा था, जिनके सामनें मेरे गले से आवाज़ ही नही निकल रही थी|

गुरुजी – रश्मि तुम अपनें नितंबों का नाम लेना भी भूल गयी| क्या तुम्हें लगता है की नितंब भी ‘यौन अंग’ हैं ? अगर कोई तुम्हें वहाँ पर छुए तो तुम्हें उत्तेजना आती है की नही ?

हे ईश्वर ! मेरी कैसी परीक्षा ले रहे हो| मैं क्या जवाब दूं|
मैं सर झुकाए गुरुजी के सामनें बैठी थी| ज़ोर ज़ोर से मेरा दिल धड़क रहा था| मेरे पास बोलनें को कुछ नही था| मैंनें फिर से हाँ में सर हिला दिया|

गुरुजी की आवाज़ बहुत शांत थी और एक बार भी उन्होनें मेरी बिना ब्रा की चूचियों की तरफ नही देखा था| उनकी आँखें मेरे चेहरे पर टिकी हुई थी और उनकी आँखों में देखनें का साहस मुझमे नही था|

गुरुजी – रश्मि देखा तुमनें| हम कई चीज़ों को भूल जाते हैं| तुम्हारे शरीर का हर वो अंग , जिसमे संभोग के समय तुम्हें उत्तेजना आती है, हर उस अंग पर लिंगा को छुआकर तुम्हें तीन बार मंत्र का जाप करना है| तुम्हारी चूचियाँ, निपल्स, नितंब, चूत, जांघें और तुम्हारे होंठ| तुम्हें पूरे मन से मेरी आज्ञा का पालन करना होगा तभी तुम्हें लक्ष्य की प्राप्ति होगी|

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समीर – मैडम, ये कपड़े आप नहानें के बाद पहनोगी|

फिर समीर नें मुझे भगवा रंग की साड़ी , ब्लाउज और पेटीकोट दिए| मेरे पास पहननें को कोई अंडरगार्मेंट नही था|

मैं कपड़े लेकर बाथरूम को जानें लगी| तभी मुझे ख्याल आया गुरुजी फर्श में बैठे हुए हैं तो उनकी नज़र पीछे से मेरे हिलते हुए नितंबों पर पड़ रही होगी| मेरे पति अनिल नें एक बार मुझसे कहा था की जब तुम पैंटी नही पहनती हो तब तुम्हारे नितंब कुछ ज़्यादा ही हिलते हैं|

लेकिन फिर मैंनें सोचा की मैं गुरुजी के बारे में ऐसा कैसे सोच सकती हूँ की वो पीछे से मेरे हिलते हुए नितंबों को देख रहे होंगे| गुरुजी तो इन चीज़ों से ऊपर उठ चुके होंगे|

फिर मैं बाथरूम के अंदर चली गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया| वहाँ इतनी तेज़ रोशनी थी की मेरी आँखे चौधियानें लगी| मुझे बड़ी हैरानी हुई की बाथरूम में इतनी तेज लाइट लगानें की क्या ज़रूरत है ?
बाथरूम के दरवाज़े में कपड़े टाँगनें के लिए हुक लगे हुए थे और ये मेरे कमरे की तरह ऊपर से खुला हुआ नही था|

मैंनें साड़ी उतार दी लेकिन उस तेज रोशनी में बड़ा अजीब लग रहा था| ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं सूरज की तेज रोशनी में नहा रही हूँ| मैंनें अपनें ब्लाउज के बटन खोले और मेरी चूचियाँ ब्रा ना होनें से झट से बाहर आ गयीं| फिर मैंनें पेटीकोट भी उतारकर हुक पे टाँग दिया| अब मैं पूरी नंगी हो गयी थी|

मैंनें बाल्टी में हाथ डालकर अपनी हथेली में जड़ी बूटी वाला पानी लिया| उसमे कुछ मदहोश कर देनें वाली खुशबू आ रही थी | पता नही क्या मिला रखा था|

फिर मैंनें पानी से नहाना शुरू किया और मग में रखे हुए साबुन के घोल को अपनें बदन में मला|
उसके बाद मैंनें लिंगा को पकड़ा , जो पत्थर का था लेकिन फिर भी भारी नही था| लिंगा को मैंनें अपनी बायीं चूची पर लगाया और जय लिंगा महाराज का जाप किया| और फिर ऐसा ही मैंनें अपनी दायीं चूची पर किया| उस पत्थर के मेरी नग्न चूचियों पर छूनें से मुझे अजीब सी सनसनी हुई और कुछ पल के लिए मेरे बदन में कंपकंपी हुई|

इस तरह से अपनें पूरे नंगे बदन में मैंनें लिंगा को घुमाया| और अपनी चूत , नितंबों , जांघों और होठों पर लिंगा को छुआकर मंत्र का जाप किया|
ऐसा करनें से मेरा बदन गरम हो गया और मैंनें उत्तेजना महसूस की| फिर मैंनें टॉवेल से गीले बदन को पोछा और आश्रम के कपड़े पहननें लगी|

[ ये तो मैंनें सपनें में भी नही सोचा था की अपनें नंगे बदन पर जो मैं ये लिंगा को घुमा रही हूँ, ये सब टेप हो रहा है और इसीलिए वहाँ इतनी तेज लाइट का इंतज़ाम किया गया था| ]

आश्रम के कपड़ों में पेटीकोट तो जैसे तैसे फिट हो गया पर ब्लाउज बहुत टाइट था| मुझे पहले ही इस बात की शंका थी की कहीं इनके दिए हुए कपड़े मिसफिट ना हो| मेरी चूचियों के ऊपर ब्लाउज आ ही नही रहा था और ब्लाउज के बटन लग ही नही रहे थे | अभी ब्रा नही थी अगर ब्रा पहनी होती तो बटन लगनें असंभव थे| जैसे तैसे तीन हुक लगाए लेकिन ऊपर के दो हुक ना लग पानें से चूचियाँ दिख रही थीं| मैंनें साड़ी के पल्लू से ब्लाउज को पूरा ढक लिया और बाथरूम से बाहर आ गयी|

गुरुजी – रश्मि , जैसे मैंनें बताया , वैसे ही नहाया तुमनें ?

“जी गुरुजी “

गुरुजी – ठीक है| अब यहाँ पर बैठो और लिंगा महाराज की पूजा करो|

गुरुजी नें पूजा शुरू की , वो मंत्र पढ़नें लगे और बीच बीच में मेरा नाम और मेरे गोत्र का नाम भी ले रहे थे| मैं हाथ जोड़ के बैठी हुई थी| लिंगा महाराज से मैंनें अपनें उपचार के सफल होनें की प्रार्थना की|

समीर भी पूजा में गुरुजी की मदद कर रहा था| करीब आधे घंटे तक पूजा हुई| अंत में गुरुजी नें मेरे माथे पर लाल तिलक लगाया और मैंनें झुककर गुरुजी के चरण स्पर्श किए|

जब मैं गुरुजी के पाँव छूनें झुकी तो हुक ना लगे होनें से मेरी चूचियाँ ब्लाउज से बाहर आनें लगी| मैं जल्दी से सीधी हो गयी वरना मेरे लिए बहुत ही असहज स्थिति हो जाती|

गुरुजी – रश्मि , अब तुम्हारी दीक्षा पूरी हो चुकी है| अब तुम मेरी शिष्या हो और लिंगा महाराज की भक्त हो| जय लिंगा महाराज|

“ जय लिंगा महाराज” , मैंनें भी कहा|

गुरुजी – अब मैं कल सुबह 6:30 पर तुमसे मिलूँगा| और आश्रम में तुम्हें क्या करना है ये बताऊँगा| अब तुम जा सकती हो रश्मि|

मैं उस कमरे से बाहर आ गयी और अपनें कमरे में चली आई , समीर भी मेरे साथ था|

समीर – मैडम, गुरुजी के पास ले जानें के लिए मैं कल सुबह 6:15 पर आऊँगा| और आपके अंडरगार्मेंट्स भी ले आऊँगा| कुछ देर में परिमल आपका डिनर लाएगा|

फिर समीर चला गया|

मैं बहुत तरोताजा महसूस कर रही थी , शायद उस जड़ी बूटी वाले पानी से स्नान करनें की वजह से ऐसा लग रहा था| गुरुजी की पूजा से भी मैं संतुष्ट थी|

फिर थोड़ी देर मैंनें बेड में आराम किया|
कुछ समय बाद किसी नें दरवाज़ा खटखटा दिया|

Antarvasna
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