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“गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे”-2

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गुरुजी का आश्रम श्यामपुर में था , उत्तराखंड में एक छोटा सा गांव जो चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ था| आश्रम के पास ही साफ पानी का एक बड़ा तालाब था| कोई पोल्यूशन ना होनें सा उस गांव का वातावरण बहुत ही अच्छा था और जगह भी हरी भरी बहुत सुंदर थी| ऐसी शांत जगह आकर किसी का भी मन प्रसन्न हो जाए|

मुझे अनिल के साथ आश्रम में आना था लेकिन ऐन वक़्त पर अनिल किसी ज़रूरी काम में फँस गये इसीलिए मेरी सासूजी को मेरे साथ आना पड़ा| आश्रम में आनें के बाद मैंनें देखा की गुरुजी के दर्शन के लिए वहाँ लोगों की लाइन लगी हुई है| हमनें गुरुजी को अकेले में अपनी समस्या बतानें के लिए उनसे मुलाकात का वक़्त ले लिया|

काफ़ी देर बाद हमें एक कमरे में गुरुजी से मिलनें ले जाया गया| गुरुजी काफ़ी लंबे चौड़े , हट्टे कट्टे बदन वाले थे , उनकी हाइट 6 फीट तो होगी ही| वो भगवा वस्त्र पहनें हुए थे| शांत स्वर में बोलनें का अंदाज़ उनका सम्मोहित कर देनें वाला था| आवाज़ में ऐसा जादू था की गूंजती हुई सी लगती थी , जैसे कहीं दूर से आ रही हो | कुल मिलाकर उनका व्यक्तित्व ऐसा था की सामनें वाला खुद ही उनके चरणों में झुक जाए| उनकी आँखों में ऐसा तेज था की आप ज़्यादा देर आँखें मिला नही सकते|

हम गुरुजी के सामनें फर्श पर बैठ गये| सासूजी नें गुरुजी को मेरी समस्या बताई की मेरी बहू को संतान नही हो पा रही है , गुरुजी ध्यान से सासूजी की बातों को सुनते रहे| हमारे अलावा उस कमरे में दो और आदमी थे , जो शायद गुरुजी के शिष्य होंगे| उनमें से एक आदमी , सासूजी की बातों को सुनकर , डायरी में कुछ नोट कर रहा था|

गुरुजी – माताजी , मुझे खुशी हुई की अपनी समस्या के समाधान के लिए आप अपनी बहू को मेरे पास लायीं| मैं एक बात साफ बता देना चाहता हूँ की मैं कोई चमत्कार नही कर सकता लेकिन अगर आपकी बहू मुझसे ‘दीक्षा’ले और जैसा मैं बताऊँ वैसा करे तो ये आश्रम से खाली हाथ नही जाएगी , ऐसा मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ| माताजी समस्या कठिन है तो उपचार की राह भी कठिन ही होगी , लेकिन अगर इस राह पर आपकी बहू चल पाए तो एक साल के भीतर उसको संतान की प्राप्ति अवश्य होगी|लेकिन इस बात का ध्यान रखना होगा की जैसा कहा जाए , बिना किसी शंका के वैसा ही करना होगा| तभी आशानुकूल परिणाम मिलेगा|

गुरुजी की बातों से मैं इतनी प्रभावित हुई की तुरंत अपनें उपचार के लिए तैयार हो गयी| मेरी सासूजी नें भी हाथ जोड़कर फ़ौरन हाँ कह दिया|

गुरुजी – माताजी , उपचार के लिए हामी भरनें से पहले मेरे नियमों को सुन लीजिए| मैं अपनें भक्तों को अंधेरे में नही रखता| तीन चरणों में उपचार होगा तब आपकी बहू माँ बन पाएगी| पहले ‘दीक्षा’, फिर ‘जड़ी बूटी से उपचार’ , और फिर ‘यज्ञ’| पूर्णिमा की रात से उपचार शुरू होगा और 5 दिन तक चलेगा| इस दौरान दीक्षा और जड़ी बूटी से उपचार को पूर्ण किया जाएगा| उसके बाद अगर मुझे लगेगा की हाँ इतना ही पर्याप्त है तो आपकी बहू छठे दिन आश्रम से जा सकती है| पर अगर ‘यज्ञ’की ज़रूरत पड़ी तो 2 दिन और रुकना पड़ेगा| आश्रम में रहनें के दौरान आपकी बहू को आश्रम के नियमों का पालन करना पड़ेगा , इन नियमों के बारे में मेरे शिष्य बता देंगे|

गुरुजी की बातों को मैं सम्मोहित सी होकर सुन रही थी| मुझे उनकी बात में कुछ भी ग़लत नही लगा| उनसे दीक्षा लेनें को मैंनें हामी भर दी|

गुरुजी – समीर , इनकी बहू को आश्रम के नियमों के बारे में बता दो और इसके पर्सनल डिटेल्स नोट कर लो| बेटी तुम समीर के साथ दूसरे कमरे में जाओ और जो ये पूछे इसको बता देना| माताजी अगर आपको कुछ और पूछना हो तो आप मुझसे पूछ सकती हैं|

मैं उठी और गुरुजी के शिष्य समीर के पीछे पीछे बगल वाले कमरे में चली गयी| वहाँ पर रखे हुए सोफे में समीर नें मुझसे बैठनें को कहा| समीर मेरे सामनें खड़ा ही रहा|

समीर लगभग 40 – 42 बरस का था , शांत स्वभाव , और चेहरे पे मुस्कुराहट लिए रहता था|

समीर – मैडम , मेरा नाम समीर है| अब आप गुरुजी की शरण में आ गयी हैं , अब आपको चिंता करनें की कोई ज़रूरत नही है| मैंनें आश्रम में बहुत सी औरतों को देखा है जिनको गुरुजी के खास उपचार से फायदा हुआ| लेकिन जैसा की गुरुजी नें कहा की आपको बिना किसी शंका के जैसा बताया जाए वैसा करना होगा|

“मैं वैसा करनें की पूरी कोशिश करूँगी | दो साल से मैं अपनी समस्या से बहुत परेशान हूँ| “

समीर – आप चिंता मत कीजिए मैडम| सब ठीक होगा| अब मैं आपको बताता हूँ की करना क्या है| अगले सोमवार को शाम 7 बजे से पहले आप आश्रम में आ जाना| सोमवार को पूर्णिमा है , आपको दीक्षा लेनी होगी| मैडम , आप अपनें साथ साड़ी वगैरह मत लाना| हमारे आश्रम का अपना ड्रेस कोड है और यहीं से आपको साड़ी वगैरह सब मिलेगा| जो जड़ी बूटियों से बनें डिटरजेंट से धोयी जाती हैं| और मैडम आश्रम में गहनें पहननें की भी अनुमति नही है| असल में सब कुछ यहीं से मिलेगा इसलिए आपको कुछ लानें की ज़रूरत ही नही है|

समीर की बातों से मुझे थोड़ी हैरानी हुई| अभी तक आश्रम में मुझे कोई औरत नही दिखी थी | मैं सोचनें लगी , साड़ी तो आश्रम से मिल जाएगी लेकिन मेरे ब्लाउज और पेटीकोट का क्या होगा| सिर्फ़ साड़ी पहन के तो मैं नही रह सकती |

शायद समीर समझ गया की मेरे दिमाग़ में क्या शंका है|

समीर – मैडम, आपनें ध्यान दिया होगा की गुरुजी नें मुझे आपके पर्सनल डिटेल्स नोट करनें को कहा था| इसलिए आप ब्लाउज वगैरह की फ़िकर मत कीजिए| सब कुछ आपको यहीं से मिलेगा| हम हेयर क्लिप से लेकर चप्पल तक सब कुछ आश्रम से ही देते हैं|

समीर मुस्कुराते हुए बोला तो मेरी शंका दूर हुई| फिर मैंनें सोचा मेरे अंडरगार्मेंट्स का क्या होगा , वो भी आश्रम से ही मिलेंगे क्या| लेकिन ये बात मैं एक मर्द से कैसे पूछ सकती थी|

समीर – मैडम , अब आप मेरे कुछ सवालों का जवाब दीजिए| मैडम एक बात और कहना चाहूँगा , जवाब देनें में प्लीज़ आप बिल्कुल मत शरमाना और बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब देना क्यूंकी आप अपनी समस्या के समाधान के लिए यहाँ आई हैं और हम सबका यही प्रयास रहेगा की आपकी समस्या का समाधान हो जाए|

मैं थोड़ी नर्वस हो रही थी| समीर की बातों से मुझे सहारा मिला और फिर मैंनें उसके सवालों के जवाब दिए , जो बहुत ही निजी किस्म के थे |

समीर – मैडम, आपको रेग्युलर पीरियड्स आते हैं ?

“हाँ , समय पर आते हैं| कभी कभार ही मिस होते हैं|”

समीर – लास्ट बार कब हुआ था इर्रेग्युलर पीरियड ?

“लगभग तीन या चार महीनें पहले| तब मैंनें कुछ दवाइयाँ ले ली थी फिर ठीक हो गया|”

समीर – आपकी पीरियड की डेट कब है ?

“22 या 23 को है|”

समीर सर झुकाकर मेरे जवाब नोट कर रहा था इसलिए उसका और मेरा ‘आई कांटेक्ट’ नही हो रहा था| वरना इतनें निजी सवालों का जवाब दे पाना मेरे लिए बड़ा मुश्किल होता| डॉक्टर्स को छोड़कर किसी नें मुझसे इतनें निजी सवाल नही पूछे थे|

समीर – मैडम आप को हैवी पीरियड्स आते हैं या नॉर्मल ? उन दिनों में अगर आपको ज़्यादा दर्द महसूस होता है तो वो भी बताइए|

“नॉर्मल आते हैं, 2 – 3 दिन तक, दर्द भी नॉर्मल ही रहता है|”

समीर – ठीक है मैडम| बाकी निजी सवाल गुरुजी ही पूछेंगे जब आप वापस आश्रम आएँगी तब|

मैं सोचनें लगी अब और कौन से निजी सवाल हैं जो गुरुजी पूछेंगे|

समीर – मैडम , अब आश्रम के ड्रेस कोड के बारे में बताता हूँ| आश्रम से आपको चार साड़ी मिलेंगी जो जड़ी बूटी से धोयी जाती हैं , भगवा रंग की| इतनें से आपका काम चल जाएगा| ज़रूरत पड़ी तो और भी मिल जाएँगी| आपका साइज़ क्या है ? मेरा मतलब ब्लाउज के लिए…|”

एक अंजान आदमी के सामनें ऐसी निजी बातें करते हुए मैं असहज महसूस कर रही थी| उसके सवाल से मैं हकलानें लगी|

“आपको मेरा साइज़ क्यूँ चाहिए ? “ , मेरे मुँह से अपनेंआप ही निकल गया|

समीर – मैडम , अभी तो मैंनें बताया था की आश्रम में रहनें वाली औरतों को साड़ी , ब्लाउज, पेटीकोट आश्रम से ही मिलता है| तो उसके लिए आपका साइज़ जानना ज़रूरी है ना|

“ठीक है| 34” साइज़ है|”

समीर नें मेरा साइज़ नोट किया और एक नज़र मेरी चूचियों पर डाली जैसे आँखों से ही मेरा साइज़ नाप रहा हो|

समीर – मैडम , आश्रम में ज़्यादातर औरतें ग्रामीण इलाक़ों से आती हैं | शायद आपको मालूम ही होगा गांव में औरतें अंडरगार्मेंट नही पहनती हैं , इसलिए आश्रम में नही मिलते| लेकिन आप शहर से आई हैं तो आप अपनें अंडरगार्मेंट ले आना | पर उनको आश्रम में जड़ी बूटी से स्टरलाइज करवाना मत भूलना| क्यूंकी दीक्षा के बाद कुछ भी ऐसा पहननें की अनुमति नही है जो जड़ी बूटियों से स्टरलाइज ना किया गया हो|

अंडरगार्मेंट की समस्या सुलझ जानें से मुझे थोड़ा सुकून मिला| पर मुझसे कुछ बोला नही गया इसलिए मैंनें ‘हाँ ‘ में सर हिला दिया|

समीर – थैंक्स मैडम| अब आप जा सकती हैं| और सोमवार शाम को आ जाना|

मैं सासूजी के साथ अपनें शहर लौट गयी| सासूजी नें बताया की जब तुम समीर के साथ दूसरे कमरे में थी तो उनकी गुरुजी से बातचीत हुई थी| सासूजी गुरुजी से बहुत ही प्रभावित थीं| उन्होनें मुझसे कहा की जैसा गुरुजी कहें वैसा करना और आश्रम में अकेले रहनें में घबराना नही , गुरुजी सब ठीक कर देंगे|

कुल मिलाकर गुरुजी के आश्रम से मैं संतुष्ट थी और मुझे भी लगता था की गुरुजी की शरण में जाकर मुझे ज़रूर संतान प्राप्ति होगी| पर उस समय मुझे क्या पता था की आश्रम में मेरे ऊपर क्या बीतनें वाली है|

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