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“कंप्यूटर मैडम के साथ उनकी सहेली की चुदाई”

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मेरा नाम अजय कुमार है| मेरी उम्र 20 साल है और कद 5’6″ है| रंग गोरा और हॉट हुँ| मै छत्तीसगढ़ के धम-तरी जिले से हुँ| मै रियलकहानी साईट का बहुँत बड़ा प्रशंसक हुँ| इसलिए अपनी जिन्दगी मे पहली बार अपनी व्यक्तिगत घटना आपसे बांट रहा हुँ|
मै कंप्यूटर इंजीनियरिंग कर चुका हुँ| और मेरी आगे की पढ़ाई अभी भी चल रही है| मै कंप्यूटर बनानेंं के लिए के घर पहुँँच कर सेवा देता हुँ|

एक दिन की बात है| एक स्कूल (स्कूल का नाम उल्लेख नहीं करूँगा| इसके लिए माफी दोस्तो) का कंप्यूटर खराब हो गया था तो वहा मेरे पहचान का एक ओमप्रकाश नाम का टीचर था! उसनेंं मुझे कॉल किया कि स्कूल का दो सिस्टम खराब हैं! आकर ठीक कर दो|
तो मै ‘हा’ बोल कर वहा गया| वहा जानेंं के बाद सबसे पहले एक मैडम जी से मुलाकात हुँई| वह मैडम जी दिखनेंं मे बहुँत ही सेक्सी और खूबसूरत थी| वो सूट इतनी टाईट पहनती थी| जिसके कारण और बहुँत ही सेक्सी और फिट दिखती थी|
उस चुस्त सूट मे उसकी बड़ी चूचियों के बड़े ही कामुक दीदार हो रहे थे साथ ही उसकी एकदम गोल चूचियों के चूचुक भी काफी सख्त और स्पष्ट उभार लिए हुँए दिखाई दे रहे थे|
मै उसे देखनेंं के बाद मदहोश हो गया और उसकी तरफ एकटक देखता ही रह गया|

इतनेंं मे उसनेंं कहा- आप कौन हैं?

मै थोड़ा घबरा कर बोला- जी| जी| मै कंप्यूटर इंजीनियर|

मैडम जी- ओह… चलो मै ओमप्रकाश सर से मिला देती हुँ|

मैनेंं कहा- ठीक है|
चलो तभी मेरी नजर उसकी सिर पर गई| तो मैनेंं देखा कि उसकी मांग तो भरी हुँई है|

मुझे थोड़ा सा दुख हुँआ|
कमै कंप्यूटर ठीक करनेंं मे लग गया! वो मेरे पास ही थी| मेरी नजर तो उसके चुतड़ों और उसके वक्ष उभारों पर ही घूम रही थीं|
सच कह रहा हुँ कि उसकी छलकती जवानी को अपनेंं इतनेंं करीब देख कर मेरा तो लौड़ा खड़ा हो गया था| पर मैनेंं अपनेंं आप को काबू मे किया और कुछ देर बाद वो क्लास लेनेंं चली गई|
तब मैनेंं ओमप्रकाश सर से उसके बारे मे पूछा- यार इन मैडम जी का क्या नाम है?

ओमप्रकाश नेंं उसका नाम पुष्पा (यह उसकी सही नाम नहीं है) बताया|
मैनेंं और ज्यादा कुछ नहीं पूछा ताकि उसको शक ना हो कि मेरा क्या नजरिया है क्योंकि पुष्पा मैडम जी शादीशुदा थी|

फिर मैनेंं कंप्यूटर ठीक किया और उसके बाद हम लोग प्रिंसीपल सर के ऑफिस मे आए| वहा पर हम दोनों की एक बार फिर मुलाकात हुँई|
प्रिंसीपल सर नेंं चाय मंगानेंं की कही| मैनेंं मना किया| तो पुष्पा मैडम जी नेंं मुझसे उसी समय बात की- कंप्यूटर इंजीनियर लोग तो ज्यादा चाय पीते हैं और आप चाय के लिए नहीं बोल रहे हो| क्या बात है?

मैनेंं कहा- ऐसी कोई बात नहीं है मैम!
वो मुस्कुराई| तो मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गई|
मै वापिस आ रहा था| तो मैडम जी को देखकर मुस्कुराकर चला गया|

उसनेंं भी मुझे मुस्कुराकर जवाब दिया|
मै उसके बारे मे सोच-सोच कर पागल सा हो गया| काश स्कूल के और सिस्टम भी खराब हो जाते| तो इससे और देर तक मिलनेंं का मौका मिल जाता|
मै बता दूँ दोस्तों| पुष्पा मैडम जी इतनी सेक्सी थी कि क्या बताऊँ| उसकी आवाज मेरे कानों मे गूंजनेंं लगी| उसके नाम से मैनेंं कई बार मुठ मारी है|

मुझे लगा कि वो मैडम जी मुझे कभी नहीं मिलेगी|
एक दिन किसी लड़की की फोन आया| वो लड़की कोई और नहीं| पुष्पा मैडम जी थी! मै उसकी आवाज कैसे भूल सकता हुँ! पर मैनेंं मैडम जी को अनजान बनते हुँए न पहचाननेंं का नाटक किया|

मैडम जी- आपका नाम अजय है?

मैनेंं- हा| आप कौन?

मैडम जी- आप कंप्यूटर इंजीनियर हो?

मैनेंं- हा हुँ| पर आपका नाम क्या है कौन हो आप?

मैडम जी- मै पुष्पा बोल रही हुँ|

आगे की कहानी पेज 2 पर
मैनेंं नाटक करते हुँए पूछा- पुष्पा कौन? मै किसी पुष्पा नाम की लड़की को नहीं जानता|

मैडम जी- मै पुष्पा मैडम जी| उस दिन आप हमारे स्कूल मे कंप्यूटर ठीक करनेंं आए थे न| तो आप मिले थे मुझसे| कुछ याद आया?
मैनेंं सोचनेंं का नाटक किया और कहा- हा| आप वो हैं| हा मैनेंं पहचान लिया|

‘थैंक्स गॉड| पहचान लिया|’

मैनेंं पूछा- मैम कैसे याद किया| सब ठीक है ना?

मैडम जी- मेरे घर का कंप्यूटर खराब हो गया है| उसे ठीक कर दोगे क्या?

मैनेंं ‘हा’ कहा|
उस दिन छुट्टी थी और उसनेंं घर का पता दिया तो मै उस पते पर उसके घर पहुँँच गया|

मैनेंं बेल बजाई| मुझे लगा कि कोई और आएगा दरवाजा खोलनेंं के लिए| पर वो खुद आई थी|
मैडम जी उस वक्त नाईटी पहनी हुँई थी| आह्ह| वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि बता नहीं सकता| शायद इसलिए कि मै उसके बारे कितना सोचता था| इसलिए मुझे और ज्यादा सेक्सी लग रही थी|
मैडम जी- अन्दर आओ|

मै अन्दर गया| उसकी घर मे एक रसोई और चार कमरे आमनेंं-सामनेंं थे|

मैनेंं पूछा- बाकी सब कहा हैं?

मैडम जी नेंं कहा- सब मतलब? यहा मै अकेली रहती हुँ|
यह सुनकर मै बहुँत खुश हो गया| फिर मैनेंं पूछा- आपके मिस्टर कहा हैं?

मैडम जी नेंं बताया- मेरे उनकी पोस्टिंग कहीं और हो गई है और वो वहा रहनेंं लगे हैं| चूंकि मै यहा टीचर हुँ| इसलिए यहीं किराये पर रहती हुँ| मेरे पति शनिवार को आते हैं| बाकी सब लोग गांव मे रहते हैं|

मैडम जी को कोई बच्चा नहीं था|
मैनेंं कहा- मैम कंप्यूटर कहा है?

मैम मुझे अपनेंं कमरे मे ले गईं| वहा जाकर मै बहुँत खुश था|

मैडम जी नेंं पूछा- चाय या फिर कुछ?

मै बोला- कुछ और| क्या?

‘मतलब ठन्डा|’

‘ओके|’
तो वो दो कोल्ड ड्रिंक लाई| थोड़ी गर्मी का मौसम था| वो बाहर चली गई| मैनेंं उसके सिस्टम ठीक किया और जानेंं के लिए तैयार हो रहा था|

उतनेंं मे मैडम जी आई| और बोली- हो गया?

मैनेंं कहा- हा हो गया|

उसनेंं कहा- कहा जा रहे हो| काम है क्या आपको?

मैनेंं कहा- नहीं फ्री हुँ|

मैडम जी बोली- रूको ना| मै भी बोर हो रही हुँ| अकेली हुँ|
मै रुक गया| तो वो मुझसे बातें करनेंं लगी और साथ ही वो अपनेंं कमरे को करीनेंं से सजानेंं मे जुट गई| और वो झुक कर चीजें उठा कर रख रही थी|

नाईटी खुले गले की होनेंं के कारण उसकी चूचियाँ मुझे साफ दिखाई दे रही थीं|
मेरा लंड खड़ा हो गया था| मै बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था|

वो इतनी गोरी थी और उसकी थिरकती चूचियाँ इतनी मस्त लग रही थीं| कि मै पसीना-पसीना हो गया था|

मैनेंं मैडम जी से कहा- बाथरूम कहा है?
तो उसनेंं बताया| मै बाथरूम मे गया और मुठ मार कर अपनेंं आपको शांत किया|
मै वापस कमरे मे आया तो मैनेंं मैडम जी को चोदनेंं का सोचा| लेकिन बोलनेंं के लिए डर लग रहा था| तो मै कुछ बोल ना पाया|

काम करनेंं के बाद मैडम जी मेरे पास आकर बैठ गईं और मुझे मेरे बारे मे पूछना शुरू किया- आपकी कोई गर्लफ्रेण्ड है क्या?

मैनेंं कहा- हा|

तो वो थोड़ा उदास सी हो गई|
फिर मैनेंं कहा- अरे मैडम जी मजाक कर रहा हुँ| मेरी काई गर्लफ्रेण्ड नहीं है| मुझे कोई मिलती ही नहीं है| सब भाव खाती हैं ना| इस कारण|

तो मैडम जी खुश हो गई|
मै मैडम जी को देखकर ही गर्म हो जाता था| शायद यह बात उसको मेरा घबराया हुँआ चेहरा देखकर पता चल गई|

फिर मैडम जी भी मुझे कुछ बोल नहीं पा रही थी| शायद उसको भी डर था| तो उसनेंं मुझसे पूछा- आपके पास फोल्डर लॉक का सॉफ्टवेयर है क्या?
मै अपनेंं साथ सारे सॉफ्टवेयर लिए रहता हुँ| पर तब भी मैनेंं कहा- नहीं पर वो सोफ़्टवेयर मेरे घर पर है|

बोली- ठीक है| कल 11 बजे ले कर आना| मै स्कूल नहीं जाऊँगी|

मैनेंं भी उसे ‘हा’ बोला| मुझे भी तो मिलना था ना मैम से|

मैनेंं घर जाकर कई बार उसके नाम से मुठ मारी|

यार क्या बताऊँ| मुझे अगले दिन का बड़ी बेसब्री से इन्तजार था| उसनेंं मुझे रात को फोन भी किया| शायद वो भी मुझसे चुदना चाहती थी|
मै जब अगले दिन उसके घर गया| तो साड़ी मे थी| साड़ी गुलाबी रंग की थी| वो साड़ी मे क्या गजब सेक्सी खुल रही थी| मैनेंं मैडम जी से कहा- मैम आप बहुँत ही ज्यादा खूबसूरत लग रही हो| क्या बात है|

तो उसनेंं मुस्कुराकर कहा- चल झूठे!

मै खुश हो कर बोला- सही कह रहा हुँ मजाक थोड़ी कर रहा हुँ|
वो कुछ संजीदा सी हुँई|
फिर मै बोला- आपको वो प्रोग्राम आपके सिस्टम मे किस लिए चाहिए| आपके अलावा और कोई नहीं बैठता है|

तो मैम बोली- नहीं| वो क्या है ना कि पड़ोस के बच्चे कभी-कभी आते हैं गानेंं सुननेंं के लिए| और मेरे काम की चीजों को कम्प्यूटर से छेड़छाड़ कर देते हैं|
फिर मैनेंं प्रोग्राम इंस्टाल किया और पूछा- कौन सा फोल्डर लॉक करना है?

उसनेंं कहा- वो मै कर लूँगी|

मै समझ गया कि क्या बात है! मै बोला- चलो ठीक है| कर लेना|
वह मुझे बैठनेंं बोली और खुद रसोईघर मे चली गई|

मै उसके कंप्यूटर मे अश्लील फिल्म खोजनेंं लगा|
तभी मुझे फिल्म का फोल्डर मिल गया! मैनेंं आवाज को बंद किया और फिल्म देखनेंं लगा|

ब्लू-फिल्म देखते हुँए मै गर्म हो चुका था! मेरा हाथ मेरे लौड़ा को सहला रहा था! मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था! मै फिल्म देखनेंं मे बेहद मस्त था|
शायद मैम भी छुपकर देख रही थी|

जब वो बेकाबू हो गई तो अन्दर कमरे मे आईं…

मैनेंं तुरन्त सिस्टम बंद ना कर सका और खड़ा हो गया| मै पोलो जीन्स पहनेंं हुँआ था| जिसमे मेरा लौड़ा एकदम खड़ा था| पोलो मे पूरा उभरा हुँआ दिखाई दे रहा था! पूरा 90 डिगरी मे तना हुँआ था|
मैडम जी मेरे पास आई| शर्म के मारे मेरा सर नीचे हो गया|

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मैडम जी मेरे लौड़ा को देखकर बोली- यह क्या है?

मै कुछ ना बोल पाया और मैडम जी नेंं मेरे सिर को ऊपर किया और अपनी गुलाबी गरम होंठों को मेरे होंठ से टिकाया और जोरदार किस करना चालू किया|
मै खुश हो गया और उसके होंठ का कस के दबादबा कर चूसनेंं लगा! जोश का आलम बढ़ गया और मै उसकी चूचियों को खूब हचक कर दबा रहा था|

चुदासी सी मैडम जी बोली- आह्ह| और जोर से दबाओ ना|

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मैनेंं उसकी साड़ी सरका दिया| पूरी तरह उसको नंगी किया और उसकी चूचियों को चूसनेंं लगा|

मैडम जी गरम होकर मुँह से सिसकारियाँ भरनेंं लगी- आह| आह| इइइइइइ| सी सी|

उसकी मादक आवाज मुझको घायल कर रही थी|
मैडम जी नेंं भी मुझे नंगा कर दिया और मेरे 8″ का लौड़ा देख कर बोली- ओह्ह| आपकी मशीन तो बहुँत बड़ी है|

मैनेंं कहा- मैडम जी| सर का बड़ा नहीं है क्या?

उसनेंं कहा- यार मैडम जी नहीं| पुष्पा कहो न|

मै बोला- ठीक है|

फिर बोली- उसकी लुल्ली तो 4″ की ही है| वो मुझे खुश नहीं कर पाता है|
मैडम जी दिखनेंं मे तो माल है ही| और सच मे बहुँत ही सेक्सी भी थी| वो मेरे लौड़ा को हाथ से सहला रही थी| मेरा लौड़ा गीला हो गया था|

मैडम जी नेंं मेरे लौड़ा को मुँह मे लिया और चूसना चालू किया| मैनेंं उसे पकड़ कर गद्दे पर लिटाया और जोरों से किस करनेंं के साथ उसकी चुत पर हाथ फेरनेंं लगा|

उसकी चुत से पानी का रिसाव शुरू हो गया था! वो ‘आह| आह|’ की आवाज लेकर मजा ले रही थी|
मुझे भी मजा आ रहा था|

इस दिन के लिए मै कितना तड़पा था|

उसकी चुत गोरी और चिकनी थी! उसनेंं अपनी चुत के बालों को शायद सुबह ही साफ किया था! मै उसकी चुत मे उंगली करनेंं लगा| मैडम जी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी| वह मेरे लौड़ा को तेजी से अन्दर-बाहर करनेंं लगी|
कुछ देर बाद मैडम जी की अकड़न चालू हुँई और वो झड़ गई|
दोस्तो! मैडम जी मेरे लौड़े से फंस चुकी थी| बस अब उसे मस्त तरीके से चोदना था| उसकी मस्त चुदाई को आप अगले भाग मे पढ़ सकते हैं|

मैनेंं उसे पकड़ कर गद्दे पर लिटाया और जोरों से चुम्बन करनेंं के साथ उसकी चुत पर हाथ फेरनेंं लगा| उसकी चुत से पानी का रिसाव शुरू हो गया था! वो ‘आह| आह|’ की आवाज लेकर मजा ले रही थी|

मुझे भी मजा आ रहा था… इस दिन के लिए मै कितना तड़पा था|
उसकी चुत गोरी और चिकनी थी! उसनेंं अपनी चुत के बालों को शायद सुबह ही साफ किया था! मै उसकी चुत मे उंगली करनेंं लगा| मैडम जी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी| वह मेरे लौड़ा को तेजी से अन्दर-बाहर करनेंं लगी|
कुछ देर बाद मैडम जी की अकड़न चालू हुँई और वो झड़ गई|
अब आगे|
अभी मै नहीं झड़ा था| यह देख मैडम जी नेंं मेरे लौड़ा को मुँह मे लिया और जोर-जोर से मेरा गन्ना चूसनेंं लगी| मै उसकी चुत को बार-बार अपनी उंगली से जोर-जोर से अन्दर-बाहर करता रहा|

उस समय मै झड़ गया|
कुछ देर बाद मैडम जी फिर से तैयार हो गई! उसकी चुत की पानी की खुश्बू से फिर मै शुरू हो गया! मै उसकी चुत को सहला रहा था! वह अपनी चूचियों को दबा रही थी और जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थी| गर्म साँसें छोड़ रही थी|

मैडम जी बोली- अजय| अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है| चोदो मुझे| नहीं तो मै मर जाऊँगी|

अब मैडम जी को मैनेंं लिटाया और पैर फैलानेंं को बोला|
मैनेंं अपनेंं लौड़ा को उनकी चुत की दरार मे फंसा दिया और जोर का धक्का दिया तो अभी मेरा आधा ही लौड़ा अन्दर गया था कि मैडम जी जोर से चिल्लाई| शायद वह बहुँत दिनों से चुदी नहीं थी|
फिर मैनेंं अपना पूरा लौड़ा मैडम जी की चुत मे डाल दिया| और धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करनेंं लगा|

मैडम जी ‘आहें|’ भर रही थी ‘आह| आह| उहं| आह| उह| चोदो और चोद आह आह|’

मुझे भी उसकी चुत चोदनेंं मे जन्नत का मजा मिल रहा था|
कुछ देर बाद मैडम जी फिर झड़ गई| मैनेंं अपनी स्पीड बढ़ा दी| मैडम जी को बहुँत मजा आ रहा था! वो झड़नेंं के बाद भी मेरा साथ दे रही थी| मै झड़नेंं वाला नहीं था| क्योंकि मै एक बार झड़ चुका था|
इसलिए मै जोर-जोर से धक्का दे रहा था मैडम जी की ‘आह| आह | आह| सी सी|’ की आवाज सुनकर मुझे बहुँत मजा आ रहा था|
इतनी सेक्सी मैडम जी मै पहली बार चोद रहा था ना| मै जन्नत का सैर मे खोया था| मै झड़नेंं वाला ही था|
मैडम जी फिर से झड़ गई| उसकी चुत के गरम पानी की वजह से मै भी झड़नेंं वाला था तो मैनेंं मैडम जी से पूछा- कहा निकालूँ?

बोली- अन्दर नहीं|

मैनेंं लौड़ा बाहर किया और उसकी चूचियों पर डाल दिया|

मेरा इतना ज्यादा पानी देखकर वो दंग रह गई ‘इतना पानी बाप रे|’

हम दोनों कुछ देर नंगे पड़े रहे| बातें करते रहे|

मैडम जी नेंं कहा- आज पहली बार इतना मजा आया| सर के साथ तो 10 मिनट मे ही खेल समाप्त हो जाता था| मजा भी नहीं आता था| जब मैनेंं आपको पहली बार देखा था| तो तभी मुझे समझ मे आ गया था| सच मे कितना दम है तुम्हारे लौड़े मे|

मैनेंं उसको मुस्कुराते हुँए चूम लिया|
उसनेंं मुझसे कहा- अब आप ही सचमुच मे मेरी जान हो|

कुछ देर आराम करते हुँए उसके नंगे बदन से खेलते हुँए मैडम जी को मैनेंं कहा- जानू! मुझे तुमको और चोदना है|
मैडम जी बिस्तर से नीचे उतरी और उसनेंं अपना एक पैर बिस्तर पर रखा और दूसरा पैर जमीन पर रख कर चुत को खोलते हुँए अपनेंं हाथों से अपनी चुत को फैलाते हुँए बोली- लो राजा| अब मुझे ऐसे ही चोदो|
मैनेंं खड़े होकर उसे अपनेंं बाँहों मे लेकर जोर-जोर चोदना शुरू कर दिया|

मैडम जी- आह| आह| उहं| और जोर से चोदो और जोर से|

उसकी चुदासी आवाजें निकल रही थीं| मुझे बहुँत मजा आ रहा था|
कुछ ही देर बाद मैडम जी झड़ गई! मै अब भी जोर-जोर चोदे जा रहा था! मैडम जी बोली- रूको ना जानू|

पर मै रुकनेंं वाला नहीं था| जोर-जोर से चोद रहा था|
कुछ देर बाद मै झड़नेंं वाला था तो मैडम जी बोली- पानी चुत के अन्दर डाल दो| और कुछ देर ऐसे ही अन्दर डाले रहना| तुम्हारा गरम-गरम लौड़ा अच्छा लग रहा है|
मैडम जी मुझे चूमे जा रही थी! पता नहीं क्यों वो मुझे छोड़नेंं का नाम नहीं ले रही थी|

फिर मैनेंं मैडम जी को अपनी गोद मे उठा लिया और उसे चूम कर फिर से बिस्तर पर लिटा दिया|
कुछ देर बाद मैडम जी नेंं मुझे किस किया और बाथरूम मे चली गई|
बाद मे मै फ्रेश होकर घर आनेंं वाला था कि मैडम जी नेंं मुझे फिर आनेंं को कहा| बोली- जब भी मेरी जरूरत हो| जरूर आना|

मै मुस्कुरा कर बोला- जानू! जब तुमको मेरी जरूरत ही मुझे फोन कर देना|
उसनेंं उसी दिन फिर से रात को मुझे फोन करकर अपनेंं पास बुलाया|

मैनेंं भी आनेंं की हा बोल दी| क्योंकि मुझे घर मे कोई कुछ नहीं बोलता है| मै बिंदास हुँ घर से|
दोस्तो मैनेंं मैडम जी को रात को चोदा| वो वास्तव मे बहुँत प्यासी थी|
उस दिन से लेकर एक सप्ताह बाद मैडम जी का फोन आया- जानू क्या कर रहे हो| खाली हो| तो घर आना| मै अकेली हुँ|

मैनेंं ‘हा’ बोला और मै रात को लगभग 9 बजे मैडम जी के घर पहुँँचा| तो मैनेंं वहा देखा कि कोई युवती और भी थी|
उसनेंं मेरा उससे परिचय काराया| वह उसकी सहेली निशा थी| उसके घर पर कोई नहीं था| उसके पति काम से बाहर गया था| इसलिए वो रात को रुकनेंं के लिए आई थी|

निशा दिखनेंं मे बहुँत खूबसूरत थी|
मैडम जी नेंं मेरे और अपनेंं बारे मे उसे बताया था कि अजय बहुँत ही चुदक्कड़ लड़का है और चुत चुदानेंं मे बहुँत ही मजा देता है| बहुँत खुश कर देता है|

उसकी सहेली भी मुझसे चुदनेंं के लिए आई थी| इस बारे मैडम जी नेंं मुझे नहीं बताया था| ताकि मुझे बुरा ना लगे|
हम तीनों खाना खा कर कंप्यूटर मे मूवी देखनेंं लगे| कुछ देर बाद वह सोनेंं चली गई! उसका कमरा ठीक हमारे कमरे के सामनेंं था|
उसके जानेंं के बाद मै अपनेंं आपको रोक नहीं पाया| मैनेंं मैडम जी को जोर से पकड़ा और अपनेंं होंठ उसके होंठों पर रख दिए और जोरों से किस करनेंं लगा! उसकी चूचियों को दबानेंं लगा|
मैडम जी गर्म हो गई| हम दोनों अपनेंं मे मस्त थे| दरवाजा खुला छोड़ कर मैडम जी जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थी ‘आह…आह इइ इइ इइ…’
यह सुनकर हमे पता ही नहीं चला कि निशा हमारे कमरे मे कब आ गई और छुपकर हमे देखनेंं लगी|
मैनेंं मैडम जी को पूरी नंगी किया और मैडम जी नेंं मुझे नंगा कर दिया मैडम जी नेंं मेरा 8″ का लौड़ा मुँह मे ले लिया और चूसना शुरू कर दिया|

मैडम जी की चुत पूरी तरह गीली हो गई थी| उसमे से पानी का रिसाव हो रहा था|

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मैडम जी गर्म हो कर चुदासी हो चुकी थी| मैनेंं उसे सीधा किया और चुत को सहलाना शुरू कर दिया| अभी अपनी उंगली से चोदना शुरू किया ही था कि मैडम जी की चुत की खुश्बू से मै पागल हो गया था! उसकी चुत की इतनी अच्छी खुश्बू थी कि पूछो मत|
मैडम जी जोर से बोल रही थी- आह| अजय आह| चोदो मुझे| जोर से आह| आह|

कुछ देर बाद मैडम जी बोली- लौड़ा डालो न| मै पागल हो गई हुँ|

मैनेंं अपना लौड़ा डाल दिया और उसको जोर-जोर से चोद रहा रहा था|
इतनेंं मे निशा हमारे कमरे मे अन्दर आ गई| वह पूरी नंगी थी! मै उसे देखकर रुक गया|

मैडम जी बोली- क्या हुँआ जानू?

मैनेंं कहा- देखो ना|

वो निशा को देखनेंं लगी|

दोनों हंस पड़ीं| तब तक मैडम जी झड़ गई थी|
मै समझ नहीं पा रहा था| निशा अपनी चुत को एक हाथ से सहला रही थी| एक हाथ से अपनेंं मम्मों को दबा रही थी|

तभी मैडम जी नेंं कहा- ये तो हम दोनों की चाल थी| जब मैनेंं इसे आपके बारे मे इसे बताया तो ये कमीनी मुझसे कहनेंं लगी कि मुझे भी जन्नत की सैर करनी है| मुझे भी तुम्हारा लौड़ा दिला दो| तो मैनेंं हा बोल दी थी| मुझे आपको बोलनेंं की हिम्मत नहीं हो रही थी ना| इस कारण यह प्लान बनाया था हमनेंं|
मैनेंं देखा निशा की चुत फ़ूली हुँई थी और चुदनेंं के लिए पूरी तरह तैयार थी| निशा की चुत गुलाबी रंग की मनमोहक चुत थी| निशा बोली- चोदोगे ना मुझे राजा|

मैनेंं लौड़ा हिलाते हुँए कहा- जब मेरी जानू तैयार है| तो मै कौन हुँ रोकनेंं वाला|
इतना कहकर मैनेंं उसकी चुत को हाथ से भर कर सहलाना शुरू किया| निशा पहले से गर्म थी और उसकी चुत से पानी बह रहा था|
मैडम जी बोली- जानू मुझे पहले चोद कर शांत कर दो| फिर इस चोदना|
मैनेंं मैडम जी को सीधा बिस्तर पर लिटाया| उसकी चुत पर मैनेंं लौड़ा को डाला और जोर-जोर से धक्का देना चालू कर दिया| निशा को अपनेंं बगल मे ही लिटा कर उसकी नंगी चुत मे मैनेंं अपनी उंगली डाली हुँई थी| मै दोनों को एक साथ चोद रहा था|

निशा जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थी| उसकी सिसकारियों से सारा रूम गूंज रहा था|
इतनेंं मे निशा झड़ गई| उसकी चुत से बहुँत ज्यादा पानी निकल रहा था|
शायद निशा काफ़ी समय से चुदी नहीं थी| आज तो मैडम जी भी झड़नेंं का नाम नहीं ले रही थी|
मैडम जी भी मुझसे जोर-जोर से चुदवा रही थी ‘आह… आह|’ उसकी आवाज आ रही थी| इतनेंं मेरा लौड़ा झड़नेंं वाला हो गया था| तो मैडम जी नेंं कहा- अन्दर चुत मे ही पानी डाल दो|
मैनेंं अपना सारा माल मैडम जी की चुत की गहराइयों मे अन्दर तक डाल दिया| मेरे झड़नेंं से मैडम जी भी झड़ गई|
कुछ पलों बाद निशा नेंं मेरे लौड़ा को अपनेंं मुँह मे ले लिया और बोली- क्या मोटा लौड़ा है| मैनेंं ऐसा लवड़ा कभी नहीं देखा| उसनेंं लौड़े को लपलप करके चूसना शुरू कर दिया|
निशा फिर से गर्म हो गई थी! उसनेंं चुत पसारते हुँए कहा- अब मेरी बारी है| अब मुझे चोदो| मै पागल हो गई हुँ|

मैनेंं निशा को मैडम जी की जगह पर लिटाया और उसकी चुत मे लवड़ा पेल कर उसे चोदना चालू कर दिया|
मैडम जी नेंं कहा- जानू| इस छिनाल को इतना चोदो| इतना चोदो कि इसे तुम्हारा लौड़ा हमेशा याद बना रहे|

इतना कह कर मैडम जी नेंं मुझे जोर-जोर किस करना चालू कर दिया|

मै निशा को जोर-जोर से चोदे जा रहा था|
निशा नेंं ‘आह| ईई| आह| मर गई| चिल्लाते हुँए अपनी सिसकारियाँ इतनी तेज कर दी थीं कि पूरा कमरा चुदास की आवाजों से गूँज रहा था|

कुछ देर बाद मै और निशा एक साथ झड़ गए| मैनेंं अपना लौड़ा निकाला| तो निशा नेंं तुरंत उसे मुँह मे ले लिया और चूस कर साफ़ कर डाला|

मै बोला- हो गया क्या?

तो निशा बोली- अभी नहीं| पूरी रात चोदो मुझे|
हम तीनों हंस पड़े|

निशा बोली- आप तो सचमुच मे जन्नत के दरवेश हो|

दोस्तो! मैनेंं मैडम जी और उसकी सहेली निशा की पूरी रात चुदाई की| वह दोनों बहुँत खुश हो गई थीं|
अभी हम तीनों बातें कर ही रहे थे कि मैडम जी नेंं कहा- जानू और नई चुत चाहिए क्या| या बस|?

तो मैनेंं कहा- आप बताओ आपको बुरा नेंं लगे तो|?

मैडम जी नेंं कहा- मुझे कुछ बुरा नहीं लगेगा| मेरी एक और सहेली है| उसे भी चुदना है आपसे|

मैनेंं कहा- ठीक है| जब भी मौका मिलता है| हम सब चुदाई का काम कर लेंगे|
इस तरह मैडम जी और उसकी सहेलियों की चुदाई आज भी करता रहता हुँ|

मैडम जी को तो एक-दो रोज मे चोद ही देता हुँ|
मैनेंं उसकी तीनों सहेलियों के साथ कई अन्य सहेलियों की चुत की प्यास को बुझाया है| उसके बारे मे फिर कभी विस्तार से लिखूँगा|

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