loading...

ऐसी चुत सबको मिले

Antarvasna sex stories, desi kahani, hindi sex stories, chudai ki kahani

अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज पढ़नें वाले मेरे दोस्तो, मेरा नाम भावेश है, मैं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से हूँ| मैं 24 साल का हूँ और बी कॉम कर रहा हूँ|

ये पोर्न स्टोरी अभी एक महीनें पहले की ही है|

मेरी दीवाली की छुट्टियां शुरू हो गई थीं तो मैं इन दिनों अपनें घर आया हुआ था| बाहर रहनें की वजह से मुझे दोस्तो के साथ घूमनें की आदत हो गई थी| घर आ जानें से यहां मैं बोर हो रहा था क्योंकि यहां घूमनें लायक कोई जगह ही नहीं है तो सारा दिन मैं अपनें लैप टॉप में पोर्न या हॉट रोमांटिक मूवी वगैरा देख कर टाइम पास कर रहा था|

एक दिन मैं लैप टॉप में हॉलीवुड मूवी देख रहा था| कानों में इयर फोन लगे होनें की वजह से मुझे किसी का पता नहीं चल पा रहा था| उस दिन तभी मेरी चाची मेरे लिए चाय लेकर कब आईं, मुझे पता ही नहीं चला कि वो कब से मेरे पीछे चाय ले कर खड़ी हो कर मेरे लैप टॉप में वो सब देख रही थी जो मैं देख रहा था मतलब हॉट मूवी… देख रही थीं|
मेरी चाची का नाम जया है, वे 40 साल की हैं|
फिर अचानक से चाची जोर से बोलीं- भावेश, चाय पी लो|

मैं चाची की तेज आवाज सुन कर एक दम से उठा और इयर फोन निकाल कर चाय के लिए हाथ बढ़ाया|
चाची नें चाय देते हुए कमेंट पास किया- भावेश, तुम कितनी गंदी मूवी देखते हो|
मैं- हद है चाची, इसमें ऐसा क्या है, इतना रोमांटिक सीन और किस वगैरह तो आजकल बिल्कुल कॉमन है|

फिर चाची स्माइल करते हुए कमरे से निकल गईं| तब मेरे दिमाग में कुछ डाउट हुआ कि कहीं ये मुझे किसी दूसरे बेस पर कमेंट पास न कर गई हों| फिर तो मेरे भेजे में उनका ही ख्याल आता रहा| रात दिन मेरे दिमाग में अब बस चाची ही घूम रही थीं| अब मुझसे रहा नहीं जाता था|| पहले ही रोज मैं उनके नाम का मुठ मारा करता था| इस घटना के बाद से तो मैं हमेशा उनको ही देखनें लगा था| उनके पास ही रहनें की कोशिश करता रहता, उनसे बातें करता रहता आदि इत्यादि|

शायद उन्हें भी कुछ डाउट हो गया था लेकिन वे कुछ बोलती नहीं थीं|
एक दिन उन्होंनें मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?
मैंनें ना में जवाब दिया|

फिर चाची कुछ नहीं बोलीं|

कुछ दिनों में मेरी छुट्टियां भी ख़त्म हो गईं, मैं वापिस कॉलेज आ गया|

अब मैं जब भी घर जाता तो अपनी चाची को वासना भरी निगाहों से देखा करता था| चाची भी मेरी नज़रों को पहचान रही थी| वो समझ रही थी कि मैं उनके सेक्सी बदन को घूर रहा हूँ|

जब मैं दोबारा घर गया तो एक दिन चाची किचन में कुछ बना रही थीं| मुझे प्यास लगी तो मैं किचन में पानी पीनें चला गया| जब मैं वहां से निकल रहा था| तब चाची नें मुझे आवाज़ दी|| तो मैं दरवाजे के पास रुक गया|
चाची बोली- भावेश, एक सवाल पूछूँ?
मैं- हाँ चाची, पूछिए ना?
चाची- क्या बात है आजकल तू मुझे कुछ ज़्यादा ही देखता रहता है?
मैं- नहीं चाची, ऐसी तो कोई बात नहीं है|
चाची- झूठ मत बोल, ऐसा क्या है मुझ में जो तू घूरता रहता है?

मैं उन की बातें सुन कर अपना आपा खो रहा था| उस टाइम पता नहीं मुझ में कहाँ से हिम्मत आ गई थी, मैं चाची के पास गया और मैंनें एक हाथ से चाची की गांड और दूसरे हाथ से चाची की चुची को दबाते हुए कहा- मेरी प्यारी चाची, मैं तो बस इन्हीं को देखता रहता हूँ|
चाची मेरी हरकत देख कर हैरान हो गईं|

फिर मैं किसी की आवाज़ सुन कर वहां से निकल गया और थोड़ी देर बाद मैं किसी काम से सिटी की तरफ निकल गया| सिटी से आनें में मुझे रात को देर हो गई थी, सभी लोग खाना ख़ा कर सो गए थे|

मैं बिना किसी को डिस्टर्ब किए किचन से खाना निकाल कर अपनें रूम में आ गया और एक मूवी देखते हुए खाना खा लिया| खाना खाकर मैंनें लाईट बंद कर ड़ी और आराम से मूवी देखनें लगा| मूवी देखते देखते रात के 2 बज गए थे|

तभी अचानक मेरे रूम का दरवाजा खुला| लाइट ऑफ होनें की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था| दरवाजा खुलनें से कुछ लाइट सी हुई तो देखा कि चाची थीं| मेरे घर में कॉमन बाथरूम है, जिसका रास्ता मेरे रूम से होते हुए जाती है|
मैंनें सोचा कि शायद चाची बाथरूम जानें के लिए आई होंगी|

मूवी में हॉट सीन चलनें के कारण मेरा पप्पू तो उस समय सलामी दे रहा था|

चाची मेरे बेड पर आकर बैठ गईं और उन्होंनें मेरे खड़े लंड को देख लिया| मैं समझ गया कि चाची मेरे लैपटॉप की लाइट को जलते देख कर रूम में आ गई थीं|

मैं तो डर गया था कि शाम की हरकत की वजह से डांट ना पड़ जाए| लेकिन ऐसा नहीं हुआ| चाची अप्रत्याशित तरीके से मेरा लंड सहलाते हुए मेरे ऊपर लेट गईं|

मैं बता दूँ कि जब भी मैं सोता हूँ तो अपनें अंडरवियर को छोड़ कर सारे कपड़े निकाल कर सोता हूँ| चाची मेरे सीनें पर मुझे किस करनें लगीं|
अब मैं विश्वामित्र तो हूँ नहीं, मैं तो वैसे भी गरम था ही, चाची के चूमनें से और ज़्यादा गरमा गया, मैंनें उनके बदन को पकड़ा और उन्हें अपनें नीचे गिरा लिया|

अब मैं उन्हें देख रहा था, तब वो बोलीं- शाम को तो बहुत बोल रहे थे कि मेरी गांड और मम्मे तुझे अच्छे लगते हैं| अब मौका मिला है, तो क्या बस देखते ही रहोगे कि कुछ करोगे भी?
मैंनें चाची के मुखे से गांड और मम्मे शब्द सुन कर हैरान हो गया लेकिन मैंनें कहा- अब तो चाची, आप बस देखती जाओ|

मैंनें पहले उनकी साड़ी निकाली, फिर पेटीकोट का नाड़ा खींच कर उसे निकालनें लगा तो नाड़े की गाँठ मुझे समझ में नहीं आई, मेरी परेशानी समझ कर चाची नें खुद ही नाड़ा खोल कर अपना पेटीकोट निकाल दिया| इसके बाद मैंनें चाची का ब्लाउज निकाल दिया, फिर चाची की ब्रा पेंटी के साथ में मैंनें अपना अंडरवियर भी निकाल दिया| अब हम दोनों चाची भतीजा एक दूसरे से लिपट गए| फिर क्या था, मैं उनके मम्मों को एक हाथ से दबा रहा था और किस किए जा रहा था, दूसरा हाथ चाची की चुत में डाल रखा था|

मुझे किस करनें में, बूब सकिंग में बड़ा मज़ा आता है|| तो मैं उन्हें पागलों की तरह किस किए जा रहा था| मेरी चाची भी मेरे साथ पूरा सहयोग कर रही थीं| मेरी चाची के दोनों हाथ मेरी पीठ पर थे| दस मिनट तक चाची को किस करनें के बाद मैंनें उनकी चुत की दरार में अपनी जीभ को घुसा दिया| चाची एक दम से तड़प उठी थीं, वो मुझसे कहनें लगीं- अब किसिंग सकिंग ही करोगे कि चोदोगे भी? मैं तेरे कमरे में ज़्यादा टाइम तक नहीं रुक पाऊँगी… अगर तेरे चचा जाग गए तो? अब और कितना तड़पाओगे|

फिर मैंनें ओ के बोल कर उनकी चुत में अपना लंड रगड़ते हुए धक्का लगाया| मेरा मोटा लंड अभी चाची की चुत में अभी थोड़ा सा ही अन्दर गया था कि चाची कराह कर बोलीं- भावेश धीरे डाल|| मेरी जान निकालेगा क्या?

मैंनें देखा कि चाची की आँखें दर्द से लाल हो गई थीं, वे थोड़ा गुस्से में भी दिख रही थीं, शायद एक दम से लंड पेलनें से चाची की चूत में कुछ ज्यादा ही दर्द हो गया था|
मैं रुक गया और उन्हें किस करनें लगा| कुछ देर बाद उन्होंनें अपनी गांड उठा कर इशारा किया, मैं समझ गया कि अब दर्द कम हो गया है|

इस बार मैंनें देर ना करते हुए पूरा लंड चाची की चुत में घुसेड़ दिया| मेरे होंठ उनके होंठों पर ढक्कन की तरह चिपके थे| इस वजह से चाची कुछ बोल भी नहीं पा रही थीं| जैसे ही पूरा लंड उनकी चुत में अन्दर गया, वो छटपटाते हुए मुझे मारनें लगीं|
चाची- धीरे धीरे कर न||

मैंनें चाची को चोदना चालू किया तो चाची नें अपनें पैरों से मुझे जकड़ लिया ताकि मैं कोई हरकत ना कर दूँ| थोड़ी देर बाद जब मेरा दर्द कम हुआ तो वो किस करते हुए आहें भरनें लगीं| फिर क्या था अपनी रेल तो निकल पड़ी|| अब चाची को भी मज़ा आ रहा था और मुझे भी मजा आ रहा था|

कुछ टाइम बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए| अब तक रात के सवा तीन हो गए थे| अब उस रात और तो कुछ नहीं हो पाया उअर चाची अपनें कपड़े पहन कर अपनें रूम में सोनें चली गईं|

सुबह मेरी आदत है कि मैं देर तक सोता हूँ इसलिए कोई उठानें भी नहीं आता है| सुबह चाची झाड़ू लगानें आईं, तब उन्होंनें ही मुझे जगाया| मैं उन्हें बांहों में पकड़ कर किस करनें लगा| वो मुझसे खुद को छुड़ा कर निकल गईं|

अगले दिन मैं कॉलेज आ गया|

अब मेरे एक फ्रेंड की शादी तय हो गई है तो उसकी शादी अटेंड करनें के लिए अब घर जाना पक्का है| अब देखते हैं कि क्या है किस्मत में| मैं अब चाची की गांड भी मरना चाहता हूँ पटा नहीं मौक़ा मिलेगा या नहीं? और अगर मौक़ा मिला तो चाची अपनी गांड मरवायेगीं या नहीं? या मुझे सिर्फ चाची की चूत चोद कर गुजारा करना पडेगा|

जो कहानियाँ अभी पढ़ी जा रही हैं

loading...
error: Protected