loading...

“एक भँवरे नें एक कली को फूल बना दिया”-4

Antarvasna sex stories, desi kahani, hindi sex stories, chudai ki kahani,

प्रियंका की योनि एकदम कसी हुई और अंदर से जैसे धधक रही थी! मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा लिंग जैसे किसी नर्म गर्म संडासी में फंसा हुआ हो| ऐसा लगता था कि योनि की उष्मा शनैः शनैः मेरे लिंग को पिंघला कर ही मानेंगी तो विरोध स्वरूप मेरा लिंग भी बृहत्तर से बृहत्तर आकार लेनें लगा|
योनि और लिंग के स्राव मिल कर खूब चिकनाहट पैदा कर रहे थे और योनि में लिंग का आवागमन थोड़ा सा सुगम होता जा रहा था लेकिन अभी मैं अपनें लिंग को प्रियंका की योनि के और ज्यादा अंदर प्रवेश करवानें से परहेज़ कर रहा था! आराम-आराम से अपनें लिंग को प्रियंका की योनि से बाहर खींच कर! फिर जहां था वहीं तक दोबारा ठेल रहा था|
अब प्रियंका भी इस रिदम का लुत्फ़ अपनें नितम्ब उठा-उठा कर ले रही थी! ऐसे करते करते दस मिनट हो चुके थे और प्रियंका आँखें बंद कर के अभिसार का सम्पूर्ण आनन्द ले रही थी! लेकिन अभी कहानी आधी ही हुई थी! समय आ गया था कि इस अभिसार को सम्पूर्णता की ओर अग्रसर किया जाए|
प्रेमपूर्वक किये जा रहे अभिसार का सबसे मुश्किल क्षण आनें को था! यह वो क्षण होता है जब एक पुरुष! पूर्ण-पुरुष की उपाधि पाता है और एक स्त्री! सुहागिन की पदवी पाती है| इसी क्षण से आगे चल कर स्त्री! एक जननी बनती है! एक माँ बनती है और एक नई सृष्टि रचती है|
इस पल में पुरुष अपनी प्रेयसी के साथ प्यार के साथ साथ थोड़ी सी क्रूरता से पेश आता है! वही क्रूरता दिखानें का पल आ पहुंचा था| मैंनें प्रियंका के बाएं उरोज़ के निप्पल को मुंह में लिया और उसे चुभलानें लगा! प्रियंका के गर्म शरीर का उत्ताप फिर से बढ़नें लगा और उन्माद में प्रियंका बिस्तर पर जल बिन मछली की तरह तड़पनें लगी|
मैंनें प्रियंका का सर अपनें दोनों हाथों से दाएं-बाएं से दबा कर! प्रियंका के उरोज़ के निप्पल से मुंह उठाया और प्रियंका के दोनों होठों को अपनें होठों में दबा लिया और लगा चूसनें!
अगले ही पल मैंनें अपना लिंग प्रियंका की योनि से बाहर निकाल कर पूरी शक्ति से वापिस प्रियंका की योनि में उतार दिया| अगर मैंनें प्रियंका के दोनों होंठ अपनें होंठों से बंद नहीं कर दिए होते तो यकीनन प्रियंका की चीख सड़क के परले सिरे तक सुनाई दी होती|
तत्काल प्रियंका के दोनों हाथों नें दीवान की चादर पकड़ कर गुच्छा-मुच्छा कर डाली और अपनें पैरों से मुझे पर धकेलनें की असफल कोशिश करनें लगी| प्रियंका की आँखों से आंसुओं की धारें फ़ूट पड़ी पर अब तो जो होना था सो हो चुका था|
अब प्रियंका कुंवारी नहीं रही थी|
मैं प्रियंका के ऊपर औंधा पड़ा धीरे धीरे प्रियंका के सर को सहला रहा था! उसके आंसू अपनें होंठों से बीन रहा था|
धीरे-धीरे प्रियंका का रोना कम होता गया और मैंनें हौले हौले अपनी क़मर को हरकत देना प्रारंभ किया! चार-छह धक्कों के बाद! अचानक प्रियंका के शरीर में वही जानी पहचानी कम्पन की लहर उठी|
दो पल बाद ही प्रियंका का शरीर इस रिदम का जवाब देनें लगा| लिंग को प्रियंका की योनि से बाहर खींचनें की क्रिया के साथ साथ ही प्रियंका अपनें नितम्ब नीचे को खींच लेती और जैसे ही लिंग योनि में दोबारा प्रवेश पानें को होता तो प्रियंका शक्ति के साथ अपनें नितंब ऊपर को करती! परिणाम स्वरूप एक ठप्प की आवाज के साथ मेरा लिंग प्रियंका की योनि के अंतिम छोर तक जाता|
प्रियंका के मुख से ‘आह…आई… ओह… मर गई… हा… उफ़… उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाय… सी… ई…ई’ की आधी-अधूरी सी मज़े वाली सिसकारियां अविरल निकल रही थी और मैं बेसाख्ता प्रियंका को यहाँ-वहाँ चूम रहा था! चाट रहा था माथे पर! आँखों पर! गालों पर! नाक पर! गर्दन पर! गर्दन के नीचे! कंधो पर! उरोजों पर! निप्पलों पर! उरोजों के बीच की जगह पर!
हमारा अभिसार अपनी अधिकतम गति पर था! अचानक प्रियंका का शरीर अकड़नें लगा! प्रियंका नें अपनें दांत मेरे बाएं कंधे पर गड़ा दिए! मेरी पीठ पर प्रियंका के तीखे नाख़ून पच्चीकारी करनें की कोशिश करनें लगे|
ये लक्षण मेरे जानें पहचानें थे! मैं तत्काल अपनी कोहनियों के बल हुआ और प्रियंका के दोनों हाथ अपनें हाथों में जकड़ कर बिस्तर पर लगा दिए और अपनी कमर तीव्रतम गति से चलानें लगा! साथ साथ मैं कभी प्रियंका के होठों पर चुम्बन जड़ रहा था! कभी उसके निप्पलों पर! कभी उसकी आँखों पर!
अचानक प्रियंका का सारा शरीर कांपनें लगा और प्रियंका की योनि में जैसे विस्फोट हुआ और प्रियंका की योनि से जैसे स्राव का झरना फूट पड़ा| प्रियंका जिंदगी में पहली बार सम्भोगरत हो कर स्खलित हो रही थी और प्रियंका की योनि की मांसपेशियों नें संकुचित होकर मेरे लिंग को जैसे निचोड़ना शुरू कर दिया|
प्रतिक्रिया स्वरूप मेरा लिंग और ज्यादा फूलना शुरू हो गया! इसका नतीजा यह निकला कि मेरे लिंग के लिए संकरी योनि में रास्ता और भी ज्यादा संकरा हो गया और मेरे लिंग पर प्रियंका की योनि की अंदरूनी दीवारों की रगड़ पहले से भी ज्यादा लगनें लगी|
करीब एक मिनिट बाद ही जैसे ही मैंनें पूरी शक्ति से अपना लिंग प्रियंका की योनि में अंदर तक डाला मेरे अंडकोषों में एक जबरदस्त तनाव पैदा हुआ और मेरे लिंग नें पूरी ताक़त से वीर्य की पिचकारी प्रियंका की योनि के आखिरी सिरे पर मारी फिर एक और.. एक और… एक और… एक और… मेरे गर्म वीर्य की बौछार!
अपनी योनि में महसूस कर के अब तक निढाल और करीब-करीब बेहोश पड़ी प्रियंका जैसे चौंक कर उठी और उसनें मुझसे अपनें हाथ छुड़ा कर जोर से मुझे आलिंगन में ले लिया और मुझे यहाँ-वहाँ चूमनें लगी|
एक भँवरे नें एक कली को फूल बना दिया था! एक लड़की! एक औरत बन चुकी थी! एक सफल अभिसार का समापन हो चुका था|

loading...
loading...