loading...

“एक भँवरे नें एक कली को फूल बना दिया”-3

Antarvasna sex stories, desi kahani, hindi sex stories, chudai ki kahani,

ड्राइंग रूम में सड़क से थोड़ी सी स्ट्रीट लाइट आ रही थी और वहाँ बैडरूम के जैसा घुप्प अन्धेरा नहीं था|
नीम अँधेरे में प्रियंका मेरी बाहों में छटपटा रही थी- मैं नहीं… मैं नहीं… मौसी उठ जायेगी… मैं बदनाम हो जाऊँगी! आप मुझे कहीं का नहीं छोड़ोगे!
ऐसे ऊटपटाँग बोल रही थी|
बाहर आते ही मैंनें अपनें बैडरूम का दरवाज़ा और बच्चों के कमरे का दरवाज़ा बाहर से लॉक किया और प्रियंका को बताया कि मौसी नहीं उठेंगी क्योंकि मौसी आज नींद में नहीं नशे में है|
फिर मैंनें उसको नींद की गोलियों वाली बात बताई तो प्रियंका आश्वस्त हुई|
मैंनें प्रियंका को बाहों में लेकर उसके तपते होठों पर होंठ रख दिए| अब प्रियंका भी दुगनें जोशो-खरोश से मेरा साथ देनें लगी| मैं प्रियंका का निचला होंठ चूस रहा था और प्रियंका मेरा ऊपर वाला होंठ चूस रही थी|
कभी मैं प्रियंका की जुबान अपनें मुंह में पा कर चूसता और कभी मेरी जीभ प्रियंका के मुंह के अंदर प्रिय के दांत गिनती|
मेरे दोनों हाथ प्रियंका के जिस्म की चोटियों और घाटियों का जायज़ा ले रहे थे! प्रियंका का एक हाथ मेरे लिंग के साथ अठखेलियां कर रहा था और दूसरा हाथ मेरी गर्दन के साथ लिपटा था और प्रियंका खुद मेरे साथ लिपटी हुई पूरी हवा में झूल रही थी|
ऐसे ही प्रियंका को अपनें साथ लिपटाये लिपटाये चलते हुये मैंनें ड्राइंग रूम में बिछे दीवान के पास उस को खड़ा कर दिया और खुद प्रियंका का नाईट सूट उतारनें लगा|
प्रियंका नें रस्मी सा प्रतिरोध किया तो सही पर मैं माना ही नहीं… पलों में मैंनें प्रियंका के नाईट सूट के साथ साथ नीचे पहनी इनर भी उतार दी और अगले ही पल मैंनें अपनें कपड़ों को भी तिलांजलि दे दी और प्रियंका की ओर मुड़ा|
वस्त्रविहीन खड़ी प्रियंका कभी अपनी नग्नता छुपानें की! कभी दिखानें की कोशिश करती! कोई खजुराहो का दिलकश मुज्जस्मा लग रही थी| प्रियंका के अनावृत दो उरोज़ और उन पर तन कर खड़े दो निप्पल जैसे पूरे संसार को चुनौती दे रहे थे कि ‘है कोई… जो हमें झुका सके?’
मेरा मन भावनाओं से भर आया! मैंनें प्रियंका को जोर से अपनें आलिंगन में कस लिया और बदले में प्रियंका नें दुगनें जोर से मुझे अपनें आलिंगन में कस लिया|
प्रियंका के दोनों उरोज़ मेरे सीनें में धँसे हुए से थे| मैं प्रियंका के दिल की धड़कनेंं साफ़ साफ़ अपनें सीनें में धड़कती महसूस कर रहा था| वक़्त का पहिया चलते-चलते अचानक थम सा गया था! उस वक़्त मैं… सिर्फ मैं था! ना कोई पति… ना पिता! सिर्फ मैं!
मेरी दोनों बाजुयें सख़्ती से प्रियंका को लपेटे हुए प्रियंका की पीठ पर जमी थीं| मैं अपना एक हाथ प्रियंका की पीठ पर ऊपर नीचे फिरा रहा था कंधों से लेकर नितंबों के नीचे तक!
कभी कभी मेरी उंगलियां नितंबों की दरार के साथ साथ नीचे… गहरे नीचे उतर जाती! बिल्कुल योनि-द्वार तक!
प्रियंका की योनि से कामरस का अविरल प्रवाह जारी था जिससे मेरा हाथ सना जा रहा था लेकिन उस अलौकिक आनन्द को पाते रहनें में मुझे प्रियंका की योनि-द्वार तक अपनें हाथों की गर्दिश कयामत के दिन तक मंज़ूर थी|
थोड़ी देर बाद मैंनें बहुत प्यार से प्रियंका को आलिंगन में लिए लिए! दीवान पर लेटा दिया और प्रियंका के निप्पलों को अपनें मुंह में लेकर कर खुद प्रियंका के ऊपर झुक सा गया! उसके मुंह से सिसकारियां अपनें चरम पर थी|
अचानक प्रियंका नें अपना एक हाथ नीचे कर के मेरा लिंग अपनें हाथ थाम लिया और जोर जोर से अपनी ओर खींचनें लगी|
आज़माइश की घड़ी पास आती जा रही थी! बतौर प्रेमी! मेरे कौशल का इम्तिहान बहुत सख़्त था! मुझे ना सिर्फ बिना कोई हल्ला किये एक सफल अभिसार करना था! बल्कि अपनी कँवारी प्रेमिका को बिना कोई ठेस लगाए अपनें प्यार का एहसास भी करवाना था|
बगल वाले कमरे में मेरी पत्नी सो रही थी और किसी किस्म का हल्ला-गुल्ला उसकी नींद उचाट कर सकता था|
काम मुश्किल था… पर मुझे करना ही था… हर हाल में करना था और अभी करना था|
मैंनें प्रियंका को जरा सा सीधा किया और घुटनों के बल बैठ कर प्रियंका की दोनों टांगों के बीच में आ गया! अपना लिंग मैंनें अपनें दाएं हाथ में लेकर प्रियंका की योनि की दरार पर रख कर थोड़ा अंदर की ओर दबाते हुए ऊपर नीचे फिराना शुरू कर दिया| प्रियंका के मुंह से आहें! कराहें क्रमशः तेज़ और ऊँची होती जा रही थी और उसके शरीर में रह रह कर उत्तेजना की लहरें उठ रही थी|
जैसे ही मेरे लिंग का शिश्नमुंड प्रियंका की योनि की दरार के ऊपर भगनासा को दबाता! प्रियंका के शरीर में मदन-तरंग उठती जिसका कम्पन मैं स्पष्टत: महसूस कर रहा था|
प्रियंका की योनि से कामरस अविरल बह रहा था! प्रियंका रह-रह कर मुझे अपनें ऊपर खींच रही थी जिससे यह बात साफ़ थी कि गर्म लोहे पर चोट करनें का वक़्त आ गया था पर मैं कोई रिस्क नहीं ले सकता था|
अचानक मेरे लिंग का शिश्नमुंड प्रियंका की योनि के मध्य भाग से जरा सा नीचे जैसे किसी नीची सी जगह में अटक गया और तभी प्रियंका के शरीर में भी जोर से इक झुरझुरी सी उठी! जन्नत का मेहमान जन्नत की दहलीज़ पर ख़डा था! मैंनें अपना लिंग प्रियंका की योनि में वहीं टिका छोड़ दिया और ख़ुद प्रियंका के ऊपर सीधा लेट गया|
मैंनें प्रियंका का निचला होंठ अपनें होंठों में लिया और हौले हौले उस को चुभलानें लगा| प्रियंका नें प्रतिक्रिया स्वरूप अपनी दोनों टांगें हवा में उठाईं और मेरी क़मर पर कैंची सी मार कर अपनें पैरों से मेरी क़मर नीचे की ओर दबानें लगी|
अभी मेरा शिश्नमुंड भी पूरा प्रियंका की योनि के अंदर नहीं गया था और लड़की मेरे लिंग को और अपनी योनि के अंदर लेनें को उतावली हो रही थी|
मैंनें अपनें लिंग पर हल्का सा दबाव बढ़ाया! अब मेरे लिंग का शिश्नमुंड पूरा प्रियंका की योनि के अंदर था|
‘आ… ई…ई…ई… ई…ई…ईईईई!!!’ प्रियंका के मुंह से आनन्द स्वरूप निकल रही सीत्कारों में पीड़ा का जरा सा समावेश हो गया| मुझे इस का पहले से ही अंदाज़ा था! मैंनें फ़ौरन अपनें लिंग पर दबाब डालना बंद कर दिया और यहीं से शिश्नमुंड वापिस खींच कर हौले से प्रियंका की योनि में वापिस यही तक दोबारा ले जा कर फिर वापिस खींच लिया|
ऐसा मैंनें तीन चार बार किया! प्रियंका पर इसकी तत्काल प्रतिक्रिया हुई! पांचवी बार जैसे ही मैंनें अपना लिंग प्रियंका की योनि से बाहर निकाला! प्रियंका नें मेरी पीठ पर अपनी टांगों की कैंची तत्काल पूरी ताक़त से अपनी ओर खींची! परिणाम स्वरूप मैं भी प्रियंका की ओर जोर से खिंचा और मेरा लिंग भी प्रियंका की योनि में ढाई से तीन इंच और गहरा चला गया|
‘सी…ई…ई…ई… आह…!’ प्रियंका के मुख से आनन्द और पीड़ा भरी मिली-जुली सिस्कारी निकल गई|

loading...
loading...