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“एक भँवरे नें एक कली को फूल बना दिया”-2

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फिर मैंनें प्रियंका की ओर करवट ली और अपना बायां हाथ प्रियंका के बाएं उरोज़ पर रख दिया! प्रियंका नें मेरा वो हाथ फ़ौरन परे झटक दिया
और अपना सर बायें से दायें हिला कर जैसे अपना एतजय़ जताया लेकिन मैंनें दोबारा अपना हाथ उसके बायें उरोज़ पर रख दिया|
प्रियंका नें दोबारा मेरा हाथ अपनें उरोज़ पर से उठाना चाहा लेकिन इस बार मेरा हाथ ना उठानें का इरादा पक्का था! दो एक मिनट की
असफ़ल कोशिश करनें के बाद प्रियंका नें अपना हाथ मेरे हाथ से उठा लिया और जैसे मुझे मनमानी करनें की इज़ाज़त दे दी|
मैं अँधेरे में प्रियंका के उरोज़ की नरमी और गर्मी दोनों को अपनें हाथ में महसूस कर रहा था|
धीरे धीरे मैंनें अपनी उँगलियों को प्रियंका के उरोज़ पर ज़ुम्बिश देनी शुरू की| प्रियंका का उरोज़ बहुत नर्म सा था! मैं उस पर बहुत नरमी से
उंगलियां चला रहा था|
अचानक एक जगह हल्की सी कुछ सख़्त सी मालूम पड़ी| हल्का सा टटोलनें पर पता पड़ा कि यह उरोज़ का निप्पल है|
जैसे ही मेरा हाथ निप्पल को लगा! वो और ज़्यादा टाईट और बड़ा हो कर ख़डा हो गया| मैंनें अपना हाथ प्रियंका की चादर के अंदर डाल
कर! प्रियंका की नाईट सूट का ऊपर वाला एक बटन खोल कर! ब्रा के अंदर से हौले से प्रियंका के उरोज़ पर रखा तो प्रियंका के पूरे ज़िस्म में
झुरझुरी की एक लहर सी दौड़ गई जिसे मैंनें स्पष्टत महसूस किया|
प्रियंका की गर्म तेज़ साँसें मैं अपनी कलाई पर महसूस कर रहा था| प्रियंका के उरोज़ के कठोर निप्पल का स्पर्श मैं अपनी हथेली के ठीक
बीचों बीच महसूस कर पा रहा था|
धीरे से मैंनें अपनी पाँचों उंगलियां उरोज़ के साथ साथ ऊपर उठानी शुरू की और अंत में निप्पल उँगलियों के बीच में आ गया जिसे मैंनें
हलके से दबाया|
प्रियंका के मुख से शाश्वत आनन्द की ‘आह’ की हल्की सी सिसकारी प्रफुटित हुई| जल्दी ही मैंनें अपना हाथ दूसरे उरोज़ की ओर सरकाया
दूर वाला उरोज़ थोड़ा दूर पड़ रहा था तो प्रियंका बिना कहे खुद ही सरक कर मेरी ओर ख़िसक आई|
अब ठीक था|
मैंनें अपना हाथ ब्रा के ऊपर से ही परले उरोज़ पर ऱखा और उरोज़ को थोड़ा सा दबाया| प्रिय के मुंह से बहुत ही हलकी सी ‘सी… सी’
की सिसकारी निकली|
मैंनें अपना हाथ उठा कर धीरे से ब्रा के अंदर सरकाया और परले उरोज़ पर कोमलता से हाथ धर दिया| परले उरोज़ का निप्पल अभी
दबा दबा सा था लेकिन जैसे ही मेरे हाथ नें निप्पल को छूआ! निप्पल नें सर उठाना शुरू कर दिया और एक सैकिंड में ही अभिमानी
योद्धा गर्व से सर ऊंचा उठाये खड़ा हो गया|
अचानक मुझे लगा की मेरे परले हाथ की हथेली पर कुछ नरम-नरम! कुछ गरम-गरम सा लग रहा है! देखा तो अपनी चादर के अंदर
प्रियंका मेरा हाथ बहुत शिद्दत से चूम रही थी! पूरे हाथ पर जीभ फ़िरा रही थी|
जल्दी ही प्रियंका नें मेरे हाथ की उँगलियाँ एक एक कर के अपनें मुँह में डाल कर चूसनी शुरू कर दी| मैं प्रियंका के होंठों की नरमी और
उस की जीभ का नरम स्पर्श अपनी उँगलियों पर महसूस कर कर के रोमांचित हो रहा था|
मेरा लिंग 90 डिग्री पर चादर और पजामे का तंबू बनाये फौलाद सा सख्त खड़ा था! मारे उत्तेज़ना के मेरे नलों में तेज़ दर्द हो रहा था|
अब सहन करना मुश्किल था! लेकिन इस से और आगे बढ़ना खतरे से खाली नहीं था|
अपनें ही बैडरूम में! अपनी ही पत्नी की कुंवारी भांजी के साथ शारीरिक संबंध बनाते या बनानें की कोशिश करते! अपनी ही पत्नी के
हाथों रंगे-हाथ पकड़े जानें से ज़्यादा शर्मनाक कुछ और हो नहीं सकता था|
मैं ऐसी बेवकूफी करनें वाला हरगिज़ नहीं था|
जिंदगी रही तो आगे ऐसे बहुत मौक़े मिलेंगे जब आदमी अपनें दिल की कर गुज़रे और प्रियंका तो जय़ी थी ही!
बेमन से मन ममोस कर मैं उठा और बाथरूम में जाकर पेशाब करनें के लिए पजामा खोला तो मेरा लिंग झटके से बाहर आया|
जैसे ही मैंनें लिंग का मुंह कमोड की ओर पेशाब करनें के लिए किया! मेरे पेशाब की धार कमोड में नीचे जानें की बजाए कमोड के ऊपर
सामनें दीवार कर पड़ी! मैं अपनें लिंग को नीचे की ओर झुकाऊं पर मेरा लिंग नीचे की ओर हो ही ना!
जैसे तैसे पेशाब करके मैं वापिस बैडरूम में आया ही था कि जुली नें मुझ से टाइम पूछा! मेरी तो फट के हाथ में आ गई|
ख़ैर जी!
जुली को टाइम बता कर A.C का टेम्प्रेचर थोड़ा बढ़ा कर मैं भी सोनें की कोशिश करनें लगा! उधर प्रियंका भी चुपचाप चित पड़ी सोनें का
बहाना कर रही थी|
बहुत रात बीतनें के बाद मुझे नींद आई|
अगला सारा दिन मैंनें मन ही मन चिढ़ते कुढ़ते हुए गुज़ारा| जो कुछ और जितना कुछ प्रियंका के साथ रातों को हो रहा था! उस से ज़्यादा
होनें की गुंजाईश बहुत कम थी और ऐसा होना भी बहुत दिनों तक ऐसा होना मुमकिन नहीं था|
आज नहीं तो कल! प्रियंका के कमरे का A.C ठीक हो कर आना ही था| ऊपर से अपनें ही बैडरूम में जुली के किसी भी क्षण उठ जानें का डर हम दोनों को खुल कर खेलनें नहीं देता था|
मुझे जल्दी ही कुछ करना था|
किसी दिन प्रियंका को ले कर किसी होटल में चला जाऊं?
ना… ना! यह निहायत ही बकवास आईडिया था! आधा शहर मुझे जानता था और प्रियंका को होटल ले कर जानें के अपनें खतरे थे|
और… घर में? घर में मेरे बच्चे थे! जुली थी… नहीं नहीं! ऐसा होना भी मुमकिन नहीं था|
तो फिर… क्या करूँ? कुछ समझ में नहीं आ रहा था! लिहाज़ा मैं चिड़चिड़ा सा हो रहा था|
रात को डिनर करनें के बाद फिर बाथरूम में ब्रश करनें के बाद मैं अपना अंडरवियर उतार कर पजामा बिना अंडरवियर के पहन कर A.C का टेम्प्रेचर 20 डिग्री पर सेट कर के सीधे अपनें बिस्तर पर जा पड़ा| आज प्रियंका और जुली दोनों अभी तक बेडरूम में नहीं आई थी|
अपनें आप में उलझे हुए मेरी कब आँख लग गई! मुझे पता ही नहीं चला|
अचानक मेरे कान में कुछ सुरसुरी सी हुई! मैंनें नींद में ही हाथ चलाया तो मेरे हाथ में प्रियंका का हाथ आ गया! प्रियंका चुपके से मुझे जगानें की कोशिश कर रही थी|
मैंनें प्रियंका का हाथ अपनी छाती पर रख कर ऊपर अपना हाथ रख दिया और प्रियंका की साइड वाला हाथ चादर के अंदर से उसके चेहरे पर फेरनें लगा|
माथा! गाल! कान! आँखें! नाक! होंठ! ठुड्डी! गर्दन… धीरे-धीरे मेरा हाथ नीचे की ओर अग्रसर था और प्रियंका की साँसें क्रमशः भारी होती जा रही थी और प्रियंका मुझे पिछले रोज़ की तरह से रोक भी नहीं रही थी! लगता था कि प्रियंका खुद ऐसा चाह रही थी|
जैसे ही मेरा हाथ गर्दन के नीचे से होता हुआ प्रियंका कंधे से होता हुआ प्रियंका की छातियों तक पहुंचा तो मैं एक सुखद आश्चर्य से भर उठा| आज प्रिय नें नाईट सूट के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी! बस एक पतली बनियान सी पहनी हुई थी| मेरा हाथ उरोज़ को छूते ही प्रियंका के शरीर में वही परिचित झुनझुनाहट की लहर उठी|
आज मैं कल जैसी नर्म दिली से पेश नहीं आ रहा था! उरोज़ का निप्पल हाथ में आते ही फूल कर सख़्त हो गया था! मैं अंगूठे और एक उंगली के बीच में निप्पल लेकर हल्के हल्के मसलनें लगा|
प्रियंका का दायां हाथ मेरे हाथ के ऊपर रखा था! जहां जहां उसे तीव्र आनन्द की अनुभूति होती! वहीं वहीं उसका हाथ मेरे हाथ पर कस जाता|
मेरा मन कर रहा था कि मैं प्रियंका के उरोज़ों का अपनें होंठों से रसपान करूँ लेकिन उस में अभी भयंकर ख़तरा था सो मैंनें अपनें मन पर काबू पाया और इसी खेल को आगे बढ़ानें में लग गया|
मैंनें अपना दायां हाथ प्रियंका के उरोजों से उठा कर प्रियंका के बाएं हाथ पर (जो मेरी छाती पर ही पड़ा था) रख दिया|
प्रियंका के हाथ को सहलाते सहलाते मैंनें प्रियंका का हाथ उठा कर पजामे के ऊपर से ही अपनें गर्म! तनें हुए लिंग पर रख दिया|
प्रियंका को जैसे 440 वाट का करंट लगा! उसनें झट से अपना हाथ मेरे लिंग से उठानें की कोशिश की लेकिन उस के हाथ के ऊपर तो मेरा हाथ था! कैसे जानें देता?
दो एक पल की धींगामुश्ती के बाद प्रियंका नें हार मान ली और मेरे लिंग पर से अपना हाथ हटानें की कोशिश छोड़ दी|
मैंनें अपनें हाथ से जो प्रियंका का वो हाथ थामे था जिस की गिरफ़्त में मेरा गर्म! फौलाद सा तना हुआ लिंग था! को दो पल के लिए अपनें लिंग से हटाया और अपना पजामा अपनी जांघों से नीचे कर के वापिस अपना लिंग प्रियंका को पकड़ा दिया| प्रियंका के शरीर में फिर से वही जानी-पहचानी कंपकंपी की लहर उठी|
अब के प्रियंका का हाथ खुद ही लिंग की चमड़ी को आगे पीछे कर के मेरे लिंग से खेलनें लगा! कभी वो शिशनमुंड पर उंगलिया फेरती! कभी लिंग की चमड़ी पीछे कर के शिशनमुंड को अपनी हथेली में भींचती! कभी मेरे अण्डकोषों को सहलाती|
ऊपर मेरे हाथों द्वारा प्रियंका की छातियों का काम-मर्दन जारी था| धीरे धीरे मैं अपना दायां हाथ प्रियंका के पेट पर ले गया! नाईट सूट के अप्पर को पेट से ऊंचा करके मैंनें प्रियंका के पेट पर हल्के से हाथ फेरा और फिर से प्रियंका के शरीर में वही जानी पहचानी कंपकंपी की लहर को महसूस किया! प्रियंका का हाथ मेरे लिंग पर जोरों से कस गया|
मैं धीरे धीरे अपना हाथ प्रियंका के पेट पर घुमाता घुमाता नाभि के आस पास ले गया! प्रियंका के शरीर में रह रह कर कंपन की लहरें उठ रही थी|
जैसे ही मेरा हाथ प्रियंका के नाईट सूट के लोअर के नाड़े को टच हुआ! प्रियंका नें अपनें दाएं हाथ से मेरा हाथ पकड़ लिया और मजबूती से मेरा हाथ ऊपर को खींचनें लगी|
मैंनें जैसे-तैसे अपना हाथ छुड़ाया और फिर से दोबारा जैसे ही प्रियंका के नाईट सूट के लोअर के नाड़े को छूआ! प्रियंका की फिर वापिस वही प्रतिक्रिया हुई! उसनें मजबूती से मेरा हाथ पकड़ कर वापिस ऊपर खींच लिया|
ऐसा लगता था कि प्रियंका मुझे किसी कीमत पर अपना लोअर खोलनें नहीं देगी|
मजबूरी थी… प्यार था! लड़ाई नहीं जो जोर जबरदस्ती करते! जो करना था खामोशी से और आपसी समझ बूझ से ही करना था|
मैंनें प्रियंका का हाथ उठा कर वापिस अपनें लिंग पर रख दिया और अब की बार अपना हाथ चादर के अंदर पर उसके नाईट सूट के सूती लोअर बाहर से ही प्रियंका की बाईं जांघ कर रख दिया प्रियंका के शरीर में कंपन की लहर उठी और अब मैं प्रियंका की जांघ सहलाते सहलाते अपना हाथ जांघ अंदर को और ऊपर की ओर ले जानें लगा|
मेरी स्कीम काम कर गई! आनन्द स्वरूप प्रियंका के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारी निकलनें लगी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ उसका हाथ जोर-जोर से मेरे लिंग पर ऊपर-नीचे चलनें लगा|
प्रियंका की बाईं जांघ पर स्मूथ चलती मेरी उंगलियों नें अचानक महसूस किया कि उंगलियों और रेशमी जांघ के बीच में कोई मोटा सा कपड़ा आ गया हो|
मैं समझ गया कि यह प्रियंका की पेंटी थी| धीरे धीरे मैं जाँघों के ऊपरी जोड़ की ओर बढ़ा|
उफ़! एकदम गर्म और सीली सी जगह… मैंनें वहां अपना हाथ रोक कर अपनी उंगलियों से सितार सी बजाई|
फ़ौरन ही प्रियंका नें मेरे लिंग को इतनें जोर से दबाया कि पूछो मत!
मैंनें नाईट सूट के सूती लोअर के बाहर से ही प्रियंका की पेंटी को साइड से ऊपर उठाया और नाईट सूट के कपडे समेत अपनी चारों उंगलियां प्रियंका की पेंटी के अंदर डाल दी| मेरे हाथ के नीचे जन्नत थी पर मुझे इस जन्नत पर कुछ जटाजूट सा कुछ महसूस होता| शायद प्रियंका अपनें गुप्तांगों के बाल नहीं काटती थी|
मैं कुछ देर अपनी उंगलियों से सितार बजानें जैसी हरकत करता रहा और इधर प्रियंका मेरे लिंग को मथती जा रही थी|
अचानक ही मैंनें अपना दायां हाथ प्रियंका की योनि से उठाया और फुर्ती से प्रियंका के नाईट सूट के लोअर का नाड़ा खोल कर अपना हाथ प्रियंका की पेंटी के अंदर से प्रियंका की बालों भरी योनि पर रख दिया|
प्रिय नें फ़ौरन अपना दायां हाथ मेरे हाथ पर रखा और मेरा हाथ अपनी योनि से उठानें की कोशिश करनें लगी लेकिन अब तो बाज़ी बीत चुकी थी! अब मैं कैसे हाथ उठानें देता|
मैंनें सख्ती से अपना हाथ प्रियंका की योनि पर टिकाये रखा और साथ साथ अपनी बीच वाली उंगली योनि की दरार पर ऊपर से नीचे! नीचे से ऊपर फिराता रहा|
कुछ ही देर बाद प्रियंका नें मेरे उस हाथ की पुश्त पर जिससे मैं उसकी योनि का जुग़राफ़िया नाप रहा था! एक हल्की सी चपत मारी और अपना हाथ उठा कर परे करके जैसे मुझे खुल कर खेलनें की परमीशन दे दी|
प्रियंका की योनि से बेशुमार काम-रस बह रहा था! उसकी पूरी पेंटी भीग चुकी थी| मैंनें योनि की दरार पर उंगली फेरते फेरते अपनी बीच वाली उंगली से प्रियंका की योनि के भगनासा को सहलाया! प्रियंका नें जल्दी से अपनी दोनों जाँघें जोर से अंदर को भींच ली|
मैंनें वही उंगली प्रियंका की योनि में जरा नीचे अंदर को दबाई तो प्रियंका के मुंह से ‘उफ़्फ़’ निकल गया|
प्रियंका शतप्रतिशत कंवारी थी! लगता था कि प्रियंका नें कभी हस्तमैथुन भी नहीं किया था|
तभी मुझे अपनी बाईं ओर हल्की सी हलचल और कपड़ों की सरसराहट का अहसास हुआ! मैंनें तत्काल अपना हाथ प्रियंका की योनि पर से खींचा और प्रियंका से जरा सा उरली तरफ सरक कर गहरी नींद में सोनें के जैसी ऐक्टिंग करनें लगा|
मिंची आँखों से देखा तो जुली बाथरूम जानें के लिए उठ रही थी|
जैसे ही जुली बाथरूम में घुसी मैंनें फ़ौरन अपनें कपड़े ठीक किये और फुसफुसाती आवाज़ में प्रियंका को भी अपनें कपड़े ठीक करनें को कह दिया|
सब कुछ ठीक ठाक करनें के बाद हम दोनों ऐसे अलग अलग लेट गए जैसे गहरी नींद में हों|
बाथरूम से बाहर आ कर जुली नें AC का टेम्प्रेचर बढ़ाया और वापिस बिस्तर पर आकर मुझे पीछे से आलिंगन में ले लिया|
बाल बाल बचे थे हम!
मुझे बहुत देर बाद नींद आई|
अगले दिन शनिवार था और शनिवार के बाद इतवार की छुट्टी थी|
शाम को लगभग 4 बज़े A.C वाले का फ़ोन आया कि A.C ठीक हो गया था और वो पूछ रहा था कि कब अपनें आदमी मेरे घर भेजे ताकि A.C वापिस फ़िट किया जा सके|
मैंनें उसे इतवार शाम को आकर A.C फिट करनें को बोला|
अब मेरे पास केवल एक ही रात थी जिसमें मैंनें कुछ कर गुज़रना था और मैं रात को सबकुछ कर गुज़रनें को दृढ़प्रतिज्ञ था| शाम को मैंनें अपनें परिचित कैमिस्ट से गहरी नींद आनें की गोलियों की एक स्ट्रिप ली और आईसक्रीम की दूकान से एक ब्रिक बटरस्काच आईसक्रीम ले कर घर आया|
जुली को बटरस्काच आईसक्रीम बहुत पसंद थी|
चार गोलियां पीस कर में पुड़ी में अपनें पास रख ली|

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अगली रात डिनर के टाइम डिनर टेबल पर प्रियंका डिनर सर्व कर रही थी! आमतौर पर जुली डिनर सर्व करती थी लेकिन उस दिन प्रियंका डिनर सर्व कर रही थी! आते-जाते बहानें बहानें से मुझे यहां वहां छू रही थी|
डिनर हुआ! आईस क्रीम मैंनें खुद सबको सर्व की| बच्चों की और जुली वाली प्लेट में मैंनें वो पीसी हुईं नींद की गोलियां मिला दी| सब नें आईसक्रीम खाई और करीब 9:30 बजे मैं एक दोहरी मनस्थिति में अपनें बैडरूम में आ गया|
नींद की गोलियों का असर जुली पर एक से डेढ़ घंटे बाद होना था|
ब्रश करनें के बाद मैंनें हस्तमैथुन किया और अपना अंडरवियर पहनें बिना ही पजामा पहन लिया और एक नावेल लेकर वापिस अपनें बिस्तर पर आ जमा| मैं अपनें बिस्तर पर दो तकियों के साथ पीठ टिका कर! पेट तक चादर ले कर ओढ़ कर और घुटनें मोड़ कर नॉवल पढ़नें लगा|
सब काम निपटा कर! करीब सवा दस बजे प्रियंका और जुली दोनों बैडरूम में आईं| तब तक बैडरूम में चलते A.C की बड़ी सुखद सी ठंडक फ़ैल चुकी थी|
आते जुली बोली- आज तो मैं बहुत थक सी गई हूँ! बहुत नींद आ रही है!
‘मुझे भी!’ प्रियंका नें भी हामी भरी|
‘तो सो जाओ! किसनें रोका है|’ मैंनें कहा|
‘और आप?’ जुली नें पूछा|
‘मैं थोड़ा पढ़ कर सोऊंगा! मुझे अभी नींद नहीं आ रही है|’ मैंनें कहा|
‘ठीक है… पर आप ट्यूब लाइट बंद करके टेबललैम्प जला लें!’ जुली नें मुझ से कहा|
मैंनें सिरहानें फिक्स टेबल-लैम्प जला कर ट्यूब लाइट बंद कर दी|
अब स्थिति यूं थी कि मेरे सर के ऊपर थोड़ा बाएं तरफ टेबल-लैम्प जल रहा था और प्रियंका मेरे दाईं तरफ क़दरतन अंधेरे में थी और मेरे दाईं ओर से! मतलब जुली की ओर से प्रियंका को साफ़ साफ़ देख पाना मुश्किल था क्योंकि बीच में मैं था और प्रियंका मेरी परछाई में थी|
बीस-पच्चीस मिनट बिना किसी हरकत के बीते| वैसे तो मेरी नज़र नॉवेल के पन्नों पर थी लेकिन दिमाग प्रियंका की ओर था|
कनखियों से प्रियंका की ओर देखा तो पाया कि प्रियंका बाईं करवट लेटी हुई मेरी ओर ही देख रही थी|
फिर प्रियंका नें आँखों ही आँखों में मुझे लाइट बंद करनें का इशारा किया लेकिन मैंनें उसे अभी रुक जानें का इशारा किया| जबाब में प्रियंका नें मुझे ठेंगा दिखा कर मुंह बिचकाया! ऊपर चादर ले कर उलटी तरफ करवट ली और मेरी तरफ पीठ कर के लेट गई|
मुझे हंसी आ गई और मैंनें हाथ बढ़ा कर प्रियंका का कंधा छूआ तो उसनें मेरा हाथ झटक दिया| मैंनें दोबारा वही हाथ उस की कमर पर रखा तो प्रियंका नें दुबारा मेरा हाथ अपनी कमर से झटक दिया|
लड़की सचमुच रूठ गई थी|
अब के मैंनें अपना हाथ हौले से प्रियंका के ऊपर वाले नितम्ब पर रख दिया! इस बार प्रियंका नें मेरा हाथ नहीं झटका| मैं धीरे-धीरे कोमलता से प्रियंका का पूरा नितम्ब सहलानें लगा|
अचानक मुझे महसूस हुआ कि आज प्रियंका नें लोअर के नीचे पैंटी नहीं पहन रखी थी| वही हाथ प्रियंका की पीठ पर फिरानें से पता चला कि ब्रा भी नदारद थी| इन सब का सामूहिक मतलब तो ये था कि मेरी प्रेयसी अभिसार के लिए आज पूरी तरह से तैयार थी|
ऐसा सोचते ही मेरा लिंग अपनी पूरी भयंकरता के साथ मेरे पजामे में फुंफ़कारनें लगा|
अपना वही हाथ प्रियंका के कंधे तक ला कर मैंनें प्रियंका का कंधा हलके से अपनी ओर खींचा तो प्रियंका सीधी हो कर लेट गई और आँख के इशारे से मुझे टेबल-लैम्प बुझानें को कहा|
मैंनें पहले जुली की ओर घूम कर देखा! अपना चेहरा परली तरफ घुमा कर हल्क़े से कंबल में चित लेटी जुली गहरी निद्रा में थी| मैंनें हाथ बढ़ा कर टेबल लैम्प बंद किया और अंधेरा होते ही झुक कर प्रियंका के होंठों पर होंठ रख दिए|
प्रियंका नें फ़ौरन अपनी बाजुएं मेरे गले में डाल दी और बड़ी शिद्दत से मेरे होंठ चूसनें लगी|
थोड़ी देर बाद मैं सीधा हुआ और फ़ौरन दोबारा प्रियंका की ओर झुक कर मैंनें प्रियंका के माथे पर! आँखों पर! गालों पर! नाक पर! गर्दन पर! गर्दन के नीचे! सैंकड़ों चुम्बन जड़ दिए|
प्रियंका के दाएं कान की लौ चुभलाते समय मैं प्रियंका के मुंह से! आनंद के मारे निकलनें वाली ‘सी…सी… सीई… सीई… सीई… ई…ई…ई’ की सिसकारियाँ साफ़ साफ़ सुन रहा था|
मैंनें प्रियंका के नाईट सूट के ऊपर के दो बटन खोल दिए और अपना हाथ अंदर सरकाया| रुई के समान नरम और कोमल दो गोलों नें जिन के सिरों पर अलग अलग दो निप्पलों के ताज़ सजे थे! मेरे हाथ की उँगलियों का खड़े होकर स्वागत किया|
क्या भावनात्मक क्षण थे!
मेरा दिल करे कि दोनों कबूतरों को अपनें सीनें से लगा कर चुम्बनों से भर दूं! निप्पलों को इतना चूसूं… इतना चूसूं कि प्रियंका के मुंह से आहें निकल जाएँ|
यूं तो प्रियंका के मुंह से आहें तो मेरे उसके उरोजों को छूनें से पहले ही निकलना शुरू हो गई थी|
उधर प्रियंका का बायां हाथ मेरे पाजामे के ऊपर से ही मेरा लिंग ढूंढ रहा था| प्रियंका नें मेरे पजामे का कपड़ा खींच कर मुझे मेरे लिंग को पजामे की कैद से छुड़ानें का इशारा किया! मैंनें तत्क्षण अपना पजामा अपनी जाँघों तक नीचे खींच लिया|
प्रियंका नें बेसब्री से मेरे तपते! कड़े-खड़े लिंग को अपनें हाथ में लिया और उसके शिश्नमुण्ड पर अपनी उंगलियां फेरनें लगी|
मेरे लिंग से उत्तेजनावश बहुत प्री-कम निकल रहा था और उससे प्रियंका का सारा हाथ सन गया|
अचानक प्रियंका नें वही हाथ अपनें मुंह की ओर किया और अपनें हाथ की मेरे प्री-कम से सनी उंगलियां अपनें मुंह में डाल कर चूसनें लगी|
मैंनें तभी प्रियंका के नाईट सूट के बाकी बटन भी खोल दिए और उसकी इनर उठा कर दोनों उरोज़ नग्न कर के अपनी जीभ से यहां-वहां चाटनें लगा|
इससे प्रियंका बिस्तर पर मछली की तरह तड़फनें लगी! प्रियंका जोर जोर से मेरा लिंग हिला दबा रही थी और मैं प्रियंका के उरोजों का! निप्पलों का स्वाद चेक कर रहा था|
प्रियंका पर झुके झुके मैंनें अपना बायाँ हाथ प्रियंका के पेट की ओर बढ़ाया! नाभि पर एक-आध मिनट हाथ की उंगलियां गोल गोल घुमानें के बाद अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ा कर हौले से प्रियंका के नाईट सूट का नाड़ा खोल दिया|
सरप्राइज ! आज प्रियंका नें मुझे ऐसा करनें से नहीं रोका|
मैंनें जैसे ही अपना हाथ और नीचे करके प्रियंका की पेंटी विहीन योनि पर रखा! एक और आश्चर्य मेरा इंतज़ार कर रहा था! आज प्रियंका की योनि एकदम साफ़-सुथरी और चिकनी थी! योनि पर बालों का दूर दूर तक कोई निशान नहीं था! लगता था कि प्रियंका नें शाम को ही योनि के बाल साफ़ किये थे|
छोटी सी योनि ज्यादा से ज्यादा साढ़े चार से पांच इन्च की जिस पर ढाई इंच से तीन इंच की दरार थी! दरार के ऊपर वाले सिरे पर छोटे मटर के साइज़ का भगनासा और प्रियंका की योनि रस से इतनी सराबोर कि दरार में से रस बह-बह जांघों की अंदर वाली साइडों को भिगो रहा था|
मैंनें अपनें हाथ की बीच वाली उंगली दरार पर ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर फेरनी शुरू की! प्रियंका के शरीर में रह रह कर काम तरंगें उठ रही थी जो मैं स्पष्टत: महसूस कर रहा था|
इधर प्रियंका मेरे लिंग का भुरता बनानें पर तुली हुई थी! जोर जोर से लिंग दबा रही थी! चुटकियां काट रही थी और लिंग के शिश्नमुण्ड को अपनी उँगलियों में दबा दबा कर रस निकालनें की कोशिश कर रही थी और बदले में मैं प्रियंका के दोनों उरोज़ चूम रहा था! यहाँ-वहाँ चाट रहा था! निप्पल्स चूस रहा था|
निःसंदेह! हम दोनों जन्नत में थे|
प्रियंका की योनि पर अपनी उंगलियां चलाते-चलाते मैंनें अपनें हाथ की बीच वाली उ|गली दरार में घुसा दी और अंगूठे और पहली उ|बगली से प्रिय का भगनासा हल्का हल्का मींजनें लगा|
इस पर प्रियंका नें उत्तेज़नावश अपनी दोनों टाँगें और चौड़ी कर दी ताकि मेरी बीच वाली उंगली थोड़ी और योनि में प्रवेश पा सके|
मुझे पता था कि प्रियंका पूर्णतः कँवारी थी और मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं था! बस इक वही रात थी और जिंदगी में दोबारा ऐसी रात आनी मुश्किल थी| मैंनें प्रियंका की योनि में धँसी अपनी उंगली को योनि के अंदर ही गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया|
इस का नतीजा फ़ौरन सामनें आया! प्रियंका बार बार रिदम में अपनें नितम्ब बिस्तर से ऐसे ऊपर उठानें लगी जैसे चाहती हो कि मेरी पूरी उंगली उसकी योनि के अंदर चली जाए|
प्रियंका की योनि से बेशुमार रस बह रहा था| मेरे लिंग पर उस की पकड़ और मज़बूत हो गई थी| मैं अपनी उंगली को हर गोल घेरे के बाद थोड़ा और अंदर की ओर धँसा देता था|
धीरे धीरे गोल गोल घूमती मेरी करीब पूरी उंगली प्रियंका की योनि में उतर गई|
अब मैंनें अपनी उंगली को बाहर निकाला और बीच वाली और तर्जनी उंगली को भी योनि में गोल गोल घुमाते घुमाते डालना शुरू कर दिया|
रस से सरोबार प्रियंका की योनि में मेरी दोनों उंगलियां प्रविष्ट हो गई|
अब ठीक था! अपनी प्रेयसी को प्रेम-जीवन के और इस सृष्टि के एक अनुपम और गृहतम रहस्य से परिचित करवानें का समय आ गया था|
मैंनें टाइम देखा! सवा बारह बज रहे थे! मतलब कि नींद की गोलियों का जादू पूरी तरह जुली पर चल चुका था और अब मेरे लिए ‘वन्स इन आ लाइफ टाइम’ जैसा मौका था|
मैं बिस्तर से उठ खड़ा हुआ और पहले अपना पजामा संभाला| परली तरफ जाकर! इससे पहले प्रियंका कुछ समझ पाती! प्रियंका को अपनी गोद में उठा कर और अपनें से लिपटा कर बाहर ड्राइंग रूम में आ गया|

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