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“एक चुदाई ऐसी भी”-1

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मेरा नाम दीपक है,, 3 वर्ष पहले मैंने MBA किया था.

अभी हाल मैं ही मैंने एक नई कम्पनी बेंगलुरु में ज्वाइन की. मेरी उम्र 26 साल, और मैं गाजीपुर का रहने वाला हूँ. मैंने कम्पनी से 6 KM दूर एक रूम किराए पर ले लिया. मकान मालिक मुंबई में सरकारी नौकरी करता हैं.

और मेरी मकान मालकिन रेशमा एक साधारण काली सी 33 साल की गांव की महिला हैं.
उसके दो बच्चे हैं.
रेशमा की बूब्स बड़ी बड़ी और मोटी गांव की औरतों जैसी हैं.
मेरा रूम पहली मंजिल पर है.
मैं अक्टूबर में इस किराए के मकान में आ गया था
और पहले दिन 11 बजे घर पहुँचा था.
रहे थे. पायल नहाने की तैयारी कर रही थी, मतलब वो वापस आ गई थी

मैनेंं दरवाज़े से झाँककर देखा| किरण! वो अब भी मेरा दरवाज़ा बाहर से बंद कर देती थी| मैनें किरण को अभी तक नहीं बताया था कि मै रोज़ उसे नहाते हुए देखता हूँ| उसको नहाते हुए देखनें का अलग मज़ा था|

थोड़ी देर में किरण नंगी होनें लगी| आज उसनें अपनी पैंटी भी पहले ही उतार दी थी| नंगी होकर सुरेखा नहानें लगी|

आज इतनें दिनों के बाद किरण को फिर से नंगा देख रहा था में! मेरा लौड़ा फिर खड़ा होनें लगा|किरण अपनें पूरे शरीर पर साबुन घुमा रही थी! और उसी के साथ साथ मेरा हाथ मेरे लौड़ा पर घूम रहा था|

रोज़ की तरह चूचियाँ हिल रही थीं! जाँघों पर साबुन लगते समय चूत पूरी चमक रही थी|

नहानें के बाद किरण अपनें कमरे में चली गई| फिर में भी तैयार होनें चला गया| आठ बजे रोज़ की तरह नाश्ता लेकर मुझसे मिलनें आई और मेरी बाँहों में चिपक गई| मैनें उसका एक चुम्बन ले लिया|

किरण बोली- अरुण 2-10 की शिफ्ट में हैं| 15 दिन ये रात को 1 बजे आएँगे| तो मै रात में आपसे बातें करुँगी इतना कहकर वो चली गई|

मै ऑफिस चला गया| पूरा दिन ऑफिस में मन नहीं लगा| पता नहीं कैसा जादू सा कर दिया था! किरण नें मुझ पर! मुझे हमेशा उसी की याद आती थी|

जैसे तेसे आज का दिन खत्म करके में घर पहुंचा| किरण ऊपर अपनें कमरे में नहीं थी| मेरे सिर में दर्द हो रहा था! अगर किरण होती तो में उसे चाय बनानें को बोलता|

लेकिन किरण तो थी ही नहीं! में नीचे की तरफ चल दिया| तभी मैनेंं देखा कि किरण का दरवाजा बाहर से बंद है| लेकिन उस पर ताला नही लगा था|

मतलब किरण घर में ही थी| मैनेंं सोचा वो भी नीचे ही होगी! तो में नीचे पहुंचा| कोई दिखाई नहीं दे रहा था| निशा के अंदर वाले कमरे से कुछ आवाजें आ रहीं थीं|

में उसी तरफ चल दिया| मैनें कमरे का दरवाजा खोला| लेकिन ये क्या अंदर का नज़ारा देखकर मेरी आंखे फटी की फटी रह गयीं|

थोड़ी देर में उस अप्सरा को ऐसे ही देखता रहा| फिर एक दम जैसे मुझे होश सा आया| मैनें दरवाजा बंद किया और भागकर ऊपर आ गया|

मेरे सर का दर्द तुरंत गायब हो गया था| मै जैसे ही ऊपर आया मेरे ठीक पीछे पीछे किरण भी ऊपर आ गयी| मै उस से नज़रें नहीं मिला पा रहा था| फिर भी मैनेंं हिम्मत करके उसकी तरफ देखा|

वो खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी| मै भी मुस्कुरा दिया|

किरण बोली- क्या काम था! नीचे कैसे पहुंच गए|

मै बोला- अरे वो सिर में दर्द हो रहा था! तो तुम्हे ढूंढते ढूंढते पहुंच गया| वैसे वो थी कौन|

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मेरे उस लड़की के बारे में पूछनें पर किरण का चेहरा उतर गया| फिर भी वो खुश दिखनें का ढोंग करते हुए बोली|

किरण बोली- वो निशा भाभीजी की चचेरी बहन है| निशा भाभीजी के देवर के लिए उसे पसंद किया है| इसलिए बुलाया है! कल वो लोग इसे देखनें आएंगे यहीं पर|

मै फिर बोला- हां वो तो ठीक है! लेकिन तुम लोग नंगी होकर क्या कर रही थीं|

किरण बोली- नंगी वो थी! मै और भाभीजी तो सिर्फ बेठे थे|

मै हँसते हुए बोला- हाँ तो तुम दोनों क्या उसका फिगर चेक कर रही थी|

किरण भी हँसनें लगी और बोली- फिगर तो तुम चेक कर रहे थे| कैसे नज़रें ज़मा कर देख रहे थे उसे|

किरण फिर बोली- अभी अभी हम बाज़ार से आये थे शॉपिँग करके! तो वो अपनें कपड़े चेक कर रही थी! कि तभी तुम पहुंच गए|

फिर किरण अंदर किचन में चली गयी और मै कमरे में|

रात को 10 बजे खाना खिलानें के बाद किरण मेरे पास आकर बैठ गई! उसनें बिना ब्रा- पैंटी के मैक्सी पहन रखी थी|

मैनें उसे उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया और उसकी मैक्सी के सारे बटनों को खोलकर मै उसकी चूचियाँ सहलानें लगा|

किरण बोली- चूत में खुजली बढ़ गई है|

मैनें उसके होंटों पे होंट लगाते हुए कहा- खुजली तो बढ़ेगी ही ! दवा तो तुम्हारी मेरे पास रखी है|

मैनें पलंग के नीचे से दवा निकाल ली और बोला- अपनी चूत रानी को खोलो! क्रीम लगा देता हूँ|

उसनें अपनी मैक्सी उतार दी! अब वो पूरी नंगी थी और जाँघों को चौड़ा करके मेरी गोद में बैठ गई! मै अपनी उंगली से उसकी चूत में क्रीम की मालिश करनें लगा|

किरण बोली- मामाजी के घर में खुजली कम हो गई थी लेकिन कल रात को ये चढ़ गए और चोदनें लगे| 20 दिन से नहीं नहाए हैं! कुछ कहती हूँ तो मारनें लगते हैं| मेरे पीछे सस्ती रंडी भी चोद आते हैं! बड़ी दुखी हूँ! बहुत गंदे रहते हैं|

मैनेंं किरण से पूछा- तुमनें ऐसे आदमी से शादी क्यों की|

किरण अपनी कहानी बतानें लगी! बोली- मैनें घर से भाग कर शादी की थी! तब मै 21 साल की थी| पापा की पोस्टिंग अहमदनगर में थी|

सोनू अहमदनगर में मेरे पड़ोस में किराए पर रहनें वाली आंटी के भांजे थे! इनसे दो साल से मेरे सम्बन्ध चल रहे थे| इन्होंनें मुझे ये बता रखा था कि ये एक कंपनी में मैनेंंजर हैं|

हर शनिवार और सोनूवार को आंटी के घर आते थे| पापा नें अपनें एक दोस्त के बेटे से मेरी शादी तय कर दी थी! तुम्हारी तरह बहुत सुंदर और एम बी ए लड़का था! मुझे भी पसंद था|

लेकिन मैनें मुकेश के साथ सेक्स कर लिया था| मेरे मन में यह बात बैठी हुई थी कि जिसके साथ सेक्स कर लो! वो ही पति होता है|

इनसे शादी के लिए पापा मम्मी राजी नहीं थे! मै इनके साथ भाग गई और इनसे शादी कर ली! माँ बाप नें नाता तोड़ लिया| मुझे धीरे-धीरे इनकी असलियत पता लगनें लगी ये दसवीं फ़ेल थे और बहुत दारु पीते थे|

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