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आख़िर चोद ही डाला मेरे ससुर जी नेंं मुझे -6

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हर धक्के से योनी में से एलेक्ट्रिक करंट निकलता था और सारे बदन में फैल जाता था|मेरे नितंब ज़ोर ज़ोर से हिल ने लगे थे| आठ दस धक्के बाद उन्हों ने फिर एक बार पूरा लंड योनी की गहराई में ज़ोर से घुसेड दिया| मूल तक लंड चूत में उतर गया| लंड का मूल से मेरी क्लैटोरिस दब गयी बस इतना काफ़ी था| मैं पूरी गरम हो चुकी थी| क्लैटोरिस के दब जाने के साथ ही मुझे जोरो का ओर्गेझम हो गया| मेरी चूत ने लंड नीचोड़ डाला| उस ने भी वीर्य छोड़ दिया| मेरा ओर्गेझम शांत होने तक वो रुके, बाद में उतरे| मैं थक गयी थी| करवट बदल कर सो गयदूसरे दिन से रसिकलाल का व्यवहार ऐसा रहा मानो की कुछ हुआ ही नहीं था| ये अच्छा था क्यूं की अडोस पड़ोस वाली चाचियाँ भाभियाँ और फुफ़्फ़ीयान सब मुझ पार कड़ी निगाहें डाल बैठी थी| मैने भी ऐसा वर्ताव रक्खा की जैसे प्रदीप मुझे रोज़ चोदता हो| उस दिन के बाद सावधानी से ससुरजी मुझे चोदते रहे| उन का बच्चा लग जाय इस से पहले मैं प्रदीप से छुड़वाना चाहती थी| एक मैने उस दिन प्रदीप की पसंदगी का खाना बनाया| रात जब सोए तब मैने पूछा : कैसा लगा आज का खाना ?
प्रदीप : बहुत बढ़िया| रोज़ ऐसा क्यूं नहीं बनाती ?
मैं : क्यूं की मैं आप से रुठ गयी हूँ
प्रदीप : क्यूं ?
मैं : इस लिए की आप मुझ से खेलते नहीं हें|
प्रदीप : खेलूँगा| कौन सा खेल खेलना है ?
मैं : राज कुमार और वन कन्या का|
ख़ुश हो कर वो तालियाँ बजाने लगा और बोला :मैं राज कुमार बनूंगा|
मैं : हाँ, हाँ, तुम ही हो राज कुमार|
प्रदीप: आगे क्या होता है ?
मैं : सुनो, पहले मैं आप को कहानी सुना उंगी| जैसे जैसे कहानी चले वैसे वैसे आप को राज कुमार का रोल अदा करना होगा| तैयार ?
प्रदीप ; हाँ, तू क्या करेगी ?
मैं : कहानी चलते ही आप समझ जाएँगे हुशियर हें ना आप ? मैने कहानी शुरू की …… एक था राजा का बेटा, बिल्कुल आप जैसा| जवान भी था आप जैसा| पता है कैसे मालूम हुआ की वो जवान हो गया था ?
प्रदीप : ना, कैसे मालूम हुआ ?
मैं : उस का बदन भर गया| सीना चौड़ा हो गया| चहेरे पैर दाढ़ी मुछ निकल आए सब तुमारी तरह, हे ना ?
प्रदीप : और क्या ?
मैने शरमा के निगाहें झुका दी और बोली : और उस का वो …| वो जो है ना दो पाँव बीच, लंबा सा, क्या बोलते हें उसे ?
प्रदीप : मूत की जगह ?
मैं : हाँ, हाँ, वो ही| लेकिन उस का दूसरा नाम भी है
प्रदीप : है लेकिन गंदा नाम है मैं : ऐसा ? सुनाओ तो मुझे| मुज़े सुनना है प्रदीप : ना, तू औरत है ऐसे लफ्ज़ नहीं सुनती और बोलती|
मैं : तो कहानी ख़तम| मैं फिर आप से रुठ जा उंगी| मैने रुठ ने का और रोने का खेल खेला|
वो पिघल गया और बोला : रो मत| किसी को कहना मत| उस को लोडा कहते हें| मैं : हाय हाय, तो वो लॅन ……लॅन …| लंड किसे कहते हें ?
प्रदीप : मालूम नहीं| छोड़ो ना ये बेकार बातें| कहानी सुनाओ ना|
मैं : हाँ , तो वो राज कुमार का लोडा लंबा और मोटा हो गया था जिस से पता चला की वो जवान हो गया था| तुमारा ……| लो …लो…||लोडा भी मोटा हो गया है ना ?
प्रदीप : हाँ , कभी कभी कड़ा भी हो जाता है |
मैं : अरे वाह, राज कुमार को भी ऐसा ही होता था| उस का वो भी कड़ा हो जाता था|
प्रदीप : फिर क्या हुआ ?
मैं : एक दिन राज कुमार शिकार खेलने जंगल में गया| अपने रसाले से छूट कर वो बहुत दूर चला गया और रास्ता भूल गया| घूमते घूमते वो थक गया और उसे भूख भी लगी प्रदीप : फिर ?
मैं : इतने में उस ने एक सरोवर देखा| वहाँ जा कर उस ने देखा की एक लड़की पानी में नहा रही थी| लड़की ने राज कुमार को देखा नहीं था| राज कुमार एक पेड़ के पीछे छुप कर लड़की को देखने लगा| लड़की नंगी नहाती थी| जब वो खड़ी हुई तब राज कुमार उस के नंगे बदन को देख कर उत्तेजित हो गया| जानते हो क्यूं ?
प्रदीप : क्यूं ?
मैं : क्यूं की उस लड़की के सीने पर बड़े बड़े गोल गोल कठोर स्तन थे, बिल्कुल मेरे हें वैसे| और भारी चिक्नी जांघें बीच काले झांट से ढकी छोटी सी भोस थी|
प्रदीप : तू तो गंदा बोलती हो| तेरी भ … भ || |भोस भी ऐसी है ?
मैं : मुझे क्या पता ? तुम ही देख कर तय कर लो ना|
प्रदीप : तुझे बुरा नहीं लगेगा ?
मैं : बिल्कुल नहीं, तुम जो मेरे पति हो| लेकिन ज़रा ठहर जाई ये| कहानी पूरी होने पर देख लेना |
प्रदीप : हाँ, ऐसा ही करेंगे|
मैं : वो लड़की को देख कर राज कुमार का लो … लोडा तन गया, वो अपना थाक और भूख भूल गया| लड़की अपने कपड़े पहन ले उस से पहले राज कुमार बाहर निकल आया| उसे देख कर लड़की गभरा गयी अपने हाथों से स्तन और भोस ढकने लगी राज कुमार ने अपनी पहचान दी और कहा की वो रास्ता भूल गया था इसी लिए वहाँ आ पहुँचा था|लड़की ने बताया की वो नज़दीक वाले आश्रम की कन्या थी और नहाने आई थी| उस ने कहा की वो राज कुमार को आश्रम में ले जाएगी और खाना खिलाएगी| उस वक़्त राज कुमार का लंड खड़ा था और ठुमके लगा रहा था| उस ने धोती का तंबू बना रक्खा था| लड़की ने पूछा : ये क्या है ? राज कुमार : ये मेरा सेवक है कन्या : वो ऐसे क्यूं हिल रहा है ? धोती से निकल कर दिखाओ ज़रा| राज कुमार ने धोती हटा कर लंड बाहर निकाला और कहा : पता नहीं| अक्सर ऐसा करता है लड़की हुशियर थी वो सब जानती थी| उस ने काई प्राणीओ को चोदते देखा था|उस की सहेलियों ने उसे सिखाया था की चुदाई कैसे और क्यूं की जाती है उस ने कहा : राज कुमार, में जानती हूँ की आप का सेवक क्यूं ऐसा हिल रहा है वो गरम हो गया है और ठंडी जगह में जाना चाहता है राज कुमार भी चुदाई के बारे में कुछ जानता था, जैसे तुम जानते हो| जानते हो ना ? प्रदीप : जानता हूँ आगे बोलो| फिर क्या हुआ ? मैं : फिर वो कन्या ने राज कुमार के पास आ कर गले में बाहें डाल दी| ऐसे …|| मैने मेरी बाहें प्रदीप के गले में डाल दी| में : कन्या के हाथ उपर उठे तब उस के स्तन खुले हो गये और राज कुनार के सीने से दब गये ऐसे …… राज कुमार ने मुँह से मुँह लगा कर चुंबन किया …||ऐसे …… और एक हाथ से स्तन थाम लिया| कन्या ने राज कुमार का लंड पकड़ लिया|इस वक़्त मैने प्रदीप का लंड पकड़ा नहीं| मेरा स्तन उस की हथेली में था| वो बोला : कैसे पकड़ लिया लंड ? ऐसे …|| कह कर मैने लंड पकड़ा| मैने कहा : कन्या तो नंगी थी, मैने तो कपड़े पहने हें| मेरे राज कुमार, तुम कहो तो मैं भी कपड़े निकाल दूं ? प्रदीप : हाँ,, हाँ, निकाल दो| मैने फटा फट कपड़े उतार दिए मेरे स्तन देख कर वो बोला : इतने बड़े ? मैं : हाँ, तुमारे लिए ही है प्रदीप : में चुस सकता हूँ ? में : क्यूं नहीं ? प्रदीप ने मेरी नीपल मुँह मे ली और चूसने लगा| मैने उस के हाथ मेरी कमर पर लिपटाये| एक हाथ में लंड पकड़ कर मैं मूठ मार ने लगी प्रदीप रितारडेड हो या ना हो, उस का लंड रितारडेड नहीं था| सात इंच लंबा और ढाई इंच मोटा था| लोहे जैसी कठोर दांडी पर मख़मल जैसी कोमल चमड़ी थी जो आसानी से उपर नीचे खिसकाई जा सकती थी| लंड का मत्था भारी और चिकना था| उस वक़्त उत्तेजना से मत्था जाँवली कलर का हो गया था और भर मार काम रस बहा रहा था|प्रदीप के होठ मेरी नीपल पर लगते ही मेरी एक्सात्मेंट बढ़ गयी मेरी भोस भारी हो गयी और पानी बहाने लगी क्लैटोरिस कड़ी हो कर ठुमके लगाने लगी योनी में लाप्प लाप्प होने लगा| मैं होले से से पलंग पर लेट गयी और प्रदीप को मेरे उपर ले लिया| मैं : प्यारे, एक बात कहूँ ? राज कुमार ने कन्या के साथ ऐसा ही किया था जो अभी तुम मेरे साथ कर रहे हो| मज़ा आता है ना
नीपल छोड़े बिना उन …|उन कर के उस ने हा कही| कहानी कहानी के ठिकाने पर रह गयी मैने मेरी जाँघें चौड़ी कर दी| वो बीच में आ गया| तना हुआ लंड मेरे हाथ में ही था| मैने लंड का मत्था चूत के मुँह पर टीका दिया| प्रदीप ने दो पाँच धक्के लगाए लेकिन लंड फिसल गया, चूत में घुस पाया नहीं| प्रदीप अपना विचार बदल दे इस से पहले मैने कहा : राज कुमार का लंड कन्या की चूत में जा ना सका क्यूं की लंड मोटा था और चूत सीकुडी थी| कन्या ने राज कुमार को बाहों में भर लिया …||ऐसे …||और पलट गयी अब राज कुमार नीचे और कन्या उपर हो गये …|ऐसे| प्रदीप मेरा एक स्तन पकड़े हुए नीपल चुसे जा रहा था इस लिए मैं बैठ ना सकी| दो बदन बीच हाथ डाल कर मैने लंड पकड़ा और उस पर चूत टिकाई| मैने कमर का हलका धक्का मारा तो लंड चूत में घुस गया| मैने अपने नितंब हिला कर प्रदीप को चोदना शुरू कर दिया|मैने कहानी आगे चलाई : कन्या अपने कुले हिला कर राज कुमार का लंड चूत मे अंदर बाहर करने लगी लंड की टोपी खिसक गयी और नंगा मत्था चूत से घिस ने लगा| दोनो को बहुत मझा आने लगा| तुम्हे भी मझा आ रहा है ना ? इस वक़्त प्रदीप ने जो किया उस से मैं दंग रह गयी उस ने स्तन छोड़ दिया, मुझे बाहों में भर ली और पलट कर उपर आ गया, चूत से लंड निकाले बिना| नीचे आते ही मैने जांघें चौड़ी कर दी और पाँव इतने उठाए की मेरे घुटने मेरे कानों से लग गये नितंब का एंगल बदलने से अब पूरा लंड चूत में उतर गया| मेने कहा : वाह मेरे राज कुमार, वो राज कुमार ने भी ऐसा ही किया था| प्रदीप लेकिन कुछ सुन ने के होश में नहीं था| घचा घच्छ, घचा घच्छ धक्के से वो चोदने लगा और दो तीन मिनिट की चुदाई में झड़ गया| मुज़े ओर्गेझम हुआ नहीं लकिन इस की मुज़े परवाह नहीं थी| जब वो होश में आया तब बोला : ये क्या हुआ था ? मैं : पहले ये बताओ की तुम्हें मझा आया की नहीं| प्रदीप : आया, ख़ूब मझा आया| मैं : मझा आया तो किसी से बोल ना नहीं| जो तुमने अभी किया वो हैर पति अपनी पत्नी के साथ करता है उसे चुदाई कहते हेंप्रदीप : मैने तुम को चोदा ? मैं : हाँ, मेरे प्यारे, तुम ने मुझे अपने लंबे लंड से चोदा जैसे राज कुमार ने वन कन्या को चोदा था| प्रदीप : तेरी चूत में दाँत तो नैन है मैं : किसी की चूत में दाँत नहीं होते| किसी ने तुम्हे ग़लत ठसा दिया था| प्रदीप : मैं तुझे रोज़ चोद सकूंगा ? मैं : ज़रूर, जब चाहे तब चोद सकते हो|
प्रदीप : अभी भी ? मैं : क्यूं नहीं ? पता है ? उस राज कुमार का लंड कन्या ने पकड़ रक्खा था| देखते देखते में लंड फिर से टन गया| राज कुमार ने कन्या को आधी बिता दी जिस से वो अपनी चूत में आता जाता लंड देख सके| छूट और लंड गिले ही थे| स र र र र करता लंड फिर से चूत की गहराई नापने अंदर उतर गया| दोनो ने लंड की कारवाई देखी और बीस मिनिट तक घमासान चुदाई की| प्रदीप ने भी मुज़े दुसरी बार चोदा| इस वक़्त मुझे छोटा सा ओर्गेझम हुआ| चूत से लंड निकले इस से पहले प्रदीप नींद में खो गया| उस को उतार कर बिस्तर पर सुला दिया और मैं सफ़ाई के लिए बाथरूम में चली गयीजब मैं निकली तब मेरी उत्तेजना बनी रही थी| औरत को कैसे संतुष्ट करना वो प्रदीप कैसे जाने ? मेरी भोस गीली थी और क्लैटोरिस टटार थी| मैं हस्त मैथुन सोच रही थी की रसोईघर से आवाज़ आई| मैं रसोईघर में गयी देखा तो ससुरजी पानी पी रहे थे| पास जा कर मैने कहा : पान क्यूं पी रहें हें आप ? दूध पी लीजिए ना| मेरी आँखों की शरारत वो समझ गये मुज़े बाहों में भर लिया और किस करने लगे| बोले : मैने तुमारी चुदाई पूरी देख ली है तू बड़ी हुशियार हो| कहानी के बहाने तू ने प्रदीप का लंड ले ही लिया| बातें करने के मूड में मैं नहीं थी, मुझे तगड़ा लंड चाहिए था| उन का लंड हाज़िर ही था, मैने झट से पकड़ लिया और कहा : हमारी चुदाई देख आप को कुछ नहीं हुआ ? वो बोले : क्यूं ना हो ? अब तक मेरा लंड खड़ा था, बड़ी मुश्किल से ठंडा पानी डाल कर मैने उसे शांत किया था| अब तू आ गयी अब वो मेरा कहा नहीं मानेगामैं : ना माने तो क्या बुरा है ? मेरी चूत भी अभी संतुष्ट नहीं हुई है चलिए ना| ससुरजी मुझे अपनी बेडरूम में ले गये मैं पलंग पर लेट गयी उन्हों ने मुझे चार पाँव किया और बोले : आज पीछे से करेंगे| मैने सोचा की वो गांड मारना चाहते थे| मैने कभी गांड मरवाई नहीं थी| इस लिए डर से मैं बोली : मुझे गांड नहीं मरवानी| मेरी चूत में आग लगी है उसे अपने पानी से शांत कीजिए| वो हस पड़े| बोले : अरी पगली, तूने वो किताब नहीं देखी जो मैने तुझे दी थी ? मैं गांड मारने नहीं जा रहा हूँ पीछे से लंड डाल कर चोदुन्गा| तेरी सासूज़ी के साथ मैने किताब वाले सब आसनों ट्राय कर लिए हें| वो भी क्या दिन थे ? चुदाई ही चुदाई, रात दिन जब देखो तब लंड चूत में घुसा ही देखो| वो मेरे नितंब सहला रहे थे और चौड़े कर रहे थे| उन की उंगलियाँ चूत का मुँह तक पहॉंच गयी थी| मैने कहा: किताब तो मैने ठीक से देखी है इन में से आप को कौन सा आसान ज़्यादा पसंद आया है ? वो : वही जिस में घोड़े घोड़ी की तरह चोदा जाता है दो उंगलियाँ छूट में दल कर अंदर बाहर कर रहे थे वो| मैं : क्यूंवो : इस में लंड मूल तक चूत में घुस पाता है थोड़ा भी बाहर रहता नहीं है दूसरे, हर धक्के के साथ क्लैटोरिस लंड से घिसी जाती है दोनो हाथों से स्तन पकड़े जाते हें|| भोस और क्लैटोरिस को सहालाना आसान होता है अभी मैं तुम्हे दिखा उंगा| उन्हों ने पीछे से लंड चूत में डाला| स र र र र र करता पूरा लंड मूल तक अंदर उतर गया| जब ंन्हों ने थोड़ा निकाला और डाला तब पता चला की लंड कैसे क्लैटोरिस से घिस पाता था| फिर से लंड चूत की गहराई में दबाए रख कर वो रुके| मैं कब की उत्तेजित हुई थी| मेरी योनी में फटाके होने लगे| जैसे उन की उंगलियों ने क्लैटोरिस छुआ, मुझे ज़ोर से ओर्गेझम हो गया| ओर्गेझम की लहरें शांत हुई तब वो मुझे चोद ने लगे| मैने सोचा था की वो दो पाँच मिनिट में झड़ जाएँगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं| लंबे, गहरे और धीरे धक्के से उन्हों ने मुझे दस मिनिट तक चोदा| आख़िर मुझे पलंग पर सपाट लेटा कर तेज़ रफ़्तार से चोद ने लगे और झडे| इन दौरान मैं तीन बार झड़ी|थोड़ी देर हम पड़े रहे| उन्हों ने लाख किस कर दी| नर्म लोडा निकाल कर वो बाथरूम में चले गये जब वो निकले तब में सो गयी थी| उस रात के बाद प्रदीप अक्सर मुझे चोदता रहा| ओर्गेझम के लिए लेकिन मुझे ससुर जी का सहारा लेना पड़ा| मुझे ये मंज़ूर था क्यूं की इस से हम तीनो राज़ी थे| ससुर जी ने मुझे कई पाठ पढ़ाए| किताब वाले सब आसनों कर दिखाए| दर्द बिना कैसे लंड गांड में लिया जाता है वो दिखाया|

लंड चूसने की तकनीक सिखाई| मुठ मार कर झडे बिना कैसे लंड को ओर्गेझम तक लिए जा सकता है वो सिखाया| वक़्त के साथ प्रदीप की दिल चश्पी भी बढ़ती चली चुदाई में| पाँच महीनो बाद मैने गर्भ रख लिया और पूरे महीनों बाद अल मस्त लड़के को जन्म दिया| मुझे पता नहीं है की उस का बाप कौन है प्रदीप या ससुरजी| डिलिवरी के बाद थोड़े दिवासों तक मैं ये सोचती रही| बाद में बच्चे की देख भाल में ऐसी लग गयी की दुसरी बातें सोच ही ना सकी|अलबत, बाप और बेटे दोनो से मेरी चुदाई चालू रही है जब मेरा बेटा चौदह साल का होगा तब मैं छत्तीस साल की हूँगी| हो सकता है उस की पहली चुदाई मुझ से हो| अभी तो मैं उस की नुन्नी से खेलती हूँ कभी कभी मुँह में लिए चुस भी लेती हूँ आप राय दीजिए, क्या करना चाहिए नुज़े ? चुदाई चालू रक्खूं या ससुरजी से ना बोल दूं ? ना बोलूं तो कैसे बोलूं ? पिछली उमर में उन के लिए आनंद का एक मात्र साधन है मेरी चुत| और मुज़े भी ओर्गेझम चाहिए जो प्रदीप मुझे नहीं दे सकता है क्या करूँ ?

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