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आख़िर चोद ही डाला मेरे ससुर जी नेंं मुझे -4

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सच कहूँ तो मुज भी चाहिए था कोई चोदनें वाला| ग़ैर को ढूंढु इन से मेरे ससुरजी क्या कम थे ? मेनें तय किया की मेरे कौमार्य की भेट में अपनें ससुरजी को दूँगी और उन से चुदवा कर जब चूत खुल जाय तब प्रदीप का लंड लेनें की सोचूँगी|उस दिन से ही मैनें ससुरजी से इशारे भेजना शुरू कर दिया| मैनें ब्रा पहन नी बंद कर दी| सलवार कमीज़ की जगह चोली घाघरी और ओढनी डालनें लगी वो जब कलाई पकड़ लेते थे तब में शरमा कर मुस्कुरानें लगी मेरा प्रतिभाव देख वो ख़ुश हुए| उन्हों नें छेड़ छाड़ बढ़ाई| एक दो बार मेरे गाल पर चिकोटी काट ली उन्हों नें| दुसरी बार मेरे कुले पर हाथ फिरा लिया| मैं अक्सर ओढनी का पल्लू गिरा कर चुचियाँ दिखाती तो कभी कभी घाघरी खिसका कर जांघें दिखाती रही|दिन ब दिन सेक्स का तनाव बढ़ता चला| एक समय ऐसा आया की उन की नज़र पड़ ते ही मैं शरमा जा नें लगी उन के छू नें से ही मेरी पीकी गीली होनें लगी उन की मोज़ूड़ागी में नीपल्स कड़ी की कड़ी रहनें लगी अब वो अपना धोती में छुपा टटार लंड मुझ से चुराते नहीं थे| मैं इंतेज़ार करती थी की कब वो मुझ पर टूट पड़ेंगे| आख़िर वो रात आ ही गयी प्रदीप सो गया था| ससुरजी रात के बारह बजे बाहर गाँव से लौटे| मेनें खाना तैयार रक्खा था | वो स्नान करनें गाये और मेनें खाना परोसा|वो नहा कर बाथरूम से निकले तब मैनें कहा : खाना तैयार है खा लीजिए| वो बोले : तूनें ख़ाया ?

मैं : नही जी| आप के आनें की राह देख रही थी| वो बोले : सूहास, ये खाना तो हम हररोज खाते हें| जिस की मुझे तीन साल से भूख है वो वो कब खिलाओगी ? मैं : मैं कैसे खिला उन ? कहाँ है वो खाना ? वो : तेरे पास हैमैं समझती थी की वो क्या कह रहे थे| मुझे शर्म आनें लगी नज़र नीची कर के मैनें पूछा : मेरे पास ? मेरे पास तो कुछ नहीं है वो : है तेरे पास ही है दिखा उन तो खिलाओगी ? सिर हिला कर मैनें हा कही| उधर मेरी पीकी गीली होनें लगी मेरे दिल की धड़कन बढ़ गयीवो मेरे नज़दीक आए| मेरे हाथ अपनें हाथों में लिए होठों से लगाए | बोले : तेरे पास ही है बता उन ? तेरी चीकनी गोरी गोरी जांघें बीच| में शरमा गयी उन से छूटनें की कोशिश करनें लगी लेकिन उन्हों नें मेरे हाथ छोड़े नहीं बल्कि उठा कर अपनी गार्दन में डाल दिए मेनें सरक कर नज़दीक गयी मेरी कमर पर हाथ रख कर उन्हों नें मुज़े अपनी पास खींच लिया और बाहों में जकड़ लिया| मैनें मेरा चहेरा उन के चौड़े सेनें में छुपा दिया|

मेरे स्तन उन के पेट साथ डब गाये उन का टटार लंड मेरे पेट से दब गया| मेरे सारे बदन में झुरझूरी फैल गयीएक हाथ से मेरा चहेरा उठा कर उस नें मेरे मुँह पर अपना मुँह लगाया| पहले होठों से होठ छू ए, बाद में दबाए, आख़िर जीभ से मेरे होठ चाटे और अपनें होठों बीच ले कर चुसे, मुझे कुछ कुछ होनें लगा| ऐसी गरमी मेनें कभी मेहसूस की नहीं थी| मेरे स्तन भारी हो गाये नीपल्स कड़ी हो गयी पीकी नें रस ज़राना शुरू कर दिया| मुज़ से खड़ा रहा गया नहीं|चुंबन का मेरा ये पहला अनुभव था, मुझे बहुत मीठा लगता था| उन्हों नें अपनें बंद होठों से मेरे होठ रगडे| बाद में जीभ निकाल कर होठ पर फिराई|| फिराते फिराते उन्हों नें जीभ की नोक से मेरे होठों बीच की दरार टटोली| मेरे रोएँ खड़े हो गये अपनें आप मेरा मुँह खाल गया और उन की जीभ मेरे मुँहमें पहुँच गयीउन की जीभ मेरे मुँह में चारों ओर घूम चुकी| जब उन्हों नें जीभ निकाल दी तब मैनें मेरी जीभ से वैसा ही किया| मैनें सुना था की ऐसे चुंबन को फ़्रेंच किस कहते हें|फ़्रेंच किस करते करते ही उन्हों नें मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और बेडरूम में चल दिए पलंग पर चित लेटा दिया| ओढनी का पल्लू हटा कर उन्हों नें चोली में क़ैद मेरे छोटे स्तनों को थाम लिया| चोली पतले कपड़े की थी और मैनें ब्रा पहनी नहीं थी इस लिए मेरी कड़ी नीपल्स उन की चीपटी में पकड़ा गयी इतनें से उन को संतोष हुआ नहीं| फटा फट वो चोली के हूक खोलनें लगे| मैं चुंबन करनें में इतनी मशगूल थी की कब उन्हों नें चोली उतार फैंकी उस का मुझे पता ना चला| जब मेरी नीपल्स मसली गयी तब मेनें जाना की मेरे स्तन नंगे थे और उन के पन्जे में क़ैद थे|स्तन सहलना कोई ससुरजी से सीखे| उंगलिओं की नोक से उन्हों नें स्तन की तलेटी छुना शुरू की और होले होले शिखर पर जहाँ नीपल है वहाँ तक पहुँचे| पाँचों उंगलिओं से कड़ी नीपल पकड़ ली और मसली| ऐसे पाँच सात बार किया हर स्तन के साथ| अब पन्जा फैला कर स्तन पर रख दिया और उंगलियाँ वाल कर सारा स्तन पन्जे में दबोच्च लिया| मेरे स्तन में दर्द होनें लगा लेकिन मीठा लगता था|

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